Saturday, March 31, 2007
ब्लैक मंडे में डेढ़ दिन बाकी
यूनिवर्सिटी शेयर बाजार में
शिक्षा के विकास और विस्तार योजनाओं को परवान चढ़ाने के लिए मुंबई विश्वविद्यालय आम जनता से पैसा जुटाने पर विचार कर रहा है। यानी यह यूनिवर्सिटी अपने शेयर जारी करेगी और इनमें निवेशक लेनदेन कर सकेंगे। पूंजी बाजार में उतरने वाला यह देश का पहला विश्वविद्यालय होगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति डा. विजय खोले का कहना है कि विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या एवं जरूरी सुविधाओं को पूरा करने में असमर्थ होने के बाद विश्वविद्यालय खुद को मुंबई शेयर बाजार (बीएसई) में सूचीबद्ध कराने के लिए विचार कर रहा है। यह एक क्रियात्मक प्रयास है और इसके जरिए विश्वविद्यालय वित्तपोषण को बेहतर बनाने के अलावा आगामी वर्ष में वैश्विक स्तर पर अपनी साख स्थापित करेगा।
Friday, March 30, 2007
मीठे पर नमक डाला और जले निवेशक
करोड़ों क्रेडिट-डेबिट कार्डों से चोरी
Thursday, March 29, 2007
अमरीकी डॉलर गया भाड़ में
Wednesday, March 28, 2007
ले लो सोना और करो मौज
ईरान और पश्चिम के बीच बढ़ रहे तनाव और गिरते शेयर बाजारों में निवेशकों की चिंता बढ़ना सही है। कहावत है कि आदमी रुपया आठ घंटे कमाता है लेकिन रुपया तो चौबीस घंटे कमाता है। इसी कहावत को ध्यान में रखकर लोग चाहते हैं कि वे भले कमाएं या नहीं लेकिन रुपया चौबीस घंटे दौड़ते रहना चाहिए। ईरान और अमरीका व ब्रिटेन में इस समय जो संवाद चल रहे हैं, उसी ने सोने और क्रूड तेल में आग लगाने का काम किया है। अमरीका को तेल से मतलब है, यानी दुनिया भर के तेल कुंओं पर कब्जा। और यह काम वह धीरे धीरे प्यार और हथियार के बल पर करता जा रहा है। खाड़ी के देश हो या कोई और वे इस बात को साफ समझ लें कि ईरान के बाद भी एक देश का नंबर है। फिर यह नंबर चाहे जिस किसी का हो। तीसरी दुनिया के देश जो अमरीकी कर्ज के बोझ तले दबे हैं, सब सहन कर रहे हैं। संसाधनों पर कब्जे के अलावा बाजार हथियाने की लड़ाई जोरदार चरण में पहुंचती जा रही है। आज भले ही हम निशिंचत होकर सो रहे हों, लेकिन हमें भी सावधान रहना होगा क्योंकि एक दिन हमारा भी नंबर आ सकता है। खैर हम चर्चा को अलग जगह ले आए...चलिए फिर चलते हैं पैसे पर। ईरान और पश्चिम के बीच बढ़ते तनाव से एक बात तो साफ है कि क्रूड और सोना इस समय निवेश लायक हैं। क्रूड 64 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है और इसके थमने के आसार नहीं हैं। दूसरा हम भारतीयों की पसंद तो सोना है, तभी तो हर साल यहां 700 टन से ज्यादा सोना खपता है। सोना इस समय लंदन में 672.30 डॉलर प्रति औंस चल रहा है, जिसके जल्दी ही सात सौ डॉलर प्रति औंस पहुंच जाने की तगड़ी संभावना है। साफ है सोना खरीदें और सात सौ डॉलर पार करने पर बेचकर मुनाफा गांठ बांध लें। रही बात शेयर बाजार की तो एक बात साफ कर दूं कि जैसा हम पहले भी बताते आ रहे हैं यहां बड़ी मंदी लंबे समय में तो नहीं है और बाजार में अप्रैल से स्थिति सुधरेगी। हालांकि, मानसून की पहली रिपोर्ट के बाद इसमें यह सुधार बेहतर रहेगा। केरल में मानसून 20 मई के आसपास आता है। शेयर बाजार के पुराने खिलाडि़यों की राय देखें तो वे कहते हैं कि धैर्य रखने वाले ही इस 15 फुट चौड़ी गली यानी दलाल स्ट्रीट में पैसा कमा पाते हैं। इस 15 फुट चौड़ी गली में रोजाना करोड़ों रुपया आता और जाता है। समय की नब्ज को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए।25 मंत्री और पहले पायदान पर चिदम्बरम जी
चिदम्बरम के बाद हैं विज्ञान और तकनीकी मंत्री कपिल सिब्बल जिनकी संपत्ति है 16 करोड़ रूपए। रेणुका चौधरी 14 करोड़ रूपए, कमलनाथ पांच करोड़ रूपए, इंद्रजीत सिंह राव पांच करोड़ रुपए, पूरणदेश्वरी 4.09 करोड़ रूपए, शरद पवार 3.6 करोड़ रूपए, अजय माकन तीन करोड़ रूपए, मीरा कुमार 2.89 करोड़ रुपए और टी आर बालू 2.75 करोड़ रूपए की संपत्ति के मालिक हैं। विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के पास डेढ़ करोड़ रुपए और शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी के पास 1.33 करोड़ रुपए की संपदा है। डीएमके के दयानिधि मारन 1.40 करोड़ रुपए की संपत्ति के स्वामी हैं।
Tuesday, March 27, 2007
परीक्षा और पढ़ाई में भी ठेकेदारी !
पता चला है कि प्रति छात्र 25 हजार रुपए के पैकेज पर कोई ठेकेदार इन्हें यहां से हायर सेकेंडरी पास कराने लाया है। चार दिन पहले नकल करते पकड़े गए इनमें से एक छात्र ने फ्लाइंग स्क्वाड के सामने यह कहते हुए इस धंधे का खुलासा किया कि उसके 25 हजार रुपए पानी में चले गए। ठेकेदार कौन है, ये छात्र उसके बारे में बताने से परहेज करते हैं। स्कूल प्रबंधन भी अनजान है। हकीकत यह है कि इस ठेकेदार ने ही इन बच्चों के फार्म यहां जमा कराए। उसी ने इनके रहने, खाने का इंतजाम किया। यहां तक कि परीक्षा केंद्र आने के लिए उसने इनके लिए बस भी लगा रखी है।
सैकड़ों किलोमीटर दूर से आए इन छात्रों को एक ही स्कूल में सेंटर मिलना भी शिक्षा माफिया की पकड़ का उदाहरण है। केरल के करीब पांच जिलों से आए ये सभी छात्र-छात्राएं भेल स्थित शासकीय महात्मा गांधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से बारहवीं की परीक्षा दे रहे हैं। इस स्कूल में इनके सहित कुल 729 प्राइवेट छात्र परीक्षा दे रहे हैं। नियमित के अलावा इतनी बड़ी संख्या होने के कारण करीब ढाई सौ परीक्षार्थियों की बैठक व्यवस्था बरखेड़ा स्थित कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में करनी पड़ी है, जो महात्मा गांधी का उपकेंद्र है। ये सभी परीक्षार्थी विशेष बसों से परीक्षा देने आते हैं और इसी से जाते हैं। एक छात्रा को मिजल्स होने के कारण तीन छात्राएं आटो से आती-जाती हैं, आटो का किराया तक इन्हें यहां लाने वाले ही देते हैं। इन्हें ठहराने और खाने-पीने की व्यवस्था भी एक साथ की गई है। इतना ही नहीं इनके इलाज का खर्चा भी यही लोग उठा रहे हैं। करीब तीन सौ छात्र मिसरोद मार्ग पर रुके हैं तो सौ सवा सौ परीक्षार्थियों को भोपाल टाकीज क्षेत्र में ठहराया गया है।
परीक्षा के पहले और बाद तक हमेशा एक साथ रहने वाले ये छात्र वैसे तो कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। अधिकांश तो हिंदी ही नहीं जानते, मलयालम में ही बातचीत करते हैं। इससे स्कूलों में तैनात शिक्षकों के अलावा निरीक्षण पर आने वाले अधिकारी भी खासे परेशान हो जाते हैं। केरल के पालघाट निवासी छात्र रवि नायर झटके में बता गया कि वह किसी नेशनल इंटर कालेज का छात्र है और उसके साथ इसी कालेज के 90 छात्र यहां परीक्षा देने आए हैं। यहां से परीक्षा क्यों दे रहे हैं? कौन लाया है? आदि सवाल सुनते ही वह कुछ नहीं जानने की बात कहते हुए अपने गु्रप में चला गया। अन्य समूह में चल रहे चार छात्र यह तो बता गए कि वे परीक्षा देने ही भोपाल आए हैं। इसके पहले न फार्म खरीदने आए और न जमा करने। फार्म किसने जमा किया, यह सुनते ही ये छात्र भी चुप्पी साध कर बस की ओर चल दिए। साभार जागरण डॉट कॉम से।
Monday, March 26, 2007
पी चिदम्बरम भी नहीं भर पाते सरल...
गुजरात हाईकोर्ट के न्यायाधीश मोहित शाह का कहना है कि आयकर से जुड़े कानून इतने जटिल हैं कि खुद वित्त मंत्री, कानून मंत्री और प्रधानमंत्री भी कर सलाहकार की सहायता के बगैर अपने कर रिटर्न नहीं भर सकते। मोहित शाह ने यह खास बात गुजरात फैडरेशन ऑफ टैक्स कंसलटेंट के सहयोग से आयोजित कराधान 2007 नामक राष्ट्रीय अधिवेशन में कही। उनका मत था कि करदाता पैसा और समय खर्च कर कर कानूनों पर न्यायालयों से स्पष्टता पाते हैं लेकिन वित्त मंत्री इन फैसलों का लाभ लोगों द्धारा उठाने से पहले ही कानून में बदलाव कर देते हैं और ऐसे परिवर्तनों को बैक डेट से लागू कर देते हैं।
वित्त वर्ष का आखिरी सप्ताह.....
इस सप्ताह के स्टॉक :ताज जीवीके होटल्स, तानिया सॉल्यूशंस, बिड़ला नोवा, महिंद्रा एंड महिंद्रा, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एलआईसी हाउसिंग, टीवी 18, क्रिसिल, कर्नाटक बैंक, डाबर इंडिया, यस बैंक। हम अपने पाठकों से एक बार फिर कहना चाहते हैं कि चीनी शेयरों में बेहद सावधानी के साथ कारोबार करें और स्टॉप लॉस का इस्तेमाल करते रहे अन्यथा ये मीठे स्टॉक कभी भी कड़वे बन सकते हैं।
Saturday, March 24, 2007
टेलीग्राम को भूल गए हम...
लेकिन जिन लोगों ने टेलीग्राम किए हैं वे उसके अहसास को समझ सकते हैं। टेलीग्राम आने पर लोग घबरा तक जाते थे कि कहां क्या हो गया, कुछ गलत तो नहीं हो गया....जब तक टेलीग्राम पढ़ नहीं लिया जाता....लोगों की घबराहट कम नहीं होती थी। इंग्लिश के टेलीग्राम की एक बानगी देखिए...राजस्थान के छोटे से गांव से चले छोरे ने कलकत्ता पहुंचकर टेलीग्राम किया...आई रिचड हियर विद सेफ्टी...अंग्रेजी में यह टेलीग्राम इस गांव में कोई पूरा नहीं पढ़ सकता। एक लड़का जो टूटी फूटी अंग्रेजी जानता था, उसने पढ़ा मैं कलकत्ता सेफ्टी के साथ पहुंच गया हूं। सारे लोग सोचते रहे कि लड़का गांव से तो अकेला गया था कमाने कलकत्ता। यह सेफ्टी कौन है। सभी ने इतना कोमल नाम देखकर राय निकाल ली की यह कोई लड़की है, जो छोरे को रास्ते में मिल गई होगी। लड़के के पिता ने पलट कर पत्र भेजा कि इस सेफ्टी को जल्दी से रवाना कर मैं तेरी शादी यही पास के गांव में एक अच्छी लड़की के साथ करने की तैयारी करता हूं।
लेकिन अब एसएमएस, ईमेल, मोबाइल, फोन सेवाओं के हुए तगड़े विस्तार ने टेलीग्राम को हमसे दूर कर दिया या लोग भूल से गए हैं। मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई जैसे बड़े एवं मध्यम शहरों में जहां पहले तार घरों में लंबी लंबी लाइनें दिखाई देती थी, वहां अब दिन भर में मुशिकल से कोई आ पाता है। अमरीका के सैम्युल मोर्स ने 1844 में मोर्स कोड की खोज की थी तो संचार जगत में बड़ी क्रांति आ गई थी लेकिन ईमेल और एसएमएस ने तो समूची दुनिया ही बदल दी।
तार दरों में पिछले लगभग 25 साल से कोई बदलाव नहीं आया है और आज भी यह साढ़े तीन रुपए पहले दस शब्दों या उससे कम के लिए है। एक्सप्रेस तार भेजना हो तो दुगुने पैसे। इस दर पर आप भारत के चाहे जिस कौने में अपना संदेश भेज सकते हैं। भारत में मोबाइल फोन सेवा 1995 में आई और इसके फैलाव के साथ तार घरों की माली हालत बिगड़ती गई, जिसका नतीजा यह है कि देश में हर साल तार घरों की संख्या कम होती जा रही है। उदयपुर के अनिल तलेसरा बताते हैं कि तार घर जाने का समय अब नहीं है। जब संदेश एसएमएस और ईमेल से कहीं जल्दी व सस्ते पहुंच जाते हैं तो क्या जरुरत है तार घर तक जाने और तार भेजने की। लेकिन हम आपको बताते हैं कि चीन सरकार ने अपनी और चीनी जनता की ओर से भारत के पहले राष्ट्रपति श्री राजेंद्र प्रसाद को राष्ट्रपति चुनने पर तार के माध्यम से ही बधाई दी थी।
Friday, March 23, 2007
शोर न मचाओं...आने वाली है तबाही
कहां फंसे हैं आपके पति...बताएगा बीएसएनएल
गुगल अब साइकिल पर.......
दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजिन गुगल ने अपने कर्मचारियों को काम पर आने के लिए मुफ्त में बाइक ठहरिए...साइकिल...देने का फैसला किया है। बाइक निर्माता कंपनी रैलेग यूरोप गुगल के तकरीबन दो हजार स्थाई कर्मचारियों को जो कि यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका में काम कर रहे हैं को यह साइकिल देगी। इस पावर पैडल साइकिल के साथ मिलेंगे फ्री में गुगल लिखे हैलमेट। यह आइडिया भी गुगल के एक कर्मचारी हॉलजर मेयेर ने दिया और इसे सभी ने पसंद किया। लेकिन ऐसा नहीं है कि सारी साइकिलें एक ही तरह की दी जाएगी, इसमें कूल क्रूजर मॉडल तक को चुना जा सकता है, जो कि फोल्डिंग साइकिल है। गुगल के एचआर विभाग के निदेशक लिआन होर्नसे का कहना है कि हम केवल टेक्नालॉजी में ही कुछ अदभुत नहीं करना चाहते बल्कि
अपने कर्मचारियों के लिए भी करना चाहते। वे कहते हैं कि साइकिल से जहां कर्मचारी अपने को चुस्त दुरुस्त रख सकेंगे वहीं वे इससे उनके शहरों को बेहतर ढंग से जानने के अलावा पर्यावरण को मस्त रखने में योगदान करेंगे। यहां मेरी एक टिप्पणी.. भारतीय कर्मचारियों सावधान...ट्रैफिक जाम और भीड़भाड़ की वजह से भारत में भी अब कार की जगह सभी को साइकिलें मिलने लगे। तो मेरे दोस्तों...आज से ही शुरू कर दो साइकिल चलाने की प्रैक्टिस।
मेरे पिया गए हैं रंगून..

मेरे पिया गए हैं रंगून...किया है वहां से टेलीफून कि तेरी याद सताती है....लेकिन अब दो दिन पहले ही एसटीडी कॉल की दरों में कमी करने का कदम उठाने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने टेलीकॉम क्षेत्र में 74 फीसदी सीधे विदेशी निवेश की अनुमति दे दी है जो इस समय 49 फीसदी है। यानी अब भारतीय टेलीकॉम जगत में विदेशी पैसा जमकर बोलेगा। सीधे विदेशी निवेश के जरिए पाओं आर्थिक गुलामी।
Thursday, March 22, 2007
गरीबों को हटा दो...गरीबी अपने आप हट जाएगी

यह जानकर लेकिन सरकार ने यह नहीं बताया कि भूख और तंगहाली से कितने गरीब स्वर्ग सिधार गए या अल्लाह को प्यारे हो गए। एक नारा है गरीबी हटाओं.......भाईयों इसके बजाय यह कहिए गरीबों को हटा दो...गरीबी अपने आप हट जाएगी। सरकार के दावे कागजी दावों से ज्यादा तो नहीं लगते। यह सैम्पल सर्वे है। किन लोगों को सर्वे में शामिल किया गया और कैसे किया गया...इस पर खूब सारे कागजात पेश किए जा सकते हैं लेकिन हकीकत तो खराब ही दिखाई देती है। कौनसे गरीबों का सर्वे किया गया, यह अहम है। मेरी मानिए आप भी एक सर्वे कर लीजिए यह संख्या बढ़ ही जाएगी। महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में किसानों की आत्महत्या से चिंतित होकर जब प्रधानमंत्री नागपुर आए थे तो आपको पता होगा कि अखबारों और टीवी में रिपोर्टस आई थी कि जिन किसानों से प्रधानमंत्री को मिलवाया गया उनमें कितने सच में पीडि़त किसान थे। कितने किसान तो प्रधानमंत्री के उनके दरवाजे तक आने का इंतजार करते रहे और आंखें सूख गई।
नेशनल सैम्पल सर्वे ने देश में गरीबी में कमी आने का दावा किया है। एनएसएस के आंकडों के मुताबिक 1999/2000 से 2004/2005 के दौरान भारत में गरीबों की संख्या में 4.3 फीसदी की कमी आई है। हालांकि अब भी देश में 23.85 करोड़ लोग गरीबी में जी रहे हैं। योजना आयोग का कहना है कि वर्ष 1999/2000 में देश में गरीबों की संख्या 26.1 फीसदी थी। वर्ष 2004/2005 में न्यूनतम सहूलियतों से कम पर गुजर बसर करने वाले लोगों की यह संख्या घटकर 21.8 फीसदी रह गई। इस दौरान गांवों में गरीबों की संख्या में शहरी इलाकों की तुलना में अधिक तेजी से कमी आई। वर्ष 2004/2005 के दौरान गांवों में गरीबों की गिनती वर्ष 1999/2000 के 27.1 फीसदी से काफी कम होकर 21.8 फीसदी रह गई। जबकि शहरी इलाकों में बदहाली में जीने वाले लोगों की संख्या वर्ष 1999/2000 के 23.6 फीसदी से थोड़ी सी कम होकर वर्ष 2004/2005 में 21.7 फीसदी रही। देश में गरीबों की कुल संख्या 23.85 करोड़ में से 17.03 करोड़ गरीब गांवों और 6.82 करोड़ गरीब शहरों में बसते हैं। इसके अलावा, यूनिफॉर्म रिकॉल पीरियड उपभोग के आधार पर भी देश की गरीबी में खासी कमी आई है।













