Saturday, March 31, 2007

ब्‍लैक मंडे में डेढ़ दिन बाकी


नए वित्‍त वर्ष की शुरूआत शेयर बाजार के लिए घातक हो सकती है। बीते वित्‍त वर्ष की आखिरी तारीख 31 मार्च को शेयर बाजार भले ही बढ़कर बंद हुआ, लेकिन बाजार के बंद होने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने अचानक कैश रिजर्व रेश्‍यो और रेपो रेट में बढ़ोतरी की जो घोषणा की, वह सोमवार को शेयर बाजार के लिए ब्‍लैक मंडे साबित हो सकता है। कैश रिजर्व रेश्‍यो में दो चरणों में आधे फीसदी की बढ़त होते ही बाजार से सीधे 15500 करोड़ रूपए और मनी मल्‍टीप्‍लायर असर से 70 हजार करोड़ रूपए कम हो जाएंगे। रेपो रेट में 25 अंक बढ़ते ही बैंकों को अल्‍प समय के लिए जरुरी पैसा जुटाना महंगा पड़ेगा। हालांकि, रिजर्व बैंक के इस कदम की आशंका सभी को थी लेकिन यह 24 अप्रैल को घोषित होने वाली मौद्रिक नीति से पहले उठा लिए जाएंगे, यह नहीं पता था। सरकार हर तरह से प्रयास कर रही है कि महंगाई की बढ़ती दर को रोका जाए, लेकिन यह नहीं हो पा रहा। भारतीय रिजर्व बैंक ने बढ़ती मुद्रास्‍फीति को थामने के लिए पिछले तीन महीनों में सीआरआर में तीसरी बार बढ़ोतरी की है। यही वजह है कि अब हर तरह के कर्ज पर ब्‍याज दरें बढ़ती जा रही हैं और आम आदमी को नई कठिनाईयों के लिए तैयार रहना होगा। आम तौर पर ब्‍याज दर में बढ़ोतरी सबसे पहले कर्ज में होती है न कि जमाओं पर। यही वजह है कि पर्सनल लोन, होम लोन, क्रेडिट कार्ड और कंज्‍युमर लोन इस ताजा सीआरआर दर की बढ़ोतरी के बाद एक बार फिर से महंगे होंगे। ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी की शुरूआत सोमवार से शुरु होने की घोषणाएं सामने आने लग जाएगी। पिछले तीन सप्‍ताह से मुद्रास्‍फीति की दर 6.46 फीसदी पर स्थिर रहने से रिजर्व बैंक को यह कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है। रिजर्व बैंक का सोचना था कि वर्ष 2006-07 में मुद्रास्‍फीति की दर 5.5 से 6 फीसदी के बीच रहेगी। रिजर्व बैंकी की इस ताजा घोषणा से सोमवार को शेयर बाजार में खासी गिरावट आएगी। सबसे ज्‍यादा गिरावट बैंक शेयरों में देखने को मिल सकती है। इसके अलावा कंसट्रक्‍शन, हाउसिंग और ऑटो क्षेत्र के शेयरों में भी नरमी संभव है। जो लोग यह सोचते हैं कि ब्‍याज दर बढ़ने से मुद्रास्‍फीति घटेगी वे यह जान लें कि जब पहले दो बार सीआरआर में बढ़ोतरी की गई तब भी ऐसा नहीं हुआ और मुद्रास्‍फीति चिंताजनक स्‍तर पर पहुंच गई। अधिक फाइनेंस लिक्‍विडिटी इसके लिए अकेले जिम्‍मेदार नहीं है। इससे बाजार में चल रही लिक्विडिटी घटती है लेकिन मांग और आपूर्ति के आधार पर जिन वस्‍तुओं के भाव तय होते हैं उनके भाव घटे, यह जरुरी नहीं है। रिजर्व बैंक यह सोचता है कि ज्‍यादा ब्‍याज दर होने पर कम कर्ज लिया जाएगा। रुपए का मूल्‍य बढ़ाकर मांग में कमी की जा सकती है, जिससे महंगाई पर लगाम लगेगी तो यह बुरी तरह गलत है। यदि सरकार की सोच इसी तरह रही तो याद रखना कि हमारी आर्थिक विकास दर साढ़े आठ फीसदी से कम रहेगी।

यूनिवर्सिटी शेयर बाजार में

शिक्षा के विकास और विस्तार योजनाओं को परवान चढ़ाने के लिए मुंबई विश्वविद्यालय आम जनता से पैसा जुटाने पर विचार कर रहा है। यानी यह यूनिवर्सिटी अपने शेयर जारी करेगी और इनमें निवेशक लेनदेन कर सकेंगे। पूंजी बाजार में उतरने वाला यह देश का पहला विश्वविद्यालय होगा।

विश्वविद्यालय के कुलपति डा. विजय खोले का कहना है कि विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या एवं जरूरी सुविधाओं को पूरा करने में असमर्थ होने के बाद विश्वविद्यालय खुद को मुंबई शेयर बाजार (बीएसई) में सूचीबद्ध कराने के लिए विचार कर रहा है। यह एक क्रियात्मक प्रयास है और इसके जरिए विश्वविद्यालय वित्तपोषण को बेहतर बनाने के अलावा आगामी वर्ष में वैश्विक स्तर पर अपनी साख स्थापित करेगा।

Friday, March 30, 2007

मीठे पर नमक डाला और जले निवेशक


शेयर बाजार में एक बार फिर चीनी कंपनियों के शेयरों को लेकर खूब हलचल मची हुई है। कुछ मीडिया और रिसर्च हाउस यह रिपोर्ट बार बार पेश कर रहे हैं अब चीनी कंपनियों के शेयरों में बड़ी तेजी है या फिर मंदी आने वाली है। कई बार तो खबरों को इस तरह से पेश किया जा रहा है कि अनेक निवेशकों ने कल ही चीनी कंपनियों के शेयरों में कड़वा स्‍वाद चखा। सरकार चीनी निर्यात की अनुमति नहीं देगी, इस खबर को फैलाकर चीनी शेयरों के निवेशकों को कल मीडिया ने झटका दिया। जबकि खबर का गलत अर्थ निकाला गया है। असली बात यह है कि सरकार ने 30 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी है जो साढ़े सात लाख टन के चार चरणों में दी गई है। यानी साढ़े सात लाख टन चीनी का निर्यात होने के बाद दूसरे साढ़े सात लाख टन निर्यात की अनुमति दी जाएगी। जबकि कल एक मीडिया हाउस ने चीनी निर्यात के पहले चरण को पूरा होने की घोषणा के बाद जस्‍ट इन कहकर सरकार चीनी निर्यात की अनुमति नहीं देगी कहा और चीनी शेयर तीन से पांच फीसदी नीचे आ गिरे।
सरकार ने अप्रैल से जून के लिए चीनी का फ्री सेल कोटा दस फीसदी कमकर 38 लाख टन दिया है। जबकि चीनी निर्यात के दूसरे चरण का रिलीज ऑर्डर अब जारी किया जाएगा। साथ ही चीनी पर सब्सिडी देने या न देने का फैसला भी एक दो दिन में हो जाएगा। इस तरह के अनेक कारणों से ही चीनी के दाम 250/300 रुपए प्रति टन बढ़े हैं। ऐसे में खबर की गलत प्रस्‍तुति चीनी निवेशक जो पहले ही ऊपर में शेयर खरीदकर फंसे हुए हैं, पर नमक छिड़का जा रहा है।

करोड़ों क्रेडिट-डेबिट कार्डों से चोरी


बीबीसी हिंदी वेबसाइट ने एक खबर दी है कि अमरीका और ब्रिटेन में इस्‍तेमाल हुए साढ़े चार करोड़ क्रेडिट और डेबिट कार्डों से कंप्‍यूटर हैकरों ने अहम जानकारियां चोरी कर ली हैं। गोपनीय जानकारियां चोरी करने का ये सबसे बड़ा मामला माना जा रहा है। पूरी खबर इस बीबीसी पर : http://www.bbc.co.uk/hindi/business/story/2007/03/070330_cardhackers_usbrit.shtml

Thursday, March 29, 2007

अमरीकी डॉलर गया भाड़ में


एक बहुत पुरानी कहावत है जापानी बीबी, फ्रैंच खाना और अमरीकी डॉलर जिस किसी के पास हो, वह बड़े नसीब वाला होता है। कहा जाता था कि अमरीकी डॉलर समूची दुनिया पर राज करता है लेकिन अब शायद इसके बुरे दिन भी आ रहे हैं। अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था में छाई मंदी को दूर करने के लिए वहां की हर सरकार ने खूब प्रयास किए लेकिन सफलता नहीं मिली। अमरीकी डॉलर दिन पर दिन कमजोर होता जा रहा है और दूसरी मुद्राएं मजबूत। ऐसे कई देश जिनकी अर्थव्‍यवस्‍था अमरीकी डॉलर से जुड़ी थी, अब यूरो को अपना रहे हैं। अनेक देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में अमरीकी डॉलर जमा करने के बजाय यूरो या दूसरी मजबूत मुद्राओं को वरीयता दे रहे हैं। ऐसे में अमरीका का परेशान होना स्‍वाभाविक है। अमरीकी कंपनियों को नए बाजारों की तलाश हैं और यही वजह है कि अमरीका एक के बाद एक देश पर हमला कर अपनी कंपनियों को वहां की अर्थव्‍यवस्‍था को हड़पने में मदद कर रहा है। जिन देशों ने अमरीकी दादागिरी के आगे सिर झुका लिया वहां देखिएं सारे बड़े कारोबारों में अमरीकी कंपनियों का वर्चस्‍व बढ़ता जा रहा है और घरेलू कंपनियां बर्बाद हो रही हैं। इसी प्रसंग में एक छोटा सा देश ईरान भी जुड़ गया है। ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर इब्राहिम शीबान ने साफ कर दिया है कि वे तेल की कीमत अमरीकी डॉलर में नहीं लेने पर विचार कर रहे हैं। यानी अब ईरान में अमरीकी डॉलर गया भाड़ में। ईरान अब जो भी भुगतान लेगा वह दूसरी मुद्राओं में होगा। हालांकि, इस समय ईरान की जो तेल आय है उसमें अमरीकी डॉलर की भागीदारी 50 फीसदी है। वाह क्‍या हिम्‍मत दिखाई है ईरान ने। लेकिन अमरीकी डॉलर के कर्ज में दबे दूसरे देश यह बात सोच भी नहीं पा रहे हैं और ज्‍यादा से ज्‍यादा भुगतान लेने देने का काम डॉलर में ही करना चाहते हैं।

Wednesday, March 28, 2007

ले लो सोना और करो मौज


ईरान और पश्चिम के बीच बढ़ रहे तनाव और गिरते शेयर बाजारों में निवेशकों की चिंता बढ़ना सही है। कहावत है कि आदमी रुपया आठ घंटे कमाता है लेकिन रुपया तो चौबीस घंटे कमाता है। इसी कहावत को ध्‍यान में रखकर लोग चाहते हैं कि वे भले कमाएं या नहीं लेकिन रुपया चौबीस घंटे दौड़ते रहना चाहिए। ईरान और अमरीका व ब्रिटेन में इस समय जो संवाद चल रहे हैं, उसी ने सोने और क्रूड तेल में आग लगाने का काम किया है। अमरीका को तेल से मतलब है, यानी दुनिया भर के तेल कुंओं पर कब्‍जा। और यह काम वह धीरे धीरे प्‍यार और हथियार के बल पर करता जा रहा है। खाड़ी के देश हो या कोई और वे इस बात को साफ समझ लें कि ईरान के बाद भी एक देश का नंबर है। फिर यह नंबर चाहे जिस किसी का हो। तीसरी दुनिया के देश जो अमरीकी कर्ज के बोझ तले दबे हैं, सब सहन कर रहे हैं। संसाधनों पर कब्‍जे के अलावा बाजार हथियाने की लड़ाई जोरदार चरण में पहुंचती जा रही है। आज भले ही हम निशिंचत होकर सो रहे हों, लेकिन हमें भी सावधान रहना होगा क्‍योंकि एक दिन हमारा भी नंबर आ सकता है। खैर हम चर्चा को अलग जगह ले आए...चलिए फिर चलते हैं पैसे पर। ईरान और पश्चिम के बीच बढ़ते तनाव से एक बात तो साफ है कि क्रूड और सोना इस समय निवेश लायक हैं। क्रूड 64 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है और इसके थमने के आसार नहीं हैं। दूसरा हम भारतीयों की पसंद तो सोना है, तभी तो हर साल यहां 700 टन से ज्‍यादा सोना खपता है। सोना इस समय लंदन में 672.30 डॉलर प्रति औंस चल रहा है, जिसके जल्‍दी ही सात सौ डॉलर प्रति औंस पहुंच जाने की तगड़ी संभावना है। साफ है सोना खरीदें और सात सौ डॉलर पार करने पर बेचकर मुनाफा गांठ बांध लें। रही बात शेयर बाजार की तो एक बात साफ कर दूं कि जैसा हम पहले भी बताते आ रहे हैं यहां बड़ी मंदी लंबे समय में तो नहीं है और बाजार में अप्रैल से स्थिति सुधरेगी। हालांकि, मानसून की पहली रिपोर्ट के बाद इसमें यह सुधार बेहतर रहेगा। केरल में मानसून 20 मई के आसपास आता है। शेयर बाजार के पुराने खिलाडि़यों की राय देखें तो वे कहते हैं कि धैर्य रखने वाले ही इस 15 फुट चौड़ी गली यानी दलाल स्‍ट्रीट में पैसा कमा पाते हैं। इस 15 फुट चौड़ी गली में रोजाना करोड़ों रुपया आता और जाता है। समय की नब्‍ज को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए।

25 मंत्री और पहले पायदान पर चिदम्‍बरम जी


एक समाचार पर नजर गई तो पता चला कि दिल्‍ली में बैठी केंद्र सरकार के तकरीबन 25 मंत्री करोड़पति हैं। इस मंत्रियों में से 20 कांग्रेस के हैं और डीएमके के तीन एवं एनसीपी के दो। करोड़पतियों को छोड़ दें तो लखपति मंत्री 28 हैं। अब जानिए सबसे बड़े करोड़पति मंत्री का नाम...पी. चिदम्‍बरम, जो हमारे देश के वित्‍त मंत्री हैं। अब वित्‍त मंत्री ही करोड़पति नहीं होंगे तो भला कौन होगा। वर्ष 2004 में चुनाव आयोग को दी संपत्ति की सूची में वित्‍त मंत्री जी ने अपनी संपत्ति 18 करोड़ रुपए दिखाई है।

चिदम्‍बरम के बाद हैं विज्ञान और तकनीकी मंत्री कपिल सिब्‍बल जिनकी संपत्ति है 16 करोड़ रूपए। रेणुका चौधरी 14 करोड़ रूपए, कमलनाथ पांच करोड़ रूपए, इंद्रजीत सिंह राव पांच करोड़ रुपए, पूरणदेश्‍वरी 4.09 करोड़ रूपए, शरद पवार 3.6 करोड़ रूपए, अजय माकन तीन करोड़ रूपए, मीरा कुमार 2.89 करोड़ रुपए और टी आर बालू 2.75 करोड़ रूपए की संपत्ति के मालिक हैं। विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के पास डेढ़ करोड़ रुपए और शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी के पास 1.33 करोड़ रुपए की संपदा है। डीएमके के दयानिधि मारन 1.40 करोड़ रुपए की संपत्ति के स्‍वामी हैं।

Tuesday, March 27, 2007

परीक्षा और पढ़ाई में भी ठेकेदारी !


ठेके पर शिक्षा का रोग उत्‍तर प्रदेश के बाद अब मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल तक पहुंच गया है। स्कूली शिक्षा में सुधार के तमाम दावों के बीच सरकार की नाक के नीचे भोपाल के एक स्कूल में सुदूर केरल के लगभग पांच सौ छात्र-छात्राएं प्राइवेट हायर सैकेंडरी की परीक्षा दे रहे हैं। अब तक चार पेपर दे चुके इन बाहरी विद्यार्थियों से स्कूल की व्यवस्थाएं गड़बड़ा गई हैं, लेकिन इन्हें एकमुश्त यहां कौन लाया, इसकी पड़ताल न तो स्कूल प्रबंधन ने की और न ही माध्यमिक शिक्षा मंडल ने।

पता चला है कि प्रति छात्र 25 हजार रुपए के पैकेज पर कोई ठेकेदार इन्हें यहां से हायर सेकेंडरी पास कराने लाया है। चार दिन पहले नकल करते पकड़े गए इनमें से एक छात्र ने फ्लाइंग स्क्वाड के सामने यह कहते हुए इस धंधे का खुलासा किया कि उसके 25 हजार रुपए पानी में चले गए। ठेकेदार कौन है, ये छात्र उसके बारे में बताने से परहेज करते हैं। स्कूल प्रबंधन भी अनजान है। हकीकत यह है कि इस ठेकेदार ने ही इन बच्चों के फार्म यहां जमा कराए। उसी ने इनके रहने, खाने का इंतजाम किया। यहां तक कि परीक्षा केंद्र आने के लिए उसने इनके लिए बस भी लगा रखी है।

सैकड़ों किलोमीटर दूर से आए इन छात्रों को एक ही स्कूल में सेंटर मिलना भी शिक्षा माफिया की पकड़ का उदाहरण है। केरल के करीब पांच जिलों से आए ये सभी छात्र-छात्राएं भेल स्थित शासकीय महात्मा गांधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से बारहवीं की परीक्षा दे रहे हैं। इस स्कूल में इनके सहित कुल 729 प्राइवेट छात्र परीक्षा दे रहे हैं। नियमित के अलावा इतनी बड़ी संख्या होने के कारण करीब ढाई सौ परीक्षार्थियों की बैठक व्यवस्था बरखेड़ा स्थित कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में करनी पड़ी है, जो महात्मा गांधी का उपकेंद्र है। ये सभी परीक्षार्थी विशेष बसों से परीक्षा देने आते हैं और इसी से जाते हैं। एक छात्रा को मिजल्स होने के कारण तीन छात्राएं आटो से आती-जाती हैं, आटो का किराया तक इन्हें यहां लाने वाले ही देते हैं। इन्हें ठहराने और खाने-पीने की व्यवस्था भी एक साथ की गई है। इतना ही नहीं इनके इलाज का खर्चा भी यही लोग उठा रहे हैं। करीब तीन सौ छात्र मिसरोद मार्ग पर रुके हैं तो सौ सवा सौ परीक्षार्थियों को भोपाल टाकीज क्षेत्र में ठहराया गया है।

परीक्षा के पहले और बाद तक हमेशा एक साथ रहने वाले ये छात्र वैसे तो कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। अधिकांश तो हिंदी ही नहीं जानते, मलयालम में ही बातचीत करते हैं। इससे स्कूलों में तैनात शिक्षकों के अलावा निरीक्षण पर आने वाले अधिकारी भी खासे परेशान हो जाते हैं। केरल के पालघाट निवासी छात्र रवि नायर झटके में बता गया कि वह किसी नेशनल इंटर कालेज का छात्र है और उसके साथ इसी कालेज के 90 छात्र यहां परीक्षा देने आए हैं। यहां से परीक्षा क्यों दे रहे हैं? कौन लाया है? आदि सवाल सुनते ही वह कुछ नहीं जानने की बात कहते हुए अपने गु्रप में चला गया। अन्य समूह में चल रहे चार छात्र यह तो बता गए कि वे परीक्षा देने ही भोपाल आए हैं। इसके पहले न फार्म खरीदने आए और न जमा करने। फार्म किसने जमा किया, यह सुनते ही ये छात्र भी चुप्पी साध कर बस की ओर चल दिए। साभार जागरण डॉट कॉम से।

Monday, March 26, 2007

पी चिदम्‍बरम भी नहीं भर पाते सरल...


आज से चालू वित्‍त वर्ष का आखिरी सप्‍ताह शुरू हो गया है और इसके साथ ही कर रिटर्न भरने की कसरत चालू हो गई है। लोगों को फोन करो तो कहते हैं कि यार बाद में बात करते हैं...सीए के पास बैठा हूं...कर वकील के दफ्तर में हूं....अकाउंटस तैयार करने में फंसा हूं तो फार्म 16 जल्‍दी से जुटाना है ताकि रिटर्न दाखिल कर पिंड छुडाऊं इस साल के लिए। लेकिन क्‍या आपको पता है कि हमारे वित्‍त मंत्री भी बगैर कर सलाहकार के अपना रिटर्न नहीं भर सकते। भले ही फॉर्म का नाम सरल रखा गया हो।


गुजरात हाईकोर्ट के न्‍यायाधीश मोहित शाह का कहना है कि आयकर से जुड़े कानून इतने जटिल हैं कि खुद वित्‍त मंत्री, कानून मंत्री और प्रधानमंत्री भी कर सलाहकार की सहायता के बगैर अपने कर रिटर्न नहीं भर सकते। मोहित शाह ने यह खास बात गुजरात फैडरेशन ऑफ टैक्‍स कंसलटेंट के सहयोग से आयोजित कराधान 2007 नामक राष्‍ट्रीय अधिवेशन में कही। उनका मत था कि करदाता पैसा और समय खर्च कर कर कानूनों पर न्‍यायालयों से स्‍पष्‍टता पाते हैं लेकिन वित्‍त मंत्री इन फैसलों का लाभ लोगों द्धारा उठाने से पहले ही कानून में बदलाव कर देते हैं और ऐसे परिवर्तनों को बैक डेट से लागू कर देते हैं।

वित्‍त वर्ष का आखिरी सप्‍ताह.....


चालू वित्‍त वर्ष का आखिरी सप्‍ताह आज से शुरू हो गया है और इस सप्‍ताह में बीएसई इंडेक्‍स 12922 अंक पर समर्थन मिलने पर 13572 अंक से ऊपर बंद हुआ तो 13745 अंक तक जा सकता है। इसी तर‍ह निफ्टी 3735 के स्‍पोर्ट पर 3961 अंक पर बंद हुआ तो 4001 अंक तक जाने की संभावना।

इस सप्‍ताह के स्‍टॉक :ताज जीवीके होटल्‍स, तानिया सॉल्‍यूशंस, बिड़ला नोवा, महिंद्रा एंड महिंद्रा, रिलायंस इंडस्‍ट्रीज, एलआईसी हाउसिंग, टीवी 18, क्रि‍सिल, कर्नाटक बैंक, डाबर इंडिया, यस बैंक। हम अपने पाठकों से एक बार फिर कहना चाहते हैं कि चीनी शेयरों में बेहद सावधानी के साथ कारोबार करें और स्‍टॉप लॉस का इस्‍तेमाल करते रहे अन्‍यथा ये मीठे स्‍टॉक कभी भी कड़वे बन सकते हैं।

Saturday, March 24, 2007

टेलीग्राम को भूल गए हम...


खो गया झुमरी तिलैया का सरगम में पिछले शनिवार को हमने यह जिक्र किया था कि उस समय कुछ लोग रेडियो पर अपनी फरमाइश टेलीग्राम के माध्‍यम से भेजते थे। लेकिन ईमेल और एसएमएस के जमाने में हम टेलीग्राम को भूल गए हैं।
हमने बताया था कि एक बार ऐसा हुआ कि आल इंडिया रेडियो पर गंगा जमुना फिल्‍म का गीत दो हंसो का जोड़ा बिछुड़ गयो रे बज रहा था। गीत समाप्‍त होने पर उदघोषक ने घोषणा की कि अभी अभी झुमरी तिलैया से रामेश्‍वर प्रसाद वर्णवाल का भेजा हुआ टेलीग्राम हमें प्राप्‍त हुआ है, जिसमें उन्‍होंने दो हंसों का जोड़ा सुनाने का अनुरोध किया है। अत: यह गीत हम आपको पुन: सुना रहे हैं। लेकिन अब मोबाइल के इस जमाने में लोग टेलीग्राम को भूल सा गए हैं और यह मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि आप यही नहीं बता पाएंगे कि आपने आखिरी टेलीग्राम किस दिन किया था। लोग अब टेलीग्राम के बजाय एसएमएस, ईमेल करना पसंद करते हैं।

लेकिन जिन लोगों ने टेलीग्राम किए हैं वे उसके अहसास को समझ सकते हैं। टेलीग्राम आने पर लोग घबरा तक जाते थे कि कहां क्‍या हो गया, कुछ गलत तो नहीं हो गया....जब तक टेलीग्राम पढ़ नहीं लिया जाता....लोगों की घबराहट कम नहीं होती थी। इंग्लिश के टेलीग्राम की एक बानगी देखिए...राजस्‍थान के छोटे से गांव से चले छोरे ने कलकत्‍ता पहुंचकर टेलीग्राम किया...आई रिचड हियर विद सेफ्टी...अंग्रेजी में यह टेलीग्राम इस गांव में कोई पूरा नहीं पढ़ सकता। एक लड़का जो टूटी फूटी अंग्रेजी जानता था, उसने पढ़ा मैं कलकत्‍ता सेफ्टी के साथ पहुंच गया हूं। सारे लोग सोचते रहे कि लड़का गांव से तो अकेला गया था कमाने कलकत्‍ता। यह सेफ्टी कौन है। सभी ने इतना कोमल नाम देखकर राय निकाल ली की यह कोई लड़की है, जो छोरे को रास्‍ते में मिल गई होगी। लड़के के पिता ने पलट कर पत्र भेजा कि इस सेफ्टी को जल्‍दी से रवाना कर मैं तेरी शादी यही पास के गांव में एक अच्‍छी लड़की के साथ करने की तैयारी करता हूं।

लेकिन अब एसएमएस, ईमेल, मोबाइल, फोन सेवाओं के हुए तगड़े विस्‍तार ने टेलीग्राम को हमसे दूर कर दिया या लोग भूल से गए हैं। मुंबई, दिल्‍ली, कोलकाता, चेन्‍नई जैसे बड़े एवं मध्‍यम शहरों में जहां पहले तार घरों में लंबी लंबी लाइनें दिखाई देती थी, वहां अब दिन भर में मुशिकल से कोई आ पाता है। अमरीका के सैम्‍युल मोर्स ने 1844 में मोर्स कोड की खोज की थी तो संचार जगत में बड़ी क्रांति आ गई थी लेकिन ईमेल और एसएमएस ने तो समूची दुनिया ही बदल दी।

तार दरों में पिछले लगभग 25 साल से कोई बदलाव नहीं आया है और आज भी यह साढ़े तीन रुपए पहले दस शब्‍दों या उससे कम के लिए है। एक्‍सप्रेस तार भेजना हो तो दुगुने पैसे। इस दर पर आप भारत के चाहे जिस कौने में अपना संदेश भेज सकते हैं। भारत में मोबाइल फोन सेवा 1995 में आई और इसके फैलाव के साथ तार घरों की माली हालत बिगड़ती गई, जिसका नतीजा यह है कि देश में हर साल तार घरों की संख्‍या कम होती जा रही है। उदयपुर के अनिल तलेसरा बताते हैं कि तार घर जाने का समय अब नहीं है। जब संदेश एसएमएस और ईमेल से कहीं जल्‍दी व सस्‍ते पहुंच जाते हैं तो क्‍या जरुरत है तार घर तक जाने और तार भेजने की। लेकिन हम आपको बताते हैं कि चीन सरकार ने अपनी और चीनी जनता की ओर से भारत के पहले राष्‍ट्रपति श्री राजेंद्र प्रसाद को राष्‍ट्रपति चुनने पर तार के माध्‍यम से ही बधाई दी थी।

Friday, March 23, 2007

शोर न मचाओं...आने वाली है तबाही


शेयरों में तेजी...रियॉलिटी में गर्मी...पैसा ही पैसा...लेकिन हो जाओं सावधान। तबाही आ रही है धीमी पदचाप से। यदि आप निवेश गुरु जिम रोजर्स की आर्थिक राय पर भरोसा करते हैं तो इस पर भी विश्‍वास कर लीजिए। इस निवेश गुरु ने अपना घर डेढ़ करोड़ डॉलर में बेचने का फैसला कर लिया है और बसने जा रहे हैं एशिया में। वे पक्‍के तौर पर कह रहे हैं कि जल्‍दी ही अमरीका में प्रॉपर्टी के दाम 40 से 50 फीसदी गिरेंगे और इसका असर भारत सहित दूसरे एशियाई देशों और यूरोपीय देशों पर जबरदस्‍त ढंग से देखने को मिलेगा। इसका मतलब साफ है कि यदि आप घर खरीदने का मन बना रहे हैं तो रुक जाइए। रोजर्स का कहना है कि रियॉलिटी में काफी सट्टेबाजी हो चुकी है और सारी खरीद तो सट्टात्‍मक थी। यानी सच्‍चाई से दूर। कमजोर क्रेडिट इतिहास वालों को कर्ज दिए गए हैं जिससे अब डिफाल्‍टरों की संख्‍या में तगड़ा इजाफा होगा। वे कह रहे हैं कि मैंने तो चीन को छोड़कर सभी उभरते बाजारों से अपने पैसे निकाल लिए हैं। चीन में यह गिरावट 30 से 40 फीसदी जबकि दूसरे उभरते बाजारों में 50 से 80 फीसदी गिरावट आएगी। कुछ बाजार तो पूरी तरह साफचट। जिम रोजर्स कहते हैं कि यह गिरावट केवल रियॉलिटी में ही नहीं है, बल्कि शेयर बाजारों में भी देखने को मिलेगी। वे कहते हैं कि मार्च 2000 से अक्‍टूबर 2002 के दौरान डॉट कॉम कंपनियों के साफ होने से दुनिया भर के शेयर बाजार साफ हो गए थे। जापान में ऊंची बचत दर और तगड़े विदेशी मुद्रा भंडार के बावजूद पिछली मंदी के दौर में शेयरों के दाम 85 फीसदी घटे थे। और अब इंतजार करें अगली आर्थिक मार का।

कहां फंसे हैं आपके पति...बताएगा बीएसएनएल


भारत संचार निगम लिमिटेड यानी बीएसएनएल उन पत्नियों के लिए वरदान बनने जा रहा है जिनके पति दिलफेक टाइप के हैं। पत्नियां जैसे ही अपने मोबाइल से पति के मोबाइल पर एसएमएस करेंगी तो भले ही वह कहीं भी फंसे हो उनकी 'लोकेशन' पता लग जाएगी। सिर्फ यही नहीं मोबाइल उपभोक्ताओं को दूर दराज हाईवे में जा रहे ट्रक की लोकेशन, कर्मचारियों का मूवमेंट, परिवार-दोस्तों का लोकेशन, उपभोक्ताओं को अज्ञात स्थान की जानकारी, नजदीकी अस्पताल, पुलिसथाना, पेट्रोल पम्प और यहां तक कि होटल, पीसीओ, बाजार आदि की जानकारी भी मोबाइल पर मिल जाएगी। इसके अलावा चैटिंग व डेटिंग तो है ही। अगले माह शुरू होने वाली यह सेवा कुछ समय तक मुफ्त रहेगी। नोकिया के सहयोग से जीएसएम मोबाइल पर लोकेशन बेस सेवा शुरू करने वाला बीएसएनएल देश में पहला आपरेटर है।

गुगल अब साइकिल पर.......

दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजिन गुगल ने अपने कर्मचारियों को काम पर आने के लिए मुफ्त में बाइक ठहरिए...साइकिल...देने का फैसला किया है। बाइक निर्माता कंपनी रैलेग यूरोप गुगल के तकरीबन दो हजार स्‍थाई कर्मचारियों को जो कि यूरोप, मध्‍य पूर्व और अफ्रीका में काम कर रहे हैं को यह साइकिल देगी। इस पावर पैडल साइकिल के साथ मिलेंगे फ्री में गुगल लिखे हैलमेट। यह आइडिया भी गुगल के एक कर्मचारी हॉलजर मेयेर ने दिया और इसे सभी ने पसंद किया। लेकिन ऐसा नहीं है कि सारी साइकिलें एक ही तरह की दी जाएगी, इसमें कूल क्रूजर मॉडल तक को चुना जा सकता है, जो कि फोल्डिंग साइकिल है। गुगल के एचआर विभाग के निदेशक लिआन होर्नसे का कहना है कि हम केवल टेक्‍नालॉजी में ही कुछ अदभुत नहीं करना चाहते बल्कि
अपने कर्मचारियों के लिए भी करना चाहते। वे कहते हैं कि साइकिल से जहां कर्मचारी अपने को चुस्‍त दुरुस्‍त रख सकेंगे वहीं वे इससे उनके शहरों को बेहतर ढंग से जानने के अलावा पर्यावरण को मस्‍त रखने में योगदान करेंगे। यहां मेरी एक टिप्‍पणी.. भारतीय कर्मचारियों सावधान...ट्रैफिक जाम और भीड़भाड़ की वजह से भारत में भी अब कार की जगह सभी को साइकिलें मिलने लगे। तो मेरे दोस्‍तों...आज से ही शुरू कर दो साइकिल चलाने की प्रैक्टिस।

मेरे पिया गए हैं रंगून..



मेरे पिया गए हैं रंगून...किया है वहां से टेलीफून कि तेरी याद सताती है....लेकिन अब दो दिन पहले ही एसटीडी कॉल की दरों में कमी करने का कदम उठाने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने टेलीकॉम क्षेत्र में 74 फीसदी सीधे विदेशी निवेश की अनुमति दे दी है जो इस समय 49 फीसदी है। यानी अब भारतीय टेलीकॉम जगत में विदेशी पैसा जमकर बोलेगा। सीधे विदेशी निवेश के जरिए पाओं आर्थिक गुलामी।

Thursday, March 22, 2007

गरीबों को हटा दो...गरीबी अपने आप हट जाएगी




देश में गरीब कम हो गए और अमीर ज्‍यादा। मजा आ गया
यह जानकर लेकिन सरकार ने यह नहीं बताया कि भूख और तंगहाली से कितने गरीब स्‍वर्ग सिधार गए या अल्‍लाह को प्‍यारे हो गए। एक नारा है गरीबी हटाओं.......भाईयों इसके बजाय यह कहिए गरीबों को हटा दो...गरीबी अपने आप हट जाएगी। सरकार के दावे कागजी दावों से ज्‍यादा तो नहीं लगते। यह सैम्‍पल सर्वे है। किन लोगों को सर्वे में शामिल किया गया और कैसे किया गया...इस पर खूब सारे कागजात पेश किए जा सकते हैं लेकिन हकीकत तो खराब ही दिखाई देती है। कौनसे गरीबों का सर्वे किया गया, यह अहम है। मेरी मानिए आप भी एक सर्वे कर लीजिए यह संख्‍या बढ़ ही जाएगी। महाराष्‍ट्र के विदर्भ इलाके में किसानों की आत्‍महत्‍या से चिंतित होकर जब प्रधानमंत्री नागपुर आए थे तो आपको पता होगा कि अखबारों और टीवी में रिपोर्टस आई थी कि जिन किसानों से प्रधानमंत्री को मिलवाया गया उनमें कितने सच में पीडि़त किसान थे। कितने किसान तो प्रधानमंत्री के उनके दरवाजे तक आने का इंतजार करते रहे और आंखें सूख गई।

नेशनल सैम्‍पल सर्वे ने देश में गरीबी में कमी आने का दावा किया है। एनएसएस के आंकडों के मुताबिक 1999/2000 से 2004/2005 के दौरान भारत में गरीबों की संख्‍या में 4.3 फीसदी की कमी आई है। हालांकि अब भी देश में 23.85 करोड़ लोग गरीबी में जी रहे हैं। योजना आयोग का कहना है कि वर्ष 1999/2000 में देश में गरीबों की संख्‍या 26.1 फीसदी थी। वर्ष 2004/2005 में न्‍यूनतम सहूलियतों से कम पर गुजर बसर करने वाले लोगों की यह संख्‍या घटकर 21.8 फीसदी रह गई। इस दौरान गांवों में गरीबों की संख्‍या में शहरी इलाकों की तुलना में अधिक तेजी से कमी आई। वर्ष 2004/2005 के दौरान गांवों में गरीबों की गिनती वर्ष 1999/2000 के 27.1 फीसदी से काफी कम होकर 21.8 फीसदी रह गई। जबकि शहरी इलाकों में बदहाली में जीने वाले लोगों की संख्‍या वर्ष 1999/2000 के 23.6 फीसदी से थोड़ी सी कम होकर वर्ष 2004/2005 में 21.7 फीसदी रही। देश में गरीबों की कुल संख्‍या 23.85 करोड़ में से 17.03 करोड़ गरीब गांवों और 6.82 करोड़ गरीब शहरों में बसते हैं। इसके अलावा, यूनिफॉर्म रिकॉल पीरियड उपभोग के आधार पर भी देश की गरीबी में खासी कमी आई है।