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March 31, 2007

ब्‍लैक मंडे में डेढ़ दिन बाकी


नए वित्‍त वर्ष की शुरूआत शेयर बाजार के लिए घातक हो सकती है। बीते वित्‍त वर्ष की आखिरी तारीख 31 मार्च को शेयर बाजार भले ही बढ़कर बंद हुआ, लेकिन बाजार के बंद होने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने अचानक कैश रिजर्व रेश्‍यो और रेपो रेट में बढ़ोतरी की जो घोषणा की, वह सोमवार को शेयर बाजार के लिए ब्‍लैक मंडे साबित हो सकता है। कैश रिजर्व रेश्‍यो में दो चरणों में आधे फीसदी की बढ़त होते ही बाजार से सीधे 15500 करोड़ रूपए और मनी मल्‍टीप्‍लायर असर से 70 हजार करोड़ रूपए कम हो जाएंगे। रेपो रेट में 25 अंक बढ़ते ही बैंकों को अल्‍प समय के लिए जरुरी पैसा जुटाना महंगा पड़ेगा। हालांकि, रिजर्व बैंक के इस कदम की आशंका सभी को थी लेकिन यह 24 अप्रैल को घोषित होने वाली मौद्रिक नीति से पहले उठा लिए जाएंगे, यह नहीं पता था। सरकार हर तरह से प्रयास कर रही है कि महंगाई की बढ़ती दर को रोका जाए, लेकिन यह नहीं हो पा रहा। भारतीय रिजर्व बैंक ने बढ़ती मुद्रास्‍फीति को थामने के लिए पिछले तीन महीनों में सीआरआर में तीसरी बार बढ़ोतरी की है। यही वजह है कि अब हर तरह के कर्ज पर ब्‍याज दरें बढ़ती जा रही हैं और आम आदमी को नई कठिनाईयों के लिए तैयार रहना होगा। आम तौर पर ब्‍याज दर में बढ़ोतरी सबसे पहले कर्ज में होती है न कि जमाओं पर। यही वजह है कि पर्सनल लोन, होम लोन, क्रेडिट कार्ड और कंज्‍युमर लोन इस ताजा सीआरआर दर की बढ़ोतरी के बाद एक बार फिर से महंगे होंगे। ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी की शुरूआत सोमवार से शुरु होने की घोषणाएं सामने आने लग जाएगी। पिछले तीन सप्‍ताह से मुद्रास्‍फीति की दर 6.46 फीसदी पर स्थिर रहने से रिजर्व बैंक को यह कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है। रिजर्व बैंक का सोचना था कि वर्ष 2006-07 में मुद्रास्‍फीति की दर 5.5 से 6 फीसदी के बीच रहेगी। रिजर्व बैंकी की इस ताजा घोषणा से सोमवार को शेयर बाजार में खासी गिरावट आएगी। सबसे ज्‍यादा गिरावट बैंक शेयरों में देखने को मिल सकती है। इसके अलावा कंसट्रक्‍शन, हाउसिंग और ऑटो क्षेत्र के शेयरों में भी नरमी संभव है। जो लोग यह सोचते हैं कि ब्‍याज दर बढ़ने से मुद्रास्‍फीति घटेगी वे यह जान लें कि जब पहले दो बार सीआरआर में बढ़ोतरी की गई तब भी ऐसा नहीं हुआ और मुद्रास्‍फीति चिंताजनक स्‍तर पर पहुंच गई। अधिक फाइनेंस लिक्‍विडिटी इसके लिए अकेले जिम्‍मेदार नहीं है। इससे बाजार में चल रही लिक्विडिटी घटती है लेकिन मांग और आपूर्ति के आधार पर जिन वस्‍तुओं के भाव तय होते हैं उनके भाव घटे, यह जरुरी नहीं है। रिजर्व बैंक यह सोचता है कि ज्‍यादा ब्‍याज दर होने पर कम कर्ज लिया जाएगा। रुपए का मूल्‍य बढ़ाकर मांग में कमी की जा सकती है, जिससे महंगाई पर लगाम लगेगी तो यह बुरी तरह गलत है। यदि सरकार की सोच इसी तरह रही तो याद रखना कि हमारी आर्थिक विकास दर साढ़े आठ फीसदी से कम रहेगी।

यूनिवर्सिटी शेयर बाजार में

शिक्षा के विकास और विस्तार योजनाओं को परवान चढ़ाने के लिए मुंबई विश्वविद्यालय आम जनता से पैसा जुटाने पर विचार कर रहा है। यानी यह यूनिवर्सिटी अपने शेयर जारी करेगी और इनमें निवेशक लेनदेन कर सकेंगे। पूंजी बाजार में उतरने वाला यह देश का पहला विश्वविद्यालय होगा।

विश्वविद्यालय के कुलपति डा. विजय खोले का कहना है कि विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या एवं जरूरी सुविधाओं को पूरा करने में असमर्थ होने के बाद विश्वविद्यालय खुद को मुंबई शेयर बाजार (बीएसई) में सूचीबद्ध कराने के लिए विचार कर रहा है। यह एक क्रियात्मक प्रयास है और इसके जरिए विश्वविद्यालय वित्तपोषण को बेहतर बनाने के अलावा आगामी वर्ष में वैश्विक स्तर पर अपनी साख स्थापित करेगा।

March 30, 2007

मीठे पर नमक डाला और जले निवेशक


शेयर बाजार में एक बार फिर चीनी कंपनियों के शेयरों को लेकर खूब हलचल मची हुई है। कुछ मीडिया और रिसर्च हाउस यह रिपोर्ट बार बार पेश कर रहे हैं अब चीनी कंपनियों के शेयरों में बड़ी तेजी है या फिर मंदी आने वाली है। कई बार तो खबरों को इस तरह से पेश किया जा रहा है कि अनेक निवेशकों ने कल ही चीनी कंपनियों के शेयरों में कड़वा स्‍वाद चखा। सरकार चीनी निर्यात की अनुमति नहीं देगी, इस खबर को फैलाकर चीनी शेयरों के निवेशकों को कल मीडिया ने झटका दिया। जबकि खबर का गलत अर्थ निकाला गया है। असली बात यह है कि सरकार ने 30 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी है जो साढ़े सात लाख टन के चार चरणों में दी गई है। यानी साढ़े सात लाख टन चीनी का निर्यात होने के बाद दूसरे साढ़े सात लाख टन निर्यात की अनुमति दी जाएगी। जबकि कल एक मीडिया हाउस ने चीनी निर्यात के पहले चरण को पूरा होने की घोषणा के बाद जस्‍ट इन कहकर सरकार चीनी निर्यात की अनुमति नहीं देगी कहा और चीनी शेयर तीन से पांच फीसदी नीचे आ गिरे।
सरकार ने अप्रैल से जून के लिए चीनी का फ्री सेल कोटा दस फीसदी कमकर 38 लाख टन दिया है। जबकि चीनी निर्यात के दूसरे चरण का रिलीज ऑर्डर अब जारी किया जाएगा। साथ ही चीनी पर सब्सिडी देने या न देने का फैसला भी एक दो दिन में हो जाएगा। इस तरह के अनेक कारणों से ही चीनी के दाम 250/300 रुपए प्रति टन बढ़े हैं। ऐसे में खबर की गलत प्रस्‍तुति चीनी निवेशक जो पहले ही ऊपर में शेयर खरीदकर फंसे हुए हैं, पर नमक छिड़का जा रहा है।

करोड़ों क्रेडिट-डेबिट कार्डों से चोरी


बीबीसी हिंदी वेबसाइट ने एक खबर दी है कि अमरीका और ब्रिटेन में इस्‍तेमाल हुए साढ़े चार करोड़ क्रेडिट और डेबिट कार्डों से कंप्‍यूटर हैकरों ने अहम जानकारियां चोरी कर ली हैं। गोपनीय जानकारियां चोरी करने का ये सबसे बड़ा मामला माना जा रहा है। पूरी खबर इस बीबीसी पर : http://www.bbc.co.uk/hindi/business/story/2007/03/070330_cardhackers_usbrit.shtml

March 29, 2007

अमरीकी डॉलर गया भाड़ में


एक बहुत पुरानी कहावत है जापानी बीबी, फ्रैंच खाना और अमरीकी डॉलर जिस किसी के पास हो, वह बड़े नसीब वाला होता है। कहा जाता था कि अमरीकी डॉलर समूची दुनिया पर राज करता है लेकिन अब शायद इसके बुरे दिन भी आ रहे हैं। अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था में छाई मंदी को दूर करने के लिए वहां की हर सरकार ने खूब प्रयास किए लेकिन सफलता नहीं मिली। अमरीकी डॉलर दिन पर दिन कमजोर होता जा रहा है और दूसरी मुद्राएं मजबूत। ऐसे कई देश जिनकी अर्थव्‍यवस्‍था अमरीकी डॉलर से जुड़ी थी, अब यूरो को अपना रहे हैं। अनेक देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में अमरीकी डॉलर जमा करने के बजाय यूरो या दूसरी मजबूत मुद्राओं को वरीयता दे रहे हैं। ऐसे में अमरीका का परेशान होना स्‍वाभाविक है। अमरीकी कंपनियों को नए बाजारों की तलाश हैं और यही वजह है कि अमरीका एक के बाद एक देश पर हमला कर अपनी कंपनियों को वहां की अर्थव्‍यवस्‍था को हड़पने में मदद कर रहा है। जिन देशों ने अमरीकी दादागिरी के आगे सिर झुका लिया वहां देखिएं सारे बड़े कारोबारों में अमरीकी कंपनियों का वर्चस्‍व बढ़ता जा रहा है और घरेलू कंपनियां बर्बाद हो रही हैं। इसी प्रसंग में एक छोटा सा देश ईरान भी जुड़ गया है। ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर इब्राहिम शीबान ने साफ कर दिया है कि वे तेल की कीमत अमरीकी डॉलर में नहीं लेने पर विचार कर रहे हैं। यानी अब ईरान में अमरीकी डॉलर गया भाड़ में। ईरान अब जो भी भुगतान लेगा वह दूसरी मुद्राओं में होगा। हालांकि, इस समय ईरान की जो तेल आय है उसमें अमरीकी डॉलर की भागीदारी 50 फीसदी है। वाह क्‍या हिम्‍मत दिखाई है ईरान ने। लेकिन अमरीकी डॉलर के कर्ज में दबे दूसरे देश यह बात सोच भी नहीं पा रहे हैं और ज्‍यादा से ज्‍यादा भुगतान लेने देने का काम डॉलर में ही करना चाहते हैं।

March 28, 2007

ले लो सोना और करो मौज


ईरान और पश्चिम के बीच बढ़ रहे तनाव और गिरते शेयर बाजारों में निवेशकों की चिंता बढ़ना सही है। कहावत है कि आदमी रुपया आठ घंटे कमाता है लेकिन रुपया तो चौबीस घंटे कमाता है। इसी कहावत को ध्‍यान में रखकर लोग चाहते हैं कि वे भले कमाएं या नहीं लेकिन रुपया चौबीस घंटे दौड़ते रहना चाहिए। ईरान और अमरीका व ब्रिटेन में इस समय जो संवाद चल रहे हैं, उसी ने सोने और क्रूड तेल में आग लगाने का काम किया है। अमरीका को तेल से मतलब है, यानी दुनिया भर के तेल कुंओं पर कब्‍जा। और यह काम वह धीरे धीरे प्‍यार और हथियार के बल पर करता जा रहा है। खाड़ी के देश हो या कोई और वे इस बात को साफ समझ लें कि ईरान के बाद भी एक देश का नंबर है। फिर यह नंबर चाहे जिस किसी का हो। तीसरी दुनिया के देश जो अमरीकी कर्ज के बोझ तले दबे हैं, सब सहन कर रहे हैं। संसाधनों पर कब्‍जे के अलावा बाजार हथियाने की लड़ाई जोरदार चरण में पहुंचती जा रही है। आज भले ही हम निशिंचत होकर सो रहे हों, लेकिन हमें भी सावधान रहना होगा क्‍योंकि एक दिन हमारा भी नंबर आ सकता है। खैर हम चर्चा को अलग जगह ले आए...चलिए फिर चलते हैं पैसे पर। ईरान और पश्चिम के बीच बढ़ते तनाव से एक बात तो साफ है कि क्रूड और सोना इस समय निवेश लायक हैं। क्रूड 64 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है और इसके थमने के आसार नहीं हैं। दूसरा हम भारतीयों की पसंद तो सोना है, तभी तो हर साल यहां 700 टन से ज्‍यादा सोना खपता है। सोना इस समय लंदन में 672.30 डॉलर प्रति औंस चल रहा है, जिसके जल्‍दी ही सात सौ डॉलर प्रति औंस पहुंच जाने की तगड़ी संभावना है। साफ है सोना खरीदें और सात सौ डॉलर पार करने पर बेचकर मुनाफा गांठ बांध लें। रही बात शेयर बाजार की तो एक बात साफ कर दूं कि जैसा हम पहले भी बताते आ रहे हैं यहां बड़ी मंदी लंबे समय में तो नहीं है और बाजार में अप्रैल से स्थिति सुधरेगी। हालांकि, मानसून की पहली रिपोर्ट के बाद इसमें यह सुधार बेहतर रहेगा। केरल में मानसून 20 मई के आसपास आता है। शेयर बाजार के पुराने खिलाडि़यों की राय देखें तो वे कहते हैं कि धैर्य रखने वाले ही इस 15 फुट चौड़ी गली यानी दलाल स्‍ट्रीट में पैसा कमा पाते हैं। इस 15 फुट चौड़ी गली में रोजाना करोड़ों रुपया आता और जाता है। समय की नब्‍ज को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए।

25 मंत्री और पहले पायदान पर चिदम्‍बरम जी


एक समाचार पर नजर गई तो पता चला कि दिल्‍ली में बैठी केंद्र सरकार के तकरीबन 25 मंत्री करोड़पति हैं। इस मंत्रियों में से 20 कांग्रेस के हैं और डीएमके के तीन एवं एनसीपी के दो। करोड़पतियों को छोड़ दें तो लखपति मंत्री 28 हैं। अब जानिए सबसे बड़े करोड़पति मंत्री का नाम...पी. चिदम्‍बरम, जो हमारे देश के वित्‍त मंत्री हैं। अब वित्‍त मंत्री ही करोड़पति नहीं होंगे तो भला कौन होगा। वर्ष 2004 में चुनाव आयोग को दी संपत्ति की सूची में वित्‍त मंत्री जी ने अपनी संपत्ति 18 करोड़ रुपए दिखाई है।

चिदम्‍बरम के बाद हैं विज्ञान और तकनीकी मंत्री कपिल सिब्‍बल जिनकी संपत्ति है 16 करोड़ रूपए। रेणुका चौधरी 14 करोड़ रूपए, कमलनाथ पांच करोड़ रूपए, इंद्रजीत सिंह राव पांच करोड़ रुपए, पूरणदेश्‍वरी 4.09 करोड़ रूपए, शरद पवार 3.6 करोड़ रूपए, अजय माकन तीन करोड़ रूपए, मीरा कुमार 2.89 करोड़ रुपए और टी आर बालू 2.75 करोड़ रूपए की संपत्ति के मालिक हैं। विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के पास डेढ़ करोड़ रुपए और शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी के पास 1.33 करोड़ रुपए की संपदा है। डीएमके के दयानिधि मारन 1.40 करोड़ रुपए की संपत्ति के स्‍वामी हैं।

March 27, 2007

परीक्षा और पढ़ाई में भी ठेकेदारी !


ठेके पर शिक्षा का रोग उत्‍तर प्रदेश के बाद अब मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल तक पहुंच गया है। स्कूली शिक्षा में सुधार के तमाम दावों के बीच सरकार की नाक के नीचे भोपाल के एक स्कूल में सुदूर केरल के लगभग पांच सौ छात्र-छात्राएं प्राइवेट हायर सैकेंडरी की परीक्षा दे रहे हैं। अब तक चार पेपर दे चुके इन बाहरी विद्यार्थियों से स्कूल की व्यवस्थाएं गड़बड़ा गई हैं, लेकिन इन्हें एकमुश्त यहां कौन लाया, इसकी पड़ताल न तो स्कूल प्रबंधन ने की और न ही माध्यमिक शिक्षा मंडल ने।

पता चला है कि प्रति छात्र 25 हजार रुपए के पैकेज पर कोई ठेकेदार इन्हें यहां से हायर सेकेंडरी पास कराने लाया है। चार दिन पहले नकल करते पकड़े गए इनमें से एक छात्र ने फ्लाइंग स्क्वाड के सामने यह कहते हुए इस धंधे का खुलासा किया कि उसके 25 हजार रुपए पानी में चले गए। ठेकेदार कौन है, ये छात्र उसके बारे में बताने से परहेज करते हैं। स्कूल प्रबंधन भी अनजान है। हकीकत यह है कि इस ठेकेदार ने ही इन बच्चों के फार्म यहां जमा कराए। उसी ने इनके रहने, खाने का इंतजाम किया। यहां तक कि परीक्षा केंद्र आने के लिए उसने इनके लिए बस भी लगा रखी है।

सैकड़ों किलोमीटर दूर से आए इन छात्रों को एक ही स्कूल में सेंटर मिलना भी शिक्षा माफिया की पकड़ का उदाहरण है। केरल के करीब पांच जिलों से आए ये सभी छात्र-छात्राएं भेल स्थित शासकीय महात्मा गांधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से बारहवीं की परीक्षा दे रहे हैं। इस स्कूल में इनके सहित कुल 729 प्राइवेट छात्र परीक्षा दे रहे हैं। नियमित के अलावा इतनी बड़ी संख्या होने के कारण करीब ढाई सौ परीक्षार्थियों की बैठक व्यवस्था बरखेड़ा स्थित कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में करनी पड़ी है, जो महात्मा गांधी का उपकेंद्र है। ये सभी परीक्षार्थी विशेष बसों से परीक्षा देने आते हैं और इसी से जाते हैं। एक छात्रा को मिजल्स होने के कारण तीन छात्राएं आटो से आती-जाती हैं, आटो का किराया तक इन्हें यहां लाने वाले ही देते हैं। इन्हें ठहराने और खाने-पीने की व्यवस्था भी एक साथ की गई है। इतना ही नहीं इनके इलाज का खर्चा भी यही लोग उठा रहे हैं। करीब तीन सौ छात्र मिसरोद मार्ग पर रुके हैं तो सौ सवा सौ परीक्षार्थियों को भोपाल टाकीज क्षेत्र में ठहराया गया है।

परीक्षा के पहले और बाद तक हमेशा एक साथ रहने वाले ये छात्र वैसे तो कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। अधिकांश तो हिंदी ही नहीं जानते, मलयालम में ही बातचीत करते हैं। इससे स्कूलों में तैनात शिक्षकों के अलावा निरीक्षण पर आने वाले अधिकारी भी खासे परेशान हो जाते हैं। केरल के पालघाट निवासी छात्र रवि नायर झटके में बता गया कि वह किसी नेशनल इंटर कालेज का छात्र है और उसके साथ इसी कालेज के 90 छात्र यहां परीक्षा देने आए हैं। यहां से परीक्षा क्यों दे रहे हैं? कौन लाया है? आदि सवाल सुनते ही वह कुछ नहीं जानने की बात कहते हुए अपने गु्रप में चला गया। अन्य समूह में चल रहे चार छात्र यह तो बता गए कि वे परीक्षा देने ही भोपाल आए हैं। इसके पहले न फार्म खरीदने आए और न जमा करने। फार्म किसने जमा किया, यह सुनते ही ये छात्र भी चुप्पी साध कर बस की ओर चल दिए। साभार जागरण डॉट कॉम से।

March 26, 2007

पी चिदम्‍बरम भी नहीं भर पाते सरल...


आज से चालू वित्‍त वर्ष का आखिरी सप्‍ताह शुरू हो गया है और इसके साथ ही कर रिटर्न भरने की कसरत चालू हो गई है। लोगों को फोन करो तो कहते हैं कि यार बाद में बात करते हैं...सीए के पास बैठा हूं...कर वकील के दफ्तर में हूं....अकाउंटस तैयार करने में फंसा हूं तो फार्म 16 जल्‍दी से जुटाना है ताकि रिटर्न दाखिल कर पिंड छुडाऊं इस साल के लिए। लेकिन क्‍या आपको पता है कि हमारे वित्‍त मंत्री भी बगैर कर सलाहकार के अपना रिटर्न नहीं भर सकते। भले ही फॉर्म का नाम सरल रखा गया हो।


गुजरात हाईकोर्ट के न्‍यायाधीश मोहित शाह का कहना है कि आयकर से जुड़े कानून इतने जटिल हैं कि खुद वित्‍त मंत्री, कानून मंत्री और प्रधानमंत्री भी कर सलाहकार की सहायता के बगैर अपने कर रिटर्न नहीं भर सकते। मोहित शाह ने यह खास बात गुजरात फैडरेशन ऑफ टैक्‍स कंसलटेंट के सहयोग से आयोजित कराधान 2007 नामक राष्‍ट्रीय अधिवेशन में कही। उनका मत था कि करदाता पैसा और समय खर्च कर कर कानूनों पर न्‍यायालयों से स्‍पष्‍टता पाते हैं लेकिन वित्‍त मंत्री इन फैसलों का लाभ लोगों द्धारा उठाने से पहले ही कानून में बदलाव कर देते हैं और ऐसे परिवर्तनों को बैक डेट से लागू कर देते हैं।

वित्‍त वर्ष का आखिरी सप्‍ताह.....


चालू वित्‍त वर्ष का आखिरी सप्‍ताह आज से शुरू हो गया है और इस सप्‍ताह में बीएसई इंडेक्‍स 12922 अंक पर समर्थन मिलने पर 13572 अंक से ऊपर बंद हुआ तो 13745 अंक तक जा सकता है। इसी तर‍ह निफ्टी 3735 के स्‍पोर्ट पर 3961 अंक पर बंद हुआ तो 4001 अंक तक जाने की संभावना।

इस सप्‍ताह के स्‍टॉक :ताज जीवीके होटल्‍स, तानिया सॉल्‍यूशंस, बिड़ला नोवा, महिंद्रा एंड महिंद्रा, रिलायंस इंडस्‍ट्रीज, एलआईसी हाउसिंग, टीवी 18, क्रि‍सिल, कर्नाटक बैंक, डाबर इंडिया, यस बैंक। हम अपने पाठकों से एक बार फिर कहना चाहते हैं कि चीनी शेयरों में बेहद सावधानी के साथ कारोबार करें और स्‍टॉप लॉस का इस्‍तेमाल करते रहे अन्‍यथा ये मीठे स्‍टॉक कभी भी कड़वे बन सकते हैं।

March 24, 2007

टेलीग्राम को भूल गए हम...


खो गया झुमरी तिलैया का सरगम में पिछले शनिवार को हमने यह जिक्र किया था कि उस समय कुछ लोग रेडियो पर अपनी फरमाइश टेलीग्राम के माध्‍यम से भेजते थे। लेकिन ईमेल और एसएमएस के जमाने में हम टेलीग्राम को भूल गए हैं।
हमने बताया था कि एक बार ऐसा हुआ कि आल इंडिया रेडियो पर गंगा जमुना फिल्‍म का गीत दो हंसो का जोड़ा बिछुड़ गयो रे बज रहा था। गीत समाप्‍त होने पर उदघोषक ने घोषणा की कि अभी अभी झुमरी तिलैया से रामेश्‍वर प्रसाद वर्णवाल का भेजा हुआ टेलीग्राम हमें प्राप्‍त हुआ है, जिसमें उन्‍होंने दो हंसों का जोड़ा सुनाने का अनुरोध किया है। अत: यह गीत हम आपको पुन: सुना रहे हैं। लेकिन अब मोबाइल के इस जमाने में लोग टेलीग्राम को भूल सा गए हैं और यह मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि आप यही नहीं बता पाएंगे कि आपने आखिरी टेलीग्राम किस दिन किया था। लोग अब टेलीग्राम के बजाय एसएमएस, ईमेल करना पसंद करते हैं।

लेकिन जिन लोगों ने टेलीग्राम किए हैं वे उसके अहसास को समझ सकते हैं। टेलीग्राम आने पर लोग घबरा तक जाते थे कि कहां क्‍या हो गया, कुछ गलत तो नहीं हो गया....जब तक टेलीग्राम पढ़ नहीं लिया जाता....लोगों की घबराहट कम नहीं होती थी। इंग्लिश के टेलीग्राम की एक बानगी देखिए...राजस्‍थान के छोटे से गांव से चले छोरे ने कलकत्‍ता पहुंचकर टेलीग्राम किया...आई रिचड हियर विद सेफ्टी...अंग्रेजी में यह टेलीग्राम इस गांव में कोई पूरा नहीं पढ़ सकता। एक लड़का जो टूटी फूटी अंग्रेजी जानता था, उसने पढ़ा मैं कलकत्‍ता सेफ्टी के साथ पहुंच गया हूं। सारे लोग सोचते रहे कि लड़का गांव से तो अकेला गया था कमाने कलकत्‍ता। यह सेफ्टी कौन है। सभी ने इतना कोमल नाम देखकर राय निकाल ली की यह कोई लड़की है, जो छोरे को रास्‍ते में मिल गई होगी। लड़के के पिता ने पलट कर पत्र भेजा कि इस सेफ्टी को जल्‍दी से रवाना कर मैं तेरी शादी यही पास के गांव में एक अच्‍छी लड़की के साथ करने की तैयारी करता हूं।

लेकिन अब एसएमएस, ईमेल, मोबाइल, फोन सेवाओं के हुए तगड़े विस्‍तार ने टेलीग्राम को हमसे दूर कर दिया या लोग भूल से गए हैं। मुंबई, दिल्‍ली, कोलकाता, चेन्‍नई जैसे बड़े एवं मध्‍यम शहरों में जहां पहले तार घरों में लंबी लंबी लाइनें दिखाई देती थी, वहां अब दिन भर में मुशिकल से कोई आ पाता है। अमरीका के सैम्‍युल मोर्स ने 1844 में मोर्स कोड की खोज की थी तो संचार जगत में बड़ी क्रांति आ गई थी लेकिन ईमेल और एसएमएस ने तो समूची दुनिया ही बदल दी।

तार दरों में पिछले लगभग 25 साल से कोई बदलाव नहीं आया है और आज भी यह साढ़े तीन रुपए पहले दस शब्‍दों या उससे कम के लिए है। एक्‍सप्रेस तार भेजना हो तो दुगुने पैसे। इस दर पर आप भारत के चाहे जिस कौने में अपना संदेश भेज सकते हैं। भारत में मोबाइल फोन सेवा 1995 में आई और इसके फैलाव के साथ तार घरों की माली हालत बिगड़ती गई, जिसका नतीजा यह है कि देश में हर साल तार घरों की संख्‍या कम होती जा रही है। उदयपुर के अनिल तलेसरा बताते हैं कि तार घर जाने का समय अब नहीं है। जब संदेश एसएमएस और ईमेल से कहीं जल्‍दी व सस्‍ते पहुंच जाते हैं तो क्‍या जरुरत है तार घर तक जाने और तार भेजने की। लेकिन हम आपको बताते हैं कि चीन सरकार ने अपनी और चीनी जनता की ओर से भारत के पहले राष्‍ट्रपति श्री राजेंद्र प्रसाद को राष्‍ट्रपति चुनने पर तार के माध्‍यम से ही बधाई दी थी।

March 23, 2007

शोर न मचाओं...आने वाली है तबाही


शेयरों में तेजी...रियॉलिटी में गर्मी...पैसा ही पैसा...लेकिन हो जाओं सावधान। तबाही आ रही है धीमी पदचाप से। यदि आप निवेश गुरु जिम रोजर्स की आर्थिक राय पर भरोसा करते हैं तो इस पर भी विश्‍वास कर लीजिए। इस निवेश गुरु ने अपना घर डेढ़ करोड़ डॉलर में बेचने का फैसला कर लिया है और बसने जा रहे हैं एशिया में। वे पक्‍के तौर पर कह रहे हैं कि जल्‍दी ही अमरीका में प्रॉपर्टी के दाम 40 से 50 फीसदी गिरेंगे और इसका असर भारत सहित दूसरे एशियाई देशों और यूरोपीय देशों पर जबरदस्‍त ढंग से देखने को मिलेगा। इसका मतलब साफ है कि यदि आप घर खरीदने का मन बना रहे हैं तो रुक जाइए। रोजर्स का कहना है कि रियॉलिटी में काफी सट्टेबाजी हो चुकी है और सारी खरीद तो सट्टात्‍मक थी। यानी सच्‍चाई से दूर। कमजोर क्रेडिट इतिहास वालों को कर्ज दिए गए हैं जिससे अब डिफाल्‍टरों की संख्‍या में तगड़ा इजाफा होगा। वे कह रहे हैं कि मैंने तो चीन को छोड़कर सभी उभरते बाजारों से अपने पैसे निकाल लिए हैं। चीन में यह गिरावट 30 से 40 फीसदी जबकि दूसरे उभरते बाजारों में 50 से 80 फीसदी गिरावट आएगी। कुछ बाजार तो पूरी तरह साफचट। जिम रोजर्स कहते हैं कि यह गिरावट केवल रियॉलिटी में ही नहीं है, बल्कि शेयर बाजारों में भी देखने को मिलेगी। वे कहते हैं कि मार्च 2000 से अक्‍टूबर 2002 के दौरान डॉट कॉम कंपनियों के साफ होने से दुनिया भर के शेयर बाजार साफ हो गए थे। जापान में ऊंची बचत दर और तगड़े विदेशी मुद्रा भंडार के बावजूद पिछली मंदी के दौर में शेयरों के दाम 85 फीसदी घटे थे। और अब इंतजार करें अगली आर्थिक मार का।

कहां फंसे हैं आपके पति...बताएगा बीएसएनएल


भारत संचार निगम लिमिटेड यानी बीएसएनएल उन पत्नियों के लिए वरदान बनने जा रहा है जिनके पति दिलफेक टाइप के हैं। पत्नियां जैसे ही अपने मोबाइल से पति के मोबाइल पर एसएमएस करेंगी तो भले ही वह कहीं भी फंसे हो उनकी 'लोकेशन' पता लग जाएगी। सिर्फ यही नहीं मोबाइल उपभोक्ताओं को दूर दराज हाईवे में जा रहे ट्रक की लोकेशन, कर्मचारियों का मूवमेंट, परिवार-दोस्तों का लोकेशन, उपभोक्ताओं को अज्ञात स्थान की जानकारी, नजदीकी अस्पताल, पुलिसथाना, पेट्रोल पम्प और यहां तक कि होटल, पीसीओ, बाजार आदि की जानकारी भी मोबाइल पर मिल जाएगी। इसके अलावा चैटिंग व डेटिंग तो है ही। अगले माह शुरू होने वाली यह सेवा कुछ समय तक मुफ्त रहेगी। नोकिया के सहयोग से जीएसएम मोबाइल पर लोकेशन बेस सेवा शुरू करने वाला बीएसएनएल देश में पहला आपरेटर है।

गुगल अब साइकिल पर.......

दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजिन गुगल ने अपने कर्मचारियों को काम पर आने के लिए मुफ्त में बाइक ठहरिए...साइकिल...देने का फैसला किया है। बाइक निर्माता कंपनी रैलेग यूरोप गुगल के तकरीबन दो हजार स्‍थाई कर्मचारियों को जो कि यूरोप, मध्‍य पूर्व और अफ्रीका में काम कर रहे हैं को यह साइकिल देगी। इस पावर पैडल साइकिल के साथ मिलेंगे फ्री में गुगल लिखे हैलमेट। यह आइडिया भी गुगल के एक कर्मचारी हॉलजर मेयेर ने दिया और इसे सभी ने पसंद किया। लेकिन ऐसा नहीं है कि सारी साइकिलें एक ही तरह की दी जाएगी, इसमें कूल क्रूजर मॉडल तक को चुना जा सकता है, जो कि फोल्डिंग साइकिल है। गुगल के एचआर विभाग के निदेशक लिआन होर्नसे का कहना है कि हम केवल टेक्‍नालॉजी में ही कुछ अदभुत नहीं करना चाहते बल्कि
अपने कर्मचारियों के लिए भी करना चाहते। वे कहते हैं कि साइकिल से जहां कर्मचारी अपने को चुस्‍त दुरुस्‍त रख सकेंगे वहीं वे इससे उनके शहरों को बेहतर ढंग से जानने के अलावा पर्यावरण को मस्‍त रखने में योगदान करेंगे। यहां मेरी एक टिप्‍पणी.. भारतीय कर्मचारियों सावधान...ट्रैफिक जाम और भीड़भाड़ की वजह से भारत में भी अब कार की जगह सभी को साइकिलें मिलने लगे। तो मेरे दोस्‍तों...आज से ही शुरू कर दो साइकिल चलाने की प्रैक्टिस।

मेरे पिया गए हैं रंगून..



मेरे पिया गए हैं रंगून...किया है वहां से टेलीफून कि तेरी याद सताती है....लेकिन अब दो दिन पहले ही एसटीडी कॉल की दरों में कमी करने का कदम उठाने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने टेलीकॉम क्षेत्र में 74 फीसदी सीधे विदेशी निवेश की अनुमति दे दी है जो इस समय 49 फीसदी है। यानी अब भारतीय टेलीकॉम जगत में विदेशी पैसा जमकर बोलेगा। सीधे विदेशी निवेश के जरिए पाओं आर्थिक गुलामी।

March 22, 2007

गरीबों को हटा दो...गरीबी अपने आप हट जाएगी




देश में गरीब कम हो गए और अमीर ज्‍यादा। मजा आ गया
यह जानकर लेकिन सरकार ने यह नहीं बताया कि भूख और तंगहाली से कितने गरीब स्‍वर्ग सिधार गए या अल्‍लाह को प्‍यारे हो गए। एक नारा है गरीबी हटाओं.......भाईयों इसके बजाय यह कहिए गरीबों को हटा दो...गरीबी अपने आप हट जाएगी। सरकार के दावे कागजी दावों से ज्‍यादा तो नहीं लगते। यह सैम्‍पल सर्वे है। किन लोगों को सर्वे में शामिल किया गया और कैसे किया गया...इस पर खूब सारे कागजात पेश किए जा सकते हैं लेकिन हकीकत तो खराब ही दिखाई देती है। कौनसे गरीबों का सर्वे किया गया, यह अहम है। मेरी मानिए आप भी एक सर्वे कर लीजिए यह संख्‍या बढ़ ही जाएगी। महाराष्‍ट्र के विदर्भ इलाके में किसानों की आत्‍महत्‍या से चिंतित होकर जब प्रधानमंत्री नागपुर आए थे तो आपको पता होगा कि अखबारों और टीवी में रिपोर्टस आई थी कि जिन किसानों से प्रधानमंत्री को मिलवाया गया उनमें कितने सच में पीडि़त किसान थे। कितने किसान तो प्रधानमंत्री के उनके दरवाजे तक आने का इंतजार करते रहे और आंखें सूख गई।

नेशनल सैम्‍पल सर्वे ने देश में गरीबी में कमी आने का दावा किया है। एनएसएस के आंकडों के मुताबिक 1999/2000 से 2004/2005 के दौरान भारत में गरीबों की संख्‍या में 4.3 फीसदी की कमी आई है। हालांकि अब भी देश में 23.85 करोड़ लोग गरीबी में जी रहे हैं। योजना आयोग का कहना है कि वर्ष 1999/2000 में देश में गरीबों की संख्‍या 26.1 फीसदी थी। वर्ष 2004/2005 में न्‍यूनतम सहूलियतों से कम पर गुजर बसर करने वाले लोगों की यह संख्‍या घटकर 21.8 फीसदी रह गई। इस दौरान गांवों में गरीबों की संख्‍या में शहरी इलाकों की तुलना में अधिक तेजी से कमी आई। वर्ष 2004/2005 के दौरान गांवों में गरीबों की गिनती वर्ष 1999/2000 के 27.1 फीसदी से काफी कम होकर 21.8 फीसदी रह गई। जबकि शहरी इलाकों में बदहाली में जीने वाले लोगों की संख्‍या वर्ष 1999/2000 के 23.6 फीसदी से थोड़ी सी कम होकर वर्ष 2004/2005 में 21.7 फीसदी रही। देश में गरीबों की कुल संख्‍या 23.85 करोड़ में से 17.03 करोड़ गरीब गांवों और 6.82 करोड़ गरीब शहरों में बसते हैं। इसके अलावा, यूनिफॉर्म रिकॉल पीरियड उपभोग के आधार पर भी देश की गरीबी में खासी कमी आई है।

बड़ा ही तेज चैनल है यह...


मीडिया कंपनियों के शेयरों में इन दिनों निवेशकों का क्रेज देखा जा रहा है और यह क्रेज जल्‍दी खत्‍म भी नहीं होगा। टीवी 18 समूह, एनडीटीवी, जी, सन टीवी सहित सभी सूचीबद्ध मीडिया समूहों ने निवेशकों को जो खासा रिटर्न दिया है, उसके बाद निवेशक यही देख रहे हैं कि सबसे सस्‍ता और बेहतर मीडिया स्‍टॉक कौन सा है। कुछ ऐसे समूह भी हैं जो शेयर बाजारों में तो सूचीबद्ध नहीं है, लेकिन वहां भी बड़ी मात्रा में विदेशी पूंजी आ रही है जिससे आने वाले दिनों में यह तो तय है कि मीडिया कंपनियों में किया गया निवेश फायदेमंद रहेगा। इन मीडिया समूहों के बीच यदि बात की जाए टीवी टूडे नेटवर्क लिमिटेड यानी आज तक चैनल कंपनी की तो बात ही क्‍या। देश का नंबर वन चैनल लंबे समय से। टीआरपी में पटखनी देने के प्रयास विफल रहे आज तक के सामने। टीवी टूडे नेटवर्क इस समय चार समाचार चैनल आज तक, हैडलाइंस टूडे, तेज और दिल्‍ली आज तक चला रही है। टीवी टूडे का हिंदी व अंग्रेजी समाचारों के बाजार में हिस्‍सा है 25 फीसदी। हिंदी समाचारों के बाजार की बात करें तो आज तक और तेज का 30 फीसदी बाजार पर कब्‍जा है। अभी ये चारों चैनल फ्री टू एयर हैं। आज तक चौबीस घंटे न्‍यूज परोसने में सभी दूसरे चैनलों से आगे है और देश के 90 फीसदी घरों में इसे देखा जाता है। हैडलाइंस टूडे को देश के 60 फीसदी घरों में देखने का दावा किया जाता हे। तेज भी 24 घंटे का हिंदी समाचार चैनल है और जो लोग जल्‍दबाजी में न्‍यूज देखना चाहते हैं उनके लिए बेस्‍ट। कंपनी कहती है कि इस चैनल ने भारत के 50 फीसदी घरों में अपनी जगह बना ली है। दिल्‍ली आज तक दिल्‍ली व एनसीआर क्षेत्र के लिए है। टीवी टूडे मानती है कि हिंदी चैनलों को अंग्रेजी समाचार चैनलों से ज्‍यादा विज्ञापन मिलेंगे क्‍योंकि हिंदी समाचार चैनलों की दृशक संख्‍या अंग्रेजी समाचार चैनलों की तुलना में तीन से चार गुना ज्‍यादा है। साथ ही अंग्रेजी चैनल देखने वाले 80 फीसदी दृशक हिंदी समाचार चैनल जरुर देखते हैं। मनोरंजन चैनलों की तुलना में समाचार चैनल देखने वालों की संख्‍या तेजी से बढ़ रही है। यहां मेरी एक टिप्‍पणी संख्‍या बढ़ेगी क्‍यों नहीं जब‍ अपराध, भूत बंगला, हंसी के गुब्‍बारे, योग और ज्‍योतिष, खाना खजाना, सास, बहू और साजिश पता नहीं क्‍या क्‍या जब एक ही चैनल पर आने लगे तो रिमोट कौन काम में ले। खैर! टीवी टूडे को कनाडा में पे चैनल का लाइसेंस मिल गया है और यह अमरीका में पिछले 15 महीनों से समाचार वितरण कर रही है। कुल कमाई में अमरीका से मिलने वाली आय का दो फीसदी हिस्‍सा है। अब कंपनी मध्‍य पूर्व और यूरोप में अगले तीन महीनों में अपने समाचार परोसेगी। टीवी टूडे की योजना कुछ और चैनल खोलने की है लेकिन अगले 12 महीनों तक कोई नया चैनल लांच नहीं करेगी और मौजूदा चैनल पर ही ध्‍यान देगी। कंपनी ने अप्रैल से दिसंबर 2006 यानी चालू वित्‍त वर्ष के पहले नौ महीनों में 130 करोड़ रूपए की शुद्ध कमाई की जिस पर शुद्ध मुनाफा हुआ 19 करोड़ रूपए। प्रति शेयर कमाई यानी ईपीएस रही 3.24 रुपए।

March 21, 2007

मार्केट को कौन चला रहा है...


अभी अभी मेरे एक मित्र का फोन आया कि मार्केट को कौन चला रहा है। बीएसई और एनएसई का इंडेक्‍स तो बढ़ रहा है लेकिन उसके शेयर के दाम क्‍यों नहीं बढ़ रहे हैं। हमने उसे बताया कि यह मत पूछो कि मार्केट को कौन चला रहा है....बहुत विवाद हो जाएगा। यह पूछो मार्केट में चल कौनसे शेयर रहे हैं। आज आई सीआईसीआई बैंक और रिलायंस एनर्जी के दम पर ही शेयर बाजार चल रहा है। चलों...फटाफट सौदे कर डालो....बाजार 20 मिनट बाद बंद होने वाला है।

धन दौलत किस पायदान पर है...


अब सुनिएं ललित होटल का अगला किस्‍सा। कल आपने जाना फल्‍कचुएशन और चॉपी को। शेयर बाजार में आ रही लगातार बढ़त के बाद आज सुबह चाय पीने जुटे निवेशक कह रहे थे चलो बाजार के बढ़ने से एसेट में कुछ तो इजाफा हुआ। होना भी चाहिए....तभी तो इस होटल में बैठकर खाना पीना हो सकेगा...नहीं तो चिदंबरम ने कही का नहीं छोड़ा था। मार मार कर दम निकाल दिया था......अब शेयर बाजार बढ़ रहा है तो कुछ दम आ रहा है। यार, एसेट पूरी तरह धुल रही थी। हम तो वहां थे ही सो फिर कूदे....देखो भाईयों....सॉरी.....मित्रों...यह एसेट नहीं धन दौलत है। लक्ष्‍मी तभी आती है, जब उससे जुड़े भारतीय शब्‍द कहे जाएं न कि लंदन के वर्ड। उसी समय पीछे से किसी ने बोला...ईक्रा के पब्लिक इश्‍यू में पैसा लगा देना...लग गया तो चांदी हो जाएगी। बड़ी अच्‍छी रेटिंग कंपनी है। हमने फिर टांग घुसेड़ी....कहा...रेटिंग से अच्‍छा है पायदान। यार अमीन सायनी तो 1952 से 1994 तक यही कहते रहे...आज यह गाना 10 वें पायदान से दूसरे पायदान पर पहुंच गया है। बीना का गीतमाला से कोलगेट सिबाका गीतमाला तक वे यही कहते रहे और तुम नहीं सुधरे। खाते हिंदी की हो और गाते हो अंग्रेजी की। अमीन साब से तो पायदान कहते कहते खुद भी पहले पायदान पर पहुंच गए और गाने भी। लेकिन ऐसा न हो कि रेटिंग के चक्‍कर में कभी तुम्‍हारी ग्रेडिंग हो जाए। चलो इस पर चर्चा फिर....लेकिन कहो...धन दौलत किस पायदान पर है.......शहद सा मीठा लगेगा यह बोलना।

March 20, 2007

तु तो बड़ा चंचल, चितवन है रे........


बॉम्‍बे शेयर बाजार के पास एक होटल है...ललित। यह होटल शेयर बाजार के खिलाडि़यों, सटोरियों, निवेशकों, पंटरों, गेनर्स और लूजर्स सभी की फेवरिट होटल है। यह होटल अब तो काफी नए रंग रुप में है लेकिन जब पहले पुराने पैटर्न की थी तभी से....खासकर ‘ओपन क्रॉय’ के जमाने में तो यहां खूब धूम रहती थी। शाम को कारोबार बंद हो जाने के बाद भी यहां शेयरों का कारोबार होता रहता था, हालांकि यह वैद्य नहीं था यानी कर्ब सौदे होते थे। खैर यह तो बात हुई होटल की। लेकिन कल शाम यहां कुछ खिलाड़ी जुटे हुए थे और कह रहे थे कि यार मार्केट में काफी ‘फल्‍कचुएशन’ हो रहा है, तो एक कह रहा था खूब ‘चॉपी’ है। एक दिन बाजार बढ़ता है तो दूसरे दिन गिर जाता है, पता नहीं कब सुधरेगा, सारी कमाई चली गई। पता नहीं यह ग्रहण कब दूर होगा। आदि आदि। हम भी कूद पड़े इस बहस की जमात में। मजा तो आता ही है, गांव की पंचायत में कूदने का। पर ठहरे हिंदी वाले, सो सलीके से इस बहस में घूसने की कोशिश की। देखों भाईयों......बस इतना ही बोले की लोग गर्दनें तानकर देखने लगे..........यह कौन आ गया मुंबई में हमको भाई बोलने वाला। आपको पता ही होगा कि, यदि नहीं है तो जान लें कि मुंबई में भाई का मतलब गुंडों की फौज के आदमी को कहा जाता है। हमने गलती सुधारी और कहा मित्रों....बाजार में आप जो कह रहे हैं फल्‍कचुएशन और चॉपी तो हम इसे सुधारना चाहते हैं। यह तो बड़ा ‘चंचल और चितवन’ है..........कितना मधुर शब्‍द। यारों हिंदी में फल्‍कचुएशन और चॉपी की जगह एक बार बोलकर तो देखों चंचल और चितवन.......कितना मिठास लगेगा और फिर करो सौदे........सारे गम भूल जाओगे और पैसे लगाने की रौनक बढ़ जाएगी।

March 19, 2007

अमरुदों के शहर में पैसे का पेड़


आपने पहचाना अमरुदों का शहर भारत में कहां है...अमरुदों का बगीचा तो जयपुर में है लेकिन शहर कहा जाता है इलाहाबाद यानी प्रयागराज को जहां है संगम। इस त्रिवेणी के शहर में एक और नया संगम है....अमरुद, कुंभ और बैंक...जहां पैसे का पेड़ है। यह बात है कि इस शहर के इलाहाबाद बैंक की...जो निवेश के लिए बेहतर स्‍टॉक है। इस बैंक का सालाना कारोबार 39 फीसदी की दर से बढ़ रहा है और एडवांस में बढ़ोतरी हो रही है 70 फीसदी के हिसाब से। जमाओं में इजाफा हो रहा है 26.6 फीसदी की। वित्‍त वर्ष 2007 में इसका शुद्ध एनपीए भी घटकर 0.6 फीसदी आ जाएगा।

बैंक को इस साल ब्‍याज से आय 1305 करोड़ रूपए होने की उम्‍मीद है और कर के बाद लाभ 286 करोड़ रुपए। इलाहाबाद बैंक का शेयर ऊपर में 99 रुपए जाने के बाद इस समय 73 रुपए में मिल रहा है, जो आकर्षक भाव कहा जा सकता है। यदि आपकी तलाश बेहतर बैंक स्‍टॉक है तो अमरुदों के शहर के इस बैंक में निवेश कर पैसे के कुंभ को भरा जा सकता है।

हार के बाद ही जीत है.......


दैनिक जागरण ने अपनी वेबसाइट पर एक बढि़या खबर लगाई है कि गिरकर भी देश का मान बढ़ाएगा सेंसेक्‍स....पढि़ए पूरी खबर जो कर रही है आपका इंतजार.....विश्‍व कप के शुरुआती दौर में ही बांग्लादेश के हाथों टीम इंडिया को मिली शर्मनाक हार से हर भारतीय निराश है। उनकी निराशा जायज भी है, लेकिन हर खेल प्रेमी को यह नहीं भूलना चाहिए कि हार के बाद ही जीत का सिलसिला शुरू होता है। शेयर बाजार के आंकड़े भी भारत के पक्ष में हैं। वैसे तो शेयर बाजार का क्रिकेट से कोई संबंध नहीं है, सिवाय इसके कि आजकल दोनों में गिरावट का दौर जारी है। हालांकि, जब-जब सेंसेक्स में गिरावट का दौर रहा है, भारत अपनी प्रतिद्वंद्वी टीम को धूल चटाता रहा है।

वर्ष 1986 में शेयर बाजार के अस्तित्व में आने के बाद से अब तक पांच विश्व कप खेले जा चुके हैं। इसलिए अगर सेंसेक्स के प्रदर्शन को कसौटी मानें तो भारत विश्व कप क्रिकेट जीत सकता है और यदि यह संभव न हुआ तो कम से कम देश का सम्मान तो बरकरार रह ही सकता है।

हम वर्ष 2003 विश्व कप की बात करें तो इसके आयोजन के दौरान 9 फरवरी से 24 मार्च के बीच सेंसेक्स में 139 अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी। इस विश्व कप में भारत फाइनल में पहुंच गया था। इसी प्रकार वर्ष 1996 में भारत विश्व कप के सेमी फाइनल तक पहुंचा था और इस दौरान 14 फरवरी से 17 मार्च के बीच सेंसेक्स में 185 अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी। क्रिकेट प्रेमियों के लिए खुशी की बात यह है कि बाजार अभी मंदड़ियों के प्रभाव में है तथा वेस्टइंडीज में हो रहे विश्व कप की शुरुआत के बाद से शेयर बाजार में लगभग 450 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। मुद्रास्फीति की दर में बढ़त के चलते देश के शेयर बाजारों के सूचकांक सरक रहे हैं। चूंकि महंगाई रोकने के सरकार के तमाम प्रयास बेकार हो चुके हैं, इसलिए बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सेंसेक्स में गिरावट का दौर फिलहाल जारी रहेगा। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले मैचों में भारत की जीत की पताका फहराएगी। साभार- जागरण डॉट कॉम से।

शेयर बाजार में जारी रहेगी बेचैनी


मित्रों नमस्‍कार, शेयर बाजार में यह सप्‍ताह भी बेचैनी भरा रहेगा और बीएसई का सूचकांक 12847 से 12033 अंकों के बीच और निफ्टी 3748 से 3473 अंक के बीच घूमता रहेगा। अभी शेयर बाजार में स्थिरता देखने को नहीं मिलेगी और यह हलचल कुछ दिन और जारी रहेगी। बैंक ऑफ जापान, चीन की ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी के साथ यूरोप के सेंट्रल बैंक की भी ब्‍याज बढ़ोतरी बाजारों के लिए घातक बनी हुई है। इसके अलावा मुद्रास्‍फीति की समूची दुनिया के सामने खड़ी भयावह स्थिति सुधरने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। हमारी सलाह है कि नए सप्‍ताह में कारोबार बेहद सावधानी से करें। इस सप्‍ताह रिलायंस इंडस्‍ट्रीज, टेल्‍को, विप्रो सेंसेक्‍स में अपनी भूमिका निभाएंगे। जबकि, वीएसएनएल, बीपीसीएल, रिलायंस इंडस्‍ट्रीज, टेल्‍को, विप्रो फ्रंटलाइन की भूमिका में दिखेंगे। एक अहम बात और बता दूं कि शुगर स्‍टॉक्‍स में करंट देखने को मिलेगा लेकिन बगैर स्‍टॉप लॉस इनमें काम नहीं करें वरना पछताना पड़ सकता है क्‍योंकि भारतीय चीनी उद्योग के बुरे दिन अभी खत्‍म नहीं हुए हैं। बेस्‍ट निवेश के लिए इलाहाबाद बैंक।

March 17, 2007

खो गया झु‍मरी तिलैया का सरगम


अगर आप रेडियो के श्रोता रहे हैं तो फरमाइशी गीतों के कार्यक्रमों में ‘झुमरी तिलैया’ का नाम अवश्‍य सुना होगा। 1950 से 1980 तक रेडियो से प्रसारित होने वाले फिल्‍मी गीतों के फरमाइशी कार्यक्रमों में शायद ही किसी गीत को सुनने के लिए झुमरी तिलैया के श्रोताओं ने फरमाइश न भेजी हो। हाल यह था कि हर किसी गीत के सुनने वाले श्रोताओं में झुमरी तिलैया का नाम कम से कम एक बार तो जरुर प्रसारित किया जाता था। इस तरह झुमरी तिलैया का नाम दिन में बार बार सुनने में आता था जिसके कारण रेडियो श्रोताओं में झुमरी तिलैया का नाम प्रसिद्ध हो गया था।

सही अर्थों में कहा जाए तो झुमरी तिलैया को विश्‍वविख्‍यात बनाने का श्रेय वहां के स्‍थानीय रेडियो श्रोताओं को जाता है जिनमें रामेश्‍वर प्रसाद वर्णवाल, गंगालाल मगधिया, कुलदीप सिंह आकाश, राजेंद्र प्रसाद, जगन्‍नाथ साहू, धर्मेंद्र कुमार जैन, पवन कुमार अग्रवाल, लखन साहू और हरेकृष्‍ण सिंह प्रेमी के नाम मुख्‍य हैं।

मुंबई से प्रकाशित धर्मयुग में वर्षों पहले छपे एक लेख में विष्‍णु खरे ने लिखा था कि उदघोषक अमीन सयानी को प्रसिद्ध बनाने में झुमरी तिलैया के रेडियो श्रोताओं में खासतौर पर रामेश्‍वर प्रसाद वर्णवाल का हाथ है।

बिहार में गया रेलवे स्‍टेशन के अगले स्‍टेशन कोडरमा के बाहरी क्षेत्र को झुमरी तिलैया के नाम से जाना जाता है। यह बिहार की राजधानी पटना से 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जिसकी आबादी एक लाख के करीब होगी। यहां विश्‍वविख्‍यात अभ्रक की खानें हैं और यहां का कलाकंद भी प्रसिद्ध है। वर्णवाल के बारे में लोगों का कहना है कि उनकी पहली फरमाइश रेडियो सिलोन से पढ़ी गई थी। फिल्‍म ‘मुगले आजम’ का गीत ‘जब प्‍यार किया तो डरना क्‍या’ के लिए उन्‍होंने टेलीग्राम से फरमाइश भेजी थी। रेडियो सिलोन से अक्‍सर यह प्रसारण होता था कि आप ही के गीत कार्यक्रम में झुमरी तिलैया से रामेश्‍वर प्रसाद वर्णवाल ने ‘दो हंसों का जोड़ा बिछुड़ गयो रे, गजब भयो रामा जुलुम भयो रे’ फरमाइश की है। झुमरी तिलैया से गंगालाल मगधिया, कुलदीप सिंह ‘आकाश’, राजेंद्र प्रसाद, जगन्‍नाथ साहू, धर्मेंद्र कुमार जैन, पवन कुमार अग्रवाल, लखन साहू ने भी इसी गीत की फरमाइश की है।

रेडियो पर फरमाइश को लेकर कई अजूबे जुड़े हुए हैं। एक बार ऐसा हुआ कि आल इंडिया रेडियो पर गंगा जमुना फिल्‍म का गीत दो हंसो का जोड़ा बिछुड़ गयो रे बज रहा था। गीत समाप्‍त होने पर उदघोषक ने घोषणा की कि अभी अभी झुमरी तिलैया से रामेश्‍वर प्रसाद वर्णवाल का भेजा हुआ टेलीग्राम हमें प्राप्‍त हुआ है, जिसमें उन्‍होंने दो हंसों का जोड़ा सुनाने का अनुरोध किया है। अत: यह गीत हम आपको पुन: सुना रहे हैं। टीवी के व्‍यापक आगमन से पहले रेडियो के अलावा मनोरंजन का दूसरा साधन नहीं था। ग्रामोफोन प्‍लेयर बहुत कम लोगों के पास था।

फरमाइश भेजने वालों में हरेकृष्‍ण सिंह ‘प्रेमी’ कभी पीछे नहीं रहे। यह अलग बात है कि वे अपनी हरकतों व कथित प्रेमी होने के कारण हमेशा चर्चा में रहे। फरमाइशों में अपने नाम के बाद अपनी कथित प्रेमिका प्रिया जैन का नाम भी जोड़ा करते थे जिसके कारण वे प्रसिद्ध हुए। यह बात अलग है कि उनकी प्रिया जैन से शादी नहीं हुई।

एक और दिलचस्‍प बात यह है कि रेडियो पर फरमाइश भेजने वालों में आपसी होड़ इस हद तक बढ़ गई थी कि लोग एक दूसरे की डाक को गायब करवाने और रुकवाने के लिए डाक छांटने वाले कर्मचारियों को रुपए देते थे। तब कई गंभीर श्रोता फरमाइशी पत्रों को भेजने के लिए गया और पटना तक जाने लगे जिससे डाक खर्च भी बढ़ गया। उन दिनों इस तरह के पत्र पर कम से कम 25 से 35 रुपए खर्च होने लगे।

एक और दिलचस्‍प प्रकरण के तहत एक सज्‍जन फरमाइश भेजने वाली लड़की से उसका मनपसंद गीत सुनने के बाद उससे प्रेम करने लगे। वे उसके प्रेम में इस हद तक पागल हो गए कि जिस दिन उस लड़की की शादी हो रही थी वहां जा पहुंचे और हंगामा खड़ा कर दिया कि मैं इस लड़की से शादी करूंगा। खैर लोगों के बहुत समझाने बुझाने और माथापच्‍ची करने के बाद मामला शांत हुआ।

झुमरी तिलैया के संबंध में सबसे ज्‍यादा रोचक बात यह थी कि जिस किसी फिल्‍म के किसी गीत को सुनने के लिए झुमरी तिलैया के श्रोता अपनी फरमाइश भेजते थे उस फिल्‍म को और उस गीत को मुंबई फिल्‍म उद्योग के बॉक्‍स ऑफिस पर हिट माना जाता था। यह सिलसिला कई साल से खत्‍म हो गया है। निजी टीवी चैनलों और दूरदर्शन की मार से रेडियो श्रोता बहुत कम रह गए हैं, साथ ही झुमरी तिलैया का सरगम भी खो गया है। इस सरगम को पढ़ने के बाद विंडो बंद मत किजिए बल्कि दिल से अपनी टिप्‍पणी ब्‍लॉग को भेजिए।

March 16, 2007

चल सिनेमा देखन को जाएं गौरी


बरसों पहले हिंदी सिनेमा में यह गाना आया और खूब जमकर बजा। जमकर सुना और आज भी पॉपुलर है। एक स्क्रिन के सिनेमा हॉल के जमाने में जब लोग 1.60 रुपए वाली सबसे सस्‍ती आगे की बैंच की टिकट लेते थे तो किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि एक समय ऐसा आएगा जब सिनेमा हॉलों में 1.60 रुपए में तो पॉपकॉर्न यानी सिका सिकाया मक्‍का भी नहीं मिलेगा। मैं आपको बता दूं कि मैंने भी कुछ फिल्‍में 1.60 रुपए वाली टिकटें खरीद कर देखी हैं। लोग सोचते थे कि इस क्‍लॉस में जो दम है वह अन्‍य क्‍लॉस की टिकटों में नहीं है क्‍योंकि यहां हिरो द्धारा विलेन की पिटाई या फिर बसंती के न नाचने पर लोकल गालियां भी सब लोग खूब बक लेते थे और ऊपर की क्‍लॉस में तो मैनर के साथ बैठना पड़ता था। कोई भी बसंती न नाची तो लोग कहते थे साली पैसे दिए हैं हॉल वाले को कैसे नाच नहीं दिखाएगी...अपने खसम के सामने नाचेगी तो फिर हमारे सामने नाचने में क्‍यों नखरे लगा रही है। देख 1.60 रुपए का टिकट लिया है। खैर! अब तो सिनेमा हॉलों की शक्‍ल ही बदल गई और आ गए मल्‍टीप्‍लैक्‍स जहां टिकट से ज्‍यादा खाना और पानी महंगा है लेकिन बढ़ते जमाने में इनकी मांग इतनी ज्‍यादा बढ़ रही है कि कोई शहर, कस्‍बा इनसे अछूता नहीं रह रहा। ऐसे में एक कंपनी सिनेमैक्‍स इंडिया लिमिटेड का पिछले दिनों पब्लिक इश्‍यू आया था 155 रुपए प्रति शेयर पर। हालांकि ऊपर में यह 213 रुपए और नीचे में 101 रुपए जो हम पंडित जी को देते हैं वहां तक जाकर आया है। आज यह तकरीबन 120 रुपए प्रति शेयर चल रहा है। यह शेयर उन निवेशकों के लिए फायदेमंद है जो दैनिक या दो चार दिन की ट्रेडिंग में विश्‍वास करते हैं। कंपनी से जुड़े कुछ लोग भी इसमें गेम कर रहे हैं ऐसी जानकारी हम सिनेमा प्रेमियों तक गब्‍बर सिंह ने पहुंचाई है। 155 रुपए का शेयर 120 रुपए में मिल रहा है यानी डिसकाउंट में। कंपनी की योजनाओं और खबरों पर विश्‍वास करें तो यह शेयर बेहतर है लेकिन एक बात साफ कर दूं कि यह ट्रेडिंग शेयर है न कि निवेश लायक शेयर। तो हो जाइएं गौरी के साथ सिनेमा देखने को तैयार ताकि इसका मुनाफा बढ़े तो निवेशक भी ठुमके लगा सके।

March 15, 2007

दम मारो दम


सिगरेट का एक कश खींच कर मारा जाए तो अच्‍छे अच्‍छों के दिमाग को हिला देता है। लेकिन सिगरेट कंपनियों में निवेश किया जाए तो कमजोर से कमजोर निवेशक को ताकतवर बना देता है। इस उद्योग की तगड़ी कंपनी आईटीसी में यदि यह निवेश किया जाए तो फिर कहने ही क्‍या। आज यह कंपनी सिगरेट से ज्‍यादा दूसरे क्षेत्रों मसलन होटल, एपेरल संबंधी, कागज और कृषि निर्यात आदि में जो काम कर रही है, वह हर साल इसके मुनाफे को मोटा करती जा रही है। और अब आईटीसी के निवेशकों के लिए एक खुशखबरी है कि सेंट्रल सेल्‍स टैक्‍स संशोधन विधेयक संसद की स्‍टैंडिंग कमेटी के पास गया है जिससे इस बात की संभावना बढ़ गई है कि सेंट्रल सेल्‍स टैक्‍स यानी सीएसटी को चार फीसदी से कम कर तीन फीसदी करने में अब देरी होगी। इस देरी से सिगरेट पर लागू होने वाला वैट भी लेट लागू होगा। सरकार का इरादा सेंट्रल सेल्‍स टैक्‍स में होने वाली कमी की भरपाई वैट से करने का है। हालांकि, इस देरी के झमले में यह नहीं माना जाना चाहिए कि सिगरेट पर वैट लागू होने का मामला खत्‍म हो गया है। हमारा मानना है कि एक्‍साइज यानी उत्‍पाद शुल्‍क बढ़ाकर पांच फीसदी होने और वैट न होने पर वर्ष 2008 में आईटीसी की प्रति शेयर आय यानी ईपीएस 8.9 रुपए रहेगी जो 22 फीसदी का इजाफा दिखाती है। यदि एक्‍स फैक्‍टरी दाम पर 12.5 फीसदी के वैट को लागू कर लें तो यह ईपीएस 8.2 रुपए रहेगी जो 12 फीसदी की बढ़ोतरी दिखाती है। यदि 12.5 फीसदी वैट बिक्री मूल्‍य पर लगाया जाता है तो प्रति शेयर आय 7.7 रुपए रहेगी जो पांच फीसदी का इजाफा है। अभी वैट एक्‍स फैक्‍टरी दाम पर लागू होगा या बिक्री दर पर, कुछ भी साफ नहीं है। पिछले एक साल में आईटीसी के शेयर के दाम में 14 फीसदी की गिरावट आ चुकी है और सेंसेक्‍स की बढ़ोतरी से तुलना की जाए तो यह 26 फीसदी गिरा है। हम यह मान लें कि वैट 12.5 प्रतिशत बिक्री भाव पर लगेगा तो आईटीसी वर्ष 2008 में सेंसेक्‍स का 22 फीसदी प्रीमियम पर होगा। जो इसकी पिछले दस साल की औसत के अनुरुप है। आईटीसी शेयर के साथ अब तक जितना बुरा होना था, हो गया लेकिन लंबे समय में अब इसमें बड़े नुकसान की संभावना नहीं है। ऐसे में आईटीसी के शेयर हर निचले स्‍तर पर खरीदना घाटे का सौदा नहीं होगा। आईटीसी की वर्ष 2007 में शुद्ध आय 2750 करोड़ रूपए और प्रति शेयर आय 7.32 रुपए आंकी जा रही है। जबकि वर्ष 2008 में शुद्ध आय 3359 करोड़ रुपए और ईपीएस 8.94 रुपए और वर्ष 2009 में शुद्ध आय 4029 करोड़ रुपए और प्रति शेयर कमाई 10.73 रुपए रहने की उम्‍मीद है।

छोड़ो अल्‍युमिनियम का कटोरा


नेशनल अल्‍युमिनियम कंपनी लिमिटेड की आय भले ही बढ़ रही हो लेकिन अब वक्‍त आ गया है जब आप अपना लाभ बुक कर लें और इस स्‍टॉक से निकल जाएं। यहां कुछ निवेशक कह सकते हैं कि कंपनी की प्रति शेयर आय यानी ईपीएस वर्ष 2008 में 37 फीसदी और वर्ष 2009 में 35 फीसदी बढ़ती दिख रही है तो बाहर क्‍यों निकले। इस साल भी कंपनी के ईपीएस में 22 फीसदी का इजाफा होगा लेकिन अहम बात यह है कि चालू वित्‍त वर्ष की आखिरी तिमाही में इसका लाभ 13 फीसदी और वर्ष 2008 में लाभ 38 फीसदी गिरने जा रहा है। हालांकि, अल्‍युमिनियम के दाम भविष्‍य में भी बढ़ते रहेंगे लेकिन ये भाव बेहतर से दूर रहेंगे। वर्ष 2008 में अल्‍युमिनियम के दाम 11 फीसदी और वर्ष 2009 में 14 फीसदी बढ़ेंगे। वर्ष 2008 में तो इसके दाम 2232 अमरीकी डॉलर प्रति टन तक जा सकते हैं लेकिन ये दाम हाजिर दाम से 20 फीसदी कम हैं। अल्‍युमिना के दाम भी नवंबर 2006 के 220 अमरीकी डॉलर प्रति टन से बढ़कर 405 अमरीकी डॉलर प्रति टन तक पहुंच गए हैं लेकिन ये भाव सप्‍लाई बढ़ते ही टिक नहीं पाएंगे। नाल्‍को का नया अल्‍युमिना कांट्रैक्‍ट चालू वित्‍त वर्ष की चौथी तिमाही से शुरू हुआ है जो 9-11 फीसदी है जबकि यह पहले 22 फीसदी था यानी जोरदार कमी। वर्ष 2008 में अल्‍युमिना के दामों में 39 फीसदी तक की कमी आ सकती है। इस तरह नकारात्‍मक बातें निवेशकों को इसकी ओर खींच नहीं पाएगी। नाल्‍को के शेयर का दाम लंदन मेटल एक्‍सचेंज के अल्‍युमिनियम भाव का अनुसरण करता है लेकिन हमारे मत में जब अल्‍युमिनियम के दामों में गिरावट आएगी तब यह स्‍टॉक दबाव में दिखाई देगा। वर्ष 2007 में इस कंपनी की शुद्ध आय 2276 करोड़ रुपए और ईपीएस 35.34 रुपए रहने की उम्‍मीद है। वर्ष 2008 में शुद्ध आय 1406 करोड़ रुपए और वर्ष 2009 में 1111 करोड़ रूपए की शुद्ध आय होने का अनुमान है। इस तरह इन दोनों वर्षों में प्रति शेयर आय क्रमश: 21.84 रुपए व 17.25 रुपए रह जाएगी।

जादूई डिबिया माचिस की


मारुति कार जब भारत की सड़कों पर पहली बार दौड़ी तो लोगों ने इसे माचिस की डिबिया कहा। छोटी और सुंदर कार देखने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे और इसे माचिस की डिबिया की उपाधि दी गई। लेकिन आज यह डिबिया जादूई डिबिया साबित हुई है। भारतीय कार बाजार के ढांचे को बदलने के अलावा इसने अपने निवेशकों की स्थिति को भी बदला है। इसके शेयर बेचकर जहां सरकार को मोटा मुनाफा हुआ, वहीं आम निवेशक को भी इससे निराशा हाथ नहीं लगी। मारुति ने कार बाजार पर अपना कब्‍जा जमाए रखने के लिए अब पेट्रोल से डिजल पर मुड़ने में रुचि दिखाई है, जो इसके बेहतर भविष्‍य का संकेत है। मारुति के शेयरों में हर गिरावट असल में निवेशकों के लिए खरीद का मौका कहा जा सकता है। अब तक इसके शेयर में 17.8 फीसदी का करेक्‍शन आ चुका है और यह अवसर है, जब कहा जा सकता है कि यदि आप मारुति के शेयर लेना चाहते हैं तो थोड़े थोड़े शेयर लेकर जमा करते जाएं। वर्ष 2007 में कंपनी की शुद्ध आय 1551 करोड़ रुपए और प्रति शेयर आय यानी ईपीएस 53.68 रुपए रहने की आस है। वर्ष 2008 में शुद्ध आय 1859 करोड़ रुपए और ईपीएस 64.35 रुपए और वर्ष 2009 में शुद्ध आय 2144 करोड़ रुपए और ईपीएस 74.21 रुपए रहने की संभावना है। वर्ष 1993 में खुली यह कंपनी आज भी देश की सबसे बड़ी घरेलू ऑटोमोबाइल कंपनी है। पिछले पांच साल से देश में पैसेंजर व्‍हीकल की मांग 10.6 फीसदी की दर से बढ़ रही है लेकिन गत तीन सालों के रिकॉर्ड को देखें तो यह 17.3 फीसदी हो गई है। उद्योग के आंकडों पर भरोसा करें तो अगले दो साल में पैसेंजर व्‍हीकल की मांग किसी भी हालत में औसतन 15 फीसदी से नहीं घटेगी। देश में तकरीबन 500 लाख दुपहिया वाहन वाले हैं जो धीरे धीरे कार की ओर मुड़ रहे हैं। इसका लाभ सबसे ज्‍यादा मारुति को होगा और यह माना जा सकता है कि अगले दो साल में कंपनी के कारोबार में 21.6 फीसदी का इजाफा होगा। देश में डिजल कार का नया बाजार धीरे धीरे बढ़ रहा है जबकि यूरोप से तुलना की जाए तो यहां अभी यह बेहद छोटा है। भारत में डिजल कार का बाजार 18 फीसदी है। इस बढ़ते बाजार की नब्‍ज मारुति ने सही समय पर पहचानी है और अपने नए उत्‍पादों में इस पर जोर देना शुरू किया है। अब महिंद्रा एंड महिंद्रा और हुंडई भी डिजल उत्‍पादों पर निवेश बढ़ाने जा रही हैं। भारत पैसेंजर कार का आउटसोर्सिंग केंद्र भी बनता जा रहा है। हुंडई भारत में सैंट्रो कार का उत्‍पादन कर विदेश में इसे भेज रही है। मारुति का भी लक्ष्‍य वर्ष 2010 तक देश से डेढ़ लाख वाहन निर्यात करने का है। इसके लिए कंपनी ने निसान के साथ 50 हजार छोटी कारों के उत्‍पादन का करार भी किया है। इसके अलावा अन्‍य 50 हजार छोटी कार सुजूकी बेज के तहत बेचने के उम्‍मीद है।

March 14, 2007

आनंद लूटो होटल


शेयर बाजार में जिन निवेशकों ने होटल शेयरों में निवेश किया है, वे पिछले दो साल से आनंद ही तो लूट रहे हैं। यह आनंद अभी जारी ही रहेगा। मांग और आपूर्ति में चल रही कमी यानी मिसमैच का फायदा होटल उद्योग को भरपूर मिलेगा। यह उद्योग न तो घरेलू मांग को पूरा कर पा रहा है और न ही अंतरराष्‍ट्रीय जरुरत को। भारत की अर्थव्‍यवस्‍था में जिस तरह की तेजी दिख रही है और बदलाव आए हैं वे कम से कम अगले तीन चार साल तो रहेंगे और यही वजह है कि मेहमानदारी क्षेत्र में गर्मी बनी रहेगी। अगले नौ साल यानी 2006/15 तक की बात करें तो भारतीय पर्यटन उद्योग की मांग 8.8 फीसदी सालाना दर से बढ़ती रहेगी।
समूची दुनिया में भारत पर्यटन बाजार के रुप में तेजी से उभरता दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। सस्‍ती विमान सेवाएं, पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ती बुनियादी सुविधाएं और आउटसोर्सिंग के हब के रुप में उभार भारत में पर्यटकों को खींच लाने का काम कर रहे हैं। हालांकि, यह तय है कि अगले दो तीन साल तो यहां जितने कमरों की जरुरत है वह पूरी नहीं हो सकती। उद्योग जगत पर भरोसा करें तो अगले तीन सालों में एक लाख बीस हजार कमरों की जरुरत है। दिल्‍ली और एनसीआर में ही वर्ष 2010 तक राष्‍ट्रमंडल खेलों की वजह से कोई 30 हजार अतिरक्ति कमरों की मांग दिखाई दे रही है। अब यहां विदेशी पर्यटक जहां कारोबार की संभावनाओं के लिए भी आ रहे हैं, वहीं घरेलू अर्थव्‍यवस्‍था के विकास से मध्‍यम वर्गीय भारतीय की खर्च करने की क्षमता में बढ़ोतरी हुई है जिससे घरेलू पर्यटकों की संख्‍या भी तेजी से बढ़ी है। इस उद्योग की कंपनियों ईआईएच, होटल लीला वेंचर्स, रॉयल आर्चिड, कामत होटल्‍स और इंडियन होटल्‍स आदि अपने विस्‍तार पर तेजी से ध्‍यान दे रही हैं। बंगलूर, नई दिल्‍ली, मुंबई और कोलकाता में निकट भविष्‍य में कमरों की संख्‍या बढ़ने से रुम दरें ज्‍यादा नहीं बढ़ सकेंगी लेकिन हैदराबाद, पुणे और जयपुर जैसे नए शहरों में कारोबारी गतिविधियां बढ़ने से होटलों की संख्‍या बढ़ने के बावजूद कमरों के किराये की दरों में कमी नहीं होगी। कमाई धमाई की बात करें तो चालू वित्‍त वर्ष के पहले नौ महीनों यानी अप्रैल से दिसंबर 2006 तक होटल उद्योग की कुल कमाई 3147 करोड़ रुपए रही, जो अप्रैल से दिसंबर 2005 में 2644 करोड़ रुपए थी। इसी तरह शुद्ध मुनाफा 371 करोड़ रुपए की जगह 619 करोड़ रुपए पहुंच गया। ये आंकडें इंडियन होटल्‍स, ईआईएच, एशियन होटल्‍स, होटल लीला वेंचर्स, रॉयल आर्चिड, ताज जीवीके, ओरिएंट होटल्‍स, वायसरॉय होटल्‍स, सयाजी होटल्‍स, कामत होटल्‍स, जैयपी होटल और ईआईएच एसोसिएटेड के हैं।
इंडियन होटल्‍स की इस समय 21 नई परियोजनाओं पर काम चल रहा है जिनसे कमरों की संख्‍या दो हजार बढ़ेगी और पूंजीगत खर्चा आएगा 1250 करोड़ रुपए। इसी तरह लीला वेंचर्स की इस समय छह नई परियोजनाओं पर काम चल रहा है जिनसे कमरों की संख्‍या 1370 बढ़ेगी और पूंजीगत खर्चा आएगा 1260 करोड़ रुपए। ईआईएच की इस समय 12 नई परियोजनाओं पर काम चल रहा है जिनसे कमरों की संख्‍या 1762 बढ़ेगी और पूंजीगत खर्चा आएगा 1150 करोड़ रुपए। कामत होटल्‍स की इस समय 19 नई परियोजनाओं पर काम चल रहा है जिनसे कमरों की संख्‍या 1540 बढ़ेगी और पूंजीगत खर्चा आएगा 365 करोड़ रुपए। रॉयल आर्चिड की इस समय पांच नई परियोजनाओं पर काम चल रहा है जिनसे कमरों की संख्‍या 480 बढ़ेगी और पूंजीगत खर्चा आएगा 500 करोड़ रुपए। इस तरह कुल नई परियोजनाएं इन होटलों की 63 हैं और कमरों की संख्‍या बढ़ेगी 7152 एवं पूंजीगत खर्चा होगा 4330 करोड़ रुपए।

आइडिया है चोखा


कहावत है आ‍इडिया दुनिया पर शासन करते हैं....लेकिन अब टेलीकॉम की दुनिया में भारती टेली और रिलायंस कम्‍युनिकेशन के बाद पूंजी बाजार में आई कंपनी आइडिया को भविष्‍य की उन कंपनियों की सूची में शामिल किया जा सकता है जो निवेशकों के लिए वरदान बनेगी न कि बोझ। कुमार मंगलम बिड़ला ने जिस तरह अपने पिता आदित्‍य बिड़ला के औद्योगिक साम्राज्‍य को महज 28 साल की आयु में संभाला और बेहतर संचालन के जरिए जिस मुकाम पर पहुंचाया है वह सराहनीय है। यह यात्रा आगे भी इसी तरह चलती रहेगी। आ‍इडिया की बात करें तो भारत की छठी सबसे बड़ी मोबाइल ऑपरेटर कंपनी के ग्राहकों की संख्‍या और विस्‍तार में तेजी आ रही है। कंपनी ने अपने शेयर 75 रुपए प्रति शेयर पर जारी किए और बाजार में सूचीबद्ध यानी लिस्टिंग हुए 14 फीसदी प्रीमियम पर। कंपनी जिन टेलीकॉम सर्किल में काम कर रही है उनमें इसकी स्थिति देखें तो यह गुजरात में तीसरे नंबर, महाराष्‍ट्र में पहले नंबर, मध्‍य प्रदेश में दूसरे नंबर, आंध्र प्रदेश में चौथे नंबर, दिल्‍ली में पांचवें नंबर, हरियाणा में पहले नंबर, केरल में तीसरे नंबर, पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश में पहले नंबर पर है। नए सर्किल जहां आइडिया ने अभी प्रवेश किया है, उनमें हिमाचल प्रदेश, राजस्‍थान और पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में छठे नंबर पर है। इन राज्‍यों में दिल्‍ली व राजस्‍थान में सात ऑपरेटर हैं, जबकि बाकी जगह छह ऑपरेटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस तरह इस दौड़ में आइडिया लगातार अपनी बढ़त बना रही है। कंपनी जल्‍दी ही मुंबई और बिहार में भी प्रवेश करने जा रही है। हालांकि, निवेशकों से कहना है कि आइडिया के शेयर का भाव जब भी 105 रुपए और इसके बाद लगातार बढ़त दिखती है तो 120 रुपए पर मुनाफा जरुर वसूल लें और गिरने पर फिर से पोजीशन ली जा सकती है। इस कंपनी में किया गया निवेश घाटे का सौदा नहीं होगा।

एक अंधेरा....लाख सितारे...


काली छाया, उजली आस.....कल ही लिखा था इस ब्‍लॉग में और आज वही हुआ.....शेयर बाजार ढेर। लेकिन डरे नहीं और बेहतर कंपनियों के अपने पास रखे स्‍टॉक नहीं बेचें। जैसा कि कल ही लिखा था कि मार्च में कभी भी पांच सौ से सात सौ अंकों की गिरावट देखने को मिलेगी और इस समय बीएसई सेंसेक्‍स 400 अंक नरम चल रहा है। लेकिन याद रखें अप्रैल से शेयरों में तेजी की नई चाल शुरू होगी और विनर वही होंगे जिनके पास होंगे बेहतर कंपनियों के स्‍टॉक। याद रखें एक अंधेरा....लाख सितारे...

March 13, 2007

बेदम हुआ सीमेंट


सरकार की दखलंदाजी के बाद जब यह तय हुआ कि सीमेंट के दाम अगले एक साल तक नहीं बढ़ सकते तो इस क्षेत्र की कंपनियों में निवेश बेदम होता जा रहा है। साथ ही यदि सरकार किसी तरह की शुल्‍क कटौती करती है तो इसका लाभ भी सीमेंट उपभोक्‍ताओं को देना होगा। जहां बजट आते ही सीमेंट उत्‍पादकों ने प्रति बैग 12 रुपए बढ़ाने की घोषणा कर दी थी, वहीं अब सरकार की दखलंदाजी के बाद वे पीछे हट गए। इसे समूचे उद्योग जगत में एक नेगेटिव कदम के रुप में देखा जा रहा है, यही वजह है कि सीमेंट शेयर अब चाहकर भी नहीं बढ़ सकते, भले ही इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर को बढ़ावा दिया जाए। आम आदमी के लिए अपने घर का सपना तो पहले ही बैंकों ने ब्‍याज दरें बढ़ाकर तोड़ दिया है। सीमेंट उद्योग की इस टूटी दीवार का नतीजा यह है कि चाहे सीमेंट उत्‍पादन लागत बढ़ जाए लेकिन सीमेंट के दाम स्थिर रहेंगे जिससे इन कंपनियों का बढ़ता मुनाफा रुक जाएगा। अगले एक साल में ईंधन या माल भाड़े की दरें बढ़ती हैं तो यह इनके मुनाफे को बुरी तरह कम करने के लिए पर्याप्‍त हैं। सीमेंट कंपनियों की बात पर भरोसा करें तो बिजली और ईंधन के साथ माल भाड़ा में ही सीमेंट के उत्‍पादन की आधी से ज्‍यादा लागत रहती है। नए वित्‍त वर्ष में 140 लाख टन सीमेंट उत्‍पादन की अतिरिक्‍त क्षमता और जुड़ने एवं निर्यात में आई सुस्‍ती से भी सीमेंट उद्योग की दशा एक साल बाद भी ठीक ढंग से नहीं सुधरेगी। यहां हम सीमेंट की मांग और आपूर्ति को देखें तो चालू वित्‍त वर्ष में सीमेंट की प्रभावी क्षमता 1597 लाख टन है जो एक अप्रैल से चालू होने वाले नए वित्‍त वर्ष में 1732 लाख टन और वर्ष 2008/09 में 2137 लाख टन पहुंच जाएगी। सीमेंट की घरेलू खपत में सालाना दस फीसदी का इजाफा मान लें तो चालू वित्‍त वर्ष में यह 1491 लाख टन, अगले वित्‍त वर्ष में 1641 लाख टन और वर्ष 2008/09 में 1805 लाख टन रह सकती है। वर्ष 2008/09 में राष्‍ट्रमंडल खेलों के लिए पांच लाख टन और स्‍पेशल इकॉनामिक जोन यानी सेज के लिए 20 लाख टन सीमेंट की मांग निकल सकती है। निर्यात मांग भी देख लें इस वित्‍त वर्ष में यह 90 लाख टन, अगले वित्‍त वर्ष में 60 लाख टन और 2008/09 में भी 60 लाख टन रहने की संभावना है। सीमेंट उद्योग चालू वित्‍त वर्ष में जहां अपनी कुल उत्‍पादन क्षमता का 94.6 फीसदी हिस्सा उपयोग कर रहा है, वही यह अगले वित्‍त वर्ष में गिरकर 93.4 फीसदी और इसके बाद 83.4 फीसदी रह जाएगा। यानी अब सीमेंट शेयरों में निवेश को लेकर ज्‍यादा उत्‍साह में न आइए। बल्कि ऐसी कंपनियों को चुनें या उद्योग में निवेश करें जहां सरकार की इस तरह दखलंदाजी न हो।

काली छाया, उजली आस


भारतीय शेयर बाजारों में चल रहा उतार चढ़ाव का दौर अभी पूरी तरह नहीं थमेगा। हालांकि, ट्रेडिंग के लिए इस तरह के दौर जरुरी हैं और लोग इसमें ही पैसा बना पाते हैं। लेकिन बाजार की बड़ी अनिश्चितता निवेशकों को अंदर तक खूब हिला भी जाती है, जो अच्‍छे अच्‍छे निवेशक के मनोबल को तोड़ देती है लेकिन धैर्य और शांति इस मनोबल को कायम करने और निवेश पर रिटर्न दिलाने के लिए मजबूत कारक होते हैं। शेयर बाजार में चल रहा मौजूदा उतार चढ़ाव का दौर अभी नहीं थमेगा बल्कि इस महीने में किसी भी समय बीएसई इंडेक्‍स में पांच सौ से सात सौ अंकों की गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि यह गिरावट जल्‍दी ही तेजी में बदलती देख सकेंगे और अप्रैल से शेयर बाजारों में तेजी का दौर शुरू होगा। इस वर्ष के आखिर तक बीएसई सेंसेक्‍स यदि 17500 अंक को छू जाए तो अचरज नहीं होना चाहिए और अगले साल दिवाली से दिसंबर तक यह 25 हजार अंक पर निश्चित रुप से पहुंचेगा। बाजार की मौजूदा दशा में कई लोगों के गले यह आंकडे उतर नहीं पा रहे हैं लेकिन चार अंकों से पांच अंक तक पहुंचते पहुंचते जो लोग निराशा के सुर अलाप रहे थे, वे इसी सेंसेक्‍स के 14 हजार आते आते पूरी तरह चुप हो गए। इस साल निफ्टी भी पांच हजार अंक को छू लेगा। काली छाया में आपको बेहतर स्‍टॉक खरीदने का मौका भी मिलता है और ऐसे शेयर खरीद कर उजली आस बनाए रखें और बेहतर मुनाफा काट लें।

निवेश के लंबे चौड़े गणित में जो निवेशक नहीं पड़ना चाहते उनके लिए ऐसी उजली आस जो कंपनियां लेकर आएगी वे है :
एनटीपीसी
गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट
आईडीएफसी
पेट्रोनेट एलएनजी
पावर फाइनेंस कार्पोरेशन
पावर ट्रेडिंग कंपनी (पीटीसी)

March 12, 2007

हम साथ-साथ हैं


वाह! मनी....शेयर बाजार में निवेश करने वाले मित्रों के लिए बना यह हिंदी ब्‍लॉग जल्‍दी ही और सामग्री परोसेगा। इस ब्‍लॉग के माध्‍यम से हम चाहते हैं कि देश व समाज आर्थिक उन्‍नति की ओर बढ़े, लोग मालदार बने। इस ब्‍लॉग पर यदि आप भी अपनी कोई निवेश कहानी को जगह दिलाना चाहते हैं तो हमें जरुर भेजें। शेयर बाजार से जुड़ी कोई ऐतिहासिक बात या पूछताछ भी आप हमें भेज सकते हैं। कोशिश करें कि आपकी बात हिंदी के मंगल फोंट में हो, लेकिन ऐसा आपके लिए संभव न हो तो अंग्रेजी या देवनागरी में भी अपनी रचना भेज सकते हैं, हमारे ई मेल पते पर। kamaljalaj@gmail.com

पैसा कमाने का सही समय !


शेयर बाजार के सभी मित्रों को नमस्‍ते। शेयर बाजार में इस समय तेजी और मंदी का जो दौर चल रहा है, हालांकि उसे अनेक निवेशक ठीक नहीं मान रहे हैं। लेकिन ट्रेडिंग के लिए इस तरह की दौर चलना बेहतर रहता है। ऐसे दौर को ठीक से समझने वाले निवेशक खासा पैसा कमा सकते हैं। हर निचले लेवल पर खरीदें और ऊपरी स्‍तर पर बेचकर मुनाफा बटोरने का यह बेहतर समय है। आज से शुरू हो रहे नए सप्‍ताह के लिए ये शेयर फायदेमंद हो सकते हैं:

टिस्‍को
मारुति उद्योग
एचडीएफसी बैंक
गुजरात मिनरल
एसकेएफ इंडिया
टोरेंट केबल
आइडिया सेलुलर
अलस्‍थॉम प्रोजेक्‍टस
सेल
रैनबक्‍सी

March 05, 2007

शांत रहे.....बाजार तो बढ़ेगा ही


अमरीकी शेयर बाजार में जिस तरह का इनसाइडर ट्रेडिंग का मसला सामने आया है, उससे दुनिया भर के शेयर बाजारों को गिरावट तो आनी ही थी। भारतीय शेयर बाजार में भी तगड़ी गिरावट अभी थमी नहीं है, लेकिन बीएसई सेंसेक्‍स को 12400 अंक पर स्‍पोर्ट मिल सकता है लेकिन कुछ लोगों की राय में यह स्‍पोर्ट 11800 के स्‍तर पर मिलेगा। खैर, चाहे जो हो। मेरी नजर में शेयर बाजारों में फिर से गर्मी का दौर मई से शुरू होगा, जब मानसून भारत में दस्‍तक दे रहा होगा। इस समय सबसे पहले शांत रहे और उन बेस्‍ट स्‍टॉक पर नजर रखें जो काफी सस्‍ते मिल रहे हैं। इन शेयरों की खरीददारी तभी करें जब बाजार बॉटम ऑउट हो जाए। यह खरीद भी छोटे छोटे ऑर्डर के माध्‍यम से करें। यानी किसी कंपनी के पांच सौ शेयर खरीदने हो तो पचास पचास शेयर के लॉट में ही खरीद करें। याद रखें कि जो शांत और धैर्यवान होता है, जीत उसी की होती है, जल्‍दबाज की नहीं। बीएसई सेंसेक्‍स आपको वर्ष 2008 की दिवाली के बाद 25 हजार के आसपास दिखाई दे तो ताज्जुब नहीं होना चाहिए, लेकिन इस मुकाम पर पहुंचने से पहले लगने वाले झटकों के लिए भी तैयार रहना होगा। आपसे अगली मुलाकात 12 मार्च को होगी.....तब तक के लिए बॉय बॉय। बेस्‍ट ऑफ लक

March 03, 2007

रंग बरसे....बुरा न मानो होली है


शेयर बाजार की बजट से पहले जिस तरह फटी पड़ी है, उसमें अच्‍छे-अच्‍छों की ढंग से ठुक गई है। शेयर बाजार में ताजा गिरावट से पैसों के लिए मदमाती युवतियां और युवक दोनों अंदर तक घुस गए हैं और कब बाहर निकलेंगे खुद कामशास्‍त्र की पीली किताबें लिखने वाले भी नहीं जानते। पैसे की जवानी का मजा लूटने निकले युवक-युवतियां तो बजट से पहले ही अंदर घुस गए थे लेकिन वित्‍त मंत्री के बजट ने पैसे के पुजारियों को और अंदर घुसेड़ दिया। शेयर बाजार में मंदडि़यों का मदनोत्‍सव पूरा हो जाने पर ही शायद ये लोग बाहर निकल पाएं और उस समय उनकी स्थिति चलने फिरने लायक नहीं बचेगी। फिर से जवानी की उमंग पाने के लिए उन्‍हें श्रावण भादों तक तेजडि़यां रुपी पिया या प्रियतमा के आने का इंतजार करना पड़ेगा। इस पिया या प्रियतमा के आने पर ही मुखड़ा खिल पाएगा और मद मस्‍त जवानी मिल पाएगी। इससे पहले तो दिल्‍ली की सड़कों पर जवानी लौटाने का दम भरने वाले अस्‍पतालों के पास भी दवा नहीं है। शेयर बाजार में शादी से पहले या शादी के बाद खोई हुई जवानी लौटाने के‍ लिए इन अस्‍पतालों के पास कोई खानदानी इलाज नहीं है यह उन्‍होंने इस ब्‍लॉग को होली के दिन भांग पीने से पहले ही बता दिया है। बॉय....बॉय।

March 02, 2007

मैं एक राजा हूं

भारतीय शेयर बाजार में कोई भी आदमी साढ़े पांच घंटे में गिरधर गोपाल से फक्‍कड़ गिरधारी होने तक का सफर तय कर सकता है। या फिर फक्‍कड़ गिरधारी से नटवर नागर बन सकता है। आम बजट से पहले और बजट के दिन तक जिस तरह शेयर बाजार औंधे मुंह गिरे वह इस सफर के लिए काफी है। लेकिन एक मार्च को ऐसा क्‍या हुआ कि बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज चढ़कर बंद हुआ और आज भी ढीला है। असल में सारा खेल इस समय न्‍यूज का कम और व्‍यूज का ज्‍यादा है।

देश के शेयर बाजारों में जितनी भी कंपनियां सूचीबद्ध हैं उनमें से कोई भी कंपनी पिछले उतार चढ़ाव से अछूती शायद ही रहीं। लेकिन शेयर बाजार की इस प्रेम कहानी में एक राजा भी है। इस राजा का नाम है एनटीपीसी यानी नेशनल थर्मल पॉवर कार्पोरेशन। बीएसई सेंसेक्‍स में जब दस फीसदी की गिरावट आई थी और बाजार में कारोबार रोक दिया गया था उस दिन एनटीपीसी का शेयर कुछ समय के लिए 95 रुपए बोला गया था लेकिन उसके बाद इसने पलट कर नहीं देखा। कुछ लोग यह कहते हैं कि लंबे निवेश के लिए बढि़या स्‍टॉक कौन सा है। मेरी राय में सबसे सुरक्षित और बेहतर स्‍टॉक एनटीपीसी है, जिसमें शेयर निवेश की जानकारी न रखने वाला भी निवेश कर सकता है। हां, यह जरुर है कि यह शेयर रोज रोज की घटबढ़ से खासा प्रभावित नहीं होता लेकिन टूटता भी नहीं है।

एक समय यही स्थिति भेल में थी, जब लोग 150 रुपए से 250-300 रुपए पहुंचने पर कहते थे कि यह खूब बढ़ गया और जल्‍दी ही गिर जाएगा लेकिन देखते ही देखते भेल ने आसमान की ओर कूच कर दिया। यही स्थिति अगले दो साल में एनटीपीसी में होगी। कंपनी के कामकाज और परियोजनाओं के बारे में बखान करने की जरुरत नहीं है क्‍योंकि यही एक कंपनी ऐसी है जिसके बारे में लगभग सभी जानते हैं। अब कंपनी भेल की तरह मशीनरी और पॉवर इक्विपमेंट का भी निर्माण करेगी यानी बिजली के अलावा दो नए क्षेत्र, जो इसकी स्थिति ही बदल देंगे। आज तकरीबन 140-142 रुपए प्रति शेयर मिल रहा एनटीपीसी ही आपको अगले दो साल में गिरधर गोपाल तक का सफर तय करा सकता है। यह मजाक नहीं है...क्‍योंकि मजाक के लिए इस ब्‍लॉग का जन्‍म भी नहीं हुआ है।

March 01, 2007

भैया ! यह दीवार टूटती क्‍यों नहीं

देखो भाई क्‍या कह रहा है...आओ अपने बीच की इस दीवार को गिरा देते हैं....भैया यह दीवार टूटती क्‍यों नहीं....टूटेगी कैसे......सीमेंट से जो बनी है। लेकिन लगता है कि केंद्र सरकार सीमेंट पर उत्‍पाद शुल्‍क यानी एक्‍साइज डयूटी बढ़ाकर बड़ी सीमेंट कंपनियों और आम उपभोक्‍ता का बेड़ा गर्क करना चाहती है। सरकार यह मानती है कि इस शुल्‍क को बढ़ाने से सीमेंट सस्‍ती होगी। लेकिन सच यह है कि इन बड़ी कंपनियां की हालत जहां खराब होगी, वहीं छोटी छोटी सीमेंट कंपनियों की पौ बारह हो जाएगी। छोटी कंपनियां कुछ पैसा बिल से और कुछ बगैर बिल लेकर अपने और खरीदने वाले के लिए रास्‍ते आसान कर लेगी। सरकार को कुछ पता भी नहीं चलेगा यानी सीधे सीधे खेल खत्‍म पैसा हजम। सीमेंट पर उत्‍पाद शुल्‍क बढ़ाकर सरकार ने बिल्‍डरों की तो चांदी ही कर दी। अब बिल्‍डर सीमेंट महंगी होने का बहाना कर मकान का सपना रखने वालों को खूब चूना लगा लेंगे वहीं छोटी छोटी कंपनियों से सीमेंट खरीद कर पैसे का घालमेल भी कर लेंगे। साथ ही बड़ी परियोजनाओं की लागत बढ़ने से निवेशक भी ढीले पड़ जाएंगे।

सरकार ने रिटेल में 190 रुपए प्रति बैग (50किलो) से ज्‍यादा भाव पर बिकने वाली सीमेंट पर उत्‍पाद शुल्‍क 50 फीसदी बढ़ा दिया है। सीमेंट उत्‍पादक और उपभोक्‍ता दोनों मानते हैं कि यह फैसला ठीक नहीं है क्‍योंकि इस समय सीमेंट पर प्रति टन चार सौ रुपए उत्‍पाद शुल्‍क लगता है लेकिन पी चिदम्‍बरम ने जो घोषणा की है उसके तहत यह 350 रुपए होगा, यदि सीमेंट का दाम खुदरा में 190 रुपए प्रति बैग से कम है तो। अन्‍यथा यह डयूटी प्रति टन छह सौ रुपए देनी होगी। सीमेंट कंपनियां कहती हैं कि अब इतना भारी भरकम शुल्‍क देने से अच्‍छा है सीमेंट की कालाबाजारी। यदि सीमेंट के मौजूदा भावों पर नजर डाली जाए तो देश भर में इसका औसत भाव प्रति बैग दो सौ रुपए है। लेकिन मुंबई जैसे तगड़ी मांग वाले बाजारों में यह 225-250 रुपए प्रति बैग तक बिकती है। सही स्थिति यह है कि रिटेल में सीमेंट 190 रुपए प्रति बैग से ज्‍यादा कीमत पर बिकती है। ऐसे में अब प्रति बैग 12 रुपए अधिक देने होंगे। हां, साउथ के कुछ छोटे सीमेंट प्‍लांट ही इसे 190 रुपए प्रति बैग पर बेच सकते हैं, ब‍ड़े नहीं। है ना, साउथ के भैया का कमाल !