Monday, April 30, 2007
स्मॉल और मिड कैप शेयरों में तेजी
Sunday, April 22, 2007
मानसून बनाएगा मालामाल
हमने जैसा कि आपको पहले बताया था कि अब शुरू होगा खतरनाक खेल...के तहत अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में एफआईआई और हैज फंडों ने मिलकर तेजी का गेम शुरू कर दिया है। चीन की विकास दर 11.1 फीसदी, जिसे ओवरहीटेड माना गया है और इससे ब्याज दरें बढ़ने को नजरअंदाज कर जिस तरह तेजी के रथ पर दुनिया सवार हुई है वह एक खेल ही है। एफआईआई और हैज फंडों ने हाल में भारत को काफी आकर्षित वेल्युएशन पर मिल रहे शेयरों की सूची दिखाकर शेयर बाजार को उठाने का काम किया है। क्रूड ऑयल के भाव बढ़ने की शुरूआत के बावजूद अमरीकी कंपनियां बेहतर कार्य परिणाम के साथ निवेशकों के बढ़े मनोबल से शेयर बाजार को चमकाने का काम किया जा रहा है। निवेशकों से हम कहना चाहेंगे कि शेयर बाजार में आ रही तेजी का लाभ जरुर उठाएं लेकिन अपनी पोजीशन को लाभ समेटते हुए सीमित रखें। बेहद लंबे समय के निवेश या अधिक लालच के बजाय मुनाफे पर ध्यान दें। यहां एक बात ध्यान रखें कि दीर्घकालिक निवेश के शेयर अलग होते हैं और कारोबार के अलग, जिनसे आप हर दिन, हर सप्ताह या हर पखवाड़े में मुनाफा बटोरकर अपने बैंक खाते को बेहतर बना सकते हैं।
23 अप्रैल से शुरू हो रहे नए सप्ताह के आखिर से खिलाड़ी छुट्टियों के लिए तैयार रहेंगे। 28 अप्रैल को शनिवार, 29 अप्रैल को रविवार है। जबकि मंगलवार 1 मई को महाराष्ट्र दिवस/लेबर डे और बुधवार 2 मई को बुध जयंति के उपलक्ष में शेयर बाजार बंद रहेगा। इन छुट्टियों को देखते हुए निवेशकों को राय दी जाती है कि वे सावधानी जरुर बरतें क्योंकि बड़े खिलाड़ी लंबी छुट्टियों के दौरान पैसा निवेश करने से बचते हैं। हालांकि यहां हम अपनी बात फिर से दोहरा रहे हैं कि इस साल के आखिर तक बीएसई का सेंसेक्स 17 हजार अंक को पार कर जाएगा। आर्थिक माहौल बेहतर है। लेकिन बेहतर स्टॉक में निवेश करने वाले ही विजेता होंगे, फ्युचर एंड ऑप्शन खेलने वालों को एक बार फिर बड़ा नुकसान हो सकता है। ये निवेशक पहले मई/जून 2006 और फरवरी/मार्च 2007 में अपने हाथ जला चुके हैं।
ये हैं अगले हीरो :
आर्टसन इंजीनियरिंग
जिंदल स्टील
लैनेक्स एबीएस
टाटा पावर
सुब्रोस
यस बैंक
मारुति उद्योग
एचडीएफसी
रिलायंस इंडस्ट्रीज
रिलायंस एनर्जी
क्रिसिल
एडॉर फोनटेक
ओएनजीसी
Wednesday, April 18, 2007
भविष्य का सितारा आदित्य बिड़ला नुवो
टेलीकॉम, बीमा और आईटी/बीपीओ जैसे तेजी से बढ़ रहे तीन क्षेत्रों से जुड़ी कंपनी आदित्य बिड़ला नुवो को भविष्य की बेहतर कंपनी कहा जा सकता है और मौजूदा भाव स्तर पर इसमें ताजा निवेश किया जा सकता है। इस कंपनी के पास आदित्य बिड़ला समूह की हाल में सूचीबद्ध हुई कंपनी आइडिया सेलुलर की 31.8 फीसदी इक्विटी है जो आगे चलकर इस कंपनी के वेल्युएशन को बढ़ाएगी। आइडिया सेलुलर का आदित्य बिड़ला नुवो की मौजूदा बाजार कीमत में 70 फीसदी हिस्सेदारी है। तकरीबन 140 लाख ग्राहक और 11 फीसदी बाजार भागीदारी के साथ आइडिया बेहतर स्थिति में है। आइडिया के पूंजीकरण में विस्तार के साथ साल दर साल बढ़ोतरी होती जाएगी। ग्यारह सर्किल में से सात में जहां कंपनी के पास ओर्जिनल लाइसेंस है, बाजार पर मजबूत पकड़ है। इन सर्किलों में हरियाणा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गुजरात और पश्चिमी उत्तर प्रदेश शामिल है। इरिक्सन के साथ जीएसएम के विस्तार के लिए हाल के तीन वर्षीय करार और आईबीएम के साथ आइडिया के कारोबार प्रोसेस्स के ट्रांसफोर्म और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ावे के लिए दस वर्षीय करार से कंपनी को काफी लाभ होगा। कंपनी मुंबई और बिहार में अपनी सेवाओं के चालू हो जाने के बाद शेष दस सर्किलों के लिए आवेदन करेगी जिससे यह पान इंडिया प्लेयर बन जाएगी। बिड़ला सन लाइफ में आदित्य बिड़ला नुवो के पास 74 फीसदी हिस्सेदारी है। जो बाजार मूल्य का दस फीसदी है। हालांकि, बीमा संचालन अभी घाटे का कार्य है। कंपनी ने नई शाखाएं खोलने के लिए निवेश शुरू कर दिया है, कंपनी अपने एजेंसी नेटवर्क को बढ़ाने व नए उत्पाद लाने पर जोर दे रही है। कंपनी का बीपीओ वेंचर आने वाले वर्षों में बेहतर रिटर्न देगा। आदित्य बिड़ला नुवो की नए क्षेत्रों के अलावा रेयान, टेक्सटाइल, फर्टीलाइजर, कार्बन ब्लैक और इंसुलेटर्स में उपस्थिति है जो इसके नकद प्रवाह में बढ़ोतरी कर रहे हैं। आदित्य बिड़ला नुवो का शेयर 18 अप्रैल को 1091 रुपए पर बंद हुआ है। पिछले 52 सप्ताह में यह ऊपर में 1498 रुपए और नीचे में 500 रुपए रहा। मौजूदा स्तर पर निवेश लाभदायी रह सकता है।
Monday, April 16, 2007
दलाल स्ट्रीट में लौटी रौनक
Saturday, April 14, 2007
शेयर बाजार केवल फायदे के सौदों के लिए है....
अमरीकी निवेशक बर्नार्ड बारुक का कहना है कि शेयर बाजार केवल फायदे के सौदे करने की जगह है न कि घाटे का। उन्होंने अपनी पुस्तक में लिखा है कि एक नियम गांठ बांध कर रखों कि शेयर बाजार में कभी नुकसान नहीं करना। यानी केवल लाभ कमाने के लिए ही शेयर बाजार में कदम रखें। अब जरा यह सोचिए कि ऐसा कोई निवेशक होगा, जो शेयर बाजार में घाटा खाने के लिए जाता होगा।
बारुक के नियम में यह रहस्य छिपा है कि कोई भी सौदा करने से पहले पूरा रिसर्च करें फिर निवेश। यानी उठने वाले एक भी गलत कदम को रोक लेने का अर्थ है नुकसान को रोक लेना। कई लोग इस पर कह सकते हैं कि जो शेयर बाजार में खूब कमाते हैं या घाटा नहीं खाते, ऐसे लोग मुंह में सोने का चम्मच लेकर पैदा होते हैं। लेकिन मैं आपको बता दूं कि ऐसा नहीं होता। एक आदमी कहां कहां निवेश कर सकता है, वह गणित इस दुनिया में आकर ही सीखा जा सकता है। लेकिन बड़ा तबका यह नहीं देखता कि वह कहां निवेश कर रहा है। या सुनी सुनाई सूचनाओं के आधार पर निवेश किया जा रहा है या फिर किसी के पीछे पीछे।
सही निवेशक हमेशा अपना रास्ता खुद बनाते हैं और खूब होमवर्क करते हैं। निवेश करने वाली हर जगह और हर कंपनी के बारे में इतना कुछ मुंह जबानी याद रखते हैं जितना शायद उस कंपनी का कोई निदेशक भी याद नहीं रख पाता होगा। लेकिन हर निवेशक पैसा तो चाहता है लेकिन लिखना पढ़ना और सूचनाएं जुटाने से बचना चाहता है। वह चाहता है कि सूचनाएं जुटाने की मेहनत कोई और करे, हम केवल मुनाफा काटें। लोग बड़े बड़े निवेशकों के बेचारे ड्राइवरों के पीछे पड़े रहते हैं कि सेठ जी फोन पर किस शेयर के बारे में बात कर रहे थे। ड्राइवर ने कुछ सुना और कुछ नहीं.....जो बताया लोग दौड़ पड़े। अरे सोचो जरा यदि ड्राइवर इतना जानता तो वह खुद सेठ बनकर एक ड्राइवर नहीं रख लेता।
एक किस्सा बताता हूं.....एक टीवी चैनल ने एक बार बड़े और प्रसिद्ध निवेशक राकेश झुनझूनुवाला से पूछा कि लोग आपके ड्राइवर को पकड़ते हैं कि किस शेयर में पैसा लगाएं...उन्होंने कहा तो ड्राइवर से पूछकर निवेश करने वालों को आप पकड़ों और बताओं उनमें से कितने राकेश बने हैं। कमल शर्मा को स्वर्ग जाना है तो पहले स्वर्गीय बनना होगा। कहने का मतबल है कि यदि बढि़या निवेशक बनना है और जमकर कमाना है तो खूब सूचनाएं जुटानी होगी, उनके सही अर्थ भी निकालने होंगे। इन खबरों का अल्प समय, मध्यम समय और दीर्घकाल में क्या असर पड़ेगा, यह भी विश्लेषण करना होगा। इटली में जन्में और अमरीका में जाकर बसे निवेशक बर्नार्ड बारुक शायद यही कहना चाहते हैं कि खुद मेहनत करो। आप जरा सोचिए जिसने 20 साल पहले अंबालाल साराभाई और बजाज ऑटो के शेयर खरीदे थे उनमें अंबालाल साराभाई के शेयरों की वेल्यू को कोई अता पता नहीं, जबकि बजाज ऑटो आज किस जगह खड़ा है सभी को पता है। धीरुभाई अंबानी का कहना था कि सूचना पाने के लिए कोई भी कीमत चुकानी पड़े तो हिचके नहीं।
Friday, April 13, 2007
गौरी तो सिनेमा देखने में बिजी है साब...
आइडिया चल निकला...102 रुपए पर
Thursday, April 12, 2007
व्हर्लपूल होगा तुरुप का पत्ता
व्हर्लपूल इंडिया लिमिटेड का शेयर आने वाले दिनों में तुरुप का पत्ता निकले तो अचरज नहीं होगा उन निवेशकों को जो इस समय इसे अपने डिमैट खातों में जमा कर रहे हैं। आज यह शेयर 28.45 रुपए पर बिक रहा है और केवल मुंबई शेयर बाजार यानी बीएसई में सूचीबद्ध है। बीएसई में इसका नंबर है 500238 और 52 सप्ताह में यह ऊपर में 44.80 रुपए और नीचे में 20.60 रुपए था। मेरे अनुमान के मुताबिक व्हर्लपूल इंडिया के शेयर का भाव अगले एक साल में 60-65 रुपए रहना चाहिए। इसे निवेशक 23 से 28 रुपए के बीच जमा कर सकते हैं या ट्रेड भी कर सकते हैं। व्हर्लपूल इंडिया ने अगले 18 महीनों में 200 लाख डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है जिसके तहत यह कंपनी भारत में अपनी उत्पादन क्षमताओं में जोरदार इजाफा करेगी। इसकी मूल अमरीकी कंपनी यह मानती है कि भारत में उसके लिए खूब संभावनाएं हैं। कंपनी ने कुछ वर्ष बाद ऑपरेटिंग लाभ कमाया है, चालू वित्त वर्ष 2007-08 में शुद्ध लाभ कमाने की उम्मीद बांधी है। अप्रैल से दिसंबर 2006 के नौ महीनों में कंपनी ने ऑपरेटिंग लाभ से 44.21 करोड़ रुपए कमाए जबकि पिछली समान अवधि में यह लाभ केवल 2.18 करोड़ रुपए था। कंपनी का कुल नुकसान 104.8 करोड़ रुपए है जो बेहतर कामकाज से जल्दी ही खत्म हो जाएगा। इस साल कंपनी किचन माडयूलर भी बाजार में उतारेगी। व्हर्लपूल इंडिया के शेयरों का 82.33 हिस्सा प्रमोटरों और उनके साथियों के पास है, जबकि आम जनता के पास केवल 17.67 फीसदी शेयर हैं। अमरीकी बाजार में राज कर रही इस कंपनी की इच्छा भारतीय बाजार में भी छा जाने की है, निवेशक भी यही चाहते हैं तभी तो उनके बैंक खातों में लक्ष्मी होगी।
Wednesday, April 11, 2007
प्रतिभा में है ढ़ेर सारी प्रतिभा
अमृतसर और अहमदाबाद हवाई अड्डों की विकास परियोजनाओं पर काम कर रही प्रतिभा इंडस्ट्रीज आने वाले समय में शेयर बाजार की एक बेहतर कंपनी साबित हो तो अचरज नहीं होना चाहिए। आम बजट के बाद हालांकि इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के शेयरों पर सीधा दांव लगाने से निवेशक हिचक रहे हैं लेकिन इस क्षेत्र की अनेक कपंनियों के शेयर घटे भावों पर लेने जैसे दिख रहे हैं। इन्हीं कंपनियों में से एक छोटी कंसट्रक्शन कंपनी प्रतिभा इंडस्ट्रीज है। कंपनी के पास 1700 करोड़ रूपए के ऑर्डर हैं। कंपनी के पास जो परियोजनाएं हैं उनका औसत आकार 10-20 करोड़ रूपए से 100 करोड़ रूपए है। कंपनी ने हाल में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी टनलिंग कंपनी ओस्तु स्तेतिन ऑफ आस्ट्रिया के साथ करार किया है। इस करार से प्रतिभा इंडस्ट्रीज को शहरी इलाकों में भूमिगत टनलिंग परियोजनाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।
कंपनी पानी से जुड़ी परियोजनाओं पर गहराई से ध्यान दे रही है। चालू वित्त वर्ष के आम बजट में वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास ध्यान दिए जाने से कंपनी को बेहतर विकास होने की उम्मीद है। प्रतिभा इंडस्ट्रीज की लगभग 60 फीसदी आय इस समय महाराष्ट्र राज्य से आ रही है। कंपनी अब राजस्थान, मध्य प्रदेश और अन्य जगहों पर पानी पाइप लाइनें बिछाने की परियोजनाएं हासिल कर रही हैं। राजस्थान में कंपनी को 136 किलोमीटर पानी परिवहन की परियोजना मिली है। राजस्थान सरकार अगले तीन वर्षों में से 12 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा राशि इस तरह की परियोजनाओं पर खर्च करेगी। कंपनी ने मुंबई में भी 65 करोड़ रुपए की पानी आपूर्ति परियोजना हासिल की है, जहां केवल एक कंपनी हिंदुस्तान कंसट्रक्शन से उसकी प्रतिस्पर्धा थी।
देश में 44 नए हवाई अड्डों का फिर से विकास करने की योजना है। कंपनी को अमृतसर और अहमदाबाद हवाई अड्डों के विकास की परियोजनाएं मिली हैं। अमृतसर में उसका सहयोगी यूनिटेक है और इस परियोजना की लागत 67 करोड़ रूपए है। अहमदाबाद परियोजना की लागत 133 करोड़ रूपए है और इसकी सहयोगी है आईटीडी सीमेंटेशन।
कंपनी सॉ स्पिरल पाइप्स के उत्पादन से भी जुड़ी हुई है। ये पाइप उपभोक्ता उद्योग ऑयल व गैस को सप्लाई होंगे। कंपनी 81 करोड़ रुपए खर्च कर 92 हजार टन की क्षमता एक साल में खड़ी करेगी। अगले तीन सालों में इस परियोजना के पूरी तरह चालू हो जाने की उम्मीद है। हमारे देश में तेल और गैस के परिवहन के लिए पाइप लाइन बिछाने की जोरदार मांग है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, नेशनल गैस पाइप लाइन ग्रिड और गेल तेल व गैस की पाइप लाइन बिछाने में बड़े निवेश कर रही हैं। इसके अलावा पानी के वितरण के लिए भी पाइप लाइनें बिछाई जा रही हैं। सॉ पाइप से कंपनी को वर्ष 2008 में 160 करोड़ रुपए की आय होगी और वर्ष 2009 में 60 फीसदी क्षमता के साथ 240 करोड़ रुपए की कमाई होगी।
कंपनी को वर्ष 2007 में 310 करोड़ रुपए और वर्ष 2008 में 610 करोड़ रुपए की कमाई होने की आस है। इस वर्ष शुद्ध लाभ 17.98 करोड़ रुपए और अगले वर्ष 36.60 करोड़ रुपए रहने की संभावना है। प्रति शेयर आय यानी ईपीएस वर्ष 2007 में 12.59 रुपए और वर्ष 2008 में 25.63 रुपए रहने की आस है। इस समय कंपनी की आय में पानी परियोजनाओं का हिस्सा 82 फीसदी, सड़क परियोजनाओं की भागीदारी 10 फीसदी और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर का योगदान आठ फीसदी है। बीएसई में यह शेयर इस समय 168 रुपए चल रहा है जो आज नीचे में 167 रुपए और ऊपर में 179 रुपए था। पिछले 52 सप्ताह में प्रतिभा इंडस्ट्रीज का शेयर नीचे में 132 रुपए और ऊपर में 392 रुपए बिका था।
Tuesday, April 10, 2007
डीसीबी इज द बेस्ट
डेवलपमेंट क्रेडिट बैंक यानी डीसीबी का शेयर इंट्रा डे और शार्ट टर्म कारोबार के लिए बेहतर माना जा रहा है। दलाल स्ट्रीट में चल रही चर्चा पर भरोसा करें तो डीसीबी जल्दी ही 80 रुपए प्रति शेयर तक पहुंच जाएगा जो इस समय 70 रुपए से अधिक पर चल रहा है। आज यह नीचे में 66 रुपए था। पिछले 52 सप्ताह में इसका अधिकतम भाव 86 रुपए और न्यूनतम भाव 35 रुपए प्रति शेयर था।
Monday, April 09, 2007
एग्रो टेक फूड्स में मिलेगा पैसा
सनड्रॉप, क्रिस्टल और रथ वनस्पति तेल बनाने वाली और दुनिया में नंबर वन पापकॉर्न ब्रांड एसटीसी ll की कंपनी एग्रो टेक फूड्स मौजूदा भाव 80 रुपए पर निवेश के लिए अच्छा स्टॉक है। दुनिया में तीसरी बड़ी फूड कंपनी कोनाग्रा फूड्स की एग्रो टेक फूड्स में 48.3 फीसदी हिस्सेदारी है।
एग्रो टेक ब्रांडेड फूड्स और बल्क व प्रोसेस्ड कमोडिटीज के कारोबार से जुड़ी हुई हैं। कंपनी चिप्स व आटा जैसे अलाभकारी कारोबार को पहले ही बंद कर चुकी है और उन्हीं क्षेत्रों पर ध्यान दे रही है जहां सकल मार्जिन 20 फीसदी से ज्यादा हो। एग्रो टेक फूड्स पहले आईटीसी समूह की कंपनी थी। एग्रो टेक फूड्स के पास उत्पादन संबंधी कोई सुविधा नहीं है। यह असंगठित खिलाडि़यों से अपनी गुणवत्ता के अनुरुप उत्पादन करवाती है। इसलिए कंपनी को पूंजीगत खर्च या वोल्यूम बढ़ाने के लिए किसी दूसरी तरह के निवेश की जरुरत नहीं पड़ती। इस कंपनी के कुल कारोबार में सनड्रॉप का हिस्सा एक तिहाई है। इस ब्रांड के कारोबार में हर साल दस फीसदी बढ़ोतरी हो रही है। कंपनी के सकल लाभ मार्जिन में इस ब्रांड का हिस्सा 15 फीसदी है जिसे 20 फीसदी तक करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
वर्ष 1996 मे एग्रो टेक फूड्स ने अपना अरुणाचल प्रदेश स्थित मंत्रालयम् स्थित संयंत्र आईटीसी को स्लंप सेल इकाई के रुप में बेच दिया था लेकिन आयकर विभाग ने इस रुप में बेच दिया था लेकिन आयकर विभाग ने इस दावे को खारिज कर दिया और कंपनी को शार्ट टर्म कैपिटल गेन और कर लेवी के रुप में 12।87 करोड़ रुपए अदा करने पड़े। कंपनी ने यह मामला पंचाट में दायर किया और 18 दिसंबर 2006 को इसकी सुनवाई पूरी हो गई। अब यदि फैसला कंपनी के खिलाफ भी आता है तो उसे कोई पैसा अदा नहीं करना पड़ेगा क्योंकि सारी राशि पहले ही दी जा चुकी है और यदि कंपनी के पक्ष में निर्णय होता है तो उसे 12.87 करोड़ रुपए व दस साल का ब्याज मिलेगा जो उसके नकद प्रवाह को बढ़ाएगा।
एसटीसी ll ब्रांड देश में 120 से ज्यादा जगहों पर मिलता है, जहां गर्म, ताजा और स्वादिष्ट पापकॉर्न परोसा जाता है। अगले 12 महीनों में एसटीसी ll को 400 जगहों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। ये जगह देश के टॉप 14 शहर होंगे। एसटीसी ll ब्रांड का योगदान 25 करोड़ रुपए है और सकल मार्जिन में लगभग 30 फीसदी। वर्ष 2007 में एग्रो टेक फूड्स की प्रति शेयर आय यानी ईपीएस 5.3 रुपए और वर्ष 2008 में 6.6 रुपए रहने की उम्मीद है। मौजूदा 80 रुपए पर मिल रहा यह शेयर सस्ता कहा जा सकता है। पिछले 52 सप्ताह में बीएसई में इसका उच्चतम भाव 171 रुपए और निम्नतम भाव 70 रुपए था।
शेयर बाजार 13 अप्रैल से नए दौर में
भारतीय शेयर बाजार की शुरूआत आज अच्छी हुई है। इस समय सेंसेक्स दोहरा शतक लगाकर आगे खेल रहा है। लेकिन असली परीक्षा 13 अप्रैल से है, जब सॉफ्टेवयर क्षेत्र की मुख्य कंपनी इंफोसिस अपने सालाना नतीजों की घोषणा करेगी। इसके बाद हर रोज अनेक कंपनियों के कार्य परिणाम आने शुरू हो जाएंगे। इंफोसिस अपने नतीजों के अलावा गाइडेंस भी जारी करेगी जिसकी अहम् भूमिका होगी। हालांकि, इसके नेगेटिव आने के ज्यादा आसार हैं। बाजार इस मसले को पहले ही डिसकाउंट कर चुका है, इसलिए अधिक असर दिखाई नहीं देगा। लेकिन हरेक कंपनी के नतीजे शेयर बाजार की अगली चाल तय कर देंगे। मौजूदा आर्थिक माहौल में फार्मा, पॉवर और इंजीनियरिंग कंपनियों में निवेश करने वाले सर्वाधिक मुनाफे में रहेंगे। 9 से 13 अप्रैल के बीच बीएसई सेंसेक्स 12700 से 13300 के बीच घूमता रहेगा। निफ्टी 3594 से 3946 अंक के बीच रहेगा।
चीनी स्टॉक से बचें
पहले हमने कहा था कि चीनी उद्योग की कंपनियों के शेयरों में डे ट्रेडिंग की जा सकती है। लेकिन अब हम देख रहे हैं कि चीनी उद्योग के लिए फिर से नेगेटिव स्थिति खड़ी हो रही है। लंदन में व्हाइट शुगर के भाव पिछले सप्ताह 730 रुपए प्रति टन टूट गए हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश में चुनाव से पूर्व चीनी उद्योग के बफर स्टॉक सहित अन्य प्रोत्साहनों के मामले पर चुनाव आयोग ने तिरछी नजर की है। चीनी उद्योग को मिलने वाले 850 करोड़ रुपए के पैकेज को भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक टाल दिया गया है। अब इस पैकेज के बारे में निर्णय मई में होगा। जबकि, मई महीने में ब्राजील की चीनी अंतरराष्ट्रीय बाजार में आ जाएगी। ब्राजील की चीनी से भारतीय चीनी प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकती। ऐसे में चीनी शेयरों में दैनिक कारोबार करने की जो राय हमने दी थी, वह वापस ले रहे हैं। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि अब वे चीनी शेयरों में ट्रेडिंग रोक दें या ट्रेडिंग की अपनी पोजीशन खत्म कर लें। चीनी शेयरों के अलावा सीमेंट, स्टील, ऑटोमोबाइल, ऑटो एनसीलिरी, बैंक व फाइनेंस और रियॉलिटी शेयरों से भी बचें।
ये रहे हीरो
शेयर बाजार के गणित को न समझ पाने वाले निवेशकों के लिए ये रहे लांग टर्म इनवेस्टमेंट शेयर :
ग्रांइडवैल नार्टन
कार्बोरेंडम यूनिवर्सल
आईएफडीसी
पीटीसी इंडिया
रिलायंस एनर्जी
एनटीपीसी
आइडिया सेलुलर
फर्स्ट सोर्स साल्यूशंस
Saturday, April 07, 2007
हिज मास्टर वॉयस यानी चाबी वाला बाजा
ग्रामोफोन आज बीते जमाने की बात हो गई है क्योंकि अब संगीत सुनने के साधन इतनी तेजी से बदल रहे हैं कि बहुत कम लोगों को ही इसके बीते महत्व के बारे में पता है। एक जमाना था जब संगीत सुनने के लिए ग्रामोफोन के अलावा कोई दूसरा सशक्त माध्यम नहीं था। उन दिनों रेडियो पर गीत जरुर प्रसारित होते थे लेकिन संगीत का पर्याप्त आनंद लेने के लिए घर में ग्रामोफोन होना जरुरी माना जाता था। आज से लगभग 130 वर्ष पूर्व एडीसन ने ऐसी मशीन का आविष्कार किया था जिससे रिकॉर्ड की गई आवाज सुनी जा सकती थी और इस मशीन का नाम फोनोग्राफ रखा गया। उस समय थियेटरों में फोनोग्राफ खास शो में रखा जाता था। एडीसन स्वयं भी थियेटरों में हाजिर रहते थे और लोग फोनोग्राफ सुनने के लिए बैठे रहते।इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए एमिल बर्लीनर ने वर्ष 1888 में ग्रामोफोन बाजार में जारी किया। एक ही वर्ष बाद इंग्लैंड में ग्रामोफोन कंपनी की स्थापना हुई। शुरूआत में इस कंपनी के ट्रेडमार्क में एक देवदूत को लिखते हुए बताया गया। कुछ समय बाद ही इसे बदल दिया गया और ग्रामोफोन के लाउडस्पीकर के समक्ष बैठे कुत्ते का प्रतीक रखा गया। स्वयं के मालिक की आवाज सुनता यह कुत्ता हिज मास्टर वॉयस के नाम से विश्व विख्यात हो गया। इस ग्रामोफोन की एक विशेषता थी कि हरेक रिकॉर्ड को चलाते समय हैंडल घुमाकर चाबी भरनी पड़ती थी एंव स्टायलस में पिन बदलनी पड़ती। पिनों से एक्सट्रा लाउड प्राप्त होती थी जो उस युग में स्टिरियो के सबसे नजदीक था। इस ग्रामोफोन को चाबी वाला बाजा या पाली वाला बाजा कहा जाता था। ग्रामोफोन के लिए कितनी सावधानी रखनी पड़ती थी इस संबंध में भी आज शायद ही कोई अंदाज लगा सकेगा। प्रयुक्त की गई पिन एक विशेष खाने में एकत्र की जाती थीं। रिकॉर्डों को रखने के लिए विशेष बॉक्स बनाया जाता था जिसमें रिकॉर्डस खड़े रखे जाते थे।
भारत में सर्वप्रथम ग्रामोफोन कंपनी की शाखा कोलकाता में वर्ष 1901 में खुली। उस समय प्रत्येक ग्रामोफोन की खरीद पर पांच रिकॉर्डस मुफ्त मिलते थे। प्रारंभ में रिकार्ड एक ही तरफ से बज सकते थे, दूसरी तरफ ये खाली होते थे। यह रिकार्ड साढ़े तीन मिनट चलता एवं इसकी गति प्रति मिनट 78 चक्कर होती थी, अत: इसका नाम 78 आर पी एम पड़ा। तत्पश्चात अनेक नई कंपनियां इस क्षेत्र में आने लगीं। कोलंबिया, ओडियन, यंग इंडिया के रिकार्डस बाजार में जारी करने के लिए वी शांताराम ने बंबई में नेशनल ग्रामोफोन कंपनी खोली। इन रिकार्डों के विषय भी विविध होते। गीत, भजन से लेकर रविन्द्रनाथ टैगोर की कविता पाठ तक। यंग इंडिया कंपनी के रिकार्ड पर तिरंगे झंडे का प्रतीक होता एवं स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले नेताओं के भाषणों के रिकार्डस इस कंपनी की विशेषता होती थी।
इस युग में संगीत प्रेमियों के शौक भी जरा अलग प्रकार के होते थे। नाटकों के संवाद, लोकगीत एवं हास्य प्रधान कार्यक्रमों के रिकार्डस बाजार में काफी बिकते थे। ग्रामोफोन कंपनी सबसे बड़ी मानी जाती थी। इस कंपनी ने सचिन देब बर्मन और कुंदनलाल सहगल को गायक के रुप में अस्वीकार कर दिया था। आगे जाकर इस रिकार्ड कंपनी ने अपनी भूल महसूस की। फिल्मी गीत जब प्रचलन में नहीं थे तब रिकार्डिंग करते समय गायकों को ऊंची आवाज में गाना पड़ता था। उस समय धीमी आवाज पकड़ पाने वाले साधनों का अभाव था।
वर्ष 1902 में पहली हिंदुस्तानी कलाकार का रिकार्ड आया। इस गायिका का नाम था शशि मुखी देवी। वर्ष 1904 में दोनों तरफ गीत वाले रिकार्ड बाजार में आए। तब सम्भ्रांत घरों की स्त्रियां परदे में रहती थीं अत: बेहतर गायन के बावजूद रिकार्ड नहीं आ सकते थे। सी आर दास की बहिन अमला दास ने इस प्रथा को तोड़ा एवं वर्ष 1912 में अमला दास का गीत रिकार्ड हुआ। प्रारंभ में रिकार्ड पर कलाकार का नाम नहीं लिखा जाता था। गीत पूरा होने पर कलाकार अपना नाम बोलता था। कवि रविन्द्रनाथ टैगोर ने वंदेमातरम् एवं सोनार तोरी का गायन एच बोज कंपनी की रिकार्ड के लिए किया था। वर्ष 1925 में पहली बार कवि एवं संगीतकार के नाम रिकार्ड पर लिखे गए। वर्ष 1934 में पहले फिल्मी गीत की रिकार्डिंग वी शांताराम ने की। उन दिनों विशेष त्योहारों पर नए रिकॉर्ड जारी किए जाते थे। ग्रामोफोन मनोरंजन का मुख्य साधन होने के नाते विशेष महत्व था। सभी कंपनियों में बेहतर ग्रामोफोन बनाने की स्पर्धा थी। इसके बाद लोंग प्ले आई। आज भी अनेक लोग पुराने रिकार्डस एकत्र करने का शौक रखते हैं, जिनमें कोलकातावासी ही आगे हैं।





