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May 30, 2007

पैसा कमाने के गुर


दुनिया के दूसरे नंबर के अमीर वारेन बफेट के अमीर बनने के गुर हर कोई जानना चाहता है। बफेट ने ये गुर बताए अपनी कंपनी बर्कशायर हैथवे की सालाना आम बैठक में। आप भी जानिए 75 वर्षीय इस अमीर के मुद्रा मंत्र।

1. बांड की तुलना में स्‍टॉक में निवेश करना ज्‍यादा फायदेमंद होता है। उनकी नजर में अमरीका और कोरिया में आप दांव लगा सकते हैं क्‍योंकि इन दोनों देशों में तेजी रहेगी। हालांकि, अमरीकी डॉलर पर उनकी राय अच्‍छी नहीं है।
2. निवेश करने से पहले यह जानें कि जिस कंपनी में आप पैसा लगाने जा रहे हैं उसका प्रबंधन कैसा है। उसका कारोबार क्‍या है। आप जिस दाम पर शेयर खरीद या बेच रहे हैं क्‍या वह उचित भाव है। उचित कीमत को अनुभव से ही मालूम किया जा सकता है।
3. खूब पढ़ो, जमकर पढ़ो। खुद वारेन बफेट अपना 75 फीसदी समय पढ़ने में गुजारते हैं। शेयर बाजार, निवेश, अर्थव्‍यवस्‍था, राजनीति यानी सब कुछ पढ़ो और इनका विश्‍लेषण करो।
4. लंबी अवधि के लिए निवेश करो। यह अवधि वे 10/15 साल मानते हैं। वारेन बफेट के पास 1980/1981 में जारी कोका कोला के शेयर हैं तो वाशिंगटन पोस्‍ट, अमरीकन एक्‍सप्रेस के शेयर भी वे नहीं बेचते। दैनिक कारोबार को वे सही नहीं मानते।
5. शेयर या बांड ऐसी कंपनी का होना चाहिए जो अपने उद्योग या सेवा में नबंर वन हो, वह अनोखी हो, मुनाफा कमा रही हो और उसका आकार बड़ा हो।
6. बाजार में गेम्बिलिंग न करें यानी किसी बात की पक्‍की जानकारी न हो तो उस कंपनी पर इसलिए दांव न खेलें कि आपके पास पैसा है और उसे निवेश करना है। यह न सोचें कि चलो बाद में देखेंगे एक बार तो रिस्‍क ले लिया। आपको कोई चीज पता नहीं हो तो किसी से सलाह ले लें।

यहां रखें नजर

शेयर ब्रोकर कंपनी प्रभुदास लीलाधर ने सीएट, एल एंड टी, डिशमैन फार्मा और इंडियन ऑयल कार्पोरेशन को खरीदने की सिफारिश की है। इस फर्म का कहना है कि इन चार कंपनियों में किया गया निवेश निवेशकों के लिए फायदेमंद रहेगा। फिनक्विस्‍ट सिक्‍युरिटीज ने सिनेमैक्‍स इंडिया के शेयर खरीदने की सलाह दी है। शेयर बाजार के कुछ पंटरों का कहना है कि बजाज ऑटो और स्‍टर्लिंग होलीडे में जल्‍दी ही उछाल देखने को मिल सकता है।

May 29, 2007

शेयर बाजार में गिरावट की आशंका!


शेयर बाजार में पिछले चंद दिनों से शुरूआती बढ़त कारोबार बंद होते होते जिस तरह सिमटती जा रही है वह बाजार के लिए बेहतर संकेत नहीं है। यहां न तो शेयर बाजार कंसोलिडेशन हो रहा है और न ही नरम और न ही गरम। पंटर और ऑपरेटर कुछ शेयरों को ही चला रहे हैं। इनमें भी जो शेयर एक या दो दिन चलते हैं उन्‍हें ये लोग छोड़ देते हैं और दूसरे शेयरों पर सवार हो जाते हैं। इस तरह का गेम आम निवेशक के लिए फायदेमंद नहीं है। आम निवेशक अमुक शेयर में अचानक आई तेजी को समझ कर उसका लाभ लेने के लिए जब अमुक शेयर में निवेश करता है, तब तक तो ऑपरेटर और पंटर वहां से छूमंतर हो जाते हैं। कमाई केवल चंद हाथों में। निवेशक इस बात का ध्‍यान रखें कि निवेश फंड मुद्रास्‍फीति, आर्थिक विकास दर, औद्योगिक विकास गति और मानसून से जुड़ी खबरों का फायदा उठाते हैं। इन खबरों के टेलीविजन प्रसारण के साथ ही बाजार तेजी से मंदी और मंदी से तेजी की और दौड़ेगा।

हमने पहले तकनीकी विश्‍लेषण में बताया था कि शेयर बाजार में बेहतर चमक के लिए बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज के 30 शेयर आधारित सेंसेक्‍स को 14725 के अंक को पार करना होगा या इसे 13500 के ऊपर कंसोलिडेटेड होना जरुरी है। सवाल यह उठता है कि सेंसेक्‍स कब ब्रेकआउट करेगा। हमने ब्रेकआउट नहीं देखा है, बाजार की हलचल दायरेबंद देखी है। संयोग से सेंसेक्‍स अपने सभी रेसीसटेंस को पार कर जाता है और यह 14724 के स्‍तर पर बंद होता है तो तेजी का दौर जारी रहेगा और कम से कम यह 16 हजार अंक तक चला जाएगा। बाजार का महत्‍वपूर्ण उच्‍च बॉटम 13500 अंक है। जब तक सेंसेक्‍स 13500 से ऊपर रहता है तब तक हम सेंसेक्‍स के 14724 के ऊपर जाने की उम्‍मीद बनाए रख सकते हैं। लेकिन अब जो खिचड़ी पक रही है उसमें अनेक ऑपरेटर सेंसेक्‍स को पिछले उच्‍च स्‍तर के करीब ले जाकर या उसे एक बार पार कर झटके से 700/800 अंक गिराने का मूड तय कर चुके हैं। संभव है कि भारतीय शेयर बाजार जून के पहले सप्‍ताह या 10 जून के करीब गच्‍चा खा जाए। लेकिन हम यहां आपको एक सुखद खबर भी बताना चाहते हैं कि जून महीने में ये ऑपरेटर ही सेंसेक्‍स को 15 हजार के पार करने का इरादा रखते हैं। बस बाजार गच्‍चा खाता है तो आपको निचले स्‍तर पर बेहतर स्‍टॉक खरीदने का मौका न चूके और 15 हजार के पार जाने पर मुनाफा वसूली से न झिझके। ऑपरेटरों पर भरोसा करें तो आईसीआईसीआई बैंक के पब्लिक इश्‍यू से पहले फर्स्‍ट सोर्स सॉल्‍यूशंस के शेयर का दाम 120/125 रुपए के करीब पहुंच सकता है जो इस समय 84 रुपए चल रहा है, आप भी नजर रखें, नजर न लगाएं। बैंक बैलेंस बढ़ाने वाले शेयर: पावर फाइनेंस कार्पोरेशन यानी पीएफसी, फर्स्‍ट सोर्स सॉल्‍यूशंस, सिएट, नोसिल।

May 27, 2007

आईटी, चीनी और बिजली शेयरों में दौड़ेगा करंट

दुनिया भर के शेयर बाजारों में आई मजबूती की चाल भारतीय शेयर बाजार में भी देखने को मिल रही है लेकिन पिछले सप्ताह के आखिरी दिनों में औद्योगिक जायंट फंडों ने एफआईआई हैज फंडों का साथ लेकर तेजी को ब्रेक लगा दियाइस ब्रेक में वे निवेशक घबराएं हुए दिखें जो पिछले साल एफ एंड और डे ट्रेडिंग में कई बार पीट चुके थेलेकिन ऐसे निवेशक इन फंडों की चाल को समझ ही नहीं सके और अंतत: मोटा फायदा इन बड़े फंडों को ही हुआ। 28 मई से 1 जून के नए सप्ताह में 31 मई को एफ एंड का सैटलमेंट होना है जिससे यह तो तय है कि अगला सप्ताह रोमांच और थ्रीलर से भरा होगा
निवेशक इस बात का ध्यान रखें कि बड़े फंड मुद्रास्फीति, आर्थिक विकास दर, औद्योगिक विकास गति और मानसून से जुड़ी खबरों का फायदा उठाते हैंइन खबरों के टेलीविजन प्रसारण के साथ ही बाजार तेजी से मंदी और मंदी से तेजी की और दौड़ेगायदि आप गौर करें तो पता चलेगा कि पहले मानसून विभाग ने यह कहा कि केरल में मानसून 24 मई को पहुंच रहा है लेकिन बाद में इसका खंडन हुआउत्तर प्रदेश में मायावती राज में अनिल अंबानी के नोएडा स्थित सेज परियोजना को अटकाने एवं चरखी दादरी बिजली संयंत्र की जांच की हलचल, मुंबई वर्ल् ट्रेड सेंटर पर हमला और भारतीय रिजर्व बैंक द्धारा सीआरआर में आधे प्रतिशत की बढ़ोतरी की चर्चा फैलाकर बड़े खिलाडि़यों ने उन छोटे निवेशकों अपने जाल में फंसा लिया जो एफ एंड के जरिए थोड़े से पैसों के सहारे तिजोरियों को खचाखच भरने का लालच नहीं छोड़ पातेहम निवेशकों को हमेशा दी जाने वाली अपनी सलाह फिर दोहराना चाहते हैं कि एफ एंड का जुआ खेलने से बचेंपैसों को बेहतर फंडामेंटल् वाली कंपनियों में निवेश करें

आपने यह देखा होगा कि अनेक म्युच्युल फंड मिड कैप फंड लाकर बेहतर रिटर्न देते हैं तो हमारी सलाह है कि निवेशक खुद ऐसी बेहतर कंपनियों की खोज करें एवं सीधे निवेश कर ज्यादा मुनाफा कमाएंअमरीकी डॉलर एक बार फिर भारतीय रुपए की तुलना में मजबूत बनता जा रहा है और यह मजबूती आगे जारी रहेगीइस बीच, इंफोसिस को जापानी बैंक सेमिला तगड़ा ऑर्डर आईटी शेयरों में चमक ला सकता हैकेंद्र सरकार चीनी उद्योग की हालत सुधारने के लिए कई कदम उठाने पर विचार कर रही है ताकि इस उद्योग को कठिन दौर का मुकाबला करने की हिम्मत मिलेंसरकार के इस विचार को देखते हुए अब चीनी शेयरों में निवेश किया जा सकता है लेकिन फिर भी सावधानी बरतने की जरुरत हैचीनी उद्योग में यदि आप निवेश करना चाहते हैं तो बलरामपुर चीनी, रेणुका शुगर, बन्नारी अमान शुगर, पोन्नी ईरोड शुगर, अपर गेंजिस शुगर, बजाज हिंदुस्तान, राजश्री शुगर, उगार शुगर्स और त्रिवेणी इंजीनियरिंग बेहतर हैं

सप्ताह बीएसई सेंसेक् 14035 से 14640 के बीच घूमते रहने की संभावना हैनिफ्टी 4145 से 4355 के बीच रहेगाअगले सप्ताह फ्रंटरनर रहेंगे : इंफोसिस, विप्रो, सत्यम, एल एंड टी, एनटीपीसी, टाटा पावर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचपीसीएल, इंजीनियर्स इंडिया, थर्मेक्ये हैं हमारे हीरो : डिश टीवी, नेक्टर लाइफ, गुजरात अल्कलीज, बॉम्बे रेयान, लक्ष्मी इलेक्ट्रिकल कंट्रोल सिस्टम, कर्नाटक बैंक, एम्को, ट्रांसपोर्ट कार्पो, इंगरसोल रैंड और आइडिया सेलुलर

बीएसई सेंसेक्‍स को 14725 को पार करना होगा


वाह! मनी ब्‍लॉग के पाठकों के लिए यह खुशी की बात है कि आप विख्‍यात शेयर तकनीकी विश्‍लेषक श्री हितेंद्र वासुदेव के नजरिए को अब हिंदी में भी जान सकेंगे कि अगले सप्‍ताह शेयर बाजार की चाल कैसी रहेगी। यह पहला मौका और पहला मंच हैं जहां आप श्री हितेंद्र वासुदेव के कॉलम को हिंदी में पढ़ सकेंगे। श्री हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि शेयर बाजार में बेहतर चमक के लिए बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज के 30 शेयर आधारित सेंसेक्‍स को 14725 के अंक को पार करना होगा या इसे 13500 के ऊपर कंसोलिडेटेड होना जरुरी है। पिछले सप्‍ताह की समीक्षा करें तो सवाल यह उठता है कि सेंसेक्‍स कब ब्रेकआउट करेगा। हमने ब्रेकआउट नहीं देखा है लेकिन साप्‍ताहिक हलचल दायरेबंद देखने को मिली। जो लांग लेज्‍ड डोजी केंडलस्टिक की रचना कर रही है। तेजडि़यों और मंदडियों के बीच खींचतान के युद्ध में लांग लेज्‍ड डोजी यह संकेत देता है कि बाजार डांवाडोल घूम रहा है। पिछले सप्‍ताह सेंसेक्‍स 14362.63 अंक पर खुला और यह ऊपर में 14500.64 तक गया और गिरकर 14046.06 अंक आया एवं अंत में 14338.45 अंक पर बंद हुआ, जो यह बताता है कि यह सप्‍ताह दर सप्‍ताह आधार पर केवल 35 अंक बढ़ा। सेंसेक्‍स का ऊपरी स्‍तर पर 14500 और 14725 अंक पर रेसीसटेंस बना रहेगा। यह इस स्‍तर से आगे बढ़ सकता है लेकिन इसके कायम रहने के लिए यह जरुरी है कि मुनाफा वसूली या बिक्री दबाव न देखने को मिलें। इसी तरह निचले स्‍तर पर स्‍पोर्ट भी जरुरी है जो बाजार में दिखने वाली चंचलता को रोकता है। शेयर बाजार के साप्‍ताहिक रुझान को देखें तो 18 मई 2007 को यह 14303 पर बंद होने पर देखने को मिला। यह रुझान गिरकर नीचे में 13885 अंक तक देखने को मिल सकता है अथवा शुक्रवार के बंद 14093 अंक से नीचे। लेकिन यदि सेंसेक्‍स ब्रेकआउट करता है और यह 14500 अंक के ऊपर साप्‍ताहिक आधार पर बंद होता है तो इसके न केवल जोरदार ढंग से बढ़ने की उम्‍मीद है बल्कि यह नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है। संयोग से सेंसेक्‍स अपने सभी रेसीसटेंस को पार कर जाता है और यह 14724 के स्‍तर पर बंद होता है तो तेजी का दौर जारी रहेगा और कम से कम यह 16 हजार अंक तक चला जाएगा। बाजार का महत्‍वपूर्ण उच्‍च बॉटम 13500 अंक है। जब तक सेंसेक्‍स 13500 से ऊपर रहता है तब तक हम सेंसेक्‍स के 14724 के ऊपर जाने की उम्‍मीद बनाए रख सकते हैं। ऊपरी स्‍तर को पार करने से पहले हम कंसोलिडेशन देखेंगे। बीएसई ऑयल एंड गैस, बीएसई कैप गुड्स, निफ्टी जूनियर, बीएसई मेटल्‍स, सीएनएक्‍स मिड कैप, बीएसई पीएसयू पिछले 13 सप्‍ताहों से मजबूती का संकेत दे रहे हैं, जबकि गत 13 सप्‍ताह से बीएसई ऑटो और बीएसई आईटी सुस्‍ती के। चुनिंदा मिड कैप बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन स्‍मॉल कैप को अभी आगे बढ़ाना बाकी है। बीएसई स्‍मॉल कैप इंडेक्‍स कमजोर है और इसने वर्ष 2007 में वर्ष 2006 की ऊंचाई को पार नहीं किया है। बीएसई स्‍मॉल कैप इंडेक्‍स की ऊंचाई 7872 रही है। प्रमुख इंडेक्‍स की बात करें तो निफ्टी सेंसेक्‍स की तुलना में कुछ समय ऊपर रहा है। आईटी इंडेक्‍स और ऑटो इंडेक्‍स ने बाजार को कमजोर रखने में भूमिका निभाई है और इसमें सीमेंट क्षेत्र का भी योगदान है। पिछले कुछ सप्‍ताहों में रुपए के मजबूत होने से बीएसई डोलेक्‍स ने नई ऊंचाई को छूआ। सीएनएक्‍स मिड कैप और निफ्टी जूनियर में ब्रेकआउट देखने को मिला। इन दोनों सूचकांकों के शेयरों में खरीददार दिखे। सम्‍पूर्ण परिदृश्‍य में देखें तो बाजार की नब्‍ज कुछ चुनिंदा फ्रंटलाइनर शेयरों के प्रदर्शन पर टिकी हैं, जो कि काफी ढीले चल रहे हैं जिससे सेंसेक्‍स उड़ान नहीं भर पा रहा है।

ईलियट वेव काउंट की यहां समीक्षा की जा रही है जो बाजार की एक व्‍यापक तस्‍वीर पेश करते हैं :
फर्स्‍ट काउंट :
वेव 1- 2594 से 3758
वेव 2- 3758 से 2828
वेव 3- 2828 से 12671 ;
वेव 3-2828 to 12671;
इंटरनल्‍स ऑफ वेव 3
वेव i- 2904 to 3416
वेव ii- 3416 to 2904
वेव iii- 2904 to 6249
वेव iv- 6249 to 4227
वेव v- 4227 to 12671
वेव 4
वेव a -12671 to 8799
वेव b-8799 to 14723
वेव c-14723 to 12316
वेव 5- 12316 to 14500 (मौजूदा चाल प्रगति में)
इंटरनल्‍स ऑफ वेव 5
वेव 1- 12316 to 13386
वेव 2- 13386 to 12425
वेव 3- 12425 to 14384
वेव 4- 14384 to 13554
वेव 5- 13554 to 14500 (मौजूदा चाल प्रगति पर)

दूसरी ओर, वेव 4 अभी प्रगति पर है और यह एक विस्‍तारित ट्रायंगल की रचना कर रही है। यहद हम विस्‍तारित ट्रायंगल देखते हैं तब यह होगा इंटरनल्‍स ऑफ वेव 4 :
वेव a -12671 to 8799
वेव b-8799 to 14723
वेव c-14723 to 12316
वेव d- 12316 to 14500 (अभी पूरी नहीं, मौजूदा चाल प्रगति पर)

विस्‍तारित ट्रायंगल में हरेक वेव अपनी पूर्व चाल से अधिक रहेगी और सम्‍पूर्ण बढ़ोतरी से पीछे लौटेगी। यदि वेव डी की चाल शुरू होती है तो यह 14724 के टॉप को पार कर सकेगी और इसकी सम्‍पूर्ण रिस्‍क वापसी 12300 तक होगी। यदि वेव डी 14724 को पार कर जाती है और ई वेब पूर्ण होनके बाद वेब डी नीचे की ओर 12300 तक आ सकती है। एक बार ए, बी, सी, डी, ई की रचना पूरी होन पर वेव पांच के लिए नई ऊंचाई देखने को मिलने की आस है। लेकिन पांचवीं वेव विफल भी हो सकती है। वेव काउंट की पुनर्समीक्षा करने के बाद उच्‍च स्‍तर पर हुई महत्‍वपूर्ण बढ़ोतरी पर रेजीसटेंस का बने रहना चुनौती पूर्ण है। यदि तेजी 14724 पर कायम रहती है तो यह अपने पहले की तेजी को तोड़ देगी। कुल मिलाकर निवेशकों और कारोबारियों को मुनाफा वसूली के साथ नई ऊंचाई पर जाने वाले शेयरों की तलाश करते रहना चाहिए।

सप्‍ताह की रणनीति
सही निवेशक की रणनीति यही होनी चाहिए कि वह उच्‍च स्‍तर पर लगातार मुनाफा वसूली करते रहे और स्‍टॉप लॉस के साथ उन स्‍टॉक्‍स में कारोबार करें जहां बढ़त देखने को मिल रही हो। हमेशा ध्‍यान इस पर रहना चाहिए कि क्‍या घट रहा है। कमजोर शेयरों के दिन भी लौटते हैं और वे अच्‍छे रिटर्न देते हैं लेकिन उनके कार्य प्रदर्शन तक का इंतजार नहीं किया जा सकता। सवाल यह है कि क्‍या कमजोर स्‍टॉक्‍स लेने चाहिए। लेकिन सही सलाह यह है कि कमजोर स्‍टॉक्‍स को नजरअंदाज करें और हरेक तेजी पर इनमें से निकल जाएं। मजबूत स्‍टॉक्‍स में बने रहें या उनमें आशिंक मुनाफा वसूली करे ताकि आपकी लागत कम हो सके और संभावना वाले अगले स्‍टॉक्‍स की तलाश करें। निवेशक अपनी लांग पोजीशन बनाए रख सकते हैं जब तक कि सेंसेक्‍स 13500 से नीचे नहीं जाता। कठिन समय का एक ही नियम है कि मौजूदा तेजी के दौर में लंबी पोजीशन के लिए दो सप्‍ताह के निचले स्‍तर को स्टॉप लॉस के रुप में रखें। दो सप्‍ताह के निचले स्‍तर से नीचे जाने का मतलब है कि अब तेजी की उम्‍मीद नहीं। दो सप्‍ताह का निचला स्‍तर 13885 है। श्री हितेंद्र वासुदेव के पहली बार हिंदी में आए इस कॉलम पर अपनी टिप्‍पणी भेजना न भूलें।

May 24, 2007

बॉम्‍बे रेयान में करो ट्रेडिंग


शेयर बाजार में जब से एफ एंड ओ की लिस्‍ट को बढ़ाया गया है तब से शेयर बाजार में कई निवेशक खूब आनंद लूट रहे हैं। आनंद यानी पैसा और पैसा आनंद तो देता ही है। इस सूची में एक कंपनी है बॉम्‍बे रेयान। बॉम्‍बे रेयान की चाल को एक बार जिस निवेशक ने समझ लिया, वह इसमें रोजाना कारोबार करे बगैर शांत नहीं बैठ सकता। बॉम्‍बे रेयान एफ एंड ओ सूची में आने के बाद कम से कम सौ रुपए के करीब बढ़ गया है और इसमें अभी यह गति जारी रहेगी। हालांकि एक बात आपकों बता दूं कि जब यह शेयर गिरता है तो अच्‍छे अच्‍छे निवेशक हिल भी जाते हैं। इसलिए इसमें कारोबार करते समय हर लेवल पर मुनाफा बुक करते रहें। लेकिन एक बात तो यह तय है कि यह शेयर बड़े दिलवालों के लिए है और जो गति में विश्‍वास रखते हैं। बॉम्‍बे रेयान के फंडामेंटल पर हम बातचीत फिर किसी दिन करेंगे, फिलहाल तो इसमें ट्रेडिंग कर बैंक बैलेंस को बढ़ाएं, लेकिन जरा सावधानी से। कहीं ऐसा न हो जाए कि जोर का झटका लगा धीरे से......। आज यह शेयर ऊपर में तकरीबन 280 रुपए और नीचे में 234 रुपए के करीब था।

May 22, 2007

शेयरों में बुक करते रहें मुनाफा


बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई का इंडेक्‍स आज 14454 अंक पर बंद हुआ है और यह ऊपर में 14484 और नीचे में 14348 अंक था। जैसा कि हमने पहले बताया था कि शेयर बाजार का इंडेक्‍स नया इतिहास लिखने के मूड में है। यानी अपने पहले के शिखर 14723 अंक को पीछे करने की तैयारी कर चुका है और इस लेवल को पार करना अब मामूली बात है। लेकिन यह मामूली बात कई बार बड़ी बात बन गई। इतिहास इस बात का गवाह है कि ऐसा कई बार हुआ है जब मामूली बात ने ही खिलाडि़यों के पूरे गणित को उल्‍ट दिया। हालांकि, इस समय जो हवा बह रही है उसे देखते हुए लगता है कि इंडेक्‍स में एक करेक्‍शन 15 हजार अंक को छूने के बाद ही आएगा। निवेशकों को हमारी सलाह है कि शेयरों में मुनाफा बुक करते रहे और लंबे निवेश के बजाय शार्ट टर्म निवेश और डे ट्रेडिंग से इस समय पैसा बनाने में ज्‍यादा भरोसा करें ताकि आपकी कैपिटल यानी पूंजी में बढ़ोतरी हो सके। पंटर इस समय एक दिन जहां इंडेक्‍स या ए श्रेणी के शेयर पकड़ते हैं तो दूसरे दिन मिड कैप या स्‍मॉल कैप में चले जाते हैं और इस तरह खेल बदल बदलकर खेल रहे हैं। यदि आप पंटरों की चाल को नहीं समझ सकते तो इस खेल का मजा भी नहीं ले सकते। बाहर बैठकर दर्शक बनने से अच्‍छा है खेल को समझे और मुनाफा कमाकर बैंक बैलेंस बढ़ाएं। जीवन में कमाई और वह मीठे ढंग से आ रही हो तो किसे अच्‍छी नहीं लगती। लेकिन मीठा जहर न बन जाए इसलिए जरुरी है कि मुनाफा बटोरते रहें, जो इस खेल का पहला नियम है। शेयर बाजार की हकीकत यह है कि आज मुनाफा आप का है एवं कल किसी और का हो जाएगा। केरल राज्‍य में 24 मई को मानसून दस्‍तक देने जा रहा है यानी अब इस खेल का दांव मानसून से भी खेला जाएगा। मुंबई में मानसून इस साल पहले आने की बात है और ऐसा होता है तो आप यह तय मान लें कि शेयर बाजार मानसून की पहली बौछार में झूम उठेगा। मानसून अपने तय समय से एक सप्‍ताह पहले आ रहा है, जो शेयर बाजार के खिलाडि़यों और निवेशकों के लिए अच्‍छा है अन्‍यथा हर साल मई महीने में बड़े बड़े खिलाड़ी कांपते रहते हैं क्‍योंकि इतिहास गवाह है कि मई महीना शेयर बाजार के लिए बुरा महीना माना जाता है। यद्यपि 28 मई से जो नया सप्‍ताह शुरू होगा उसमें एफ एंड ओ का सैटलमेंट होगा, उस समय संभवत: बाजार में कुछ उल्‍टी स्थिति बन सकती है, लेकिन थोड़ा भी धैर्य है तो घबराएं नहीं, हां मुनाफा बटोरते रहें। नए हीरो हैं : दिवान हाउसिंग, सीएट, बॉम्‍बे रेयान, आरएनआरएल, कर्नाटक बैंक और डिश टीवी।

May 21, 2007

एबीसी बियरिंग्‍स में निवेश कर लूटो मजा

बियरिंग क्षेत्र की किसी कंपनी में निवेश करने का आपका इस समय मन कर रहा हो तो एबीसी बियरिंग्‍स से भला और कहां निवेश किया जा सकता है। एबीसी बियरिंग्‍स अपने कारोबार के पुनर्गठन, ऊंची ब्‍याज दर वाले कर्ज के पुनर्भुगतान, आक्रामक पूंजीगत खर्च योजना के बाद विकास के पथ पर है। इस कंपनी में निवेश इसलिए करना चाहिए क्‍योंकि ऑटो उद्योग की अगले पांच वर्षों में सालाना औसत विकास दर 13 फीसदी रहने का अनुमान है। इसके साथ कृषि और मैन्‍युफैक्‍चरिंग क्षेत्र में हो रहा विकास भी बियरिंग उद्योग को गति दे रहा है।

बियरिंग उद्योग का विकास तकनीकी पर निर्भर करता है और इसके लिए भारी भरकम पूंजीगत खर्चा भी करना होता है। एबीसी के संबंध जापानी कंपनी एनएसके के साथ हैं, जो कि तकनीकी की दृष्टि से दुनिया में सबसे बड़ी बियरिंग निर्माता कंपनियों में से एक है। यह सहयोग एबीसी को अपनी विस्‍तार योजना में मददगार होगा। यह कंपनी अपने विस्‍तार के तहत वर्ष 2010 तक 80 करोड़ रूपए से अपनी बियरिंग क्षमता को 65 लाख से बढ़ाकर 120 लाख बियरिंग करने जा रही है। यह विस्‍तार कंपनी व्‍यावसायिक वाहन, औद्योगिक बियरिंग सेगमेंट में अपनी बाजार हिस्‍सेदारी को बरकरार रखने के लिए कर रही है। साथ ही इससे कंपनी को अपना निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी। कंपनी ने अपनी लागत को काबू में करने के लिए पिछले तीन साल में अनेक कदम उठाए हैं और अपनी गैरउत्‍पादक इकाई लोनावाला को बंद कर इसे भरुच में शिफ्ट कर दिया है। साथ ही भारी ब्‍याज वाले कर्ज को चुकाकर अपने लाभ को बढ़ाने का कार्य किया है।

भारतीय बियरिंग उद्योग की बात करें तो यह 32 अरब रुपए का उद्योग है जिसमें लगभग 30 फीसदी हिस्‍सा आयातित बियरिंग का है। बियरिंग का उपयोग विभिन्‍न उद्योगों मसलन ऑटोमोबाइल्‍स, जनरल इंजीनियरिंग, रेलवे, इलेक्ट्रिल अप्‍लायंसेस, पम्‍पस, फैन्‍स और कृषि उपकरणों में काम आते हैं। हालांकि, ऑटोमोबाइल क्षेत्र से इस उद्योग को तकरीबन 45 फीसदी आय मिलती है। संगठित बियरिंग बाजार को असंगठित क्षेत्र से गलाकाट प्रतिस्‍पर्धा का सामना करना पड़ रहा है जिसका कुल बियरिंग बाजार पर 50 फीसदी कब्‍जा है। बियरिंग कई प्रकार के होते हैं जिनमें बॉल बियरिंग, टेपर हैड बियरिंग, सिलेंडरिकल बियरिंग, स्‍पेहयर बियरिंग और निडल बियरिंग हैं। एसकेएफ- बियरिंग जहां बॉल बियरिंग में प्रमुख हैं वहीं एबीसी- बियरिंग टैपर हैड बियरिंग, फैग- सिलेंडरिकल बियरिंग और टिमकैन कंपनी इस उद्योग की अगुआ कंपनियों में हैं। ऑटोमेटिव बियरिंग में तगड़ी प्रतिस्‍पर्धा है और फैग एवं एसकेएफ का 55 फीसदी बाजार पर कब्‍जा है, जबकि एबीसी बियरिंग्‍स का संगठित बाजार में आठ प्रतिशत हिस्‍सा है। इस कंपनी के मुख्‍य ग्राहकों में टेल्‍को, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अशोक लेलैंड, स्‍वराज मजदा, आयशर मोटर्स, टोयटो किर्लोस्‍कर मोटर्स आदि हैं।

हमारे अनुमान में कंपनी की शुद्ध बिक्री वर्ष 2007 में 182 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 23 करोड़ रुपए रहना चाहिए, जबकि वर्ष 2008 में शुद्ध बिक्री 224 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 26 करोड़ रुपए और वर्ष 2009 में शुद्ध बिक्री 257 करोड़ रुपए और शुद्ध मुनाफा 31 करोड़ रुपए रहने की आस है। वर्ष 2007 में प्रति शेयर आय यानी ईपीएस 19.6 रुपए, वर्ष 2008 में 22.3 रुपए और वर्ष 2009 में 26.8 रुपए रहने की उम्‍मीद है।

कंपनी के प्रमोटर के पास 31.3 फीसदी, भारतीय जनता के पास 32.2 फीसदी, एफआईआई के पास 27 फीसदी और बैंक, म्‍युच्‍युअल फंडों के पास 9.5 फीसदी शेयर हैं। इस कंपनी का शेयर इस समय 147 रुपए के आसपास मिल रहा है और निकट भविष्‍य में यह आपको 200 रुपए के पार दिखाई दे तो अचरज नहीं होना चाहिए। पिछले 52 सप्‍ताह में इसका अधिकतम भाव 190 रुपए और निम्‍नतम भाव 90 रुपए था।

May 20, 2007

सेफ इनवेस्‍टरों के सेफ आइटम

जीमेल पर चैट करते समय कल मुझसे एक ब्‍लॉगर मित्र ने कहा कि मैं शेयर बाजार में निवेश करना चाहता हूं लेकिन रिस्‍क उठाने की हिम्‍मत नहीं है। उसने बताया कि वह सेफ इनवेस्‍टर है। हालांकि, जब हम घर से बाहर निकलते हैं तो सेफ नहीं होते फिर यह तो बाजार है जहां सटोरिएं, पंटर और ऑपरेटर इस तरह सक्रिय होते हैं कि उनके गणित को तगड़े तगड़े निवेशक नहीं समझ पाते। खैर! इन ब्‍लॉगर मित्र के सेफ इनवेस्‍टर वाले फंडे पर मुझे भी सूझा कि क्‍यों नहीं कुछ कंपनियां खोज निकालूं जहां कोई भी निवेशक अपने निवेश को सुरक्षित पा सकता है। हालांकि, इन कंपनियों में किए गए निवेश से आपको हर साल बेहतर लाभांश मिलता रहेगा, भले ही इन कंपनियों के शेयर खूब न चढ़े, लेकिन अधिक गिरते भी नहीं हैं। जानिए यह सूची : एनटीपीसी, यूनिवर्सल कार्बोरेंडम, चंबल फर्टिलाइजर, आयशर मोटर्स, वोल्‍टास, फिनोलैक्‍स केबल्‍स, ओएनजीसी, ब्‍लू स्‍टार, आंध्र बैंक, महाराष्‍ट्र बैंक, जियोजिट फाइनेंशियल, क्‍लेरियंट कैमिकल्‍स, बर्जर पेंट्स, वरुण शीपिंग, नोवार्तिस इंडिया, ग्रेफाइट इंडिया, इंडो रामा सिंथेटिक, मर्क, जीई शीपिंग। यह सूची और लंबी हो सकती है, लेकिन फिलहाल इतना ही।

नया इतिहास लिखने के मूड में इंडेक्‍स

भारतीय शेयर बाजार का इंडेक्‍स अब नया इतिहास लिखने के मूड में है। 21 से 25 मई के दौरान यदि बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई का सेंसेक्‍स 14560 अंक से ऊपर बंद होता है तो यह 14715 अंक तक देखने को मिलेगा। शेयर बाजार में करेक्‍शन यानी गिरावट की उम्‍मीद पाले अनेक निवेशक ही नहीं ऑपरेटर और पंटर तक पिछले दिनों बढ़े दो हजार अंक की गर्मी का मजा नहीं ले सके। जबकि, अर्थव्‍यवस्‍था के आंकड़ों और बाजार के मूड को भांपने में विफल रहने वाले ही इस लाभ में भागीदार नहीं बन सके। यहां हम एक बात बताना चाहेंगे कि बड़े बड़े निवेशक, ऑपरेटर और निवेश कंपनियां मनोवैज्ञानिकों के अपने यहां इसलिए रखती हैं कि आम आदमी के मन और मस्तिषक का अध्‍ययन किया जा सके और इसी आधार पर तेजी मंदी का खेल खेला जाता है। जब लोग यह आश्‍वस्‍त हो जाते हैं कि अब मंदी या करेक्‍शन आना तय है तो यह नहीं आएगा। बड़े खिलाड़ी हमेशा विपरीत दिशा में नाव खेते हैं, तभी तो उनके जहाज धन से भरे रहते हैं और वे लोग खाली घूमते हैं जो मास सायक्‍लोजी नहीं पढ़ पाते। शेयर बाजार में सफल होने का यही पहला और आखिरी मंत्र है कि आप मास सायक्‍लोजी पढ़ना जानते हैं या नहीं। खैर! इस विषय पर हम फिर कभी गहराई से चर्चा करेंगे उन उदाहरणों के साथ जो इसी पर आधारित है और बाजार में होने वाले हर मूवमेंट में इनका हाथ रहा है। देश की सभी प्रमुख कंपनियों के नतीजे आ चुके हैं और यह कारक शेयर बाजार के लिए लगभग पूरा हो चुका है। केरल राज्‍य में 24 मई को मानसून दस्‍तक देने जा रहा है यानी अगले सप्‍ताह से शेयर बाजार की चाल मानसून के साथ चलेगी। यह मानसून अपने तय समय से एक सप्‍ताह पहले आ रहा है, जो शेयर बाजार के खिलाडि़यों और निवेशकों के लिए अच्‍छा है अन्‍यथा हर साल मई महीने में बड़े बड़े खिलाड़ी कांपते रहते हैं क्‍योंकि इतिहास गवाह है कि मई महीना शेयर बाजार के लिए बुरा महीना माना जाता है। यद्यपि 28 मई से जो नया सप्‍ताह शुरू होगा उसमें एफ एंड ओ का सैटलमेंट होगा, उस समय संभवत: बाजार में कुछ उल्‍टी स्थिति बन सकती है, लेकिन इस पर हम चर्चा करेंगे बाजार की अगली चाल देखने के बाद। अगले हफ्ते इंडेक्‍स कंपनियों के अलावा इंजीनियरिंग, ऑटो एनसीलियरी, बैंकिंग, हाउसिंग, फार्मा कंपनियों के शेयरों में चमक दिखाई देगी। म्‍युच्‍युअल फंडों के साथ हाई नेटवर्थ निवेशक, ऑपरेटर मिड कैप और स्‍मॉल कैप वाली बेहतर कंपनियों के शेयर जमा करते हुए मिलेंगे। यहां हम आपको एक बात सावधानी के बतौर कहना चाहेंगे कि यदि आप किसी ऐसी कंपनी के शेयरों में लंबे समय से फंसे हुए हैं, जिसका ट्रेक रिकॉर्ड अच्‍छा नहीं है, तो आने वाले समय में इन स्‍टॉक से पूरी तरह निकल जाए और बेहतर ट्रेक रिकॉर्ड वाली कंपनियों खासकर बिजली, बिजली उपकरण, बैंकिंग, इंजीनियरिंग, रियालटी क्षेत्र की कंपनियों में अपने निवेश को बढ़ाएं। अगले सप्‍ताह फ्रंट रनर में रिलायंस इंडस्‍ट्रीज, रिलायंस कम्‍युनिकेशन, एचडीएफसी, पंजाब नेशनल बैंक, सेल, एल एंड टी, बीपीसीएल, रहेंगे। ये हैं हमारे अगले हीरो : डिश टीवी, सिनेमैक्‍स, कर्नाटक बैंक, फैडरल बैंक, ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर, पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन, कार्बोरेंडम यूनिवर्सल, फिलिप्‍स कार्बन ब्‍लैक, एगिस लॉजेस्टिक, ग्रीन प्‍लाई, गोदावरी पावर।

May 18, 2007

शेयर बाजार में आज नरमी संभव

भारतीय शेयर बाजार में आज नरमी की संभावना है और चार दिन से चली आ रही तेजी को ब्रेक लग सकता है। साथ ही मिड कैप और स्‍मॉल कैप शेयरों के भाव स्थिर से कुछ नरम रह सकते हैं। तेजी को ब्रेक की वजह अंतरराष्‍ट्रीय शेयर बाजारों से अभी तक के मिले संकेत हैं। हमने भारतीय शेयर बाजार में नरमी का अनुमान इसी आधार पर लगाया है। जापान, हागंकांग, सिंगापुर, अमरीकी सहित दुनिया भर के अनेक शेयर बाजारों के इंडेक्‍स गिरे हुए हैं। हालांकि, हम साफ कर दें कि घबराने की कोई जरुरत नहीं है। भारतीय शेयर बाजारों का भविष्‍य बेहतर है और तेजी जारी रहेगी। तेजी और मंदी के इस खेल में चढ़ाव उतार आना स्‍वाभाविक है। लेकिन एक दिन के रुझान से आप यह नहीं कह सकते कि अब तो यही चाल जारी रहेगी। यदि बाजारों में तेजी और मंदी बंद हो जाए या एक तरफा चाल रहे तो किसी को फायदा नहीं होता केवल लांग टर्म निवेशकों को ही इसका लाभ होता है। सभी को फायदा हो इसके लिए जरुरी है कि तेजी और मंदी का खेल जारी रहे। यदि आज बाजार में नरमी का रुझान दिखाई देता है, जिसके चांस ज्‍यादा है, तो अच्‍छी कंपनियों के शेयर निचले स्‍तरों पर खरीदे। शेयर खरीदते समय एक बात जरुर ध्‍यान रखें कि अपना पूरा ऑर्डर हमेशा एक साथ मत दीजिए। मसलन यदि आपको फिलिप्‍स कार्बन ब्‍लैक के पांच सौ शेयर खरीदने हैं और इसके भाव नरम होते दिख रहे हैं या बाजार की चाल मंदी की बन रही है तो 50/50 के लॉट में ऑर्डर दीजिए तो आप पाएंगे कि आपके खरीदे शेयरों की कीमत सस्‍ती है। याद रखिए...यह मत सोचिए कि ब्रोकर क्‍या सोचेगा कि 50/50 या 25/30 कर शेयर खरीद रहा है क्‍योंकि पैसा आपको ही अदा करना है, ब्रोकर को नहीं। ब्रोकर को क्‍या लगेगा, यह मत सोचिए, कारोबार में केवल अपना फायदा देखिए। ब्रोकर को तो आप ब्रोकरेज अदा कर ही रहे हैं। अब भले आप 25/25, 50/50 या 40/40 या 500 शेयर एक साथ खरीद रहे हों। बेचते समय भी आप इस नियम को अपना सकते हैं, जब बाजार तेजी की ओर हो। थोड़े थोड़े शेयर बेचकर आप अपना बिक्री भाव बेहतर कर सकते हैं। शेयर बाजार में बिजनैस के समय ध्‍यान में रखी जाने वाली छोटी छोटी लेकिन अहम बातों की, जिनसे आप बढ़ा सकते हैं अपना फायदा, पर बातचीत होती रहेगी। वाह मनी ब्‍लॉग आपको कैसा लगता है, इसमें और क्‍या सुधार होने चाहिए, आप क्‍या जानना चाहते हैं, हमें जरुर अवगत कराए, अपनी टिप्‍पणी से। यह आपका ब्‍लॉग है। kamaljalaj@gmail.com

May 17, 2007

एफएंडओ में हो रहा है बड़ा गेम

नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज ने 31 कंपनियों को एफएंडओ यानी फ्युचर एंड ऑप्‍शन में रखा है और इनमें 14 मई से एफएंडओ कैटेगरी में कारोबार हो रहा है। इस कैटेगरी में आने के बाद इन कंपनियों के शेयरों में खासी बढ़त देखी जा रही है। आप भी रखिए इन पर नजर और कमाए पैसा।


ADITYA BIRLA NUVO LIMITED
ADLABS FILMS LTD
AIA ENGINEERING LIMITED
DECCAN AVIATION LIMITED
ANSAL PROP & INFRA LTD
ALSTOM PROJECTS INDIA LTD
OSWAL CHEM. & FERT. LTD.
BIRLA CORPORATION LTD
BOMBAY RAYON FASHIONS LTD
DENA BANK
EDUCOMP SOLUTIONS LTD
EVEREST KANTO CYLINDERLTD
FINANCIAL TECHNO (I) LTD
MAHINDRA GESCO DEVELOPERS
HOTEL LEELA VENTURES LTD
INDIA INFOLINE LIMITED
KESORAM INDUSTRIES LTD
MOSER-BAER (I) LTD
PANTALOON RETAIL (I) LTD
PATEL ENGINEERING LTD.
PENINSULA LAND LIMITED
PETRONET LNG LIMITED
RAJESH EXPORTS LTD
REL. NAT. RESOURCES LTD.
ROLTA INDIA LTD
SHREE CEMENTS LTD
S KUMARS NATIONWIDE LTD
STERLING BIOTECH LTD
STERLITE OPTICAL TECHNOLO
UNITED PHOSPHOROUS LTD
UNITECH LTD

May 15, 2007

फिलिप्‍स कार्बन ब्‍लैक में पैसा ही पैसा

यदि आप इस समय निवेश के लिए एक बेहतर कंपनी की तलाश कर रहे हैं तो आपकी यह तलाश आरपीजी समूह की कंपनी फिलिप्‍स कार्बन ब्‍लैक के साथ पूरी हो सकती है। अब इस कंपनी के मुख्‍य कर्ता धर्ता अशोक गोयल हैं जिन्हें टर्नअराउंड विशेषज्ञ माना जाता है तभी तो उन्‍होंने 45 साल के इतिहास में पहली बार घाटे में गई इस कंपनी को एक साल के भीतर फिर से मुनाफे वाली कंपनियों की सूची में ला खड़ा किया।

घरेलू कार्बन ब्‍लैक की मांग वर्ष 2006 में 3.70 लाख टन थी जो वर्ष 2010 तक सालाना आठ फीसदी की दर से बढ़ती हुई 5.20 लाख टन पहुंच जाएगी। टायर उद्योग की बढ़ती मजबूत मांग से यह तय है कि कार्बन ब्‍लैक की मांग अगले पांच वर्ष में 7.4 फीसदी की औसत दर से बढ़ती रहेगी। जबकि कार्बन ब्‍लैक की आपूर्ति इस अवधि में पांच फीसदी की औसत सालाना दर से बढ़ेगी। फिलिप्‍स कार्बन ब्‍लैक, भारत की सबसे बड़ी कार्बन ब्‍लैक उत्‍पादक कंपनी है और इसकी बाजार हिस्‍सेदारी 41 फीसदी है। यही वजह है कि कंपनी को इस बढ़ते बाजार में जोरदार लाभ होगा। कार्बन ब्‍लैक का टायर उद्योग में सबसे ज्‍यादा 64 फीसदी, रबर होज, कनवेर्स, ऑटो कम्‍पोनेंट में 33 फीसदी और प्रिंटिंग इंक, पीवीसी, मास्‍टर बेचेज में तीन फीसदी उपयोग होता है। कार्बन ब्‍लैक के घरेलू खिलाडि़यों में फिलिप्‍स कार्बन की 48 फीसदी, हाई टेक की 29 फीसदी, कांटिनेंटल की 11 फीसदी, कैबॉट की नौ फीसदी और रालसन की तीन फीसदी बाजार हिस्‍सेदारी है।

कच्‍चे माल की कीमतें बढ़ने से इस कंपनी को इतिहास में पहली बार वर्ष 2006 में घाटा हुआ लेकिन कंपनी ने इससे सबक लेते हुए कई कदम उठाए और वर्ष 2007 में कंपनी ने अपने उत्‍पादों के दाम 20 फीसदी बढ़ाए और दाम तय करने के सूत्र को लचीला बनाया। साथ ही क्षमता का उपयोग बढ़ाने, कार्यकारी पूंजी पर मिलने वाली यील्‍ड के चक्र पर ध्‍यान से यह कंपनी सफलतापूर्वक घाटे से उबर गई है। कंपनी निजी बिजली संयंत्र लगाकर बिजली लागत को कम करने की दिशा में कदम उठा रही है। साथ ही सरप्‍लस बिजली बेचकर कंपनी आमदनी भी कर सकेगी। वर्ष 2009 में कपंनी को जहां निजी बिजली संयंत्र से छह लाख रुपए की बचत होगी, वहीं सरप्‍लस बिजली बेचकर 46 करोड़ रुपए से ज्‍यादा की कमाई होगी।

कंपनी को वर्ष 2007 में 998 करोड़ रुपए की आय होने का अनुमान है वहीं यह आय वर्ष 2008 में 999 करोड़ रूपए और वर्ष 2009 में 1218 करोड़ रुपए पहुंच जाने की उम्‍मीद है। कंपनी को बीते वित्‍त वर्ष में 23 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ होने की उम्‍मीद की जा रही है। वर्ष 2008 में शुद्ध लाभ 67 करोड़ रुपए और वर्ष 2009 में 83 करोड़ रुपए रहने की आस है। इसी तरह प्रति शेयर आय वर्ष 2007 में 9.3 रुपए, वर्ष 2008 में 23.7 रुपए और वर्ष 2009 में 29.3 रुपए रहेगी। फिलिप्‍स कार्बन की अपनी समूह कंपनी सीएट में 12 फीसदी होल्डिंग है। फिलिप्‍स कार्बन और हाई टेक ये दो ही कंपनियां इस समय कार्बन ब्‍लैक की घरेलू और निर्यात मांग को पूरा करने के लिए अपना विस्‍तार कर रही हैं।

आरपीजी समूह की यह कंपनी कार्बन ब्‍लैक के उत्‍पादन में भारत में पहले स्‍थान पर और दुनिया में आठवें स्‍थान पर है। इसके तीन संयंत्र हैं जो बड़ौदा, कोचिन और दुर्गापुर में हैं। इन सभी संयंत्रों की कुल क्षमता 2.70 लाख टन है, जो देश की कुल स्‍थापित क्षमता का 48 फीसदी है। अब कंपनी सवा लाख टन सालाना की नई क्षमता जोड़ने जा रही है। साथ ही 26 मेगावाट का निजी बिजली संयंत्र भी लगा रही है। इस विस्‍तार पर कुल 3.5 अरब रुपए खर्च होंगे। इसमें से कार्बन ब्‍लैक संयंत्र पर 2.3 अरब रुपए और बिजली संयंत्र पर 1.2 अरब रुपए खर्च होंगे। यह विस्‍तार वर्ष 2009 तक पूरा हो जाएगा और इसके लाभ वित्‍त वर्ष 2010 के नतीजों में दिखाई देंगे। इस कंपनी के मुख्‍य ग्राहकों में गुडईयर, ब्रिजस्‍टोन और सभी घरेलू टायर निर्माता कंपनियां हैं। अपने 45 साल के इतिहास में कंपनी को पहली बार वर्ष 2006 में घाटा हुआ लेकिन अशोक गोयल की अगुआई में आई नई प्रबंधन टीम ने इसे फिर से मुनाफे में ला खड़ा किया। अशोक गोयल टर्नअराउंड विशेषज्ञ के रुप में प्रसिद्ध हैं। हमारी राय में इस कंपनी के शेयर का दाम जल्‍दी ही 250/300 रुपए पहुंच सकता है जो आज 175 रुपए के करीब बंद हुआ है।

May 14, 2007

पैसे का पावर या पावर का पैसा


नवधनाढ़य जो नए नए पैसे आने पर इतराते हुए घूमते हैं उनके लिए एक कहावत याद आती है पैसे का पावर....लेकिन यदि आप इसमें शामिल नहीं हैं तो आप पावर का पैसा बना सकते हैं। सरकार ने अगले 30 साल के भीतर देश के कौने कौने में 24 घंटे बिजली उपलब्‍ध कराने का लक्ष्‍य तय किया है। इस लक्ष्‍य को पाने के लिए भारी भरकम निवेश करना होगा जिसका बड़ा लाभ ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर, एबीबी और थर्मेक्‍स जैसी कंपनियों को होगा। पावर इक्विपमेंट, पावर ट्रांसमिशन, पावर उत्‍पादन से जुड़ी कंपनियों का भविष्‍य लंबे समय तक उज्‍जवल रहेगा। शेयर बाजार में भले ही उतार चढ़ाव होता रहे लेकिन इन कंपनियों की आय और शेयरों की कीमत हमेशा बढ़ती रहेगी। यदि हम पिछले छह महीनों का ही हिसाब किताब देखें तो एबीबी के शेयरों के दाम 31 फीसदी, अरेवा टीएंडडी के 65 फीसदी और ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर के 69 फीसदी बढ़े। शेयर विश्‍लेषकों पर भरोसा करें तो एबीबी, क्रॉम्‍पटन ग्रीव्‍ज और भेल को बिजली क्षेत्र की मांग को देखते हुए तगड़े निवेश से अपना भावी विस्‍तार करना होगा। भारत में जरुरी बिजली उत्‍पादन क्षमता खड़ी करने और वितरण के लिए एक लाख करोड़ रुपए से अधिक राशि निवेश करनी होगी। यह इस बात का संकेत है कि बिजली उपकरण बनाने वाली कंपनियों जैसे कि एबीबी, सीमेंस, प्राज और भेल के पास बड़े ऑर्डर हैं। सरकार ने ग्‍यारहवीं पंचवर्षीय योजना 2007/2012 के दौरान 78577 मेगावॉट रिकॉर्ड बिजली क्षमता खड़ी करने की योजना बनाई है। इसका मतलब होगा कि बिजली उपकरणों की मांग खूब होगी और मौजूदा पूंजीगत गर्मी से अन्‍य इंजीनियरिंग सामानों की भी मांग निकलेगी। एबीबी की बात की जाए तो उसके पास 31 मार्च 2007 को 5623 करोड़ रुपए के ऑर्डर थे, जबकि थर्मेक्‍स को अप्रैल से दिसंबर 06 तक 3024 करोड़ रूपए के ऑर्डर मिले। सभी कंपनियों के पास कम से कम उनकी एक साल की बिक्री के बराबर ऑर्डर हैं। केंद्र सरकार वर्ष 2012 तक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर 320 अरब डॉलर यानी 13.12 लाख करोड़ रूपए खर्च करना चाहती है जिसमें एक बड़ा हिस्‍सा बिजली क्षेत्र के नाम है। इंफ्रास्‍ट्रकचर बूम की बात करें तो सरकार ने वर्ष 2008 से 2012 के दौरान बिजली क्षेत्र के लिए 5516 अरब रुपए यानी 43.57 फीसदी राशि खर्च करने का लक्ष्‍य रखा है। सड़क पर यह राशि 2474 अरब रुपए यानी 19.54 फीसदी, रेलवे पर 1495 अरब रुपए, बंदरगाह और हवाई अड्डों पर 958 अरब रुपए, पानी आपूर्ति एवं पाइपलाइंस पर 1186 अरब रुपए और शहरी बुनियादी सुविधाओं पर 1031 अरब रुपए खर्च किए जाएंगे। पावर ट्रांसमिशन में ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर और कल्‍पतरु की सालाना विकास दर 25/30 फीसदी रहने की उम्‍मीद है। पावर उपकरणों की जिन कंपनियों में आप निवेश कर सकते हैं, वे हैं: एबीबी, सीमेंस, थर्मेक्‍स, कल्‍पतरु, ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर, क्राम्‍पटन गीव्‍ज, भेल, क्‍युमिंस इंडिया, प्राज, किर्लोस्‍कर ब्रदर्स।

May 13, 2007

सेंसेक्‍स की चाल पर नहीं लगेगी लगाम

उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे शेयर बाजार के लिए उत्‍साहजनक हैं। उत्‍तर प्रदेश में सपष्‍ट बहुमत के साथ जो राजनीतिक स्थिरता आई है, उसका शेयर बाजार पर मनोवैज्ञानिक असर दिखाई देगा। साथ ही शेयर बाजार में आई शार्ट कवरिंग ने मंदडि़यों को अपना खेल खेलने से पीछे हटने को मजबूर किया है। 14 मई से 18 मई के सप्‍ताह के दौरान बीएसई सेंसेक्‍स 14061 के ऊपर बंद होता है तो यह 14290 अंक तक देखने को मिलेगा।

राजनीति के गलियारों में यह चर्चा है कि उत्‍तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव नतीजों ने वामपंथियों की आंखें खोल दी हैं। पहले पंजाब, उत्‍तरांचल के नतीजों ने वामपंथियों को चेताया था लेकिन उत्‍तर प्रदेश ने इनकी आंखें पूरी तरह खोलने का काम किया है। वामपंथियों ने 15 मई को नंदीग्राम घटना पर विचार करने के लिए अपनी बैठक बुलाई है लेकिन असल में इस में यह विचार होगा कि अब यूपीए सरकार के साथ किस तरह का संबंध रखा जाए। कहीं कांग्रेस के हाथ के साथ अपना भी हंसिया व हथौड़ा किसी काम का न रह जाए। अत: मंगलवार शेयर बाजार के लिए थोड़ा रिस्‍की हो सकता है।
केवल वामपंथियों की बैठक को छोड़ दें तो शेयर बाजार के लिए कोई रिस्‍क नजर नहीं आता।

अमरीकी डॉलर रुपए के मुकाबले जिस तरह फिर से मजबूत हो रहा है, उससे साफ्टवेयर शेयरों में लेवाली बढ़ सकती है। इसके अलावा डॉ। रेड्डी के स्‍पेशल ड्रग को यूएस एफडीए की अगले हफ्ते मंजूरी मिलने की संभावना है, जिससे फार्मा कंपिनयों के शेयरों में चमक आ सकती है। शेयर बाजार में अब बारिश और मुद्रास्फिति के नाम पर खेल खेला जाएगा। बारिश की कमी और अधिकता, विकास और निवेश के आंकड़ों के साथ मुद्रास्‍फिति के उतार चढ़ाव शेयर बाजार के पंटरों के मुख्‍य हथियार होंगे।

बजाज ऑटो, टेल्‍को सहित अनेक कंपनियों के नतीजे बेहतर आते हैं तो बाजार में जान फूंक सकते हैं। अगले सप्‍ताह का डार्क हॉर्स सन फार्मा। फ्रंटरनर रहेंगे : टेल्‍को, डॉ. रेड्डी, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, जेबी कैमिकल, फिनोलैक्‍स केबल्‍स, ब्‍लू चिप इंडिया, लॉयड फाइनेंस, वायथ लैब, एनआरबी बियरिंग, आईएसएमटी, एम्‍को, डेवलपमेंट क्रेडिट बैंक, सिनेमैक्‍स इंडिया।

May 11, 2007

पैसे का फ्यूज नहीं उड़ेगा इंडो एशियन में


एलवी इलेक्ट्रिकल स्विचगियर और लाइटिंग इकिवपमेंट बनाने वाली कंपनी इंडो एशियन फ्यूजगियर में किए गए निवेश का फ्यूज नहीं उड़ेगा। मध्‍यम से दीर्घकाल के निवेश करने वाले निवेशकों के लिए यह बेहतर कंपनी है। कंपनी के पंजाब, हरियाणा और उत्‍तरांचल में आठ उत्‍पादन इकाईयां हैं। कंपनी ने हाल में उत्‍तरांचल में दो संयंत्र कर मुक्‍त क्षेत्र में लगाए हैं। कंपनी इसी क्षेत्र में एक स्विचगियर संयंत्र भी लगा रही है, जिसके जल्‍दी ही चालू होने के आसार हैं।

कंपनी के उत्‍पादों की मांग भारत में ही नहीं वरन दुनिया के 80 से ज्‍यादा देशों में है। पिछले साल कंपनी के कुल कारोबार में निर्यात की हिस्‍सेदारी 16 फीसदी के आसपास रही। कंपनी ने विदेशों में अपने कारोबार को बढ़ाने पर ध्‍यान केंद्रित किया है और इसी सिलसिले में नेपाल, श्रीलंका, मध्‍य पूर्व के बाजारों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के जोरदार प्रयास कर रही है। कंपनी ने स्‍पेन की सिमोन के साथ उच्‍च गुणवत्‍ता वाली वायरिंग एस्‍सरीज, बिल्डिंग ऑटामेशन और इंटेलीजेंट स्विचिंग उत्‍पादों व प्रणालियों, ऊर्जा संबंधी विभिन्‍न उत्‍पादों के उत्‍पादन व विपणन के लिए संयुक्‍त उद्यम लगाया है।

इस साल कंपनी की बिक्री 217 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 17.84 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। इंडो एशियन फ्यूजगियर की शेयरधारिता की बात करें तो प्रमोटरों के पास इसके 28.98 फीसदी शेयर हैं, जबकि कार्पोरेट संस्‍थानों के पास 36.35 फीसदी, आम जनता के पास 26.43 फीसदी, म्‍युच्‍युअल फंडों के पास 4.97 व एफआईआई के पास 3.27 फीसदी शेयर हैं। आज 11 मई 2007 को इंडो एशियन फ्यूजगियर का शेयर 110 रुपए पर बंद हुआ, जबकि पिछले 52 सप्‍ताह में यह ऊपर में 319 रुपए (18 मई 2006) और नीचे में 88 रुपए (8 मार्च 2007) को था।

May 09, 2007

आखिरी तेजी, वो क्‍या होता है..!


शेयर बाजार को गिराने की तैयारी !....ब्‍लॉग पर लिखने के बाद अनेक निवेशक मित्रों के फोन आए कि क्‍या यह आखिरी तेजी है। सारे शेयर बेच बाचकर फ्री हो जाएं क्‍या। क्‍या होगा, समझ नहीं आता, आदि आदि। शीत पेय थम्‍स अप का एक विज्ञापन आता है जिसमें फिल्‍मी हीरो अक्षय कुमार कहता है कि आखिरी थम्‍स अप, वो क्‍या होता है.........यही कहना है कि हमारा शेयर बाजार के बारे में। आखिरी तेजी वो क्‍या होती है। मंदी और तेजी बाजार के दो पहलू हैं जैसे की रात और दिन।

हम आज भी अपनी इस पुरानी बात पर कायम हैं कि भारतीय शेयर बाजार का सेंसेक्‍स 17 हजार अंक को छू जाएगा और अगले साल दिवाली के बाद दिसंबर अंत तक 25 हजार अंक के आसपास होगा। सभी फंडामेंटल्‍स और तकनीकी स्थि‍ति को देखते हुए सेंसेक्‍स के पायदान में बदलाव की हमें कोई जरुरत महसूस नहीं हो रही है। लेकिन बाजार में चल रही अंदरुनी हलचल का ज्‍योंहि हमें पता चला हमने आम निवेशक को यह अवगत कराना अपनी जिम्‍मेदारी समझा और लिखा ‘शेयर बाजार को गिराने की तैयारी !’

हालांकि, हम यह भी साफ कर दें कि जब महासागर में भयंकर तूफानी लहरें उठती हैं तो छोटी मोटी नौकाएं डूब जाती हैं। ऐसे में केवल कोलम्‍बस और वास्‍कोडिगामा जैसे नाविक ही सफल हो पाते हैं। इसी तरह भयंकर तूफानी लहरें जब शेयर बाजार में उठती हैं तो शेयरों में दैनिक कारोबार करना कमजोर दिल वालों के बस का रोग नहीं होता। उन्‍हें तो केवल लांग टर्म यानी लंबी अवधि का निवेश ही करना चाहिए। हम अपने इस ब्‍लॉग पर समय समय पर यह बताते रहे हैं कि कौन कौन सी कंपनियां लंबे समय के निवेश पर बेहतर रिटर्न देंगी। हालांकि, मजा भयंकर तूफान के समय ही खेलने का आता है और इस तूफान में जो नाविक पूरी सूझबूझ और तैयारी के साथ उतरता है वही पैसा कमा पाता है। हम एक बार फिर निवेशकों से कह रहे हैं कि वे अपने पास रखें क्रीम शेयरों को गिरावट के दौर में न बेचें और धैर्य बनाए रखें, सफलता उनके हाथ जरुर लगेगी। यदि फिर भी मन घबरता हो तो जहां मुनाफा मिल रहा हो, उसे गांठ बांध लें एवं गिरावट के समय फिर से अपने शेयर खरीद लें।

शेयर बाजार को गिराने की तैयारी.. का एक पैरा फिर से रिपीट कर रहा हूं कि आपने कहावत सुनी होगी कि मौत के अनेक बहाने....सेबी ने डीएलएफ के पब्लिक इश्‍यू को अपनी मंजूरी दे दी है और यह आईपीओ 13600 करोड़ रूपए का होगा। पहले भी यह समूह अपना पब्लिक इश्‍यू लाना चाहता था लेकिन कुछ न कुछ अवरोधों ने इसे रोक दिया। डीएलएफ यदि सफल होता है तो बाजार में नंबर वन और नबंर टू की लड़ाई शुरू हो जाएगी, जिसको देखते हुए नंबर वन कभी नहीं चाहेगा कि कोई उसके मुकाबले खड़ा हो सके। यह नंबर वन भारत का एक औद्योगिक घराना है जो अब सैकंडरी बाजार को तोड़ने के साथ रियॉलिटी स्‍टॉक का दम निकालने की तैयारी कर रहा है ताकि डीएलएफ के पब्लिक इश्‍यू को बेदम किया जा सके। इस घराने ने मंदी के ऑपरेटरों के साथ बैठकें करनी शुरू कर दी है। मंदी के ऑपरेटरों ने अपने तेजी के सौदे काटकर मंदी का खेल शुरू कर दिया है। तो तैयार हो जाइए तूफान का आनंद लूटने के लिए....यह आपको सोचना है कि आप किनारे से दूर खड़े रहेंगे या फिर कोलम्‍बस और वास्‍कोडिगामा की तरह अपनी नावों को महासागर का सीना चीरते हुए आगे बढ़ाएंगे।

May 08, 2007

शेयर बाजार को गिराने की तैयारी !


भारतीय शेयर बाजारों के लिए मई का महीना भय का महीना बन गया है। 12 मई 1992, 15 मई 2006, 17 मई 2004, 18 मई 2006, 19 मई 2006 और 22 मई 2006 को आई गिरावट को याद कर निवेशक आज भी अंदर तक कांप जाते हैं। मई की इन तारीखों ने बड़े बड़े और धैर्यवान निवेशकों तक को रुला दिया था। दुनिया के कई शेयर बाजारों में आज भी गर्मी है, लेकिन भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्‍त बिकवाली का माहौल पिछले दो दिनों से देखा जा रहा है। यही वजह है कि आज भी बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई का सेंसेक्‍स 114 अंक गिरकर बंद हुआ है। बीएसई सेंसेक्‍स यह 13765 अंक पर बंद हुआ है, जो 14 हजार के मानसिक स्‍तर से नीचे है। निवेशकों के दिलों को सुकून तब मिलेगा जब सेंसेक्‍स 14 हजार अंक से ऊपर बंद होगा, अन्‍यथा दिलों की धड़कन बढ़ जाएगी। पूंजी बाजार के अनेक खिलाड़ी कह रहे हैं कि इस महीने बीएसई सेंसेक्‍स एक हजार अंक तो गिर ही जाएगा, लेकिन लंबी अवधि में वे यह भी मानते हैं कि मंदी टिक नहीं पाएगी। यहां गिरावट का एक अन्‍य कारण जो नजर आ रहा है वह भी गौर करने लायक है क्‍योंकि आपने कहावत सुनी होगी कि मौत के अनेक बहाने....सेबी ने डीएलएफ के पब्लिक इश्‍यू को अपनी मंजूरी दे दी है और यह आईपीओ 13600 करोड़ रूपए का होगा। पहले भी यह समूह अपना पब्लिक इश्‍यू लाना चाहता था लेकिन कुछ न कुछ अवरोधों ने इसे रोक दिया। डीएलएफ यदि सफल होता है तो बाजार में नंबर वन और नबंर टू की लड़ाई शुरू हो जाएगी, जिसको देखते हुए नंबर वन कभी नहीं चाहेगा कि कोई उसके मुकाबले खड़ा हो सके। यही नंबर वन अब सैकंडरी बाजार को तोड़ने के साथ रियॉलिटी स्‍टॉक का दम निकालने की तैयारी कर रहा है ताकि डीएलएफ के पब्लिक इश्‍यू को बेदम किया जा सके। नंबर वन ने अपने साथ मंदी के ऑपरेटरों के साथ बैठकें करनी शुरू कर दी है। मंदी के ऑपरेटरों ने कल अपने तेजी के सौदे सुलटाकर मंदी का खेल शुरू कर दिया है। लेकिन निवेशकों से हमारा कहना है कि यदि आपके पास वाकई बेहतर कंपनियों के शेयर हैं तो धैर्य बनाए रखें क्‍योंकि बड़ों की लड़ाई में अपनी छोटी सी पूंजी को न खोएं। यदि आप धैर्य नहीं रख सकते तो मुनाफा बुक कर लें और हर निचले लेवल पर वापस अपने शेयरों की खरीद कर लें। एक विश्‍ेलषक ने तो यहां तक भ्‍ाविष्‍यवाणी की है कि यह गिरावट एक हजार अंक की नहीं डेढ़ से दो हजार अंक तक की हो सकती है।

शेयर बाजार में आई दस तगड़ी गिरावट

18 मई 2006*****826 अंक
2 अप्रैल 2007****617 अंक
28 अप्रैल 1992****570 अंक
17 मई 2004****565 अंक
5 मार्च 2007****471 अंक
15 मई 2006****463 अंक
22 मई 2006****457 अंक
19 मई 2006****453 अंक
4 अप्रैल 2000****361 अंक
12 मई 1992****334 अंक

May 06, 2007

मध्‍यम, छोटे क्रीम शेयरों में आक्रामक तेजी

भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला सप्‍ताह तेजी का रहा, हालांकि शुक्रवार को बाजार में मंदी रही लेकिन घबराने की कोई बात नहीं है। कार्पोरेट जगत के बेहतर नतीजों से अंतरराष्‍ट्रीय शेयर बाजारों में तेजी का माहौल बना हुआ है। अगले सप्‍ताह अमरीकी शेयर बाजार में भी तेजी रहेगी क्‍योंकि वहां दो बड़े अधिग्रहण होने की दिशा में बात आगे बढ़ रही है। इनमें पहला है याहू का अधिग्रहण। माइक्रोसॉफ्ट कंपनी की नजर याहू पर है। दूसरा, मीडिया मोगल रुपर्ट मर्डोक की नजर न्‍यूज एजेंसी डॉव जोंस पर है। पिछले सप्‍ताह यूरोप, अमरीका और लैटिन अमरीका के शेयर बाजारों में गर्मी देखने को मिली। कुछ एशियाई देशों मसलन चीन, इंडोनेशिया, सिंगापुर, कोरिया और मलेशिया के शेयर बाजारों में भी तेजी थी। अगले सप्‍ताह इन बाजारों में तेजी बनी रहेगी जिसकी अगुआई डॉव जोंस इं‍डस्ट्रियल एवरेज करेगा। आने वाले दिनों में मिड और स्‍मॉल कैप के उन शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिलेगी, जो बेहतर प्रबंधन के तहत कामकाज कर रही हैं। यानी मिड और स्‍मॉल कैप के क्रीम स्‍टॉक में तेजी देखने को मिलेगी। हालांकि, बाजार की नजरें उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के परिणामों पर रहेगी। मुलायम सिंह सरकार का पतन और मायावती का कांग्रेस के साथ सरकार बनाना शेयर बाजार में धमाका कर सकता है। अगले सप्‍ताह यानी 7 मई से 11 मई के दौरान बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 14355 से 13660 के बीच घूमता रहेगा। जबकि एनएसई का निफ्टी 4225 से 4020 के बीच रहने की संभावना है। अगले सप्‍ताह ओएनजीसी, गेल, वीएसएनएल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एशियन पेंट्स, भारत बिजली, फिनोलैक्‍स केबल्‍स, टोरंट केबल, जे एंड के बैंक, डेवलपमेंट क्रेडिट बैंक, डाबर इंडिया, टीआरएफ, जीटीएन टेक्‍सटाइल, जीआईसी हाउसिंग, आईडीएफसी, कैस्‍ट्रॉल इंडिया, डिश टीवी इंडिया, और बालाजी टेलीफिल्‍मस में तेजी देखने को मिल सकती है।

May 03, 2007

पैसा बने कूल कूल...टेंशन जाओं भूल भूल..

वोल्‍टास निवेश के लिए सदाबहार कंपनी। एक ऐसी इंजीनियरिंग कंपनी जिसमें आप कभी भी निवेश कर सकते हैं और जब चाहे मुनाफा कमाकर बाहर निकल सकते हैं। वोल्‍टास की इलेक्‍ट्रो मैकेनिकल उत्‍पादों के क्षेत्र में मजबूत स्थिति है। पश्चिम एशिया में कंसट्रक्‍शन क्षेत्र में जिस तरह की गर्मी देखने को मिल रही है, उसे शीतलता देने का काम वोल्‍टास को मिल रहा है जिससे इसकी आय और मुनाफे में खूब बढ़ोतरी हो रही है। यदि कोई निवेशक अपने निवेश को तीन साल रोककर रखने की हिम्‍मत रखता है तो उसके लिए वोल्‍टास से बेहतर कंपनी नहीं है। वर्ष 2008 में कंपनी की सालाना आय में 30 फीसदी का इजाफा होने की संभावना है।

वोल्‍टास एयर कं‍डिशनिंग और इंजीनियरिंग सॉल्‍यूशंस प्रोवाइडर कंपनी है। इस कंपनी का मूल कामकाज घरों और दफ्तरों, मॉल्‍स, एयरपोर्टस, मल्‍टीप्‍लेक्‍स के लिए बेहतर एयर कंडीशनिंग आवश्‍यकताओं को पूरा करना है। यह कंपनी उन क्षेत्रों में भी काम करती है, जहां तापमान, आर्द्रता और हवा पर निगरानी रखने की जरुरत होती है। इन उपयोगकर्ताओं में स्‍टील और बिजली संयंत्र, पेट्रोकैमिकल्‍स सुविधाएं और लैबोरेटरीज शामिल हैं। वोल्टास मटीरियल हैंडलिंग इक्विपमेंट के उत्‍पादन और टेक्‍सटाइल मशींस व कंसट्रक्‍शन एवं माइनिंग इक्विपमेंट के लिए एजेंसी सेवाएं देती है। कारोबार का यह विविधीकरण कंपनी को एक सेगमेंट में आनी वाली मंदी से बचाता है।

भारत में हीटिंग वेंटीलेशन और एयर कंडीशनिंग (एचवीएसी) बाजार में जो मुख्‍य खिलाड़ी हैं, उनमें वोल्‍टास, ब्‍लू स्‍टार और कैरियर खास हैं। नित नए खुले रहे दफ्तरों विशेषकर आईटी और आईटी सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के दफ्तरों में इनके लिए विशेष मांग है। मॉल्‍स और मल्‍टीप्‍लेक्‍स की बढ़ती संख्‍या, नए आ रहे विशेष आर्थिक जोन भी एचवीएसी कारोबार के लिए नए अवसर हैं, जिनका लाभ उठाने के लिए वोल्‍टास ने इन परियोजनाओं पर काम करना शुरू कर दिया है। कंपनी के पास मौजूदा ऑर्डर की बात करें तो इसके पास इस समय 2400 करोड़ रूपए के ऑर्डर हैं जिसमें से 1300 करोड़ रूपए के ऑर्डर अंतरराष्‍ट्रीय बाजारों से मिले हैं। कंपनी को पश्चिम एशिया में आए कंसट्रक्‍शन बूम का भरपूर लाभ मिलने की उम्‍मीद है। इस क्षेत्र का वर्ष 2006 में कंपनी की आय में 27 फीसदी हिस्‍सा था।
वोल्‍टास को हैदराबाद हवाई अड्डे में 160 करोड़ रुपए का इलेक्‍ट्रो मैकेनिकल परियोजना मिली है। कंपनी ने मुंबई एवं दिल्‍ली हवाई अड्डों के लिए भी इसी तरह की परियोजनाओं के लिए बोली लगाई है। देश में हवाई अड्डों का जिस तेजी से विस्‍तार और आधुनिकीकरण हो रहा है, उसे देखते हुए यह क्षेत्र वोल्‍टास की संभावनाओं को बढ़ाता है। इससे पहले कंपनी बहरीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट और हांगकांग के लिए यह कार्य कर चुकी है और यह कार्य वोल्‍टास को दूसरी कंपनियों से अलग खड़ा करता है। इसके अलावा देश में बढ़ रहे कोल्‍ड स्‍टोरेज और वेयरहाउस सॉल्‍यूशंस से वोल्‍टास की कारोबार संभावनाएं बढ़ रही हैं। तेजी से खुल रहे रिटेल स्‍टोर्स और फ्रैश फूड के क्षेत्र में बढ़ रहे निवेश से कोल्‍ड श्रृंखला की जरुरत होगी जिससे वोल्‍टास को फायदा होगा। इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कंपनी ने नीदरलैंड के बिस्‍सैलिंग समूह से हाथ मिलाया है। वोल्‍टास इस गठबंधन के तहत बाद में हर्टिकल्‍चर स्‍टारेज के लिए भी टर्नकी सॉल्‍यूशंस उपलब्‍ध कराएगी और यह क्षेत्र वोल्‍टास का एचवीएसी परियोजनाओं से ज्‍यादा मुनाफा बढ़ाएगी। इसी तरह कंसट्रक्‍शंस और माइनिंग इक्विपमेंट एवं फार्कलिफ्टस डिवीजन से भी मार्जिन बढ़ेगा।

कंपनी ने हैदराबाद स्थित अपनी इकाई को बंद कर इसे उत्‍तरांचल में लगाया है, जहां कर संबंधी लाभ मिलेंगे। कंपनी ने अपनी घाटे वाली रेफ्रिजिरेशन इकाई को बंद कर दिया है जिससे इसके मार्जिन में सुधार होगा। वोल्‍टास में जोखिम के जो कारक दिखाई दे रहे हैं उनमें अल्‍युमिनियम और तांबे जैसे कच्‍चे माल की कीमतों का बढ़ना मुख्‍य है। साथ ही असंगठित क्षेत्र से मिल रही चुनौती और पश्चिम एशिया में कोई राजनीतिक अशांति पैदा होने पर या कंसट्रक्‍शन क्षेत्र में मंदी आती है तो वोल्‍टास के मुनाफे पर विपरीत असर देखा जा सकता है। वोल्‍टास का शेयर आज 97.70 रुपए पर मिल रहा है, जो लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बेहतर कहा जा सकता है। वोल्‍टास का शेयर पिछले 52 सप्‍ताह में ऊपर में 120 रुपए और नीचे में 60 रुपए था।

May 02, 2007

सिकंदर का मुकद्दर गरवारे ऑफशोर

अब तक तो आपने सुना होगा मुकद्दर का सिकंदर....लेकिन सिकंदर ने तो खुद अपना मुकद्दर बनाया था। इसीलिए हम चाहते हैं कि आप भी मुकद्दर के सिकंदर के बजाय एक सिकंदर के रुप में अपना मुकद्दर खुद बनाएं। बात जब मालदार बनने की आती है तो निवेश के साधनों की खूब चर्चा होती है कि कहां ब्‍याज ज्‍यादा मिलेगा या कहां निवेश बढ़ने की गारंटी अथवा कहां रुपए दुगुने हो सकते हैं। देश की मालदार कंपनियों की बात करने की अपनी श्रृंखला में आज हम बात करेंगे एक ऐसी ही कंपनी की जिसके शेयर का दाम देखते देखते काफी बढ़ा और इसमें आगे भी भरपूर संभावनाएं मौजूद हैं। कंपनी है गरवारे ऑफशोर सर्विसेज लिमिटेड। एक जमाने में गरवारे शीपिंग के नाम से प्रसिद्ध इस कंपनी की स्‍थापना स्‍वर्गीय बी डी गरवारे ने की थी, जो कि गरवारे समूह के संस्‍थापक थे। जनरल कार्गो वेसलस के कारोबार से जुड़ी इस कंपनी ने 1998 में शीपिंग कारोबार को छोड़ अपना विविधीकरण खासे आकर्षक कारोबार ऑफशोर सप्‍लाई वेसलस की ओर किया। इस कंपनी ने 1983/84 में सिंगापुर में पांच एएचटीएसवी बनाए और उन्‍हें ओएनजीसी की सेवा में सौंप दिया। अप्रैल 2005 में इनमें से एक एएचटीएसवी को बेच दिया गया, जबकि चार अभी भी ओएनजीसी की सेवा में हैं। जनवरी 2006 में कंपनी का नाम बदलकर गरवारे ऑफशोर सर्विसेज लिमिटेड किया गया।

ऑफशोर सप्‍लाई वेसलस में अनेक तरह के वेसलस होते हैं मसलन मल्‍टी स्‍पोर्ट वेसल यानी एमएसवी, एंकर हैंडलिंग टग्‍स कम सप्‍लाई वेसलस यानी एएचटीएसवी, प्‍लेटफॉर्म स्‍पोर्ट वेसलस यानी पीएसवी आदि। सप्‍लाई वेसलस अनेक स्‍पोर्ट फंकशंस जैसे क्रू एवं इक्विपमेंट ट्रांसपोर्टेशन आदि से लेकर ऑयल ड्रिलिंग रिग्‍स व प्राडक्‍शन प्‍लेटफॉर्म तक की सेवाएं देते हैं। सप्‍लाई वेसलस में पर्याप्‍त पूंजी निवेश की जरुरत होती है। सप्‍लाई वेसलस को तेल व गैस कंपनियां भाड़े पर लेती हैं और सप्‍लाई वेसलस कंपनियों को तेल व गैस उत्‍पादकों से पैसा मिलता है। तेल की कीमतें तेजी से जहां आसमान छू रही हैं वहीं समूची दुनिया में तेल उत्‍पादन की क्षमता तीन दशक पहले वाली ही है, जो कम महसूस की जा रही है। इस समय तेल खोज से जुड़ी परियोजनाओं पर आक्रामक रुप से काम हो रहा है। वर्ष 2006/2010 तक 260 अरब अमरीकी डॉलर से ज्‍यादा राशि अकेले ऑफशोर ड्रिलिंग पर खर्च होगी। तेल एक्‍सप्‍लोरेशन की बढ़ती गतिविधियों की वजह से अनेक ऑपरेटरों ने ऑफशोर स्‍पोर्ट वेसलस की उपलब्‍धता के लिए दीर्घकालीन करार कर लिए हैं जिससे वर्ष 2009 तक शीपयार्ड पूरी तरह बुक हैं।

गरवारे ऑफशोर 1500 लाख डॉलर के पूंजीगत खर्च से अपना विस्‍तार करने जा रही है जिससे इसका फील्‍ट आकार दुगुना होकर 13 विसलस हो जाएगा। इस कंपनी को तेल खोज और उत्‍पादन के क्षेत्र में आ रहे तगड़े निवेश का खूब लाभ होगा। नए वेसलस के आने से कंपनी का हायर स्‍पेस वेसलस में प्रवेश होगा और यह डिपवॉटर एक्‍सप्‍लोरेशन ड्रिलिंग गतिविधियां की ओर मुड़ने से होगा, जहां काफी तगड़ी मांग है। हमारा अनुमान है कि वर्ष 2007 में गरवारे ऑफशोर सर्विसेज की शुद्ध बिक्री 98.61 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 29.06 करोड़ रुपए रहेगा। प्रति शेयर आय यानी ईपीएस 12.2 रुपए रहने का अनुमान है। वर्ष 2008 में कंपनी की शुद्ध बिक्री 162 करोड़ रुपए, शुद्ध लाभ 48 करोड़ रुपए और प्रति शेयर आय 20.3 रुपए रहने की संभावना है। वर्ष 2009 में शुद्ध बिक्री 231 करोड़ रूपए, शुद्ध मुनाफा 74 करोड़ रुपए और ईपीएस 30.9 रुपए रहने के आसार हैं।

भारत में भी तेल खोज और उत्‍पादन की तस्‍वीर अलग नहीं है। देश में क्रूड तेल की घरेलू आपूर्ति केवल 27 फीसदी तक सीमित है, जबकि शेष मांग को आयात के माध्‍यम से पूरा किया जाता है। वर्ष 2025 तक देश में तेल की सालाना मांग के 3640 लाख टन पहुंच जाने का अनुमान है। तेल का हमारा सालाना आयात बिल जो इस समय 18 अरब अमरीकी डॉलर है, के उस समय तेल की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर अकल्‍पनीय ऊंचाई तक पहुंच जाने का अनुमान है। दस फीसदी की आर्थिक विकास दर को पाने के लिए तेल का घरेलू उत्‍पादन बढ़ाना जरुरी है। क्रूड के दाम में हर दस अमरीकी डॉलर की बढ़ोतरी होने पर जीडीपी पर डेढ़ फीसदी का दबाव बढ़ता है। भारत में न्‍यू एक्‍सप्‍लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी के तहत इस क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भारत में भी इस क्षेत्र में तेजी से निवेश बढ़ता जा रहा है। गरवारे ऑफशोर सर्विसेज लिमिटेड का शेयर इस समय 215 रुपए पर मिल रहा है। हमारा अनुमान है कि इसका भाव जल्‍दी ही 290 रुपए के स्‍तर के पार कर जाएगा। पिछले 52 सप्‍ताह में इसका उच्‍चतम भाव 300 रुपए और निम्‍नतम दाम 67 रुपए था।

स्‍टार न्‍यूज के खुलासे के बाद जीएमआर के शेयर बेचो


स्‍टार न्‍यूज चैनल पर आई इस खास रिपोर्ट के बाद कि दिल्‍ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डे की सुरक्षा को कोई भी भेद सकता है और उसके एक कैमरा मैन विकास पांडे को वहां कार्गो में लोडर की नौकरी एक लाख रुपए की रिश्‍वत देकर मिल गई, के बाद हम निवेशकों को जीएमआर इंडस्‍ट्रीज और जीएमआर इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर कंपनी के शेयरों को बेचने की सलाह दे रहे हैं। विकास पांडे को जो नौकरी मिली और उसके जिस पहचान पत्र को स्‍टार न्‍यूज ने दिखाया है उस पर जीएमआर कंपनी का नाम छपा हुआ है। जीएमआर को दिल्‍ली हवाई अड्डे के आधुनिकीकरण और विस्‍तार का ठेका मिला हुआ है। कई अन्‍य महत्‍वपूर्ण परियोजनाओं पर यह कंपनी कार्य कर रही है। यह कंपनी काफी तेजी से इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के क्षेत्र में बढ़ रही है। इस कंपनी ने हवाई अड्डों के ठेके पाने में रिलायंस जैसे घराने को पछाड़ दिया था और अदालत में जाने पर रिलायंस को मुंह की खानी पड़ी थी। निवेशकों को हमारी राय है कि वे अपने पास रखे जीएमआर इंडस्‍ट्रीज और जीएमआर इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के शेयर बेच दें। जब तक सारी मामले की जांच नहीं हो जाएगी और पूरी रिपोर्ट सामने नहीं आती, इस कंपनी में अपने निवेश को बनाए रखना हमें उचित नहीं लग रहा है। इस पूरे प्रकरण पर अभी हैदराबाद स्थित जीएमआर समूह का भी खुलासा आना बाकी है।