Friday, August 31, 2007

विजया बैंक फायदेमंद


यदि आपका इरादा किसी बैंक स्‍टॉक में निवेश करने का है और वह भी सस्‍ता स्‍टॉक तो विजया बैंक फायदेमंद साबित होगा। विजया बैंक की खरीद मौजूदा भाव स्‍तर 56 रुपए पर की जा सकती है और जब यह 60 रुपए को पार करता है तो आप अपना निवेश बढ़ा सकते हैं। विजया बैंक का पहला लक्ष्‍य 75 रुपए है। इस स्‍तर को पार करने पर यह 135/140 रुपए तक जा सकता है।

शेयर एफएंडओ में 14 नई कंपनियां

नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज की एफएंडओ लिस्‍ट में 14 और कंपनियां जुड़ गई हैं। यानी अब इन कंपनियों में कोई सर्किट सीमा नहीं होगी और वायदा खेला जा सकेगा। कंपनियों के नाम इस तरह हैं :


3 आई इंफोटेक
एप्‍टेक
भूषण स्‍टील
बायोकॉन
सीएमसी
हवील्‍स इंडिया
लक्ष्‍मी मशींस
निट टेक्‍नालॉजिस
न्‍युक्लियस सॉफ्टवेयर
सासकेन कम्‍युनिकेशन
टेक महिंद्रा
तुलीप आईटी सर्विसेज
वेल्‍सपन गुजरात
यस बैंक

Wednesday, August 29, 2007

एसएमएस पढ़ने के लिए मिलता है पैसा

अपने मोबाइल पर आने वाले बेतहाशा प्रमोशनल एसएमएस की वजह से आप भी परेशान होंगे। आजकल मोबाइल मार्केटिंग का यह नया ट्रेंड शुरू हो गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ उपभोक्ता ऐसे भी हैं, जो इन एसएमएस के जरिए पैसा भी कमा रहे हैं?

मोबाइल की घंटी बजते ही आपको पता चला कि एसएमएस आया है। आपने उतावलेपन में उसे फटाफट खोलकर देखा, लेकिन खोलते ही पता चला कि यह एक विज्ञापन था। अब आपका पारा सातवें आसमान पर चढ़ा हुआ है, लेकिन जरा रुकिए जनाब। क्या आप यह जानते हैं कि इन्हीं एसएमएस के जरिए आप खुद इतना पैसा कमा सकते हैं कि कम से कम अपने महीनेभर का मोबाइल बिल तो आराम से चुका ही दें।

वैसे यह बात उन लोगों के लिए नई नहीं होगी, जो इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। असल में इंटरनेट पर ईमेल पढ़ने के लिए भी पैसे दिए जाते हैं। इसमें यूजर को बस अपना नेटवर्क ज्यादा से ज्यादा बड़ा बनाना होता है। जितना बड़ा नेटवर्क होगा, यानी यूजर जितने फ्रेंड्स बनाएगा, वह उतने पैसे कमा सकेगा। ऐसी ही एक सर्विस का इस्तेमाल कर रहे आशुतोष गुप्ता कहते हैं, 'मैं ऐसी एक साइट से काफी पैसे कमा चुका हूं। तीन महीने पहले मैंने ये साइट जॉइन की थी। इससे मुझे इतने पैसे तो मिल ही जाते हैं कि मैं कॉलर ट्यून और रिंगटोंस को डाउनलोड करने का खर्चा निकाल लेता हूं। वैसे मुझे औसतन एक एड पढ़ने के कम से कम 5 पैसे तो मिल ही जाते हैं। कुछ साइट तो इसके लिए 20 पैसे तक देती हैं।

इस सिस्टम की सफलता को देखते हुए अब ज्यादा से ज्यादा एडवरटाइजर्स इसका इस्तेमाल करने लगे हैं। विज्ञापनदाताओं के लिए यह सिस्टम वाकई फायदेमंद साबित हो रहा है। उनके मुताबिक इस सिस्टम से वे अपने टार्गेट ऑडियंस तक बहुत आसानी से पहुंच जाते हैं। यह सिस्टम उनके लिए भी फायदेमंद है, जो विज्ञापन पढ़ना पसंद करते हैं। आखिर विज्ञापन पढ़ने पर उन्हें पैसा जो मिल जाता है। इस बारे में स्टूडेंट निखिल सिंह कहते हैं, 'हर रोज पता नहीं कितने प्रमोशनल मैसेज हमारे मोबाइल में आते रहते हैं। अगर इनसे परेशान होने के बजाय इनसे कमाई की जा सके, तो इसमें बुरा क्या है। मैसेज पढ़ने के लिए मुझे पैसे मिलते हैं। इससे मेरा काफी खर्च निकल आता है। वैसे इस सिस्टम में बारे में ज्यादातर लोगों को पता नहीं है। जिन्हें पता लगता है, उनमें से ज्यादातर इसे फ्रॉड समझकर इसके लिए रजिस्टर ही नहीं करते।'

इस सिस्टम का फायदा सिर्फ आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी उठाया जा सकता है। इसे विज्ञापन का नया तरीका मानकर सोशल वर्क से जुडे़ मैसेज भी पास किए जा सकते हैं। सोशल साइंस की स्टूडेंट सपना मुखर्जी कहती हैं, 'यह सिस्टम न सिर्फ कॉरपोरेट एड के लिए फायदेमंद है, बल्कि इसका फायदा सामाजिक उद्देश्यों के लिए भी उठाया जा सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह सिस्टम किसी भी मैसेज को तुरंत अपने टार्गेट तक पहुंचा देता है।'

दिलचस्प बात यह है कि इस सिस्टम में टेलिकॉम कंपनियों की दखलंदाजी नहीं होती। एक टेलिकॉम कंपनी के मार्केटिंग हेड सूर्यप्रकाश सोनी कहते हैं, 'मैंने इस तरह की साइट्स के बारे में सुना तो है, लेकिन अभी तक इनमें से देखा किसी को नहीं है। ये साइट अपना काम अपने आप ही करती हैं और यूजर से सीधे जुड़ी होती हैं।' एक वेबसाइट को चलाने वाले चैतन्य इस बारे में कहते हैं, 'असल में हम बिचौलियों की तरह काम करते हैं। विज्ञापन देने वाला हमसे इस तरह के एसएमएस मांगने वालों का डेटा मांगता है और हम उन्हें यह डेटा उपलब्ध कराने की एवज में पैसा मांगते हैं। यह पैसा फिर आगे उन एसएमएस प्राप्त करने वाले लोगों में बांट दिया जाता है, जो इन्हें पढ़ना चाहते हैं। इस तरह विज्ञापनदाता का मैसेज उन्हीं हाथों में पहुंचता है, जो इसे चाहते हैं और फिर यूजर को सूचना मिलने के साथ-साथ पैसा भी मिलता है। इस तरह यह सिस्टम सभी के लिए फायदेमंद है।' इस साइट को चलाने के उद्देश्य के बारे में चैतन्य कहते हैं, 'इस समय मोबाइल यूजर्स की पर्सनल इनफॉर्मेशन गैरकानूनी तरीके से विज्ञापनदाताओं को दे दी जाती है। इसके एवज में विज्ञापनदाता गुपचुप तरीके से ऐसी इनफॉर्मेशन देने वाले को कुछ पैसा दे देते हैं। यहां हमारी तरह की बाकी वेबवाइट्स इस अनैतिक डेटा ट्रांसफर पर लगाम लगाने का काम करती हैं।' (नवभारत टाइम्‍स से साभार)

बिजली बनाएगी मालामाल

इकॉनामिक टाइम्‍स में छपी एक खबर बिजली क्षेत्र की कंपनियों में किए जाने वाले निवेशकों के लिए खास खबर हो सकती है। वाह मनी ब्‍लॉग हमेशा कहता आया है कि जो भी निवेशक अपना निवेश बिजली क्षेत्र के शेयरों में लगाएंगे वे आने वाले दिनों में मालामाल होंगे और हो सकता है यह तेजी इतनी जोरदार हो कि निवेशक आईटी क्षेत्र की तेजी को भूल जाएं। पढि़ए यह खबर और करें निवेश बिजली क्षेत्र की कंपनियों में। पावर सेक्टर की छोटी कंपनियों को सरकार टैक्स छूट देने पर विचार कर रही है। यह छूट इनकम टैक्स और कस्टम ड्यूटी में दी जा सकती है। 25 मेगावॉट से लेकर 1000 मेगावॉट तक बिजली पैदा करने वाली कंपनियां इसके दायरे में आएंगी।

ऊर्जा मंत्रालय ने एक कैबिनेट नोट जारी किया है। इसमें वित्तीय छूट की पात्रता रखने वाली पावर कंपनियों की प्रॉडक्शन कपैसिटी की सीमा कम की गई है। उम्मीद है कि इन तब्दीलियों को नई मेगा पावर पॉलिसी में शामिल किया जाएगा। फिलहाल इस पॉलिसी के रिव्यू का काम चल रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक ऐसी पावर कंपनियों से कस्टम ड्यूटी नहीं ली जाएगी। साथ ही उन्हें 10 साल तक इनकम टैक्स नहीं देना होगा। अपनी स्थापना से 15 साल के बीच कंपनी किसी भी 10 साल के लिए इनकम टैक्स में छूट का फायदा ले सकती है। एक वरिष्‍ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि हमें उम्मीद है कि मेगा पावर पॉलिसी में तब्दीली किए जाने से इलेक्ट्रिसिटी टैरिफ 12 से 15 पैसे तक की कमी आएगी। साथ ही छोटे पावर प्रोजेक्ट के लिए टैरिफ के लिहाज से की जाने वाली बिडिंग के लिए भी इस तब्दीली के बाद अच्छे ऑफर्स आएंगे।

जैसे ही इन परिवर्तनों की अधिसूचना जारी होगी, मेगा पावर प्रोजेक्ट्स द्वारा दूसरे राज्य को बिजली बेचने की कानूनी रूप से जरूरी अनिवार्यता खत्म हो जाएगी। यानी यदि किसी मेगा पावर प्रोजेक्ट को यह लगता है कि उसके द्वारा पैदा की जाने वाली पूरी बिजली का इस्तेमाल सिर्फ उसी राज्य में किया जा सकता है, जिसमें प्रोजेक्ट है, तो वह सिर्फ उसी राज्य के साथ पावर परचेज अग्रीमेंट कर सकता है। दूसरे राज्य को भी बिजली बेचना उसकी मजबूरी नहीं होगी। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि बिजली खरीदने वाले राज्य को एक रेग्युलेटरी कमिशन बनाना होगा और ट्रांसमिशन व डिस्ट्रिब्यूशन लॉस को कम किए जाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखानी होगी।

यदि पावर पॉलिसी नए परिवर्तनों के साथ आती है तो लैंको, जयप्रकाश इंडस्ट्रीज, एस्सार पावर, बीपीएल पावर, टोरेंट पावर, एलएनजी भीलवाड़ा और जिंदल पावर जैसी कंपनियों के इस सेक्टर में नए सिरे से निवेश करने की उम्मीद है। यहां तक कि एईएस समेत कई विदेशी कंपनियां भी इस सेक्टर में निवेश कर सकती है।

Tuesday, August 28, 2007

शेयर में लॉटरी अगले महीने

शेयर बाजार में लॉटरी....अनोखी बात लेकिन यहां आने वाले सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ में आजकल लॉटरी ही तो लगती है। अधिकतर निवेशक पिछले कुछ समय से आने वाले नए आईपीओ में जमकर निवेश कर रहे हैं क्‍योंकि उन्‍हें पता है कि ऐसी ज्‍यादातर कंपनियों की लिस्टिंग इश्‍यू प्राइस से ऊंची होती है और उस समय आबंटित शेयर बेचकर मुनाफा कमाया जा सकता है। आईपीओ में कम समय में अपने निवेश पर सबसे ज्‍यादा और जल्‍दी बड़ा रिटर्न मिलने का मौका रहता है। ऐसा ही होने वाला है आने वाले दिनों में।

पूंजी बाजार में दो कंपनियां पावर ग्रिड कार्पोरेशन और रुरल इलेक्ट्रिफिकेशन कार्पोरेशन जल्‍दी ही आने वाली हैं। इन दोनों सरकारी कंपनियों की आईपीओ में आंख मूंदकर निवेश किया जा सकता है। बिजली क्षेत्र के तेज विकास को देखते हुए एनटीपीसी, पावर फाइनेंस कार्पोरेशन और पीटीसी इंडिया के बाद इन दोनों कंपनियों में निवेश करने से नहीं चूके। हालांकि, शार्ट टर्म के अलावा जो निवेशक लांग टर्म का व्‍यू लेकर चलना चाहते हैं, वे भी इन कंपनियों के निवेश में खासी कमाई करेंगे।

पावर ग्रिड कार्पोरेशन लिमिटेड दस रुपए वाले 57.39 करोड़ शेयर जारी करेगी जिसके तहत ऊपरी प्राइस बैंक के मुताबिक 2984 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे। दस सितंबर को शत प्रतिशत बुक बिल्डिंग के तहत खुल रहे इस आईपीओ में प्राइस बैंड 42/52 रुपए तय की गई है। यह कंपनी इंटरस्‍टेट और इंटर रिजनल इलेक्ट्रिक पावर ट्रांसमिशन सिस्‍टम से जुड़ी हुई है। आईपीओ के बाद मिनी रत्‍न प्रथम ग्रेड इस कंपनी में सरकार की हिस्‍सेदारी 86.36 फीसदी रहेगी।

जबकि, रुरल इलेक्ट्रिफिकेशन कार्पोरेशन लिमिटेड दस रुपए वाले 15.61 करोड़ से अधिक शेयर आईपीओ के तहत जारी करेगी। यह कंपनी बिजली क्षेत्र में फाइनेंसिंग, प्रमोशन ऑफ ट्रांसमिशन, डिस्‍ट्रीब्‍यूशन, जनरेशन प्रोजेक्‍टस से जुड़ी हुई है। साथ ही राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना की नोडल एजेंसी है जिसके तहत देश के गांव गांव में बिजली पहुंचाई जा रही है। इस कंपनी को भी भारत सरकार ने मिनी रत्‍न ए ग्रेड का दर्जा दे रखा है। इस आईपीओ में 1200 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्‍य है।

Sunday, August 26, 2007

शार्ट पोजीशन से निकले और मुनाफा गांठ बांधे

हितेंद्र वासुदेव
भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्‍ताह भी खासी चंचलता बनी रही। पिछले सप्‍ताह सेंसेक्‍स 14512.28 अंक पर खुला और ऊपर में यह 14680.09 अंक तक गया और नीचे में 13870.70 अंक आया। शुक्रवार को सेंसेक्‍स 14224.87 अंक पर बंद हुआ जो साप्‍ताहिक आधार पर 308 अंक की शुद्ध बढ़त दिखाता है। शेयर बाजार के साप्‍ताहिक रुझान की बात की जाए तो यह नरमी का है और यह ऊपर में 15069 अंक को पार करने के बाद ही तेजी की तरफ बढ़ेगा या यदि शुक्रवार को यह साप्‍ताहिक आधार पर 14643 से ऊपर जाने पर ही ऐसा होगा। साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 14479/15090 है और साप्‍ताहिक स्‍पोर्ट 14141/13970/13779 होगा।
शेयर बाजार का विस्‍तार से हाल जानने के लिए इलियट वेव काउंट पर एक नजर :
फर्स्‍ट काउंट :
वेव 1- 2594 to 3758;
वेव 2- 3758 to 2828;
वेव 3-2828 to 12671;
इंटरनल्‍स ऑफ वेव 3
वेव i- 2904 to 3416
वेव ii- 3416 to 2904
वेव iii- 2904 to 6249
वेव iv- 6249 to 4227
वेव v- 4227 to 12671
वेव 4
वेव a -12671 to 8799
वेव b-8799 to 14723
वेव c-14723 to 12316
वेव 5- 12316 to 15868
इंटरनल्‍स ऑफ वेव 5
वेव 1- 12316 to 13386
वेव 2- 13386 to 12425
वेव 3- 12425 to 14384
वेव 4-
वेव a- 14384 to 13554
वेव b- 13554 to 14683
वेव c- 14683 to 13946
वेव 5- 13946 to 15868
इंटरनल स्‍ट्रक्‍चरर्स में परिवर्तन आ सकता है यदि सेंसेक्‍स टॉप को पार करता है तो।
करेक्‍टिव वेव स्‍ट्रक्‍चर- W-X-Y
वेव W -15868 to 13779
इंटरनल स्‍ट्रक्‍चर
वेव a-15868 to 15572
वेव b-15572 to 15812
वेव c-15812 to 15135
वेव x-15135 to 15568
वेव a-15568 to 14896
वेव b-14896 to 15235
वेव c-15235 to 14705
वेव B- 14705 to 15542
वेव C -15542 to 13779
वेव एक्‍स ऊपरी दिशा के साथ शुरु होगी। जब वेव एक्‍स पूरी हो जाएगी तब इसके नीचे के स्‍तर से गिरने और 13779 को तोड़ने की उम्‍मीद है। वेव एक्‍स के 13779/14445 के बीच और ब्रेकडाउन के लिए ट्रायंगल विकसित करने की उम्‍मीद है।

वैकल्पिक काउंट

वेव 1- 2594 to 3758;
वेव 2- 3758 to 2828;
वेव 3-2828 to 15868;
इंटरनल्‍स ऑफ वेव 3
वेव 1- 2904 to 3416
वेव 2- 3416 to 2904
वेव 3- 2904 to 6249
वेव 4- 6249 to 4227
वेव 5- 4227 to 15868
इंटरनल्‍स ऑफ वेव 5 टर्मिनल पैटर्न में से है
वेव A – 4227 to 12671
वेव B- 12671 to 8799
वेव C- 8799 to 14724
वेव D- 14724 to 12316
वेव E- 12316 to 15868
वेव 4
वेव a -15868 to 13779
वेव b 13779 to 14445 (इस समय यह प्रगति पर है।)
दोनों काउंट में उच्‍च स्‍तर पर पर्याप्‍त वापसी बढ़ोतरी पर प्रश्‍नचिंह लगा हुआ है। प्रस्‍तावित रेसीसटेंस अभी तक कवर नहीं हो पाए हैं। पहला गैप 14680/14964 पर है और दूसरा गैप 15568/15654 पर है।

साप्‍ताहिक रणनीति
रणनीति कुल मिलाकर पहले की तरह चलती रहनी चाहिए। लांग पोजीशन से बाहर निकले और जब भी अवसर मिले ऊपर में बिकवाली करें। इंट्रा वीक कारोबारी सेंसेक्‍स के 14779 के ऊपर तक प्रतीक्षा कर सकते हैं और जब सेंसेक्‍स 14779 से नीचे गिरता है तो बिकवाली करे। सप्‍ताह में स्‍टॉप लॉस 14779 रखें।. इसी तरह, 14324/13970 की रेंज में बढ़ोतरी पर शार्ट पोजीशन कवर करें। 13779 से नीचे गिरने पर और बिकवाली करे। बाजार में गिरावट आती है तो सेंसेक्‍स की रेंज 12779/12161 आ सकती है। सेंसेक्‍स के 15069 से ऊपर बंद होने की दशा में सभी शार्ट पोजीशन से निकल जाएं।

Thursday, August 23, 2007

शेयर बाजार अब ज्‍यादा हॉट नहीं

दुनिया भर के शेयर बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजारों की जो गत बिगड़ी है उसकी दो वजह है। एक-विदेशी संस्‍थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली, दो-देश में पैदा हुआ राजनीतिक संकट। हालांकि, भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के फंडामेंटल्‍स को लेकर किसी तरह की कोई समस्‍या नहीं है और वे पहले की तरह मजबूत बने हुए हैं लेकिन उपर्युक्‍त दो कारणों ने शेयर बाजार की गर्मी पर पानी डाला है। अर्थव्‍यवस्‍था के बैरोमीटर बीएसई के सेंसेक्‍स को 12800 के स्‍तर पर मजबूत स्‍पोर्ट मिलना चाहिए और अब हम अपने इस मत से पीछे हट रहे हैं कि इस साल के अंत तक बीएसई सेंसेक्‍स 18 हजार के अंक को छू जाएगा। हमारी राय में अब साल के आखिर तक सेंसेक्‍स 17 हजार के स्‍तर तक जा पाएगा क्‍योंकि अब जो भी तगड़ी बढ़त होगी, वहां मुनाफा वसूली उससे ज्‍यादा जोर से आएगी जिसकी वजह से सेंसेक्‍स हमारे पूर्व अनुमान 18 हजार तक नहीं पहुंच पाएगा।

दूर रहने में भलाई
निवेशकों को हमारी सलाह है कि वे नई खरीद से कुछ समय दूर रहें जब तक कि सेंसेक्‍स 15 हजार के अंक को पार नहीं कर जाता, बल्कि इस दौरान मुनाफा वसूली जरुर करते रहे या फिर उन कंपनियों में ही इंट्रा डे ट्रेडिंग करें जहां गर्मी आने की पक्‍की खबर हो या फिर गिरने की पक्‍की खबर हो तो शार्ट सेल कर पैसा कमाते रहे। लेकिन एक बात दिमाग में साफ रखें कि अगले तीन महीने तक बाजार में तेजी का बड़ा मूवमेंट नहीं होगा और मंदडिए हावी रहेंगे। हमारी राय में भारतीय शेयर बाजार की आने वाले दिनों में मौजूदा स्‍तर से दस फीसदी तक और धुलाई हो सकती है।

धमाके से बचना आसान नहीं
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों के तकरीबन 150 अरब डॉलर लगे हुए हैं जिससे यह तो साफ है कि घरेलू निवेशकों की ताकत इनकी तुलना में कम है और वही होगा जो विदेशी निवेशक चाहेंगे। इस पैसे में हैज फंडों और पी नोट की बड़ी भूमिका है। 1997 में एशिया में जो संकट पैदा हुआ था, उस समय हम जरुर बच गए लेकिन इसके बाद से अर्थव्‍यवस्‍था में खूब पानी बह गया है और अब हम भी एशिया में आने वाले किसी संकट अथवा वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था में होने वाले किसी भी धमाके से बच नहीं सकते। लेकिन हम दोहराना चाहेंगे कि हमारे फंडामेंटल्‍स खराब नहीं है और भारतीय बैंकिंग उद्योग की हालत बेहतर है जिससे लंबी अवधि के निवेशकों को बड़ी चपत नहीं लगेगी।

भारतीय शेयर बाजार जिस तरह विदेशी निवेशकों को रिटर्न दे रहा है उससे आने वाले दिनों में इन निवेशकों के सामने भारत में निवेश करने के अलावा कोई चारा नहीं है और यह निवेश आगे जाकर बढ़े तो अचरज नहीं होना चाहिए। यह इससे भी साफ है कि पहले ये निवेशक जहां केवल 50-75 कंपनियों में ही निवेश करते थे, वह संख्‍या अब हजार-डेढ़ हजार तक पहुंच गई है। पहले यह निवेश केवल सेंसेक्‍स आधारित या टॉप ब्‍लू चिप कंपनियों में ही होता था, वह अब मिड कैप कंपनियों में हो रहा है।

राजनीतिक दुर्भाग्‍य
अब बात करते हैं राजनीतिक मोर्चे की। हमारे देश का यह दुर्भाग्‍य है कि पिछले कई साल से हमारे यहां कोई भी एक राजनीतिक दल अपने दम पर केंद्र में सरकार नहीं बना सका है जिसकी वजह से कई कड़े राजनीतिक और नीतिगत निर्णय करने में अड़चनें आती हैं। असल में भाजपा और कांग्रेस ने भानुमती का पिटारा टाइप की सरकारें दी हैं जो अहम मुद्दों पर लाचार नजर आईं। देशवासियों को वास्‍तविक आर्थिक, सामाजिक विकास के लिए इस दिशा में सोचना चाहिए और किसी भी राजनीतिक दल को साफ बहुमत देकर दिल्‍ली की गद्दी पर बैठाना चाहिए। इस समय कम्‍युनिस्‍ट जिस तरह भारत-अमरीका परमाणु करार पर रुख अपनाए हुए है और बयान दे रहे हैं, उसने बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित करने के साथ राजनीतिक अस्थिरता को पुष्‍ट किया है जिसके परिणाम हमें भोगने के लिए तैयार रहना होगा।

Wednesday, August 22, 2007

कम्‍युनिस्‍ट बिजी हैं ‘न्‍यू क्लियर डील’ में

भारत-अमरीका के बीच हो रही न्‍युक्लियर डील को लेकर हंगामा मचा रहे कम्‍युनिस्‍टों को देश की चिंता कब से सताने लगी। असल में कम्‍युनिस्‍ट इस समय कांग्रेस के साथ इस डील पर नहीं बल्कि ‘न्‍यू क्लियर डील’ पर बातचीत कर रहे हैं। यानी यदि भारत और अमरीका के बीच न्‍युक्लियर डील पर हमें चुप करना है तो पहले इस ‘डील को क्लियर’ करने के लिए हमारे साथ सौदेबाजी करो।

हम यहां कम्‍युनिस्‍टों से पूछना चाहते हैं कि जब भारत और अमरीका के बीच इस करार को लेकर शुरूआती बातचीत और करार हुए थे तब क्‍या कम्‍युनिस्‍टों को इसके प्रभाव और मसौदे की जानकारी नहीं थी। हर सुबह उठकर चीन की ओर देखने वाले कम्‍युनिस्‍टों को यह बिल्‍कुल गवारा नहीं है कि भारत के अमरीका के साथ संबंध मजबूत बने या फिर भारत एशिया महाद्धीप में चीन से ज्‍यादा शक्तिशाली बने। समूची दुनिया में कम्‍युनिजम का क्‍या हुआ यह किसी से छिपा नहीं है और कम्‍युनिजम के सिद्धांत ताश के पत्‍तों की तरह वहीं ढेर हुए जो देश इन सिद्धांतों पर पल बढ़ रहे थे।

भारत में पहले कम्‍युनिस्‍ट अपनी बदौलत दिल्‍ली की गद्दी हासिल करे और फिर देश का विकास व उसकी चिंता करे, तो ही उचित होगा। हम दावे के साथ कह सकते हैं कि अगले सौ साल तक भारत में कम्‍युनिस्‍ट सत्‍ता में बगैर दूसरे की बैसाखी पकड़े नहीं आ सकते। पहले जो सत्‍ता का स्‍वाद चखा वह श्रीमती इंदिरा गांधी की वजह से और अब श्रीमती सोनिया गांधी के चाहने से। केंद्र सरकार बार बार पेट्रोल, डीजल के भाव बढ़ाती रही, अनाज, सब्जियों, दालों और आम आदमी के जीवन के लिए जरुरी वस्‍तुओं के भाव बढ़ते रहे तब ये कम्‍युनिस्‍ट कहां थे। क्‍यों नहीं ऐसे मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार से समर्थन वापस ले लिया, जिसकी धमकी अब दी जा रही है।

हम दावे के साथ कहते हैं कि कम्‍युनिस्‍ट मौजूदा सरकार से अपना समर्थन वापस नहीं लेंगे और यदि ऐसा करते हैं तो आम चुनाव में उन्‍हें 30 से अधिक सीटें नहीं मिल पाएंगी। एनसीपी नेता शरद पवार अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को मध्‍यावधि चुनाव के लिए तैयार रहने को कह चुके हैं। लेकिन ऐसा होगा नहीं और यह सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर ही लेगी। कम्‍युनिस्‍टों के साथ केंद्रीय मंत्री प्रणब मुखर्जी बातचीत कर रहे हैं। हम पूछना चाहते हैं कि जब देश के एक बड़े करार पर बातचीत हो रही है तो यह बंद दरवाजे में क्‍यों हो रही है। कम्‍युनिस्‍टों के साथ की जा रही डील की जानकारी आम जनता को क्‍यों नहीं दी जा रही। क्‍या इस समझौते पर बात चल रही है कि मान जाओं, आगे तुम्‍हारी भी जय जय और हमारी भी जय जय। खैर !

दुनिया भर के शेयर बाजारों में सुधार शुरू हुए अमरीका के एक कदम से। हालांकि हम यह नहीं कहते कि यह कदम स्‍थाई होगा और बाजार फिर से ट्रैक पर लौट आएगा। लेकिन यहां जिस तरह कम्‍युनिस्‍टों ने जो हल्‍ला मचाया क्‍या उससे वे जानते हैं कि लाखों निवेशकों को किस तरह की मार सहनी पड़ी है। देश की अर्थव्‍यवस्‍था को कितना नुकसान हुआ है। कम्‍युनिस्‍ट अभी चाहे जितना हल्‍ला मचा लें लेकिन यह हमारा दावा है कि वे जल्‍दी ही चुप हो जाएंगे और भारत-अमरीका के बीच परमाणु करार हो जाएगा लेकिन ‘न्‍यू क्लियर डील’ के बाद। अब हम अपने निवेशकों से कहना चाहते हैं कि वे हर ऊंचे स्‍तर पर जहां भी मुनाफा मिल रहा हो, पहले वसूल करें और जब तक बीएसई सेंसेक्‍स 15 हजार को पार नहीं कर जाता, बड़ी खरीद या लांग पोजीशन लेने से बचें।

Monday, August 20, 2007

शेयर बाजार में रहें सचेत


दुनिया भर के शेयर बाजारों में अमरीका के एक छोटे से कदम से गर्मी आ गई है। निवेशकों के चेहरे भी खिल उठे हैं। लेकिन अभी इस गर्मी के टिकने और बढ़ने के बारे में कोई भी आश्‍वस्‍‍त नहीं हैं। भारतीय शेयर बाजार के सेंसेक्‍स को देखें तो 14680 के आज के उच्‍च स्‍तर को यह अभी बरकरार नहीं रख पाया है और इस अचानक बढ़त पर बिकवाली खूब हुई है, जिस निवेशक को जिस किसी शेयर में मुनाफा मिल रहा था, उसने उसे गांठ बांधना उचित समझा। कई निवेशकों को अब यह समझ में आ रहा है कि आज जो मुनाफा आपकी जेब में आ सकता है, वह कल किसी और की जेब में जा सकता है। भलाई इसमें ही है कि मुनाफा लेते चलो और लालच से बचों। लेकिन यह भी सच है कि बाजार एक बार फिर ठीक ठाक बढ़त की ओर चला तो लालचियों की संख्‍या भी बढ़ती जाएगी, जो उन्‍हें तगड़े झटके देगी।

निवेशकों को हमारी सलाह है कि इस समय बेहतर शेयरों में ही इंट्रा डे ट्रेडिंग करें और जहां भी मुनाफा मिले, सौदे काट लें। हम आपको एक बात कहना चाहते हैं कि जिस जगह से भी आपको किसी कंपनी या अर्थव्‍यवस्‍था से जुड़ी कोई खबर मिलती हो उसे बेह‍द बारीकी से पढ़े और उसके परिणाम के बारे में सोचें क्‍योंकि यदि आपने खबर का सही ढंग से अर्थ लगाया तो आपके व्‍यारे न्‍यारे हो सकते हैं। शेयर बाजार के कामकाज में आप सफलता चाहते हैं तो हर खबर को सही ढंग से देखने का नजरिया पैदा करना होगा। हालांकि, इस खूबी को पैदा करना सभी के लिए संभव नहीं है। हम जल्‍दी ही अपने इस ब्‍लॉग पर आपको खबरों के अर्थ देंगे कि जिस कंपनी से जुड़ी खबर आज छाई हुई है वह आपके लिए फायदेमंद है या नुकसानदायी।

हमें अनेक निवेशकों की ऐसी पूछताछ मिली है कि रोज रोज कुछ न कुछ पैसे कैसे कमाएं शेयर बाजार में। हम आपको जल्‍दी ही यह बताएंगे कि आप शेयर बाजार में रोजाना एक ही डील में कैसे पांच सौ से पांच हजार रुपए कमा सकते हैं। हालांकि, यह कमाई की रकम बढ़ भी सकती है, यदि आपके निवेश का दायरा बड़ा हो तो। हम वाह मनी के पाठकों से यह जानना चाहते हैं कि वे अपनी जिज्ञासाओं, सुझावों और शिकायतों से हमें टिप्‍पणियों या ई मेल के माध्‍यम से अवगत कराते रहें ताकि हम वह कार्य कर सके जो आप चाहते हैं।

Friday, August 17, 2007

हताशा से उबरो पार्थ


दुनिया भर के शेयर बाजारों में चल रही तगड़ी गिरावट से काफी निवेशक हताश हो चुके हैं। कल एक ही दिन में हैज फंडों की बिकवाली से निवेशकों के एक लाख 70 हजार करोड़ रूपए साफ हो गए। मैंने कई निवेशकों के उतरे हुए चेहरे, दुखी चेहरे और आंसूओं से भीगी पलकें देखी है। इस विषम स्थिति में हम फिर से कहना चाहेंगे कि धैर्य रखें और यदि आप डिलीवरी आधारित कारोबार करने वाले निवेशक हैं तो निराश न हो क्‍योंकि शेयर बाजार अगले छह महीने में बेहतर स्थिति में होगा। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के न तो फंडामेंटल खराब हुए हैं और न ही उनमें कोई बड़ा बदलाव हुआ है। यह सही है कि अमरीका, जापान में जो हालात बिगड़े हैं उनका असर दुनिया भर में पड़ा है क्‍योंकि डॉलर के प्रभाव से कोई बच नहीं सकता।

निवेशकों को हमारी सलाह है कि जहां भी हल्‍के सुधार के साथ उन्‍हें जिन कंपनियों के शेयरों में मुनाफा मिल रहा हो, उसे वसूल लें। जिन कंपनियों के निवेश में बड़ा घाटा हो रहा हो, उनमें प्राइस एवरेज करने के लिए नई खरीद अभी नहीं करे, बल्कि दो सप्‍ताह प्रतीक्षा करें। प्राइस एवरेज के लिए की जाने वाली नई खरीद में शेयरों की लेवाली बेहद छोटी छोटी मात्रा में करें क्‍योंकि आपकी एक बड़ी खरीद बाजार पर सकारात्‍मक असर नहीं डाल सकती। ध्‍यान रखें कि आप दुनिया के बड़े ऑपरेटर नहीं हैं। आप एक छोटे से निवेशक हैं या बड़े बड़े ऑपरेटरों की छोड़ी गई मलाई की मामूली सी परत खाने के साझीदार हैं।

बीएसई सेंसेक्‍स में इस बात को ध्‍यान रखें कि यदि यह 13700 का स्‍तर तोड़ता है और इससे नीचे आता है तो नई खरीद बिल्‍कुल न करें क्‍योंकि इसके बाद शेयर बाजार का बड़ा बंटाढार तय है। लेकिन विजेता वही होगा जो धैर्य को नहीं छोड़ेगा। कहावत है धैर्य के माध्‍यम से बड़ी बड़ी मुसीबतों से पार पाया जा सकता है। शेयर बाजार के बटाढांर पर लंबी अवधि के लिए अपने पोर्टफोलियो को रखें। 24 साल के अनुभव के बाद हम आप से कह सकते हैं कि अच्‍छे दिन लौटते हैं और बुरे तरह से टूट चुकी कंपनी, लेकिन बेहतर प्रबंधन और कार्य कर रही कंपनी के शेयर दिन लौटने पर आसमान पर होते हैं। महासागर में भयंकर तूफानी लहरें उठती हैं तो छोटी मोटी नौकाएं डूब जाती हैं। ऐसे में केवल कोलम्‍बस और वास्‍कोडिगामा जैसे नाविक ही सफल हो पाते हैं और आप ऐसे ही नाविक हैं तभी तो अमरीका एवं भारत जैसे महादेशों की खोज कर पाएंगे।

Tuesday, August 14, 2007

झंडा ऊंचा रहे हमारा


Monday, August 13, 2007

बढ़े चलो, चले चलो

देश के विख्‍यात निवेशक राकेश झुनझुनूवाला का कहना है कि वर्ष 2012 तक बीएसई सेंसेक्‍स 25 हजार अंक पहुंच जाएगा। वे मानते हैं कि देश की अर्थव्‍यवस्‍था इस बात के संकेत दे रही है कि तेजी कायम रहेगी। एकदम सही कहा है राकेश झुनझुनूवाला ने। वाह मनी ब्‍लॉग शुरू से ही कहता आया है कि हर गिरावट आपके लिए बेहतर कंपनियों के शेयर खरीद के मौके खड़ी करती है और हर बड़ी तेजी आंशिक मुनाफा वसूली।

असल में हर गिरावट के बाद एक उछाल आता है लेकिन सच्‍चा खिलाड़ी वह है जो हर बड़ी गिरावट में बेहतर शेयर छोटी छोटी मात्रा में खरीदता है। आपको कई बार यह लगता है कि मैंने अमुक कंपनी के शेयर नहीं लिए या चूक गया...लेकिन ऐसी गिरावट आपको बेहतर कंपनियों या अपनी पसंदीदा कंपनियों के शेयर खरीदने के मौके देती है। गिरावट के समय जो सबसे बड़ा मंत्र है, पहले आप शांत मन से अपनी पसंदीदा कंपनियों की सूची का विश्‍लेषण करें और यह देखें कि जिन कंपनियों के शेयर आप खरीदना चाहते हैं उनके नतीजे पिछले तीन सालों में किस तरह के आए हैं, प्रबंधन कैसा है, जिस क्षेत्र से कंपनी जुड़ी हैं, उस उद्योग का भविष्‍य कैसा है। क्‍या शेयर खरीदने के बाद आपकी होल्डिंग क्षमता कैसी है। इस तरह के अनेक कारक हैं जिन पर आप विचार कर हर गिरावट में बेस्‍ट कंपनियों के शेयर ले सकते हैं, लेकिन याद रखिए आपकी यह खरीद छोटी छोटी मात्रा में होनी चाहिए ताकि अगली गिरावट पर भी आपके पास लिक्विडीटी बनी रहे।

हम आज भी अपनी इस पुरानी बात पर कायम हैं कि भारतीय शेयर बाजार का सेंसेक्‍स इस साल 18 हजार अंक को छू जाएगा और अगले साल दिवाली के बाद दिसंबर अंत तक 25 हजार अंक के आसपास होगा। राकेश झुनझुनूवाला का मत इससे भिन्‍न हो सकता है। सभी फंडामेंटल्‍स और तकनीकी स्थि‍ति को देखते हुए सेंसेक्‍स के पायदान में बदलाव की हमें कोई जरुरत महसूस नहीं हो रही है और लगता है कि सबप्राइम मामले से जल्‍दी ही दुनिया भर के बाजार उबर जाएंगे।

हम आपको यह भी बता दें कि जब महासागर में भयंकर तूफानी लहरें उठती हैं तो छोटी मोटी नौकाएं डूब जाती हैं। ऐसे में केवल कोलम्‍बस और वास्‍कोडिगामा जैसे नाविक ही सफल हो पाते हैं। इसी तरह भयंकर तूफानी लहरें जब शेयर बाजार में उठती हैं तो शेयरों में दैनिक कारोबार करना कमजोर दिल वालों के बस का रोग नहीं होता। उन्‍हें तो केवल लांग टर्म यानी लंबी अवधि का निवेश ही करना चाहिए। हम अपने इस ब्‍लॉग पर समय समय पर यह बताते रहे हैं कि कौन कौन सी कंपनियां लंबे समय के निवेश पर बेहतर रिटर्न देंगी। हालांकि, मजा भयंकर तूफान के समय ही खेलने का आता है और इस तूफान में जो नाविक पूरी सूझबूझ और तैयारी के साथ उतरता है वही पैसा कमा पाता है। हम एक बार फिर निवेशकों से कह रहे हैं कि वे अपने पास रखें क्रीम शेयरों को गिरावट के दौर में न बेचें और धैर्य बनाए रखें, सफलता उनके हाथ जरुर लगेगी। यदि फिर भी मन घबरता हो तो जहां मुनाफा मिल रहा हो, उसे गांठ बांध लें एवं गिरावट के समय फिर से अपने शेयर खरीद लें।

गोल्‍डन रुल
अमरीकी निवेशक बर्नार्ड बारुक का कहना है कि शेयर बाजार केवल फायदे के सौदे करने की जगह है न कि घाटे का। उन्‍होंने अपनी पुस्‍तक में लिखा है कि एक नियम गांठ बांध कर रखों कि शेयर बाजार में कभी नुकसान नहीं करना। यानी केवल लाभ कमाने के लिए ही शेयर बाजार में कदम रखें। अब जरा यह सोचिए कि ऐसा कोई निवेशक होगा, जो शेयर बाजार में घाटा खाने के लिए जाता होगा।

बारुक के नियम में यह रहस्‍य छिपा है कि कोई भी सौदा करने से पहले पूरा रिसर्च करें फिर निवेश। यानी उठने वाले एक भी गलत कदम को रोक लेने का अर्थ है नुकसान को रोक लेना। कई लोग इस पर कह सकते हैं कि जो शेयर बाजार में खूब कमाते हैं या घाटा नहीं खाते, ऐसे लोग मुंह में सोने का चम्‍मच लेकर पैदा होते हैं। लेकिन मैं आपको बता दूं कि ऐसा नहीं होता। एक आदमी कहां कहां निवेश कर सकता है, वह गणित इस दुनिया में आकर ही सीखा जा सकता है। लेकिन बड़ा तबका यह नहीं देखता कि वह कहां निवेश कर रहा है। या सुनी सुनाई सूचनाओं के आधार पर निवेश किया जा रहा है या फिर किसी के पीछे पीछे।

सही निवेशक हमेशा अपना रास्‍ता खुद बनाते हैं और खूब होमवर्क करते हैं। निवेश करने वाली हर जगह और हर कंपनी के बारे में इतना कुछ मुंह जबानी याद रखते हैं जितना शायद उस कंपनी का कोई निदेशक भी याद नहीं रख पाता होगा। लेकिन हर निवेशक पैसा तो चाहता है लेकिन लिखना पढ़ना और सूचनाएं जुटाने से बचना चाहता है। वह चाहता है कि सूचनाएं जुटाने की मेहनत कोई और करे, हम केवल मुनाफा काटें। लोग बड़े बड़े निवेशकों के बेचा