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September 29, 2007

सेंसेक्‍स की विजेता छलांग


हितेंद्र वासुदेव
बीएसई सेंसेक्‍स पिछले सप्‍ताह उम्‍मीद के अनुरुप झूम उठा और 726 अंक की छलांग लगाई जो उससे पहले के सप्‍ताह में लगभग नौ सौ अंक बढ़ा। बीएसई सेंसेक्‍स पिछले सप्‍ताह पूर्व सप्‍ताह के बंद 16564.23 अंक की अपेक्षा बड़े अंतर पर खुला। सेंसेक्‍स 16697.89 अंक पर खुला और नीचे में 16599.66 अंक से नीचे नहीं गया। साप्‍ताहिक ऊंचाई 17361.47 अंक रही और अंत में बंद 17291.10 अंक पर हुआ। साप्‍ताहिक आधार पर यह 726 अंक बढ़ा।

31 अगस्‍त 2007 को सेंसेक्‍स के 15318 अंक पर बंद होने के बाद से साप्‍ताहिक रुझान तेजी का है। साप्‍ताहिक रुख नरमी का तभी दिखेगा जब यह साप्‍ताहिक बंद 16262 से नीचे होगा। अब सेंसेक्‍स के आने वाले दिनों में 17957-19248-21337 अंक जाने की उम्‍मीद है। 27 फरवरी 2008 से 19 मार्च 2008 के बीच सेंसेक्‍स के 17957 अंक जाने की उम्‍मीद की जा सकती है। लेकिन जिस तरह शेयरों के दाम चढ़ रहे हैं उससे 17957 का स्‍तर हमारे अनुमान से जल्‍दी देखने को मिल सकता है। साप्‍ताहिक स्‍पोर्ट 17084-16806-16564 पर होगा। साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 17568, 17957, 18050 और 18330 पर रहेगा। उम्‍मीद बाजार के साप्‍ताहिक रेसीसटेंस से अधिक बढ़ने की है। आने वाले दिनों में एक के बाद एक स्‍तर देखने को मिलेगा।

हम यहां कुछ पिछली बातें करना चाहेंगे जब हमने 1 जनवरी 2007 को कलैंडर वर्ष 2007 के लिए वार्षिक स्‍तर बताया था। वार्षिक स्‍तर का बिंदु 12207 था और तीन स्‍तर बताए गए थे जिनमें तीसरा 15615 था। चौथा वार्षिक स्‍तर 20851 है। कलैंडर वर्ष 2007 के लिए निचला स्‍तर 12316 और उच्‍च स्‍तर अब 17361 है। सेंसेक्‍स ने अपने केंद्रीय बिंदु को पिछले तीन साल में न तो तोड़ा है और न ही इससे नीचे की ओर आया है। पिछले तीन साल में इसने केंद्रीय बिंदु को लगभग छूआ ही है और वापसी पर नई ऊंचाई बनाई है। चौथे साल भी यही दिखाई देता है। तार्किक आधार पर 31 दिसंबर 2007 तक सेंसेक्‍स 20851 अंक पर होना चाहिए।

बाजार पर व्‍यापक नजर के लिए हम इलियट वेव काउंट को देखते हैं :
प्रिफर्ड फर्स्‍ट काउंट:

वेव 1 – 2594 to 3758;
वेव 2 – 3758 to 2904;
वेव 3 – 2904 to 17361 (वर्तमान में यह प्रगति पर है)
इंटरनल्‍स ऑफ वेव 3
वेव i – 2904 to 6249
वेव ii – 6249 to 4227
वेव iii – 4227 to 12671
वेव iv - 12671 to 8799
वेव v- 8799 to 17361 (वर्तमान में यह प्रगति पर है)
वेव i- 8799 to 14724
वेव ii- 14724 to 13799
वेव a- 14724 to 12316
वेव b –12316 to 15868
वेव c – 15868 to 13799
वेव iii-13799 to 17361 (वर्तमान में यह प्रगति पर है)

यदि सेंसेक्‍स गिरता है और यह गिरकर नीचे में 15868 अंक पर बंद होता है तो उपर्युक्‍त वेव काउंट लागू नहीं होंगे।

साप्‍ताहिक रणनीति
करेक्‍शन की स्थिति में 17084-16806 अंक और 16564 अंक को स्‍टॉप लॉस के साथ खरीद के लिए उपयोग किया जा सकता है। सेंसेक्‍स के बढ़कर 17957-19248-21337 जाने की उम्‍मीद की जा सकती है। रेसीसटेंस 17568 अंक रहेगा। अनुवाद: कमल शर्मा

September 27, 2007

ज्‍योतिष कहते हैं गिरेगा शेयर बाजार


शेयर बाजार में अब करेक्‍शन की बात तकनीकी विश्‍लेषक और निवेश सलाहकार ही नहीं कर रहे बल्कि ज्‍योतिष भी कह रहे हैं। विश्‍व विजय पंचांग के मुताबिक 11 अक्‍टूबर से 7 नवंबर 2007 के बीच शेयर बाजार में भारी मंदी देखने को मिलेगी। जबकि 11 अक्‍टूबर तक रिलायंस और एसीसी में जोरदार तेजी दिखेगी। इस पंचांग पर भरोसा करें तो 7 नवंबर से 31 दिसंबर 2007 के बीच बीएसई में तगड़ा उछाल देखने को मिलेगा। लेकिन यदि इसके बाद मंदी चले तो मंदी का कारोबार करें। पंचांग में कहा गया है कि 12 फरवरी 2008 से पहले नए साल में जबरदस्‍त नरमी आएगी। इसलिए सावधानी से कारोबार करें तो बेहतर है। राजस्‍थान के उदयपुर में मेरे एक निवेशक मित्र रहते हैं जिन्‍होंने बताया कि उन्‍हें भी एक ज्‍योतिष ने बताया है कि 8 से 11 अक्‍टूबर के बीच शेयर बाजार में गिरावट आएगी। वाह मनी ने भी 19 सितंबर को कहा था कि शेयर बाजार में गिरावट दस अक्‍टूबर के बाद...पढ़ें....

September 26, 2007

शेयर बाजार में उछाल रहेगा लेकिन झटके खाकर

भारतीय शेयर बाजार बीएसई के केवल छह दिन में 16 से 17 हजार अंक का सफर तय करते ही निवेशकों के चेहरे मुस्‍करा उठे। इस सफर में मिड कैप और स्‍माल कैप की अनेक कंपनियों ने बढ़त हासिल की जिससे तकरीबन सभी निवेशकों को लाभ हुआ है। क्रिकेट के ट्वेंटी ट्वेंटी मैच की तरह सेंसेक्‍स ने जो छलांग लगाई है उसके बाद सभी ब्रोकरेज हाउस और निवेश सलाहकार यह कह रहे हैं कि अब 20 हजार, 25 हजार और 30 हजार का सेंसेक्‍स जल्‍दी ही दिखेगा। वाह मनी लंबे समय से कह रहा है कि सेंसेक्‍स वर्ष 2008 में दिवाली के बाद कभी भी 25 हजार अंक पहुंच जाएगा...देखें यहां...

सेंसेक्‍स का बढ़ना कोई अचरज की बात नहीं है। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में जो सुधार का शंख पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिंहराव ने फूंका उसे अब उस जमाने के वित्‍त मंत्री और मौजूदा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बढ़ा रहे हैं। देश में सरकार किसी भी दल की आ जाए, उस पर इतने दबाव रहेंगे कि वह चाहकर भी आर्थिक सुधारों को रोक नहीं सकेगी, भले ही इसकी गति धीमी हो। परिवर्तन संसार का नियम है और ऐसे में पीछे लौटा भी नहीं जा सकता। भारत सहित अनेक देशों के शेयर सूचकांक पिछले पांच सालों में इतनी तेजी से बढ़े हैं कि अभी इन पर लगाम नहीं लगेगी। लेकिन एक सत्‍य को स्‍वीकार करना होगा कि जो मुनाफा आज आप की जेब में जा सकता है, वह कल किसी और का हो सकता है। वाह मनी की राय में निवेशकों को शेयरों की आंशिक बिकवाली करते रहना चाहिए और मुनाफा वसूली में ही फायदा है।

इतिहास गवाह है कि शेयर बाजार बड़ी बढ़त के बाद गिरा भी है। यदि आप ऑपरेटरों और पंटरों के मन को पढ़ सकते हैं तो यह जान लें कि जब बाजार में चौतरफा यह तय हो जाता है कि बाजार में अब गिरावट नहीं आएगी और यह उठता ही रहेगा तभी इतना तगड़ा झटका दिया जाता है कि निवेशकों की बड़ी संख्‍या संभल ही नहीं पाती। कई बार यह धक्‍का प्‍यार से दिया जाता है....यानी 80/100/150 अंक की रोज रोज गिरावट एवं आम निवेशक यह सोचता रहता है कि आज गिरा है, कल बाजार उठेगा। परसों तो दम आएगा ही....लेकिन ऐसा नहीं होता और पता चलता है कि बाजार तो डेढ़ हजार अंक का गोता लगा गया।

ऑपरेटर आम आदमी के मन को बेहतर ढंग से पढ़ना जानते हैं और हम नहीं क्‍योंकि आम आदमी अपने बढ़ते मुनाफे को देख देखकर कागज पर हिसाब जोड़ता जाता है लेकिन जब गिरावट आती है तो रोता है। वाह मनी पहले ही कह चुका है कि दस अक्‍टूबर के बाद शेयर बाजार में गिरावट आएगी, हां तब तक आप जितना खेलना चाहते हैं, जरुर खेलें। भारत के वन डे क्रिकेट कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी ने जिस तरह जोश में होश बनाए रखा और देश को विश्‍व विजेता बनाया, उससे काफी सीखने की जरुरत है और आम निवेशक इससे काफी कुछ सीख सकता है।

September 25, 2007

शेयर बाजार में नरमी के संकेत, बांध लेना मुनाफा गांठ में


निवेश गुरु जिम रोजर्स पर भरोसा करें तो अमरीकी फैडरल रिजर्व बैंक द्धारा की गई ब्‍याज दर कटौती गंभीर गलत कदम है और इससे अमरीका में मुद्रास्‍फीति बढ़ेगी। अमरीकी डॉलर का दुनिया भर में बज रहा बैंड और बजेगा। कमोडिटी के बढ़ते दाम और डॉलर की ठुकाई अमरीका में मंदी को बढ़ावा देगी। जिम रोजर्स सोने और कृषि कमोडिटी में तेजी की बात कह रहे हैं। वे कहते हैं कि चीनी मुझे अच्‍छी लग रही है और यह मौजूदा स्‍तर से बढ़ेगी। भारतीय चीनी के संबंध में यहां पढ़े....चीनी स्‍टॉक्‍स में किया निवेश तो खाएंगे धोखा....भविष्‍य कृषि कमोडिटी का है। हालांकि, वे चीन को छोड़कर अन्‍य उभरते बाजारों में तेजी नहीं देखते।

वाह मनी ने 19 सितंबर को कहा था कि....केवल अमरीका ने ब्‍याज दरों में कटौती की और दुनिया भर की अर्थव्‍यवस्‍था सुधर गई। ऐसा कोई जादूई कदम हर देश क्‍यों नहीं उठा लेता ताकि सभी जगह खुशहाली दिखाई दे। अमरीका ने ब्‍याज दरों में जो कटौती की है, उसके परिणाम तत्‍काल दिखाई नहीं देंगे और अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार भी नहीं होगा। सबप्राइम का मामला केवल इस कदम से ठीक हो सकता है तो पहले यह कदम क्‍यों नहीं उठा लिया गया। हम आम निवेशक को कहना चाहेंगे कि मृग मरीचिका में न फंसे और अपने विवेका का उपयोग कर ही नया निवेश करें। अमरीका में भी अर्थव्‍यवस्‍था की समीक्षा इस साल के अंत में होगी तभी यह पता चल पाएगा कि ब्‍याज दर में जो कमी की गई है क्‍या वाकई वह लाभकारी रही। ऐसा न हो कि साल के आखिर में अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था में कमजोरी बढ़ जाए। अमरीका पिछले लंबे समय से अर्थव्‍यवस्‍था में आई कमजोरी से उबरने का हर संभव प्रयास कर रहा है लेकिन वह मंदी के दलदल में फंसता ही जा रहा है। पूरी रिपोर्ट के लिए यहां क्लिक करें....शेयर बाजार में गिरावट का खेल दस अक्‍टूबर के बाद....।

हमेशा यह ध्‍यान रखें कि बाजार कहीं भागकर नहीं जा रहा और कंपनियां तो बनती बिगड़ती रहती है। यदि आप रिलायंस चूक गए तो कोई बात नहीं...क्‍योंकि रिलायंस को आज तक सफर तय करने में कई साल लगे हैं। ठीक ऐसी ही दूसरी कंपनी की तलाश किजिए और देखिए वह भी इतने साल बाद रिलायंस बनती है या नहीं। एल एंड टी छूट गई तो क्‍या...पकडि़ए दूसरी इंजीनियरिंग कंपनी जो बरसों बाद दूसरी एल एंड टी होगी। असली निवेशक वही है जो भारत की दूसरी बड़ी भावी कंपनियों में आज कम निवेश करता है और हो जाता है करोड़पति कुछ साल बाद। वर्ष 1980 में विप्रो के सौ रुपए वाले सौ शेयर को आपने खरीदा होता तो आज आपके पास दो सौ करोड़ रुपए हो सकते थे। वर्ष 1992 में इंफोसिस के शेयर में दस हजार रुपए का निवेश किया होता तो आपके पास आज डेढ़ करोड़ रुपए हो सकते थे। इसी तरह 1980 में रेनबैक्सी में एक हजार रुपए का निवेश किया होता तो आपके पास आज तकरीबन दो करोड़ रूपए होते। पुरानी बातें छोड़ भी दें तो अगर आपने 2004 की गिरावट में यूनिटेक में 40 हजार रुपए का निवेश किया होता तो आज आपके पास एक करोड़ दस लाख रुपए हो सकते थे। इंतजार करने वाले निवेशकों ही यहां फायदा होता है, भले ही सेंसेक्‍स कुछ भी हो। जिस तरह एक बच्‍चे को पूरी तरह क्षमतावान होने में समय लगता है वही इन कंपनियों के साथ होता है। इसलिए उन कंपनियों की तलाश कीजिए जो कल के युवा होंगे।

September 24, 2007

शेयर बाजार में होगा तगड़ा मूवमेंट


शेयर विश्‍लेषक विकास अग्रवाल, राउरकेला का मानना है कि निफ्टी और सेंसेक्‍स मौजूदा स्‍तर पर काफी मजबूत हैं। ताजा खरीद का रुझान बाजार के माहौल को गर्म रखेगा और निफ्टी 4724 और सेंसेक्‍स 16216 से ऊपर रहेगा। समूचे सप्‍ताह में निफ्टी में 745 अंक और सेंसेक्‍स में 2295 अंक की हलचल देखने को मिल सकती है। यदि निफ्टी 4968 और सेंसेक्‍स 16964 अंक से ऊपर टिका रहता है तो ये क्रमश: 5099 अंक और 17365 अंक को छू सकते हैं। नरमी की स्थिति में निफ्टी को 4594 अंक और सेंसेक्‍स को 15815 अंक पर स्‍पोर्ट मिलेगा। निफ्टी फ्यूचर मौजूदा स्‍तर पर 4939.85 अंक के लक्ष्‍य के साथ खरीदा जा सकता है। इसमें स्‍टॉप लॉस या एवरेज 4779.05 अंक से नीचे।

रोल्‍टा अक्‍टूबर 2007 को मौजूदा स्‍तर पर 603.65 रुपए के लक्ष्‍य के साथ खरीदें और स्‍टॉप लॉस 490.35 रुपए रखें। यदि आप लंबी अवधि के निवेशक हैं तो बॉम्‍बे डाईंग को मौजूदा स्‍तर पर 1519.75 रुपए के लक्ष्‍य के साथ खरीद सकते हैं। क्रेयन इंडिया 228.50 रुपए के लक्ष्‍य के साथ लिया जा सकता है। मध्‍यम अवधि के निवेशकों के लिए मवाना शुगर्स 28 रुपए के स्‍टॉप लॉस के साथ 46.95 रुपए के लक्ष्‍य को ध्‍यान में रखकर खरीदना अच्‍छा होगा। शार्ट टर्म डिलीवरी कॉल के तहत अग्रवाल का कहना है कि एनईपीसी इंडिया बेस्‍ट हैं। इसका लक्ष्‍य वे 24.80 रुपए बताते हैं और स्‍टॉप लॉस 21.95 रुपए।

चीनी स्‍टॉक्‍स में निवेश किया तो खाएंगे धोखा

केंद्र सरकार अब चीनी उद्योग को अनेक रियायतों की बातें कर रही हैं जिससे शेयर बाजार में इन दिनों चीनी शेयरों को खरीदने की सिफारिश बड़े पैमाने पर हो रही है। बीच बीच में चीनी शेयरों के दाम इस तरह बढ़े भी हैं कि अच्‍छे अच्‍छे निवेशक पैसे बनाने के लालच में आ जाएं। जबकि हकीकत यह है कि चीनी शेयरों में निवेश करने वाले निवेशक एक दिन अपने को ठगा हुआ महसूस करेंगे।

चीनी उद्योग के हालात मिलने वाली रियायतों के बावजूद खराब ही रहेंगे। अब जानिए हकीकत जो चीनी के मिठास जितनी ही कड़वी है। केंद्र सरकार चीनी उद्योग को दिए जा रहे निर्यात प्रोत्‍साहन समय को एक साल के लिए बढ़ाएगी। एथनॉल की ब्‍लेंडिंग पांच से बढ़ाकर दस फीसदी की जाएगी, जबकि इस समय ब्‍लेंडिंग पांच तो छोड़ों दो फीसदी भी नहीं हो रही। सीधे गन्‍ने में से एथनॉल बनाने का ढांचा ही नहीं है। ऐसी बुनियादी सुविधाएं खड़ी करने में दो साल लगेंगे। नाबार्ड बैंक के कर्ज को रिस्‍ट्रक्‍चरिंग करने की है तो हम आपको बता दें कि शेयर बाजार में लिस्‍टेड किसी भी शुगर कंपनी के पास नाबार्ड बैंक का कर्ज नहीं है, तो फायदा किसे मिलेगा। केवल उत्‍तर प्रदेश में गन्‍ने के दाम घटाए जाएं तो ही वहां की चीनी मिलों को लाभ हो सकता है अन्‍यथा समूचा चीनी उद्योग घाटे की भेंट। बलरामपुर, बजाज, त्रिवेणी और रेणुका शुगर में चतुर खिलाड़ी शार्ट सेलिंग कर रहे हैं तो शेयरों को खरीदने की सिफारिश कैसे की जा रही है। यदि शार्ट सेलिंग न हो रही हो तो भी चीनी शेयरों को न लें, नजरअंदाज करें। बीएसई सेंसेक्‍स 650 अंक जिस दिन उछला उस दिन चीनी शेयरों में आग लगी हुई दिखी लेकिन जब मामला डिलीवरी का आया तो यह केवल आठ से इक्‍कीस फीसदी थी। ऐसे में इन शेयरों के भाव और वोल्‍यूम बढ़ाना धोखा नहीं है तो क्‍या है।


अक्‍टूबर से नया चीनी सीजन शुरु होने जा रहा है और उस समय चीनी का ओपनिंग स्‍टॉक सौ लाख टन रहेगा। जबकि उत्‍पादन तीन सौ लाख टन होने का अनुमान लगाया जा रहा है। कुल उपलब्‍धता चार सौ लाख टन चीनी। इसमें से 210 लाख टन घरेलू खपत और 40 लाख टन निर्यात को निकाल दें तो 50 लाख टन चीनी बगैर बिकी बचती है। यानी अक्‍टूबर 2008 में चीनी का ओपनिंग स्‍टॉक 150 लाख टन। रुपया मजबूत होने के बावजूद चीनी का निर्यात तो होगा, लेकिन निर्यात को झटका भी लगेगा। आज से 15 दिन पहले चीनी 270 डॉलर प्रति टन एफओबी यानी 11070 रुपए प्रति टन बिक रही थी जो अब 260 डॉलर प्रति टन एफओबी आ गई है। इसका मतलब यह हुआ कि प्रति डॉलर 39.80 रुपए के अनुसार 10350 रुपए प्रति टन एफओबी मिल रहे हैं। इस तरह 15 दिन में एक टन पर 720 रुपए का नुकसान। यदि अब रुपया और मजबूत होता है तो चीनी मिलों की हालत क्‍या होगी, आप खुद समझ सकते हैं। डायबिटीज के मरीजों को चीनी खिलाने का मतलब समझते हैं ना, आत्‍महत्‍या।

यहां रखें नजर : 24 सितंबर से शुरू होने वाले नए सप्‍ताह में बीएसई सेंसेक्‍स 16933 अंक के ऊपर बंद होता है तो यह 17816 तक जा सकता है। स्‍पोर्ट स्‍तर 16068 अंक। निफ्टी 4673 के स्‍पोर्ट के साथ 4958 से ऊपर बंद होता है तो 5043 अंक तक जाने के अवसर हैं। इस सप्‍ताह एफ एंड ओ का सैटलमेंट भी होगा लेकिन चाल तेजी की रहने की उम्‍मीद है। हालांकि, सैटलमेंट के समय हर बार खिलाड़ी चाल बदलते हैं। अगले सप्‍ताह टेल्‍को, मारुति, एसीसी, ओएनजीसी और एम एंड एम फ्रंटरनर रह सकते हैं। अन्‍य हीरो: आईसीआई इंडिया, मास्‍टेक, आईडीबीआई, जीएमआर इंफ्रा, एटलास कोप्‍को, नार्गाजुन कंसट्रक्‍शन, इगारसी मोटर्स, रिलायंस पेट्रो, आरएनआरएल, पायोनियर एम्‍ब्रायडरी, अंसल प्रोपर्टीज, बाटलीबॉय, बेस्‍ट ईस्‍टर्न होटल और निप्‍पो बैटरीज।

September 22, 2007

शेयर बाजार में चमक बनी रहने की आस

हितेंद्र वासुदेव
शेयर बाजार ने पिछले सप्‍ताह ‘क्‍या सेंसेक्‍स शिखर को पार कर पाएगा..?’ का जवाब सकारात्‍मक दिया। हमने शेयर बाजार को ब्रेकआउट होते और नई ऐतिहासिक ऊंचाई बनाते देखा। पिछले सप्‍ताह बीएसई सेंसेक्‍स 15664.74 अंक पर खुला और नीचे में 15467.46 अंक तक गया लेकिन बाद में यह तेजी से उठकर 16616.84 के मुकाम पर पहुंच गया। अंत में यह 16564.23 अंक पर बंद हुआ। इस तरह सेंसेक्‍स ने साप्‍ताहिक आधार पर 927 अंक की रिकॉर्ड तोड़ बढ़त हासिल की। हमने सेंसेक्‍स में तीन सप्‍ताह पहले नौ सौ अंक की बढ़त देखी थी और फिर से पिछले सप्‍ताह नौ सौ अंक का उछाल देखा।

बीएसई सेंसेक्‍स में तेजी का दौर 31 अगस्‍त 2007 को साप्‍ताहिक बंद स्‍तर 15318 अंक से ही चल रहा है। नरमी की बात करें तो साप्‍ताहिक रुझान शुक्रवार को 15769 अंक से बंद आने पर या सेंसेक्‍स के तेजी से गिरकर 15300 से नीचे पहुंचने पर ही दिखेगा। अगले सप्‍ताह करेक्‍शन देखने को मिल सकता है लेकिन इसमें बढ़त की गुजांइश से भी इनकार नहीं किया जा सकता। अब सेंसेक्‍स आने वाले समय में 17957-19248-21337 पर दिख सकता है। 27 फरवरी 2008 से 19 मार्च 2008 के बीच सेंसेक्‍स 17957 तक पहुंचने की उम्‍मीद की जा सकती है। देखा जाए तो 16 हजार से 17 हजार का सफर सबसे कम समय में होगा। साप्‍ताहिक स्‍पोर्ट 16216-15815-15300 पर होगा। साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 16964 पर होगा।

शेयर बाजार की व्‍यापक स्थिति के लिए इलियट वेव काउंट को देखें:
फर्स्‍ट काउंट
वेव 1 – 2594 to 3758;
वेव 2 – 3758 to 2828;
वेव 3 – 2828 to 12671;
इंटरनल्‍स ऑफ वेव 3
वेव i – 2904 to 3416
वेव ii – 3416 to 2904
वेव iii – 2904 to 6249
वेव iv – 6249 to 4227
वेव v – 4227 to 12671
वेव 4
वेव a – 12671 to 8799
वेव b – 8799 to 14723
वेव c – 14723 to 12316
वेव d – 12316 to 15868
वेव e- 15868 to 13799
वेव 5 – 13799 to 16616 (यह वेव इस समय चल रही है)

सप्‍ताह के लिए रणनीति
शेयर बाजार गिरने पर 16216-15815 के स्‍तर को खरीद के लिए बेहतर माना जा सकता है। बीएसई सेंसेक्‍स के बढ़कर 17957-19248-21337 अंक पहुंचने की उम्‍मीद है। अगले सप्‍ताह के लिए रेसीसटेंस 16964 होगा। अनुवाद: कमल शर्मा

September 20, 2007

शेयर बाजार कहीं भागकर नहीं जा रहा...

भारतीय शेयर बाजार बीएसई सेंसेक्‍स के नई ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अधिकतर निवेशकों का कहना था कि जल्‍दी बताओं कौन कौनसी कंपनियों के शेयर खरीदें...हम तो गाड़ी चूक गए। गाड़ी न पकड़ पाए और यदि गाड़ी में बैठे हैं तो ऐसे निवेशक एक बार इसे पढ़ लें...शेयर बाजार में गिरावट का खेल दस अक्‍टूबर के बाद....। हम गाड़ी पकड़ने के लिए दौड़ने वाले निवेशकों को राय देना चाहेंगे कि शेयर बाजार में आपाधापी का खेल न खेलें और अब तक जो भी निवेशक शेयर बाजार को कोसते हुए मिलते हैं या जिन्‍होंने इस बाजार में अपने हाथ जलाएं हैं वे आपाधापी में थे कि मैं क्‍यों नहीं पैसा कमा सका। उसकी कमीज मेरी कमीज से ज्‍यादा सफेद क्‍यों।

इस समय शेयर बाजार में अलग अलग विश्‍लेषक अलग अलग बात कह रहे हैं...जैसे क्रिस्‍टॉप लालो को लें...उभरते शेयर बाजारों में विपुल संभावनाएं हैं। लेकिन मुद्रा यानी करेंसी एपरिसिएट होना लंबी अवधि के लिए अच्‍छा नहीं है। मेरे ख्‍याल से इस साल के आखिर या अगले साल की शुरूआत में बीएसई सेंसेक्‍स 20 हजार अंक तक पहुंच जाएगा। अब लें...जेएम फाइनेंशियल के तकनीकी विश्‍लेषक गौतम शाह को...अक्‍टूबर का महीना बाजार के लिए क्रूशिएल है। इस महीने शेयर बाजार में अगस्‍त महीने जैसा करेक्‍शन दिखाई दे सकता है। बाजार का मजबूत रेसीसटेंस 16500-16700 पर दिखता है।...टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्‍यमों में यह चर्चा जोरों पर है कि अगला मुकाम क्‍या।

सेंसेक्‍स का मुकाम कुछ भी हो लेकिन हम सभी निवेशकों से कहना चाहेंगे कि किसी भी कंपनी के शेयर खरीदने से पहले उसके बारे में सारी जानकारी जुटा लें क्‍योंकि इस समय बाजार में अफवाहों का दौर है कि यह लो...यह पकड़ो...यहां बिल्‍कुल मत चूको...भागो....पकड़ो...एक निवेशक होने के नाते सारी सूचनाएं आपके पास होनी चाहिए लेकिन जिस कंपनी के शेयर लेना चाहते हैं उन्‍हें आप अपने पास कितने समय रखेंगे यानी कितने समय के कारोबार के हिसाब से खरीदना चाहते हैं...इंट्रा डे...शार्ट टर्म....लांग टर्म...। किसी भी सुनी सुनाई टिप के आधार पर शेयर नहीं खरीदें...क्‍योंकि ऐसा न हो कि शेयर बाजार का कचरा आपके हाथ में आ जाए और आपके सपनों पर पानी फिर जाए। बेहतर कंपनियों और तेजी से बढ़ते उद्योगों के ही शेयर खरीदे लेकिन छोटी छोटी मात्रा में। सारा खरीद ऑर्डर एक साथ न दें।

हमेशा यह ध्‍यान रखें कि बाजार कहीं भागकर नहीं जा रहा और कंपनियां तो बनती बिगड़ती रहती है। यदि आप रिलायंस चूक गए तो कोई बात नहीं...क्‍योंकि रिलायंस को आज तक सफर तय करने में कई साल लगे हैं। ठीक ऐसी ही दूसरी कंपनी की तलाश किजिए और देखिए वह भी इतने साल बाद रिलायंस बनती है या नहीं। एल एंड टी छूट गई तो क्‍या...पकडि़ए दूसरी इंजीनियरिंग कंपनी जो बरसों बाद दूसरी एल एंड टी होगी। असली निवेशक वही है जो भारत की दूसरी बड़ी भावी कंपनियों में आज कम निवेश करता है और हो जाता है करोड़पति कुछ साल बाद। वर्ष 1980 में विप्रो के सौ रुपए वाले सौ शेयर को आपने खरीदा होता तो आज आपके पास दो सौ करोड़ रुपए हो सकते थे। वर्ष 1992 में इंफोसिस के शेयर में दस हजार रुपए का निवेश किया होता तो आपके पास आज डेढ़ करोड़ रुपए हो सकते थे। इसी तरह 1980 में रेनबैक्सी में एक हजार रुपए का निवेश किया होता तो आपके पास आज तकरीबन दो करोड़ रूपए होते। पुरानी बातें छोड़ भी दें तो अगर आपने 2004 की गिरावट में यूनिटेक में 40 हजार रुपए का निवेश किया होता तो आज आपके पास एक करोड़ दस लाख रुपए हो सकते थे। इंतजार करने वाले निवेशकों ही यहां फायदा होता है, भले ही सेंसेक्‍स कुछ भी हो। जिस तरह एक बच्‍चे को पूरी तरह क्षमतावान होने में समय लगता है वही इन कंपनियों के साथ होता है। इसलिए उन कंपनियों की तलाश कीजिए जो कल के युवा होंगे।

September 19, 2007

शेयर बाजार में गिरावट का खेल दस अक्‍टूबर के बाद

अमरीकी अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए फैडरल रिजर्व के ब्याज दरों में अपेक्षित चौथाई फीसदी के बजाय आधा प्रतिशत कटौती कर दुनिया भर के शेयर बाजारों को तगड़ी ऊंचाई की ओर बढ़ा दिया है। डॉव जोंस भी वर्ष 2002 के बाद कल पहली बार एक ही दिन में 336 अंक उछला। भारतीय शेयर बाजार बीएसई ने अपनी पिछली ऊंचाई 15869 को पीछे छोड़ते हुए 16 हजार अंक को पार किया और इस समय यह 16261 अंक चल रहा है। इस समय तक सेंसेक्‍स में 591 अंक का जोरदार इजाफा। निवेशक झूम रहे हैं कि सेंसेक्‍स दौड़ गया लेकिन मिड कैप और स्‍मॉल कैप की कितनी कंपनियों के शेयरों में उछाल आया है।

आज की दौड़ का आम निवेशक को जो मझौली और छोटी कंपिनयों में पैसा लगाता है कोई फायदा नहीं हुआ। कौनसे शेयर दौड़ रहे हैं, जरा यह सोचिए। क्‍या आज आपको शेयर बाजार से सेंसेक्‍स की तुलना में बड़ा फायदा हुआ है। अधिकतर निवेशकों का इस पर नकारात्‍मक जवाब है। जब आम निवेशक को लाभ नहीं हुआ है तो मौजूदा तेजी किसके हित में। विदेशी संस्‍थागत निवेशक, घरेलू बड़े संस्‍थागत निवेशक और म्‍युच्‍यूअल फंड इस मलाई के भागीदार बने हैं। इस समय सभी जगह यह बात आ रही है कि अमरीकी कदम से शेयर बाजारों को खूब लाभ होगा और तेजी जारी रहेगी। आम निवेशक को पैसा निवेश करना चाहिए। लेकिन आम निवेशक तो मझौली व छोटी कंपनियों में पैसा लगाता है और जब ये शेयर बढ़ते नहीं तो उसे क्‍या फायदा। हां, खूबसूरत पिक्‍चर खड़ी कर छोटे निवेशकों की जेब से पैसा निकालने के लिए जमकर राय देना संस्‍थागत निवेशकों के लिए कारोबार करने वाले विश्‍लेषकों के लिए जरुर मुनाफे का सौदा है। ये ही विश्‍लेषक चंद दिनों पहले कह रहे थे कि शेयर बाजार का बंटाढार हो जाएगा।

केवल अमरीका ने ब्‍याज दरों में कटौती की और दुनिया भर की अर्थव्‍यवस्‍था सुधर गई। ऐसा कोई जादूई कदम हर देश क्‍यों नहीं उठा लेता ताकि सभी जगह खुशहाली दिखाई दे। अमरीका ने ब्‍याज दरों में जो कटौती की है, उसके परिणाम तत्‍काल दिखाई नहीं देंगे और अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार भी नहीं होगा। सबप्राइम का मामला केवल इस कदम से ठीक हो सकता है तो पहले यह कदम क्‍यों नहीं उठा लिया गया। हम आम निवेशक को कहना चाहेंगे कि मृग मरीचिका में न फंसे और अपने विवेका का उपयोग कर ही नया निवेश करें। अमरीका में भी अर्थव्‍यवस्‍था की समीक्षा इस साल के अंत में होगी तभी यह पता चल पाएगा कि ब्‍याज दर में जो कमी की गई है क्‍या वाकई वह लाभकारी रही। ऐसा न हो कि साल के आखिर में अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था में कमजोरी बढ़ जाए। अमरीका पिछले लंबे समय से अर्थव्‍यवस्‍था में आई कमजोरी से उबरने का हर संभव प्रयास कर रहा है लेकिन वह मंदी के दलदल में फंसता ही जा रहा है।

अब बात करते हैं भारतीय शेयर बाजार की : क्रूड तेल इस समय तकरीबन 81 डॉलर प्रति बैरल बिक रहा है जो काफी ऊंचा भाव कहा जा सकता है। क्रूड के दाम इसी तरह ऊंचाई पर जमे रहे तो देश में पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ना तय है और यह बढ़त इतनी ज्‍यादा होगी कि आम आदमी पर भारी पड़ेगी। पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ने की मार चौतरफा पड़ेगी। भारत व अमरीका परमाणु करार पर वामपंथी फिर से हलचल में आ गए हैं। इस करार पर समिति बनने के बाद लग रहा था कि राजनीतिक स्थिरता आ जाएगी। लेकिन माकपा महासचिव प्रकाश कारत का कहना है कि इस करार को छह महीने के लिए स्‍थगि‍त करो अन्‍यथा राजनीतिक संकट के लिए तैयार रहो। इस तरह के आने वाले बयान मार्केट के मूड को बिगाड़ने के लिए पर्याप्‍त है। अब तमिलनाडु के मुख्‍यमंत्री करुणानिधि जो एक जमाने में भाजपा के दोस्‍त थे रामसेतु पर यूपीए में जूतमपैजार करने जा रहे हैं। कांग्रेस अलग राप अलपा रही है और डीएमके अलग। भारत अमरीका परमाणु करार ओर राम सेतु के मूद्दे मौजूदा केंद्र सरकार के लिए कष्‍टकारी रहेंगे ओर हो सकता है‍ कि कांग्रेस को मध्‍यावधि चुनाव के लिए मन बनाना पड़े।

दस अक्‍टूबर के बाद भारतीय कार्पोरेट जगत के दूसरी तिमाही के नतीजे आने शुरू हो जाएंगे। नतीजों के उस मौसम में आईटी कं‍पनियों से बेहतर नतीजों की उम्‍मीद नहीं की जा सकती। आईटी के साथ कुछ और सेक्टर की कंपनियों के नतीजे भी अच्‍छे नहीं आएंगे, जो शेयर बाजार के मूड को बिगाड़ेंगे। इन सभी कारणों से बीएसई सेंसेक्‍स दस अक्‍टूबर के बाद एक हजार से बारह सौ अंक लुढ़क जाए तो अचरज नहीं होना चाहिए। हालांकि, जो निवेशक लंबा खेल खेलना चाहते हैं उन्‍हें चिंतित होने की जरुरत नहीं है। यह गिरावट इंट्रा डे कारोबार करने वालों के माथे पर चिंता की लकीर खींचेगी।

September 18, 2007

शेयर बाजार में रही चमक

अमरीकी फैडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरों में कमी किए जाने की प्रबल संभावनाओं के बीच यूरोप के शेयर बाजारों में आई तेजी का असर 18 सितंबर 2007 को भारतीय शेयर बाजार में भी देखने को मिला। शेयर बाजार के मौजूदा रुझान को देखते हुए इस तेजी के आगे भी बने रहने की संभावना है।

बीएसई सेंसेक्‍स में तेजी कारोबार दूसरे चरण में आई जब इसकी अगुआई तेल एवं गैस और बैंकिंग स्‍टॉक्‍स ने की। बीएसई में कुल 1794 शेयर बढ़े, जबकि 958 में गिरावट देखी गई। केवल 55 कंपनियों के शेयरों में कोई बदलाव नहीं देखा गया। बीएसई सेंसेक्स में 165 अंक की जोरदार बढ़त दर्ज की गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 52 अंक चढ़ा।

बाजार विश्लेषक कहते हैं कि अमरीकी अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए फैडरल रिजर्व के ब्याज दरों में कम से कम चौथाई फीसदी की कमी किए जाने की पूरी-पूरी संभावना है। हालांकि, यह कटौती आधा प्रतिशत तक भी हो सकती है।

एल एंड टी को सेल से 7।6 अरब रुपए का आर्डर मिलने से बढ़त देखी गई। लेन्‍को इंफ्राटेक का यूएई की कंपनी गल्‍फटेनर के साथ पोर्ट और ट्रांसपोर्टेशन परियोजनाओं के लिए करार होने से गर्मी आई। बिकवाली दबाव से एफएमसीजी शेयर गिरे।

शेयर बाजार में गर्मी लाने वाले शेयर रहे : आईसीआईसीआई बैंक 925 रुपए, एसबीआई 1693 रुपए और भारती एयरटेल 832 रुपए। गिरने वाले रहे सिप्‍ला 168 रुपए, विप्रो 444 रुपए और आईटीसी 180 रुपए। बिग गेनर्स रहे : रेमंड 327 रुपए, इंजीनियर्स इंडिया 582 रुपए, इंडुसइंड बैंक 73 रुपए। बिग लूजर्स : हैक्‍सावेर 127 रुपए, नेवली लिग्‍नाइट 96 रुपए और अपोलो टायर्स 39 रुपए।

September 17, 2007

क्‍या सेंसेक्‍स शिखर को पार कर पाएगा ?

हितेंद्र वासुदेव
बीएसई सेंसेक्‍स जिस मुकाम पर है वहां उसकी परीक्षा उसके पिछले शिखर पर होगी। सेंसेक्‍स ने इसका प्रयास भी किया। पिछले सप्‍ताह सेंसेक्‍स का उच्‍च स्‍तर 15824 रहा, जबकि पिछला उच्‍चतम शिखर 15868 था। इस शिखर पर सेंसेक्‍स की परीक्षा हो रही है लेकिन चंचलता और उतार चढ़ाव भी देखा गया। बीएसई सेंसेक्‍स पिछले सप्‍ताह 15413.58 पर खुला और नीचे में 15363.53 तक गया। इसने ऊपर में 15824.65 अंक तक जाने का प्रयास किया लेकिन आखिर में 15603.80 अंक पर बंद हुआ। इस तरह साप्‍ताहिक आधार पर इसमें 13 अंक की बढ़ोतरी रही। कुल मिलाकर सेंसेक्‍स में हलचल सीमित रही। 31 अगस्‍त को समाप्‍त सप्‍ताह में सेंसेक्‍स 15318 पर बंद हुआ और तभी से साप्‍ताहिक रुझान ऊपर का है। साप्‍ताहिक रुझान नरमी में पलट सकता है यदि यह शुक्रवार के 15234 से नीचे से बंद हो।

यहां एक बार फिर यह अहम सवाल उठता है कि क्‍या सेंसेक्‍स अपने‍ शिखर को पार करेगा। हालांकि, इस संबंध में कोई भी साफ तौर पर नहीं कह सकता। हां, सेंसेक्‍स 15868 के ऊपर बंद होता है तो यह स्थिति को और साफ करेगा। दैनिक बंद स्‍तर 15868 अंक से ऊपर होना ही पर्याप्‍त नहीं है, इसके लिए साप्‍ताहिक बंद 15868 अंक से ऊपर होना जरुरी है जो साप्‍ताहिक कैंडल को सकारात्‍मक मजबूती देगा। ब्रेकआउठ के साथ साप्‍ताहिक वोल्‍यूम भी अहम होगा। यदि यह सब होता है तब हम मजबूत तेजी की उम्‍मीद कर सकते हैं। जब बाजार अपने अहम शिखर के पास होता है तो हम हमेशा बाजार में मुनाफा वसूली की वजह से चंचलता यानी वॉलिटीलिटी और उतार चढ़ाव देखते हैं। यदि सेंसेक्‍स ब्रेकआउट होता है और यह 15868 के पार बंद होता है तो सेंसेक्‍स के आने वाले समय में 17957-19248-21337 अंक तक जाने की उम्‍मीद कर सकते हैं। समय के हिसाब से देखें तो सेंसेक्‍स के 15868 के ऊपर बंद होने पर 27 फरवरी 2008 से 19 मार्च 2008 के बीच सेंसेक्‍स के 17957 अंक पहुंचने की अपेक्षा की जा सकती है। लेकिन इसके लिए साप्‍ताहिक बंद 15868 अंक के ऊपर आना जरुरी है। साप्‍ताहिक स्‍पोर्ट 15597-15370-15300 पर होगा। साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 15800-15900 होगा।

शेयर बाजार की स्थिति को विस्‍तार से जानने के लिए इलियट वेव काउंट को देखें :
फर्स्‍ट काउंट :
वेव 1 – 2594 to 3758;
वेव 2 – 3758 to 2828;
वेव 3 – 2828 to 12671;
इंटरनल्‍स ऑफ वेव 3
वेव i – 2904 to 3416
वेव ii – 3416 to 2904
वेव iii – 2904 to 6249
वेव iv – 6249 to 4227
वेव v – 4227 to 12671
वेव 4
वेव a – 12671 to 8799
वेव b – 8799 to 14723
वेव c – 14723 to 12316
वेव 5 – 12316 to 15868
इंटरनल्‍स ऑफ वेव 5
वेव 1 – 12316 to 13386
वेव 2 – 13386 to 12425
वेव 3 – 12425 to 14384
वेव 4
वेव a – 14384 to 13554
वेव b – 13554 to 14683
वेव c – 14683 to 13946
वेव 5 – 13946 to 15868

इंटरनल ढांचे में बदलाव आ सकता है यदि सेंसेक्‍स अपने टॉप को पार कर लेता है तो।
संशोधित वेव ढांचा - A-B-C
संशोधित पैटनर्स वेव के साथ A – WXY
वेव A – 15868 to 13779
वेव B- 13779 to 15824 (इस समय जारी हलचल)

यदि सेंसेक्‍स अपने टॉप को पार करता है और हम अनियमित सपाट स्थ‍िति देख सकते हैं। सेंसेक्‍स गिरता है और 15300 से नीचे बंद होता है तो वेव बी तेजी को पीछे खींचेगी और वेव सी इसे तोड़ेगी। अनियमित सपाट वेव बी पर अमल होता है तो यह सेंसेक्‍स को कम से कम 16303 तक ले जा सकती है। सेंसेक्‍स के पिछले शिखर को सर करने के बाद हम फिर से समीक्षा करेंगे। वैकल्पिक काउंट ने अभी उम्‍मीद जगा रखी है। फर्स्‍ट काउंट में देखें तो करेक्‍शन अल्‍प समय के लिए होगा न कि लंबी अवधि के लिए।

वैकल्पिक काउंट
वेव 1 – 2594 to 3758;
वेव 2 – 3758 to 2828;
वेव 3 – 2828 to 15868;
इंटरनल्‍स ऑफ वेव 3
वेव 1 – 2904 to 3416
वेव 2 – 3416 to 2904
वेव 3 – 2904 to 6249
वेव 4 – 6249 to 4227
वेव 5- 4227 to 15868
इंटरनल्‍स ऑफ वेव 5 टर्मिनल पैटर्न में
वेव A – 4227 to 12671
वेव B – 12671 to 8799
वेव C – 8799 to 14724
वेव D – 14724 to 12316
वेव E – 12316 to 15868
वेव 4
वेव a – 15868 to 13779
वेव b – 13779 to 15824 (इस समय जारी हलचल)

साप्‍ताहिक रणनीति
15868 पर मुनाफा वसूली करें और जब सेंसेक्‍स 15900 से ऊपर बंद आए तो फिर से बाजार में प्रवेश करें। सप्‍ताह के निचले स्‍तर या 15300 जो भी ब्रेकआउट के समय कम हो को स्‍टॉप लॉस रखें। अनुवाद: कमल शर्मा

वाह मनी ब्‍लॉग को चाहिए दो यंग जर्नलिस्‍ट

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September 15, 2007

बीएसई सेंसेक्‍स दिवाली तक 17 हजार

भारतीय शेयर बाजार एक बड़े झटके से उबरता हुआ एक बार फिर नई ऊंचाई की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में यह सवाल फिर से हर निवेशक के मन में उठ रहा है कि क्‍या शेयर बाजार फिर से गोता तो नहीं लगा जाएगा या यह तेजी का माहौल निरंतर बना रहेगा। यदि हम भारतीय शेयर बाजार के मौजूदा रुझान को देखें तो बीएसई सेंसेक्‍स इस साल के अंत तक 17 हजार अंक को पार कर सकता है बशर्ते राजनीतिक मोर्चे पर स्थिरता कायम रहे।

भारत अमरीका परमाणु करार की समीक्षा के लिए समिति बनने के बाद भी जिस तरह के बयान आ रहे हैं उससे यह लगता है कि कांग्रेस एवं वामपंथी एक दूसरे की ताकत और संभावना को टटोल रहे हैं, जबकि समिति बनने के बाद सार्वजनिक बयान बंद हो जाने चाहिए थे और जो कुछ आना चाहिए वह समिति की रिपोर्ट के माध्‍यम से आना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। माकपा महासचिव प्रकाश कारत का मूड कुछ और ही दिखता है। संभवत: वे चाहते होंगे कि उनकी अगुआई में वामपंथी पश्चिम बंगाल एवं केरल के साथ कुछ और जगह अच्‍छा प्रर्दशन कर सकते हैं। यदि वामपंथी केंद्र सरकार का साथ छोड़ते हैं तो बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज का सेंसेक्‍स इस साल के अंत तक 17 हजार अंक को नहीं छू पाएगा। राजनीतिक और आर्थिक पहलू सभी देशों के विकास पर सीधा असर डालते हैं और जब तक इन दोनों मोर्चो पर चंचलता रहेगी, सब कुछ ठीकठाक नहीं हो सकता। कुछ दिनों पहले जिस तरह की राजनीतिक बयानबाजी चली उससे आर्थिक सुधारों पर विपरीत असर पड़ता है। सरकार अनेक आर्थिक सुधार करना चाहती है लेकिन गठबंधन सरकार होने से सब कुछ संभव नहीं हैं। भाजपा की भी सरकार गठबंधन सरकार थी, सो उसे भी कई समझौते करने पड़े। तेज आर्थिक विकास के लिए एक दलीय सरकार का होना जरुरी है या फिर आपसी सूझबूझ बड़ी होनी चाहिए।

अब हम यहां यह मान लेते हैं कि खींचतान के बावजूद मौजूदा केंद्र सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर लेगी। ऐसा होता है तो इस साल के आखिर तक बीएसई सेंसेक्‍स 17 हजार अंक को पार कर लेगा। वाह मनी का मानना है कि अगले साल यानी 2008 के आखिर में सेंसेक्‍स 25 हजार अंक के आसपास दिखाई देगा। सेंसेक्‍स के इस सफर में अब आईटी क्षेत्र की भूमिका बड़ी नहीं रहेगी, यह तय है। सेंसेक्‍स के अगले सफर के साथी पावर, पावर ट्रांसमिशन, पावर डिस्‍ट्रीब्‍यूशन, कंसट्रक्‍शन, कैपिटल गुड्स और मेटल क्षेत्र की कंपनियां होंगी। इस समय अनेक गैर अमरीकी फंड भारत की ओर देख रहे हैं, जो शेयर बाजार के लिए अच्‍छी खबर है। साथ ही अमरीकी फेड रिजर्व की 18 सितंबर को होने वाली बैठक में ब्‍याज दरों में 25 अंक तक की कटौती होने की उम्‍मीद है, जो शेयर बाजार के लिए एक बेहतर खबर होगी। हालांकि, क्रूड के दाम शेयर बाजार के लिए जरुर चिंताजनक है क्‍योंकि इस समय क्रूड का दाम तकरीबन 80 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल चल रहा है जिसे जरुर चिंता हो रही है और यह कारक अर्थव्‍यवस्‍था पर दबाव डालता है लेकिन उभरती अर्थव्‍यवस्‍थाओं को अंतरराष्‍ट्रीय कारकों को सहना पड़ता है। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था पहले भी इस तरह के दबाव को झेल चुकी है।

जेएम फाइनेंशियल के कार्यकारी निदेशक और पूंजी बाजार प्रमुख अतुल मेहरा का कहना है कि इस साल दिवाली तक बीएसई सेंसेक्‍स 17500 अंक को छू लेगा। वे भारतीय शेयर बाजार में बड़ी तेजी मानते हैं। अडवानी ओटीसी डीलर्स के पशुपति अडवानी की राय में बाजार में मंदी आएगी और बीएसई सेंसेक्‍स 16 हजार अंक को छूने से पहले 15 हजार तक लौटेगा। तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव की राय में सेंसेक्‍स इस समय फिर से अपनी पिछली ऊंचाई के करीब है और यदि यह पुलबैक नहीं होता है तो दिवाली से दिसंबर अंत तक 17/18 हजार अंक पहुंच सकता है। वासुदेव का कहना है कि पावर, पावर ट्रांसमिशन, पावर डिस्‍ट्रीब्‍यूशन, कंसट्रक्‍शन कंपनियों के शेयर तेजी से बढ़ेंगे। इसके अलावा वे एफएमसीजी क्षेत्र को डार्क हॉर्स मानते हैं। उनकी राय में इस एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों के दाम काफी नीचे आ चुके हैं और अब इनमें भी तेजी की संभावना दिख रही है।

September 14, 2007

गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं, सेंसेक्‍स इस साल 17 हजार के पार

वाह मनी के सभी चहेतों को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं। भारतीय शेयर बाजार के मौजूदा मूड को भांपते हुए इस साल के अंत तक बीएसई सेंसेक्‍स 17 हजार अंक के पार होगा। सेंसेक्‍स के इस सफर पर पढि़ए खास स्‍टोरी कल गणेश चतुर्थी के मौके पर। वाह मनी के चहेतों की मांग पर हम जल्‍दी ही लेखों की एक श्रृंखला शुरु करने जा रहे हैं उन निवेशकों के लिए जो बिल्‍कुल नए हैं और शेयर बाजार से अनजान हैं। साथ ही शेयर बाजार का रोजाना का हालचाल और किसी एक विशेष कंपनी से जुड़ी खबर एवं उसका असर हम आपको बताएंगे, ताकि आप यह निर्णय कर सकें कि जिस खबर को आप पढ़ रहे हैं उस कंपनी में निवेश करें या नहीं अथवा अपने निवेश को बनाए रखें या बाहर निकल जाएं। वाह मनी पर आप और क्‍या चाहते हैं यानी आप शेयर बाजार से जुड़ी और कैसी जानकारियां जानना चाहते हैं, हमें जरुर बताएं।

September 13, 2007

शेयर बाजार में पैसा लगाने से पहले

रिस्क प्रोफाइल सबसे पहले अपना रिस्क प्रोफाइल तय कर लें। यानी यह जान लें कि इनवेस्टमेंट के मामले में आप किस हद तक जोखिम उठाने की स्थिति में हैं। इनवेस्टमेंट से संबंधित कोई ठोस निर्णय लेने का यह एकदम सही आधार है। आपका इनवेस्टमेंट आपके रिस्क प्रोफाइल के अनुसार ही होना चाहिए। रिस्क प्रोफाइल आपकी उम्र, निजी जिम्मेदारियों, सरप्लस आमदनी या बचत और आपकी आर्थिक व पारिवारिक हालत पर निर्भर करता है। 25 साल का एक प्रफेशनल, 56 साल के किसी सर्विसमैन की तुलना में कहीं ज्यादा जोखिम उठाने की स्थिति में होता है। इनवेस्टमेंट के मामले में यही फॉर्म्युला लागू होता है, 'ज्यादा जोखिम, ज्यादा मुनाफा'। शेयर मार्केट में इनवेस्टमेंट के मामले में यह फॉर्म्युला कुछ ज्यादा ही फिट बैठता है, क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल कुछ ज्यादा ही रहता है। दूसरी ओर, बॉन्ड, फिक्स्ड डिपॉजिट, पीपीएफ, पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम वगैरह उन लोगों के लिए हैं, जो ज्यादा जोखिम उठाने की स्थिति में नहीं होते।

देर नहीं भली इनवेस्टमेंट के मामले में सीधा-सा नियम है कि आपके पास वक्त जितना कम होगा, आपको उतना ही ज्यादा सावधान रहना होगा। अगर आप काफी कम उम्र में, मान लीजिए 20 साल की उम्र से ही, इनवेस्टमेंट शुरू करते हैं, तो जाहिर है कि उस समय आप ज्यादा जोखिम उठाने की स्थिति में होंगे। वजह यह कि उस समय आपके ऊपर ज्यादा जिम्मेदारियां नहीं होंगी। ऐसे में आप अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा इनवेस्टमेंट करने की स्थिति में होंगे। इनवेस्टमेंट के लिए ज्यादा रकम होना और ज्यादा जोखिम उठाने की स्थिति में होना, ये दोनों बातें एक साथ मिलकर आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होंगी। अगर आप कम उम्र से ही इनवेस्टमेंट करते हैं, तो आपकी रकम में वृद्धि और नुकसान से उबरने के लिए ज्यादा वक्त मिलेगा, जो अंतत: अच्छे नतीजे देगा।

रिसर्च है जरूरी शेयर बाजार में एंट्री करने से पहले थोड़ा रिसर्च कर लेना जरूरी है। इस बारे में ऐसा कोई कॉमन फॉर्म्युला नहीं है, जो हर इनवेस्टर के लिए सटीक साबित हो। यह रिसर्च आपकी निजी स्थिति (रिस्क प्रोफाइल, इनकम वगैरह) और आप कैसे शेयरों में इनवेस्ट करना चाहते हैं, इस पर निर्भर होना चाहिए। ऐसे में अलग-अलग कंपनियों के शेयरों की अपनी अलग खूबियां-खामियां होती हैं। इनके मद्देनजर ही आपकी रिसर्च होनी चाहिए। कंपनियों के तिमाही व सालाना नतीजे, कैश फ्लो, मैनेजमेंट, मार्केट कैप, पिछले साल भर के अंदर कंपनी की माली हालत व शेयर बाजार में परफॉर्मेंस आदि बातों से जुड़ी जानकारी जुटाकर उनका अध्ययन कर लेना सही रहेगा।

बुरा झेलने के लिए हमेशा रहिए तैयार आपने सारा होमवर्क कर लिया, इसके बावजूद आप निश्चिंत नहीं हो पा रहे हैं। आप किसी कंपनी के बारे में स्टडी कर उसके शेयर से जुड़े किसी नतीजे पर पहुंचते हैं। आपकी यह स्टडी आपको सेफ गेम खेलने में मदद करती है, लेकिन यह जान लीजिए कि इस बारे में कोई दावा नहीं कर सकता कि आपका निष्कर्ष गलत साबित नहीं होगा। बाजार का रुख कैसा होगा, इस बारे में कोई निश्चित तौर पर कुछ नहीं कह सकता। ऐसे में तमाम अच्छे संकेतों के बावजूद आपको विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए भी मानसिक तौर पर तैयार रहना चाहिए।

फैसला हो अपना आपका कोई मित्र वर्षों से शेयर बाजार में इनवेस्ट करता आ रहा है। आपने उनसे टिप्स ले लिए हैं और अब यह सोचकर कि कहीं मौका हाथ से निकल नहीं जाए, तत्काल शेयर बाजार में हाथ आजमाना चाहते हैं, तो जरा ठहरिए। पहले आप कुछ मूलभूत बातें चेक कर लें। जब आप एक बार शेयर बाजार में इनवेस्ट करना शुरू कर देते हैं, तो इसमें दिलचस्पी लगातार बढ़ती जाती है। फिर यह दोस्तों के बीच चर्चा के विषयों में शुमार हो जाता है। ऐसी चर्चाओं से मिले किसी टिप्स पर सीधे अमल करने के बजाय आप अपनी स्टडी और अपने विवेक के आधार पर निर्णय लें।

वैल्यू स्टॉक या ग्रोथ स्टॉक इनवेस्टर्स के बीच दोनों तरह के स्टॉक पॉपुलर हैं। वैल्यू स्टॉक में पैसा लगाने वाले तत्काल रिटर्न की चाह में इनवेस्टमेंट करते हैं, जबकि ग्रोथ स्टॉक में इनवेस्टमेंट करने वाले लोग तत्काल के बजाय भविष्य में अच्छा रिटर्न मिलने की उम्मीद में पैसा लगाते हैं। जोखिम को बैलेंस करने के उद्देश्य से बेहतर तो यही रहेगा कि आप दोनों तरह के स्टॉक में इनवेस्टमेंट करें। अगर आप इससे इतर फैसला लेते हैं, तो यह अपनी स्थिति का मूल्यांकन करते हुए लेना चाहिए।

इनवेस्टमेंट क्यों? आप इनवेस्टमेंट क्यों करना चाहते हैं? शेयर बाजार में इनवेस्टमेंट करने से पहले खुद से यह सवाल जरूर करें। अपनी इनकम बढ़ाना, अतिरिक्त पैसे को ठिकाने लगाना, जल्द रिटायर होने की प्लानिंग करना या रिटायरमेंट के बाद अच्छी आर्थिक स्थिति सुनिश्चित करना जैसे कई उद्देश्यों से लोग इनवेस्टमेंट करते हैं। आप किस उद्देश्य से इनवेस्टमेंट करने जा रहे हैं, यह जान लेने से आप सही इनवेस्टमेंट ऑप्शन तय कर सकेंगे। जब आप इनवेस्टमेंट का उद्देश्य और सही ऑप्शन तय कर लेंगे, तो आपको कम से कम जोखिम की संभावना रह जाएगी। नवभारत टाइम्‍स से साभार

September 11, 2007

शेयर बाजार तो चमकेगा ही

भारत और अमरीका के बीच परमाणु करार पर वामपंथियों ने जो रुख दिखाया और सरकार से समर्थन वापस लेने की बात तक कही अब उससे हर सांसद बचता नजर आ रहा है। मौजूदा यूपीए सरकार पूरे पांच साल चले इसकी पहल दस सांसदों ने शुरू कर दी है। इन सांसदों की अगुआई कर रहे राहुल बजाज का कहना है कि इस पहल का उद्देश्‍य सभी दलों की सरकार बनाकर मध्‍यावधि चुनावों को टालना है। ऐसे चुनाव से देश पर तगड़ा वित्‍तीय बोझ पड़ता है। हमारा आश्‍य मौजूदा लोकसभा अपनी अवधि पूरी करे यही है। इस समय मध्‍यावधि चुनाव होते हैं तो 2700 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस खर्च में राजनीतिक दलों द्धारा किए जाने वाला खर्च शामिल नहीं है। इस प्रयास की पहल भले ही दस सांसदों ने की हो, लेकिन हरेक पार्टी के सांसद के मन में तो यही है कि मध्‍यावधि चुनाव न हो।

राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं पर भरोसा करें तो देश में मध्‍यावधि चुनाव की संभावना कम ही है क्‍योंकि सभी दल जानते हैं कि भाजपा ने समय से पहले चुनाव कराकर अपनी सत्‍ता खो दी थी। वामपंथियों से लेकर दक्षिणपंथी तक इस बात के हिमायती हैं कि मध्‍यावधि चुनाव को टाला जाना चाहिए। यदि देश मध्‍यावधि चुनाव की ओर नहीं जाता है तो शेयर बाजार में तेजी भी तय है। लेकिन अगली तेजी की अगुआई बिजली क्षेत्र की कंपनियां करेंगी। यह जान लें कि पावर बगैर सब अधूरा है। पैसे का पावर या पावर का पैसा...वाह मनी हमेशा यह कहता आया है कि बिजली क्षेत्र में निवेश करें और अब क्‍या हो रहा है। बिजली क्षेत्र में निवेश के लिए सारे विश्‍लेषक सलाह दे रहे हैं। मै एक राजा हूं...अक्‍टूबर मध्‍य तक हमारे अनुमान के मुताबिक सेंसेक्‍स 16500 के आसपास दिखाई देगा और इस साल के अंत तक बीएसई सेंसेक्‍स 17 हजार के करीब होगा। ये रहे कुछ डार्क हॉर्स : एनटीपीसी, पीटीसी इंडिया, विजय बैंक, जेके लक्ष्‍मी सीमेंट, सीएट टायर्स।

September 09, 2007

मुनाफा वसूली के साथ करें शेयरों में कामकाज

यूरोपियन सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंग्‍लैंड ने भले ही ब्‍याज दरों को यथावत रखा हो लेकिन शेयर निवेशकों की नजर 18 सितंबर को होने वाली अमरीकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर है। इस बैठक में ब्‍याज दरों में कटौती की उम्‍मीद की जा रही है। लेकिन सब प्राइम की छाया से अभी अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था उबरी नहीं है। हाउसिंग और एम्‍पलायज के कमजोर आंकडों ने इस अर्थव्‍यवस्‍था को और हिला दिया है। लंदन मेटल एक्‍सचेंज में अलौह धातुओं के बढ़ रही आपूर्ति ने इन धातुओं के भाव को तोड़ दिया है जिसका असर मेटल शेयरों पर पड़ रहा है। हालांकि, घरेलू मोर्चे पर मुद्रास्‍फीति दर 16 महीने की निचले स्‍तर पर आ गई है लेकिन राजनीतिक स्थिरता नहीं है। ऐसा लग रहा है जैसे कि सभी राजनीतिक दल आर्थिक सुधारों पर ब्रेक लगाकर मध्‍यावधि चुनाव की तैयारी में जुट रहे हैं।

अगले सप्‍ताह यानी दस सितंबर को चालू होने वाले नए सप्‍ताह में बीएसई सेंसेक्‍स के 15125 से 15925 के बीच घूमने की उम्‍मीद है। पिछले दिनों की भारी गिरावट में बीएसई सेंसेक्‍स 13790 अंक तक आ गया था जो अब तक 1925 अंक बढ़ चुका है। यही वजह है निवेशकों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि शेयर बाजार ही बेहतर रिटर्न दे सकता है। लंबी अवधि के लिए बेहतर कंपनियों का ही चयन करें और यह मानकर चलिए कि ऐसी कंपनियां चुनने वाले बाजार की हर परिस्थिति में विजेता बनकर उभरेंगे। यदि आपका निवेश बेहतर कंपनियों में है और बाजार टूटता भी है तो फिर से होने वाला सुधार इन कंपनियों के निवेशकों को रिटर्न जरुर देता है। लेकिन घटिया कंपनियों में किए गए निवेश के लिए यही कह सकते हैं कि काठ की हांडी दूसरी बार नहीं चढ़ती। ऐसी कंपनियों के भाव बढ़ने पर निवेशक लालचवश बेच नहीं पाता और दूसरी बार निकलने का अवसर नहीं मिलता।

बेहतर निवेशक की एक पहचान होती है कि वह खूब पढ़ता और मनन करता है, तब जाकर मुश्किल से एक कदम उठा पाता है जिसका उसे शानदार नतीजा मिलता है। लेकिन बगैर होमवर्क वाले निवेशक जिन्‍हें कानाफूसी पर ज्‍यादा भरोसा होता है, शेयर बाजार में अधिक समय फल फूल नहीं सकते। हम अपने निवेशकों से कहना चाहते हैं कि वे एफ एंड ओ में नहीं खेलें क्‍योंकि बाजार अभी रिस्‍क से उबरा नहीं है। ऐसे में 14 कंपनियों को एफ एंड ओ की सूची में डाल दिया गया है ताकि निवेशक कम पैसे में कमाने के चक्‍कर में फंस जाए। लक्ष्‍मी मशीन कंपनी जिसमें वोल्‍यूम काफी कम होता है, को एफ एंड ओ में किस आधार पर रखा गया, समझ नहीं आता। दूसरी ओर, नगद की अनेक कंपनियों में अचानक सर्किट सीमा बदल दी गई। पिछले एक-डेढ़ साल से पांच फीसदी सर्किट सीमा में चल रही कंपनियों में अचानक इसे बढ़ाकर सीधे 20 फीसदी कर दिया गया है। प्रिज्‍म सीमेंट में पांच फीसदी सर्किट को अचानक किस आधार पर बढ़ाकर 20 फीसदी किया गया। क्‍या यह कुछ वेस्‍टेड इंटरेस्‍ट वालों की ख‍ातिर किया गया है।

अगले सप्‍ताह ओएनजीसी, रिलायंस कम्‍युनिकेशन, एनटीपीसी, आईटीसी, इंफोसिस और हिंडाल्‍को फ्रंटरनर रहेंगे जबकि सिम्‍पलैक्‍स कास्टिंग, वेस्‍ट कोस्‍ट पेपर, सेंचुरी टेक्‍सटाइल, आईपीसीएल, मधुकॉन प्रोजेक्‍ट्स, बाम्‍बे डाईंग, आकृति निर्माण, ग्रासिम और एएसएम टेक्‍नो भी बढ़ेंगे। लेकिन निवेशकों को सलाह है कि वे आंशिक मुनाफा भी लेते रहें। बहुत लंबी पोजीशन लेने का यह सही अवसर नहीं है।

चीनी शेयर ले डूबेंगे
वाह मनी ने पिछले सप्‍ताह भी कहा था कि चीनी कंपनियों के शेयर नहीं खरीदें। हम एक बार फिर अपनी बात दोहरा रहे हैं चीनी शेयरों में निवेश नहीं करें अन्‍यथा यह मान लें कि ये कंपनियां आपके निवेश को डूबा सकती हैं। सस्‍ते के चक्‍कर में कचरा न जुटा लें और यह तो आप भी जानते हैं कि कचरा अपने पास कोई नहीं रखना चाहता, चाहे ऑपरेटर हो या ब्रोकर अथवा पंटर। इन दिनों अनेक अखबारों और टीवी चैनलों पर यह खूब आ रहा है कि फलां चीनी शेयर को खरीदें क्‍योंकि शार्ट टर्म में इसका भाव यहां तक पहुंच सकता है। इस तरह के झांसे में न आएं और चीनी शेयरों से बचें।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2007/08 में चीनी उद्योग को मदद करने की घोषणा की है जिससे चीनी शेयरों में एक बार फिर गर्मी दिखाई दे रही है। लेकिन एक सवाल यहां उठता है कि मदद से क्‍या होगा, चीनी उत्‍पादन घटेगा, चीनी की खपत बढ़ेगी या फिर जोरदार निर्यात होगा जबकि अन्‍य देश भी तो चीनी बना रहे हैं। हमें जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक केंद्र सरकार पेट्रोल में एथनॉल की ब्‍लेडिंग को पांच फीसदी से बढ़ाकर दस फीसदी करने जा रही है। लेकिन यहां सवाल खड़ा होता है कि क्‍या इस समय देश में पांच फीसदी एथनॉल की ब्‍लेडिंग हो रही है। पहले सरकार पांच फीसदी एथनॉल की ब्‍लेडिंग तो शुरू करवाएं। सच्‍चाई यह भी है कि वर्ष 2007/08 में हमारे देश में दस फीसदी एथनॉल ब्‍लेडिंग की बुनियादी सुविधाएं नहीं है। दूसरी संभावना नाबार्ड बैंक के कर्ज को रिस्‍ट्रक्‍चरिंग करने की है तो हम आपको बता दें कि शेयर बाजार में लिस्‍टेड किसी भी शुगर कंपनी के पास नाबार्ड बैंक का कर्ज नहीं है, तो फायदा किसे मिलेगा। हमारे देश में अगले चीनी सीजन में चीनी का ओपनिंग स्‍टॉक 118 लाख टन और उत्‍पादन 290 लाख टन रहने की संभावना है यानी कुल 408 लाख टन चीनी का हम और चीनी उद्योग करेगा क्‍या। देश में चीनी की घरेलू खपत 200 लाख टन रहेगी। इसके अलावा हमारे बंदरगाहों पर चीनी निर्यात सुविधा 50 लाख टन की है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि इस घरेलू खपत और निर्यात के बाद बची 158 लाख टन चीनी का क्‍या होगा। शेयर बाजार के पंटर चीनी कंपनियों के शेयरों के बारे में जो बात बताते हैं उन पर भरोसा कर इन शेयरों को खरीदने से पहले हमने जो बात आपके सामने रखी है उस पर भी विचार करें क्‍योंकि कहीं ऐसा नहीं हो कि चीनी आपके स्‍टॉक पोर्टफोलियों के लिए मधुमेह न बन जाए।

September 08, 2007

मार्च-2009 तक भरे जा सकते हैं बिलेटिड रिटर्न


वित्त वर्ष 2006-07 के लिए टैक्स रिटर्न भरने की अंतिम तारीख 31 जुलाई थी। इस तारीख से पहले लोगों ने टैक्स रिटर्न भरने के लिए काफी भागदौड़ की और कई-कई पेजों का नया टैक्स रिटर्न भरा। पर इस भागदौड़ के बावजूद बहुत से लोग ऐसे छूट गए, जो टैक्स रिटर्न नहीं भर पाए। उनके लिए एक अच्छी खबर। वे 31 मार्च, 2009 तक रिटर्न भर सकते हैं। पर इसमें एक 'खतरा' भी है। अगर आयकर अधिकारी ने उनके पेपर का असेसमेंट कर लिया, तो हो सकता है कि उनको 5,000 रुपये तक जुर्माना देना पड़ जाए। इसके अतिरिक्त भी उन्हें कर अदा करने में देरी के लिए 1 प्रतिशत मासिक की दर से ब्याज देना पड़ेगा।

क्या है बिलेटिड रिटर्न
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(4) करदाताओं को अंतिम तारीख के बाद भी रिटर्न भरने की अनुमति देती है। इसके तहत रिटर्न असेसमेंट इयर के अंत के बाद एक साल के भीतर भरा जा सकता है। इसको हम और साफ करते हैं। वित्त वर्ष 2006-07 के लिए रिटर्न भरने की अंतिम तारीख 31 जुलाई, 07 थी। इस वित्त वर्ष के लिए असेसमेंट इयर 2007-08 होगा। यानी कि असेसमेंट वर्ष 31 मार्च, 08 को पूरा होगा। ऐसे में असेसमेंट साल के खत्म होने के बाद एक साल तक यानी कि 31 मार्च, 2009 तक आप रिटर्न भर सकते हैं।

क्या है जुर्माना
टैक्स रिटर्न की बात करते वक्त करदाता को 2 स्थितियों से गुजरना होगा।
करदाता ने अपने सभी टैक्स अदा कर दिए हैं, पर वह जायज कारणों से रिटर्न नहीं जमा कर पाया है
या फिर उसने टैक्स भी अदा नहीं किए हैं, और वह रिटर्न भी जमा नहीं कर पाया है।
पहले मामले में चूंकि करदाता ने अपने सभी टैक्स जमा कर दिए हैं, इसलिए उस पर किसी तरह का जुर्माना नहीं लगेगा। पर उसको असेसमेंट इयर के अंत तक रिटर्न जमा करना होगा। यानी कि यदि करदाता असेसमेंट इयर के अंत तक (31 मार्च, 2008) तक रिटर्न जमा कर देता है, तो उस पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा।

वहीं अगर रिटर्न इस समयावधि के दौरान जमा नहीं कराया जाता है, और कर अधिकारी करदाता की आय का असेसमेंट करता है, तो वह उस पर आयकर कानून की धारा 271 एफ के तहत 5,000 रुपये का जुर्माना लगा सकता है।

दूसरे मामले में, जो लोग सरकार को न तो टैक्स का भुगतान कर सके हैं, और न तो उन्होंने रिटर्न जमा किया है, उन पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234ए के तहत कुल टैक्स बकाया पर 1 फीसदी मासिक के आधार पर ब्याज देना लगेगा। मान लें कि यदि आपने रिटर्न 31 दिसंबर, 08 को फाइल किया है, तो आपको 5 माह के लिए 1 प्रतिशत का ब्याज देना होगा।

और क्या हो सकता है
यदि कोई व्यक्ति अंतिम तारीख के बाद रिटर्न जमा करता है, और उसे यह पता नहीं है कि उसने टैक्स का भुगतान किया है या नहीं, ऐसी स्थिति में यदि वित्त वर्ष के दौरान उसे किसी तरह का घाटा हुआ है, तो वह इस घाटे को आगे नहीं ले जा सकेगा। नवभारत टाइम्‍स से साभार

September 06, 2007

सेंसेक्‍स हजार अंक उछलेगा !

भारतीय शेयर बाजार ने न्‍यूक्लियर डील पर वामपंथियों के रवैये से जो मात खाई थी वह दूर हो गई है। न्‍यूक्लियर डील के संबंध में समिति का गठन कर दिया गया है और अब इस बारे में समिति मिलकर निर्णय करेगी कि भारत को क्‍या करना चाहिए। समूचे मामले को शां‍त करने के लिए समिति बनाई गई लेकिन एक बात तय है कि इस संबंध में समय समय पर हो हल्‍ला होता रहेगा ता‍कि पश्चिम बंगाल और केरल के मतदाताओं को यह लगते रहना चाहिए कि वामपंथी मौजूद है और उनके वोट बैंक में कोई दरार नहीं पड़ पाए। सत्‍ता का स्‍वाद चख रहे वामपंथी भी नहीं चाहते कि कुर्सी का दम ही निकल जाए अन्‍यथा ऑल क्लियर डील कहां करेंगे। बड़ी मुश्किल से मिलती है कुर्सी। वामपंथी भी चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल और केरल उनके हाथ से न निकले बस इतना तो हो हल्‍ला करने ही दो। वामपंथियों को दूसरे रुप में धन्‍यवाद देना चाहिए कि अनेक निवेशकों को बेस्‍ट स्‍टॉक्‍स सस्‍ते में मिल गए और वापस सेंसेक्‍स वहीं पहुंच गया, जहां से वह गिरा था। अब शेयर ऑपरेटरों, पंटरों की बात पर भरोसा करें तो अक्‍टूबर मध्‍य तक सेंसेक्‍स 16500 के आसपास दिखाई देगा। इनका कहना है कि सभी जगह सब कुछ ठीकठाक हो गया है, चिंता मत करिए, सेंसेक्‍स को तो एक हजार अंक उछलना ही है। वाह मनी का मानना है कि इस साल के अंत तक बीएसई सेंसेक्‍स 17 हजार के करीब होगा। निवेशकों को सलाह है कि वे पावर स्‍टॉक्‍स जुटाते रहें, ये स्‍टॉक्‍स ही डार्क हॉर्स हैं। पंटरों के आज के स्‍टॉक्‍स : जेनेटक लैब, रिको ऑटो, मुकुंद, गोदावरी पावर, इस्‍पात इंडस्‍ट्रीज, आईएमपी पावर और जेके लक्ष्‍मी सीमेंट।

September 03, 2007

शेयर बाजार में रहेगी गर्मी, चीनी शेयरों से बचें

दुनिया भर के शेयर बाजारों में आए सुधार के साथ अब भारतीय शेयर बाजार भी ताल मिला रहा है। हालांकि, इस तेजी की रेस में भारतीय शेयर बाजार पहले पिछड़ रहे थे क्‍योंकि भारत अमरीका परमाणु करार पर वामपंथियों ने केंद्र सरकार से अपना समर्थन लेने की बात कही थी। हालांकि, अडि़यल वामपंथी अब थोड़े नरम पड़े हैं और न्‍यूक्लियर डील को क्लियर करवाने के लिए एक समिति बनाई गई है। निवेशकों को इस समय भी सचेत रहने की जरुरत है क्‍योंकि समिति बन जाना राजनीतिक स्थिरता की गारंटी नहीं है। वामपंथी कभी भी इस मुद्दे पर सरकार का साथ छोड़ सकते हैं या अपने बयानों से बाजार पर बुरा असर डाल सकते हैं। इस समय सभी राजनीतिक दल देश में मध्‍यावधि चुनाव की बात सोच जरुर रहे हैं। सभी दल इस गणना में लगे हैं कि यदि इस समय मध्‍यावधि चुनाव होते हैं तो उन्‍हें कितना लाभ होगा और जब तक कांग्रेस की रिपोर्ट नहीं बन जाती, मध्‍यावधि चुनाव की ओर बढ़ने का सवाल ही नहीं उठता। वामपंथी भी एक बात यह अच्‍छी तरह जानते हैं कि वे अपने बूते कभी देश में सरकार नहीं बना सकते और मौजूदा मौके को खोना उन्‍हें ठीक नहीं लगता क्‍योंकि सत्‍ता हमेशा ताकत देती हैं।


आज से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में बीएसई सेंसेक्‍स के ऊपर में 15780 और नीचे में 15075 तक रहने की संभावना है। निफ्टी ऊपर में 4620 और नीचे में 4370 तक रह सकता है। एफआईआई और औद्योगिक फंडों की पिछले दिनों जो लेवाली निकली है, वह आगे जारी रहेगी जिसकी वजह से निफ्टी पांच हजार अंक को छू जाए तो अचरज नहीं होना चाहिए। इस सप्‍ताह फ्रंटरनर रहेंगे एसीसी 1065 रुपए, विप्रो 432 रुपए, टीसीएस 1065 रुपए, रिलायंस कम्‍युनिकेशन 543 रुपए।

दौड़ के दूसरे खिलाड़ी हैं : नेस्‍ले 1282 रुपए, पुंज लॉयड 278 रुपए, जेट एयरवेज 808 रुपए, जिंदल फोटो 120 रुपए, फ्रेश फ्रूटस 124 रुपए, गार्नेट कंसट्रक्‍शन 54 रुपए, सिम्‍पलेक्‍स कास्टिंग 74 रुपए। आज शेयर बाजार में जिस स्‍टॉक में ऊपरी सर्किट लग सकता है वह है हिंदुस्‍तान ग्‍लास 626 रुपए। हिंदुस्‍तान ग्‍लास आने वाले दिनों में एक हजार रुपए को पार करने की क्षमता रखता है। इस कंपनी का पूरा ब्‍यौरा जल्‍दी ही इस ब्‍लॉग पर होगा। इस सप्‍ताह आप इन शेयरों पर भी आप नजर रख सकते हैं : फर्स्‍ट सोर्स साल्‍यूशंस, श्‍याम टेलीकॉम, गृह फाइनेंस, एम्‍टेक ऑटो, श्रृंगार सिनेमा और एएमडी मेटप्‍लास्‍ट।

चीनी शेयरों से बचें
केंद्र सरकार ने वर्ष 2007/08 में चीनी उद्योग को मदद करने की घोषणा की है जिससे चीनी शेयरों में एक बार फिर गर्मी दिखाई दे रही है। लेकिन एक सवाल यहां उठता है कि मदद से क्‍या होगा, चीनी उत्‍पादन घटेगा, चीनी की खपत बढ़ेगी या फिर जोरदार निर्यात होगा जबकि अन्‍य देश भी तो चीनी बना रहे हैं। हमें जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक केंद्र सरकार पेट्रोल में एथनॉल की ब्‍लेडिंग को पांच फीसदी से बढ़ाकर दस फीसदी करने जा रही है। लेकिन यहां सवाल खड़ा होता है कि क्‍या इस समय देश में पांच फीसदी एथनॉल की ब्‍लेडिंग हो रही है। पहले सरकार पांच फीसदी एथनॉल की ब्‍लेडिंग तो शुरू करवाएं। सच्‍चाई यह भी है कि वर्ष 2007/08 में हमारे देश में दस फीसदी एथनॉल ब्‍लेडिंग की बुनियादी सुविधाएं नहीं है। दूसरी संभावना नाबार्ड बैंक के कर्ज को रिस्‍ट्रक्‍चरिंग करने की है तो हम आपको बता दें कि शेयर बाजार में लिस्‍टेड किसी भी शुगर कंपनी के पास नाबार्ड बैंक का कर्ज नहीं है, तो फायदा किसे मिलेगा। हमारे देश में अगले चीनी सीजन में चीनी का ओपनिंग स्‍टॉक 118 लाख टन और उत्‍पादन 290 लाख टन रहने की संभावना है यानी कुल 408 लाख टन चीनी का हम और चीनी उद्योग करेगा क्‍या। देश में चीनी की घरेलू खपत 200 लाख टन रहेगी। इसके अलावा हमारे बंदरगाहों पर चीनी निर्यात सुविधा 50 लाख टन की है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि इस घरेलू खपत और निर्यात के बाद बची 158 लाख टन चीनी का क्‍या होगा। शेयर बाजार के पंटर चीनी कंपनियों के शेयरों के बारे में जो बात बताते हैं उन पर भरोसा कर इन शेयरों को खरीदने से पहले हमने जो बात आपके सामने रखी है उस पर भी विचार करें क्‍योंकि कहीं ऐसा नहीं हो कि चीनी आपके स्‍टॉक पोर्टफोलियों के लिए डायबिटीज बन जाए।