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October 30, 2007

हिम्‍मत मत हारना यदि बनना है अमीर

भारतीय शेयर बाजार के निवेशक आज सुबह से ही इस बात से चिंतित थे कि भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति में कहीं ऐसा कुछ घोषित न कर दें कि उनकी दिवाली काली न हो जाए। खैर, सीआरआर में बढ़ोतरी के अलावा कोई ऐसा दूसरा कदम नहीं उठा जिसका बड़ा असर पड़ता। हालांकि, सीआरआर में बढ़ोतरी की खबर आने के बाद बाजार सुधरा, गिरा और अंत में लुढ़ककर बंद हुआ। असल में आज के ऊपरी स्‍तर से शेयर बाजार चार सौ अंकों के आसपास टूटा। बाजार बंद होते होते यह बात चल पड़ी की अमरीकी फैड की बैठक में क्‍या होगा। क्‍या वहां ब्‍याज दरें बढ़ेंगी, गिरेंगी या ज्‍यों की त्‍यों रहेगी। भारतीय रिजर्व बैंक की घोषणाओं पर सोच विचार पूरा भी नहीं हुआ कि अमरीका में क्‍या होगा, चिंता सताने लगी।

अमरीका में ब्‍याज दरों के बढ़ने के अवसर कम हैं। लेकिन यदि ब्‍याज दरें किसी संयोग में बढ़ती है तो इसका भारतीय शेयर बाजार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हां, ब्‍याज दरें घटी तो शेयरों में आग लग सकती है क्‍योंकि दुनिया के सारे फंड इस बात से सहमत हैं कि भारतीय शेयर बाजार में मिलने वाला रिटर्न वाकई बेहतर है और आदमी को लालची बनाता है। फटाफट एक के तीन हो रहे हैं तो फिर यह मलाई खाने से किसे परहेज। चाहे डॉक्‍टर कह दें कि यह मलाई मत खाना, ठीक नहीं है लेकिन डॉक्‍टर की बात को इस समय कोई मानने वाला नहीं है। हम निवेशकों से कहना चाहेंगे कि आज अमरीकी फैड रिजर्व की हो रही बैठक पर नजर रखें और उसी आधार पर कल निवेश संबंधी अपने निर्णय करें। हालांकि, जो निवेशक लांग टर्म के आधार पर निवेश कर रहे हैं, उन्‍हें चिंतित होने की जरुरत नहीं है।

भारतीय शेयर बाजार अब और नई ऊंचाईयों को छूएगा, लेकिन हो सकता है कि इस बीच कुछ झटके लगें। हम निवेशकों को राय देंगे कि वे अपने पोर्टफोलियों को बेहद लंबा न बनाकर चुनिंदा कंपनियों में ही निवेश करें। कल हमने बात की थी मलाई खाने की....तो इन कंपनियों को अपने पोर्टफोलियों में शामिल कर लें, यदि आपके पोर्टफोलियों में ये कंपनियां पहले से शामिल हैं तो हर घटे भाव पर शेयरों की संख्‍या बढ़ा लें ताकि आपकी खरीद लागत कम हो सके। मलाईदार शेयर : आईडीएफसी, रिलायंस पेट्रोलियम, पेट्रोनेट एलएनजी, पेनिनसुला लैंड।

October 29, 2007

शेयर बाजार की मलाई खाने के लिए हो जाइए तैयार


भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के बैरोमीटर बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज के सेंसेक्‍स ने जैसे ही 20 हजार अंक को छूआ, निवेशकों के चेहरे खुशी से दमक रहे थे। वजह भी साफ थी कि 17 हजार अंक पर सेंसेक्‍स के आने पर हर निवेशक को कमाई नहीं हुई थी लेकिन इस बार स्थिति बदली है और हर निवेशक ने कुछ न कुछ कमाया ही है।
निवेशकों के मन में अब फिर वही सवाल उठा है कि सेंसेक्‍स और शेयर बाजार में आगे क्‍या होगा। क्‍या यह तेजी इसी तरह बनी रहेगी या फिर मार्केट का बंटाढार हो जाएगा किसी भी समय। वाह मनी की राय में न तो शेयर बाजार में सब कुछ मिटने जा रहा है और न ही बड़ी मंदी आएगी। यह बात अलग है कि हर तगड़ी तेजी के बाद कुछ करेक्‍शन आ सकता है लेकिन ऐसे करेक्‍शन स्‍थाई नहीं होंगे और शेयर बाजार नई बुलंदियों को छूता रहेगा।

बीएसई सेंसेक्‍स जब पांच हजार अंक था और आठ हजार अंक पर आया तब भी यही बातें होती थी कि अब बहुत बढ़ गया बाजार, कभी भी औंधे मुंह गिरेगा। आठ से 15 हजार अंक पहुंचा तब भी इसी तरह की बातें होती थी और आज भी हो रही है। इस तरह की बातों को सोचने के पीछे हमारी गलती नहीं है, बल्कि हमारी मानसिकता आड़े आ जाती है क्‍योंकि हम तगड़ी तेजी देखने के आदी नहीं रहे और पहली बार बाजार में आग लगते हुए देख रहे हैं।

हमारी राय में तेजी की यह शुरूआत है और सेंसेक्‍स को अभी बड़ी मंजिल तय करनी है। इस समय शेयर बाजार में करीबन दो सौ ऐसी कंपनियां हैं जिनके भाव आप काफी कम देख रहे हैं, हालांकि पिछले दिनों की बढ़ोतरी के बाद लोग कहते हैं इन कंपनियों के दाम तो दो गुना या पांच गुना बढ़ चुके हैं लेकिन वाह मनी की राय में ऐसी कंपनियों के शेयरों के दाम अगले एक साल में उस मुकाम पर होंगे जिसके बारे में अधिकतर निवेशकों ने कल्‍पना भी नहीं की है।

कल मैं एनडीटीवी इंडिया का एक प्रोग्राम देख रहा था जिसमें लोगों से यह पूछा जा र‍हा था कि आप कितने समय में करोड़पति बनना चाहते हैं। कुछ कहना था कि अभी, पांच मिनट में, एक साल में या फिर जब बना दो। इस कार्यक्रम की प्रस्‍‍तुति में यह बताया जा रहा था कि किन बातों पर ध्‍यान देना होगा यदि आप करोड़पति बनना चाहते हैं। कहां कहां निवेश कर करोड़पति बना जा सकता है आदि आदि। असल में हमारे देश को ऐसे ही कार्यक्रम की जरुरत है जहां अधिक से अधिक लोग करोड़पति बन सके और आर्थिक खुशहाली हासिल कर सकें।

वाह मनी भी यही चाहता है कि देश का हर आदमी आर्थिक रुप से खूब मजबूत हो। शेयर बाजार की मौजूदा चाल लोगों को आर्थिक रुप से मजबूत बनाने में बड़ी सहायक हो सकती है। हम हर निवेशक से कहना चाहेंगे कि यदि आपने देश की क्रीम कंपनियों में निवेश किया है तो बिल्‍कुल न घबराएं, चाहे सेंसेक्‍स किसी भी स्‍तर पर दिखें। साथ ही ऐसी कंपनियों के शेयर छोटे मोटे लाभ के लिए न बेंचे, बल्कि लांग टर्म के आधार पर अपने निवेश को बनाए रखें। हालांकि, बाजार पर बुरा असर डालने वाली कोई बड़ी खबर आ रही हो तो आप कुछ समय के लिए अपने शेयर बेच सकते हैं लेकिन उन्‍हें घटे स्‍तर पर खरीदने की तैयारी भी रखें।

यह ध्‍यान रखें पैसा कमाने के लिए धैर्य जरुरी है और घबराहट के किसी भी कारण के समय आत्‍मचिंतन जरुर करें अन्‍यथा आप गेनर के बजाय लूजर बन सकते हैं। भेड़चाल का हिस्‍सा न बनते हुए किसी भी कंपनी के शेयर खरीदते और बेचते समय यह जरुर सोचें कि यह खरीद कितने समय के लिए है और यदि शेयर बेच रहे हैं तो यह देखें कि जिस भाव पर आप शेयर बेच रहे हैं क्‍या उसके बाद इसमें बढ़ोतरी की बड़ी गुंजाइश नहीं बची है। यदि गुंजाइश है तो शेयर बेचने का आपका फैसला गलत हो सकता है। वाह मनी की राय में यदि आज भी कोई निवेशक देश की भाव क्रीम कंपनियों में निवेश करता है तो अगले दो साल यानी दिवाली 2009 तक करोड़पति बन सकता है। तो तैयार हो जाइए करोड़पति बनने का सफर तय करने के लिए वाह मनी के साथ। हम बताएंगे आपको क्रीम स्‍टॉक और आप लुत्‍फ उठाएंगे मलाई का।

October 26, 2007

थ्री आई में निवेश होगा फायदेमंद


भारतीय शेयर बाजार एक बार फिर नई ऊंचाई पर पहुंच गया है और पिछले दिनों आई मंदी बीती बात बन गई है। वाह मनी के पास कई निवेशकों के फोन आए हैं कि अब किन कंपनियों में निवेश करें जो बाजार के हर मूवमेंट को झेलने के साथ सेफ निवेश वाली हों। वाह मनी के मुताबिक...आईडीबीआई, आईडीएफसी, आईएफसीआई यानी थ्री आई सबसे सुरक्षित कंपनियां हैं, जहां आप मध्‍यम से लंबी अवधि के लिए निवेश कर सकते हैं। इन तीनों कंपनियों के शेयर के दाम आने वाले समय में आपको नई ऊंचाई पर दिखाई दें तो अचरज न करें। इनके अलावा थ्री आई इंफोटेक, पावर फाइनेंस कार्पोरेशन, पेनिनसुला लैंड, रिलायंस पेट्रोलियम, सेल, आइडिया, बाटा इंडिया और पावर ट्रेडिंग कार्पोरेशन में भी निवेश किया जा सकता है जो हर निवेशक के लिए फायदेमंद साबित होंगी।

October 23, 2007

शेयर बाजार में लगेगी आग


वित्‍त मंत्री पी चिदम्‍बरम का यह बयान कि सरकार का इरादा पूंजी बाजार पर अंकुश लगाने या किसी फंड को बाजार से दूर रखने का नहीं है, शेयर बाजार में आग लगाने के लिए पर्याप्‍त है। यही वजह है कि बीएसई सेंसेक्‍स इस समय एक हजार अंक बढ़कर 18500 अंक को पार कर चुका है। वित्‍त मंत्री मानते हैंकि भारतीय वित्‍त बाजार में किसी तरह की कोई दिक्‍कत नहीं है। शेयर बाजार में हाल के करेक्‍शन को वे फंड मैनेजरों का तुरत फुरत में आई प्रतिक्रिया मानते हैं। वे कहते हैं कि हम विदेशी संस्‍थागत निवेशकों को भारत आने का न्‍यौता दे रहे हैं लेकिन वहां आकर अपने को सेबी में रजिस्‍टर कराएं।

वित्‍त मंत्री के आए इस बयान के बाद यह साफ है कि शेयर बाजार की ताजा गिरावट को जो कुछ समय के लिए बताया जा रहा था, सही है। वाह मनी की निवेशकों को राय है कि वे बेहतर कंपनियों के स्‍टॉ‍क नहीं बेचें बल्कि इस समय उम्‍दा कंपनियों के शेयर खरीदकर होल्‍ड करें। चंद दिनों पहले की जो तगड़ी तेजी थी उस समय यदि आप किसी उम्‍दा कंपनी के शेयर न ले पाएं हो तो अब लें लेकिन इस मंत्र के साथ कि बीच बीच में आंशिक मुनाफा भी वसूल करते रहेंगे।

ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर्स में बड़ी संभावनाएं पैसे की


बिजली ट्रांसमिशन और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन से जुड़ी कंपनी ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर्स लिमिटेड मध्‍यम से लंबी अवधि के निवेशकों के पोर्टफोलियो में होना जरुरी है। कंपनी की हाजिरी ट्रांसमिशन लाइन वैल्‍यू चैन की पूरी श्रृंखला में है। इसके नाशिक और रायपुर में दो टावर उत्‍पादन संयंत्र हैं जिनकी कुल क्षमता 96 हजार टन सालाना है। कंपनी की महाराष्‍ट्र के ईगतपुरी में परीक्षण सुविधाएं हैं। कंपनी ने गल्‍फ इनवेस्‍टमेंट कार्पोरेशन के साथ संयुक्‍त उद्यम स्‍थापित किया है जो खाड़ी क्षेत्र में कारोबार संभावनाएं तलाश करेगा। इस संयुक्‍त उद्यम की ट्रांसमिशन टावर उत्‍पादन क्षमता 33 हजार टन सालाना है।

बिजली क्षेत्र के बढ़ते विकास से यह तय है कि आने वाले समय में ट्रांसमिशन परियोजना कारोबार में बढ़ोतरी होगी और इसका बड़ा लाभ ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर्स को होगा। कंपनी का ईपीसी खिलाडि़यों के साथ सहयोग भी इसकी आय में बढ़ोतरी करेगा। ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर्स की वर्ष 2008 में शुद्ध बिक्री 1360.4 करोड़ रूपए रहने का अनुमान है जो वर्ष 2007 में 971.6 करोड़ रूपए थी। शुद्ध लाभ भी 55 करोड़ रूपए से बढ़कर 77 करोड़ रूपए पहुंचने की संभावना है। प्रति शेयर आय यानी ईपीएस 6.72 रुपए से 9.5 रुपए पहुंच जाने की उम्‍मीद है। कंपनी की इक्विटी 16.10 करोड़ रूपए है जिसमें प्रमोटरों का हिस्‍सा 27.14 फीसदी है, जबकि म्‍युच्‍यूअल फंडों के पास 16.20 फीसदी हिस्‍सा है। विदेशी संस्‍थागत निवेशकों के पास इस कंपनी के 33.29 फीसदी शेयर है। कार्पोरेट बॉडीज के पास 10.58 और आम जनता व अन्‍य के पास 12.79 फीसदी स्‍टॉक हैं। ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर्स का शेयर इस समय 244 रुपए प्रति शेयर पर उपलब्‍ध है। जो पिछले 52 सप्‍ताह में ऊपर में 287 रुपए और नीचे में 86 रुपए पर मिल रहा था।

October 19, 2007

चैन से सोना है तो जाग जाओं निवेशकों

शेयर बाजार में आई गिरावट के लिए हर कोई विदेशी संस्‍थागत निवेशकों को दोष दे रहा है कि उनकी बिकवाली ने शेयर बाजार को तोड़ दिया। लेकिन क्‍या विदेशी संस्‍थागत निवेशकों को शेयर बेचने का अधिकार नहीं है। या उन्‍हें हमने यहां केवल शेयर खरीदने के लिए ही बुलाया है कि आप केवल शेयर खरीदें और बेचेंगे हम ही। जब शेयर बाजार ऑल टाइम हाई हो गया था तो क्‍यों घरेलू निवेशक यह सोचकर रुक गए कि बाजार तो अभी और फलेगा, फूलेगा...‍िफर शेयर बेचेंगे। वाह मनी हमेशा यह कहता रहा है कि जो मुनाफा आज आप की जेब में हैं वह कल किसी और की जेब में जा सकता है। इस समय असल में यही हो रहा है कि जो मुनाफा कल आपकी जेब के हवाले हो सकता था आज विदेशी संस्‍थागत निवेशकों के बैंक खाते में पहुंच गया है।

जब एक छोटे निवेशक को अपने शेयर बेचने का अधिकार है तो बड़े निवेशक को भी अपने शेयर बेचने का अधिकार है। यह अलग बात है कि छोटे निवेशक के पास किसी कंपनी के सौ से कुछ हजार शेयर होंगे जबकि विदेशी संस्‍थागत निवेशकों के पास एक एक कंपनी के लाखों शेयर होते हैं। जब कोई छोटा निवेशक शेयर बेचता या खरीदता है तो वह अपने स्‍तर के निवेशकों या सलाहकारों की राय से भी कारोबार में मदद पाता है। अब यही समूह शेयर बेचने का मानस बना लें तो किसी कंपनी के कितने शेयर बेच पाएंगे। महज कुछ हजार....लेकिन विदेशी संस्‍थागत जो आपस में मित्र भी हो सकते हैं और बेचने का मानस तय कर लें तो स्‍वाभाविक हैं कि जिसमें बिकवाली करेंगे उस कंपनी के शेयर को बुरी तरह टूटने से बचा पाना मुश्किल है। जैसे एक आम निवेशक अपने निवेश पर मुनाफा कमाना चाहता है कि वैसा ही संस्‍थागत निवेशक चाहते हैं। इन निवेशकों को भी अपने यहां निवेश करने वालों को लाभांश देना होता है और कंपनी के आकार को बढ़ाना होता है।

लोग कहते हैं कि ये विदेशी हमें डूबा देंगे...सही कह रहे हैं ऐसे लोग भी, लेकिन विदेशी संस्‍थागत निवेशकों को यहां लाया कौन और किसने उन्‍हें कारोबार की अनुमति दी। क्‍या वे जबरन घुसे....हां जो ऐसे निवेशक सेबी के पास बगैर रजिस्‍ट्रेशन के कारोबार कर रहे हैं उनके खिलाफ जमकर कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन जिन्‍होंने सारी औपचारिकताएं पूरी की और बाजार को खोलने की प्रक्रिया के तहत भारत आने दिया गया उनका कोई कसूर नहीं है। यदि आपको बाजार में कारोबार करने का तरीका नहीं आता है तो उसके लिए दूसरे को दोष देने का अधिकार किसी के पास नहीं है।

खुले बाजार का सीधा सिद्धांत है या तो कारोबार करने का तरीका जानो अन्‍यथा हट जाओं। आपके पास सही समय पर सूचनाएं नहीं आती तो यह आपकी कमी है। जो लोग तेजी से सूचनाएं बटोरते हैं वे ही मौजूदा बाजार में टिक सकते हैं। हम ऐसे कई निवेशकों को जानते हैं कि जो रोजाना दो से चार रुपए का एक आर्थिक अखबार तक नहीं खरीदते। जो निवेशक एक अखबार तक नहीं पढ़ते उनसे आप देश विदेश के अखबार और पत्रिकाएं पढ़ने या इंटरनेट पर जानकारियां लेने की उम्‍मीद छोड़ दीजिए। शेयर बाजार में कमाई कोई रसगुल्‍ला नहीं है कि बाजार गए और मुंह में लपक लिया। यहां भी दूसरे कारोबार की तरह मेहनत करनी पड़ती है लेकिन यह मेहनत ज्ञान आधारित है। मैं मेरे एक मित्र को जानता हूं जो देर रात पढ़ाई करते हैं और सुबह जल्‍दी उठकर इंटरनेट पर सारे अखबार और सूचनाएं पढ़ चुके होते हैं। दिन रात फोन पर जगह जगह से सूचनाएं लेते रहते हैं। मेरे इन मित्र को शेयर बाजार में कोई नुकसान नहीं हुआ, जबकि वे इससे तकरीबन 20 साल से जुड़े हुए हैं। अधिकतर निवेशक यह तक नहीं जानते कि एक शेयरधारी होने के नाते उनके पास कानूनी तौर पर कंपनी में क्‍या क्‍या अधिकार मिले हुए हैं। इन अधिकारों को लेकर वाह मनी पर जल्‍दी ही एक पोस्‍ट आएगी।

ज्‍यादातर निवेशक जिस कंपनी में पैसा लगाते हैं उन्‍हें यही नहीं पता कि यह कंपनी करती क्‍या है, इसका ट्रेक रिकॉर्ड कैसा है, कौन चेयरमैन और निदेशक हैं...इन सब को भी छोडि़ए यह तक नहीं पता रहता कि इस कंपनी का रजिस्‍टर्ड कार्यालय कहां है और इसके कार्य परिणाम कब आएंगे। ऐसे महान निवेशकों से क्‍या उम्‍मीद की जा सकती है। अखबार इन निवेशकों के हाथ में दे दीजिए तो यह नहीं देख पाते कि जिस कंपनी में उन्‍होंने निवेश किया है उसके बारे में आज किस पेज पर क्‍या खबर छपी है। मैं सैंकड़ों कंपनियों की सालाना आम सभा यानी एजीएम में गया हूं, वहां अलग ही नजारा देखने को मिलता है कि बाहर लोग कंपनी के कर्मचारियों से इसलिए लड़ रहे है कि उन्‍हें चाय, कोल्‍ड ड्रिंक और नाश्‍ते के फ्री कूपन नहीं मिले। ऐसे निवेशक कूपन के लड़ रहे हैं और भले ही अंदर जहां एजीएम चल रही हैं कंपनी के निदेशक कंपनी को बेच डालें या मनमाने प्रस्‍ताव पास करा लें। कंपनी के निदेशक क्‍या करना चाहते हैं इससे कोई मतलब नहीं, बस फ्री में नाशता मिल जाए, यह जरुरी है बाकी कंपनी गई भाड़ में। कंपनी चेयरमैन की स्‍पीच और कुछ निवेशकों के उठे सवालों पर दिए जवाब से जिन निवेशकों को कोई मतलब नहीं है उन्‍हें बाजार को कोसने का भी अधिकार नहीं है। बस ऐसे निवेशकों को छेड़ दो तो कहेंगे, अरे जो अंदर बैठे हैं उन्‍हें जो करना है वे उसे तय करके आए हैं। लेकिन हम कहते हैं आप अपनी बात तो उठाइए, कंपनी के निदेशक कैसे मनमानी कर लेंगे। इस समय ढेरों कंपनियों के प्रमोटर अपना हिस्‍सा बेच रहे हैं क्‍योंकि बाजार में खूब तेजी है और ये प्रमोटर अगर अपनी सारी हिस्‍सेदारी बेचकर कंपनी से बाहर निकल जाएं तो भी ऐसे निवेशकों को कोई मतलब नहीं है कि कंपनी का क्‍या होगा।

इस समय लोगों को ध्‍यान यहां गया ही नहीं कि हर रोज ढेरों कंपनियों के प्रमोटर अपनी हिस्‍सेदारी बेच रहे हैं और सरकार, सेबी, शेयर बाजार अथॉरिटी एवं निवेशक चुपचाप बैठे हुए हैं। क्‍यों बेच रहे हैं अपनी हिस्‍सेदारी किसी ने हिसाब पूछा। किसी ने सेबी से पूछा कि पी नोट का मामला कितने साल से चल रहा है और अब तक चुपचाप क्‍यों बैठे थे। यदि पहले भी यह मामला उठा था तो उस समय क्‍यों नहीं कोई कानून कायदा बनाया गया और अब जब जमकर तेजी आई तो कानून की बात होने लगी। भारतीय रिजर्व बैंक तो पहले ही सेबी को कह रहा था पी नोट के बारे में तो सेबी व सरकार अब तक क्‍यों सोई रही। शेयर बाजार में यह अफवाह भी थी कि एक केंद्रीय मंत्री का बेटा शेयर बाजार में फंसा हुआ है और उसे उबारने के लिए यह पी नोट का मसला सामने आया और उसके निकलने पर पी नोट का मुद्दा ठंडे बस्‍ते में चला जाएगा। पूछी यह बात किसी ने सरकार से। जब तक निवेशक नहीं जागेंगे कुछ नहीं हो सकता। तो जागो निवेशकों, नहीं तो आपको चूना लगना तय है।

October 18, 2007

लालच यही करता है जो आज हुआ...

पार्टिसिपेटरी नोट को लेकर शेयर बाजार में मचा तूफान वित्‍त मंत्री का बयान आने के बाद थमता दिखाई दिया लेकिन विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने तो कुछ और ही तय कर रखा था। शेयर बाजार कल की तगड़ी गिरावट के बाद जिस तरह रिकवर हुआ, उससे आम निवेशक के मन में य‍ह बात बैठी की इस तरह की गिरावट के बाद पैसा कमाया जा सकता है। आम निवेशक ने इसी सोच को देखते हुए सु‍बह जब बीएसई सेंसेक्‍स को 18827 अंक से बढ़ते हुए देखा तो अपने मन पर काबू न पा सके और जमकर शेयरों की खरीद की। बस, विदेशी संस्‍थागत निवेशकों को तो यही चाहिए था कि घरेलू निवेशक बाजार की ओर आएं। सेंसेक्‍स 19198 अंक, ऑल टाइम हाई। शेयर विश्‍ेलषकों ने राग अलापना शुरू किया कि सब ठीक ठाक हो गया और सेंसेक्‍स 19700 अंक से ऊपर दिखाई देगा। इसके बाद खेल खेला विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने और सेंसेक्‍स को ऐसा हिलाया कि अच्‍छे अच्‍छे विश्‍लेषक सोच न पाएं और सेंसेक्‍स आ गया 17771 अंक। हालांकि, अंत में एवेरज होकर सेंसेक्‍स आया 17998 अंक।

मैं कल रात से कई निवेशक मित्रों से बात कर रहा था कि 15 नवंबर से पहले सेंसेक्‍स 15 से 15500 अंक तक आ सकता है। कुछ निवेशकों का कहना था कि ऐसा नहीं हो सकता। मैं कहता हूं क्‍यों नहीं हो सकता। क्‍या किसी को पता था कि‍ पार्टिसिपेटरी नोट का मुद्दा सामने आएगा और बाजार में तूफान मच जाएगा। अब क्‍या क्‍या मुद्दे सामने आएंगे, आपको पता है, नहीं ना। हालांकि, मैं आम निवेशक के हित में कहना चाहूंगा कि सेंसेक्‍स बढ़े और लोग मुनाफा कमाकर बाजार से निकले। लेकिन, लालची मन लोगों को रोकता है कि ठहरो, और तेजी आएगी, और तेजी आएगी। मुनाफा गांठ बांधना अच्‍छा नहीं लगता। हर कोई मुनाफे की आखिरी पाई पाई कमाना चाहता है लेकिन ऐसा हो नहीं सकता। हर किसी को सबसे निचले स्‍तर पर खरीद कर, सबसे ऊंचे स्‍तर पर शेयर बेचने हैं और ऐसा आज तक नहीं हुआ। हां, यदि आप सोने का चम्‍मच लेकर पैदा हुए हों तो बात अलग है और सोने का चम्‍मच लेकर पैदा होने वाले दुनिया में अंगुलियों पर गिने जा सकते हैं।

वाह मनी निवेशकों को एक बार फिर कहना चाहता है कि जहां आपको मुनाफा मिले, उसे लेकर चलते रहें क्‍योंकि जो मुनाफा आज आपकी जेब में आ रहा है, वह कल किसी और की जेब में जा सकता है। आज की स्थिति के बाद वाह मनी निवेशकों से कहना चाहेगा कि वह 25 अक्‍टूबर तक रुके और सेबी की पार्टिसिपेटरी नोट पर होने वाली बैठक के बाद ही अपनी रणनीति तय करें। हालांकि, इससे पहले 22 अक्‍टूबर को होने वाली परमाणु करार पर वामपंथियों के बयान को गहराई से समझें। वैसे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमरीका को इस करार के संबंध में कहा है उससे नहीं लगता कि वामपंथी केंद्र सरकार को गिराने के मूड में दिखें। इसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति जारी करेगा जिसमें सीआरआर के बढ़ने की आशंका है। हालांकि यदि ऐसा होता है तो बाजार को एक धक्‍का लग सकता है लेकिन इस कारक को बाजार जल्‍दी ही डिस्‍काउंट कर लेगा। शेयर बाजार के मौजूदा हालात इस ओर संकेत करते हैं कि आम निवेशक को हर समय सचेत रहने की जरुरत है और लंबी पोजीशन लेकर चलने के बजाय डे ट्रेडिंग कर पोजीशन को बराबर कर लें। यद्यपि जिन लोगों ने वास्‍तविक निवेशक के रुप में पैसा लगाया है उन्‍हें घबराने की जरुरत नहीं है क्‍योंकि उन्‍हें लांग टर्म में बड़ा लाभ होगा। वाह मनी अपनी इस राय पर कायम है कि दिवाली 2008 के आसपास सेंसेक्‍स 25 हजार के आसपास होगा।

October 17, 2007

शेयर बाजार फिर दौड़ेगा


सेबी ने पार्टिसिपेटरी नोट पर अपने दिशा निर्देशों का मसौदा सामने रखा और भारतीय शेयर बाजार आज औंधे मुंह गिरा। वित्‍त मंत्री पी चिदम्‍बरम ने भी शेयर बाजार में आई तगड़ी गिरावट के बाद ज्‍योंहि बयान दिया, शेयर बाजार सुधार की ओर मुड़ा। शेयर बाजार में आई भयानक गिरावट पर वित्त मंत्री का कहना है कि वे पार्टिसिपेटरी नोट को प्रतिबंधित करने के पक्ष में नहीं है और दिन चढने के साथ शेयर बाजार में फैली यह घबराहट दूर हो जाएगी। इस समय बीएसई सेंसेक्‍स तकरीबन 750 अंक नीचे है, हालांकि निवेशकों को बहुत सावधान रहने की जरुरत है। फिर भी हम निवेशकों से कहना चाहेंगे कि वे बुनियादी तौर पर मजबूत कंपनियों के शेयर कतई नहीं बेचें बल्कि कम भावों पर ऐसी कंपनियों के शेयर खरीदें जरुर। यदि आज आपने गौर किया है तो कई बेहतर कंपनियों के शेयर काफी घट गए थे लेकिन अब वापस वे कल के स्‍तर के आसपास दिख रही हैं यानी समझदारों ने इनमें खरीद का मौका देखा।

पी नोट का यह है झंझट पुराना

सेबी और रिजर्व बैंक ने इस बात पर जोर दिया है कि पी नोट्स के अंधाधुंध इस्‍तेमाल को रोकने की आवश्‍यकता है। हालांकि, पार्टिसिपेटरी नोट को रोकने के लिए यह पहली बार कुछ नहीं कहा गया है। जब भी पार्टिसिपेटरी नोट पर अंकुश लगाने की बात होती है, शेयर बाजार में घबराहट भरी गिरावट आती है। स्थित‍ि को आप भी देखिए कि पार्टिसिपेटरी नोट का कुल अनुमानित मूल्‍य मार्च 2004 के 31875 करोड़ रूपए से बढ़कर अगस्‍त 2007 में 353484 करोड़ रूपए पहुंच गया। यही वजह है रिजर्व बैंक इस मामले पर सेबी को जगाता रहा है जिसकी वजह से सेबी ने कुछ कदम उठाने की बात कही। सेबी विदेशी संस्‍थागत निवेशकों के निवेश को लेकर चिंतित है। वह इन पर अब पूरा अंकुश चाहती है। इस कदम को उठाने की पहल इसलिए की गई है कि अचानक से ऐसा बड़ा निवेश न आए जिसकी उम्‍मीद न की गई हो और फिर एकदम से वह पैसा बाहर निकल जाए जिससे बाजार को तगड़ा झटका लगे।

सब कुछ नहीं मिटेगा

निवेशक घबराएं नहीं क्‍योंकि सब कुछ मिटने नहीं जा रहा है। बुनियादी रुप से मजबूत कंपनियों के शेयर मजबूत रहेंगे। हां जिन में जमकर सट्टा चल र‍हा था या कमजोर कंपनियां जो गलत ढंग से दौड़ रही थी में काफी नुकसान होगा। सेबी ने पार्टिसिपेटरी नोट पर अभी कोई आदेश जारी नहीं किया है या कोई अंतिम सिफारिश नहीं दी है। सेबी ने केवल डिस्‍क्‍शन पेपर जारी किया है लेकिन इसकी भाषा से लगता है कि सेबी पार्टिसिपेटरी नोट को नियंत्रित करना चाहती है। इस चर्चा पर राय भेजने का समय केवल 20 अक्‍टूबर तक का है। यानी चार दिन में सब कुछ करना है।

क्‍या है पी नोट

पार्टिसिपेटरी नोट किसी विदेशी संस्‍थागत निवेशक और उसके विदेशी ग्राहक के बीच होने वाला समझौता पार्टिसिपेटरी नोट होता है। इसके माध्‍यम से विदेशी निवेशक उस विदेशी संस्‍थागत निवेशक को अपने लिए कोई सौदा करने का निर्देश देता है। लेकिन जब यह सौदा बाजार में होता है तो नाम विदेशी संस्‍थागत निवेशक का ही आता है असली विदेशी ग्राहक का नहीं। असल में पार्टिसिपेटरी नोट के माध्‍यम से शेयर खरीदने बेचने वाले की पूरी जानकारी सेबी को नहीं मिल पाती। यानी पार्टिसिपेटरी नोट विदेशी निवेशकों को बाजार में पैसा लगाने और बेचकर निकलने का आसान और छिपा रास्‍ता है। एक तरह से ये बेनामी विदेशी सौदे हैं। असल में ऐसे विदेशी निवेशक यह रास्‍ता चुनते हैं जो अपना रजिस्‍ट्रेशन सेबी के पास नहीं कराना चाहते या जिन पर सेबी ने रोक लगा रखी है। हम आपको बता दें कि मार्च 2004 में केवल 14 विदेशी संस्‍थागत निवेशक ही पार्टिसिपेटरी नोट जारी करते थे‍ जिनकी संख्‍या अब बढ़कर 34 हो गई है। सेबी का कहना है कि इस समय भारतीय शेयर बाजार में कुल विदेशी संस्‍थागत निवेश का 51 फीसदी हिस्‍सा पार्टिसिपेटरी नोट का है। सेबी अध्‍यक्ष का कहना है कि पार्टिसिपेटरी नोट के संबंध में रखे गए प्रस्‍ताव पी नोट के खिलाफ हैं न कि विदेशी संस्‍थागत निवेशकों के।

सेबी के प्रस्‍ताव

1-विदेशी संस्‍थागत निवेशक यानी एफआईआई या उनके सब एकाउंट की ओर से डेरिवेटिव्‍स के लिए पार्टिसिपेटरी नोट या इसी तरह के दूसरे ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्‍ट्रुमेंट जारी करने पर तत्‍काल रोक लगाना। जो पार्टिसिपेटरी नोट पहले जारी हो चुके हैं उन्‍हें 18 महीने के अंदर निपटाया जाए। हालांकि, नकद बाजार में ऐसी रोक का प्रस्‍ताव नहीं है।

2- विदेशी संस्‍थागत निवेशक के सब एकाउंट की ओर पार्टिसिपेटरी नोट जारी किया जाना पूरी तरह बंद हो।

3-जिस विदेशी संस्‍थागत निवेशक की ओर से जारी पार्टिसिपेटरी नोट डेरिवेटिव्‍स छोड़कर का अनुमानित मूल्‍य भारत में उसके कुल निवेश के 40 फीसदी से ज्‍यादा हो, उन्‍हें मौजूदा पार्टिसिपेटरी नोट के रद्द होने, भुनाए जाने या बंद होने पर उतने के बराबर ही नए पार्टिसिपेटरी नोट जारी करने की अनुमति रहे। सेबी के प्रस्‍ताव के लिए पूरी डिटेल आप पढ़ सकते हैं
यहां :

October 13, 2007

शेयर बाजार का मार्च पॉस्‍ट


भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को खासा उछाल देखने को मिल सकता है। लेकिन परमाणु करार से कदम पीछे खींचने से बिजली कंपनियों के शेयरों को झटका लगने की आशंका है। कांग्रेस के परमाणु करार से अधिक सरकार को बचाए रखने की प्राथमिकता यह संकेत देती है कि कांग्रेस जो अब तक अपने आप को चुनाव के लिए तैयार बता रही थी, पहले गुजरात में लड़े जाने वाले मिनी चुनाव युद्ध का जायका लेना चाहती है। यदि गुजरात चुनाव में सही सफलता हाथ लगी तो ही केंद्र सरकार फरवरी-मार्च में लोकसभा चुनाव के बारे में सोच सकती है। इस तरह की सोच से पहले अगले आम बजट के संकेत भी साफतौर पर दिए जाएंगे कि बजट कैसा बनाने का मूड है और इस संबंध में देश के वित्‍त मंत्री पी चिदम्‍बरम ने कुछ बातें कही हैं। पेट्रोल डीजल की कीमतें मार्च से पहले न बढ़ाने की घोषणा और खाद्यान्‍नों के न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍यों को बढ़ाकर किसानों वोट बैंक की आ‍कर्षित करना, खाद्यान्‍नों की कीमतों पर नियंत्रण की बात कर आम आदमी को लुभाना भी इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। परमाणु करार के बजाय सरकार बचाने को वरीयता देने के बाद यह तो साफ है कि शेयर बाजार में उछाल आएगा लेकिन हम आम निवेशक को कहना चाहते हैं कि वे सावधान रहें क्‍योंकि जब यह निवेशकों के मन में बात बैठ चुकी हो कि गिरावट बीती बात बन गई है, ऑपरेटर इसके विपरीत चल सकते हैं। लेकिन कुल जमा माहौल गर्म रहेगा।

सरकार पहले, करार बाद में

किसी भी कीमत पर परमाणु करार को अंजाम तक पहुंचाने का दावा कर रहे प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी अब पीछे हट गए हैं। कांग्रेस के इन दिग्‍गजों ने सरकार बचाने के लिए करार के प्रति बेकरारी रोक दी है। प्रधानमंत्री ने साफ कहा, 'अगर करार नहीं हुआ तो अफसोस होगा, लेकिन जिंदगी यहीं खत्म नहीं होती।' सोनिया ने भी कहा, 'सरकार अपना कार्यकाल पूरा करे, यह हमारी कोशिश होगी।' साफ है कांग्रेस ने कम्‍युनिस्‍टों और सहयोगियों के दबाव में अपने पुराने रुख से पलटी मार ली है। कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री यहां तक कह रहे थे कि 'करार से सरकार पीछे नहीं हटेगी, चाहे जो हो।' लेकिन अब गठबंधन धर्म निबाहने की बात कही जा रही है, भले इससे देश का नुकसान हो।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने न सिर्फ सरकार के कार्यकाल पूरा करने का दावा किया, बल्कि कम्‍युनिस्‍टों की नाराजगी का सबब बने बयानों पर भी सफाई दी। खास तौर से झज्जर में करार का विरोध करने वालों को विकास के दुश्मन बताने संबंधी बयान पर भी उन्होंने सफाई दी। 'मैंने वामदलों पर निशाना नहीं साधा था, बल्कि मैं हरियाणा में विपक्ष को निशाना बना रही थी।' बयान के गलत मतलब निकाले जाने के लिए उन्होंने अपनी खराब हिंदी को दोष दिया।

आम बजट चिदम्‍बरम ही करेंगे पेश

वित्तमंत्री पी चिदंबरम का कहना है कि आर्थिक सुधार अगले बजट में भी जारी रखे जाएंगे। इस तरह से उन्होंने इन अटकलों पर विराम लगा दिया कि चुनावों से पहले वे लोकलुभावन बजट लाएंगे। वित्‍त मंत्री कहते हैं कि वे अगला बजट भी पेश करेंगे। चिदंबरम की यह टिप्पणी सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के उन बयानों के बीच आई है कि केंद्र सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी। अगला बजट लोकलुभावन होगा या सुधारों वाला यह पूछे जाने पर चिदंबरम ने कहा कि रास्ते बदलने की कोई वजह नहीं है। अगर विकास की दर कम हुई हो तो रास्ता बदला जा सकता है। लेकिन हमारी औसतन विकास दर 8.6 फीसदी रही है। उन्होंने जिक्र किया कि विकास दर के बारे में सबसे निराशाजनक अनुमान 8.5 फीसदी का है और इससे कहीं नहीं लगता कि हमें अपना रास्ता बदलना चाहिए।

October 11, 2007

गोलमाल है भाई सब गोलमाल है....


भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह कंप्‍यूटरीकृत होने और सेबी की कड़ी नजर से शेयर बाजार में गोलमाल न होने की छवि रखने वाले आम निवेशक यह जान लें कि हरिदास मूंदडा, हर्षद मेहता और केतन पारेख से भले ही अब यह बाजार बचा हुआ हो लेकिन यहां अभी भी काफी कुछ गोलमाल है और यह गोलमाल हमेशा बना रहेगा। हम आपको बताते हैं कि शेयर बाजार में कैसे सांकेतिक भाषा में गोलमाल चलता है ताकि फोन रिकार्डिंग होने के बावजूद कोई पकड़ा नहीं जा सके।

माहौल है--देश के एक विख्‍यात संस्‍थागत शेयर ब्रोकिंग हाउस के इक्विटी डिलिंग रुम का। जहां इसके एक सेल्‍स टीम सदस्‍य श्रीमान एक्‍स बैठे हैं जिन्‍हें एक विदेशी ग्राहक ने एनटीपीसी के दस लाख शेयर अमुक भाव पर खरीदने का ऑर्डर दिया है। इसके बाद श्रीमान एक्‍स के पास एक फोन आता है और इस फोन की आस पहले से ही श्रीमान एक्‍स को थी। बस अब बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज के खुलने में केवल दस मिनट बचे हैं। फोन पर श्रीमान एक्‍स से ग्राहक बाजार की सामान्‍य बातचीत करता है और पूछता है कि आज लंदन शेयर बाजार कैसा रहेगा। श्रीमान एक्‍स का जवाब है मेरे ख्‍याल से अच्‍छा रहेगा। सर, मैं इस समय व्‍यस्‍त हूं और आपसे इस संबंध में रात दस बजे बात करुंगा। जबकि हकीकत यह है कि ग्राहक ने फ्रंट रनिंग के सौदे की टिप्‍स इस सांकेतिक भाषा में दी। तकनीकी रुप से देखें तो कोई भी ग्राहक द्धारा खरीद या बिक्री का बड़ा ऑर्डर दिए जाने से पहले कोई कारोबारी इस सौदे की जानकारी के आधार पर उसका गलत तरीके से लाभ उठाने के लिए पोजीशन ले उसे फ्रंट रनिंग कहा जाता है।

डिलिंग रुम में आए इस फोन के बंद होने के बाद ऑपरेटर जिसे बाजार में कोबरा के नाम से जाना जाता है अपने खुद के डीलर को बाजार खुलते ही एनटीपीसी के एक लाख शेयर खरीदने और दिन में पांच रुपए बढ़ते ही बेच देने की सूचना देता है। इस तरह दोनों सौदे पूरे होने के बाद आर 001 नामक खाते में एनटीपीसी के 25 हजार शेयर खरीदने की सूचना भी दी जाती है। बड़े ग्राहक विदेश से शेयर खरीदने की सूचना ईमेल पर देते हैं ताकि जल्‍दी से इस खेल को कोई पकड़ न सके। हालांकि भारत और दूसरे देशों के समय में अंतर होने से ऐसे ऑर्डर कई घंटे पहले रात में ही आ जाते हैं।

ऐसी कारोबारी सूचनाओं के लिए श्रीमान एक्‍स ने कोबरा को फ्रंट रनिंग सौदे के लिए जो टिप्‍स दी वह सांकेतिक भाषा में दी गई। इस बातचीत में एनटीपीसी के लिए लंदन और दस लाख शेयर के ऑर्डर के लिए रात को दस बजे को कोड के रुप में इस्‍तेमाल किया गया। इस टिप्‍स देने की व्‍यवस्‍था के तहत संबंधित ब्रोकिंग कंपनी अपने ग्राहक के लिए दस लाख शेयर की खरीद करने से पहले ही कोबरा इस शेयर में बड़ी पोजीशन लेने की तैयारी करते हैं और साथ ही श्रीमान एक्‍स के लिए भी कुछ शेयर खरीदना चाहते हैं। शेयर बाजार खुलते ही एक लाख शेयर की खरीद करने के बाद विदेशी ग्राहक के लिए शेयर खरीदे जाते हैं और शेयर का भाव बढ़ते ही कोबरा अपने शेयर बेचकर मुनाफा बुक करना चाहते हैं। इस लाभ में से कुछ हिस्‍सा श्रीमान एक्‍स को भी दिया जाना है। यदि विदेशी ग्राहक ने शेयर बेचने का ऑर्डर दिया होता तो कोबरा भी शेयर बेचते और मुनाफा काटते। हम आपको बता दें कि सभी मुख्‍य संस्‍थागत ब्रोकिंग कंपनियों के डिलिंग रुम के सभी फोन रिकॉर्ड होते हैं और वहां मोबाइल फोन का इस्‍तेमाल नहीं किया जा सकता।

फ्रंट रनिंग की शंका होने पर सेबी का जांच अधिकारी कोबरा और श्रीमान एक्‍स के बीच हुई बातचीत के टेप सुने तो भी दोनों के बीच कोई गठजोड़ हुआ है, साबित करना मुशिकल है। ऐसे गोलमाल से जुड़े कारोबारी समय समय पर सांकेतिक भाषा बदलते रहते हैं। ऑर्डर के लिए सप्‍ताह के विभिन्‍न वारों का जैसे रविवार एक लाख, सोमवार दो लाख....यूज किए जाते हैं। इसी तरह तय समय या महीने की अमुक तारीख का सहारा लिया जाता है। इसी तरह एक शेयर के लिए दूसरे शेयर के नाम का सहारा लिया जाता है। मसलन इस्‍पात इंडस्‍ट्रीज अच्‍छा लगता है तो इसका अर्थ होगा कि टिस्‍को में खरीद करें। यदि टिस्‍को बेचना हो तो कहा जाएगा कि इस्‍पात कमजोर लग रहा है।

1990 के दशक के मध्‍य से 2004 तक फ्रंट रनिंग काफी आक्रामक रुप से चलता था। इस समय फ्रंट रनिंग के बारे में शेयर बाजार के खिलाड़ी एकमत नहीं हैं। कुछ खिलाड़ी कहते हैं कि पहले बाजार सीमित दायरे में चलता था और मुनाफा कमाने का मौका बहुत कम मिलता था, ऐसे में फ्रंट रनिंग खूब होता था लेकिन अब बाजार काफी व्‍यापक है और मुनाफा कमाने के मौके खूब हैं जिससे फ्रंट रनिंग नहीं होता। इस समय शेयर बाजार के खिलाड़ी अपने अनुमान से कहीं अधिक कमा रहे हैं। इस वजह से कोई खिलाड़ी अपने कैरियर को दांव पर नहीं लगाएगा। जबकि अनेक खिलाड़ी कहते हैं कि फ्रंट रनिंग कम नहीं हुआ है। बल्कि अब खूब बड़े सौदे होते हैं और खिलाडि़यों को कैश सौदों में रुचि नहीं है। संस्‍थागत निवेशकों की रुचि एफ एंड ओ में बढ़ रही है। फ्रंट रनिंग के खेल में इक्विटी सेल्‍स स्‍टॉफ और डीलर तो केवल मोहरे हैं।

खेल तो चालू है
सेबी ने हाल में यूटीआई सिक्‍युरिटीज के एक डीलर, एमके शेयर एंड स्‍टॉक ब्रोकर्स के एक सब ब्रोकर और प्रयास सिक्‍युरिटीज के एक निदेशक पर बल्‍लारपुर इंडस्‍ट्रीज के शेयर में कारोबार करने संबंधी रोक लगाई है। यह रोक कथित फ्रंट रनिंग की वजह से लगाई गई है। सेबी ने फ्रंट रनिंग के तहत यह पहला कदम उठाया है। हालांकि, फ्रंट रनिंग और इनसाइडर ट्रेडिंग को साबित करना काफी कठिन होता है। सेबी को यदि ऐसे खिलाडि़यों के फोन और ईमेल पर नजर रखने का अधिकार मिले तो काफी हद तक ऐसे गोलमाल पर काबू पाया जा सकता है।

October 09, 2007

शेयर बाजार दौड़ा, छोटे निवेशक मुस्‍काते रहे, हाथ न आया धैला

यूपीए और वामपंथियों की बैठक का नतीजा जीरो आने की भनक लगते ही शेयर बाजार के खिलाड़ी पूरी तरह रंग में आ गए जो पिछले शुक्रवार से भयभीत थे जिसकी वजह से कल सोमवार को बाजार का रंग फीका पड़ गया था। आज सुबह भी निवेशक इसी भय में खरीद टाल रहे थे कि कहीं वामपंथी उन्‍हें साफ न कर दें, लेकिन बैठक का नतीजा जीरो आने की भनक के साथ ही शेयर बाजार दौड़ने लगा और नीचे से 1040 अंक सुधरकर 18327 अंक तक जा पहुंचा। हालांकि, कुल बढ़त 789 अंक की रही और बीएसई सेंसेक्‍स बंद हुआ 18280 अंक पर। एक दिन में हजार अंक की निचले स्‍तर से बढ़त ऐतिहासिक बढ़त हो गई है। सेंसेक्‍स का अगला मुकाम 18 हजार...देखें।

हाथ नहीं आया धैला

सेंसेक्‍स की उछाल से निवेशकों के चेहरों पर मुस्‍कान फैली हुई थी और ऐसी अनुभूति हो रही थी, मानो बड़ा गढ़ जीत लिया हो लेकिन आज भी यही सवाल सामने खड़ा है कि आम निवेशक की जेब में कितना मुनाफा आया क्‍योंकि जब शेयर बाजार ऊपर की दौड़ रहा था तब भी मिड कैप और स्‍मॉल कैप काउंटरों की हालत अच्‍छी नहीं थी। असली फायदा तो कुछ ही स्‍टॉक्‍स को हुआ। जैसे रिलायंस एनर्जी बढ़त 11.78%, रिलायंस कम्‍युनिकेशन 11.39%, रिलायंस इंडस्‍ट्रीज 8.07%, मारुति 7.73%, भारती एयरटेल 6.71%, एनटीपीसी 6.55%, एसबीआई 5.85%, टिस्‍को 5.82%, ग्रासिम 5.53%, एलएंडटी 5.12% बढ़े। इन तेजी से दौड़ने वाली कंपनियां के कितने शेयर आम निवेशक के पास है। आज की तेजी में आम निवेशक केवल मुस्‍कराता रहा लेकिन हाथ में एक भी धैला नहीं आया।

छोटे छोटे ही रहे

आज की दौड़ का आम निवेशक को जो मझौली और छोटी कंपिनयों में पैसा लगाता है कोई फायदा नहीं हुआ। कौनसे शेयर दौड़ रहे हैं, जरा यह सोचिए। क्‍या आज आपको शेयर बाजार से सेंसेक्‍स की तुलना में बड़ा फायदा हुआ है। अधिकतर निवेशकों का इस पर नकारात्‍मक जवाब है। जब आम निवेशक को लाभ नहीं हुआ है तो मौजूदा तेजी किसके हित में। विदेशी संस्‍थागत निवेशक, घरेलू बड़े संस्‍थागत निवेशक और म्‍युच्‍यूअल फंड इस मलाई के भागीदार बने हैं। आम निवेशक को पैसा निवेश करना चाहिए। लेकिन आम निवेशक तो मझौली व छोटी कंपनियों में पैसा लगाता है और जब ये शेयर बढ़ते नहीं तो उसे क्‍या फायदा। हां, खूबसूरत पिक्‍चर खड़ी कर छोटे निवेशकों की जेब से पैसा निकालने के लिए जमकर राय देना संस्‍थागत निवेशकों के लिए कारोबार करने वाले विश्‍लेषकों के लिए जरुर मुनाफे का सौदा है।

बैठक एक ढकोसला

भारत-अमरीका परमाणु करार पर आपसी मतभेद हल करने के लिए यूपीए और वामपंथियों की बैठक फिर बेनतीजा रही। अब अगली बैठक 22 अक्टूबर को होगी। उन्होंने कहा है कि इस बैठक में परमाणु समझौते का विदेश नीति और सुरक्षा सहयोग के मसलों पर होने वाले असर पर चर्चा शुरु की गई है। चुनावों की चर्चा के बीच बैठक के बाद यूपीए के एक घटक दल के नेता और केंद्रीय मंत्री लालू प्रसाद यादव ने पत्रकारों से कहा, "कोई भी चुनाव नहीं चाहता, इसलिए मध्यावधि चुनाव होने की कोई आशंका नहीं है." आज की बैठक से पहले सुबह ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर थी कि वामपंथियों की सरकार से समर्थन वापसी की धमकी गीदड़ धमकी साबित होगी क्‍योंकि कोई भी वाम दल इस समय आम चुनाव का सामना करने को तैयार नहीं है। वाह मनी ने पहले ही कहा था कि कम्‍युनिस्‍ट ‘न्‍यू क्लियर डील’ में लगे हैं।

बड़े बूढ़ों ने कराया चुप

वामदल समर्थन वापस लेते हैं तो इसका खामियाजा सबसे अधिक वामदलों को ही होगा और उन्‍हें यह भी भरोसा नहीं है कि इस समय संसद में उनके जितने सांसद हैं वह संख्‍या भी बरकरार रहेगी। राजनीतिक विश्‍लेषक कह रहे थे कि सोनिया गांधी ने कड़ा रुख अपनाकर जो कदम उठाया उससे कम्‍युनिस्‍टों को पीछे हटना पड़ रहा है। साथ ही बूढ़े नेता ज्‍योति बसु भी नहीं चाहते कि देश चुनाव की ओर मुड़े। उन्‍होंने ही अपने कामरेडो को सलाह दी की बैठक करो और केवल बैठक। सही है सत्‍ता का मजा और स्‍वाद अलग ही तरह का होता है। राजनीतिक गलियारों की चर्चा पर भरोसा करें तो भारत और अमरीका के बीच परमाणु करार होकर रहेगा और यह कांग्रेस की नाक का सवाल बन गया है। वामपंथी आगे थोड़ा बहुत चिल्‍लाते रहेंगे और करार हो जाएगा।

कार फाइनेंस पर भी करें रिसर्च

कार खरीदने से पहले जितनी रिसर्च कार पर की जाती है, उतनी ही जांच-पड़ताल लोन को लेकर भी होनी चाहिए। ज्यादतर लोग लोन को उतनी गंभीरता से नहीं लेते, लेकिन अगर इसे गंभीरता से लिया जाए, तो डील सस्ती साबित हो सकती है।

कार खरीदने से पहले तमाम लोग डीलरों और अपने दोस्तों-परिचितों से जरूरी जानकारी मालूम करते हैं और खुद ड्राइव कर हर तरह से निश्चिंत हो जाना चाहते हैं। इसके लिए ज्यादातर लोग रिसर्च करते हैं, प्राइस, फीचर्स, कलर्स, स्पेसिफिकेशन, सेफ्टी, क्वॉलिटी रेटिंग आदि से जुड़ी तमाम बातें मालूम करते हैं। लेकिन कम ही लोग ऐसे हैं, जो ऑटो फाइनैंस से जुड़ी इतनी तहकीकात करते हैं। अगर आप भी इन्हीं लोगों में से हैं, तो बेहतर डील के लिए आपको यह आदत बदलनी चाहिए।

ज्यादातर मामलों में खरीदार लोन के लिए डीलर पर ही निर्भर होते हैं। खरीदारों की ओर से डीलर ही उनकी जरूरत और बजट के मुताबिक लोन ऑप्शन बता देते हैं और अमूमन खरीदार उसी आधार पर डील फाइनल कर लेते हैं। लेकिन डीलर के बताने से पहले आपको भी थोड़ी रिसर्च कर लेनी चाहिए। आपको उपलब्ध ऑप्शंस के बारे में जान लेना चाहिए और अपने लिए सही डील का अंदाज खुद लगाना चाहिए। ऑटो लोन लेने का काम मुख्य रूप से तीन चरणों में पूरा किया जाना चाहिए।

होमवर्क कीजिए

अपनी माली हालत को खुद तौलिए और देखिए कि आप कितना लोन अफोर्ड कर सकते हैं। यानी आप कितनी रकम बतौर ईएमआई चुका सकते हैं। आप जैसी कार चाह रहे हैं, उस रेंज में उपलब्ध तमाम कंपनियों की कारों के बीच से अपने लिए सबसे अच्छे मॉडल का चयन कीजिए। अब लोन के लिए उपलब्ध तमाम ऑप्शंस पर नजर दौड़ाइए और इनके बीच से सबसे अच्छा विकल्प चुनिए। इंटरेस्ट रेट, प्रॉसेसिंग फी आदि की तुलना करते हुए सस्ता व आसान लोन देने वाले बैंक या फाइनेंशल इंस्टिट्यूशन के पास जाइए।

अटल रहिए

आप अपने बजट के हिसाब से लिए गए फैसले पर अटल रहिए। डिस्काउंट, इनिशिएटिव या किसी और आधार पर मॉडल फाइनल करने के बजाय आप अपनी जरूरतों के हिसाब से सही मॉडल का चयन कीजिए।

प्राइस को लेकर जहां तक हो सके, बारगेनिंग करने की कोशिश कीजिए। बारगेनिंग केवल प्राइस को लेकर ही नहीं होती, बल्कि लोन की शर्तों व रेट के मामले में भी होती है। इसलिए आप लोन देने वाले बैंक या फाइनेंशल इंस्टिट्यूशन से भी बारगेनिंग कर सकते हैं। कुल मिलाकर आपका टार्गेट सस्ते में बेहतर डील करना होना चाहिए।

ऑप्शनल प्रॉडक्ट्स, जैसे-एक्सटेंडेड वॉरंटी, एक्सटेंडेड सर्विस कॉन्ट्रैक्ट, क्रेडिट इंश्योरेंस आदि तभी खरीदें, जब आपको इसकी जरूरत हो। इनके लिए आपको अलग से कीमत चुकानी होगी और यह कीमत वसूल होती हो, तभी इन्हें खरीदना फायदेमंद रहेगा।

किसी डॉक्युमेंट पर दस्तखत करने से पहले उसे पढ़ कर अच्छी तरह समझ लें। जहां थोड़ी भी कठिनाई हो, पूछने में संकोच नहीं करना चाहिए।

क्रेडिट प्रोटेक्शन

किस्त समय पर भरें। इसमें अगर देर या चूक हुई, तो आपको लेट फी के रूप में अतिरिक्त रकम तो चुकानी ही पड़ेगी, इसके अलावा आपकी क्रेडिट रिपोर्ट खराब मानी जाएगी और इसकी वजह से भविष्य में लोन मिलने में मुश्किल हो सकती है।

अगर आपके लिए किस्त भरना मुश्किल हो रहा हो, तो बैंक या फाइनेंशल इंस्टिट्यूशन से बात कर एक रीपेमेंट शेड्यूल तय कर लीजिए। जरूरी हो, तो किसी स्वैच्छिक काउंसलिंग एजेंसी की सेवा भी ले सकते हैं। नवभारत टाइम्‍स से साभार

October 08, 2007

आया शेयर बाजार नीचे, खरीद के लिए रहो तैयार

भारतीय शेयर बाजार में आज वही हुआ जिसकी पहले से ही आशंका थी।
बीएसई सेंसेक्‍स आज 282 अंक गिरकर 17491 पर बंद हुआ, हालांकि यह नीचे में 17322 तक चला गया था, जहां अधिकतर निवेशकों की धड़कनें बढ़ गई थी। शेयर बाजार में आई गिरावट के लिए कांग्रेस और वामपंथियों के बीच चल रही शब्‍द लड़ाई को माना जा रहा है। यदि देश मध्‍यावधि चुनाव की ओर मुड़ता है तो साफ है शेयर बाजार को तगड़ी नजर लगेगी। विश्‍लेषकों की बातों पर भरोसा किया जाए तो आज की गिरावट जारी रहेगी। यह अलग बात है कि सेंसेक्‍स को हल्‍के झटके लगे या तगड़े। फिर भी बीएसई सेंसेक्‍स के दो हजार अंक तक घटने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वाह मनी के पाठक जानते हैं कि हमने दो काफी दिन पहले ही दो स्‍टोरी इस बात पर दी थी कि शेयर बाजार में गिरावट आएगी और आज आठ अक्‍टूबर है और भविष्‍यवाणी सच हुई। हम एक बात और साफ कर देना चाहते हैं कि शेयर बाजार में भले ही भयंकर गिरावट न आए लेकिन मिड कैप और स्‍मॉल कैप में आई ताकत को केवल चार दिन में साफ किया जा सकता है।

मध्‍यावधि चुनाव अब कमान बसु के हाथ

कांग्रेस और वामपंथियों के बीच चल रहे शब्‍द युद्ध की कमान अब बूढ़े मा‌र्क्सवादी नेता ज्योति बसु ने संभाल ली है। बसु का कहना है कि उनके पार्टी नेतृत्व को भारत-अमरीका परमाणु करार पर समझौता करने से जुड़ी संभावनाओं पर गौर करना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के भाषण का जिक्र करते हुए बसु ने कहा कि यदि वह चुनाव चाहतीं हैं तो हम भी इसके लिए तैयार हैं, भले ही हम इसके पक्ष में न हों। बसु ने कहा कि प्रणव मुखर्जी से मुलाकात के बाद मैंने प्रकाश करात और सीताराम येचुरी से बातचीत की है। मैंने उनसे उनकी बात सुनने के लिए कहा है यह देखने के लिए कि क्या कोई समझौता किया जा सकता है। परमाणु करार के विरोधियों पर सोनिया के हमले के बारे में बसु कहते हैं कि मैं नहीं जानता कि उन्होंने अब अपना लहजा क्यों बदल लिया। यदि वह चुनाव चाहती हैं तो हम तैयार हैं। हालांकि माकपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस वक्त वह चुनाव के पक्ष में नहीं हैं।
बसु ने कहा कि विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने उनसे मुलाकात कर बताया है कि यूपीए सरकार आईएईए के पास जाएगी और उसे बता दिया गया है कि सरकार वामपंथियों के साथ बातचीत कर रही है और उन्हें उनकी चिंताओं के बारे में अवगत कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि हमें कम से कम अभी के लिए मिलकर काम करना चाहिए क्योंकि सांप्रदायिक ताकतें कुछ इलाकों में फिर एकजुट हो रही हैं और अन्य राज्यों में कमर कस रही हैं। बसु कहते हैं कि 18 अक्टूबर को नई दिल्ली में माकपा पोलित ब्यूरो की बैठक होगी। जिसमें परमाणु करार के सिलसिले में पार्टी के अगले कदम पर फैसला किया जाएगा।

खरीद का मौका

शेयर बाजार के खिलाडि़यों का कहना है कि बीएसई सेंसेक्‍स ने दो हजार अंकों की दौड़ बहुत तेजी से लगाई जिससे निवेशक चिंतित है और इस समय जमकर मुनाफा वसूली कर लेना चाहते हैं। शेयर बाजार विश्‍लेषकों की राय में बीएसई सेंसेक्‍स गिरकर 16 हजार से 16500 अंक तक आ सकता है। मिडकैप पर ज्‍यादा दबाव रहेगा। अभी तक मिड कैप में पांच से सात फीसदी की धुलाई देखी है लेकिन यह नरमी बढ़ती है तो लार्ज कैप स्‍टॉक में 10 से 12 फीसदी का करेक्‍शन आ सकता है। जबकि मिड कैप में यह नरमी 15 से 20 फीसदी तक दिखाई दे सकती है। तेजी की दशा में सेंसेक्‍स का अगला मुकाम 18 हजार अंक है। वाह मनी की राय में गिरावट पर शेयर खरीदने में जल्‍दबाजी न दिखाएं लेकिन मौजूदा नरमी का फायदा बेहतर कंपनियों के शेयर खरीदने के लिए जरुर उठाएं। यह खरीद छोटी छोटी मात्रा में करें ताकि आपका खरीद भाव नीचा रह सके। बेहतर स्‍टॉक्‍स जरुर लें ताकि फिर से आने वाले जम्‍प के समय मोटा मुनाफा कमाया जा सके।

October 05, 2007

शेयर बाजार को गिराने का इंतजाम कर रहे हैं वामपंथी

भारत-अमरीका परमाणु करार पर यूपीए के साथ अपनी बैठक से चंद घंटे पहले ही वाम दलों ने एक बार फिर साफ किया कि यदि सरकार करार को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ी तो उससे समर्थन वापस ले लिया जाएगा। बस यही बयान आज भारतीय शेयर बाजार के लिए कारोबार के आखिर समय में घातक हुआ और सेंसेक्‍स गिरकर बंद हुआ। इस बयान से यह तय है कि आने वाले दिन शेयर बाजार के कठिन हो सकते हैं और सेंसेक्‍स नरम पड़ सकता है। इससे पहले भी परमाणु करार पर बवाल मचाकर वामपंथी शेयर बाजार को तगड़ा झटका दे चुके हैं। निवेशकों को हमारी राय है कि यदि वे लांग टर्म निवेशक हैं तो घबराएं नहीं और यदि शार्ट टर्म निवेशक या इंट्रा डे ट्रेडिंग करते हैं तो पूरी तरह सचेत रहें एवं अपने पोर्टफोलियो को हल्‍का करते रहे। एक बड़ी गिरावट के बाद वापस उम्‍दा कंपनियों के शेयर खरीद लें। वाह मनी का मानना है कि वर्ष 2008 की दिवाली के आसपास बीएसई सेंसेक्‍स 25 हजार अंक दिखाई दे तो अचरज नहीं होना चाहिए।

सीताराम येचुरी का कहना है कि सवाल यह है कि क्या भारत परमाणु करार को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ता है। तब हमें देखना पड़ेगा। यदि सरकार आगे कदम बढ़ाती है तो हम पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि हमारा समर्थन जारी नहीं रहेगा। वाम-यूपीए की 15 सदस्यीय समिति की बैठक के बारे में येचुरी ने कहा कि सरकार ने उनकी चिंताओं का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि हमने उनकी टिप्पणियों का अध्ययन किया है और उनके आधार पर बैठक में हम अपने विचार रखेंगे। माकपा नेता कहते हैं कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन और उसके बाहरी समर्थकों के बीच विचार-विमर्श जारी रहेगा। भाकपा महासचिव एबी वर्धन भी कह रहे हैं कि हमारी चेतावनी को हल्‍के से नहीं लिया जाना चाहिए। वे कहते हैं कि ऐसे संकेत मिले हैं कि सरकार परमाणु करार को लागू करेगी। जब तक करार पर कार्रवाई नहीं रोकी जाती तब तक कोई सुलह समझौता संभव नहीं है।

सीताराम येचुरी ने माकपा के मुखपत्र पीपुल्स डेमोक्रेसी के संपादकीय में भी लिखा है कि निश्चित रूप से कोई भी वामपंथी दलों से इस यूपीए सरकार को समर्थन देने की उम्मीद नहीं कर सकता जो न्यूनतम साझा कार्यक्रम का उल्लंघन कर भारत की विदेश नीति को उसी दिशा में आगे बढ़ा रही है जिसकी शुरुआत भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने की थी। फारवर्ड ब्लाक और आरएसपी भी परमाणु मुद्दे पर अपना कड़ा विरोध जता रही हैं। शेयर बाजार में गिरावट 10 अक्‍टूबर के बाद...यहां क्लिक करें और पढ़े..।

October 04, 2007

पावर ग्रिड खरीदो, रखो, खूब मिलेगा पैसा

पावर ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया 5 अक्‍टूबर 2007 को शेयर बाजार में सूचीबद्ध यानी लिस्टिंग होने जा रही है। देश के पावर ट्रांसमिशन में इसका एकाधिकार है और उम्‍मीद की जा रही है कि इसका शेयर कल 82-85 रुपए पर लिस्टिंग होगा। पावर क्षेत्र में यह ऐसा शेयर है जिसे आप शार्ट टर्म और लांग टर्म दोनों के लिए रख सकते हैं और दोनों मोर्चों पर ही पैसा कमाएंगे।

वे निवेशक निराश न हों जिन्‍हें पावर ग्रिड कार्पोरेशन के पब्लिक इश्‍यू में शेयर नहीं मिल सके। ऐसे निवेशकों को पावर ग्रिड के शेयर 80 रुपए से नीचे पर खरीदने की सलाह है लेकिन दो से तीन महीने तक इन्‍हें रखने की तैयारी पहले कर लें। वाह मनी ब्‍लॉग की राय में पावर ग्रिड कार्पोरेशन का शेयर जल्‍दी ही तीन अंकों में दिखाई देगा, जैसा कि पावर फाइनेंस कार्पोरेशन में हुआ था। हां, जिन निवेशकों को पब्लिक इश्‍यू में शेयर मिले हैं, वे इसे 95 रुपए पार करने पर बेचकर एक बार मुनाफा वसूली कर सकते हैं। पावर ग्रिड ने इश्‍यू का भाव 52 रुपए प्रति शेयर तय किया जो 44-52 रुपए के प्राइस बैंड का अधिकतम भाव है। आईपीओ के तहत 573932895 शेयर आबंटित किए गए हैं। पावर ग्रिड को एफएंडओ सेगमेंट में भी शामिल किया गया है जहां लॉट साइज 3850 शेयर है।

निवेशक एक बात अपने दिमाग में रखें कि पावर ट्रांसमिशन के क्षेत्र में इस कंपनी का कोई प्रतिस्‍पर्धी नहीं है इसलिए जो भी कंपनियां बिजली उत्‍पादन के क्षेत्र में आ रही हैं उन्‍हें अपनी बिजली उपभोक्‍ताओं तक पहुंचाने के लिए पावर ग्रिड कार्पोरेशन का सहारा लेना पड़ेगा। इसलिए तो कहा गया है वन नेशन, वन ग्रिड। और वाह मनी कहता है वन शेयर....लवली पावर ग्रिड। इसे भी देखें....बिजली बनाएगी मालामाल