भारतीय शेयर बाजार के निवेशक आज सुबह से ही इस बात से चिंतित थे कि भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति में कहीं ऐसा कुछ घोषित न कर दें कि उनकी दिवाली काली न हो जाए। खैर, सीआरआर में बढ़ोतरी के अलावा कोई ऐसा दूसरा कदम नहीं उठा जिसका बड़ा असर पड़ता। हालांकि, सीआरआर में बढ़ोतरी की खबर आने के बाद बाजार सुधरा, गिरा और अंत में लुढ़ककर बंद हुआ। असल में आज के ऊपरी स्तर से शेयर बाजार चार सौ अंकों के आसपास टूटा। बाजार बंद होते होते यह बात चल पड़ी की अमरीकी फैड की बैठक में क्या होगा। क्या वहां ब्याज दरें बढ़ेंगी, गिरेंगी या ज्यों की त्यों रहेगी। भारतीय रिजर्व बैंक की घोषणाओं पर सोच विचार पूरा भी नहीं हुआ कि अमरीका में क्या होगा, चिंता सताने लगी।
अमरीका में ब्याज दरों के बढ़ने के अवसर कम हैं। लेकिन यदि ब्याज दरें किसी संयोग में बढ़ती है तो इसका भारतीय शेयर बाजार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हां, ब्याज दरें घटी तो शेयरों में आग लग सकती है क्योंकि दुनिया के सारे फंड इस बात से सहमत हैं कि भारतीय शेयर बाजार में मिलने वाला रिटर्न वाकई बेहतर है और आदमी को लालची बनाता है। फटाफट एक के तीन हो रहे हैं तो फिर यह मलाई खाने से किसे परहेज। चाहे डॉक्टर कह दें कि यह मलाई मत खाना, ठीक नहीं है लेकिन डॉक्टर की बात को इस समय कोई मानने वाला नहीं है। हम निवेशकों से कहना चाहेंगे कि आज अमरीकी फैड रिजर्व की हो रही बैठक पर नजर रखें और उसी आधार पर कल निवेश संबंधी अपने निर्णय करें। हालांकि, जो निवेशक लांग टर्म के आधार पर निवेश कर रहे हैं, उन्हें चिंतित होने की जरुरत नहीं है।
भारतीय शेयर बाजार अब और नई ऊंचाईयों को छूएगा, लेकिन हो सकता है कि इस बीच कुछ झटके लगें। हम निवेशकों को राय देंगे कि वे अपने पोर्टफोलियों को बेहद लंबा न बनाकर चुनिंदा कंपनियों में ही निवेश करें। कल हमने बात की थी मलाई खाने की....तो इन कंपनियों को अपने पोर्टफोलियों में शामिल कर लें, यदि आपके पोर्टफोलियों में ये कंपनियां पहले से शामिल हैं तो हर घटे भाव पर शेयरों की संख्या बढ़ा लें ताकि आपकी खरीद लागत कम हो सके। मलाईदार शेयर : आईडीएफसी, रिलायंस पेट्रोलियम, पेट्रोनेट एलएनजी, पेनिनसुला लैंड।
Tuesday, October 30, 2007
हिम्मत मत हारना यदि बनना है अमीर
Monday, October 29, 2007
शेयर बाजार की मलाई खाने के लिए हो जाइए तैयार
निवेशकों के मन में अब फिर वही सवाल उठा है कि सेंसेक्स और शेयर बाजार में आगे क्या होगा। क्या यह तेजी इसी तरह बनी रहेगी या फिर मार्केट का बंटाढार हो जाएगा किसी भी समय। वाह मनी की राय में न तो शेयर बाजार में सब कुछ मिटने जा रहा है और न ही बड़ी मंदी आएगी। यह बात अलग है कि हर तगड़ी तेजी के बाद कुछ करेक्शन आ सकता है लेकिन ऐसे करेक्शन स्थाई नहीं होंगे और शेयर बाजार नई बुलंदियों को छूता रहेगा।
बीएसई सेंसेक्स जब पांच हजार अंक था और आठ हजार अंक पर आया तब भी यही बातें होती थी कि अब बहुत बढ़ गया बाजार, कभी भी औंधे मुंह गिरेगा। आठ से 15 हजार अंक पहुंचा तब भी इसी तरह की बातें होती थी और आज भी हो रही है। इस तरह की बातों को सोचने के पीछे हमारी गलती नहीं है, बल्कि हमारी मानसिकता आड़े आ जाती है क्योंकि हम तगड़ी तेजी देखने के आदी नहीं रहे और पहली बार बाजार में आग लगते हुए देख रहे हैं।
हमारी राय में तेजी की यह शुरूआत है और सेंसेक्स को अभी बड़ी मंजिल तय करनी है। इस समय शेयर बाजार में करीबन दो सौ ऐसी कंपनियां हैं जिनके भाव आप काफी कम देख रहे हैं, हालांकि पिछले दिनों की बढ़ोतरी के बाद लोग कहते हैं इन कंपनियों के दाम तो दो गुना या पांच गुना बढ़ चुके हैं लेकिन वाह मनी की राय में ऐसी कंपनियों के शेयरों के दाम अगले एक साल में उस मुकाम पर होंगे जिसके बारे में अधिकतर निवेशकों ने कल्पना भी नहीं की है।
कल मैं एनडीटीवी इंडिया का एक प्रोग्राम देख रहा था जिसमें लोगों से यह पूछा जा रहा था कि आप कितने समय में करोड़पति बनना चाहते हैं। कुछ कहना था कि अभी, पांच मिनट में, एक साल में या फिर जब बना दो। इस कार्यक्रम की प्रस्तुति में यह बताया जा रहा था कि किन बातों पर ध्यान देना होगा यदि आप करोड़पति बनना चाहते हैं। कहां कहां निवेश कर करोड़पति बना जा सकता है आदि आदि। असल में हमारे देश को ऐसे ही कार्यक्रम की जरुरत है जहां अधिक से अधिक लोग करोड़पति बन सके और आर्थिक खुशहाली हासिल कर सकें।
वाह मनी भी यही चाहता है कि देश का हर आदमी आर्थिक रुप से खूब मजबूत हो। शेयर बाजार की मौजूदा चाल लोगों को आर्थिक रुप से मजबूत बनाने में बड़ी सहायक हो सकती है। हम हर निवेशक से कहना चाहेंगे कि यदि आपने देश की क्रीम कंपनियों में निवेश किया है तो बिल्कुल न घबराएं, चाहे सेंसेक्स किसी भी स्तर पर दिखें। साथ ही ऐसी कंपनियों के शेयर छोटे मोटे लाभ के लिए न बेंचे, बल्कि लांग टर्म के आधार पर अपने निवेश को बनाए रखें। हालांकि, बाजार पर बुरा असर डालने वाली कोई बड़ी खबर आ रही हो तो आप कुछ समय के लिए अपने शेयर बेच सकते हैं लेकिन उन्हें घटे स्तर पर खरीदने की तैयारी भी रखें।
यह ध्यान रखें पैसा कमाने के लिए धैर्य जरुरी है और घबराहट के किसी भी कारण के समय आत्मचिंतन जरुर करें अन्यथा आप गेनर के बजाय लूजर बन सकते हैं। भेड़चाल का हिस्सा न बनते हुए किसी भी कंपनी के शेयर खरीदते और बेचते समय यह जरुर सोचें कि यह खरीद कितने समय के लिए है और यदि शेयर बेच रहे हैं तो यह देखें कि जिस भाव पर आप शेयर बेच रहे हैं क्या उसके बाद इसमें बढ़ोतरी की बड़ी गुंजाइश नहीं बची है। यदि गुंजाइश है तो शेयर बेचने का आपका फैसला गलत हो सकता है। वाह मनी की राय में यदि आज भी कोई निवेशक देश की भाव क्रीम कंपनियों में निवेश करता है तो अगले दो साल यानी दिवाली 2009 तक करोड़पति बन सकता है। तो तैयार हो जाइए करोड़पति बनने का सफर तय करने के लिए वाह मनी के साथ। हम बताएंगे आपको क्रीम स्टॉक और आप लुत्फ उठाएंगे मलाई का।
Friday, October 26, 2007
थ्री आई में निवेश होगा फायदेमंद
Tuesday, October 23, 2007
शेयर बाजार में लगेगी आग
वित्त मंत्री के आए इस बयान के बाद यह साफ है कि शेयर बाजार की ताजा गिरावट को जो कुछ समय के लिए बताया जा रहा था, सही है। वाह मनी की निवेशकों को राय है कि वे बेहतर कंपनियों के स्टॉक नहीं बेचें बल्कि इस समय उम्दा कंपनियों के शेयर खरीदकर होल्ड करें। चंद दिनों पहले की जो तगड़ी तेजी थी उस समय यदि आप किसी उम्दा कंपनी के शेयर न ले पाएं हो तो अब लें लेकिन इस मंत्र के साथ कि बीच बीच में आंशिक मुनाफा भी वसूल करते रहेंगे।
ज्योति स्ट्रक्चर्स में बड़ी संभावनाएं पैसे की
बिजली क्षेत्र के बढ़ते विकास से यह तय है कि आने वाले समय में ट्रांसमिशन परियोजना कारोबार में बढ़ोतरी होगी और इसका बड़ा लाभ ज्योति स्ट्रक्चर्स को होगा। कंपनी का ईपीसी खिलाडि़यों के साथ सहयोग भी इसकी आय में बढ़ोतरी करेगा। ज्योति स्ट्रक्चर्स की वर्ष 2008 में शुद्ध बिक्री 1360.4 करोड़ रूपए रहने का अनुमान है जो वर्ष 2007 में 971.6 करोड़ रूपए थी। शुद्ध लाभ भी 55 करोड़ रूपए से बढ़कर 77 करोड़ रूपए पहुंचने की संभावना है। प्रति शेयर आय यानी ईपीएस 6.72 रुपए से 9.5 रुपए पहुंच जाने की उम्मीद है। कंपनी की इक्विटी 16.10 करोड़ रूपए है जिसमें प्रमोटरों का हिस्सा 27.14 फीसदी है, जबकि म्युच्यूअल फंडों के पास 16.20 फीसदी हिस्सा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों के पास इस कंपनी के 33.29 फीसदी शेयर है। कार्पोरेट बॉडीज के पास 10.58 और आम जनता व अन्य के पास 12.79 फीसदी स्टॉक हैं। ज्योति स्ट्रक्चर्स का शेयर इस समय 244 रुपए प्रति शेयर पर उपलब्ध है। जो पिछले 52 सप्ताह में ऊपर में 287 रुपए और नीचे में 86 रुपए पर मिल रहा था।
Friday, October 19, 2007
चैन से सोना है तो जाग जाओं निवेशकों
शेयर बाजार में आई गिरावट के लिए हर कोई विदेशी संस्थागत निवेशकों को दोष दे रहा है कि उनकी बिकवाली ने शेयर बाजार को तोड़ दिया। लेकिन क्या विदेशी संस्थागत निवेशकों को शेयर बेचने का अधिकार नहीं है। या उन्हें हमने यहां केवल शेयर खरीदने के लिए ही बुलाया है कि आप केवल शेयर खरीदें और बेचेंगे हम ही। जब शेयर बाजार ऑल टाइम हाई हो गया था तो क्यों घरेलू निवेशक यह सोचकर रुक गए कि बाजार तो अभी और फलेगा, फूलेगा...िफर शेयर बेचेंगे। वाह मनी हमेशा यह कहता रहा है कि जो मुनाफा आज आप की जेब में हैं वह कल किसी और की जेब में जा सकता है। इस समय असल में यही हो रहा है कि जो मुनाफा कल आपकी जेब के हवाले हो सकता था आज विदेशी संस्थागत निवेशकों के बैंक खाते में पहुंच गया है।
जब एक छोटे निवेशक को अपने शेयर बेचने का अधिकार है तो बड़े निवेशक को भी अपने शेयर बेचने का अधिकार है। यह अलग बात है कि छोटे निवेशक के पास किसी कंपनी के सौ से कुछ हजार शेयर होंगे जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों के पास एक एक कंपनी के लाखों शेयर होते हैं। जब कोई छोटा निवेशक शेयर बेचता या खरीदता है तो वह अपने स्तर के निवेशकों या सलाहकारों की राय से भी कारोबार में मदद पाता है। अब यही समूह शेयर बेचने का मानस बना लें तो किसी कंपनी के कितने शेयर बेच पाएंगे। महज कुछ हजार....लेकिन विदेशी संस्थागत जो आपस में मित्र भी हो सकते हैं और बेचने का मानस तय कर लें तो स्वाभाविक हैं कि जिसमें बिकवाली करेंगे उस कंपनी के शेयर को बुरी तरह टूटने से बचा पाना मुश्किल है। जैसे एक आम निवेशक अपने निवेश पर मुनाफा कमाना चाहता है कि वैसा ही संस्थागत निवेशक चाहते हैं। इन निवेशकों को भी अपने यहां निवेश करने वालों को लाभांश देना होता है और कंपनी के आकार को बढ़ाना होता है।
लोग कहते हैं कि ये विदेशी हमें डूबा देंगे...सही कह रहे हैं ऐसे लोग भी, लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों को यहां लाया कौन और किसने उन्हें कारोबार की अनुमति दी। क्या वे जबरन घुसे....हां जो ऐसे निवेशक सेबी के पास बगैर रजिस्ट्रेशन के कारोबार कर रहे हैं उनके खिलाफ जमकर कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन जिन्होंने सारी औपचारिकताएं पूरी की और बाजार को खोलने की प्रक्रिया के तहत भारत आने दिया गया उनका कोई कसूर नहीं है। यदि आपको बाजार में कारोबार करने का तरीका नहीं आता है तो उसके लिए दूसरे को दोष देने का अधिकार किसी के पास नहीं है।
खुले बाजार का सीधा सिद्धांत है या तो कारोबार करने का तरीका जानो अन्यथा हट जाओं। आपके पास सही समय पर सूचनाएं नहीं आती तो यह आपकी कमी है। जो लोग तेजी से सूचनाएं बटोरते हैं वे ही मौजूदा बाजार में टिक सकते हैं। हम ऐसे कई निवेशकों को जानते हैं कि जो रोजाना दो से चार रुपए का एक आर्थिक अखबार तक नहीं खरीदते। जो निवेशक एक अखबार तक नहीं पढ़ते उनसे आप देश विदेश के अखबार और पत्रिकाएं पढ़ने या इंटरनेट पर जानकारियां लेने की उम्मीद छोड़ दीजिए। शेयर बाजार में कमाई कोई रसगुल्ला नहीं है कि बाजार गए और मुंह में लपक लिया। यहां भी दूसरे कारोबार की तरह मेहनत करनी पड़ती है लेकिन यह मेहनत ज्ञान आधारित है। मैं मेरे एक मित्र को जानता हूं जो देर रात पढ़ाई करते हैं और सुबह जल्दी उठकर इंटरनेट पर सारे अखबार और सूचनाएं पढ़ चुके होते हैं। दिन रात फोन पर जगह जगह से सूचनाएं लेते रहते हैं। मेरे इन मित्र को शेयर बाजार में कोई नुकसान नहीं हुआ, जबकि वे इससे तकरीबन 20 साल से जुड़े हुए हैं। अधिकतर निवेशक यह तक नहीं जानते कि एक शेयरधारी होने के नाते उनके पास कानूनी तौर पर कंपनी में क्या क्या अधिकार मिले हुए हैं। इन अधिकारों को लेकर वाह मनी पर जल्दी ही एक पोस्ट आएगी।
ज्यादातर निवेशक जिस कंपनी में पैसा लगाते हैं उन्हें यही नहीं पता कि यह कंपनी करती क्या है, इसका ट्रेक रिकॉर्ड कैसा है, कौन चेयरमैन और निदेशक हैं...इन सब को भी छोडि़ए यह तक नहीं पता रहता कि इस कंपनी का रजिस्टर्ड कार्यालय कहां है और इसके कार्य परिणाम कब आएंगे। ऐसे महान निवेशकों से क्या उम्मीद की जा सकती है। अखबार इन निवेशकों के हाथ में दे दीजिए तो यह नहीं देख पाते कि जिस कंपनी में उन्होंने निवेश किया है उसके बारे में आज किस पेज पर क्या खबर छपी है। मैं सैंकड़ों कंपनियों की सालाना आम सभा यानी एजीएम में गया हूं, वहां अलग ही नजारा देखने को मिलता है कि बाहर लोग कंपनी के कर्मचारियों से इसलिए लड़ रहे है कि उन्हें चाय, कोल्ड ड्रिंक और नाश्ते के फ्री कूपन नहीं मिले। ऐसे निवेशक कूपन के लड़ रहे हैं और भले ही अंदर जहां एजीएम चल रही हैं कंपनी के निदेशक कंपनी को बेच डालें या मनमाने प्रस्ताव पास करा लें। कंपनी के निदेशक क्या करना चाहते हैं इससे कोई मतलब नहीं, बस फ्री में नाशता मिल जाए, यह जरुरी है बाकी कंपनी गई भाड़ में। कंपनी चेयरमैन की स्पीच और कुछ निवेशकों के उठे सवालों पर दिए जवाब से जिन निवेशकों को कोई मतलब नहीं है उन्हें बाजार को कोसने का भी अधिकार नहीं है। बस ऐसे निवेशकों को छेड़ दो तो कहेंगे, अरे जो अंदर बैठे हैं उन्हें जो करना है वे उसे तय करके आए हैं। लेकिन हम कहते हैं आप अपनी बात तो उठाइए, कंपनी के निदेशक कैसे मनमानी कर लेंगे। इस समय ढेरों कंपनियों के प्रमोटर अपना हिस्सा बेच रहे हैं क्योंकि बाजार में खूब तेजी है और ये प्रमोटर अगर अपनी सारी हिस्सेदारी बेचकर कंपनी से बाहर निकल जाएं तो भी ऐसे निवेशकों को कोई मतलब नहीं है कि कंपनी का क्या होगा।
इस समय लोगों को ध्यान यहां गया ही नहीं कि हर रोज ढेरों कंपनियों के प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं और सरकार, सेबी, शेयर बाजार अथॉरिटी एवं निवेशक चुपचाप बैठे हुए हैं। क्यों बेच रहे हैं अपनी हिस्सेदारी किसी ने हिसाब पूछा। किसी ने सेबी से पूछा कि पी नोट का मामला कितने साल से चल रहा है और अब तक चुपचाप क्यों बैठे थे। यदि पहले भी यह मामला उठा था तो उस समय क्यों नहीं कोई कानून कायदा बनाया गया और अब जब जमकर तेजी आई तो कानून की बात होने लगी। भारतीय रिजर्व बैंक तो पहले ही सेबी को कह रहा था पी नोट के बारे में तो सेबी व सरकार अब तक क्यों सोई रही। शेयर बाजार में यह अफवाह भी थी कि एक केंद्रीय मंत्री का बेटा शेयर बाजार में फंसा हुआ है और उसे उबारने के लिए यह पी नोट का मसला सामने आया और उसके निकलने पर पी नोट का मुद्दा ठंडे बस्ते में चला जाएगा। पूछी यह बात किसी ने सरकार से। जब तक निवेशक नहीं जागेंगे कुछ नहीं हो सकता। तो जागो निवेशकों, नहीं तो आपको चूना लगना तय है।
Thursday, October 18, 2007
लालच यही करता है जो आज हुआ...
पार्टिसिपेटरी नोट को लेकर शेयर बाजार में मचा तूफान वित्त मंत्री का बयान आने के बाद थमता दिखाई दिया लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों ने तो कुछ और ही तय कर रखा था। शेयर बाजार कल की तगड़ी गिरावट के बाद जिस तरह रिकवर हुआ, उससे आम निवेशक के मन में यह बात बैठी की इस तरह की गिरावट के बाद पैसा कमाया जा सकता है। आम निवेशक ने इसी सोच को देखते हुए सुबह जब बीएसई सेंसेक्स को 18827 अंक से बढ़ते हुए देखा तो अपने मन पर काबू न पा सके और जमकर शेयरों की खरीद की। बस, विदेशी संस्थागत निवेशकों को तो यही चाहिए था कि घरेलू निवेशक बाजार की ओर आएं। सेंसेक्स 19198 अंक, ऑल टाइम हाई। शेयर विश्ेलषकों ने राग अलापना शुरू किया कि सब ठीक ठाक हो गया और सेंसेक्स 19700 अंक से ऊपर दिखाई देगा। इसके बाद खेल खेला विदेशी संस्थागत निवेशकों ने और सेंसेक्स को ऐसा हिलाया कि अच्छे अच्छे विश्लेषक सोच न पाएं और सेंसेक्स आ गया 17771 अंक। हालांकि, अंत में एवेरज होकर सेंसेक्स आया 17998 अंक।
मैं कल रात से कई निवेशक मित्रों से बात कर रहा था कि 15 नवंबर से पहले सेंसेक्स 15 से 15500 अंक तक आ सकता है। कुछ निवेशकों का कहना था कि ऐसा नहीं हो सकता। मैं कहता हूं क्यों नहीं हो सकता। क्या किसी को पता था कि पार्टिसिपेटरी नोट का मुद्दा सामने आएगा और बाजार में तूफान मच जाएगा। अब क्या क्या मुद्दे सामने आएंगे, आपको पता है, नहीं ना। हालांकि, मैं आम निवेशक के हित में कहना चाहूंगा कि सेंसेक्स बढ़े और लोग मुनाफा कमाकर बाजार से निकले। लेकिन, लालची मन लोगों को रोकता है कि ठहरो, और तेजी आएगी, और तेजी आएगी। मुनाफा गांठ बांधना अच्छा नहीं लगता। हर कोई मुनाफे की आखिरी पाई पाई कमाना चाहता है लेकिन ऐसा हो नहीं सकता। हर किसी को सबसे निचले स्तर पर खरीद कर, सबसे ऊंचे स्तर पर शेयर बेचने हैं और ऐसा आज तक नहीं हुआ। हां, यदि आप सोने का चम्मच लेकर पैदा हुए हों तो बात अलग है और सोने का चम्मच लेकर पैदा होने वाले दुनिया में अंगुलियों पर गिने जा सकते हैं।
वाह मनी निवेशकों को एक बार फिर कहना चाहता है कि जहां आपको मुनाफा मिले, उसे लेकर चलते रहें क्योंकि जो मुनाफा आज आपकी जेब में आ रहा है, वह कल किसी और की जेब में जा सकता है। आज की स्थिति के बाद वाह मनी निवेशकों से कहना चाहेगा कि वह 25 अक्टूबर तक रुके और सेबी की पार्टिसिपेटरी नोट पर होने वाली बैठक के बाद ही अपनी रणनीति तय करें। हालांकि, इससे पहले 22 अक्टूबर को होने वाली परमाणु करार पर वामपंथियों के बयान को गहराई से समझें। वैसे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमरीका को इस करार के संबंध में कहा है उससे नहीं लगता कि वामपंथी केंद्र सरकार को गिराने के मूड में दिखें। इसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति जारी करेगा जिसमें सीआरआर के बढ़ने की आशंका है। हालांकि यदि ऐसा होता है तो बाजार को एक धक्का लग सकता है लेकिन इस कारक को बाजार जल्दी ही डिस्काउंट कर लेगा। शेयर बाजार के मौजूदा हालात इस ओर संकेत करते हैं कि आम निवेशक को हर समय सचेत रहने की जरुरत है और लंबी पोजीशन लेकर चलने के बजाय डे ट्रेडिंग कर पोजीशन को बराबर कर लें। यद्यपि जिन लोगों ने वास्तविक निवेशक के रुप में पैसा लगाया है उन्हें घबराने की जरुरत नहीं है क्योंकि उन्हें लांग टर्म में बड़ा लाभ होगा। वाह मनी अपनी इस राय पर कायम है कि दिवाली 2008 के आसपास सेंसेक्स 25 हजार के आसपास होगा।
Wednesday, October 17, 2007
शेयर बाजार फिर दौड़ेगा
पी नोट का यह है झंझट पुराना
सेबी और रिजर्व बैंक ने इस बात पर जोर दिया है कि पी नोट्स के अंधाधुंध इस्तेमाल को रोकने की आवश्यकता है। हालांकि, पार्टिसिपेटरी नोट को रोकने के लिए यह पहली बार कुछ नहीं कहा गया है। जब भी पार्टिसिपेटरी नोट पर अंकुश लगाने की बात होती है, शेयर बाजार में घबराहट भरी गिरावट आती है। स्थिति को आप भी देखिए कि पार्टिसिपेटरी नोट का कुल अनुमानित मूल्य मार्च 2004 के 31875 करोड़ रूपए से बढ़कर अगस्त 2007 में 353484 करोड़ रूपए पहुंच गया। यही वजह है रिजर्व बैंक इस मामले पर सेबी को जगाता रहा है जिसकी वजह से सेबी ने कुछ कदम उठाने की बात कही। सेबी विदेशी संस्थागत निवेशकों के निवेश को लेकर चिंतित है। वह इन पर अब पूरा अंकुश चाहती है। इस कदम को उठाने की पहल इसलिए की गई है कि अचानक से ऐसा बड़ा निवेश न आए जिसकी उम्मीद न की गई हो और फिर एकदम से वह पैसा बाहर निकल जाए जिससे बाजार को तगड़ा झटका लगे।
सब कुछ नहीं मिटेगा
निवेशक घबराएं नहीं क्योंकि सब कुछ मिटने नहीं जा रहा है। बुनियादी रुप से मजबूत कंपनियों के शेयर मजबूत रहेंगे। हां जिन में जमकर सट्टा चल रहा था या कमजोर कंपनियां जो गलत ढंग से दौड़ रही थी में काफी नुकसान होगा। सेबी ने पार्टिसिपेटरी नोट पर अभी कोई आदेश जारी नहीं किया है या कोई अंतिम सिफारिश नहीं दी है। सेबी ने केवल डिस्क्शन पेपर जारी किया है लेकिन इसकी भाषा से लगता है कि सेबी पार्टिसिपेटरी नोट को नियंत्रित करना चाहती है। इस चर्चा पर राय भेजने का समय केवल 20 अक्टूबर तक का है। यानी चार दिन में सब कुछ करना है।
क्या है पी नोट
पार्टिसिपेटरी नोट किसी विदेशी संस्थागत निवेशक और उसके विदेशी ग्राहक के बीच होने वाला समझौता पार्टिसिपेटरी नोट होता है। इसके माध्यम से विदेशी निवेशक उस विदेशी संस्थागत निवेशक को अपने लिए कोई सौदा करने का निर्देश देता है। लेकिन जब यह सौदा बाजार में होता है तो नाम विदेशी संस्थागत निवेशक का ही आता है असली विदेशी ग्राहक का नहीं। असल में पार्टिसिपेटरी नोट के माध्यम से शेयर खरीदने बेचने वाले की पूरी जानकारी सेबी को नहीं मिल पाती। यानी पार्टिसिपेटरी नोट विदेशी निवेशकों को बाजार में पैसा लगाने और बेचकर निकलने का आसान और छिपा रास्ता है। एक तरह से ये बेनामी विदेशी सौदे हैं। असल में ऐसे विदेशी निवेशक यह रास्ता चुनते हैं जो अपना रजिस्ट्रेशन सेबी के पास नहीं कराना चाहते या जिन पर सेबी ने रोक लगा रखी है। हम आपको बता दें कि मार्च 2004 में केवल 14 विदेशी संस्थागत निवेशक ही पार्टिसिपेटरी नोट जारी करते थे जिनकी संख्या अब बढ़कर 34 हो गई है। सेबी का कहना है कि इस समय भारतीय शेयर बाजार में कुल विदेशी संस्थागत निवेश का 51 फीसदी हिस्सा पार्टिसिपेटरी नोट का है। सेबी अध्यक्ष का कहना है कि पार्टिसिपेटरी नोट के संबंध में रखे गए प्रस्ताव पी नोट के खिलाफ हैं न कि विदेशी संस्थागत निवेशकों के।
सेबी के प्रस्ताव
1-विदेशी संस्थागत निवेशक यानी एफआईआई या उनके सब एकाउंट की ओर से डेरिवेटिव्स के लिए पार्टिसिपेटरी नोट या इसी तरह के दूसरे ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रुमेंट जारी करने पर तत्काल रोक लगाना। जो पार्टिसिपेटरी नोट पहले जारी हो चुके हैं उन्हें 18 महीने के अंदर निपटाया जाए। हालांकि, नकद बाजार में ऐसी रोक का प्रस्ताव नहीं है।
2- विदेशी संस्थागत निवेशक के सब एकाउंट की ओर पार्टिसिपेटरी नोट जारी किया जाना पूरी तरह बंद हो।
3-जिस विदेशी संस्थागत निवेशक की ओर से जारी पार्टिसिपेटरी नोट डेरिवेटिव्स छोड़कर का अनुमानित मूल्य भारत में उसके कुल निवेश के 40 फीसदी से ज्यादा हो, उन्हें मौजूदा पार्टिसिपेटरी नोट के रद्द होने, भुनाए जाने या बंद होने पर उतने के बराबर ही नए पार्टिसिपेटरी नोट जारी करने की अनुमति रहे। सेबी के प्रस्ताव के लिए पूरी डिटेल आप पढ़ सकते हैं
यहां :
Saturday, October 13, 2007
शेयर बाजार का मार्च पॉस्ट
सरकार पहले, करार बाद में
किसी भी कीमत पर परमाणु करार को अंजाम तक पहुंचाने का दावा कर रहे प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी अब पीछे हट गए हैं। कांग्रेस के इन दिग्गजों ने सरकार बचाने के लिए करार के प्रति बेकरारी रोक दी है। प्रधानमंत्री ने साफ कहा, 'अगर करार नहीं हुआ तो अफसोस होगा, लेकिन जिंदगी यहीं खत्म नहीं होती।' सोनिया ने भी कहा, 'सरकार अपना कार्यकाल पूरा करे, यह हमारी कोशिश होगी।' साफ है कांग्रेस ने कम्युनिस्टों और सहयोगियों के दबाव में अपने पुराने रुख से पलटी मार ली है। कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री यहां तक कह रहे थे कि 'करार से सरकार पीछे नहीं हटेगी, चाहे जो हो।' लेकिन अब गठबंधन धर्म निबाहने की बात कही जा रही है, भले इससे देश का नुकसान हो।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने न सिर्फ सरकार के कार्यकाल पूरा करने का दावा किया, बल्कि कम्युनिस्टों की नाराजगी का सबब बने बयानों पर भी सफाई दी। खास तौर से झज्जर में करार का विरोध करने वालों को विकास के दुश्मन बताने संबंधी बयान पर भी उन्होंने सफाई दी। 'मैंने वामदलों पर निशाना नहीं साधा था, बल्कि मैं हरियाणा में विपक्ष को निशाना बना रही थी।' बयान के गलत मतलब निकाले जाने के लिए उन्होंने अपनी खराब हिंदी को दोष दिया।
आम बजट चिदम्बरम ही करेंगे पेश
वित्तमंत्री पी चिदंबरम का कहना है कि आर्थिक सुधार अगले बजट में भी जारी रखे जाएंगे। इस तरह से उन्होंने इन अटकलों पर विराम लगा दिया कि चुनावों से पहले वे लोकलुभावन बजट लाएंगे। वित्त मंत्री कहते हैं कि वे अगला बजट भी पेश करेंगे। चिदंबरम की यह टिप्पणी सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के उन बयानों के बीच आई है कि केंद्र सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी। अगला बजट लोकलुभावन होगा या सुधारों वाला यह पूछे जाने पर चिदंबरम ने कहा कि रास्ते बदलने की कोई वजह नहीं है। अगर विकास की दर कम हुई हो तो रास्ता बदला जा सकता है। लेकिन हमारी औसतन विकास दर 8.6 फीसदी रही है। उन्होंने जिक्र किया कि विकास दर के बारे में सबसे निराशाजनक अनुमान 8.5 फीसदी का है और इससे कहीं नहीं लगता कि हमें अपना रास्ता बदलना चाहिए।
Thursday, October 11, 2007
गोलमाल है भाई सब गोलमाल है....
माहौल है--देश के एक विख्यात संस्थागत शेयर ब्रोकिंग हाउस के इक्विटी डिलिंग रुम का। जहां इसके एक सेल्स टीम सदस्य श्रीमान एक्स बैठे हैं जिन्हें एक विदेशी ग्राहक ने एनटीपीसी के दस लाख शेयर अमुक भाव पर खरीदने का ऑर्डर दिया है। इसके बाद श्रीमान एक्स के पास एक फोन आता है और इस फोन की आस पहले से ही श्रीमान एक्स को थी। बस अब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के खुलने में केवल दस मिनट बचे हैं। फोन पर श्रीमान एक्स से ग्राहक बाजार की सामान्य बातचीत करता है और पूछता है कि आज लंदन शेयर बाजार कैसा रहेगा। श्रीमान एक्स का जवाब है मेरे ख्याल से अच्छा रहेगा। सर, मैं इस समय व्यस्त हूं और आपसे इस संबंध में रात दस बजे बात करुंगा। जबकि हकीकत यह है कि ग्राहक ने फ्रंट रनिंग के सौदे की टिप्स इस सांकेतिक भाषा में दी। तकनीकी रुप से देखें तो कोई भी ग्राहक द्धारा खरीद या बिक्री का बड़ा ऑर्डर दिए जाने से पहले कोई कारोबारी इस सौदे की जानकारी के आधार पर उसका गलत तरीके से लाभ उठाने के लिए पोजीशन ले उसे फ्रंट रनिंग कहा जाता है।
डिलिंग रुम में आए इस फोन के बंद होने के बाद ऑपरेटर जिसे बाजार में कोबरा के नाम से जाना जाता है अपने खुद के डीलर को बाजार खुलते ही एनटीपीसी के एक लाख शेयर खरीदने और दिन में पांच रुपए बढ़ते ही बेच देने की सूचना देता है। इस तरह दोनों सौदे पूरे होने के बाद आर 001 नामक खाते में एनटीपीसी के 25 हजार शेयर खरीदने की सूचना भी दी जाती है। बड़े ग्राहक विदेश से शेयर






