भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों को ऑपरेटरो, पंटरो और कंपनियों के प्रमोटरों द्धारा लूटा जाना कोई नई बात नहीं है। लेकिन इसमें सेबी और शेयर एक्सचेंज भी जब शामिल होता है तो बात गंभीर हो जाती है। पुराने किस्सों को दरकिनार कर दें।
अब दो मामलों को देखें...पहला रिलायंस पेट्रोलियम में जो हुआ। रिलायंस पेट्रोलियम 295 रुपए से ऊपर बिककर अब 190 रुपए के करीब आ गया है और जिन निवेशकों ने इसमें बढ़त कायम रहने की उम्मीद से खरीद की थी, अब पछता रहे हैं कि वे बाजार में फैली इस खबर के चक्कर में आ गए कि यह जल्दी ही 350 रुपए और साल भर में हजार रुपए हो जाएगा। कितने निवेशकों ने यह जानने की कोशिश की कि रिलायंस पेट्रोलियम का कामकाज किस गति से चल रहा है और रिफाइनरी लगने के साथ संचालन कब से होने लगेगा।
रिलायंस प्रबंधन ने जिस तरह रिलायंस पेट्रोलियम के शेयर बेचे और डिसक्लोज किया कि हमने यह हिस्सेदारी खुले बाजार में बेची है, उस पर सेबी की तत्काल कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। प्रमोटर या मुख्य कंपनी जब शेयर बेच रही थी तो उसका रोजाना खुलासा क्यों नहीं हुआ। कितने निवेशकों को यह पता था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज रिलायंस पेट्रोलियम के शेयर बेच रही हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने चार फीसदी शेयर बेचकर 4023 करोड़ रुपए कमा लिए। 18 करोड़ शेयर बिके और किसी को भनक तक नहीं लगने दी जब तक कि खुद कंपनी ने ही खुलासा नहीं किया। अब सेबी कह रही है कि उसने बाजार से आंकड़े मंगाए हैं और अध्ययन कर रही है। इसके बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा। अपने देश में इस तरह के या इससे गंभीर सैंकड़ों किस्से हो चुके हैं और कुछ नहीं हुआ। सब कुछ थोड़े दिनों में फिर से नियमित रुप से होने लगता है। इस मामले में भी यही होगा और सेबी की कागजी रिपोर्ट मीडिया में तब आएगी जब निवेशक मौजूदा दर्द को भूल चुके होंगे। उस समय या तो रिलायंस पेट्रोलियम का शेयर नई ऊंचाई पर होगा। जैसा कि आज भी यह नीचे में 188 रुपए और ऊपर में 223 रुपए था। अथवा निवेशक यह सोचकर लांग टर्म के लिए इसे रखेंगे कि एक दिन यह जरुर तगड़ा रिटर्न देगा, भले अभी नहीं चल रहा हो।
दूसरा लूट का सरकारी तरीका। कल चलते शेयर बाजार के मध्य समय में अचानक आई फ्यूचर एंड ऑप्शन की नई सूची रही। इस सूची में जिन 15 कंपनियों जिंदल सॉ, केपीआईटी क्युमिंस इंफोसिस्टम, डेवलमेंट क्रेडिट बैंक, हिंदुस्तान जिंक, मोटर इंडस्ट्रीज, इंफो एज, निट, ग्रेट ऑफशोर, वायर एंड वायरलैस, रेडिंगटॉन इंडिया, नेटवर्क 18 फिनकैप, ग्लोबल ब्राडकॉस्ट न्यूज, इस्पात इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान ऑयल एक्सप्लोरेशन, गितांजली जैम्स लिमिटेड, को रखा गया सभी में आग लग गई। दे दनादन ऊपरी सर्किट, न खरीदने का मौका मिला और न सोचने का कि यह क्या हो रहा है। जब तक पता चलता, खेल पूरा हो गया। आज भी इन कंपनियों में गर्मी देखने को मिली क्योंकि कल यानी 30 नवंबर से इन्हें एफ एंड ओ में आना है और सीमा का मामला समाप्त, सो जरुरी नहीं कि खूब कमाई हो ही जाए।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने अपनी वेबसाइट पर सर्क्युलर लगाया सेबी से इन 15 कंपनियों में एफ एंड ओ चालू करने की अनुमति मिलने के बाद लेकिन यदि इसे बाजार बंद होने के बाद लगाया जाता तो अच्छा रहता। अथवा यह सूची 29 नवंबर को बाजार बंद होने के बाद जारी की जानी चाहिए थी। अचानक चलते बाजार में सूची जारी करने से अधिकतर छोटे निवेशकों का नुकसान ही हुआ है। शेयर बाजारों में तो यहां तक चर्चा है कि इस सूची के इस तरह जारी करने को एक्सचेंज और नियामक यह कहकर अपना बचाव कर सकते हैं कि यह नियमित मामला है और सूचनाएं देखने का कार्य निवेशकों का है। हम इस तरह की सूचनाएं कभी भी जारी करने के लिए स्वतंत्र हैं।
लेकिन दलाल स्ट्रीट में कहा जा रहा है कि सर्क्यूलर जारी होने से पहले इसे जानने वालों और उनके चहेतों ने खूब माल जुटा लिया था और जमकर चांदी काटी। सूची इस तरह जारी होनी चाहिए थी कि सभी निवेशकों को मालूम हो जाता कि इन 15 कंपनियों को एफ एंड ओ में शामिल किया जा रहा है। सुबह अपने शेयर बेच चुके निवेशक अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे थे। हालांकि, इन कंपनियों में भले ही खूब गर्मी आई हो लेकिन आने वाले कुछ दिनों में शेयर बाजार के नरम रहने के संकेत हैं। अत: जिन कंपनियों को बेहतर माना जा रहा है, उनके शेयर खरीदने का मौका फिर हाथ आएगा लेकिन एक बड़ी कमाई से बड़ा वर्ग वंचित हो गया। दलाल स्ट्रीट में कई बड़े निवेशकों का कहना था कि इन 15 कंपनियों में कई बेहतर हैं लेकिन इनमें शामिल कुछ कंपनियों को देखकर यह शंका मन में आती है कि कुछ कंपनियों को केवल सट्टे के लिए चुना गया है जिनमें आगे चलकर निवेशक अपने को पीटा हुआ पाएंगे। क्या एफ एंड ओ में इनसे बेहतर कंपनियों का चयन नहीं हो सकता था।
Thursday, November 29, 2007
शेयर बाजार में लूट के दो वैध तरीके
Wednesday, November 28, 2007
एफ एंड ओ में नए 15 खिलाड़ी
जिंदल सॉ, केपीआईटी क्युमिंस इंफोसिस्टम, डेवलमेंट क्रेडिट बैंक, हिंदुस्तान जिंक, मोटर इंडस्ट्रीज, इंफो एज, निट, ग्रेट ऑफशोर, वायर एंड वायरलैस, रेडिंगटॉन इंडिया, नेटवर्क 18 फिनकैप, ग्लोबल ब्राडकॉस्ट न्यूज, इस्पात इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान ऑयल एक्सप्लोरेशन, गितांजली जैम्स लिमिटेड।
Tuesday, November 27, 2007
इंडेक्स पर नहीं शेयर पर रखें नजर
शेयर बाजार में जरा सी भी मंदी की आहट हर निवेशक को बिकवाली पर उतरने के लिए सोचने को मजबूर कर देती है और लोग बार बार बस यही सवाल करते हैं कि अब क्या करें। क्या पूरा पोर्टफोलियो बेच दें। एक दिन में कई लोग तो यही सवाल 25 बार कर देते होंगे, लेकिन हर बढ़त पर उत्साह और हर गिरावट पर चिंता ठीक नहीं है यदि आप लंबी अवधि के निवेशक हैं तो। हमारी राय में भारतीय शेयर बाजार में अगले दस साल तक तेजी का माहौल बना रहे तो अचरज नहीं होना चाहिए। हो सकता है तेजी का यह माहौल इससे भी ज्यादा समय तक बना रहे। हालांकि, यह भी सच है कि तेजी हर सेक्टर और हर शेयर में नहीं रहेगी। इसलिए आपको बेहतर कंपनियों का चयन करना होगा और इसके लिए पढ़ने, खूब पढ़ने की आदत डालनी होगी। कारोबार दूसरे के कंधे पर नहीं किया जा सकता भले ही दूसरे के कंधे पर बंदूक रखकर चलाने की कहावत हो।
निवेशकों को हमारी सलाह है कि वे इस समय इंडेक्स को न देखकर शेयर विशेष को देखकर कारोबार करें क्योंकि इंडेक्स दिसंबर अंत तक इसी तरह ढुलमुल चल सकता है। जबकि आपको कोई कोई शेयर इस दौरान इंडेक्स के नीचे रहने पर भी बड़ा मुनाफा दे सकता है जैसा कि भूषण स्टील में हुआ। हमने दिवाली से दिवाली वाले शेयरों की लिस्ट में इसे शामिल किया था। यहां देखें...पूरी सूची। आने वाला समय उस निवेशक का है जो सूचनाएं जल्द से जल्द पाएगा। एक खबर आपको बड़ा मुनाफा दे सकती है, आपका घाटा कम कर सकती है या फिर आपके पैसे को पानी में जाने से रोक सकती है।
आपके पास सही समय पर सूचनाएं नहीं आती तो यह आपकी कमी है। जो लोग तेजी से सूचनाएं बटोरते हैं वे ही मौजूदा बाजार में टिक सकते हैं। हम ऐसे कई निवेशकों को जानते हैं कि जो रोजाना दो से चार रुपए का एक आर्थिक अखबार तक नहीं खरीदते। जो निवेशक एक अखबार तक नहीं पढ़ते उनसे आप देश विदेश के अखबार और पत्रिकाएं पढ़ने या इंटरनेट पर जानकारियां लेने की उम्मीद छोड़ दीजिए। शेयर बाजार में कमाई कोई रसगुल्ला नहीं है कि बाजार गए और मुंह में लपक लिया। यहां भी दूसरे कारोबार की तरह मेहनत करनी पड़ती है लेकिन यह मेहनत ज्ञान आधारित है। मैं मेरे एक मित्र को जानता हूं जो देर रात पढ़ाई करते हैं और सुबह जल्दी उठकर इंटरनेट पर सारे अखबार और सूचनाएं पढ़ चुके होते हैं। दिन रात फोन पर जगह जगह से सूचनाएं लेते रहते हैं। मेरे इन मित्र को शेयर बाजार में कोई नुकसान नहीं हुआ, जबकि वे इससे तकरीबन 20 साल से जुड़े हुए हैं।
ज्यादातर निवेशक जिस कंपनी में पैसा लगाते हैं उन्हें यही नहीं पता कि यह कंपनी करती क्या है, इसका ट्रेक रिकॉर्ड कैसा है, कौन चेयरमैन और निदेशक हैं...इन सब को भी छोडि़ए यह तक नहीं पता रहता कि इस कंपनी का रजिस्टर्ड कार्यालय कहां है और इसके कार्य परिणाम कब आएंगे। ऐसे महान निवेशकों से क्या उम्मीद की जा सकती है। अखबार इन निवेशकों के हाथ में दे दीजिए तो यह नहीं देख पाते कि जिस कंपनी में उन्होंने निवेश किया है उसके बारे में आज किस पेज पर क्या खबर छपी है। मैं सैंकड़ों कंपनियों की सालाना आम सभा यानी एजीएम में गया हूं, वहां अलग ही नजारा देखने को मिलता है कि बाहर लोग कंपनी के कर्मचारियों से इसलिए लड़ रहे है कि उन्हें चाय, कोल्ड ड्रिंक और नाश्ते के फ्री कूपन नहीं मिले। ऐसे निवेशक कूपन के लड़ रहे हैं और भले ही अंदर जहां एजीएम चल रही हैं कंपनी के निदेशक कंपनी को बेच डालें या मनमाने प्रस्ताव पास करा लें। कंपनी के निदेशक क्या करना चाहते हैं इससे कोई मतलब नहीं, बस फ्री में नाशता मिल जाए, यह जरुरी है बाकी कंपनी गई भाड़ में। कंपनी चेयरमैन की स्पीच और कुछ निवेशकों के उठे सवालों पर दिए जवाब से जिन निवेशकों को कोई मतलब नहीं है उन्हें बाजार को कोसने का भी अधिकार नहीं है। बस ऐसे निवेशकों को छेड़ दो तो कहेंगे, अरे जो अंदर बैठे हैं उन्हें जो करना है वे उसे तय करके आए हैं। लेकिन हम कहते हैं आप अपनी बात तो उठाइए, कंपनी के निदेशक कैसे मनमानी कर लेंगे। इस समय ढेरों कंपनियों के प्रमोटर अपना हिस्सा बेच रहे हैं क्योंकि बाजार में खूब तेजी है और ये प्रमोटर अगर अपनी सारी हिस्सेदारी बेचकर कंपनी से बाहर निकल जाएं तो भी ऐसे निवेशकों को कोई मतलब नहीं है कि कंपनी का क्या होगा। हाल में रिलायंस पेट्रोलियम का शेयर नई ऊंचाई छूने के बाद तकरीबन सौ रुपए गिरा और बाद में पता चला कि एक बड़ा हिस्सा प्रमोटर समूह ने ही बेचकर खासा पैसा जुटा लिया और अब हर निवेशक यही पूछ रहा है कि रिलायंस पेट्रोलियम कब बढ़ेगा।
Friday, November 23, 2007
जेके लक्ष्मी सीमेंट एक उम्दा स्टॉक
उत्तर और पश्चिम भारत के सीमेंट बाजार में मजबूत खिलाड़ी जेके लक्ष्मी सीमेंट लिमिटेड एक बेहतर स्टॉक है। यह कंपनी जिस तरह प्रगति कर रही है उससे यह लगता है आने वाले दिनों में यह सीमेंट क्षेत्र का एक महंगा स्टॉक होगा। दलाल स्ट्रीट के पंटरों पर भरोसा करें तो अगले 15 दिनों के बाद सीमेंट शेयरों में खासा करंट दिख सकता है।
जेके लक्ष्मी सीमेंट की स्थापित क्षमता 34 लाख टन सालाना है। समय पर अपनी क्षमता का विस्तार करने की वजह से आने वाले दो साल में यह जबरदस्त ग्रोथ करेगी। कंपनी ने वर्ष 2009 की दूसरी छमाही तक अपनी क्षमता को बढ़ाकर 50 लाख टन करने की योजना बनाई है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कंपनी के उत्पादन में 40 फीसदी और बिक्री में 36 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है। इसी अवधि में 50 किलो के बैग का दाम तिमाही दर तिमाही 2.4 फीसदी बढ़कर 154 रुपए पहुंच गया है। बेहतर वोल्यूम और दामों को देखते हुए वर्ष दर वर्ष कंपनी की शुद्ध बिक्री 267 करोड़ रूपए पहुंच जाने का अनुमान है। यदि हम प्रति टन सीमेंट उत्पादन लागत की बात करें तो जेके लक्ष्मी सीमेंट की लागत दूसरी तिमाही में 4.6 फीसदी सालाना हिसाब से 202 करोड़ रुपए पहुंच गई है। जिसमें प्रति टन 27 फीसदी लागत परिवहन बढ़ना और 4.6 फीसदी प्रति टन कर्मचारी लागत बढ़ना है। हालांकि, कंपनी बिजली और ईंधन लागत को कम करने में कामयाब रही है। वर्ष 2007 की दूसरी तिमाही में यह लागत 704 रुपए प्रति टन थी जो अब 674 रुपए प्रति टन पर आ गई है।
कंपनी का 36 मेगावाट का निजी खपत का बिजली संयंत्र शुरू होने जा रहा है जिससे बिजली व ईधन लागत में और बचत होगी। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 267 करोड़ रूपए की बिक्री पर 74 करोड़ रूपए का शुद्ध लाभ कमाया है और तिमाही आधार पर प्रति शेयर आय यानी ईपीएस 12 रुपए रही है। जबकि वर्ष 2007 की दूसरी तिमाही में कंपनी की शुद्ध बिक्री 163 करोड़ रूपए थी और शुद्ध लाभ 23 करोड़ रुपए। प्रति शेयर आय 3.8 रुपए थी। कंपनी अपने महंगे कर्ज को अब सस्ते ब्याज वाले कर्ज में बदलने जा रही है।
कंपनी की सीमेंट के आकर्षक बाजारों में हाजिरी, समय पर अतिरिक्त क्षमता का बढ़ाना, ब्रांड की स्थिति में सुधार और संचालन में बेहतर होने से इस स्टॉक को ऑउटपरफार्मर कहा जा सकता है एवं निकट भविष्य में इसका भाव 210 रुपए तक जा सकता है। हालांकि, जो निवेशक इसे दो साल के लिए रखना चाहते हैं, उन्हें बेहतर कमाई होगी। जेके लक्ष्मी सीमेंट आज 184 रुपए पर बंद हुआ है। पिछले 52 सप्ताह में यह नीचे में 97 रुपए और ऊपर में 211 रुपए था।
Thursday, November 22, 2007
शेयर बाजार का बड़ा बंटाढार नहीं
दिवाली के बाद गुजरात घूमने चले जाने से वाह मनी पर कोई भी पोस्ट नहीं डाल पाया। शेयर बाजार में अहम भूमिका निभाने वाले इस राज्य से लौटते हुए पाया कि बाजार काफी टूट चुका है। भारतीय शेयर बाजार में इस समय चल रही गिरावट से ज्यादातर निवेशक घबराए हुए हैं और अपना पोर्टफोलियो हल्का करने में जुटे हैं। शेयर बाजार में एक सप्ताह पहले जब हजार अंक का उछाल आया तो ये ही निवेशक पोर्टफोलियो को बड़ा करने में जुटे थे लेकिन जरा सी नरमी देखने की आदत नहीं होने से अब बिकवाली पर उतर आए हैं।
अमरीकी बाजार में मंदी के खासे संकेत होने से भारतीय शेयर बाजार का भी जायका बिगड़ने की बात हर कोई कह रहा है लेकिन हम इस बात को दूसरे तरीके से लेते हैं। मसलन एक निवेशक को जब एक बाजार में पैसा कमाने को नहीं मिलता है तो वह दूसरे बाजार की तलाश करता है, जहां उसे बेहतर रिटर्न मिल सके। रिटर्न के मामले में भारतीय बाजार आने वाले कई वर्ष तक बेहतर रहेगा। जिसकी वजह से अमरीकी बाजार के टूटने पर भी पैसा भारतीय बाजार में आता रहेगा। इस समय दुनिया भर के बड़े संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार में निवेश करने के लिए लालायित हैं। सेबी अध्यक्ष भी कह चुके हैं कि पी नोटस पर उठाए गए कदम के बाद अब विदेशी निवेशकों के रजिस्ट्रेशन पाने के आवेदनों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।
इंडोनेशिया में विदेशी संस्थागत निवेशकों के फंड मैनेजरों की एक बैठक होने जा रही है जिसमें यह तय किया जाएगा कि अमरीकी व यूरोपीय शेयर बाजारों में आई मंदी में अपने नुकसान को कम करने के लिए क्या भारतीय शेयर बाजार में निवेश को बढ़ाया जा सकता है। उम्मीद है कि ये फंड मैनेजर भारतीय शेयर बाजार के मिड कैप शेयरों में लेवाली का मानस बनाएंगे और साढ़े चार हजार से पांच हजार करोड़ रुपए की लेवाली निकलेगी। घरेलू म्युच्युअल फंड भी मौजूदा गिरावट के पूरा होने पर नई खरीद की रणनीति बनाकर बैठे हुए हैं।
वाह मनी की राय में निवेशकों को इस समय घबराहटपूर्ण बिकवाली के बजाय हर गिरावट पर थोड़ी थोड़ी संख्या में बेहतर कंपनियों के शेयर खरीदने चाहिए क्योंकि भारतीय शेयर बाजार में आने वाले समय में मजबूती का माहौल बना रहेगा। जो निवेशक बेहतर कंपनियों की तलाश नहीं कर पा रहे हो, वे वाह मनी की इस पिछली पोस्ट को जरुर पढ़ें और निवेश के लिए शेयरों का चयन कर लें। बीएसई सेंसेक्स के लिए 18333 अंक का स्तर काफी अहम हैं क्योंकि यदि यह स्तर टूटता है तो सेंसेक्स 17100 अंक तक जा सकता है। वैसे सेंसेक्स के एक सप्ताह में संभल जाने की संभावना है। निवेशकों से हम कहना चाहेंगे कि अपना सारा निवेश एक ही उद्योग की कंपनियों में न करें बल्कि पोर्टफोलियो में विविधता रखें।
Saturday, November 10, 2007
दिवाली से दिवाली तक के शेयर
बिजली- पावर ग्रिड कार्पोरेशन, पावर फाइनेंस कार्पोरेशन, एनटीपीसी, पीटीसी इंडिया, टोरेंट पावर, क्राम्टपन ग्रीव्ज, जीवीके पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चरर्स।
बैंक- डीसीबी, यस बैंक, कर्नाटक बैंक, यूको बैंक।
स्टील- टिस्को, सेल, भूषण स्टील और इंस्पात इंडस्ट्रीज।
इंफ्रास्ट्रक्चर/फाइनेंस- एल एंड टी, जीएमआर इंफ्रास्ट्रक्चर, श्रेई इंफ्रा, मयटास इंफ्रा, आईडीएफसी, आईडीबीआई, दिवान हाउसिंग, एलआईसी हाउसिंग, जीआईसी हाउसिंग।
चीनी- त्रिवेणी इंजीनियरिंग।
सीमेंट- इंडिया सीमेंट, जेके लक्ष्मी सीमेंट।
शीपिंग- वरुण शीपिंग, गरवारे ऑफशोर, जीई शीपिंग
अन्य- फिलिप्स कार्बन ब्लैक, पेट्रोनेट एलएनजी, मेक्नली भारत इंजीनियरिंग, रुचि सोया, आइडिया सेलुलर, व्हर्लपूल, रिफैक्स रिफ्रिजर्नेटस, एशियन इलेक्ट्रॉनिक्स, कोर प्रोजेक्टस एंड टेक्नालॉजिस, और एवरोन सिस्टम्स।
जमाना तो है पावर का
मुश्किल इस मायने में नहीं क्योंकि पावर सेक्टर में अभी तेजी ठीक ढंग से शुरू नहीं हुई है और आने वाले इसी सेक्टर के हैं। बीएसई ने पावर 14 कंपनियों को लेकर पावर इंडेक्स जारी किया है। निवेशकों को हमारी राय है कि इन कंपनियों में हर गिरावट पर निवेश करते रहें। हालांकि, पावर सेक्टर में इनके अलावा ढेरों कंपनियां हैं जिनमें से आप बेहतर कंपनियों का चयन करते रहे निवेश के लिए। वाह मनी भी आपको समय समय पर बताता रहेगा इस क्षेत्र की कंपनियां ताकि आप बन सके मालदार।
बीएसई ने पावर इंडेक्स में जिन 14 कंपनियों को शामिल किया वे हैं कोष्ठक में इन कंपनियों की इंडेक्स में भारिता को दिया गया है : भेल (22.15 फीसदी), एनटीपीसी (13.76 फीसदी), रिलायंस एनर्जी (13.7 फीसदी), सुजलॉन एनर्जी (8.81 फीसदी), टाटा पावर (8.36 फीसदी), एबीबी (7.68 फीसदी), सीमेंस (6.16 फीसदी), क्राम्पटन ग्रीव्ज (4.46 फीसदी), पावर ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (4.37 फीसदी), जीवीके पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चरर्स (3.17 फीसदी), जीएमआर इंफ्रास्ट्रक्चर्स (2.37 फीसदी), टोरेंट पावर (1.96 फीसदी), अरेवा टी एंड डी इंडिया (1.75 फीसदी) और सीईएससी लिमिटेड (1.3 फीसदी)।
Thursday, November 08, 2007
शेयर बाजार नई उड़ान में लेगा समय
शेयर बाजार ने इस साल लाखों निवेशकों की दिवाली को सुधारा है। शेयर बाजार से जुड़े निवेशक वर्ग के पास पिछले दिनों पैसा आया है, हालांकि निवेशकों को उम्मीद थी कि धनतेरस को सेंसेक्स 21 हजार अंक तक पहुंच सकता है, जो नहीं पहुंचा। फिर भी निवेशकों को निराश नहीं होना चाहिए क्योंकि भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पैसा आता ही रहेगा क्योंकि यहां अन्य बाजारों से रिटर्न अधिक है। बड़ा रिटर्न मिलने का लालच भारतीय बाजार से किसी को बाहर नहीं जाने देगा। लेकिन इस समय शेयर बाजार के लिए नई उड़ान भरने के लिए कोई सकारात्मक खबर नहीं है। सभी पिछली सकारात्मक खबरों से शेयर बाजार को जितना बढ़ना था, वह बढ़ चुका।
वाह मनी निवेशकों को यह राय देता रहा है कि आंशिक मुनाफा वसूली करते रहे और जिन्होंने इस मंत्र को माना, वे आज खुश हैं क्योंकि सेंसेक्स अपनी पिछली ऊंचाई से तकरीबन 1200 अंक गिर चुका है और इस गिरावट के अभी रूकने के आसार कम ही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड के दाम जिस गति से बढ़ रहे हैं, वह हमारे लिए भी बुरी खबर बनेगी। पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा यह संकेत दे चुके हैं कि दिवाली के बाद पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ाए जा सकते हैं। साथ ही तेल कंपनियों का भी कहना है कि यदि पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस के दाम नहीं बढ़ाए गए तो उनकी माली हालात चरमरा जाएगी। सरकार को इस संबंध में कुछ कदम उठाने पड़ेंगे जिनमें आयात शुल्क घटाने से लेकर उत्पादों के दाम बढ़ाना तक शामिल हैं। इस कदम का हर जगह असर पड़ेगा जिससे शेयर बाजार अछूता नहीं रहेगा।
गुजरात में दिसंबर में विधानसभा चुनाव है। चुनाव में यदि कांग्रेस जीतती है तो यह तय है कि भारत अमरीका परमाणु करार के संबंध में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आगे बढ़ सकते हैं। तब शायद कांग्रेस को यह भरोसा हो जाएगा कि मध्यावधि चुनाव की नौबत आती भी है तो हम जीत जाएंगे लेकिन यदि गुजरात के नतीजे भाजपा के पक्ष में आए तो मनमोहन सरकार को चुप्पी साधनी पड़ सकती है। विदेशी संस्थागत निवेशकों को दिसंबर में अपने निवेशकों को लाभांश देना होता है तो, ऐसे में यह बिकवाली शेयर बाजार को कमजोर कर सकती है लेकिन जनवरी में अगले आम बजट की तैयारी व विदेशी संस्थागत निवेशकों के पास निवेश के लिए नया पैसा आता है, जो शेयर बाजार में जोश भरेगा।
शेयर बाजार में अब एक करेक्शन की गुंजाइश बन चुकी है और इस समय जो करेक्शन हो रहा है वह काफी धीमी गति से हो रहा है जब सुबह सुहानी होती है और दोपहर खराब। यानी सुबह शेयर बाजार बढ़कर खुल रहा है और दोपहर में बंद होते समय गिरकर। यह रुख अगले कुछ दिनों तक जारी रहने के आसार हैं। इस गिरावट में हर निवेशक यह मानकर चल रहा है कि कल का दिन अच्छा रहेगा और सुबह आई बढ़त बाजार बंद होते होते नरमी में पलट जाती है। इस तरह की हलचल में ज्यादातर निवेशकों को शेयर बाजार से बाहर निकलने का मौका नहीं मिलता और वे अपने शेयरों के पिछले ऊंचे भाव का इंतजार करते रह जाते हैं। हालांकि, भारतीय शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था के अगले संकेत सकारात्मक हैं एवं लंबी अवधि के निवेशको को निराश होने की जरुरत नहीं है। वाह मनी पहले की तरह यह मानता है कि दिवाली 2008 के आसपास बीएसई सेंसेक्स 25 हजार अंक को पार कर जाएगा।
जनवरी तक केवल स्टॉक विशेष में कारोबार करना चाहिए क्योंकि जरुरी नहीं कि आपको चौतरफा तेजी दिखे। निवेशकों को हमारी राय है कि मौजूदा मुनाफा वसूली के पैसे को इस जल्दबाजी में फिर से निवेश न करें कि शेयर बाजार हर बार गिरने पर बहुत तेजी से चंद दिनों में बढ़ जाता है। ऐसा हर बार नहीं होगा। देखों और प्रतीक्षा करो की नीति अपनाने वाले फायदे में रहेंगे। मौजूदा माहौल में हर बड़ी गिरावट पर क्रीम स्टॉक छोटी छोटी मात्रा में खरीदते रहने वाले निवेशक फायदे में रहेंगे। वाह मनी की राय में बिजली, इंफ्रास्ट्रक्चर और बैंक कंपनियों के शेयरों में निवेश अगले साल बड़ा मुनाफे का सौदा हो सकता है। वाह मनी की ओर से आप सभी को दिवाली व नव वर्ष की शुभकामनाएं।
Monday, November 05, 2007
दिवाली रिटर्न शेयर बाजार का
बीएसई सेंसेक्स दिवाली मुहूर्त पर वर्ष 1992 में 6.3 फीसदी, 1994 में 6.2 फीसदी, 1995 में 6.8 फीसदी, 1996 में 4.9 फीसदी और 1997 में 8.5 फीसदी गिरकर बंद हुआ था, जबकि अन्य वर्षों में यह बढ़कर बंद हुआ।
वर्ष 1991 में दिवाली मुहूर्त कारोबार पर बीएसई सेंसेक्स 1917.96 अंक पर बंद हुआ था, जो वर्ष 1992 में 2987.21 अंक, 1993 में 2786.41 अंक, 1994 में 4303.65 अंक, 1995 में 3486.20 अंक, 1996 में 3080.26 अंक, 1997 में 3803.24 अंक, 1998 में 2853.27 अंक, 1999 में 4650.54 अंक, 2000 में 3757.16 अंक, 2001 में 3113.04 अंक, 2002 में 2987.58 अंक, 2003 में 4802.28 अंक, 2004 में 5964.01 अंक, 2005 में 8471.04 अंक, 2006 में 12736.82 अंक पर बंद हुआ था। इस वर्ष शेयर बाजार में दिवाली मुहूर्त कारोबार 9 नवंबर को शाम छह से सात बजे तक होगा।
Saturday, November 03, 2007
सेंसेक्स 21 हजार की ओर करेगा कूच
हितेंद्र वासुदेव
बीएसई सेंसेक्स पिछले सप्ताह एक बार फिर नई ऊंचाई पर पहुंचा। यह सेंसेक्स की अच्छी आदत कही जा सकती है कि सेंसेक्स नई ऊंचाई बना रहा है। लेकिन बढ़त मुनाफा वसूली को नहीं रोक पा रही है। सोमवार को सेंसेक्स 19621.39 अंक के गेप के साथ खुला और बढ़त लेकर मंगलवार को 20238.16 अंक की नई ऊंचाई पर पहुंच गया। दो नवंबर शुक्रवार को बाजार गिरकर खुला लेकिन गेप को कवर करते हुए यह बढ़ता गया। साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स में बढ़त 673 अंक की रही। 26 अक्टूबर को 19243 अंक पर बंद होने के साथ साप्ताहिक रुझान तेजी का है। साप्ताहिक रुझान सेंसेक्स के 17 हजार या शुक्रवार के साप्ताहिक बंद 18798 से नीचे आने पर ही बदल सकता है। वर्ष 2007 के कैलेडर वर्ष की शुरुआत में सेंसेक्स का वार्षिक स्तर हमने 20851 अंक बताया था। यदि मौजूदा रुझान जारी रहता है तो यह संभव है। अगले रेसीसटेंस स्तर 22000-24000 की रेंज में हैं। सेंसेक्स के हर ऊंचे स्तर पर चंचलता और दामों का बढ़ना बना रहेगा। सप्ताह का अहम सपोर्ट स्तर 19621-19100 है। यदि सेंसेक्स 19100 से नीचे बंद होता है तो गहरे करेक्शन को आमंत्रण देगा और सेंसेक्स का नीचला स्तर 18839-17857 अंक होगा। सेंसेक्स बढ़त कायम रखता है और यह 20238 अंक से ऊपर बंद होता है तो यह कम से कम 20851 अंक तक पहुंच जाएगा और इसकी उतार चढ़ाव रेंज 22000-24000 रहेगी।
बाजार की व्यापक स्थिति के लिए इलियट वेव देखें :
फर्स्ट काउंट :
वेव 1 – 2594 से 3758;
वेव 2 – 3758 से 2904;
वेव 3 – 2904 से 20238 (ऊपर की ओर जा रही मौजूदा वेव)
इंटरनल्स ऑफ वेव 3
वेव i – 2904- 6249
वेव ii – 6249- 4227
वेव iii – 4227 - 12671
वेव iv – 12671- 8799
वेव v- 8799- 20238 (ऊपर की ओर जा रही मौजूदा वेव)
वेव i- 8799 - 14724
वेव ii- 14724 - 13799
वेव a- 14724 - 12316
वेव b –12316-15868
वेव c – 15868 - 13799
वेव iii-13799 - 19198
वेव iv-19198 - 17171
वेव v-17171- 20238 (ऊपर की ओर जा रही मौजूदा वेव)
वैकल्पिक काउंट
वेव 1-2594- 3758
वेव 2-3758- 2828
वेव 3-2828 - 12671
इंटरनल्स
वेव 1-2828- 3413
वेव 2-3418 - 2904
वेव 3-2904 - 6249
वेव 4-6249 - 4227
वेव 5-4227- 12671
वेव 4 -12671- 13779
इंटरनल्स
वेव A-12671- 9810
वेव B-9810- 14724
वेव C- 14724- 12316
वेव D-12316 - 15868
वेव E-15868 - 13779
वेव 5- 13779- 20238 (ऊपर की ओर जा रही मौजूदा वेव)
वेव i-13779- 19198
वेव ii-19198 - 17171
वेव iii-17171- 20238 (ऊपर की ओर जा रही मौजूदा वेव)
Thursday, November 01, 2007
मेहमानों ने की मनमानी
आउटलुक साप्ताहिक हिंदी के 5 नवंबर 2007 के अंक में पेज संख्या 41 पर मेरा एक लेख छपा है..मेहमानों ने की मनमानी....आप भी पढि़ए इस लेख को.....सांप चला गया और लकीर पीटी जा रही है। भारतीय शेयर बाजार को बुरी तरह झकझोरने के बाद शेयर बाजार नियामक सेबी यही कर रही है। सेबी अब यह जानना चाहती कि मुंबई शेयर बाजार के सेंसेक्स ने 1700 अंक का गोता कैसे लगाया जिससे अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर हिल उठा। हालांकि, शेयर बाजार इन पंक्तियों के लिखे जाने तक स्थिर नहीं हो पाया था। भारत-अमेरिका परमाणु करार पर फैसला, सेबी की पार्टिसिपेटरी नोट पर बैठक, शेयर वायदा का निपटान, भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति और अमेरिकी फैड रिजर्व की बैठक। ये पांच मसले भारतीय शेयर बाजार की अगली चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बाजार में उतना खतरा नहीं है जितना रोज रोज कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए।
सेंसेक्स 19198 अंक के ऑल टाइम हाई पर पहुंचने के बाद जिस तरह नीचे आया उसके लिए सेबी द्धारा पार्टिसिपेटरी नोट पर अपने दिशा निर्देशों का मसौदा सामने रखना मुख्य वजह मानी गई। यही वजह खास थी क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बाजार में जमकर चांदी काट रहे थे और वे यह भी नहीं बताना चाहते हैं कि जो डॉलर भारत आ रहे हैं वे कहां से आ रहे हैं और उनका असली मालिक कौन हैं। वित्त विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए बाहरी पैसे के महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता लेकिन यह जानने का सरकार और नियामकों को अधिकार तो है ही जो पैसा आ रहा है उसका मुख्य स्त्रोत क्या है। विदेशी संस्थागत निवेशक मेहमान है तो इसका मतलब यह नहीं कि वे मेजबान के घर में मनमानी करने लगें। मनमानी करने पर ऐसे मेहमान को घर से बाहर भी निकाला जा सकता है।
सेबी और रिजर्व बैंक ने इस बात पर जोर दिया है कि पार्टिसिपेटरी नोट के अंधाधुंध इस्तेमाल को रोकने की आवश्यकता है। हालांकि, पार्टिसिपेटरी नोट को रोकने के लिए यह पहली बार कुछ नहीं कहा गया है। जब भी पार्टिसिपेटरी नोट पर अंकुश लगाने की बात होती है, शेयर बाजार में घबराहट भरी गिरावट आती है। स्थितियां आप भी देखिए कि पार्टिसिपेटरी नोट का कुल अनुमानित मूल्य मार्च 2004 के 31875 करोड़ रूपए से बढ़कर अगस्त 2007 में 353484 करोड़ रूपए पहुंच गया। यही वजह है रिजर्व बैंक इस मामले पर सेबी को जगाता रहा है जिसकी वजह से सेबी ने कुछ कदम उठाने की बात कही। सेबी विदेशी संस्थागत निवेशकों के निवेश को लेकर चिंतित है। वह इन पर अब पूरा अंकुश चाहती है। इस कदम को उठाने की पहल इसलिए की गई है कि अचानक ऐसा बड़ा निवेश न आए जिसकी उम्मीद न की गई हो और फिर एकदम से वह पैसा बाहर निकल जाए जिससे बाजार को तगड़ा झटका लगे। हालांकि, यहां एक बात समझ में नहीं आती कि पार्टिसिपेटरी नोट की बीमारी पर सेबी ने शुरूआत में ही कोई कदम क्यों नहीं उठाया जिसके इलाज के बारे में बाजार के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद कहा गया।
उभरते बाजारों में भारत जिस तरह बì




