ओमप्रकाश तिवारी
जागरण से साभार
केंद्र सरकार द्वारा शुक्रवार को पेश किए जाने वाले बजट में विदर्भ के किसानों को क्या मिलने वाला है, शायद इसकी गंध राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं को पहले ही लग गई है। महाराष्ट्र में यह अटकल बजट के तुरंत बाद राकांपा के किसान सम्मेलनों की फेहरिस्त देखकर लगाई जा रही है। बजट पेश होने के एक दिन बाद, यानी दो मार्च से ही राकांपा पूरे महाराष्ट्र में एक सप्ताह के अंदर छह किसान रैलियां करने जा रही है। इन रैलियों को कृतज्ञता रैली का नाम दिया गया है।
अर्थात विदर्भ सहित पूरे महाराष्ट्र के किसान बजट में कृषि क्षेत्र को मिली सुविधाओं के लिए मराठा क्षGप एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के प्रति कृतज्ञता दर्शाने के लिए इन रैलियों में जमा होंगे गौरतलब है, पिछले चार वर्ष में विदर्भ के सिर्फ छह जिलों में पांच हजार से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं। बीते वर्ष भी आत्महत्या करनेवाले किसानों की संख्या 1200 से ज्यादा रही है। इसी को मुद्दा बनाकर विपक्षी दल शिवसेना और भाजपा की बड़ी-बड़ी रैलियां पिछले एक सप्ताह से पूरे महाराष्ट्र में हो रही हैं। अब दो मार्च को निर्धारित राकांपा की पहली रैली राज्य की उपराजधानी एवं विदर्भ के गढ़ नागपुर में होगी। अगली रैली तीन मार्च को विदर्भ के ही अकोला में होगी। तीसरी रैली चार मार्च को उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव में, चौथी रैली पांच मार्च को पश्चिम महाराष्ट्र के कोल्हापुर में, पांचवी रैली मुंबई के पास ठाणे में सात मार्च को और अंतिम रैली आठ मार्च को मराठवाड़ा के बीड जिले में होगी।
इन सभी रैलियों के लिए झंडे बैनर अभी से रवाना कर दिए गए हैं। यही नहीं, बजट के दिन भी किसानों के लिए होने वाली घोषणाओं का स्वागत पटाखों और आतिशबाजियों से करने का निर्देश राकांपा कार्यकर्ताओं को दिया गया है ताकि किसानों को अहसास दिलाया जा सके कि ये सुविधाएं उन्हें राकांपा अध्यक्ष शरद पवार के कारण ही मिल रही हैं।
Friday, February 29, 2008
आम बजट पहले ही लिक हो गया था
आम बजट वर्ष 2008-09

केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आज वित्त वर्ष 2008-09 के लिए आम बजट पेश किया। इस पूरे बजट को आप यहां हिंदी और अंग्रेजी में पढ़ सकते हैं।
बजट में शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स पर टैक्स को बढ़ाकर 15 फीसदी करने और कार्पोरेट कर पर सरचार्ज में कोई बदलाव न करने की घोषणा का प्रतिकल असर शेयर बाजार पर देखा जा रहा है।
Thursday, February 28, 2008
हाउसिंग सैक्टर की बेरुखी ने डुबोया सीमेंट उद्योग को
सीमेट उद्योग क्षमता बढ़ने और आवास क्षेत्र की घटी मांग से पीडि़त है। इंडिया इंफोलाइन के एक सर्वे के मुताबिक सीमेंट डीलरों को हाउसिंग सैक्टर से मांग के बिगड़े गणित के बावजूद यह भरोसा है कि सीमेंट की मांग आने वाले दिनों में बढ़ेगी। सीमेंट डीलरों का कहना है कि शार्ट टर्म में सीमेंट के दाम सकारात्मक धारणा के साथ स्थिर रहेंगे। दक्षिण राज्यों, महाराष्ट्र, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के सीमेंट डीलरों का मानना है कि अगले तीन से छह महीने के दौरान सीमेंट के दाम बढ़ेंगे, जबकि पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तरांचल के डीलर कहते हैं कि सीमेंट के दाम गिरेंगे। इंडिया इंफोलाइन की राय में सीमेंट की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजनाएं जारी रहेंगी। खासकर दक्षिण भारत में सीमेंट उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। ग्रासिम इंडस्ट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट, मद्रास सीमेंट, इंडिया सीमेंट और श्री सीमेंट के शेयरों की खरीद की इस रिपोर्ट में सलाह दी गई है।
इंडिया इंफोलाइन ने 18 राज्यों के 60 सीमेंट डीलरों से बातचीत के आधार पर तैयार अपनी सर्वे रिपोर्ट में कहा है कि पिछले दो महीनों में तेज सर्दी की वजह से कंसट्रक्शन गतिविधियां थम गई थी जिसकी वजह से सीमेंट की मांग घटी और इसका डिस्पैच 4 से 5 फीसदी कम हुआ। हालांकि, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक को छोड़कर अन्य राज्यों में अब सीमेंट की मांग बढ़ रही है लेकिन ज्यादातर राज्यों में अभी भी हाउसिंग सैक्टर की मांग कमजोर बनी हुई है। आंध्र प्रदेश में हाल की जबरदस्त बेमौसमी बारिश का कंसट्रक्शन उद्योग पर विपरीत असर पड़ा है। कर्नाटक में राज्य सरकार के भंग हो जाने से इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से जुड़ी गतिविधियां ठंडी पड़ गई है।
सीमेंट के दामों की बात की जाए तो फरवरी में महाराष्ट्र में सीमेंट के दाम प्रति बैग 2 से 5 रुपए बढ़े, जबकि आंध्र प्रदेश में यह 4 से 5 रुपए और उत्तर प्रदेश में 2 से 3 रुपए प्रति बैग कम हुए। आंध्र प्रदेश में में सरकार प्रयोजित हाउसिंग व इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के सुस्त पड़ने एवं बेमौसमी बारिश से सीमेंट का उठाव कमजोर पड़ा है। यहां सीमेंट के दाम अगले दो से तीन सप्ताह में सुधरने की उम्मीद की जा सकती है।
सीमेंट के आयात से पड़ने वाले असर को देखा जाए तो पाकिस्तान से आने वाली सीमेंट का असर पंजाब को छोड़कर अन्य राज्यों में नहीं पड़ेगा। पंजाब के डीलरों का मानना है कि पाकिस्तान से आने वाली सीमेंट की वजह से यहां इसके दाम अगले कुछ महीनों में 5 से 10 रुपए प्रति बैग गिर सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक सीमेंट की मांग बढ़ रही है क्योंकि राज्य सरकारों के सार्वजनिक निर्माण विभागों और सरकारी एजेंसियां अपने को आबंटित फंड को पूरा करने के लिए फरवरी और मार्च में कंसट्रक्शन संबंधी गतिविधियों पर जोर देती है। इन सभी को वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले यह कार्य करना होता है। डीलरों को पूरी पूरी उम्मीद है कि समूचे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं और कार्पोरेट विस्तार परियोजनाओं की वजह से सीमेंट की मांग बढ़ेगी। कुछ डीलर तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान और छत्तीसगढ़ को छोड़कर अन्य राज्यों के आवास क्षेत्र से सीमेंट में मांग निकलने की आस नहीं रखते।
महाराष्ट्र, दक्षिण राज्यों, झारखंड और उड़ीसा में सीमेंट डीलरों को अगले तीन से छह महीनों में सीमेंट के दाम बढ़ने का भरोसा है। महाराष्ट्र और तमिलनाडु में अगले दो से तीन महीनों में सीमेंट के भाव 10 से 20 रुपए प्रति बैग तक बढ़ने के आसार हैं। दक्षिण भारत के डीलरों का कहना है कि यदि सरकार भाव नियंत्रण में ढील देती है तो सीमेंट के दाम प्रति बैग 300 रुपए तक पहुंच सकते हैं।
उत्तर भारत के सीमेंट डीलर मानते हैं कि इसे दाम सीमेंट की आपूर्ति सही होने से ऊंचे दामों का बने रहना कठिन है। पंजाब में तो पाकिस्तान से आ रही सीमेंट की वजह से घरेलू सीमेंट कंपनियों को दाम घटाने पड़ सकते हैं। गुजरात में यह माना जा रहा है कि सीमेंट के दाम बेहतर मांग के बावजूद शार्ट टर्म में स्थिर रहेंगे। राज्य में बिनानी सीमेंट ने आपूर्ति बढ़ा दी है। साथ ही जैपी सीमेंट के संयंत्र में वित्त वर्ष 2009 की दूसरी तिमाही से उत्पादन शुरु हो जाने पर दाम गिरने की आशंका है। इस राज्य में विभिन्न सीमेंट उत्पादकों के बीच बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सीमेंट के भावों में कटौती करने के आसार बढ़े हैं। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में छह महीने बाद सीमेंट की कीमतों में कमी होने की आस है, हालांकि यहां तेज गिरावट देखने को नहीं मिलेगी। वित्त वर्ष 2007 में देश भर से सीमेंट की मांग 1494 लाख टन की उम्मीद की जा रही है और जनवरी 2008 तक यह 1327 लाख टन सीमेंट रही। समूचे वित्त वर्ष में सीमेंट की मांग में दस फीसदी का इजाफा देखा जा रहा है।
ये हैं सात कमाऊ पूत
ग्लोबल इनवेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी मोर्गन स्टेनली ने एशिया पैसिफिक की ऐसी 20 कंपनियों की सूची जारी की है जो अगले पांच वर्ष में बेहतर रिटर्न देगी। मोर्गन स्टेनली ने आने वाले कल के विजेता शीर्षक से जारी इस सूची में भारतीय कंपनियों रिलायंस इंडस्ट्रीज, रिलायंस कैपिटल, भारती एयरटेल, लार्सन एंड टुब्रो, पेंटालून रिटेल, आईडीएफसी और शोभा डेवलपर्स को शामिल किया है। इस सूची में शामिल हुई कंपनियों में से आधी से ज्यादा तो भारत या चीन के शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं।
मोर्गन स्टेनली का कहना है कि एशिया में भारत और चीन के तेज विकास की वजह से हमने इस क्षेत्र और कारोबार पर ध्यान केंद्रित किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये वे कंपनियां हैं जिन्होंने प्रतिस्पर्धा में बाजी मारी हैं एवं शेयरधारकों को बेहतर रिटर्न दिया है। इन कंपनियों ने अपने देश में खुद के प्रतिस्पर्धियों को जहां पीछे छोड़ दिया वहीं अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए बेहद मजबूत है। सूची में शामिल अधिकतर कंपनियां ऐसे उद्योगों से जुड़ी हुई हैं जिनमें उतरने के लिए बड़ी बड़ी अड़चनों का सामना करना पड़ता है।
मोर्गन स्टेनली की इस सूची में शामिल कंपनियों में से छह कंपनियां हांगकांग शेयर बाजार में सूचीबद्ध है, जबकि चीन, ताईवान और कोरिया की दो दो कंपनियां हैं। एक आस्ट्रेलियाई कंपनी को इस सूची में जगह मिली है। हांगकांग से जिन कंपनियों को पसंद किया गया उनमें बेले इंटरनेशनल, मेंगनीनु डेरी, स्पिरिट होल्डिंग, ली एंड फंग, टेनसेन्ट होल्डिंग्स और केमैन आइलैंड स्थित टिंग्यी होल्डिंग कार्पोरेशन शामिल हैं।
कोरिया की सेमसंग टेक्विन और वूरी फाइनेंस होल्डिंग, ताईवान की फोक्सकॉन टेक और जेमटैक टेक ने इस सूची में अपना स्थान बनाया है। चीन से शांघाई झेनहुआ पोर्ट मशीनरी कंपनी और शुआंगहुई इनवेस्टमेंट शामिल हुई हैं।
Tuesday, February 26, 2008
रेल ने कमाएं 25 हजार करोड़ रुपए
रेलवे ने वित्त वर्ष 2007-08 में 25 हजार करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया जबकि इस दौरान परिचालन लाभ 76 फीसदी रहा है। यह जानकारी रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने आज वर्ष 2008-09 के लिए रेल बजट पेश करते हुए दी। रेलवे की यह उपलब्धि कई ‘फॉर्च्युन500’ कम्पनियों से बेहतर है।
मौजूदा वित्तीय वर्ष में दिसम्बर 2007 तक कुल माल भाड़ा आय में 8.2 प्रतिशत और यात्री टिकट से आय में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2007-08 में माल ढुलाई में 23.3 करोड़ टन का इजाफा हुआ है। 2007-08 में माल ढुलाई में 14,000 हजार करोड़ रुपए की अतिरिक्त कमाई हुई है। 2008-09 में 79 करोड़ टन माल ढुलाई का लक्ष्य। माल भाड़े से 2007-08 में 33,427 करोड़ रुपए की कमाई हुई। दो साल में 6000 एटीवीएम होंगे। टिकट काउंटर पर लगने वाली भीड़ दो साल में खत्म करन का वादा। यात्री किराए कमाई में 14 फीसदी की वृद्धि हुई है। रेल बजट 2008-2009 हिंदी में पूरा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
Monday, February 25, 2008
शेयर बाजार में बड़ी हलचल संभव
भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह बड़ी हलचल रहने की पूरी पूरी संभावना है क्योंकि 25 फरवरी से शुरु हो रहे सप्ताह में रेल बजट, आर्थिक सर्वे और आम बजट पेश होगा। इस सप्ताह शेयर बाजार के खिलाडि़यों का पूरा ध्यान नई दिल्ली की ओर लगा रहेगा कि वहां से किस तरह की घोषणाएं होती हैं। मौजूदा केंद्र सरकार का यह आखिरी आम बजट है, जिसमें लोक लुभावन वादे होने की अधिक संभावना है ताकि अगले आम चुनाव में जीत हासिल की जा सके।
भारतीय शेयर बाजार पर इस सप्ताह नई दिल्ली में होने वाली घोषणाओं का असर दिखाई देगा लेकिन हमारे शेयर बाजार काफी समय से अमरीकी और एशियाई शेयर बाजारों का अनुसरण कर रहे हैं जिससे यहां घोषित होने वाली सकारात्मक घोषणाओं का कुछ समय तो असर रह सकता है लेकिन सारी चाल अमरीकी एवं एशियाई बाजारों के रुझान पर निर्भर करेगी।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्स के इस सप्ताह 18180 से 16647 और निफ्टी के 5348 से 4905 अंक के बीच घूमते रहने की संभावना अधिक है। तकनीकी विश्लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बीएसई सेंसेक्स के लिए इस सप्ताह 18274-18509 का रेसीसटेंस अहम है। यदि बाजार इस स्तर को पार कर जाता है तो सुधार के संकेत दिखाई देंगे अन्यथा शेयर बाजार को किसी चमत्कार की जरुरत रहेगी। सेंसेक्स पिछले सप्ताह भी इस स्तर को पार करने में विफल रहा ओर 801 अंक की गिरावट देखने को मिली थी।
वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम के लिए वित्त वर्ष 2008-09 के लिए आम बजट पेश करना काफी चुनौती भरा है। आठ राज्यों में विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव का ख्याल रखते हुए मुद्रास्फीति पर काबू एवं नौ फीसदी की विकास दर को बनाए रखना उनके लिए खास चुनौतियां हैं। मतदाताओं को लुभाने के इस बजट प्रयास में अनेक ऐसी नकारात्मक घोषणाएं भी आ सकती हैं जिनसे बाजार का मूड बिगड़ सकता है। ऐसे में निवेशक यह साफ जान लें कि शेयर बाजार इस सप्ताह एक तरफा चाल नहीं चलेगा। बजट के साथ डेरीवेटिव्ज सैटलमेंट का सप्ताह होने से शेयर बाजार में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशक काफी सावधानी से कारोबार करें। शेयर बाजार को सिक्युरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स, आयकर, कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत, लाभांश कर संबंधी प्रावधान और विदेशी संस्थागत निवेशकों के संबंध में होने वाली घोषणाओं का इंतजार है।
इस सप्ताह एचडीएफसी बैंक, सेंचुरियन बैंक ऑफ पंजाब, जिंदल स्टील, पार्ले सॉफ्टवेयर और सीमेंस की ताजा घोषणाओं पर नजर रहेगी। शेयर बाजार में फ्रंटरनर की भूमिका में, एल एंड टी, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी रहेंगे। इसके अलावा एनटीपीसी, एलआईसी हाउसिंग, फुलफोर्ड इंडिया, हीरो होंडा, थ्री एम इंडिया, वोल्टास, पीएसएल, सेसा गोवा, एबीजी शीपयार्ड, मैक्नली भारत, कॉम्युलिंक सिस्टम और अपार इंडस्ट्रीज के शेयरों पर निवेशक ध्यान दे सकते हैं।
Friday, February 22, 2008
टायर कंपनियों में निवेश के लिए करे इंतजार
नेचुरल रबड़ की कीमतों में अचानक आए उछाल का बुरा असर टायर बनाने वाली कंपनियों की सेहत पर पड़ सकता है। टायर बनाने वाली कंपनियों ने अब यह संकेत दिए हैं कि उन्हें उत्पादों की कीमतों को बढ़ाना पड़ सकता है। इस बीच, देश की चौथी सबसे बड़ी टायर बनाने वाली कंपनी सीएट ने टायरों के दाम बढ़ा दिए हैं लेकिन कंपनी का कहना है कि यदि रबड़ की कीमतों की स्थिति यही रही तो उसे अगले महीने फिर से अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं।
नेचुरल रबड़ की कीमतें पिछले दस दिनों में अचानक बढ़ना शुरु हुई है और 21 फरवरी 2008 को इसका दाम सौ रुपए प्रति किलो को पार कर गया। रबड़ के दाम बढ़ने के बावजूद इसके खरीददारों को स्टॉक नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, अभी तक उद्योग यह जानने में कामयाब नहीं हो पाया है कि नेचुरल रबड़ के दाम अचानक क्यों बढ़ रहे हैं। फिर भी मोटे तौर पर क्रूड की कीमतों में आया उछाल और थाईलैंड में तगड़ी सर्दी से पेड़ों से रबड़ नहीं मिल पा रहा है। गौरतलब है कि थाईलैंड दुनिया में नेचुरल रबड़ का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। क्रूड की कीमतों के आसमान पहुंचने से सिंथेटिक रबड़ के उत्पादन की लागत बढ़ रही है। क्रूड तेल सिंथेटिक रबड़ उत्पादन के लिए डेरीवेटिव्ज का काम करता है।
ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (एटमा) के चेयरमैन आर पी सिंघानिया का कहना है कि रबड़ के दामों का सौ रुपए प्रति किलो को पार करना टायर उद्योग के लिए घातक साबित हो सकता है। एक सप्ताह में पांच से छह रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी से टायर उद्योग पर दबाव काफी बढ़ गया है। रबड़ के दाम में पांच रुपए प्रति किलो बढ़ोतरी का मतलब बस व ट्रक टायर की कीमतों में सौ रुपए तक का इजाफा होना है। इस साल रबड़ का उत्पादन 8.39 लाख टन के आसपास होने की संभावना है, जबकि खपत 8.59 लाख टन है। हमारे देश में 75 हजार टन रबड़ आयात किया जाता है और लगभग 45 हजार टन रबड़ का निर्यात होने की संभावना है। अपोलो टायर्स पर रिपोर्ट पढ़ें।
Tuesday, February 19, 2008
टैक्स ट्रीटी जांच के घेरे में
मॉरिशस ने टैक्स ट्रीटी पर भारत की चिंता को जायज ठहराया है। मॉरिशस ने भारत को इस पूरे मुद्दे पर जांच करने की पूरी छूट देने का फैसला किया है। मॉरिशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम का कहना है कि हमने मॉनिटरिंग सेल की स्थापना कर दी है और भारत को टैक्स ट्रीटी मामले पर जांच करने का प्रस्ताव दिया है। इस बीच, मॉरिशस ने निवेशकों के लिए टैक्स रेसीडेंसी सर्टीफिकेट देने की प्रक्रिया कड़ी बना दी है।
नए नियमों के मुताबिक सभी बोर्ड बैठक मॉरिशस में करनी होगी। कंपनी को अपने बोर्ड में दो स्थानीय निदेशक रखना जरुरी है। साथ सारा लेनदेन मॉरिशस स्थित बैंक खाते से होना जरुरी है। इन नियमों पर अमल के लिए मॉरिशस में ऑफिस होना जरुरी है।
इस बीच, भारत की चिंता ट्रीटी शॉपिंग यानी भारत में निवेश के लिए कैपिटल गेन्स टैक्स में छूट के मिल रहे लाभ का तीसरे देश के निवेशकों द्धारा किए जाने दुरुपयोग पर है। साथ ही सरकार भारतीय निवेशकों द्धारा हो रहे राउंड ट्रिपिंग्स को भी रोकना चाहती है। इसके तहत स्थानीय निवेशक विदेश में जाकर मॉरिशस के रास्ते धन वापस भारत ले आते हैं।
भारत सरकार तो वैसे भी ना चेतती, अगर इसके खिलाफ अदालत में जनहित याचिका दायर नहीं होती। मौजूदा सरकार ने इसको अपने न्यूनतम साझा कार्यक्रम में शामिल किया। भारत सरकार ने जब सारी बात मॉरिशस सरकार को बताई तो मॉरिशस को भी लगा कि दाल में कुछ काला है। अत: अब उसने इस पूरी ट्रीटी की खुलकर जांच करने की भारत को छूट देने का फैसला किया है।
गौरतलब है कि अगस्त 1982 में भारत और मॉरिशस के साथ एक टैक्स ट्रीटी हुई थी जिसको डबल टैक्सेशन एवाइडेंस ट्रीटी कहा जाता है। भारत ने इस ट्रीटी के तहत मॉरिशस निवासियों को भारत में शेयर की खरीद बिक्री पर हुई कमाई पर टैक्स ना लेने का वचन दिया था। इसी तरह की छूट मॉरिशस ने भी दी। भारतीय निवेशक दस से तीस तक कैपिटल गेन्स टैक्स देते है। जबकि मॉरिशस वाले संस्थागत निवेशक न तो भारत में कर अदा करते हैं और नही मॉरिशस में।
हमारे देश ने 50 विभिन्न देशों के साथ डबल टैक्सेशन एवाइडेंस ट्रीटी पर हस्ताक्षर कर रखे हैं जिनमें कम से कम 16 ट्रीटी मॉरिशस के साथ किए गए समझौते जैसी हैं। इन देशों में साइप्रस, इंडोनेशिया, माल्टा, तंजानिया, थाईलैंड, सीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और जाम्बिया शामिल हैं। मॉरिशस के साथ हुई ट्रीटी की जांच करने की बात उठने के साथ अब यह माना जा रहा है दूसरे देशों के साथ हुई ट्रीटी की भी जांच की जा सकती है।
Monday, February 18, 2008
आरईसी का आईपीओ है निवेश लायक
सरकारी कंपनी रुरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन 19 फरवरी को पूंजी बाजार में उतरने जा रही है। कंपनी इस आईपीओ के माध्यम से 1405-1639 करोड़ रुपए जुटाएगी। कुल 15.6 करोड़ इक्विटी शेयर 90 से 105 रुपए की प्राइस बैंड पर ऑफर किए जाएंगे। यह आईपीओ 22 फरवरी को बंद होगा। कंपनी अपने पूंजी आधार को बढ़ाने और भविष्य की जरुरतों को पूरा करने के लिए यह आईपीओ ला रही है।
रुरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन यानी आरईसी बिजली क्षेत्र की दो बड़ी वित्तीय संस्थाओं में से एक है। आरईसी के अलावा पावर फाइनेंस कंपनी यानी पीएफसी देश में बिजली परियोजनाओं के विकास में वित्त और सलाहकार सेवा देती हैं। इस कंपनी की स्थापना का मुख्य उद्देश्य गांवों में बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में मदद करना है। इसमें ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क मुख्य है। इस कंपनी की एसेट बेस 38700 करोड़ रुपए है और उसकी बुक वेल्यू प्रति शेयर 53 रुपए है। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना पर अमल की जिम्मेदारी आरईसी के जिम्मे है। ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के तहत इस योजना के लिए 40 हजार करोड़ रुपए आबंटित किए जाएंगे। इस वजह से आरईसी के पास कोष बढ़ने की संभावना है।
वर्ष 2007/08 की पहली छमाही में आरईसी की ब्याज आवक 30 फीसदी बढ़कर 1561 करोड़ रुपए रही, जबकि अन्य आवक 230.5 करोड़ रुपए थी। जबकि ब्याज खर्च 965 करोड़ रुपए रहा। कंपनी का इस अवधि में शुद्ध लाभ 522.9 करोड़ रुपए पहुंच गया। यह शुद्ध लाभ पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 81.1 फीसदी अधिक है। निवेशक इस कंपनी में कट ऑफ पर निवेश कर सकते हैं।
...तो तेजडि़यों के हाथों में होगा शेयर बाजार
भारतीय शेयर बाजार को चमत्कार की जरुरत...पिछले सप्ताह हमने शेयर बाजार के लिए यही कहा था और वास्तव में यही हुआ कि बुधवार से शुक्रवार यानी 13 से 15 फरवरी के बीच बीएसई सेंसेक्स 1500 अंक से ज्यादा उछला। हालांकि, अभी भी शेयर बाजार मंदडि़यों की पकड़ से छूटा नहीं है। बीएसई सेंसेक्स आज 18 फरवरी से शुरु हो रहे सप्ताह में 19 हजार अंक को पार कर बंद होता है तो यह फिर से तेजडि़यों के हाथ में चला जाएगा।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्स इस सप्ताह हालांकि 18930 से 17523 और निफ्टी 5540 से 5123 अंक के बीच घूमते रहने की संभावना अधिक है। तकनीकी विश्लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बीते सप्ताह सेंसेक्स ने 18142 की ऊंचाई को छूआ जो 17580 के स्तर से ऊपर है और अब नए स्तर जो देखने लायक होंगे वे 18274 से 18968 होंगे। सेंसेक्स के पुल बैक लेवल 18274, 18834 और 19395 अंक दिख रहे हैं। सेंसेक्स के लिए लोअर टॉप 18895 है। सेंसेक्स साप्ताहिक ब्रेकआउट होकर 19 हजार अंक से ऊपर बंद होता है तो यह मंदडि़यों की पकड़ से बाहर हो जाएगा। साप्ताहिक बंद शुक्रवार को 19 हजार से ऊपर होना चाहिए। बेहतर सेफ स्तर 19400 अंक से ऊपर बंद होना होगा। ऐसा होने पर न केवल सेंसेक्स की परीक्षा 21206 अंक पर होगी बल्कि यह अपने पिछले उच्च स्तर को पार कर सकता है।
अमरीका आर्थिक मंदी को रोकने के लिए अनेक कदम उठा रहा है लेकिन अभी तक सफलता के कोई संकेत नहीं दिख रहे। ब्याज दरों में तेजी से कटौती और 150 अरब डॉलर के रीलिफ पैकेज को मंजूरी दी गई है लेकिन फेडरल रिजर्व बैंक का मानना है कि मंदी की जोखिम अभी कायम है। सबप्राइम की वजह से वहां बैंकों को अभी भी 120 अरब डॉलर डूबत खाते में डालने पड़ सकते हैं। अमरीकी मंदी का डर जब तक समाप्त नहीं होगा विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार में भी खुलकर निवेश नहीं कर पाएंगे। हालांकि, वे यह मानते हैं कि एशिया में भारत और चीन उन्हें बेहतर रिटर्न देने वाले बाजार हैं।
इस बीच, फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष बेन बर्नानके ने संकेत दिए हैं कि अमरीकी अर्थव्यवस्था में मंदी से निपटने के लिए भविष्य में ब्याज दरों में और कटौती की जा सकती है। बैंक की अगली बैठक 18 मार्च को होगी जिसमें आधा फीसदी ब्याज दर कम करने की घोषणा की जा सकती है। फेडरल रिजर्व सितंबर के मध्य के बाद से ब्याज दरों में 2.25 फीसदी की कमी कर चुका है और इस समय वहां तीन फीसदी ब्याज दर रह गई है। दूसरी ओर, बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दर 0.5 फीसदी को बनाए रखा है।
प्राइमरी बाजार के निवेशकों के लिए बीते सप्ताह के पहले दिन ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। यह पानी फिरा रिलायंस पावर के आईपीओ की लिस्टिंग में। छोटे निवेशकों को रिलायंस पावर के शेयर 430 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से मिले थे, जिस पर लोगों की गणना थी कि हर आईपीओ अपने इश्यू प्राइस से डबल पर खुल रहा है तो वे इसमें भी चंद दिनों में डबल पैसा बना लेंगे, लेकिन हुआ सब उल्टा। रिलायंस पावर अपने इश्यू प्राइस से इस समय काफी नीचे चल रहा है। इस सप्ताह एक और बिजली कंपनी रुरल इलेक्ट्रिफिकेशन कार्पोरेशन यानी आरईसी का पब्लिक इश्यू आ रहा है। आरईसी सरकारी कंपनी है और 19 फरवरी को खुल रहे इस पब्लिक इश्यू में प्राइस बैंड 90 से 105 रुपए प्रति शेयर रखी गई है। कंपनी का इरादा 1405 से 1639 करोड़ रुपए जुटाने का है।
इस सप्ताह क्रिसिल, गुजरात गैस, वोकहार्ट, क्लेरियंट, एबीबी, कैस्ट्रॉल, लेनेक्स एबीएस के नतीजों पर नजर रहेगी। शेयर बाजार में फ्रंटरनर की भूमिका एल एंड टी और एचडीएफसी बैंक रहेंगे। इसके अलावा एसकेएफ इंडिया, भारती शीपयार्ड, सिटी यूनियन बैंक, आईवीआरसीएल इंफ्रास्ट्रक्चर्स, बीजीआर एनर्जी सिस्टम, जैन इरिगेशन, तमिलनाडु न्यूजप्रिंट, ऊषा मार्टिन, ग्रेफाइट इंडिया, एजिस लॉजिस्टिक्स, ब्लूस्टार और प्राज इंडस्ट्रीज के शेयरों पर निवेशक ध्यान दे सकते हैं।
Sunday, February 17, 2008
इंग्लिश इंडियन क्लेय के निवेशक हुए चौपट!
इंग्लिश इंडियन क्लेय लिमिटेड 4.46 करोड़ रुपए की इक्विटी पूंजी, 82 फीसदी प्रमोटर होल्डिंग और आम जनता के पास आठ फीसदी यानी 3.52 लाख शेयर और 110 करोड़ रुपए के रिजर्व वाली कंपनी है। इस कंपनी के शेयर का भाव 18 जनवरी 2008 को 3582 रुपए था जो बाद में बाजार के गिरने पर 12 फरवरी 2008 को 1690 रुपए आ गया था। लेकिन 13 फरवरी को इस कंपनी के शेयर का भाव 187.95 रुपए ऊपर के सर्किट में देख निवेशक हैरान रह गए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने इस संबंध में नोटिस संख्या 20082007-37 (07/02/2008) और नोटिस संख्या 20080212-28 (12/02/2008) को पढ़ने पर शेयरधारकों के तो होश ही उड़ गए।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के इन नोटिस के मुताबिक कंपनी के इनवेस्टमेंट डिविजन को डिमर्ज कर भारत स्टार्च प्रॉडक्ट्स लिमिटेड (बीएसपीएल) के साथ मिला दिए जाने से इंग्लिश इंडियन क्लेय के शेयर धारकों को प्रत्येक 19 शेयर पर भारत स्टार्च प्रॉडक्ट्स लिमिटेड के चार शेयर दिए जाएंगे। दूसरे शब्दों में डिमर्ज से पहले इंग्लिश इंडियन क्लेय लिमिटेड के सौ शेयर रखने वाले को डिमर्ज के बाद इंग्लिश इंडियन क्लेय लिमिटेड के सौ शेयर के अलावा भारत स्टार्च लिमिटेड के 21 शेयर पा सकेंगे। इस नोटिस के मुताबिक भारत स्टार्च के शेयर देश के किसी भी शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है और भविष्य में भी इस कंपनी की योजना अपने शेयर लिस्टिंग कराने की नहीं है। शेयर लिस्टिंग न कराने की योजना की वजह से डीबीएच इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और अथवा करुण कार्पेटस प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से शेयरधारकों से भारत स्टार्च प्रॉडक्ट्स लिमिटेड के शेयर एक हजार रुपए प्रति शेयर खरीदने का ऑफर किया जाएगा जो 18 फरवरी तक ही रहेगा।
बीएसई ने डिमर्ज के बाद इंग्लिश इंडियन क्लेय लिमिटेड के शेयरों का बेस प्राइस 179 रुपए तय कर पांच फीसदी की सर्किट सीमा लागू कर दी जिससे निवेशकों में रोष है और उन्हें तगड़ा झटका लगा है। डिमर्ज के पहले इंग्लिश इंडियन क्लेय लिमिटेड के सौ शेयर का बाजार भाव 1690 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से 1.69 लाख रुपए था लेकिन डिमर्ज के बाद इंग्लिश इंडियन क्लेय का प्रति शेयर 197.30 रुपए और भारत स्टार्च के 21 शेयर का भाव ऑफर के मुताबिक केवल 40730 रुपए (19730+21000) रह गया। कंपनी की 21 जनवरी 2008 को बोर्ड बैठक हुई जिसमें शेयर धारकों को प्रति छह शेयर पर एक शेयर 990 रुपए के प्रीमियम पर राइट शेयर देने का प्रस्ताव पारित किया गया। अब सवाल उठता है कि जब कंपनी के शेयर का भाव 197 रुपए है तो एक हजार रुपए प्रति शेयर के भाव पर राइट कैसे ऑफर किया जा रहा है। इंग्लिश इंडियन क्लेय लिमिटेड का डिमर्ज के बाद तय किया बेस प्राइस कैसे गलत तय हुआ और इसमें कहां चूक हुई इस ओर न तो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का ध्यान गया है और न ही सेबी का। ऐसे में आम निवेशक किसी की भूल या गलत गणना के शिकार होकर अपने को लुटा पिटा पा रहे हैं।
Saturday, February 16, 2008
शेयर बाजार में लौटी चमक कायम रहेगी !
हितेंद्र वासुदेव
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स पिछले सप्ताह 17427।34 अंक पर खुला और नीचे में 16457.74 अंक तक आया। लेकिन बाद में यह सुधरकर ऊपर में 18142.92 अंक तक गया और बंद हुआ 18115.25 अंक पर। इस तरह साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स में 714 अंक की तेजी देखी गई। सेंसेक्स के 16457 से 18142 अंक तक का सफर उम्मीद की किरण दिखाता है लेकिन अभी इसके ऊपर बने रहने के लिए कई चीजों की जरुरत दिख रही है। अगले सप्ताह में रेसीसटेंस गेप 18274 से 18509 है जो शेयर बाजार के लिए खास महत्व रखता है। दैनिक चार्ट में ट्रेंड लाइन 21206 और 20985 पर बनाने पर रेसीसटेंस 18300 अंक पर दिखती है जिससे पता चलता है कि गेप 18274 से 18509 पर है।
बीते सप्ताह सेंसेक्स ने 18142 की ऊंचाई को छूआ जो 17580 के स्तर से ऊपर है और अब नए स्तर जो देखने लायक होंगे वे 18274 से 18968 होंगे। सेंसेक्स के पुल बैक लेवल 18274, 18834 और 19395 अंक दिख रह