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February 29, 2008

आम बजट पहले ही लिक हो गया था

ओमप्रकाश तिवारी
जागरण से साभार


केंद्र सरकार द्वारा शुक्रवार को पेश किए जाने वाले बजट में विदर्भ के किसानों को क्या मिलने वाला है, शायद इसकी गंध राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं को पहले ही लग गई है। महाराष्ट्र में यह अटकल बजट के तुरंत बाद राकांपा के किसान सम्मेलनों की फेहरिस्त देखकर लगाई जा रही है। बजट पेश होने के एक दिन बाद, यानी दो मार्च से ही राकांपा पूरे महाराष्ट्र में एक सप्ताह के अंदर छह किसान रैलियां करने जा रही है। इन रैलियों को कृतज्ञता रैली का नाम दिया गया है।

अर्थात विदर्भ सहित पूरे महाराष्ट्र के किसान बजट में कृषि क्षेत्र को मिली सुविधाओं के लिए मराठा क्षGप एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के प्रति कृतज्ञता दर्शाने के लिए इन रैलियों में जमा होंगे गौरतलब है, पिछले चार वर्ष में विदर्भ के सिर्फ छह जिलों में पांच हजार से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं। बीते वर्ष भी आत्महत्या करनेवाले किसानों की संख्या 1200 से ज्यादा रही है। इसी को मुद्दा बनाकर विपक्षी दल शिवसेना और भाजपा की बड़ी-बड़ी रैलियां पिछले एक सप्ताह से पूरे महाराष्ट्र में हो रही हैं। अब दो मार्च को निर्धारित राकांपा की पहली रैली राज्य की उपराजधानी एवं विदर्भ के गढ़ नागपुर में होगी। अगली रैली तीन मार्च को विदर्भ के ही अकोला में होगी। तीसरी रैली चार मार्च को उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव में, चौथी रैली पांच मार्च को पश्चिम महाराष्ट्र के कोल्हापुर में, पांचवी रैली मुंबई के पास ठाणे में सात मार्च को और अंतिम रैली आठ मार्च को मराठवाड़ा के बीड जिले में होगी।

इन सभी रैलियों के लिए झंडे बैनर अभी से रवाना कर दिए गए हैं। यही नहीं, बजट के दिन भी किसानों के लिए होने वाली घोषणाओं का स्वागत पटाखों और आतिशबाजियों से करने का निर्देश राकांपा कार्यकर्ताओं को दिया गया है ताकि किसानों को अहसास दिलाया जा सके कि ये सुविधाएं उन्हें राकांपा अध्यक्ष शरद पवार के कारण ही मिल रही हैं।

आम बजट वर्ष 2008-09


केंद्रीय वित्‍त मंत्री पी चिदंबरम ने आज वित्‍त वर्ष 2008-09 के लिए आम बजट पेश किया। इस पूरे बजट को आप यहां हिंदी और अंग्रेजी में पढ़ सकते हैं।

बजट में शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स पर टैक्स को बढ़ाकर 15 फीसदी करने और कार्पोरेट कर पर सरचार्ज में कोई बदलाव न करने की घोषणा का प्रतिकल असर शेयर बाजार पर देखा जा रहा है।

February 28, 2008

हाउसिंग सैक्‍टर की बेरुखी ने डुबोया सीमेंट उद्योग को

cement सीमेट उद्योग क्षमता बढ़ने और आवास क्षेत्र की घटी मांग से पीडि़त है। इंडिया इंफोलाइन के एक सर्वे के मुताबिक सीमेंट डीलरों को हाउसिंग सैक्‍टर से मांग के बिगड़े गणित के बावजूद यह भरोसा है कि सीमेंट की मांग आने वाले दिनों में बढ़ेगी। सीमेंट डीलरों का कहना है कि शार्ट टर्म में सीमेंट के दाम सकारात्‍मक धारणा के साथ स्थिर रहेंगे। दक्षिण राज्‍यों, महाराष्‍ट्र, उड़ीसा और छत्‍तीसगढ़ के सीमेंट डीलरों का मानना है कि अगले तीन से छह महीने के दौरान सीमेंट के दाम बढ़ेंगे, जबकि पंजाब, उत्‍तर प्रदेश और उत्‍तरांचल के डीलर कहते हैं कि सीमेंट के दाम गिरेंगे। इंडिया इंफोलाइन की राय में सीमेंट की उत्‍पादन क्षमता बढ़ाने की योजनाएं जारी रहेंगी। खासकर दक्षिण भारत में सीमेंट उत्‍पादन क्षमता बढ़ेगी। ग्रासिम इंडस्‍ट्रीज, अल्‍ट्राटेक सीमेंट, मद्रास सीमेंट, इंडिया सीमेंट और श्री सीमेंट के शेयरों की खरीद की इस रिपोर्ट में सलाह दी गई है।

इंडिया इंफोलाइन ने 18 राज्‍यों के 60 सीमेंट डीलरों से बातचीत के आधार पर तैयार अपनी सर्वे रिपोर्ट में कहा है कि पिछले दो महीनों में तेज सर्दी की वजह से कंसट्रक्‍शन गतिविधियां थम गई थी जिसकी वजह से सीमेंट की मांग घटी और इसका डिस्‍पैच 4 से 5 फीसदी कम हुआ। हालांकि, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक को छोड़कर अन्‍य राज्‍यों में अब सीमेंट की मांग बढ़ रही है लेकिन ज्‍यादातर राज्‍यों में अभी भी हाउसिंग सैक्‍टर की मांग कमजोर बनी हुई है। आंध्र प्रदेश में हाल की जबरदस्‍त बेमौसमी बारिश का कंसट्रक्‍शन उद्योग पर विपरीत असर पड़ा है। कर्नाटक में राज्‍य सरकार के भंग हो जाने से इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर परियोजनाओं से जुड़ी गतिविधियां ठंडी पड़ गई है।

सीमेंट के दामों की बात की जाए तो फरवरी में महाराष्‍ट्र में सीमेंट के दाम प्रति बैग 2 से 5 रुपए बढ़े, जबकि आंध्र प्रदेश में यह 4 से 5 रुपए और उत्‍तर प्रदेश में 2 से 3 रुपए प्रति बैग कम हुए। आंध्र प्रदेश में में सरकार प्रयोजित हाउसिंग व इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर परियोजनाओं के सुस्‍त पड़ने एवं बेमौसमी बारिश से सीमेंट का उठाव कमजोर पड़ा है। यहां सीमेंट के दाम अगले दो से तीन सप्‍ताह में सुधरने की उम्‍मीद की जा सकती है।

सीमेंट के आयात से पड़ने वाले असर को देखा जाए तो पाकिस्‍तान से आने वाली सीमेंट का असर पंजाब को छोड़कर अन्‍य राज्‍यों में नहीं पड़ेगा। पंजाब के डीलरों का मानना है कि पाकिस्‍तान से आने वाली सीमेंट की वजह से यहां इसके दाम अगले कुछ महीनों में 5 से 10 रुपए प्रति बैग गिर सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक सीमेंट की मांग बढ़ रही है क्‍योंकि राज्‍य सरकारों के सार्वजनिक निर्माण विभागों और सरकारी एजेंसियां अपने को आबंटित फंड को पूरा करने के लिए फरवरी और मार्च में कंसट्रक्‍शन संबंधी गतिविधियों पर जोर देती है। इन सभी को वित्‍त वर्ष की समाप्ति से पहले यह कार्य करना होता है। डीलरों को पूरी पूरी उम्‍मीद है कि समूचे देश में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर परियोजनाओं और कार्पोरेट विस्‍तार परियोजनाओं की वजह से सीमेंट की मांग बढ़ेगी। कुछ डीलर तमिलनाडु, गुजरात, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ को छोड़कर अन्‍य राज्‍यों के आवास क्षेत्र से सीमेंट में मांग निकलने की आस नहीं रखते।

महाराष्‍ट्र, दक्षिण राज्‍यों, झारखंड और उड़ीसा में सीमेंट डीलरों को अगले तीन से छह महीनों में सीमेंट के दाम बढ़ने का भरोसा है। महाराष्‍ट्र और तमिलनाडु में अगले दो से तीन महीनों में सीमेंट के भाव 10 से 20 रुपए प्रति बैग तक बढ़ने के आसार हैं। दक्षिण भारत के डीलरों का कहना है कि यदि सरकार भाव नियंत्रण में ढील देती है तो सीमेंट के दाम प्रति बैग 300 रुपए तक पहुंच सकते हैं।

उत्‍तर भारत के सीमेंट डीलर मानते हैं कि इसे दाम सीमेंट की आपूर्ति सही होने से ऊंचे दामों का बने रहना कठिन है। पंजाब में तो पाकिस्‍तान से आ रही सीमेंट की वजह से घरेलू सीमेंट कंपनियों को दाम घटाने पड़ सकते हैं। गुजरात में यह माना जा रहा है कि सीमेंट के दाम बेहतर मांग के बावजूद शार्ट टर्म में स्थिर रहेंगे। राज्‍य में बिनानी सीमेंट ने आपूर्ति बढ़ा दी है। साथ ही जैपी सीमेंट के संयंत्र में वित्‍त वर्ष 2009 की दूसरी तिमाही से उत्‍पादन शुरु हो जाने पर दाम गिरने की आशंका है। इस राज्‍य में विभिन्‍न सीमेंट उत्‍पादकों के बीच बाजार हिस्‍सेदारी बढ़ाने के लिए सीमेंट के भावों में कटौती करने के आसार बढ़े हैं। मध्‍य प्रदेश और उत्‍तर प्रदेश में छह महीने बाद सीमेंट की कीमतों में कमी होने की आस है, हालांकि यहां तेज गिरावट देखने को नहीं मिलेगी। वित्‍त वर्ष 2007 में देश भर से सीमेंट की मांग 1494 लाख टन की उम्‍मीद की जा रही है और जनवरी 2008 तक यह 1327 लाख टन सीमेंट रही। समूचे वित्‍त वर्ष में सीमेंट की मांग में दस फीसदी का इजाफा देखा जा रहा है।

ये हैं सात कमाऊ पूत

morgen ग्‍लोबल इनवेस्‍टमेंट बैंकिंग कंपनी मोर्गन स्‍टेनली ने एशिया पैसिफिक की ऐसी 20 कंपनियों की सूची जारी की है जो अगले पांच वर्ष में बेहतर रिटर्न देगी। मोर्गन स्‍टेनली ने आने वाले कल के विजेता शीर्षक से जारी इस सूची में भारतीय कंपनियों रिलायंस इंडस्‍ट्रीज, रिलायंस कैपिटल, भारती एयरटेल, लार्सन एंड टुब्रो, पेंटालून रिटेल, आईडीएफसी और शोभा डेवलपर्स को शामिल किया है। इस सूची में शामिल हुई कंपनियों में से आधी से ज्‍यादा तो भारत या चीन के शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं।

मोर्गन स्‍टेनली का कहना है कि एशिया में भारत और चीन के तेज विकास की वजह से हमने इस क्षेत्र और कारोबार पर ध्‍यान केंद्रित किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये वे कंपनियां हैं जिन्‍होंने प्रतिस्‍पर्धा में बाजी मारी हैं एवं शेयरधारकों को बेहतर रिटर्न दिया है। इन कंपनियों ने अपने देश में खुद के प्रतिस्‍पर्धियों को जहां पीछे छोड़ दिया वहीं अंतरराष्‍ट्रीय प्रतिस्‍पर्धा का सामना करने के लिए बेहद मजबूत है। सूची में शामिल अधिकतर कंपनियां ऐसे उद्योगों से जुड़ी हुई हैं जिनमें उतरने के लिए बड़ी बड़ी अड़चनों का सामना करना पड़ता है।

मोर्गन स्‍टेनली की इस सूची में शामिल कंपनियों में से छह कंपनियां हांगकांग शेयर बाजार में सूचीबद्ध है, जबकि चीन, ताईवान और कोरिया की दो दो कंपनियां हैं। एक आस्‍ट्रेलियाई कंपनी को इस सूची में जगह मिली है। हांगकांग से जिन कंपनियों को पसंद किया गया उनमें बेले इंटरनेशनल, मेंगनीनु डेरी, स्पिरिट होल्डिंग, ली एंड फंग, टेनसेन्‍ट होल्डिंग्‍स और केमैन आइलैंड स्थित टिंग्‍यी होल्डिंग कार्पोरेशन शामिल हैं।

कोरिया की सेमसंग टेक्विन और वूरी फाइनेंस होल्डिंग, ताईवान की फोक्‍सकॉन टेक और जेमटैक टेक ने इस सूची में अपना स्‍थान बनाया है। चीन से शांघाई झेनहुआ पोर्ट मशीनरी कंपनी और शुआंगहुई इनवेस्‍टमेंट शामिल हुई हैं।

February 26, 2008

रेल ने कमाएं 25 हजार करोड़ रुपए

रेलवे ने वित्त वर्ष 2007-08 में 25 हजार करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया जबकि इस दौरान परिचालन लाभ 76 फीसदी रहा है। यह जानकारी रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने आज वर्ष 2008-09 के लिए रेल बजट पेश करते हुए दी। रेलवे की यह उपलब्धि कई ‘फॉर्च्युन500’ कम्पनियों से बेहतर है।

मौजूदा वित्तीय वर्ष में दिसम्बर 2007 तक कुल माल भाड़ा आय में 8.2 प्रतिशत और यात्री टिकट से आय में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2007-08 में माल ढुलाई में 23.3 करोड़ टन का इजाफा हुआ है। 2007-08 में माल ढुलाई में 14,000 हजार करोड़ रुपए की अतिरिक्त कमाई हुई है। 2008-09 में 79 करोड़ टन माल ढुलाई का लक्ष्य। माल भाड़े से 2007-08 में 33,427 करोड़ रुपए की कमाई हुई। दो साल में 6000 एटीवीएम होंगे। टिकट काउंटर पर लगने वाली भीड़ दो साल में खत्म करन का वादा। यात्री किराए कमाई में 14 फीसदी की वृद्धि हुई है। रेल बजट 2008-2009 हिंदी में पूरा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

February 25, 2008

शेयर बाजार में बड़ी हलचल संभव

भारतीय शेयर बाजार में इस सप्‍ताह बड़ी हलचल रहने की पूरी पूरी संभावना है क्‍योंकि 25 फरवरी से शुरु हो रहे सप्‍ताह में रेल बजट, आर्थिक सर्वे और आम बजट पेश होगा। इस सप्‍ताह शेयर बाजार के खिलाडि़यों का पूरा ध्‍यान नई दिल्‍ली की ओर लगा रहेगा कि वहां से किस तरह की घोषणाएं होती हैं। मौजूदा केंद्र सरकार का यह आखिरी आम बजट है, जिसमें लोक लुभावन वादे होने की अधिक संभावना है ताकि अगले आम चुनाव में जीत हासिल की जा सके।

भारतीय शेयर बाजार पर इस सप्‍ताह नई दिल्‍ली में होने वाली घोषणाओं का असर दिखाई देगा लेकिन हमारे शेयर बाजार काफी समय से अमरीकी और एशियाई शेयर बाजारों का अनुसरण कर रहे हैं जिससे यहां घोषित होने वाली सकारात्‍मक घोषणाओं का कुछ समय तो असर रह सकता है लेकिन सारी चाल अमरीकी एवं एशियाई बाजारों के रुझान पर निर्भर करेगी।

बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स के इस सप्‍ताह 18180 से 16647 और निफ्टी के 5348 से 4905 अंक के बीच घूमते रहने की संभावना अधिक है। तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बीएसई सेंसेक्‍स के लिए इस सप्‍ताह 18274-18509 का रेसीसटेंस अहम है। यदि बाजार इस स्‍तर को पार कर जाता है तो सुधार के संकेत दिखाई देंगे अन्‍यथा शेयर बाजार को किसी चमत्‍कार की जरुरत रहेगी। सेंसेक्‍स पिछले सप्‍ताह भी इस स्‍तर को पार करने में विफल रहा ओर 801 अंक की गिरावट देखने को मिली थी।

वित्‍त मंत्री पी. चिदम्‍बरम के लिए वित्‍त वर्ष 2008-09 के लिए आम बजट पेश करना काफी चुनौती भरा है। आठ राज्‍यों में विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव का ख्‍याल रखते हुए मुद्रास्‍फीति पर काबू एवं नौ फीसदी की विकास दर को बनाए रखना उनके लिए खास चुनौतियां हैं। मतदाताओं को लुभाने के इस बजट प्रयास में अनेक ऐसी नकारात्‍मक घोषणाएं भी आ सकती हैं जिनसे बाजार का मूड बिगड़ सकता है। ऐसे में निवेशक यह साफ जान लें कि शेयर बाजार इस सप्‍ताह एक तरफा चाल नहीं चलेगा। बजट के साथ डेरीवेटिव्‍ज सैटलमेंट का सप्‍ताह होने से शेयर बाजार में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशक काफी सावधानी से कारोबार करें। शेयर बाजार को सिक्‍युरिटीज ट्रांजेक्‍शन टैक्‍स, आयकर, कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स में राहत, लाभांश कर संबंधी प्रावधान और विदेशी संस्‍थागत निवेशकों के संबंध में होने वाली घोषणाओं का इंतजार है।

इस सप्‍ताह एचडीएफसी बैंक, सेंचुरियन बैंक ऑफ पंजाब, जिंदल स्‍टील, पार्ले सॉफ्टवेयर और सीमेंस की ताजा घोषणाओं पर नजर रहेगी। शेयर बाजार में फ्रंटरनर की भूमिका में, एल एंड टी, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी रहेंगे। इसके अलावा एनटीपीसी, एलआईसी हाउसिंग, फुलफोर्ड इंडिया, हीरो होंडा, थ्री एम इंडिया, वोल्‍टास, पीएसएल, सेसा गोवा, एबीजी शीपयार्ड, मैक्‍नली भारत, कॉम्‍युलिंक सिस्‍टम और अपार इंडस्‍ट्रीज के शेयरों पर निवेशक ध्‍यान दे सकते हैं।

February 22, 2008

टायर कंपनियों में निवेश के लिए करे इंतजार

tyre नेचुरल रबड़ की कीमतों में अचानक आए उछाल का बुरा असर टायर बनाने वाली कंपनियों की सेहत पर पड़ सकता है। टायर बनाने वाली कंपनियों ने अब यह संकेत दिए हैं कि उन्‍हें उत्‍पादों की कीमतों को बढ़ाना पड़ सकता है। इस बीच, देश की चौथी सबसे बड़ी टायर बनाने वाली कंपनी सीएट ने टायरों के दाम बढ़ा दिए हैं लेकिन कंपनी का कहना है कि यदि रबड़ की कीमतों की स्थिति यही रही तो उसे अगले महीने फिर से अपने उत्‍पादों के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं।

नेचुरल रबड़ की कीमतें पिछले दस दिनों में अचानक बढ़ना शुरु हुई है और 21 फरवरी 2008 को इसका दाम सौ रुपए प्रति किलो को पार कर गया। रबड़ के दाम बढ़ने के बावजूद इसके खरीददारों को स्‍टॉक नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, अभी तक उद्योग यह जानने में कामयाब नहीं हो पाया है कि नेचुरल रबड़ के दाम अचानक क्‍यों बढ़ रहे हैं। फिर भी मोटे तौर पर क्रूड की कीमतों में आया उछाल और थाईलैंड में तगड़ी सर्दी से पेड़ों से रबड़ नहीं मिल पा रहा है। गौरतलब है कि थाईलैंड दुनिया में नेचुरल रबड़ का सबसे बड़ा उत्‍पादक देश है। क्रूड की कीमतों के आसमान पहुंचने से सिंथेटिक रबड़ के उत्‍पादन की लागत बढ़ रही है। क्रूड तेल सिंथेटिक रबड़ उत्‍पादन के लिए डेरीवेटिव्‍ज का काम करता है।

ऑटोमोटिव टायर मैन्‍युफैक्‍चर्स एसोसिएशन (एटमा) के चेयरमैन आर पी सिंघानिया का कहना है कि र‍बड़ के दामों का सौ रुपए प्रति किलो को पार करना टायर उद्योग के लिए घातक साबित हो सकता है। एक सप्‍ताह में पांच से छह रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी से टायर उद्योग पर दबाव काफी बढ़ गया है। रबड़ के दाम में पांच रुपए प्रति किलो बढ़ोतरी का मतलब बस व ट्रक टायर की कीमतों में सौ रुपए तक का इजाफा होना है। इस साल रबड़ का उत्‍पादन 8.39 लाख टन के आसपास होने की संभावना है, जबकि खपत 8.59 लाख टन है। हमारे देश में 75 हजार टन रबड़ आयात किया जाता है और लगभग 45 हजार टन रबड़ का निर्यात होने की संभावना है। अपोलो टायर्स पर रिपोर्ट पढ़ें।

February 19, 2008

टैक्‍स ट्रीटी जांच के घेरे में

port louis मॉरिशस ने टैक्‍स ट्रीटी पर भारत की चिंता को जायज ठहराया है। मॉरिशस ने भारत को इस पूरे मुद्दे पर जांच करने की पूरी छूट देने का फैसला किया है। मॉरिशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम का कहना है कि हमने मॉनिटरिंग सेल की स्‍थापना कर दी है और भारत को टैक्‍स ट्रीटी मामले पर जांच करने का प्रस्‍ताव दिया है। इस बीच, मॉरिशस ने निवेशकों के लिए टैक्‍स रेसीडेंसी सर्टीफिकेट देने की प्रक्रिया कड़ी बना दी है।

नए नियमों के मुताबिक सभी बोर्ड बैठक मॉरिशस में करनी होगी। कंपनी को अपने बोर्ड में दो स्‍थानीय निदेशक रखना जरुरी है। साथ सारा लेनदेन मॉरिशस स्थित बैंक खाते से होना जरुरी है। इन नियमों पर अमल के लिए मॉरिशस में ऑफिस होना जरुरी है।

इस बीच, भारत की चिंता ट्रीटी शॉपिंग यानी भारत में निवेश के लिए कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स में छूट के मिल रहे लाभ का तीसरे देश के निवेशकों द्धारा किए जाने दुरुपयोग पर है। साथ ही सरकार भारतीय निवेशकों द्धारा हो रहे राउंड ट्रिपिंग्‍स को भी रोकना चाहती है। इसके तहत स्‍थानीय निवेशक विदेश में जाकर मॉरिशस के रास्‍ते धन वापस भारत ले आते हैं।

भारत सरकार तो वैसे भी ना चेतती, अगर इसके खिलाफ अदालत में जनहित याचिका दायर नहीं होती। मौजूदा सरकार ने इसको अपने न्‍यूनतम साझा कार्यक्रम में शामिल किया। भारत सरकार ने जब सारी बात मॉरिशस सरकार को बताई तो मॉरिशस को भी लगा कि दाल में कुछ काला है। अत: अब उसने इस पूरी ट्रीटी की खुलकर जांच करने की भारत को छूट देने का फैसला किया है।

गौरतलब है कि अगस्‍त 1982 में भारत और मॉरिशस के साथ एक टैक्‍स ट्रीटी हुई थी जिसको डबल टैक्‍सेशन एवाइडेंस ट्रीटी कहा जाता है। भारत ने इस ट्रीटी के तहत मॉरिशस निवासियों को भारत में शेयर की खरीद बिक्री पर हुई कमाई पर टैक्स ना लेने का वचन दिया था। इसी तरह की छूट मॉरिशस ने भी दी। भारतीय निवेशक दस से तीस तक कैपिटल गेन्स टैक्स देते है। जबकि मॉरिशस वाले संस्थागत निवेशक न तो भारत में कर अदा करते हैं और नही मॉरिशस में।

हमारे देश ने 50 विभिन्‍न देशों के साथ डबल टैक्‍सेशन एवाइडेंस ट्रीटी पर हस्‍ताक्षर कर रखे हैं जिनमें कम से कम 16 ट्रीटी मॉरिशस के साथ किए गए समझौते जैसी हैं। इन देशों में साइप्रस, इंडोनेशिया, माल्‍टा, तंजानिया, थाईलैंड, सीरिया, संयुक्‍त अरब अमीरात और जाम्बिया शामिल हैं। मॉरिशस के साथ हुई ट्रीटी की जांच करने की बात उठने के साथ अब यह माना जा रहा है दूसरे देशों के साथ हुई ट्रीटी की भी जांच की जा सकती है।

February 18, 2008

आरईसी का आईपीओ है निवेश लायक

power सरकारी कंपनी रुरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन 19 फरवरी को पूंजी बाजार में उतरने जा रही है। कंपनी इस आईपीओ के माध्‍यम से 1405-1639 करोड़ रुपए जुटाएगी। कुल 15.6 करोड़ इक्विटी शेयर 90 से 105 रुपए की प्राइस बैंड पर ऑफर किए जाएंगे। यह आईपीओ 22 फरवरी को बंद होगा। कंपनी अपने पूंजी आधार को बढ़ाने और भविष्‍य की जरुरतों को पूरा करने के लिए यह आईपीओ ला रही है।

रुरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन यानी आरईसी बिजली क्षेत्र की दो बड़ी वित्‍तीय संस्‍थाओं में से एक है। आरईसी के अलावा पावर फाइनेंस कंपनी यानी पीएफसी देश में बिजली परियोजनाओं के विकास में वित्‍त और सलाहकार सेवा देती हैं। इस कंपनी की स्‍थापना का मुख्‍य उद्देश्‍य गांवों में बिजली इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के विकास में मदद करना है। इसमें ट्रांसमिशन और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन नेटवर्क मुख्‍य है। इस कंपनी की एसेट बेस 38700 करोड़ रुपए है और उसकी बुक वेल्‍यू प्रति शेयर 53 रुपए है। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना पर अमल की जिम्‍मेदारी आरईसी के जिम्‍मे है। ग्‍यारहवीं पंचवर्षीय योजना के तहत इस योजना के लिए 40 हजार करोड़ रुपए आबंटित किए जाएंगे। इस वजह से आरईसी के पास कोष बढ़ने की संभावना है।

वर्ष 2007/08 की पहली छमाही में आरईसी की ब्‍याज आवक 30 फीसदी बढ़कर 1561 करोड़ रुपए रही, जबकि अन्‍य आवक 230.5 करोड़ रुपए थी। जबकि ब्‍याज खर्च 965 करोड़ रुपए रहा। कंपनी का इस अवधि में शुद्ध लाभ 522.9 करोड़ रुपए पहुंच गया। यह शुद्ध लाभ पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 81.1 फीसदी अधिक है। निवेशक इस कंपनी में कट ऑफ पर निवेश कर सकते हैं।

...तो तेजडि़यों के हाथों में होगा शेयर बाजार

भारतीय शेयर बाजार को चमत्‍कार की जरुरत...पिछले सप्‍ताह हमने शेयर बाजार के लिए यही कहा था और वास्‍तव में यही हुआ कि बुधवार से शुक्रवार यानी 13 से 15 फरवरी के बीच बीएसई सेंसेक्‍स 1500 अंक से ज्‍यादा उछला। हालांकि, अभी भी शेयर बाजार मंदडि़यों की पकड़ से छूटा नहीं है। बीएसई सेंसेक्‍स आज 18 फरवरी से शुरु हो रहे सप्‍ताह में 19 हजार अंक को पार कर बंद होता है तो यह फिर से तेजडि़यों के हाथ में चला जाएगा।

बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स इस सप्‍ताह हालांकि 18930 से 17523 और निफ्टी 5540 से 5123 अंक के बीच घूमते रहने की संभावना अधिक है। तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बीते सप्‍ताह सेंसेक्‍स ने 18142 की ऊंचाई को छूआ जो 17580 के स्‍तर से ऊपर है और अब नए स्‍तर जो देखने लायक होंगे वे 18274 से 18968 होंगे। सेंसेक्‍स के पुल बैक लेवल 18274, 18834 और 19395 अंक दिख रहे हैं। सेंसेक्‍स के लिए लोअर टॉप 18895 है। सेंसेक्‍स साप्‍ताहिक ब्रेकआउट होकर 19 हजार अंक से ऊपर बंद होता है तो यह मंदडि़यों की पकड़ से बाहर हो जाएगा। साप्‍ताहिक बंद शुक्रवार को 19 हजार से ऊपर होना चाहिए। बेहतर सेफ स्‍तर 19400 अंक से ऊपर बंद होना होगा। ऐसा होने पर न केवल सेंसेक्‍स की परीक्षा 21206 अंक पर होगी बल्कि यह अपने पिछले उच्‍च स्‍तर को पार कर सकता है।

अमरीका आर्थिक मंदी को रोकने के लिए अनेक कदम उठा रहा है लेकिन अभी तक सफलता के कोई संकेत नहीं दिख रहे। ब्‍याज दरों में तेजी से कटौती और 150 अरब डॉलर के रीलिफ पैकेज को मंजूरी दी गई है लेकिन फेडरल रिजर्व बैंक का मानना है कि मंदी की जोखिम अभी कायम है। सबप्राइम की वजह से वहां बैंकों को अभी भी 120 अरब डॉलर डूबत खाते में डालने पड़ सकते हैं। अमरीकी मंदी का डर जब तक समाप्‍त नहीं होगा विदेशी संस्‍थागत निवेशक भारतीय बाजार में भी खुलकर निवेश नहीं कर पाएंगे। हालांकि, वे यह मानते हैं कि एशिया में भारत और चीन उन्‍हें बेहतर रिटर्न देने वाले बाजार हैं।

इस बीच, फेडरल रिजर्व के अध्‍यक्ष बेन बर्नानके ने संकेत दिए हैं कि अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था में मंदी से निपटने के लिए भविष्‍य में ब्‍याज दरों में और कटौती की जा सकती है। बैंक की अगली बैठक 18 मार्च को होगी जिसमें आधा फीसदी ब्‍याज दर कम करने की घोषणा की जा सकती है। फेडरल रिजर्व सितंबर के मध्‍य के बाद से ब्‍याज दरों में 2.25 फीसदी की कमी कर चुका है और इस समय वहां तीन फीसदी ब्‍याज दर रह गई है। दूसरी ओर, बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्‍याज दर 0.5 फीसदी को बनाए रखा है।

प्राइमरी बाजार के निवेशकों के लिए बीते सप्‍ताह के पहले दिन ने उनकी उम्‍मीदों पर पानी फेर दिया। यह पानी फिरा रिलायंस पावर के आईपीओ की लिस्टिंग में। छोटे निवेशकों को रिलायंस पावर के शेयर 430 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से मिले थे, जिस पर लोगों की गणना थी कि हर आईपीओ अपने इश्‍यू प्राइस से डबल पर खुल रहा है तो वे इसमें भी चंद दिनों में डबल पैसा बना लेंगे, लेकिन हुआ सब उल्‍टा। रिलायंस पावर अपने इश्‍यू प्राइस से इस समय काफी नीचे चल रहा है। इस सप्‍ताह एक और बिजली कंपनी रुरल इलेक्ट्रिफिकेशन कार्पोरेशन यानी आरईसी का पब्लिक इश्‍यू आ रहा है। आरईसी सरकारी कंपनी है और 19 फरवरी को खुल रहे इस पब्लिक इश्‍यू में प्राइस बैंड 90 से 105 रुपए प्रति शेयर रखी गई है। कंपनी का इरादा 1405 से 1639 करोड़ रुपए जुटाने का है।

इस सप्‍ताह क्रिसिल, गुजरात गैस, वोकहार्ट, क्‍लेरियंट, एबीबी, कैस्‍ट्रॉल, लेनेक्‍स एबीएस के नतीजों पर नजर रहेगी। शेयर बाजार में फ्रंटरनर की भूमिका एल एंड टी और एचडीएफसी बैंक रहेंगे। इसके अलावा एसकेएफ इंडिया, भारती शीपयार्ड, सिटी यूनियन बैंक, आईवीआरसीएल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर्स, बीजीआर एनर्जी सिस्‍टम, जैन इरिगेशन, तमिलनाडु न्‍यूजप्रिंट, ऊषा मार्टिन, ग्रेफाइट इंडिया, एजिस लॉजिस्टिक्‍स, ब्‍लूस्‍टार और प्राज इंडस्‍ट्रीज के शेयरों पर निवेशक ध्‍यान दे सकते हैं।

February 17, 2008

इंग्‍लिश इंडियन क्‍लेय के निवेशक हुए चौपट!

stock इंग्लिश इंडियन क्‍लेय लिमिटेड 4.46 करोड़ रुपए की इक्विटी पूंजी, 82 फीसदी प्रमोटर होल्डिंग और आम जनता के पास आठ फीसदी यानी 3.52 लाख शेयर और 110 करोड़ रुपए के रिजर्व वाली कंपनी है। इस कंपनी के शेयर का भाव 18 जनवरी 2008 को 3582 रुपए था जो बाद में बाजार के गिरने पर 12 फरवरी 2008 को 1690 रुपए आ गया था। लेकिन 13 फरवरी को इस कंपनी के शेयर का भाव 187.95 रुपए ऊपर के सर्किट में देख निवेशक हैरान रह गए। बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज ने इस संबंध में नोटिस संख्‍या 20082007-37 (07/02/2008) और नोटिस संख्‍या 20080212-28 (12/02/2008) को पढ़ने पर शेयरधारकों के तो होश ही उड़ गए।

बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज के इन नोटिस के मुताबिक कंपनी के इनवेस्‍टमेंट डिविजन को डिमर्ज कर भारत स्‍टार्च प्रॉडक्‍ट्स लिमिटेड (बीएसपीएल) के साथ मिला दिए जाने से इंग्लिश इंडियन क्‍लेय के शेयर धारकों को प्रत्‍येक 19 शेयर पर भारत स्‍टार्च प्रॉडक्‍ट्स लिमिटेड के चार शेयर दिए जाएंगे। दूसरे शब्‍दों में डिमर्ज से पहले इंग्लिश इंडियन क्‍लेय लिमिटेड के सौ शेयर रखने वाले को डिमर्ज के बाद इंग्लिश इंडियन क्‍लेय लिमिटेड के सौ शेयर के अलावा भारत स्‍टार्च लिमिटेड के 21 शेयर पा सकेंगे। इस नोटिस के मुताबिक भारत स्‍टार्च के शेयर देश के किसी भी शेयर बाजार में लिस्‍टेड नहीं है और भविष्‍य में भी इस कंपनी की योजना अपने शेयर लिस्टिंग कराने की नहीं है। शेयर लिस्टिंग न कराने की योजना की वजह से डीबीएच इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और अथवा करुण कार्पेटस प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से शेयरधारकों से भारत स्‍टार्च प्रॉडक्‍ट्स लिमिटेड के शेयर एक हजार रुपए प्रति शेयर खरीदने का ऑफर किया जाएगा जो 18 फरवरी तक ही रहेगा।

बीएसई ने डिमर्ज के बाद इंग्लिश इंडियन क्‍लेय लिमिटेड के शेयरों का बेस प्राइस 179 रुपए तय कर पांच फीसदी की सर्किट सीमा लागू कर दी जिससे निवेशकों में रोष है और उन्‍हें तगड़ा झटका लगा है। डिमर्ज के पहले इंग्लिश इंडियन क्‍लेय लिमिटेड के सौ शेयर का बाजार भाव 1690 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से 1.69 लाख रुपए था लेकिन डिमर्ज के बाद इंग्लिश इंडियन क्‍लेय का प्रति शेयर 197.30 रुपए और भारत स्‍टार्च के 21 शेयर का भाव ऑफर के मुताबिक केवल 40730 रुपए (19730+21000) रह गया। कंपनी की 21 जनवरी 2008 को बोर्ड बैठक हुई जिसमें शेयर धारकों को प्रति छह शेयर पर एक शेयर 990 रुपए के प्रीमियम पर राइट शेयर देने का प्रस्‍ताव पारित किया गया। अब सवाल उठता है कि जब कंपनी के शेयर का भाव 197 रुपए है तो एक हजार रुपए प्रति शेयर के भाव पर राइट कैसे ऑफर किया जा रहा है। इंग्लिश इंडियन क्‍लेय लिमिटेड का डिमर्ज के बाद तय किया बेस प्राइस कैसे गलत तय हुआ और इसमें कहां चूक हुई इस ओर न तो बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज का ध्‍यान गया है और न ही सेबी का। ऐसे में आम निवेशक किसी की भूल या गलत गणना के शिकार होकर अपने को लुटा पिटा पा रहे हैं।

February 16, 2008

शेयर बाजार में लौटी चमक कायम रहेगी !

हितेंद्र वासुदेव
बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज का सेंसेक्‍स पिछले सप्‍ताह 17427।34 अंक पर खुला और नीचे में 16457.74 अंक तक आया। लेकिन बाद में यह सुधरकर ऊपर में 18142.92 अंक तक गया और बंद हुआ 18115.25 अंक पर। इस तरह साप्‍ताहिक आधार पर सेंसेक्‍स में 714 अंक की तेजी देखी गई। सेंसेक्‍स के 16457 से 18142 अंक तक का सफर उम्‍मीद की किरण दिखाता है लेकिन अभी इसके ऊपर बने रहने के लिए कई चीजों की जरुरत दिख रही है। अगले सप्‍ताह में रेसीसटेंस गेप 18274 से 18509 है जो शेयर बाजार के लिए खास महत्‍व रखता है। दैनिक चार्ट में ट्रेंड लाइन 21206 और 20985 पर बनाने पर रेसीसटेंस 18300 अंक पर दिखती है जिससे पता चलता है कि गेप 18274 से 18509 पर है।

बीते सप्‍ताह सेंसेक्‍स ने 18142 की ऊंचाई को छूआ जो 17580 के स्‍तर से ऊपर है और अब नए स्‍तर जो देखने लायक होंगे वे 18274 से 18968 होंगे। सेंसेक्‍स के पुल बैक लेवल 18274, 18834 और 19395 अंक दिख रहे हैं। सेंसेक्‍स के लिए लोअर टॉप 18895 है। सेंसेक्‍स साप्‍ताहिक ब्रेकआउट होकर 19 हजार अंक से ऊपर बंद होता है तो यह मंदडि़यों की पकड़ से बाहर हो जाएगा। साप्‍ताहिक बंद शुक्रवार को 19 हजार से ऊपर होना चाहिए। बेहतर सेफ स्‍तर 19400 अंक से अधिक पर बंद होना होगा। ऐसा होने पर न केवल सेंसेक्‍स की परी्क्षा 21206 अंक पर होगी बल्कि यह अपने पिछले उच्‍च स्‍तर को पार कर सकता है।

सेंसेक्‍स वेव विश्‍लेषण
वेव I-2594 से 3758
वेव II-3758 से 2904
वेव III- इंटरनल्‍स इस तर‍ह :
वेव 1- 2904 से 6249
वेव 2-6249 से 4227
वेव 3-4227 से 12671
वेव IV- 12671 से 8799
वेव V-इंटरनल्‍स इस तरह :
वेव 1-8799 से 14724
वेव 2-14724 से 12316
वेव 3-12316 से 21206.
वेव 4-21206 to 15532 (इस समय प्रगति पर)
इंटरनल्‍स ऑफ वेव 4
वेव A-21206 से 17203
वेव i-21206 से 2505
वेव ii-2505 से 20985
वेव iii-20985 से 15332
वेव iv-15332 से 18895
वेव v- 18895 से 16457
वेव B-16457 से 18142 (इस समय प्रगति पर)
यदि वेव v विफल होती है तो वेव A बदल जाएगी।

सप्‍ताह की रणनीति
शेयर बाजार में तेजी का मतलब नकद जनरेट होना है। ऊंचे स्‍तर को नगद जनरेट करने के लिए काम में लें। बाजार की ऊपर जाने पर कारोबारियों के सामने कारोबार की अच्‍छी संभावनाएं आएंगी। जो कारोबारी अपनी जोखिम का ढंग से प्रबंधन कर पाने के साथ स्‍टॉपलॉस को काम में लेंगे वे फायदे में रहेंगे। शेयर बाजार के 19 हजार से लेकर 19400 के ऊपर बंद होना जरुरी है और यह स्‍तर बाजार को मंदडि़यों के चंगुल से निकाल लेगा।

February 15, 2008

औरा हीलींग संभाल लेगा आपको शेयर बाजार में

गरिमा तिवारी
शेयर बाजार में इन दिनों चल रही उथल पथल के कारण हर निवेशक परेशान है, बाजार का कुछ भरोसा नही, कब लाल या कब हरा॥ इस कड़ी मे मै खुद परेशान हो रही थी।

सच कहूं तो मुझे ऐसा लगने लगा कि कहां हीलर थी, काम भी अच्छा खासा चल रहा था, और अब ये कहा फंस गई। इसी सोच मे थी कि एक क्लाईंट औरा रीडींग के लिए आया, उस को कलर यानी रंगों के बारे मे समझा रही थी, तभी खुद मेरे समझ मे आया कि अरे, शेयर बाजार हीलींग का असर क्‍यूं ना देखा जाए।

दरअसल, प्रभामंडल मे बाहरी स्तर पर हरा और उसके बाद लाल रंग का होना व्यवसाय के लिए अच्छा होता है, जिस किसी भी व्यवसायी के प्रभामंडल मे इन रंगों की कमी होती है, उसके व्यवसाय के घाटे में जाने कि स्थिति उत्पन्न होने लगती है।

कारण कि हरा रंग धन, वृद्धि, भाग्य आदि का प्रतीक है, और लाल रंग शौर्य, पराक्रम, और ताकत का प्रतीक है। हरा रंग जहां भाग्योदय में काम करता है, लाल रंग उसका साथ देकर भाग्य को मजबूत बनाता है। ऐसे योग के बाद इंसान भाग्य के पीछे नहीं बल्कि भाग्य इंसान के पीछे भागता है, और सभी तरह की विषम परिस्थितीयो में साथ देता है, संतुलित रखता है, और आगे बढ़ाता है। लाल रंग मनोबल को उच्च रखता है एवं हरा रंग अनुकूल परिस्थितियो का निर्माण करता है।

शेयर बाजार मे उतरने वालो के लिए भी यह सम्बल उतना ही जरूरी है जितना कि, किसी अन्य व्यवसाय में उतरने के लिए। बस फिर क्या था मै रोज बाजार मे आने के पहले मै अपना प्रभामण्डल बैलेंस करने लगी इसे सही दिशा प्रदान करती हूं फिर शेयर बाजार की तरफ रुख करती हूँ, और इसका परिणाम यह है कि जाने अनजाने मुझ द्वारा कि गई हर प्रकिया का परिणाम पोजीटिव आने लगा।
कई बार ऐसा भी हो रहा है कि शाम को बैलेंस बनाकर देखते वक्त सोचती रह जाती हूं अरे यह क्या॥ यह कैसे हुआ ? पर जो भी होता है अच्छा ही होता है। और कल शाम तो मै खुशी से उछल पड़ी इन कुछ दिनों में ना ही सिर्फ घाटा कवर हुआ, बल्कि उससे ऊपर मुनाफा भी कमाया।

तो दोस्तों शेयर बाजार मे निवेश करने से पहले कुछ बातो का ध्यान दे :
1. मार्केट मे होने वाली हलचल के लिए बिजनैस न्‍यूज जरूर पढ़े।
2.विश्लेषकों की राय ध्यान में रखें।
3. अच्छी कंपनियों की लिस्ट बनाकर, उनका तुलनात्मक अध्ययन करके निवेश करें।
बाकी औरा हीलींग है ना... सब सम्भाल लेगा। सपंर्क पता : avgroup@gmail.com

February 14, 2008

आतंक के खिलाफ युद्ध में पैसा ही पैसा

military सफल निवेशक वह है जो आने वाले समय के उन उद्योगों में निवेश करता रहे जहां रिटर्न अधिक मिलने की उम्‍मीद हो। शेयर बाजार में एक खास बात यह देखने को मिलती है की हर नई तेजी के समय पिछली तेजी की कुछ कंपनियां छूट जाती हैं और कुछ ऐसी कंपनियां अगली तेजी में चमक जाती है जिनके बारे में हर निवेशक अनुमान नहीं लगा पाता। यही हालत उद्योगों की होती है। मसलन कुछ अरसे पहले पावर सेक्‍टर की ओर किसी का ध्‍यान नहीं था लेकिन अब हर निवेशक पावर सेक्‍टर से जुड़ी कंपनियों के शेयर लपक रहा है। शेयर बाजार में अगली तेजी की अब जो लहर चलेगी उसमें दो उद्योग उभरकर आएंगे। ये हैं शीपयार्ड और हथियार उद्योग। भारत में अब तक हथियार उद्योग पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में रहा है लेकिन अब इसमें बढ़ती निवेश जरुरत की वजह से निजी क्षेत्र की भागीदारी शुरु हो रही है। समूची दुनिया में हथियार की बढ़ रही दौड़ से हथियार बनाने वाली कंपनियों में किया गया निवेश आने वाले दिनों में बेहद फायदेमंद होगा।

अर्नस्‍ट एंड यंग ने दुनिया भर में हो रहे सैन्‍य खर्च पर जारी अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2040 तक अमरीका दुनिया का सबसे बड़ा प्रतिरक्षा बाजार होगा। जबकि चीन एशिया में सेना पर खर्च करने वाला प्रमुख देश होगा जबकि इजरायल जो कि भारत का दूसरा सबसे बड़ा प्रतिरक्षा भागीदार है, के रुस से आगे निकल जाने की संभावना है। वर्ष 2010 तक भारत और रुस के बीच प्रतिरक्षा कारोबार दस अरब अमरीकी डॉलर का रहेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुनिया में मिलिट्री हार्डवेयर का आयात करने वाला सबसे बड़ा देश होगा। रिपोर्ट में उम्‍मीद जताई गई है कि भारत प्रतिरक्षा उत्‍पादन और घरेलू उत्‍पादन क्षमताओं को विकसित करने में आत्‍मनिर्भर होने की दिशा में आगे बढ़ेगा। अर्नस्‍ट एंड यंग के साझीदार कुलजीत सिंह का कहना है कि हथियार के मामले में भारत में चीन के बाद बड़ी कारोबारी संभावनाएं हैं। भारत का प्रतिरक्षा खर्च वर्ष 2004/05 से वर्ष 2007/08 के बीच प्रतिरक्षा खर्च की सालाना औसत वृद्धि दर आठ फीसदी रही। भारत का वर्ष 2007/08 में प्रतिरक्षा बजट 960 अरब रुपए का था जिसमें 44 फीसदी हिस्‍सा नए हथियार, प्रणालियां और इक्विपमेंट खरीदने के लिए रखा गया। भारत ने वर्ष 2005/06 में छह अरब डॉलर से अधिक के मिलिट्री हार्डवेयर आयात किए। भारत के बाद दूसरे विकासशील देशों में सबसे ज्‍यादा हथियार खरीदने वालों में सउदी अरब और चीन रहे। इन दोनों देशों ने दो से तीन अरब डॉलर के सौदे किए। रुस भारत को हर साल डेढ़ अरब डॉलर के हथियार बेचता है और इजरायल एक अरब डॉलर के हथियार बेचता है। यानी इजरायल रुस से ज्‍यादा पीछे नहीं है।

भारत प्रतिरक्षा के क्षेत्र में अपनी 70 फीसदी जरुरत के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है और केवल 30 फीसदी जरुरत निजी क्षेत्र के माध्‍यम से पूरी करती है। सरकार का इरादा वर्ष 2010 तक अपनी 70 फीसदी प्रतिरक्षा जरुरतों को घरेल स्‍त्रोतों से पूरा करने का है। देश में हथियारों के मामले में निजी क्षेत्र की भागीदारी को तेजी से बढ़ाया जा रहा है। देश में इस समय निजी क्षेत्र के लिए प्रतिरक्षा बाजार 70 करोड़ अमरीकी डॉलर का है। भारत में प्रतिरक्षा उद्योग में निजी क्षेत्र की बढ़ाई जा रही भागीदारी के बाद इस बाजार में बढ़ोतरी हो रही है। भारत मिलट्री हार्डवेयर के निर्यात पर भी ध्‍यान दे रहा है। इनमें रशियन-भारतीय क्रूज मिसाइल्‍स सहित राइफल्‍स, राकेट और राडार का निर्यात शामिल है। यह निर्यात पड़ौसी देशों के साथ तीसरी दुनिया के देशों को किया जाएगा। हालांकि, भारत हथियारों का निर्यात अपनी पसंद के देशों को ही करना चाहता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2006 में दुनिया भर का सैन्‍य खर्च 1204 अरब अमरीकी डॉलर रहा जो पूर्व वर्ष की तुलना में 3.5 फीसदी अधिक था। इस खर्च में अमरीका की हिस्‍सेदारी सर्वाधिक थी, जिसने आंतक के खिलाफ युद्ध के नाम पर बड़ी राशि खर्च की। अमरीका का यह खर्च इराक और अफगानिस्‍तान के पीछे हुआ है।

दो उद्योगपति तोड़ रहे हैं रिलायंस पावर !

anil ambani रिलायंस पावर लिमिटेड ने लिस्टिंग के साथ जिस तरह लाखों निवेशकों के सपनों पर पानी फेरा उसने कई बातों को जन्‍म दे दिया। दलाल स्‍ट्रीट में चल रही चर्चा पर भरोसा करें तो देश के एक बड़े औद्योगिक घराने और लंदन स्थित एक भारतीय उद्योगपति ने मिलकर अनिल अंबानी की इस कंपनी के शेयर को ढ़ेर किया है।

ये दोनों उद्योगपति कतई नहीं चाहते थे कि रिलायंस पावर ऊंचे भाव पर लिस्‍ट हो और अनिल अंबानी दुनिया के टॉप अमीर बन जाएं। अब जो ताजा चर्चा है उसके मुताबिक आने वाले दिनों में अनिल अंबानी की दूसरी कंपनियों के शेयरों को भी तोड़ा जाएगा। हालांकि, पिछले दिनों अनिल अंबानी की दूसरी कंपनियों मसलन रिलायंस एनर्जी, रिलायंस कैपिटल, आरएनआरएल आदि बुरी तरह घटे हैं।

कहा जा रहा है कि अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ लाने के साथ ही अनिल अंबानी कई उद्योगपतियों की आंख की किरकिरी बन गए। इसके अलावा उन्‍होंने जिन मोबाइल कं‍पनियों के साथ स्‍पैक्‍ट्रम के मसले पर लड़ाई लड़ीं वे भी उनके खिलाफ हो गईं। अनिल अंबानी ने रिलायंस पावर के बाद दूसरी कंपनियों के आईपीओ लाने की बात कहकर कुछ उद्योगपतियों की चिंता बढ़ा दी। हालांकि, यह बात सभी जानते हैं कि अनिल अंबानी कच्‍चे खिलाड़ी नहीं है और वक्‍त आने पर वे जवाब देना बखूबी जानते हैं।

रेटिंग कंपनियों ने लगवाया चूना !

rating शेयर बाजार की ताजा तगड़ी गिरावट के कारण कुछ भी रहे हो लेकिन एक सवाल सभी के सामने है कि पब्लिक इश्‍यू यानी आईपीओ को रेटिंग देने वाली रेटिंग कंपनियों की भूमिका पर कड़ी नजर रखी जाना जरुरी है। जब से रेटिंग कंपनियों को आईपीओ की रेटिंग करने को कहा गया है वे ज्‍यादातर कंपनियों को बढि़या रेटिंग दे रही हैं लेकिन लिस्टिंग और चलते इश्‍यू के समय इनके फेल हो जाने से रेटिंग कंपनियों की भूमिका भी शंका के घेरे में आ गई हैं। हालांकि, रेटिंग कंपनियां उनकी रेटिंग की गई कंपनियों के शेयरों के दाम प्राइस बैंड से नीचे जाने के अनेक कारण गिनवा देंगी और अपनी खाल बचाने में कामयाब हो जाएंगी। लेकिन इनसे यह तो पूछा जाना चाहिए कि जब आपने रिलायंस पावर को बढि़या रेटिंग दी तो क्‍या आपने ऐसी दूसरी पावर कंपनियों को ध्‍यान में रखा था जो देश या विदेश में शानदार कार्य कर रही हैं।

एनटीपीसी देश की सबसे बढि़या बिजली उत्‍पादक कंपनी है। इसके शेयर का दाम आज तक तीन सौ रुपए को पार नहीं कर सका, लेकिन केवल कागजों पर मौजूद रिलायंस पावर का प्राइस बैंड 450 रुपए को इन रेटिंग कंपनियों ने उचित बताया। रिलायंस पावर की तो किस्‍मत अच्‍छी थी जो 60 सैंकेंड में ही इतना भर गया कि बाद में सोचने के लिए कुछ बचा ही नहीं। इन्‍हीं रेटिंग कंपनियों ने वोकहार्ट हॉस्पिटल, एमार एमजीएफ और एसवीईसी कंसट्रक्‍शंस के आईपीओ की रेटिंग की। लेकिन ये कंपनियां बदनसीब रहीं और इन्‍हें बीच में से ही बाजार से हटना पड़ा यानी पब्लिक इश्‍यू टायं टायं फिस्‍स। हालांकि, इन कंपनियों ने अपनी प्राइस बैंड भी घटाई लेकिन ऐसा करते ही निवेशकों के मन में यह बात उठी की ये कंपनियां ऐसा क्‍यूं कर रही है। क्‍यों वैल्‍यूएशन से सस्‍ते दाम पर शेयर देने की तैयारी।

वोकहार्ट हॉस्पिटल ने अपने शेयर की प्राइस बैंड 280 से 310 रुपए से घटाकर 225 से 260 रुपए कर दी थी। एमार एमजीएफ ने अपने शेयर की प्राइस बैंड 610 से 690 रुपए से घटाकर 540 से 630 रुपए कर दी थी। एसवीईसी कंसट्रक्‍शंस ने अपने प्राइस बैंड 85 से 95 रुपए को घटाकर 80 से 90 रुपए कर दिया था। अब ये तीनों कंपनियां अपने आईपीओ के विफल होने के दुख के लिए बाजार को जिम्‍मेदार बताएंगी। लेकिन यह नहीं कहेंगी कि उन्‍होंने प्राइस बैंड निवेशकों को पूरी तरह निचोड़ने के हिसाब से तय किया और रेटिंग कंपनियों को कुछ दिखाई ही नहीं दिया।

मजेदार बात तो यह देखिएं कि एमआर दुबई स्थित कंपनी है और दुबई स्‍टॉक एक्‍सचेंज में इसकी लिस्टिंग 130 रुपए प्रति शेयर पर हुई, जबकि भारत में यह प्रति शेयर 610 से 690 रुपए वसूलना चाहती थी। निवेशक अब पहले से ज्‍यादा सचेत हैं और जब उन्‍हें पता है कि दुबई में इस कंपनी का शेयर काफी सस्‍ता मिल रहा है तो वे क्‍यों यहां इतना महंगा दाम चुकाएं। निवेशकों को यदि एमआर में रुचि होगी तो सीधे दुबई एक्‍सचेंज में शेयर नहीं खरीद लेंगे। इससे यह शक तो होता ही है कि एक कंपनी का शेयर दुबई में सस्‍ता मिल रहा है और भारत में महंगा, कहीं रेटिंग कंपनियां कुछ ले देकर विशेष मेहरबानी तो नहीं कर रही कार्पोरेट जगत का। यानी रेटिंग कंपनियां आम निवेशक को चूना लगवाने में अप्रत्‍यक्ष रुप से मदद तो नहीं कर रही। ये कंपनियां ही बांड, ऋण पत्र, सा‍वधि जमाओं जैसे दूसरे निवेश साधनों को भी रेटिंग देती हैं यानी वहां भी अब शंका के लिए जगह है। हालांकि, इन कंपनियों का कहना है कि वे वैज्ञानिक पद्धति और कई पहलूओं को ध्‍यान में रखने के बाद रेटिंग करती हैं लेकिन आम निवेशक तो उसे रेटिंग देने का पैसा नहीं चुकाता, तो ऐसे में हर कार्य पूरी ईमानदारी एवं निष्‍ठा से करने वाले हरिश्‍चंद्र आज मिलने मुश्किल हैं क्‍योंकि आखिरकार पैसा भी तो रेटिंग पानी वाली कंपनियां ही अदा करती हैं।

February 12, 2008

शेयर बाजार में सुधार 18 फरवरी से

शेयर बाजार में पिछले कई दिन से लगातार गिरावट आ रही है। ऐसे में शेयर बाजार के बड़े बड़े से खिलाडियों की सांसें ऊंची-नीची होना स्‍वाभाविक है लेकिन इस बार की गिरावट ने निवेशकों के बहुत बड़े वर्ग को प्रभावित किया है। सोमवार को बसंत पंचमी जो कि मां सरस्‍वती का विशिष्‍ट दिन और अबूझ मुहूर्त है, के दिन रिलायंस पावर का आईपीओ लिस्‍टेड हुआ और औंधे मुंह गिर पडा। अनिल अंबानी और रिलायंस में निवेश करने वाले लाखों लोगों को उम्‍मीद थी कि अब तक का सबसे बडा आईपीओ बाजार को भी सुधार देगा लेकिन भावनाओं के सामूहिक ह्रास का नतीजा यह हुआ कि लोगों का विश्‍वास डगमगा गया है।

किसी एक व्‍यक्ति की कुण्‍डली में मंगल के रोल के बारे में पहले बता चुका हूं लेकिन पूरे बाजार के सेंटीमेंट के बारे में बताने के लिए मण्‍डेन देखना होगा। यानि ग्रहों और नक्षत्रों की सार्वभौम स्थिति। मुझसे शेयर बाजार से जुडे एक सज्‍जन ने पूछा कि आगामी दो महीने में शेयर बाजार की क्‍या स्थिति रहेगी। इसी सवाल को मैंने प्रश्‍न का रूप दिया और प्रश्‍न कुण्‍डली बनाई। यह कुण्‍डली 12 फरवरी सुबह 12-17-58 बजे की है। इसमें वृष लग्‍न है और लग्‍न का अधिपति शुक्र लाभ के मालिक गुरू के साथ आठवें स्‍थान पर है। पांचवे भाव का अधिपति बुध नौंवे भाव में वक्री हुआ बैठा है। यानि अभी बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्‍टर का नंबर लगना बाकी है। हौंसले के तीसरे घर का मालिक भी बारहवें स्‍थान पर है और बारहवें स्‍थान का मालिक दूसरे स्‍थान पर है।

बाजार का लग्‍न आठवें स्‍थान में होने का मतलब हुआ कि अभी बाजार गुप्‍त क्रियाओं में जुटा है। इसके साथ लाभ स्‍थान के मालिक के जुड़े होने का मतलब है कि जो स्थिति अभी दिखाई दे रही है उससे उलट लाभ के बड़े सौदे भविष्‍य के गर्भ में है। मेरे हिसाब से बाजार की गिरावट बड़े लाभ के संकेत दे रही है। द्वादशेश मालिक दूसरे स्‍थान पर होने का मतलब है शीघ्र ही विदेशी निवेश फिर से शुरू होगा। इसमें प्रवासी भारतियों का बड़ा योगदान होने की संभावना है। क्‍योंकि लग्‍न का मालिक उसे देख रहा है। पांचवें भाव के अधिपति के नौंवे स्‍थान पर होने का अर्थ है कि अभी स्‍पेक्‍युलेशन बढ़ेगा और वक्री होने का अर्थ है कि कुछ समय के लिए फाइनेंशियल इंस्‍टीट्यूशन्‍स की स्थिति खराब होगी। बुध के मार्गी होने के साथ ही बाजार में तेजी से सुधार होगा। मार्केट की दोबारा पकड़ बनने का आधार इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और इनसे जुडी कंपनियां बनेंगी।

मेरा अनुमान है कि निवेशकों को बाजार में निवेश करना शुरू कर देना चाहिए। विशेषकर छोटे निवेशकों को क्‍योंकि 18 फरवरी से बाजार की दूसरी रंगत शुरू होगी। फिलहाल वित्‍तीय स्‍टॉक्‍स से दूरी बनाए रखें और समय आने पर उनमें निवेश आशातीत लाभ देगा। मित्र, सिद्धार्थ जोशी के ब्‍लॉग से साभार।

शेयर बाजार में मंगल का रोल !

astrology शेयर बाजार का सीधा संबंध मंगल से है। किसी व्‍यक्ति विशेष की कुण्‍डली में मंगल की सकारात्‍मक स्थिति उसे शेयर बाजार में लाभ दिलाती है। बारह भावों में से पांचवा भाव प्रारब्‍ध से जुड़ा होता है। पूर्व जन्‍म के कर्म हमें इस जन्‍म में अनायास लाभ दिलाते हैं। पांचवें भाव के साथ मंगल का साथ होने पर हौंसला और भाग्‍य आपस में जुड़ जाते हैं।

इस तरह शेयर बाजार के उतार चढ़ाव के बीच द्वीप की तरह खड़ा व्‍यक्ति आसानी से प्रेशर को झेल जाता है और उम्‍मीद के मुताबिक धन कमाता है। किसी व्‍यक्ति की कुण्‍डली में शेयर बाजार से पैसा कमाने का योग है अथवा नहीं यह देखने के लिए पहले उसके पांचवें भाव के सब लार्ड को देखने की आवश्‍यकता होती है। पांचवें भाव का सबलार्ड किसी भी तरह से मंगल से संबंध बनाता हो तो समझ लीजिए कि शेयर बाजार का काम किया जा सकता है।

इसके बाद नंबर आता है बाजार में टिके रहने का। इसके लिए जरूरी है कि जातक का सूर्य भी मजबूत हो यानि सूर्य लग्‍न, पांचवें या मंगल से अच्‍छी तरह संबंधित हो तो ऐसा व्‍यक्ति पूरे भरोसे के साथ अंत तक बाजार में टिका रहता है । एक दिन में कई बार सौदे करने वाले लोगों के लिए चंद्रमा को भी देखना पड़ता है ।

ऐसे लोगों का चंद्रमा बारहवें भाव से संबंध कर या तो पूरी तरह खराब हुआ होता है या फिर पांचवे भाव में ही बैठकर स्‍पेक्‍युलेटिव माइंड देता है! चंद्रमा की खराब स्थिति में व्‍यक्ति शेयर बाजार से कमाकर भी सुखी नहीं रह पाता है जबकि पांचवें भाव का चंद्रमा वाला व्‍यक्ति शेयर बाजार में आसानी से कमाता है और जल्‍दी बाहर आ जाता है।

शेयर बाजार में कौनसी कंपनियां मंगल के अधीन हैं इस बात का कोई लेन देन शेयर बाजार और मंगल से नहीं है लेकिन जातक की कुण्‍डली में मंगल का रोल अधिक महत्‍वपूर्ण है। शेयर बाजार की नेचर के संबंध में सबसे आम धारणा यही है कि यह एक बैटल फील्‍ड है यानि युद्ध का मैदान कब कौनसी गोली किधर से आकर लग जाएगी कोई नहीं जानता।

एक बार एक सटोरिए ने यह फिलासाफी मुझे समझाई थी। एनसीडीईएक्‍स के इस सटोरिए ने जिन्‍दगी में कई बार धक्‍के खाए। पांच सौ रुपए प्रतिमाह की नौकरी से जीवनयापन शुरू करने वाले इस बंदे ने रिजर्व मनी के रूप में साठ करोड़ रुपए से अधिक राशि जमा कर रखी है। जब इसके सितारे गर्दिश में थे तो इसे खुद पर भरोसा नहीं रहा। इसने मुझसे पूछा कि बरखुरदार क्‍या होगा मेरा। इस पर मेरा एक ही जवाब था कि समय तुम्‍हारा है युद्ध के मैदान में गिरते रहोगे लेकिन हारोगे नहीं। मेरे पास यह बात कहने का एक ही आधार था कि इस बंदे की कुण्‍डली का मंगल जबरदस्‍त था।

तो कौन है जिसे शेयर बाजार में उतरना चाहिए। शेयर बाजार में एक बार निवेश कर देना और सालों तक इंतजार करके बढ़े हुए रुपए पर गर्व करना आदर्श बात है इसे शेयर बाजार में घुसना नहीं कहा जा सकता। मैं बात कर रहा हूं ऐसे लोगों की जो एक दिन में या कुछ दिनों के अंतराल में अच्‍छा पैसा बना लेते है। इसी अच्‍छे के फेर में कईयों के वारे न्‍यारे हो जाते हैं और कुछ कंगाल।

तो चंद्रमा की स्थिति मजबूत हो, लग्‍न स्‍ट्रांग हो और मंगल को सपोर्ट करते हो तो शेयर बाजार में उतर जाना चाहिए। यह तो बहुत स्‍थूल विश्‍लेषण हुआ। चंद्रमा हमारे मन का कारक है।अगर यह कमजोर होता है तो शेयर बाजार के उतार चढ़ाव के बहाव के साथ बहने लगता है और सब गुड़ गोबर करा देता है

लग्‍न- आपने अगर अपनी कुण्‍डली देखी हो तो उसमें ऊपर एक संख्‍या लिखी होती है। किसी के एक तो किसी के पांच किसी के सात यह लग्‍न होता है। प्राय: मेष, सिंह और तुला लग्‍न के लोग शेयर बाजार के कारोबार के लिए उत्‍तम होते हैं अन्‍य लग्‍नों के लोग भी इसमें सफलता प्राप्‍त कर सकते हैं जबकि लग्‍न का अधिपति अच्‍छी स्थिति में बैठा हो। लग्‍न उत्‍तम होने पर आदमी स्‍पष्‍ट निर्णय कर पाता है और उस पर अडिग रह पाता है। लंबी रेस के घोडों में यह खासियत होती है कि वे जल्‍दी से घबराते नहीं है एक बार पिछड़ जाने पर अपने निर्णयों को बदलते नहीं है और रेस के अंत में अधिक प्रयत्‍न कर जीत जाते हैं।

इन्‍हें छोटे छोटे झगडों में जीता जा सकता है लेकिन युद्ध वे ही जीतेंगे। इसलिए लग्‍न बहुत बलशाली होना चाहिए। कोई भी लग्‍न बलशाली हो सकता है। बशर्ते उस पर किसी क्रूर ग्रह की नजर न पड़ रही हो और उसका मालिक बेहतर स्थिति में हो। अब मंगल सेनापति है। पहले लड़ने के लिए जोश देता है और फिर डटे रहने के लिए बाद में समय पर निकल जाने की बुद्धि भी। तो समझे मंगल का रोल। यह सबसे जरूरी है जो लोग शेयर बाजार को देखते हैं उन्‍हें पता है कि चंद्रमा, लग्‍न और मंगल में से सबसे अहम रोल किसका रहेगा। मित्र, सिद्धार्थ जोशी के ब्‍लॉग से साभार।

February 11, 2008

शेयर बाजार को चमत्‍कार की जरुरत

भारतीय शेयर बाजार अभी भी संभल नहीं पाया है और एक दिन की बढ़त जहां निवेशकों में आस दिखाती है वहीं दूसरे दिन की मंदी उन्‍हें अपने निवेश के बारे में फिर से सोचने पर मजबूर कर देती है। हालांकि, भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के जो आंकड़ें हाल में सामने आए हैं वे चिंताजनक नहीं है लेकिन बढ़ती मुद्रास्‍फीति को थामना कठिन नजर हो गया है। शेयर बाजार के बजट तक ही स्थिर होने की उम्‍मीद की जा सकती है लेकिन इसे ऊपर उठाने के लिए किसी चमत्‍कार की जरुरत है जिसका सभी निवेशक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

शेयर बाजार में चल रही गिरावट की वजह से प्राइमरी बाजार को भी तगड़ा झटका लगा है। जिसकी वजह से जुलाई 2006 के बाद पहली बार किसी कंपनी को अपने पब्लिक इश्‍यू को वापस लेने पर विवश होना पड़ा। वोकहार्ट हॉस्पिटल के बाद रीयल इस्‍टेट दिग्गज कंपनी एमार एमजीएफ को भी अपने आईपीओ को कमजोर समर्थन की वजह से वापस लेना पड़ा। फर्स्ट ग्लोबल के शंकर शर्मा का कहना है कि निवेशकों को डर है कि आईपीओ के शेयर बीएसई और एनएसई में लिस्टेड होने पर मंदी की चपेट में न आ जाएं। इसलिए वे ज्यादा प्राइस बैंड वाले आईपीओ से बच रहे हैं। निवेशकों का मूड देखते हुए आने वाले कई आईपीओ के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है।

वोकहार्ट हॉस्पिटल और एमार एमजीएफ वाकई अच्‍छी कंपनियां है लेकिन इनका प्राइस बैंड बाजार की उम्‍मीद से कहीं ऊंचा था। हालांकि इन दोनों कंपनियों ने अपने प्राइस बैंड घटाने के अलावा आईपीओ में पैसा लगाने के लिए आवेदन जमा कराने की तारीख तक बढ़ाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वोकहार्ट हॉस्पिटल ने अपने शेयर की प्राइस बैंड 280 से 310 रुपए से घटाकर 225 से 260 रुपए कर दी थी। एमार एमजीएफ ने अपने शेयर की प्राइस बैंड 610 से 690 रुपए से घटाकर 540 से 630 रुपए कर दी थी। प्राइस बैंड का मतलब होता कि जिस भाव पर निवेशक शेयरों के लिए आवेदन कर सकते हैं। जब कोई कंपनी अपना आईपीओ बाजार में लाती है तो उसका प्रति शेयर का मूल्य तकनीकी रूप से दस रुपए होता है। कारोबार और नेटवर्थ के आधार पर कंपनी को प्रीमियम और प्राइस बैंड तय करने का अधिकार होता है। आज 11 फरवरी को शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में सभी की नजरें रिलायंस पावर लिमिटेड पर है। यह कंपनी आज शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो रही है।

दुनिया के तीन बड़े निवेश गुरु में से एक जॉर्ज सोरास भी मार्क फैबर और जिम रोजर्स की तरह अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था के मंदी की चपेट में आने की बात कहते हैं। वे कहते हैं कि मौजूदा संकट 60 सालों से डॉलर को रिजर्व करेंसी मानकर किए जा रहे ऋण विस्‍तार के युग का अंत है। समय समय पर आने वाले वित्‍तीय संकट बूम बस्‍ट साइकिल के हिस्‍से थे। लेकिन मौजूदा संकट 60 साल के सुपर बूम की समाप्ति है। ग्‍लोबलाइजेशन ने अमरीका को दुनिया भर की बचत को चट करने में मदद की और वह अपने उत्‍पादन से ज्‍यादा खपत करते चला गया। सोरास का कहना है कि हालांकि, विकसित देशों में मंदी लगभग तय है लेकिन चीन, भारत और कुछ तेल उत्‍पादक देशों की स्थिति बिल्‍कुल विपरीत है इसलिए मौजूदा वित्‍तीय संकट वैश्विवक मंदी में तब्‍दील नहीं हो पाएगा।

आज से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 17966 अंक के ऊपर बंद होता है तो यह 18444 अंक तक जा सकता है। इसे नीचे में 17063 अंक पर स्‍पोर्ट मिलने की संभावना है। निफ्टी को 5011 अंक पर स्‍पोर्ट मिलने के आसार हैं। निफ्टी 5273 अंक पार करने पर 5433 अंक तक जा सकता है। पिछले सप्‍ताह सेंसेक्‍स में 805 अंक की धुलाई हुई और यह 17465 अंक पर बंद हुआ। तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बीएसई सेंसेक्‍स को एक चमत्‍कार की जरुरत है और वही इसे बुरी तरह टूटने के एक और राउंड से बचा सकता है। वे कहते हैं कि शेयर बाजार की स्थिति में बेहतर सुधार के लिए सेंसेक्‍स का 19 हजार अंक के ऊपर बंद होना जरुरी है। सेंसेक्‍स यदि जल्‍दी से 19 हजार अंक के ऊपर नहीं पहुंचता है और 16729 अंक के नीचे बंद होता है तो सेंसेक्‍स 15532 और 14800 से 14400 अंक तक जा सकता है।

इस सप्‍ताह कुछ कंपनियां शेयर विभाजन और लाभांश घोषित करेंगी। इनमें फिनिक्‍स मिल, बजाज हिंदुस्‍तान, कंटेनर कार्पोरेशन, भेल, क्‍युमिंस, दालमिया सीमेंट, इरकॉन इंटरनेशनल, कुलकर्णी पावर और ट्राइटोन कार्पोरेशन मुख्‍य हैं।

जिन कंपनियों के शेयरों पर इस सप्‍ताह निवेशक ध्‍यान दे सकते हैं वे है : इंटरनेशनल कॉम्‍ब्‍युजन, पुंज लायड, गोदावरी फर्टिलाइजर्स, जीवीके पावर, एलआईसी हाउसिंग, बारटोनिक्‍स इंडिया, इंडो टेक ट्रांसफारमर्स और रिलायंस नेचुरल रिसोर्स।

February 10, 2008

दो हाई प्रोफाइल मौत !

bse भारतीय शेयर बाजार में डेढ़ साल बाद दो हाई प्रोफाइल कंपनियों के आईपीओ की मौत हुई है। शेयर बाजार में चल रही ताजा गिरावट ने पहले वोकहार्ट हॉस्पिटल और अब रीयल इस्‍टेट की दिग्‍गज कंपनी एमार एमजीएफ को पब्लिक इश्‍यू यानी आईपीओ वापस लेने पर मजबूर कर दिया। इन कंपनियों को अपने शेयर खरीदने वाले ही नहीं मिले। यहां सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्‍यों हुआ, शेयर बाजार में मंदी ही इनके आईपीओ की मौत के लिए जिम्‍मेदार है। शेयर बाजार में अभी पहली बार मंदी आई हो, ऐसी बात नहीं है। मंदी और तेजी का चक्र चलता रहता है। लेकिन जिस तरह इन कंपनियों ने अपने आईपीओ की प्राइस बैंड यानी निवेशकों को अपने शेयर बेचने की कीमत रखी वह सही नहीं थी, नतीजन निवेशकों ने इन्‍हें खारिज कर दिया।

वोकहार्ट हॉस्पिटल के आईपीओ को केवल 20 फीसदी ही समर्थन मिला। रीयल इस्‍टेट दिग्गज कंपनी एमार एमजीएफ को भी यह समर्थन 38 फीसदी रहा। निवेशकों के इतने कमजोर समर्थन ने इन दोनों कंपनियों के लीड मैनेजरों को आईपीओ वापस लेने पर मजबूर कर दिया। फर्स्ट ग्लोबल के शंकर शर्मा का कहना है कि निवेशकों को डर है कि आईपीओ के शेयर बीएसई और एनएसई में लिस्टेड होने पर मंदी की चपेट में न आ जाएं। इसलिए वे ज्यादा प्राइस बैंड वाले आईपीओ से बच रहे हैं। निवेशकों का मूड देखते हुए आने वाले कई आईपीओ के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है।

वोकहार्ट हॉस्पिटल और एमार एमजीएफ वाकई अच्‍छी कंपनियां है लेकिन इनका प्राइस बैंड बाजार की उम्‍मीद से कहीं ऊंचा था। हालांकि इन दोनों कंपनियों ने अपने प्राइस बैंड घटाने के अलावा आईपीओ में पैसा लगाने के लिए आवेदन जमा कराने की तारीख तक बढ़ाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वोकहार्ट हॉस्पिटल ने अपने शेयर की प्राइस बैंड 280 से 310 रुपए से घटाकर 225 से 260 रुपए कर दी थी। एमार एमजीएफ ने अपने शेयर की प्राइस बैंड 610 से 690 रुपए से घटाकर 540 से 630 रुपए कर दी थी। प्राइस बैंड का मतलब होता कि जिस भाव पर निवेशक शेयरों के लिए आवेदन कर सकते हैं। जब कोई कंपनी अपना आईपीओ बाजार में लाती है तो उसका प्रति शेयर का मूल्य तकनीकी रूप से दस रुपए होता है। कारोबार और नेटवर्थ के आधार पर कंपनी को प्रीमियम और प्राइस बैंड तय करने का अधिकार होता है।

एमआर एमजीएफ के बारे में एक रोचक बात देखें कि एमआर दुबई स्थित कंपनी है और दुबई स्‍टॉक एक्‍सचेंज में इसकी लिस्टिंग 130 रुपए प्रति शेयर पर हुई, जबकि भारत में यह प्रति शेयर 610 से 690 रुपए वसूलना चाहती थी। निवेशक अब पहले से ज्‍यादा सचेत हैं और जब उन्‍हें पता है कि दुबई में इस कंपनी का शेयर काफी सस्‍ता मिल रहा है तो वे क्‍यों यहां इतना महंगा दाम चुकाएं। निवेशकों को यदि एमआर में रुचि होगी तो सीधे दुबई एक्‍सचेंज में शेयर नहीं खरीद लेंगे।

वोकहार्ट हॉस्पिटल और एमार एमजीएफ के आईपीओ की हुई दुर्दशा के बाद भी कुछ कंपनियां प्राइमरी बाजार में ताल ठोंक कर खड़ी हुई हैं। लेकिन इनके आईपीओ का क्‍या हाल रहेगा, यह तो शेयर बाजार का मूड तय करेगा। इस बीच, एसवीईसी कंसट्रक्‍शंस ने अपने प्राइस बैंड 85 से 95 रुपए को घटाकर 80 से 90 रुपए करने के साथ आईपीओ बंद होने की तारीख बढ़ाकर 13 फरवरी कर दी है। कंपनी को 40 लाख शेयरों के केवल 24 फीसदी हिस्‍से के लिए अब तक आवेदन मिल पाएं हैं। यानी इस आईपीओ को भी कोई चमत्‍कारिक निवेश ही बचा सकेगा।

फरवरी महीने में अब सात और कंपनियों के आईपीओ आने हैं उनमें खास नजर सरकारी कंपनी रुरल इलेक्‍ट्री‍फिकेशन कार्पोरेशन यानी आरईसी पर रहेगी। यह कंपनी 957 करोड़ रुपए के आईपीओ के साथ 19 फरवरी को पूंजी बाजार में उतरेगी। इस कंपनी ने अपने शेयर का प्राइस बैंड 90 से 105 रुपए प्रति शेयर तय किया है। इसके अलावा वस्‍कॉन इंजीनियरिंग 500 करोड़ रुपए, ऑयल इंडिया 500 करोड़ रुपए, जीएसएस अमरीका 150 करोड़ रुपए, ग्‍लोबस स्पिरिट 68 करोड़ रुपए, अल्‍कली मेटल 55 करोड़ रुपए और झवेरी फ्लैक्‍सो 50 करोड़ रुपए पूंजी बाजार से जुटाने के लिए इस महीने बाजार में उतर रही हैं। इन कंपनियों की वोकहार्ट हॉस्पिटल और एमआर एमजीएफ के नतीजों ने नींद उड़ा दी है।

आने वाले आईपीओ के भविष्‍य के बारे में एक विशेषज्ञ का कहना है कि यह बाजार के मूड पर निर्भर करता है। बजट आने वाला है और बाजार में स्थिरता आ सकती है और यह सुधर भी सकता है। मगर कंपनियों को अपने आईपीओ के दाम को लेकर काफी होमवर्क करना होगा। निवेशक अब सैकेंडरी मार्केट को देखकर ही आईपीओ को खरीदेगा।

February 08, 2008

रिलायंस पावर पर नजर !

anil भारतीय शेयर बाजार के लिए अगले सप्‍ताह का पहला सोमवार यानी 11 फरवरी 2008 खास होगा। शेयर बाजार ज्‍योंहि सुबह 9 बजकर 55 मिनट पर खुलेगा, सभी की नजरें इस पर लगी होंगी कि अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस पावर की लिस्टिंग किस भाव पर होती है।

रिलायंस पावर का जब पब्लिक इश्‍यू खुला हुआ था तब इसके हर शेयर का प्रीमियम 400 से 450 रुपए बोला जा रहा था। लेकिन, पब्लिक इश्‍यू बंद होने के बाद शेयर बाजार को जोरदार ग्रहण लगा और आज यह प्रीमियम घटकर 125 से 150 रुपए तक सिमट कर रह गया है। शेयर बाजार विश्‍लेषक कहते हैं कि हमें अब रिलायंस पावर के 125 से 150 रुपए प्रीमियम पर लिस्‍ट होने के आसार दिख रहे हैं और हर निवेशक को इसका लाभ उठाते हुए मुनाफा वसूली कर लेनी चाहिए। शेयर बाजार की स्थिति में खास सुधार नहीं होता और रिलायंस पावर का शेयर यदि 450 रुपए से नीचे जाता है तो इसे फिर से खरीदा जा सकता है। लेकिन पहला काम मुनाफा वसूली का होना चाहिए।

के आर चौकसी सिक्‍युरिटीज के आर एस अय्यर का कहना है कि रिलायंस पावर के 450 से 500 रुपए के आसपास लिस्टिंग होने की संभावना है। यह संभावना शेयर बाजार की खराब मूड और कम वोल्‍यूम को देखते हुए है। लेकिन इश्‍यू प्राइस से नीचे पर बेचने के लिए जल्‍दबाजी नहीं करनी चाहिए एवं बेहतर दाम के लिए इंतजार करना चाहिए। वे कहते हैं कि निकट भविष्‍य में इसका भाव 650 रुपए तक जा सकता है लेकिन इस सोमवार को नहीं।

बाजार की चर्चा पर भरोसा करें तो यदि रिलायंस पावर का शेयर सोमवार को छह सौ रुपए पर लिस्‍ट होता है तो एचएनआई कैटेगरी की इसमें बड़ी बिकवाली निकल सकती है। इस कैटेगरी के पास रिलायंस पावर के 2.28 करोड़ के करीब शेयर हैं। इस वर्ग के अधिकतर निवेशक मार्जिन फंडिंग वाले हैं और वे शुद्ध रुप से कारोबारी दृष्टिकोण अपनाएंगे।

रिलायंस पावर में रिटेल निवेशकों के पास 6.84 करोड़ शेयर हैं और बेहतर लिस्टिंग की दशा में यह वर्ग भी मुनाफा वसूली करना चाहेगा। अब बात करें क्‍यूआईबी यानी क्‍वालिफाइड इंस्‍टीट्यूशनल बॉडीज निवेशकों की तो वे सबसे ज्‍यादा चतुर होते हैं और जिस तरफ हवा बह रही होती है, उसी तरफ चल देते हैं। निवेश के समय इन्‍हें प्रति शेयर केवल 45 रुपए देने पड़े थे और ब्‍याज लागत 27 रुपए प्रति शेयर को जोड़ लें तो छह सौ रुपए की लिस्टिंग पर सबसे पहले मुनाफा काटने के लिए ये निवेशक ही दौड़ेंगे। इस तरह सोमवार को रिलायंस पावर के पांच करोड़ शेयर बिकने के लिए आ सकते हैं। रिलायंस पावर में मुनाफा वसूली के बाद 550 रुपए से ऊंचे भाव पर फिर से खरीद नहीं करनी चाहिए और कुछ दिन इंतजार करना उचित रहेगा क्‍योंकि इसमें खासी चंचलता दिख सकती है।

गौरतलब है कि रिलायंस पावर ने अपने इश्‍यू का भाव 450 रुपए प्रति शेयर तय किया था और 45 लाख शेयरधारियों के साथ लिस्टिंग होने वाले यह सबसे बड़ी शेयर होल्‍डर बेस कंपनी है। इसका इश्‍यू 70 गुना सब्‍सक्राइब्‍ड हुआ।

भारत मंदी की चपेट में नहीं: जॉर्ज सोरास

जॉर्ज सोरास भारतीय उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस एंटरटेनमेंट में तीन फीसदी हिस्‍सा दस करोड़ डॉलर में खरीदने की बात कहकर देश्‍ा के अखबारों के पहले पन्‍ने पर चमक रहे हैं। लेकिन 12 अगस्‍त 1930 को हंगरी के बुडापेस्‍ट में जन्‍मा और अब अमरीका में स्‍थाई जॉर्ज सोरास संभवत: निवेश जगत के सबसे कुख्‍यात खिलाड़ी हैं। उन्‍होंने कमाया खूब है लेकिन वे अपने बुरे कारनामों के लिए ज्‍यादा जाने जाते हैं। वे ऐसे खिलाड़ी हैं जो कंपनियों को नहीं, बड़ी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍थाओं को ठिकाने लगा देते हैं। वाह मनी के नियमित पाठक और मित्र अरबिंद सोलंकी का तीसरा लेख जो उन्‍होंने दुनिया के कुख्‍यात विख्‍यात सटोरिएं जॉर्ज सोरास के बारे में भेजा। आप भी पढ़े इस लेख को।

जॉर्ज सोरास ने पौंड में शार्ट पोजीशन खड़ी करके 1992 में बैंक ऑफ इंग्‍लैंड को तबाही के कगार पर पहुंचा दिया था और 1997 में पूर्वी एशियाई देशों की हालत खस्‍ता कर दी थी जिसने एशियन टाइगर कहलाने वाले देशों को चूहा बना दिया था। लेकिन सोरास बड़े दानी भी हैं, विभिन्‍न सामाजिक कार्यों के लिए वे चार अरब डॉलर यानी लगभग 16 हजार करोड़ रुपए दान दे चुके हैं।

यहां पर हम अमरीकी और वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था के बारे में जार्ज सोरास के दृष्टिकोण को रख रहे हैं। मार्क फैबर और जिम रोजर्स सहित दूसरे खिलाडि़यों की तरह सोरास भी मंदी में हैं। अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था की हाल की स्थिति को लेकर सोरास का कहना है कि मौजूदा वित्‍तीय संकट हाउसिंग मार्केट बबल के कारण उभरा है। दूसरे विश्‍व युद्ध के बाद ऐसे वित्‍तीय संकट अमरीका में चार से दस साल के अंतराल के बीच आते रहे हैं। लेकिन वर्तमान संकट की खास बात यह है कि यह 60 सालों से डॉलर को रिजर्व करेंसी मानकर किए जा रहे ऋण विस्‍तार के युग का अंत है। समय समय पर आने वाले वित्‍तीय संकट बूम बस्‍ट साइकिल के हिस्‍से थे। लेकिन मौजूदा संकट 60 साल के सुपर बूम की समाप्ति है।

सोरास का कहना है कि आसान ऋण से मांग उत्‍पन्‍न होती है जो बाद में ऋण उपलब्‍धता बढ़ा देती है। जब भी ऋण विस्‍तार खतरे में होता है वित्‍तीय प्राधिकार तरलता बढ़कार या अन्‍य तरीकों से अर्थव्‍यवस्‍था को फिर से पटरी पर ले आते हैं जिससे ऋण या क्रेडिट का विस्‍तार और तेज हो जाता है। लेकिन यह चक्र हमेशा नहीं चल सकता।

सोरास कहते हैं कि ग्‍लोबलाइजेशन ने अमरीका को दुनिया भर की बचत को चट करने में मदद की और वह अपने उत्‍पादन से ज्‍यादा खपत करते चला गया। साल 2006 में अमरीकी करेंट अकाउंट डेफेसिट, ग्रास नेशनल प्रोडक्‍ट (जीएनपी) के 6.2 गुने तक चला गया। वित्‍तीय संस्‍थानों ने नए नए इंस्‍ट्रुमेंट्स और आसान शर्तों के द्धारा ग्राहकों को और ऋण लेने के लिए प्रेरित किया और सरकार ने प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष (खतरे के समय सीमित हस्‍तक्षेप) रुप से इस प्रक्रिया को बढ़ावा दिया। साल 1980 के बाद से नियमों का लगातार सरलीकरण होता रहा जब तक कि वे खत्‍म नहीं हो गए। स्थिति यहां तक आ गई कि सरकार जोखिम नापने के लिए बैंकों के जोखिम प्रबंधन तंत्र पर आश्रित हो गई। रेटिंग एजेंसी भी यहां वहां मिलने वाली जानकारी से काम चलाने लगीं। इस तरह जिम्‍मेदारियों को नजरअंदाज करना चौंकाने वाला है। जो कुछ भी गलत हो सकता था, किया गया। नतीजा यह हुआ कि कोलेट्रल डेब्‍ट सहित वित्‍तीय व्‍यवस्‍था का हर हिस्‍सा अब संकट की गिरफ्त में है। ऋण विस्‍तार के बाद आवश्‍यक रुप से ऋण संकुचन (क्रेडिट कांट्रैक्‍शन) दौर आने चाहिए क्‍योंकि कुछ नए ऋण इंस्‍ट्रुमेंट्स या तरीके गलत हो सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

सोरास की राय में निवेशक सोचते रहे कि हर बार की तरह इस बार भी अमरीकी फैडरल रिजर्व मंदी को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेगा लेकिन अब फैडरल रिजर्व ऐसी स्थिति में नहीं है। कच्‍चे तेल, खाद्यान्‍न और अन्‍य कमोडिटी के भाव आसमान छू रहे हैं ऐसे में फैडरल रिजर्व को मुद्रास्‍फीति को भी काबू में रखना है। यदि फैडरल फंड को एक निश्चित स्‍तर से नीचे लाया जाता है तो डॉलर पर दबाव बनेगा और लंबी अवधि के बांड की यील्‍ड बढ़ जाएगी। ऐसा स्‍तर कहां है यह कहना मुश्किल है लेकिन जब यह स्‍तर आएगा तब अर्थव्‍यवस्‍था में जान डालने की फैड की क्षमता खत्‍म हो जाएगी। सोरास का कहना है कि हालांकि, विकसित देशों में मंदी लगभग तय है लेकिन चीन, भारत और कुछ तेल उत्‍पादक देशों की स्थिति बिल्‍कुल विपरीत है इसलिए मौजूदा वित्‍तीय संकट वैश्विवक मंदी में तब्‍दील नहीं हो पाएगा।

February 06, 2008

नाम बड़े और दर्शन छोटे

शेयर बाजार में अभी बीस दिन पहले त‍क हर शेयर विश्‍लेषक बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज में लिस्‍टेड कंपनियों के शेयरों के नए भाव लक्ष्‍य दे रहे थे और यह बता रहे थे कि जल्‍दी से खरीदों वरना वन टू का फोर हो गया तो आप रह जाओगे। लेकिन इन विश्‍लेषकों को यह नहीं पता था कि फोर तो जब होगा तब होगा पहले वन का चौथाई जरुर हो जाएगा। लेकिन अब इन विश्‍लेषकों ने अपने प्राइस टार्गेट घटाने शुरु कर दिए हैं और निवेशकों को फिर से यह बता रहे हैं कि आप इस कंपनी के शेयर खरीदें और इसके तो ले ही लें।

इन विश्‍लेषकों ने व्‍यावहारिक चीजों को दरकिनार कर अनाप शनाप प्राइस टार्गेट दिए जिसने होमवर्क न करने वाले निवेशकों को सबसे पहले डुबोया और भारतीय शेयर बाजार में सबसे ज्‍यादा वे ही निवेशक हैं जो खुद होमवर्क नहीं करते। वाह मनी लगातार कहता आ रहा है कि पैसा कमाने के लिए खुद भी होमवर्क करें और जिस कंपनी में निवेश करने जा रहे हैं उसके बारे में काफी कुछ पढ़ें। शेयर विश्‍लेषक तो इस साल बीएसई इंडेक्‍स के 35 से 40 हजार अंक तक पहुंच जाने की दावे के साथ भविष्‍यवाणी कर रहे थे। फरवरी में तो मानना था कि 25 हजार अंक से ऊपर इंडेक्‍स दिखेगा, लेकिन क्‍या हुआ। वाह मनी शुरु से कह रहा है कि वर्ष 2008 के आखिर तक ही बीएसई सेंसेक्‍स 25 हजार अंक पहुंचेगा, इससे पहले नहीं और अब ज्ञानी, महाज्ञानी विश्‍लेषकों ने भी अपने अनुमान कम कर दिए हैं। असल में किताबी चीजों से ज्‍यादा सफल व्‍यावहारिक चीजें होती हैं।

ब्रोकिंग हाउसों के इक्विटी विश्‍लेषकों ने विभिन्‍न कंपनियों के शेयरों के भाव आने वाले दिनों में जिन नई ऊंचाइयों पर पहुंचने के लिए जिस औजार को काम में लिया वह एम्‍बेडेड वेल्‍यू है। लेकिन इस औजार को काम में लेते समय विश्‍लेषक बाजार की बुरी दशा पर विचार करने से चूक गए। उन्‍हें यह औजार तो दिखा लेकिन यह नहीं कि कल हमारा बिगड़ने वाला है। यह हम मानते हैं कि एम्‍बेडेड वेल्‍यू कई जगह उपयोगी है। इसमें सम ऑफ द पार्टस पद्धति को काम में लिया जाता है। इसके तहत शेयर बाजार में लिस्‍टेड या अनलिस्‍टेड सब्सिडियरी कंपनियों की कीमत और कुछ संपत्तियों को ध्‍यान में रखना होता है। जरुरी नहीं कि ये संपत्तियां मुख्‍य कारोबार का हिस्‍सा हो ही। इस कीमत को कंपनी के शेयर भाव में शामिल कर लिया जाता है। लेकिन, शेयर विश्‍लेषकों ने इसका उपयोग कंपनियों के शेयरों को नई ऊंचाई के लक्ष्‍य दिखाने में किया।

एम्‍बेडेड वेल्‍यू के विचार को बढ़ावा देने में विदेशी संस्‍थागत निवेशकों और घरेलू निवेशकों की शेयरों के लिए जगी भूख जिम्‍मेदार है। ऐसे निवेशक शेयर खरीदने के लिए कोई भी बहाना खोजते रहते हैं। एम्‍बेडेड वेल्‍यू विचार ने पिछले कुछ महीनों में अनेक कंपनियों के शेयरों को उछाला है और यही वजह है कि कंपनियां अपनी सब्सिडियरी कंपनियों के पब्लिक इश्‍यू लाने के लिए आगे बढ़ीं। इसका उम्‍दा उदाहरण रिलायंस एनर्जी है जिसका भाव तकरीबन चार सौ फीसदी बढ़ गया था और सब्सिडियरी कंपनी रिलायंस पावर का पब्लिक इश्‍यू आया। इसी तरह, स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया और आईसीआईसीआई बैंक ने अपनी बीमा कंपनी और एसेट मैंनजमेंट सब्सिडियरी कंपनियों के लिस्टिंग के संबंध में कदम उठाए।

कुछ निवेश गुरु कहते हैं कि एम्‍बेडेड वेल्‍यू की धारणा बुरी नहीं है। कंपनियों के फंडामेंटल के संबंध में भी कोई समस्‍या नहीं है क्‍योंकि जो बातें सामने आई थी वे तो तीन से पांच वर्ष के लिए थीं लेकिन सटोरियों ने इसका उपयोग शेयरों के भाव उछालने में किया। दुनिया में जब लिक्विडिटी की स्थिति सुधरेगी तो यह विचार फिर अपना महत्‍व कायम करेगा।

February 05, 2008

जिम रोजर्स ने छोड़ा ठंडे अमरीका को

वाह मनी के नियमित पाठक और मित्र अरबिंद सोलंकी का दूसरा लेख जो उन्‍होंने दुनिया के एक और बड़े निवेश गुरु जिम रोजर्स के बारे में भेजा। आप भी पढ़ें इस लेख को।

हॉट कमोडिटी के लेखक और जाने माने कमोडिटी व इक्विटी विशेषज्ञ जिम रोजर्स ने अपना मेनहटन (न्‍यूयार्क) का पसंदीदा घर बेच दिया है। यह मकान उन्‍होंने 30 साल पहले एक लाख डॉलर में खरीदा था और बेचा है तकरीबन 1.57 करोड़ डॉलर में। हालांकि, यह कोई खास खबर नहीं है, खास तो यह है कि वे अब सिंगापुर आ गए हैं और उन्‍हें अपने देश अमरीका पर भरोसा नहीं रहा। वे मानते हैं कि अमरीका को मंदी से कोई नहीं बचा सकता।

अब आप कहेंगे कि सिंगापुर में बसने में क्‍या बड़ी बात हुई तो बता दूं कि रोजर्स स्‍थान परिवर्तन अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था के घटते दबदबे और चीन के बाजार के प्रति बढ़ते विश्‍वास के कारण कर रहे हैं। मतलब रोजर्स को अमरीका दमहीन और चीन दमदार नजर आ रहा है। ऐसा नहीं कि रोजर्स ने यह फैसला अचानक लिया है। वे सालों से चीन को लेकर बुलिश हैं और काफी पहले एक्‍शन सेंटर यानी चीन के नजदीक रहने की बात कह चुके हैं। इस नजरिए से देखें तो रोजर्स का फैसला काफी रणनीतिक लगता है। वे चीन की यात्रा मोटरसाइकिल पर कर चुके हैं और चीन को उन्‍होंने निकट से देखा है। यानी फैसला काफी होमवर्क करने के बाद।

अमरीकी बाजार को लेकर रोजर्स कितनी मंदी में है यह इसी बात से समझा जा सकता है कि उन्‍होंने सिटी बैंक और न्‍यूयार्क के कई इनवेटमेंट बैंकों में अपनी शॉर्ट पोजीशन पिछले दिनों की जोरदार गिरावट के बावजूद कवर नहीं की है। फैडरल रिजर्व द्धारा ब्‍याज दर में 75 अंक और फिर 50 अंक की कटौती के बारे में रोजर्स का कहना है‍ कि यह इस बात का संकेत हैं कि सेंट्रल बैंक राजकोषीय अनुशासन बनाने की इच्‍छुक नहीं है जिसकी अर्थव्‍यवस्‍था को बेहद जरुरत है।

रोजर्स का कहना है कि अर्थव्‍यवस्‍था में मंदी है, डॉलर गिर रहा है और मुद्रास्‍फीति बढ़ रही है। लेकिन स्थिति इससे भी ज्‍यादा खराब है। बेन बर्नाक भारी मात्रा में नोटों की छपाई करवा रहे हैं, वे और फेडरल रिजर्व नियंत्रण से बाहर हैं। संभवत: हम दूसरे विश्‍व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी मंदी की तरफ जा रहे हैं। बढ़ती मुद्रास्‍फीति के बीच फैड की लगातार लिक्विडिटी बढ़ाने की इच्‍छा से लगता है कि अमरीका 1970 के इतिहास को दोहराने वाला है। मतलब स्‍टैगफ्लेशन (मंदी और बढ़ती मुद्रास्‍फीति, दोनों एक साथ)? रोजर्स मानते हैं कि इसी की आशंका है और यही असली खतरा है।

वे मानते हैं कि अमरीका में मंदी का असर चीन पर भी पड़ेगा लेकिन सभी क्षेत्रों पर नहीं। इसलिए चीन में निवेश किया जा सकता है। रोजर्स चीन की अर्थव्‍यवस्‍था में करेक्‍शन की उम्‍मीद रखते हैं लेकिन यह भले के लिए होगा। वे चीन में निवेश करेंगे लेकिन उतावली के साथ नहीं, धीरे धीरे और चरणबद्ध ढंग से।

February 04, 2008

रिलायंस पावर की लिस्टिंग ट्रिगर होगी शेयर बाजार के लिए

अनिल धीरुभाई अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड की लिस्टिंग घरेलू शेयर बाजार के लिए शार्ट टर्म में अहम ट्रिकर साबित होगी। इस कंपनी की लिस्टिंग संभवत: 11 फरवरी को होगी। यह इश्‍यू 11560 करोड़ रुपए का रहा। भारतीय शेयर बाजार में 1 फरवरी के बाद आज पहले कारोबारी दिवस पर भी खासा सुधार देखने को मिला और बीएसई सूचकांक 18660 अंक पर बंद हुआ। हालांकि, इस सुधार के बावजूद रिलायंस पावर से रिफंड आने वाले एक लाख करोड़ रुपए बाजार में आने की संभावना कम है।

छोटे निवेशकों का मूड इस समय नया पैसा बाजार में लगाने का बिल्‍कुल दिखाई नहीं दे रहा, जब तक कि वे जहां फंसे हुए हैं, वहां से निकल नहीं जाते। हालांकि, भारतीय म्‍युच्‍यूअल फंड और बीमा कंपनियों के पास काफी पैसा है और नया पैसा भी आ रहा है। असल में इन कंपनियों को दिसंबर से मार्च के दौरान टैक्‍स सेविंग में होने वाले निवेश के तहत नया पैसा मिलता है। यदि यह पैसा शेयर बाजार में आता है तो बेहतर सुधार हो सकता है। शेयर बाजार में अगले सुधार के टिकने और मिडकैप व स्‍मॉल कैप कंपनियों के शेयरों में बढ़ोतरी से ही छोटे निवेशकों का बाजार के प्रति भरोसा लौट सकता है।

वाह मनी ने कुछ छोटे निवेशकों से बातचीत की। अमरीकी बाजार में मंदी के संकेत के बावजूद भारतीय शेयर बाजार के बेहतर रहने की उन्‍हें उम्‍मीद है। इस उम्‍मीद के कारण आप भी जानें। 1. बीमा कंपनियों को नया पैसा दिसंबर से मार्च के दौरान खूब मिलता है और इन कंपनियों का निवेश शेयर बाजार को उठाने में मदद करेगा। 2. घरेलू म्‍युच्‍यूअल फंडों के पास निवेश के लिए बड़ी राशि है। इन पर रिडम्‍पशन का दबाव न होने से यह पैसा बाजार में ही आएगा। 3. सरकार पेंशन फंड का पैसा शेयर बाजार में लाने की तैयारी कर रही है और इस संबंध में जल्‍दी ही संसद की अनुमति मिलने की संभावना है। 4. देश्‍ा की आर्थिक विकास दर अगले कई साल तक नौ फीसदी से ऊंची बनी रहेगी। 5. भारतीयों की बचत आदत बेहतर है और आय के दूसरे स्‍त्रोत के तहत लोगों में इक्विटी कल्‍चर बढ़ रहा है। अत: यह बचत शेयर बाजार में आएगी। 6. अमरीका में भले ही मंदी आए लेकिन भारत अपने आप में बड़ा बाजार है और इसे दूसरे बाजारों पर निर्भर रहने की अधिक जरुरत नहीं है। 7. सामाजिक ढांचा इस तरह का है कि लोग अपने कर्ज को चुकाने की हर संभव कोशिश करते हैं इसलिए अमरीका में जिस तरह सबप्राइम का मामला हुआ, उसकी संभावना यहां कम है। 8. देश का बुनियादी विकास तो अभी शुरु हुआ है इसलिए आर्थिक विकास में कहीं कमी दिखाई नहीं देगी। और अंत में 9. राजनीति में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार से हितैषियों के माध्‍यम से शेयर बाजार में गर्मी बनी रहेगी क्‍योंकि खुद नेताओं ने भी कमाई के लिए इसी को चुना है और वे भी नहीं चाहते कि बाजार में गिरावट आए।

February 01, 2008

इक्विटी बाजार में बड़ी तबाही की दस्‍तक !

birthday वाह मनी ब्‍लॉग का आज पहला जन्‍मदिन है। इस ब्‍लॉग के नियमित पाठक और मित्र अरबिंद सोलंकी ने वाह मनी की पहली वर्षगांठ पर विशेष रुप से यह लेख भेजा है जिसमें उन्‍होंने शेयर बाजार के खिलाडि़यों को चेताया है कि मौजूदा हालात इक्विटी बाजार में बड़ी तबाही की दस्‍तक है। कबीरा खड़ा बाजार में लिए लुकाटी हाथ, जो घर फूंके आपना चले हमारे साथ। कबीर को भी पता नहीं क्‍या हो जाता था, जब चाहे बाजार में खड़े हो जाते थे। किसी की खैर मांगेंगे तो बाजार में खड़े होकर और किसी को घर फूंक अपने साथ चलने को कहेंगे तो बाजार में खड़े होकर। कबीर का बाजार में खड़े होने का प्रेम समझ से परे है। अपने फक्‍कड़पन या विचारधारा के कारण कबीर, कम्‍युनिस्‍ट किस्‍म के लोगों में काफी लोकप्रिय हैं लेकिन जिस तरह से वे जब तब बाजार में खड़े हो जाते हैं या थे वे मुझे खांटी कैपिटिल्सिट लगते हैं। खैर! कबीर बाजार में खड़े हों या किसी मैदान में हमें ?

दरअसल इस लेख का कबीर से या उनके बाजार में खड़े होने से कोई संबंध नहीं है। यह लेख तो शेयर बाजार में खड़े लोगों के लिए है जो मक्‍खी की तरह पूरा गुड़ चट करने की कोशिश में हैं। उन्‍हें लग रहा है कि अनंतकाल तक गुड़ आता जाएगा, वे चट करते जाएंगे और उसमें चिपकेंगे नहीं। मै क्‍या, शायद कबीर भी बाजार में खड़े होकर ऐसे लोगों की खैर नहीं मांगते।

पिछले कुछ दिनों में हमने दुनिया भर के शेयर बाजारों में जोरदार गिरावट देखी है लेकिन लोग इन झटकों से सहमें नहीं हैं। सबको सब कुछ हरा हरा दिख रहा है, लो्ग अब भी रोज चांदी काटने की उम्‍मीद कर रहे हैं। वित्‍त मंत्री से लेकर बाजार के अधिकतर जानकार अर्थव्‍यवस्‍था के साथ साथ शेयर बाजार में गरमी के हामी हैं और लगातार हर गिरावट पर खरीद की सलाह दे रहे हैं। लेकिन यहां सवाल उठता है कि क्‍या गिरावट वास्‍तव में खरीद का सुनहरा अवसर है या यह भारी तबाही से पहले लगने वाला ?

मार्क फैबर की मानें तो यह तो भारी गिरावट की शुरुआत है। डिकपलिंग की थ्‍यौरी को नकारते हुए वे अमरीकी बाजार की हलचल का असर भारत और चीन के उभरते बाजारों पर पड़ने की बात करते हैं और अमरीकी बाजार के संबंध में फैबर का कहना है कि शेयर बाजार ओवर सोल्‍ड है इसलिए राहत देने के लिए एक रैली आ सकती है लेकिन यह रैली खरीद के लिए नहीं बल्कि अपनी पोजीशन काटने का अच्‍छा अवसर होगा।

फैबर अमरीका में 1973/74 की मंदी की बात करते हुए कहते हैं कि उस समय सभी ब्रोकर गिरावट के बावजूद तेजी में बने रहे लेकिन जब 1974 के अंत में मंदी ने पूरी तरह बाजार को ढक लिया तो कई ब्रोकरेज फर्म बाजार से बाहर हो गई और न्‍यूयार्क में कई ब्रोकरों को जीवनयापन के लिए टैक्‍सी ड्राइवर बनना पड़ा। उनका मानना है कि एक बार फिर वही समय आ रहा है।

मार्क फैबर का मानना है कि अधिकत लोग हाल की गिरावट के समय पूरी तरह निवेशित थे इसलिए वे पैसा गंवा चुके थे। अब बाजार को उबारने के लिए उनके पास पैसा नहीं हे। उनका कहना है कि हाल की गिरावट मार्केट इवेंट नहीं बल्कि एक इकॉनामिक इवेंट है। इस बारे में वे एक अन्‍य दिग्‍गज जॉर्ज सोरॉस से सहमत है। जिनका मानना है कि अमरीका में हालिया संकट मात्र हाउसिंग बूम के बाद आई गिरावट नहीं है बल्कि यह 60 साल से जारी क्रेडिट एक्‍सपेंशन (विस्‍तार) का अंत है जो कि डॉलर को रिजर्व करेंसी मानकर किया गया था।

फैबर के मुताबिक अमरीका की स्थिति काफी गंभीर है। पिछले कुछ दशकों की बात करें तो अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था ने 1974, 1981/82, 1987, 1990, 1998 और 2001 में मंदी के दौर देखे हैं। लेकिन कभी भी डिस्‍पोजेबल इनकम के प्रतिशत के रुप में हाउस होल्‍ड रियल इस्‍टेट असेट और हाउसहोल्‍ड इक्विटी असेट के मूल्‍य में एक सा‍थ कमी नहीं आई थी इसलिए बाजार को कुशन मिलता रहा। लेकिन आज कहानी अलग है शेयर और हाउसिंग, दोनों क्षेत्रों के टूटने से घरेलू संपत्ति पर दबाव पड़ा है। इस तरह की मंदी पहले नहीं देखी गई और इस स्‍तर पर तो कभी नहीं।