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March 31, 2008

खास उपयोगी नंबर आप सभी के लिए

विमान सेवाएं

Indian Airlines - 1800 180 1407
Jet Airways - 1800 22 5522
SpiceJet - 1800 180 3333
Air India -- 1800 22 7722
KingFisher - 1800 180 0101

बैंक

ABN AMRO - 1800 11 2224
Canara Bank - 1800 44 6000
Citibank - 1800 44 2265
Corporatin Bank - 1800 443 555
Development Credit Bank - 1800 22 5769
HDFC Bank - 1800 227 227
ICICI Bank - 1800 333 499
ICICI Bank NRI - 1800 22 4848
IDBI Bank - 1800 11 6999
Indian Bank - 1800 425 1400
ING Vysya - 1800 44 9900
Kotak Mahindra Bank - 1800 22 6022
Lord Krishna Bank - 1800 11 2300
Punjab National Bank - 1800 122 222
State Bank of India - 1800 44 1955
Syndicate Bank - 1800 44 6655

ऑटोमोबाइल

Mahindra Scorpio - 1800 22 6006
Maruti - 1800 111 515
Tata Motors - 1800 22 5552
Windshield Experts - 1800 11 3636

कंप्‍यूटर्स एवं आईटी

Adrenalin - 1800 444 445
AMD - 1800 425 6664
Apple Computers - 1800 444 683
Canon - 1800 333 366
Cisco Systems - 1800 221 777
Compaq - HP - 1800 444 999
Data One Broadband - 1800 424 1800
Dell - 1800 444 026
Epson - 1800 44 0011
eSys - 3970 0011
Genesis Tally Academy - 1800 444 888
HCL - 1800 180 8080
IBM - 1800 443 333
Lexmark - 1800 22 4477
Marshal's Point - 1800 33 4488
Microsoft - 1800 111 100
Microsoft Virus Update - 1901 333 334
Seagate - 1800 180 1104
Symantec - 1800 44 5533
TVS Electronics - 1800 444 566
WeP Peripherals - 1800 44 6446
Wipro - 1800 333 312
xerox - 1800 180 1225
Zenith - 1800 222 004

रेलवे

Indian Railway General Enquiry       131
Indian Railway Central Enquiry     131
Indian Railway Reservation     131
Indian Railway Railway Reservation Enquiry     1345 ,1335,1330
Indian Railway Centralised Railway Enquiry     1330/1/2/3/4/5/6/7/8/9

 कुरियर्स एवं पैर्क्‍स व मूवर्स

ABT Courier - 1800 44 8585
AFL Wizz - 1800 22 9696
Agarwal Packers & Movers - 1800 11 4321 Associated Packers P Ltd - 1800
21 4560 DHL - 1800 111 345 FedEx - 1800 22 6161 Goel Packers & Movers -
1800 11 3456 UPS - 1800 22 7171

होम अप्‍लायंसेस


Aiwa/Sony - 1800 11 1188
Anchor Switches - 1800 22 7979
Blue Star - 1800 22 2200
Bose Audio - 1800 11 2673
Bru Coffee Vending Machines - 1800 44 7171

Daikin Air Conditioners -1800 444 222

DishTV - 1800 12 3474

Faber Chimneys - 1800 21 4595

Godrej- 1800 22 5511

Grundfos Pumps - 1800 33 4555

LG - 1901 180 9999

Philips- 1800 22 4422

Samsung - 1800 113 444

Sanyo - 1800 11 0101

Voltas -180033 4546

WorldSpace Satellite Radio - 1800 44 5432

निवेश और वित्‍त

CAMS - 1800 44 2267
Chola Mutual Fund - 1800 22 2300
Easy IPO's - 3030 5757
Fidelity Investments - 1800 180 8000
Franklin Templeton Fund - 1800 425 4255

J M Morgan Stanley - 1800 22
0004 Kotak Mutual Fund - 1800 222 626

LIC Housing Finance - 1800 440005
SBI Mutual Fund - 1800 22 3040

Sharekhan - 1800 22 7500

Tata Mutual Fund- 1800 22 0101

ट्रावेल


Club Mahindra Holidays - 1800 33 4539
Cox & Kings - 1800 22 1235
God TV Tours - 1800 442 777
Kerala Tourism - 1800 444 747
Kumarakom Lake Resort - 1800 44 5030
Raj Travels & Tours - 1800 22 9900
Sita Tours - 1800 111 911
SOTC Tours - 1800 22 3344

हैल्‍थकेयर

Best on Health - 1800 11 8899
Dr Batras - 1800 11 6767
GlaxoSmithKline - 1800 22 8797
Johnson & Johnson - 1800 22 8111
Kaya Skin Clinic - 1800 22 5292
LifeCell - 1800 44 5323
Manmar Technologies - 1800 33 4420
Pfizer - 1800 442 442
Roche Accu-Chek - 1800 11 45 46
Rudraksha - 1800 21 4708
Varilux Lenses - 1800 44 8383
VLCC - 1800 33 1262

बीमा


AMP Sanmar - 1800 44 2200
Aviva - 1800 33 2244
Bajaj Allianz - 1800 22 5858
Chola MS General Insurance - 1800 44 5544

HDFC Standard Life - 1800 227
227 LIC - 1800 33 4433

Max New York Life - 1800 33 5577

Royal Sundaram-1800 33 8899

SBI Life Insurance - 1800 22 9090

होटल रिजर्वेशन

GRT Grand - 1800 44 5500
InterContinental Hotels Group - 1800 111 000

Marriott - 1800 22 0044
Sarovar Park Plaza - 1800 111 222

Taj Holidays - 1800 111 825

टेलीशॉपिंग

Asian Sky Shop - 1800 22 1800
Jaipan Teleshoppe - 1800 11 5225
Tele Brands - 1800 11 8000
VMI Teleshopping - 1800 447 777
WWS Teleshopping - 1800 220 777

अन्‍य


Domino's Pizza - 1800 111 123
Cell Phones
BenQ - 1800 22 08 08
Bird CellPhones - 1800 11 7700
Motorola MotoAssist - 1800 11 1211
Nokia - 3030 3838
Sony Ericsson - 3901 1111

शेयर लेवाली का बेहतर समय


भारतीय शेयर बाजार के लिए वित्‍त वर्ष 2007-08 का अंतिम सप्‍ताह अच्‍छा रहा और जिस तरह के भारी बिकवाली दबाव की जो आशंका थी, वह आशंका ही रह गई। अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था में आए मंदी के संकेत मिटे नहीं है बल्कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था जापान के बुरे हाल होने की खबरें बैचेनी बढ़ा सकती है। देश में भी महंगाई की दर ने सिर उठा लिया है बावजूद इसके पिछले शुक्रवार को बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज में 356 अंक का उछाल देखने को मिला, जो यह संकेत देता है कि बाजार एक बार फिर कई कारकों को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ता रहेगा। लोकसभा चुनाव के इस वर्ष में खुद सरकार भी नहीं चाहती कि शेयर बाजार में अब कोई बड़ी गिरावट आए जिससे उसे आक्रोश का सामना करना पड़े, लिहाजा बाजार का सेंटीमेंट सकारात्‍मक रखने के लिए अब अनेक घोषणाएं होती रहेंगी।

मोतीलाल ओसवाल सिक्‍युरिटीज के इक्विटी वाइस प्रेसीडेंट मनीष सोंथलिया का मानना है कि शेयर बाजार ने बॉटम से उठना शुरु कर दिया है और इसने उच्‍च मुद्रास्‍फीति को भी डिस्‍काउंट कर लिया है। अगले सप्‍ताह से शेयर बाजार में मजबूती दिखने की उम्‍मीद है एवं चौथी तिमाही के लिए आने वाले कार्पोरेट नतीजे इसे और बढ़ाएंगे। एसबीआई कैप सिक्‍युरिटीज के संस्‍थागत बिक्री के प्रमुख जिग्‍नेश देसाई का कहना है कि कमोडिटी के दाम नीचे आ रहे हैं जिससे अगले सप्‍ताह मुद्रास्‍फीति में कमी की आस है।

इस बीच, चुनाव आयोग ने अगस्‍त के बाद देश में आम चुनाव और चार राज्‍यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, उड़ीसा एवं सिक्‍कम में विधानसभा चुनाव की तैयारी दिखाई है। आम चुनावों को देखते हुए केंद्र सरकार यह कतई नहीं चाहती कि आर्थिक मोर्चे पर ऐसे कोई कदम उठाए जाएं जिससे उसे दिक्‍कतों का सामना करना पड़े बल्कि अब शेयर बाजार को भी गर्म बनाए रखने के लिए अनेक सकारात्‍मक घोषणाएं सुनने को मिल सकती हैं। वित्‍त मंत्री पी चिदंबरम कह ही चुके हैं कि आर्थिक विकास दर को बनाए रखने के साथ महंगाई को नियंत्रण में रखने के पूरे प्रयास किए जाएंगे जिसकी वजह से ही पिछले सप्‍ताह मुद्रास्‍फीति के जोरदार ढंग से बढ़ने के बावजूद शेयर बाजार में नया जोश दिखा।

अब बड़े और छोटे निवेशक शेयर बाजार में आए जोश को देखते हुए लौटने का मूड बना रहे हैं। वित्‍त वर्ष 2008-09 के पहले सप्‍ताह से घरेलू म्‍युच्‍यूअल फंड और विदेशी संस्‍थागत निवेशक शेयरों की खरीद की तैयारी कर चुके हैं। नए वित्‍त वर्ष में कैपिटल गुड्स ऑटोमोबाइल, फार्मा और आईटी क्षेत्र की कंपनियों में बड़ा निवेश दिखाई दे सकता है। नए सप्‍ताह में फार्मा के साथ आईटी शेयरों में वेल्‍यू बाईंग देखने को मिलेगी। चौथी तिमाही के नतीजों से पहले यह खरीद होगी। बाजार विश्‍लेषकों पर भरोसा करें तो चौथी तिमाही के नतीजे बेहतर रहेंगे। इसके बाद मानसून फैक्‍टर बाजार को चलाने के लिए भूमिका अदा करेगा।

असल में मौजूदा समय शेयरों में ट्रेडिंग का सही समय बन रहा है। हर गिरावट पर खरीद एवं हर बढ़त पर बाहर होना मौजूदा स्थिति में कमाई का उचित समय है। केवल आपको उस कंपनी का चयन करना है जहां कमाई का मौका मौजूदा है। फर्स्‍ट कॉल इंडिया इक्विटी एडवाइजर्स के कंट्री हैड डॉ. वीवीएलएन शास्‍त्री का कहना है कि अनेक कंपनियों की वेल्‍यूएशन खूब आकर्षक हैं और इसका लाभ म्‍युच्‍यूअल फंड और एफआईआई ले रहे हैं। अमरीका में ब्‍याज दर का स्‍तर वर्ष 2003 के स्‍तर पर पहुंच गया है। उभरते बाजारों में तेजी का दौर वर्ष 2003 से शुरु हुआ था। इस तरह मौजूदा भावों पर खरीद का अच्‍छा मौका सामने आया है।

बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 31 मार्च से शुरु हो रहे सप्‍ताह में 16863 अंक से ऊपर बंद होने पर 17188 अंक तक जा सकता है। बीएसई सेंसेक्‍स को 15883 अंक पर स्‍पोर्ट मिलेगा। निफ्टी 5083 अंक से ऊपर बंद होने पर 5188 अंक तक जाने की उम्‍मीद है। निफ्टी को स्‍पोर्ट 4782 अंक पर मिलेगा। तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि सेंसेक्‍स के लिए अगला ट्रिगर 16683 है। सेंसेक्‍स इस स्‍तर को पार करता है और 16923 अंक से ऊपर बंद होता है तो तेजी एकदम बढ़ेगी एवं सेंसेक्‍स के अगले स्‍तर 17177, 17947 और 18717 अंक होंगे। यानी शेयर सेंसेक्‍स में खासा सुधार और रौनक लौटने के दिन।

इस सप्‍ताह निवेशक कोटक महिंद्रा बैंक, लार्सन एंड टुब्रो, भेल, ओएनजीसी, गोदरेज इंडस्‍ट्रीज, लैनेक्‍स एबीएस, के एस ऑयल, एसकेएफ इंडिया, ग्‍लैक्‍सो स्मिथ फार्मा, लॉयड इलेक्ट्रिक, मारुति सुजूकी, एबीजी शीपयार्ड, सन फार्मा और क्‍युमिंस इंडिया पर ध्‍यान दे सकते हैं।

March 25, 2008

शेयर बाजार में तेजी तय नहीं


अमरीकी शेयर बाजारों में आए सुधार के साथ भारतीय शेयर बाजार की ताल मिलने से निवेशक खुश हैं। बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज ने कई दिनों बाद 16 हजार अंक का स्‍तर पार किया है। इस चमक के बाद अधिकतर शेयर विश्‍लेषक यह कह रहे हैं कि नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज का निफ्टी जल्‍दी ही 5050 अंक तक चला जाएगा और 5050 से 5100 के स्‍तर पर आने के बाद इसकी अगली मंजिल 5300 अंक होगी। इस मंजिल को पार करने के बाद भारतीय शेयर बाजार में तेजी पूरी तरह तय है और हम नई ऊंचाई की ओर बढ़ेंगे।

अचरज होता है कि दो दिन की चमक के बाद अब विश्‍लेषकों को सारे फंडामेंटल बदले हुए नजर आ रहे हैं। यह सही है कि जेपी मॉर्गन ने खस्‍ताहाल अमरीकी निवेश बैंक बेयर स्‍टीयर्न्‍स को खरीदने के लिए अपने पेशकश पांच गुना तक बढ़ाने की मंशा जताई है और अमरीका में घर खरीद के आंकड़े कुछ सकारात्‍मक आ रहे हैं। लेकिन इन दो वजहों से यह कतई तय नहीं किया जा सकता कि अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था के सुधरने के ठोस संकेत सामने आ गए हैं। यही वजह है कि घरेलू तकनीकी विश्‍लेषक बचने के लिए यह भी जोड़ रहे हैं कि निफ्टी का 4600 अंक का स्‍तर नहीं टूटना चाहिए। यदि यह टूटा तो एक बार फिर कबाड़ा हो सकता है। इससे यह तो साफ है कि कोई भी भविष्‍यवक्‍ता यह बताने की स्थिति में नहीं है भारतीय शेयर बाजार का रुख कैसा बना रहेगा।

शेयर विश्‍लेषकों को इस समय जल्‍दबाजी में कोई भविष्‍यवाणी करने से अच्‍छा है यह कहना चाहिए कि भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार का दिन भी मंगलकारी रहा तो सही होगा। जब तक अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था की काली छाया का संकट दूर नहीं हो जाता, छोटे निवेशकों को तेजी के नाम पर फिर से बाजार में खींचने की ऐसी लालची भविष्‍यवाणी नहीं होनी चाहिए। बेयर स्‍टीयर्न्‍स के लिए बेहतर पेशकश और घर खरीद के आंकड़े थोड़े सुधरने से जो ज्‍यादा जोश चढ़ा है वह ठीक नहीं है। इस समय पहले से ऊंचे स्‍तरों पर फंसे निवेशकों के पास नया पैसा है ही नहीं कि वे नया निवेश कर सके। मौजूदा चमक तेजी वाली चमक नहीं है बल्कि आम निवेशक को कुछ इंतजार करना चाहिए क्‍योंकि एक बात सदैव ध्‍यान रखें कि शेयर बाजार कहीं भागकर नहीं जा रहा। अति उत्‍साह में आकर बड़ी खरीद एक साथ न करें, हालांकि यह समय साहसियों के लिए निवेश का है, लेकिन हर गिरावट और हर हलचल पर नजर रखते हुए क्‍योंकि आपने यह तो सुना ही होगा कि चार दिन की चांदनी और फिर अंधेरी रात।

March 24, 2008

शेयर बाजार में बड़ा चमत्‍कार संभव नहीं


अमरीकी फेडरल रिजर्व की ब्‍याज दर में 0.75 फीसदी की कटौती से दुनिया भर के शेयर बाजारों में थोड़ी राहत महसूस की गई है लेकिन यह कदम शेयर बाजारों के लिए बड़ा चमत्‍कारी साबित नहीं होगा। भारतीय शेयर बाजार में असली समस्‍या लिक्विडिटी नहीं है बल्कि सेंटीमेंट की है। जब तक निवेशकों के सेंटीमेंट में परिवर्तन नहीं होगा, शेयरों में बड़े सुधार की उम्‍मीद नहीं की जानी चाहिए। हालांकि, इस सेंटीमेंट से उबरने में अभी भी चार से पांच महीने लग सकते हैं।

अमरीकी फेडरल रिजर्व की ब्‍याज दर कटौती पर शेयर बाजार में झूमने का यह समय नहीं है बल्कि निवेशकों को आने वाले दिनों में और बुरे समाचार सुनने पड़ सकते हैं। वॉल स्‍ट्रीट में पांचवें नंबर के मुख्‍य निवेश घराने बेयर स्‍टीयर्न्‍स का जिस तरह पतन हुआ है उससे सभी अचंभित है। जेपी मार्गन ने इस घराने को केवल 24 करोड़ डॉलर यानी एक हजार करोड़ रुपए से कम पर खरीद लिया है। इस सौदे के खिलाफ बेयर स्‍टीयर्न्‍स के शेयरधारी अदालत में गए हैं जिनका कहना है‍ कि उन्‍हें पूरी तरह अंधेरे में रखा गया है। अब सिंगापुर स्थित डीबीएस ने अपने ट्रेडर्स को लेहमैन ब्रदर्स के साथ कारोबार नहीं करने को कहा है। जब येन, अमरीकी डॉलर के मुकाबले नित नई ऊंचाई छू रहा है, जापान अपने सेंट्रल बैंक के प्रमुख के बारे में फैसला नहीं ले पा रहा है। यदि जापानी अर्थव्‍यवस्‍था में गिरावट के समाचार आते हैं तो यह सबसे बुरा समय होगा।

भारत में व्‍यापार घाटा दस अरब डॉलर महीना चल रहा है जो देश से वित्‍त प्रवाह को बाहर धकेल रहा है। इस वजह से रुपए में आकर्षण कम हो रहा है। दलाल स्‍ट्रीट में एक बड़े ऑपरेटर द्धारा चलाई जा रही पोर्टफोलियो मैनेजमेंट स्‍कीम बड़े रिडम्‍पशन का सामना कर रही है। साथ ही चार बैंक जिनमें से दो विदेशी हैं, उन निवेशकों से मार्जिन के रुप में लिक्विड स्‍टॉक की मांग कर रही हैं जो बाजार से पैसा उधार लेकर खेलते हैं। पूंजी बाजार नियामक जो भी कदम उठा रहे हैं उन्‍हें हताशा का कदम माना जा रहा है।

ब्रिक्‍स सिक्‍युरिटीज के इक्विटी प्रमुख आनंद टंडन का कहना है कि शेयर बाजार में अभी और गिरावट संभव है। मौजूदा अर्निंग के आधार पर बाजार का मूल्‍यांकन सही है लेकिन अर्निंग के संबंध में कुछ भी ठोस आंकडे नहीं है जिससे कमोडिटी और डेरीवेटिव्‍स में नुकसान है। विदेशी संस्‍थागत निवेशकों की बारे में देखें तो उनकी बिकवाली अधिक आक्रामक नहीं है। जनवरी से अब तक इन निवेशकों ने चार अरब डॉलर की बिकवाली की है जो वर्ष 2007 में इनकी निवेश राशि का केवल 20 फीसदी है। एफआईआई के पास इस समय 150 अरब डॉलर का पोर्टफोलियो है जिसमें से केवल तीन फीसदी को ही इन्‍होंने दूसरी जगह ट्रांसफर किया है। असली समस्‍या केवल सेंटीमेंट की है जिसे सुधरने में समय लगेगा।

सेंटीमेंट बदलने की वजह से शेयर ब्रोकर इस समय अपने निवेशकों को बाजार से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं। सेंसेक्‍स अपनी ऊंचाई से 30 फीसदी टूटा है जिससे केवल 47 कारोबारी दिवसों में आम निवेशक का दो वर्ष का निवेश पूरी तरह धुल गया है। हालांकि, म्‍युच्‍यूअल फंड के निवेशकों की ओर से रिडम्‍पशन दबाव नहीं देखा जा रहा है जो अच्‍छी खबर है। म्‍युच्‍यूअल फंड के प्रबंधक एनएवी स्थिर रखने की व्‍यूहनीति में लगे हुए हैं। क्रिस सिक्‍युरिटीज के निदेशक अरुण केजरीवाल का कहना है कि मौजूदा समय शेयरों में निवेश का सुरक्षित समय है। वे कहते हैं कि इस समय माहौल घबराहट का है जिसकी वजह से निवेशक कतरा रहे हैं। मोतीलाल ओसवाल सिक्‍युरिटीज के एक विशेषज्ञ का कहना है कि शेयर बाजार में गिरावट की वजह से निवेशक कमोडिटी बाजार की ओर मुड़ रहे हैं जबकि मौजूदा स्‍तर पर इक्विटी में वेल्‍यू दिखती है। लेकिन सेंटीमेंट ने सब कुछ चौपट कर दिया है।

बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स को 24 मार्च से शुरु हो रहे सप्‍ताह में 14544 अंक पर स्‍पोर्ट मिलने की उम्‍मीद है। यदि यह 15445 अंक से ऊपर बंद होता है तो इसके 15763 अंक तक जाने की आस है। निफ्टी 4711 अंक से ऊपर बंद होने पर 4823 अंक पहुंचने की उम्‍मीद है। इसे 4423 अंक पर स्‍पोर्ट‍ मिलने की उम्‍मीद की जा सकती है। कांग्रेस भारत अमरीका परमाणु करार पर अमल करने के पूरे मूड में दिखाई दे रही है और इस संबंध में वामपंथियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। साथ ही वित्‍त मंत्री पी चिदंबरम ने जिस तरह वामपंथियों को कोसा है उससे लगता है कि कांग्रेस और वामपंथियों के बीच संबंधों में दरार बढ़ सकती है जिससे बाजार पर नकारात्‍मक असर दिख सकता है। साथ ही वित्‍त वर्ष का अंत होने से निवेशक और बड़े आपरेटर घाटा बुक करते दिखाई देंगे।

इस सप्‍ताह रिलायंस इंडस्‍ट्रीज और मारुति सुजूकी फ्रंटरनर की भूमिका में दिखाई देंगे। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, श्रीरेणुका शुगर, बलरामपुर चीनी, त्रिवेणी इंजीनियरिंग, केसीपी शुगर, बजाज हिंदुस्‍तान, अशोक लैलेंड, गॉडफ्रे फिलिप, बारटोनिक्‍स, कोटक गोल्‍ड ईटीएफ, ज्‍योडिक क्‍लोदिंग, एआईए इंजीनियरिंग और अभिषेक मिल्‍स पर ध्‍यान दे सकते हैं।

March 20, 2008

साहसियों के लिए समय है निवेश का


दुनिया के सबसे अमीर आदमी वारेन बफेट की बात मानें तो शेयर बाजार की गिरावट हरेक को निवेश का मौका देती है जो भविष्‍य में आपको अमीर बनाती है। लेकिन दुनिया भर के शेयर बाजारों में इस समय जो गिरावट आई है उसमें चंद ही ऐसे लोग हैं जो निवेश कर रहे हैं। इसलिए यह भी तय है कि भविष्‍य में चंद ही लोग आपको दुनिया में सबसे अमीर दिखाई देंगे। यह आम कहावत है कि मंदी में शेयर खरीदो और तेजी में बेचो। लेकिन ऐसा कहने वाले भी यह नहीं कर पाते।

अमरीकी फैड रिजर्व ने ब्‍याज दर में 0.75 फीसदी और डिस्‍काउंट रेट में भी इतनी ही कमी की है। इससे खबर से अमरीकी शेयर बाजारों में खासा सुधार हुआ। इस उम्‍मीद पर भारतीय शेयर बाजारों को एक बड़े तेज गेप के साथ खुलना स्‍वाभाविक था लेकिन यह ऊंचाई अंत तक कायम नहीं रही और बीएसई सेंसेक्‍स 161 अंक बढ़कर 15 हजार के नीचे ही बंद हुआ। अनेक भारतीय इक्विटी विश्‍लेषक यह कह रहे हैं कि अब मंदी पूरी हो चुकी है और शेयर बाजार फिर से तेजी की ओर मुड़ेगा। लेकिन इसका भरोसा तो खुद अमरीकियों को भी नहीं है। आज भी मार्क फैबर, जिम रोजर्स, जॉर्ज सोरास और वारेन बफेट तक अमरीकी बैंक के इस कदम के बाद यह नहीं कह पा रहे हैं कि करेक्‍शन का दौर खत्‍म हो गया तो चंद घंटे पहले तक बाजार के सत्‍यानाश की भविष्‍यवाणी करने वाले आज सुबह से यह राग अलाप रहे हैं कि अब फिर तेजी। कई विश्‍लेषक धड़ाधड़ यह सिफारिश कर रहे थे कि अमुक कंपनियों के शेयर खरीदों, हमारे लक्ष्‍य यह हैं। लेकिन वे खुद बिकवाल थे। यानी आम निवेशक को शेयर दिलवाओं और खुद बेच दो।

मार्क फैबर अमरीका में 1973/74 की मंदी की बात करते हुए कहते हैं कि उस समय सभी ब्रोकर गिरावट के बावजूद तेजी में बने रहे लेकिन जब 1974 के अंत में मंदी ने पूरी तरह बाजार को ढक लिया तो कई ब्रोकरेज फर्म बाजार से बाहर हो गई और न्‍यूयार्क में कई ब्रोकरों को जीवनयापन के लिए टैक्‍सी ड्राइवर बनना पड़ा। उनका मानना है कि एक बार फिर वही समय आ रहा है। फैबर के मुताबिक अमरीका की स्थिति काफी गंभीर है। पिछले कुछ दशकों की बात करें तो अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था ने 1974, 1981/82, 1987, 1990, 1998 और 2001 में मंदी के दौर देखे हैं। लेकिन कभी भी डिस्‍पोजेबल इनकम के प्रतिशत के रुप में हाउस होल्‍ड रियल इस्‍टेट असेट और हाउसहोल्‍ड इक्विटी असेट के मूल्‍य में एक सा‍थ कमी नहीं आई थी इसलिए बाजार को कुशन मिलता रहा। लेकिन आज कहानी अलग है शेयर और हाउसिंग, दोनों क्षेत्रों के टूटने से घरेलू संपत्ति पर दबाव पड़ा है। इस तरह की मंदी पहले नहीं देखी गई और इस स्‍तर पर तो कभी नहीं।

खैर ! हम बात कर रहे थे वारेन बफेट के उसूल की। शेयर बाजार में मौजूदा गिरावट का मुख्‍य कारण अमरीका का सबप्राइम संकट है लेकिन इस संकट में जहां कई साफ हो गए वहीं कुछ बनेंगे भी। यह समय नई खरीद का है जहां आप वे ब्‍लूचिप शेयर खरीद सकते हैं जो केवल दो महीने पहले खरीद क्षमता से बाहर हो चुके थे। लेकिन शर्त यह है कि इस निवेश पर मलाई पाने के लिए कुछ साल इंतजार करना पड़ेगा और खरीद करने से पहले पढ़ाई भी कि आप किस कंपनी के शेयर किन किन आधारों पर खरीद रहे हैं।

जबरदस्‍त तेजी के समय जो निवेश यह मान रहे थे कि शेयर बाजार में अब पैसा लगाना उनके बस की बात नहीं, असल में अब यह उनके ही बस में है। यह उन निवेशकों के लिए भी मौका है जिन्‍होंने पहले ऊंचे भावों पर शेयर खरीदे हैं। मान लीजिए ए कंपनी के शेयर यदि आपने पहले सौ रुपए में खरीदा है और आज उसका भाव 50 से 55 रुपए है तो आपको उसमें और खरीददारी करनी चाहिए। जब आपने कुछ तथ्‍यों के आधार पर इस कंपनी का शेयर सौ रुपए में खरीदा और वे तथ्‍य जस के तस है तो फिर 50 से 55 रुपए में खरीदने में क्‍या खराबी है। इससे दो फायदे हैं एक तो शेयर की खरीद कीमत कम हो गई और दूसरे नजरिए से देखें तो जब यह 50 से 55 रुपए में खरीदा गया शेयर थोड़ा भी बढ़ता है तो आप उस बढ़त का लाभ इस सस्‍ते वाले शेयर को बेचकर ले सकते हैं। कई बार भाव औसत देखने होते हैं और कई बार हर खरीद के भाव अलग अलग। यह बाजार के रुझान पर निर्भर करता है।

मंदी के इस दौर में शेयर खरीदते समय यह जरुर ध्‍यान रखें कि पहली पसंद ब्‍लूचिप कंपनियों को ही बनाएं क्‍योंकि जब भी बाजार में मंदी को लगाम लगती है तो सबसे पहले इन्‍हीं कंपनियों के शेयर चलते हैं और बड़े देसी व विदेशी निवेशक इनमें ही खरीद करते हैं। मिडकैप और स्‍मालकैप कंपनियों के शेयर चलने में वक्‍त लगता है इसलिए पहली खरीद ब्‍लूचिप कंपनियों के शेयरों की ही करें। मसलन रिलायंस इंडस्‍ट्रीज का शेयर जो जनवरी में 3200 रुपए पर बिक रहा था अब 2159 रुपए में मिल रहा है। तो फिर देर किस बात की बनाइए ऐसी ब्‍लूचिप कंपनियों की सूची और हर गिरावट पर करें खरीद भविष्‍य के वारेन बफेट बनने के लिए।

सामान्‍य प्रभामंडल से मिलता है लाभ शेयर बाजार में


गरिमा तिवारी
कुछ दिनो से ऐसा लग रहा है कि शेयर बाजार को अब सिर्फ कोई चमत्कार ही बचा सकता है । हर निवेशक अब किसी ना किसी चमत्कार की आशा मे लगा हुआ है। हे! प्रभु अब बहुत हो गया इंतजार, हमारी नैया जल्दी पार लगाओ।

चमत्कार के इस सिलसिले मे मै याद दिला दूं कि पिछले लेखों मे मैने औरा हीलींग और पिरामीड हीलींग का जिक्र किया था, जिन दोस्तों ने उन पर अमल किया होगा, अपने बैंक खाते में हुए चमत्कार का अनुभव जरूर कर रहे होंगे। इसके लिए मुझे शुक्रिया कहने की जरूरत नही है, आपके चेहरे पर आई खुशी ही मेरे लिए बहुत होगी।

जो बन्धु चमत्कारो के उन सिलसिलो से दूर रह गए होंगे, उन्हें भी निराश होने की जरूरत नहीं है। मै उसी श्रृंखला को एक बार फिर से समझाने की कोशिश कर रही हूं, ताकि आप बिन किसी शक के औरा हीलींग और पिरामीड हीलींग का लाभ उठा सके। वैसे तो आजकल यह दोनों शब्द काफी प्रचलित हैं। बच्चे बूढे सभी इससे लाभ ले रहे हैं, हां बस शेयर बाजार मे इसका उपयोग ब‍हुत कम है, लेकिन वक्त के साथ लोगों मे इसकी जागरुकता जरूर फैलेगी यह मैं यकीन के साथ कह सकती हूं।

अब कुछ काम की बाते करें...
क्या आप जानते हैं किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए क्या क्या चाहिए, विशेष रूप से शेयर बाजार में सफलता हासिल करने के लिए ?
मेरे ख्याल से आप सभी को इसका जवाब पता होगा।
1. उचित मेहनत
2. उचित दिशा मे की गई मेहनत
3. भाग्य

हम सभी निवेशक अपने अपने हिसाब से मेहनत तो कर ही रहे हैं, और हम में से अधिकांश उचित दिशा में मेहनत कर रहे हैं। इसके बावजूद कई बार हमको हमारे निवेश में निराशा हाथ लगती है, इसका सीधा सा कारण कुछ हद तक हमारे भाग्य का हमारे साथ नहीं होना है।

अब ऊर्जा चिकित्सा की दुनिया में भाग्य का साथ नहीं होने का सीधा तात्पर्य यह लगता है कि उस अमुक वक्त पर इंसान के प्रभामंडल में किसी ना किसी वजह से असहजता उत्पन्न हो गई है। जिसके कारण उक्त इंसान को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रभामंडल मे आई इस असहजता का निवारण कभी कभी स्वयं ही हो जाता है या फिर वक्त के साथ घटता बढ़ता रहता है, या फिर धीरे-धीरे बढ़ता ही जाता है।

ऐसा किन कारणो से होता है उसका उल्लेख फिर कभी करेंगे अभी सिर्फ निवारण की बात करते हैं। उसी असहजता के निवारण के लिए मैने औरा हीलींग तत्पश्चात पिरामीड हीलींग का उल्लेख किया था। औरा हीलींग का सीधा असर आपके प्रभामंडल पर होता है एवं पिरामीड हीलींग उसको बरकरार रखने में सहायक होता है। इस कडी मे अभी और कई पहलू हैं जिनका उल्लेख मै समय-समय पर करती रहूंगी1 फिलहाल आप एक औरा हीलर और एक पिरामीड हीलर को पकड़िए और अपने प्रभामंडल को सामान्य बनाए ताकि शेयर बाजार में लाभ कमा सकें, मै भी चलती हूँ, अपना बैंक बैलेंस बढ़ाने...।

March 14, 2008

पिरामिड करता है शेयर बाजार में फायदा



गरिमा तिवारी
मार्केट के उतार चढ़ाव मे जब अफ़रा तफ़री का माहौल है, कई निवेशक टूट चुके हैं, किधर जाना है, कहा जाना है क्या करें? समझ में नहीं आ रहा है.. तो निवेशक के सामने चुपचाप किस्मत ठोकने कि सिवाय कोई नया रास्ता नहीं बचता।

इस दुखदायी स्थिति से बचने के लिये मै लाई हूं कुछ नए कुछ पुराने तरीके

1. बाजार के बारे मे पूरी जानकारी रोज रखे। मीडिया का भरपूर प्रयोग करें।
2. अपने तरीके से अपने पसंदीदा शेयर की पूरी जानकारी इकट्ठा करें।
3. हर उतार चढ़ाव पर खरीद बेच का भरपूर फ़ायदा उठाएं।
4. अगर आप छोटी अवधि के निवेशक हैं तो भले ही लॉस बुक करें पर अपनी लिक्विडिटी बढ़ाए।
5. मार्केट के उतार मे शार्ट सेल का लुत्फ़ उठाइए।
ये सब तो आप जानते हैं तो मै किसलिए आई हूं.. लीजिए मेरे बताने का कारण है.. जो आप नहीं जानते या प्रयोग में नहीं लाते।

शेयर मार्केट के साथ पिरामिड का उपयोग

चौक गए ना? भला ये भी होता है, शेयर बाजार मे पिरामिड का प्रयोग!!!

तो मै कहती हूं कि हां होता है... कैसे?
मै बताती हूं।

सबसे पहले आप एक हरे रंग का पिरामिड बनवाइए, उसके अन्दर पीले रंग के कागज टुकड़े पर लाल रंग के कलम से अपने अगले महीने का टार्गेट लिखिए।
अब उसको किसी पिरामिड हीलर से ऊर्जान्वित करवाएं और कंप्‍यूटर के पास रख लीजिए।
रोज सुबह मार्केट शुरु होने के पहले पिरामिड के सामने बैठकर पिरामीड ऊर्जा के सम्पर्क में आइए और शाम को पिरामिड ऊर्जा के साथ दिन भर के हुए उथल-पथल का आंकलन करें, मेरा 80 फीसदी दावा है कि आप फ़ायदे में रहेंगे, अगर आपने सही तरीके से काम किया है तो।

अब आप कहेंगे कि सही तरीके से काम करने से तो यूं भी सफ़ल होते... इसमे पिरामिड की क्या भूमिका है ?
वास्तव में पिरामिड ऊर्जा का काम ही है.. सही ऊर्जा देकर सही मानसिक तरंग देना... तभी तो आप मार्केट चढे़ या उतरे, फ़ायदे मे रहेंगे।

नोट- टार्गेट उतना ही रखें जितना सम्भव हो, ये ना कि आप महीने भर का टार्गेट सौ फीसदी लिख लें फ़िर तो आपका अविश्वास ही पिरामिड तरंगों को नकारात्मक प्रभावित करेगा। पिरामिड की तरंगे क्या काम करेंगी ?

डिस्क्लेमर- यह प्रयोग मै खुद कर रही हूँ और यह प्रयोग सफ़ल भी है। सपंर्क पता : avgroup@gmail.com

March 10, 2008

शेयर बाजार में देखो और प्रतीक्षा करो


अमरीका में मंदी की बढ़ती जा रही आशंका ने अब समूची दुनिया के बाजारों में अपना रंग दिखाना शुरु कर दिया है। साथ ही भारत-अमरीका के बीच परमाणु संधि को लेकर कांग्रेस व वामपंथियों के बीच खटराग बढ़ने से अगले सप्‍ताह शेयर बाजार की स्थिति और बिगड़ सकती है। ऐसे में निवेशकों के लिए बेहतर होगा कि वे देखो और प्रतीक्षा करो की नीति अपनाए। पिछले सप्‍ताह बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज साढ़े नौ फीसदी और नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज का निफ्टी नौ फीसदी टूटा।

शेयर विश्‍लेषकों का कहना है कि बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज का बैरोमीटर सेंसेक्‍स अपने स्‍पोर्ट स्‍तर 16100 को तोड़ चुका है। अब सेंसेक्स के लिए अगला समर्थन स्तर जनवरी के निचले स्तर 15300 के करीब है। अगर सेंसेक्स इस स्तर को भी तोड़ कर नीचे जाता है तो बाजार में भारी तबाही मच सकती है। शेयर बाजार में मौजूदा स्थिति अगले तीन से चार महीने तक ऐसी ही बनी रहेगी। हालांकि, लंबी अवधि में भारतीय शेयर बाजार में किया गया निवेश फायदेमंद रहेगा। इस बीच, शेयर बाजार में आंतककारियों का पैसा होने की बात की जांच की संभावना है, हालांकि इस मसले पर सरकार में मतभेद रहे हैं और आतंककारियों का पैसा लगा होने की कोई पुष्टि नहीं हो पाई है। लेकिन जांच की संभावना की खबर से शेयर बाजार को और गिराकर आम निवेशक के हाथ से क्रीम कंपनियों के शेयर खींच लेने की चाल भी चली जा रही है।

बाजार के इस अनिश्चित माहौल में निवेशकों को नए निवेश से बचना चाहिए। उम्मीद की जा रही है कि अगले दो-तीन महीने तक बाजार में इसी तरह की अनिश्चिताएं बनीं रहेंगी। बाजार में तरलता की काफी कमी है। वॉल्यूम बिल्कुल ही नहीं दिख रहे हैं। बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स के इस सप्‍ताह 14444 से 16187 और निफ्टी के 4262 से 4837 अंक के बीच घूमते रहने की संभावना है। तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि सेंसेक्‍स में 17228 अंक के स्‍टॉप लॉस के साथ 16297 से 16905 अंक पर बिकवाली करें। सेंसेक्‍स की परीक्षा 15532 से 15183 अंक पर होगी।

सेबी के नए चेयरमैन सी बी भावे ने पहली बोर्ड बैठक में निवेशकों के फायदे के लिए कंपनियों के पब्लिक इश्‍यू, राइट इश्‍यू के ड्रॉफ्ट प्रॉस्‍पेक्‍ट्स फाइल करने के शुल्‍क, वेंचर कैपिटल फंड के पंजीकरण शुल्‍क में जोरदार कमी जैसे कदम उठाए हैं। लेकिन सैकंडरी बाजार की बी ग्रुप और एस ग्रुप की कंपनियों में सर्किट लिमिट को लेकर जो व्‍यवहार किया जा रहा है, उसमें सुधार की तत्‍काल जरुरत है। शेयर बाजार में अनेक ऐसे ग्रुप काम कर रहे हैं जो बी व एस ग्रुप के शेयरों के थोड़ा सा बढ़ने पर टी ग्रुप में डलवा देते हैं जिससे आम निवेशक इन शेयरों से छूट नहीं पाते और बेमौत मरते हैं। तेजी के समय जब भी इन ग्रुपों की कंपनियों में दो दिन 20 फीसदी का ऊपरी सर्किट लगता है तो तीसरे दिन सर्किट सीमा कम कर दी जाती है या टी ग्रुप में डाल दिया जाता है। जबकि मौजूदा मंदी में गिरते शेयरों को थामने के लिए क्‍यों नहीं सर्किट सीमा पांच या दो फीसदी की जा रही है।

दलाल स्‍ट्रीट के खिलाडि़यों का कहना है कि अमरीका में एक के बाद एक आ रही खराब खबरों ने पूरी दुनिया के बाजारों को झकझोर कर रख दिया है। अमरीका मंदी की चपेट में जाता नजर आ रहा है। अब इस बात को जॉर्ज बुश प्रशासन ने भी स्‍वीकार कर लिया है। अमरीका में जनवरी में 22 हजार और फरवरी में 63 हजार लोगों ने अपनी नौकरी खोई है। अब यह माना जा रहा है कि फैडरल रिजर्व अप्रैल अंत तक ब्‍याज दर को काफी घटाकर केवल दो फीसदी या इससे कम कर देगा। इससे पहले 18 मार्च को फैडरल रिजर्व की बैठक होने वाली है। इस बैठक में ब्याज दर में 0.75 फीसदी की कटौती हो सकती है। लेकिन बार-बार इस तरह की कटौती भी उचित नहीं है।

इस बीच, भारत में मुद्रास्फिति की दर पांच फीसदी के ऊपर पहुंच चुकी है ऐसे में रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दर में कटौती करना और भी मुश्किल हो सकता है। यानी फिर से लिक्‍विडिटी बढ़ाने के कदम पर रुकावट आ सकती है। भारत-अमरीका के बीच परमाणु संधि पर एक बार फिर वामपंथियों ने तलवारे निकाल ली हैं। वामपंथियों का कहना है कि इस मुद्दे पर सरकार आगे बढ़ी तो हम अपना समर्थन वापस ले लेंगे। इसका मतलब यह हुआ कि समय से पहले आम चुनाव।

10 मार्च से शुरु हो रहे सप्‍ताह में फ्रंटरनर की भूमिका में लार्सन एंड टुब्रो और भारती एयरटेल रहेंगे। इसके अलावा टेक महिंद्रा, भारत फोर्ज, सन फार्मा, गांधी स्‍पेशल टयूब, थामस कुक, सीएमसी, ब्‍लू स्‍टार, बीजीआर एनर्जी सिस्‍टम, डेकोलाइट सिरामिक्‍स और टाइम टेक्‍नो के शेयरों पर निवेशक ध्‍यान दे सकते हैं।

March 04, 2008

दलाल स्‍ट्रीट खतरे में !


भारतीय शेयर बाजार की पहचान दलाल स्‍ट्रीट अब खतरे में है। शेयर बाजार में आई लगातार गिरावट से घट रहे कारोबार की वजह से यह स्‍ट्रीट खतरे में नहीं है क्‍योंकि ऐसे कई उतार चढ़ाव इस स्‍ट्रीट ने अनेक बार देख लिए हैं। लेकिन मुंबई महापालिका के ए वार्ड के कांग्रेसी कार्पोरेटर विजय धुल्‍ला चाहते हैं कि इस स्‍ट्रीट का अब नाम बदल दिया जाए। यदि ऐसा हुआ तो बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेज का पर्याय दलाल स्‍ट्रीट को लोग नक्‍शे में ढूंढते रहेंगे। दलाल स्‍ट्रीट का नाम आते ही लोगों के मन मस्तिष्‍क में शेयर बाजार के टावर का नक्‍शा उभर आता है।

मुंबई महापालिका के कांग्रेसी कार्पोरेटर विजय धुल्‍ला की इच्‍छा है कि दलाल स्‍ट्रीट का नाम 25 वर्ष तक यहां ब्रोकर के रुप में काम कर चु‍के नागरमल शराफ गली कर दिया जाए। धुल्‍ला ने दो महीने पहले ए वार्ड की बैठक में नाम बदलने संबंधी जो प्रस्‍ताव रखा उसे उसी दिन पारित करा लिया। उन्‍होंने दो सप्‍ताह पहले इस आवेदन को मुंबई महापालिका के अन्‍य कार्पोरेटरो की अंतिम मुहर लगवाने के लिए भेजी है। सूत्र बताते है कि यह तो एक औपचारिकता है अन्‍यथा आम तौर पर स्‍थानीय वार्ड समिति द्धारा पारित लगभग हरेक प्रस्‍ताव को महापालिका पारित करती ही है।

विजय धुल्‍ला का कहना है कि मारवाड़ी सम्‍मेलन ने मुझे दलाल स्‍ट्रीट का नाम बदलकर नागरमल शराफ की याद में रखने के लिए के लिए पत्र लिखा था। शेयर बाजार में 25 साल तक काम करने वाले एक व्‍यक्ति को यह सच्‍ची श्रद्धांजलि होगी। मैंने वार्ड की समिति में स्‍ट्रीट का नाम बदलने का प्रस्‍ताव रखा और वह उसी दिन पारित हो गया।

इस बीच, बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज के सीईओ ने नाम बदलने को लेकर अपनी आपत्ति भेजी है। पत्र में कहा गया है कि यह एक संवेदनशील मुद्दा है और इससे निवेशकों एवं ब्रोकरों की भावनाओं को ठेस लगेगी। दलाल स्‍ट्रीट अजोड नाम है और यह शेयर बाजार का पर्याय बन चुका है। यह नाम दुनिया भर में जाना जाता है। नाम बदलने से निवेशकों को दिक्‍कत होगी। कुछ शेयर ब्रोकरों का कहना है कि नागरमल शराफ का योगदान अहमियत रखता है लेकिन दलाल स्‍ट्रीट दुनिया भर में भारतीय शेयर बाजार का पर्याय बन गई है। कुछ ब्रोकर कहते हैं कि नाम बदलने से क्‍या फर्क पड़ेगा, लोग तो इसे दलाल स्‍ट्रीट ही पुकारते रहेंगे।

बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज के कार्पोरेट मामलों के प्रमुख कल्‍याण बोस का कहना है कि मीडिया में पूंजी बाजार से जुड़ी रिपोर्ट में बाजार का उल्‍लेख दलाल स्‍ट्रीट के नाम से होता है। दलाल स्‍ट्रीट भारतीय पूंजी बाजार का पर्याय है। इस गली ने भारतीय पूंजी बाजार की वृद्धि और विकास देखे हैं। जब आप देश के शेयर बाजार का इतिहास लिखते हैं तो दलाल स्‍ट्रीट नामक दो शब्‍द नहीं छोड़ सकते। यह भारतीय नाम है, विदेशी नहीं तो फिर इसे बदलने की क्‍या जरुरत है।