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April 27, 2008

श्री अष्‍टविनायक खरीदें, लक्ष्‍य 557 रुपए : नेटवर्थ

श्री अष्‍टविनायक सिने विजन लिमिटेड के शेयर खरीदना फायदेमंद रहेगा। यह राय है नेटवर्थ स्‍टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड की। श्री अष्‍टविनायक सिने विजन लिमिटेड फिल्‍म निर्माण और वितरण कारोबार से जुड़ी प्रमुख कंपनी है। इस कंपनी ने सात फिल्‍में बनाई हैं जिनमें से आखिरी पांच फिल्‍मों ने बॉक्‍स ऑफिस पर तहलका मचाया है। यह ऐसा अनोखा संयोग है कि यह कंपनी लगातार सफल फिल्‍में दे रही हैं। फिल्‍म वितरण कारोबार की बात करें तो यह मुंबई क्षेत्र में अगुवा है और इसका फिल्‍म चयन अच्‍छा है जिनकी सफलता का अनुपात बेहतर है।

अगले दो साल में इसका इरादा 13 फिल्‍मों का निर्माण करने का है जिसके लिए इसने बड़े कलाकारों के साथ मशहूर निर्देशकों के साथ करार किए हैं। कंपनी ने अब दिल्‍ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब क्षेत्र में अपने वितरण विस्‍तार के साथ विदेशी वितरण के अधिकार लेने की योजना बनाई है।

कंपनी ने फिल्‍म निर्माण और वितरण कारोबार के विस्‍तार के लिए जरुरी धन हाल में एफसीसीबी के माध्‍यम से जुटाया है। यह राशि 342.5 लाख डॉलर है। नेटवर्थ स्‍टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड का मानना है कि वित्त वर्ष 2008-10 तक कंपनी की आय और शुद्ध लाभ में सालाना औसत वृद्धि दर 113.4 फीसदी और 83 फीसदी रहेगी। वित्त वर्ष 2010 की प्रति शेयर आय यानी ईपीएस के आधार पर श्री अष्‍टविनायक सिने विजन लिमिटेड के शेयर का लक्ष्‍य 557 रुपए रखा है। यह इस समय 410 रुपए में मिल रहा है।

नेटवर्थ स्‍टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड का अनुमान है कि 2007-08 मे श्री अष्‍टविनायक सिने विजन लिमिटेड की शुद्ध बिक्री 91.5 करोड़ रुपए रहेगी जो वित्त वर्ष 2006-07 की 96 करोड़ रुपए से कम रहेगी। शुद्ध लाभ का अनुमान 14.1 करोड़ रूपए की तुलना में 15.5 करोड़ रुपए लगाया गया है। कंपनी की शुद्ध बिक्री वित्त वर्ष 2008-09 में 251.5 करोड़ रुपए, वित्त वर्ष 2009-10 में 417.2 करोड़ रुपए पहुंचने की धारणा है। जबकि, शुद्ध लाभ का अनुमान 27.4 करोड़ रुपए और 52 करोड़ रुपए है। चालू वित्त वर्ष में प्रति शेयर आय यानी ईपीएस 27.3 रुपए और अगले वित्त वर्ष में 39.8 रुपए प्रति शेयर पहुंचने की संभावना है।

श्री अष्‍टविनायक सिने विजन में प्रमोटरों की शेयर हिस्‍सेदारी 48.55 फीसदी है, जबकि कार्पोरेट होल्डिंग 36.39 फीसदी है। संस्‍थागत निवेशकों के पास 0.54 फीसदी शेयर हैं तो आम जनता के पास 14.52 फीसदी शेयर हैं। दस रुपए की कीमत वाला इस कंपनी का शेयर पिछले 52 सप्‍ताह में ऊपर में 480 रुपए और नीचे में 148 रुपए तक गया था।

रिलायंस पावर के बोनस की रिकॉर्ड डेट 2 जून

anil ambani रिलायंस पावर का शेयर बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज में 25 अप्रैल को 400 रुपए के पार बंद हुआ। रिलायंस पावर इससे पहले 400 रुपए के पार 3 मार्च 2008 को गया था। इस दिन कंपनी ने अपने बोनस इश्‍यू की घोषणा की थी।

रिलायंस पावर ने कहा है कि उसके सदस्‍यों का रजिस्‍टर 3 जून से 5 जून तक बंद रहेगा और इस दौरान जिनका नाम रजिस्‍टर में होगा, उन्‍हें बोनस शेयर दिए जाएंगे। यानी बोनस के लिए निवेशक का नाम 2 जून को कंपनी के रजिस्‍टर में होना जरुरी है।

रिलायंस पावर का शेयर 25 अप्रैल को दिन में ऊपर में 404.65 रुपए तक गया ओर यह 402.15 रुपए पर बंद हुआ। आज इसमें 51.25 लाख शेयरों का कामकाज हुआ। रिलायंस पावर का शेयर 24 मार्च 2008 को 303.45 रुपए तक के निचले स्‍तर पर पहुंच गया था, जो अब 32 फीसदी का सुधार दिखा रहा है।

रिलायंस पावर कंपनी के प्रमोटरों को छोड़कर सभी शेयर धारकों को बोनस शेयर जारी करेगी। कंपनी का कहना है कि वह दस रुपए वाले प्रत्‍येक पांच शेयर पर तीन शेयर बोनस के रुप में देगी। इस बोनस शेयर से उन लाखों खुदरा निवेशकों को फायदा होगा जिन्‍हें आईपीओ के तहत रिलायंस पावर के शेयर 430 रुपए प्रति शेयर पर मिले थे। इस बोनस के बाद इन निवेशकों की यह खरीद लागत 268.75 रुपए आ जाएगी।

संस्‍थागत निवेशक जिन्‍हें इस कंपनी के शेयर 450 रुपए प्रति शेयर पर मिले थे, कि लागत 281 रुपए प्रति शेयर आ जाएगी। रिलायंस पावर के पास अनेक बिजली परियोजनाएं हैं जिनकी कुल क्षमता 28 हजार मेगावॉट है लेकिन इसकी पहली आय मार्च 2010 से शुरु होगी।

सेंसेक्‍स ने किया गर्मी का पहला पड़ाव पार

bse हितेंद्र वासुदेव

देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में पड़ रही जोरदार गर्मी का असर भारतीय शेयर बाजार में भी पिछले सप्‍ताह देखने को मिला। बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज के सेंसेक्‍स ने गर्मी का पहला पड़ाव पार कर लिया जिससे निवेशकों के चेहरे लंबे समय बाद खिले हुए दिखे।

सेंसेक्‍स पिछले सप्‍ताह पूर्व सप्‍ताह के बंद की तुलना में गेप से खुला। सेंसेक्‍स 16611.41 अंक पर खुला और नीचे में यह 16589.45 अंक रहा। पूरे सप्‍ताह में यह स्थिर और चॉपी बना रहा। शुक्रवार 25 अप्रैल को आखिरी डेढ़ घंटे में सेंसेक्‍स में भाव का उतार चढाव अनिश्चित रहा। सेंसेक्‍स 17125.98 अंक पर बंद होने से पहले ऊपर में 17150.92 अंक तक गया। कुल मिलाकर सेंसेक्‍स साप्‍ताहिक आधार पर 664 अंक बढ़कर बंद हुआ। सेंसेक्‍स 21206 से गिरकर 14677 अंक तक आने के बाद पहली बार यह अपने वापसी के स्‍तर पर के किनारे पर है। इसके अगले स्‍तर 17171, 17942 और 18712 अंक होंगे।

अगले सप्‍ताह आरंभिक रेसीसटेंस 17150 और 17307 अंक पर होगा। दो सौ दिन की ईएमए और एसएमए 16889 और 17379 अंक है। सेंसेक्‍स के 17575 और 18193 स्‍तर तक जाने की संभावना बढ़ी है। समानांतर स्‍तर पर 15532, 14677 और 18895 अंक अहम है। ऊपरी चैनल वेल्‍यू 17968 अंक के आसपास है।

यदि शेयर बाजार लगातार बढ़ता है तो सेंसेक्‍स की परीक्षा कम से कम 17942 के ऊपरी स्‍तर पर होगी और इससे आगे इसकी परीक्षा 18712 अंक पर होगी। सेंसेक्‍स को स्‍पोर्ट 16800-16500-16400 पर मिलेगा। पिछले सप्‍ताह हमने कहा था कि यदि सेंसेक्‍स नीचे में 15300 का स्‍तर नहीं तोड़ता है तो यह ऊपर में 16500 अंक तक दिखाई देगा। अब सेंसेक्‍स ने न केवल 16500 के स्‍तर को पार कर लिया है बल्कि अपनी वापसी के पहले स्‍तर 17171 के स्‍तर पर पहुंच गया है।

अब हम सेंसेक्‍स के वापस लौटने की बात करें तो स्‍टॉप लॉस भी इतना ही अहम होगा। यदि सेंसेक्‍स में ऊपर जाने के स्‍तर से गिरने की नौबत आती है तो यह वापस 14677 अंक आ सकता है।

सेंसेक्‍स वेव विश्‍लेषण

वेव I-2594 से 3758

वेव II-3758 से 2904

वेव III- इंटरनल्‍स इस तरह :

वेव 1- 2904 से 6249

वेव 2-6249 से 4227

वेव 3-4227 से 12671

वेव IV- 12671 से 8799

वेव V- 8799 से 21206

वेव A-21206 से 14677

वेव B-14677 से 17150 (इस समस प्रगति पर)

सार

सेंसेक्‍स के आगे बढ़ने के स्‍तर 17172-17942-18712। साप्‍ताहिक बंद आधार पर स्‍टॉप लॉस 16371 का रखें।

April 24, 2008

चीनी शेयरों में बढ़ रही मिठास

चीनी कंपनियों के लिए अगला सीजन बेहतर होने की आस में संस्थागत निवेशक चीनी से जुड़ी बड़ी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। सरकार ने चीनी उद्योग के भले के लिए जिस तरह कदम उठाने की मंशा दिखाई है, उससे तो यही लगता है। चीनी का उत्‍पादन घटने का अनुमान और चीनी उद्योग के भले के लिए उठने वाले कदमों के बल पर चीनी कंपनियों के शेयरों में पिछले एक महीने में बेहतर बढ़ोतरी देखने को मिली है।

देश में इस साल चीनी का उत्‍पादन 250-260 लाख टन होने का अनुमान है जो पिछले साल 284 लाख टन था। गन्‍ने की घटती खेती से यह आंका जा रहा है कि अब अगले सीजन में चीनी का उत्‍पादन 210-220 लाख टन रह जाएगा। गन्ने के भुगतान में होने वाली देरी की वजह से किसान अब गन्‍ने की बोआई को घटा रहे हैं। साथ ही धान व गेहूं के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की वजह से भी किसान गन्‍ने से मुंह मोड़ रहे हैं। चीनी मिल मालिकों ने पिछले साल गन्ने का पैसा देने में काफी देरी कर दी थी। ऐसा इसलिए हुआ था कि गन्ने के दाम ऊंचे थे और चीनी के नीचे।

अब किसानों के गन्‍ने की फसल से मुंह मोड़ने की वजह से चीनी के दाम धीरे धीरे बढ़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में चीनी का फैक्‍टरी दाम 1500 रुपए क्विंटल है। अक्‍टूबर से अब तक यह दाम नौ से दस फीसदी तक बढ़ चुके हैं। अगर गन्‍ने के उत्पादन में वाकई कमी आती है तो चीनी को और मजबूती मिलेगी।

क्रूड के बढ़ते दामों से परेशान सरकार ने भी अगले अक्‍टूबर से पेट्रोल में दस फीसदी एथनॉल मिलाने को हरी झंडी दिखा दी है। इस समय पांच फीसदी एथनॉल पेट्रोल में मिलाया जाता है। इससे चीनी कंपनियों की आय स्‍थाई होगी। जिन चीनी कंपनियों की ओर निवेशकों का रुझान इसकी बढ़ने वाली मिठास को लेकर बढ़ रहा है उनमें बजाज हिंदुस्‍तान, रेणुका शुगर, बलरामपुर चीनी और त्रिवेणी इंजीनियरिंग मुख्‍य है।

चीनी शेयरों में बड़े निवेशकों की बढ़ती रुचि इनके भावों में पिछले एक महीने में आई बढ़ोतरी से साफ पता चलता है। यदि इस बढ़ोतरी को देखा जाए तो निवेशकों को चीनी शेयरों में हो रही हलचल पर नजर रखनी चाहिए और हर गिरावट पर बेहतर चीनी शेयर की खरीद की जा सकती है।

बाम्बे स्टॉक एक्सचेंज में बजाज हिंदुस्‍तान का शेयर आज यानी 24 अप्रैल 2008 को 231.85 रुपए पर बंद हुआ, जो 24 मार्च 2008 को 166.40 रुपए पर बंद हुआ था। इसी तरह बलरामपुर चीनी का शेयर आज 99.35 रुपए पर बंद हुआ, जो एक महीने पहले 71.95 रुपए पर मिल रहा था। त्रिवेणी इंजीनियरिंग का शेयर एक महीने पहले 94.15 रुपए था, जो आज 115.25 रुपए आ पहुंचा। श्रीरेणुका शुगर्स का शेयर आज 122.25 रुपए पर बंद हुआ, जो एक महीने पहले 88.02 रुपए था।

धामपुर शुगर का शेयर आज 63.45 रुपए पर बंद हुआ, जो एक महीने पहले 41.85 रुपए था। अपर गंगेज शुगर 64.30 रुपए की तुलना में आज 98.20 रुपए पर जा पहुंचा। ईआईडी पेरी का शेयर आज 215.20 रुपए पर बंद हुआ, जो एक महीने पहले बीएसई में 162.85 रुपए पर मिल रहा था। बन्‍नारीअमान शुगर्स का शेयर 798.20 रुपए से बढ़कर 830 रुपए पहुंच गया।

April 21, 2008

शेयर बाजार में फिर से तेजी की बुनियाद


महंगाई पर काबू पाने के प्रयास में मिली सफलता के बाद रिजर्व बैंक ने नकद आरक्षित अनुपात यानी सीआरआर में आधा फीसदी की बढ़ोतरी कर यह संकेत दे दिया कि बढ़ी महंगाई दर को जल्‍दी से रोकने का यही वक्‍त है। हालांकि, रिजर्व बैंक ने सीआरआर बढ़ाने के बाद इतना समय जरुर दे दिया कि शेयर बाजार के निवेशक अपने को एक झटके के लिए मानसिक रुप से तैयार कर सके। लेकिन, अमरीकी कंपनी इंटेल सहित कुछ कंपनियों के आए बेहतर नतीजों से अमरीकी शेयर बाजारों में जो रौनक लौटी है उसमें सीआरआर फैक्‍टर डिस्‍काउंट होता दिख रहा है। हालांकि, इस समय केवल एक ही नकारात्‍मक कारक क्रूड तेल है जिसके दाम 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। जी सात देशों ने भी आर्थिक मंदी को थामने के लिए सौ दिन की एक कार्य योजना बनाई है जिसके आने वाले दिनों में अनुकूल नतीजे देखने को मिल सकते हैं।

जेपी मॉर्गन चेस बैंक के एशिया इकानॉमिक रिसर्च राजीव मलिक कहते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक द्धारा अब 29 अप्रैल को और कोई कदम उठाए जाने की उम्‍मीद नहीं है। हम रिजर्व बैंक के इस तरह के कदम के लिए तैयार थे लेकिन नकद आरक्षित अनुपात यानी सीआरआर बढ़ाने के समय के प्रति अचरज हो रहा है लेकिन इसके बढ़ने की पूरी उम्‍मीद थी। मौजूदा स्थिति में सीआरआर का बढ़ाना सही कदम है लेकिन अब यदि रेपो रेट बढ़ती है तो आश्‍चर्य होगा। सीआरआर और रेपो रेट दोनों को बढ़ाने की जरुरत नहीं है। शेयर बाजार ज्‍यादा अपसेट होने की आशंका नहीं है, बल्कि सरकार के दूसरे कदमों पर नजर रखनी चाहिए।

भारतीय रिजर्व बैंक ने 26 अप्रैल और 10 मई से दो चरणों में कुल आधा फीसदी सीआरआर बढ़ाने की घोषणा की है जो इस समय 7.5 फीसदी है। अब यह आठ फीसदी हो जाएगी। बैंक के इस कदम से शेयर बाजार निवेशक थोड़े घबराए हुए हैं और यह आशंका जताई जा रही है कि सोमवार 21 अप्रैल को बाजार काफी नरम खुलेंगे। अनाम फाइनेंशियल के अध्‍यक्ष वल्‍लभ भंसाली मानते हैं कि बाजार इससे पूरी तरह प्रभावित नहीं होगा। मुझे नहीं लगता कि इससे बाजार को पूरा झटका लगेगा। इसके विपरीत आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्‍युचुअल के उप प्रबंध निदेशक निलेष शाह मानते हैं कि शेयर बाजार निश्चित रुप से नरम खुलेगा। तय है सेंसेक्‍स गिरेगा।

भारतीय रिजर्व बैंक ने सीआरआर में आधे फीसदी की बढ़ोतरी करने की घोषणा की है। मौद्रिक नीति में यदि रेपो रेट में बढ़ोतरी नहीं हुई तो भी सीआरआर बढ़ने से बैंक आवास और वाहन कर्ज की ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। शेयर बाजार सेंटिमेंट पर चलता है। ब्याज दरें बढ़ने की आशंका है और इसका सीधा असर इन दो क्षेत्रों पर पड़ेगा। कुछ विश्‍लेषक मानते हैं कि कंपनियों के बेहतरीन वित्तीय नतीजों से बाजार में रौनक फिर लौटेगी। साथ ही भारी उतार-चढ़ाव का दौर भी खत्म होगा। आने वाले दिन बिजली और सूचना तकनीकी के शेयरों के होंगे। सूचना तकनीकी क्षेत्र की कंपनियों ने जिस तरह से अपना कारोबार यूरोपीय बाजार में बढ़ाया है उससे यह यकीन हो रहा है कि इन कंपनियों में मंदी नहीं आएगी।

बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 21 अप्रैल से शुरु हो रहे सप्‍ताह में 16923 अंक के ऊपर बंद होने पर 17143 अंक तक जा सकता है। हालांकि, स्‍पोर्ट स्‍तर 15933 अंक को ध्‍यान में रखना होगा। जबकि नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी एनएसई का निफ्टी 5083 अंक के ऊपर बंद होने पर 5148 अंक तक जा सकता है। इसका स्‍पोर्ट स्‍तर 4811 अंक है। इस सप्‍ताह शेयर बाजार पर जहां रिलायंस इंडस्‍ट्रीज, टीसीएस, सत्‍यम कंप्‍यूटर जैसी दिग्‍गज कंपनियों के नतीजों का असर देखने को मिलेगा वहीं भारतीय रिजर्व बैंक द्धारा सीआरआर में की जाने वाली बढ़ोतरी और घटी मुद्रास्‍फीति का प्रभाव भी देखने को मिलेगा। इसका मतलब हुआ कि शेयर बाजार में तेजडि़यों और मंदडियों की आपसी खींचतान जोरदार रहेगी। जैसा कि हमने पिछले सप्‍ताह कहा था कि बीएसई सेंसेक्‍स यदि अगले सात कारोबारी दिवसों में 14300 अंक से नीचे नहीं जाता है तो खासी तेजी की नींव तैयार होगी और इस समय उसकी बुनियाद रखी जा रही है।

तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि सेंसेक्‍स का साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 16683 और 16892 अंक होगा। साप्‍ताहिक स्‍पोर्ट 16208-15573, अंक पर रहेगा। सेंसेक्‍स का साप्‍ताहिक बंद 16892 अंक से ऊपर होता है तो बाजार तेजी की ओर कूच करेगा एवं यह 17642 के बाद कम से कम 18426 अंक तक जाएगा। सेंसेक्‍स की परीक्षा 16500 के आसपास होगी, हालांकि चार्ट इसे मजबूत और पर्याप्‍त बता रहा है। लेकिन, सेंसेक्‍स 15573 के नीचे बंद होता है तो फिर से इसकी परीक्षा 15300 अंक पर होगी जिसके टूटने पर यह 14677 अंक और 14100 अंक तक आ सकता है।

इस सप्‍ताह निवेशक बिहार कॉस्टिक एंड केमिकल्‍स, एचईजी, टीसीएस, सत्‍यम कंप्‍यूटर, कंटेनर कार्पोरेशन, फोस्‍को इंडिया, पेपर प्रॉडक्‍ट्स, रिलायंस इंडस्‍ट्रीज, बीजीआर एनर्जी, आईडीएफसी, डीसीबी, रूचि सोया, गेटवे डिस्‍ट्रीपार्क, वरुण शीपिंग, जेएमसी प्रोजेक्‍ट्स पर ध्‍यान दे सकते हैं।

April 16, 2008

फर्टिलाइजर शेयरों पर रखें नजर

देश में जून से सितंबर के दौरान मानसून के सामान्‍य रहने की संभावना से आज फर्टिलाइजर शेयरों में तेजी आई। केंद्र सरकार के मुताबिक इस साल मानसून लंबी अवधि के औसत का 99 फीसदी रहेगा। निवेशकों को अब फर्टिलाइजर और ट्रैक्‍टर कंपनियों के शेयरों पर नजर रखनी चाहिए।

राष्‍ट्रीय केमिकल एंड फर्टिलाइजर 4.96 फीसदी बढ़कर आज 63.45 रुपए पर जा पहुंचा। चंबल फर्टिलाइजर 9.32 फीसदी चढ़कर 56.90 रुपए, नेशनल फर्टिलाइजर 8.94 फीसदी तेज होकर 47.50 रुपए, जीएनएफसी 2.90 फीसदी तेज होकर 145.60 रुपए, नागार्जुन फर्टिलाइजर 6.97 फीसदी बढ़कर 41.45 रुपए, फर्टिलाइजर एंड केमिकल 4.98 फीसदी चमककर 27.40 रुपए, कोरोमंडल फर्टिलाइजर 3.36 फीसदी सुर्ख होकर 121.60 रुपए, जुआरी इंडस्‍ट्रीज 3.06 फीसदी बढ़कर 242.75 रुपए, स्पिक 8.95 फीसदी तेज होकर 27.40 रुपए, खेतान केमिकल 4.92 फीसदी बढ़कर 65 रुपए, बसंत एग्रो टेक 9.98 फीसदी चढ़कर 50.70 रुपए, धरमसी मोरारजी 7.60 फीसदी सुर्ख होकर 13.45 रुपए, शिवा फर्टिलाइजर 4.89 फीसदी तेज होकर 23.60 रुपए और रामा फास्‍फेट्स 4.98 फीसदी बढ़कर 6.96 रुपए पर बंद हुआ। गिरने वालों में जीएसएफसी, दीपक फर्टिलाइजर और एमपी एग्रो रहे लेकिन इनमें आई गिरावट बेहद मामूली रहे।

शेयर बाजार में रहेगी खासी उथल पुथल


अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था पर छाए मंदी के बादल अभी छंटे नहीं हैं जिसकी वजह से भारतीय शेयर बाजार में भी निवेशकों को इस सप्‍ताह खास उम्‍मीद नहीं रखनी चाहिए। इस सप्‍ताह इंफोसिस, विप्रो, रिलायंस पेट्रो, रिलायंस इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, एनडीटीवी, एचसीएल टेक्‍नो, रोल्‍टा इंडिया और जैपी होटल्‍स सहित अनेक कंपनियां अपनी चौथी तिमाही के नतीजे पेश करने जा रही हैं। लेकिन बाजार विश्‍लेषकों को इन नतीजों से कोई खास आशा नहीं हैं। साथ ही बढ़ती महंगाई दर पर इस सप्‍ताह बड़ा राजनीतिक हो हल्‍ला हो सकता है, जो बाजार की सेहत को और बिगाड़ सकता है। इस बीच, जी 7 देशों ने वैश्विक वित्त बाजार की हालत उम्मीद से कहीं ज्यादा खराब बताई है। इन देशों ने दुनिया को इस संकट से निकालने के लिए जरूरी मौद्रिक और वित्तीय कदम उठाने का प्रण किया है लेकिन यह कदम क्या होंगे इसका खुलासा नहीं किया। पूंजी बाजार को पटरी पर लाने के लिए 100 दिन का एक कार्यक्रम बनाया है। वित्तीय कंपनियों से कहा गया है कि वे अपनी अर्ध वार्षिक आमदनी में साफ तौर पर बताएं कि उनका कितना निवेश डूबने के कगार पर है ताकि हालात का सही जायजा लिया जा सके।

बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 15 अप्रैल से शुरु हो रहे सप्‍ताह में 16287 का अहम स्‍तर टूटने से 15333 अंक तक जा सकता है। यदि यह स्‍तर भी टूटता है तो सेंसेक्‍स के 15047 अंक की जाने की आशंका है। जबकि नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी एनएसई का निफ्टी भी 4934 अंक का स्‍तर तोड़ चुका है इसलिए निफ्टी के 4633 अंक तक आने की संभावना है। निफ्टी ने यदि इस स्‍तर को तोड़ा तो यह 4533 अंक तक जा सकता है। सेंसेक्‍स और निफ्टी की इस चाल में इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक्‍नो खास भूमिका निभाएंगे। बीएसई सेंसेक्‍स यदि अगले सात कारोबारी दिवसों में 14300 अंक से नीचे नहीं जाता है तो खासी तेजी की नींव तैयार होगी।

तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि सेंसेक्‍स का साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 16609, 16450 और 16705 अंक होगा। साप्‍ताहिक स्‍पोर्ट 15433-15297, 14994 और 14789-14677 अंक पर रहेगा। दैनिक चार्ट के आधार पर अहम स्‍पोर्ट 15300 अंक पर है। यदि बाजार इस स्‍तर से गिरता है तो सेंसेक्‍स की अगली परीक्षा 14677 अंक पर होगी। यदि सेंसेक्‍स 14677 अंक से गिरकर नीचे की ओर जाता है तो इसके 14100-14000 अंक तक जाने की संभावना है। अहम बात यह है कि सेंसेक्‍स का सभी साप्‍ताहिक रेसीसटेंस स्‍तरों को पार करना और उनके ऊपर बंद होना जरुरी है। सेंसेक्‍स 16500 अंक से ऊपर बंद होता है तो यह 16900 से 17646 अंक की ओर बढ़ेगा।

इस बीच, भारतीय शेयर बाजार के प्रति विदेशी संस्‍थागत निवेशक मंदी का मत रखते हैं लेकिन घरेलू म्‍युच्‍युअल फंड इससे विपरीत चाल चल रहे हैं। जनवरी से मार्च 2008 के दौरान विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने 12 हजार करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की। यह बिकवाली पी नोट्स की पोजीशन कम करने का भी एक हिस्‍सा हो सकती है। लेकिन घरेलू म्‍युच्‍युअल फंडस ने इस अवधि में बड़ी संख्‍या में शेयरों की खरीद की है, हालांकि इनकी खरीद बाजार को उठाने में कामयाब नहीं हो सकी। इस समय अवधि में बीएसई सेंसेक्‍स 4700 अंक घटा है। मंदी के इस दौर में अनेक कंपनियों में उनके प्रमोटरों की हिस्‍सेदारी बढ़ती दिखाई दी है। मसलन बॉम्‍बे डाईंग में प्रमोटरों की जो हिस्‍सेदारी 31 दिसंबर 2007 को 44.9 फीसदी थी वह बढ़कर अब 47.1 फीसदी, रिलायंस एनर्जी में प्रमोटरों का हिस्‍सा 34.7 फीसदी से बढ़कर 36 फीसदी पहुंच गया है। प्रमोटरों की हिस्‍सेदारी बढ़ाने का कदम बाजार के अच्‍छा संकेत कहा जा सकता है। इस अवधि में इन दोनों कंपनियों में विदेशी निवेशकों की हिस्‍सेदारी 3 फीसदी और 2.3 फीसदी कम हुई है।

इस सप्‍ताह निवेशक इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक्‍नो, पावर फाइनेंस कार्पोरेशन, पीवीआर, एनडीटीवी, जी न्‍यूज, जी एंटरटेनमेंट, भारती शीपयार्ड, मोजर बेयर, हिंदुस्‍तान ऑयल एक्‍सप्‍लोरेशन, दिवान हाउसिंग, एचईजी, ब्रिटानिया, वेल्‍सपन गुजरात, गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट और बलरामपुर चीनी पर ध्‍यान दे सकते हैं।

April 10, 2008

मान न मान, मैं तेरा मेहमान


आपने यह कहावत जरुर सुनी होगी..मान न मान मैं तेरा मेहमान...लेकिन अब भारतीय कार्पोरेट जगत में इस समय चल रही जंग में मेहमान नहीं मेजबान बनने की तैयारी हो रही है। रैनबक्‍सी समूह की माने जाने वाली कंपनी सोलरेक्‍स फार्मास्‍युटिकल ने ओर्किड कैमिकल्‍स एंड फार्मास्‍युटिकल्‍स पर कब्‍जा जमाने की जंग तेज कर दी है। वहीं, ओर्किड कैमिकल्‍स के कर्ताधर्ता राघवेंद्र राव ने अपने पास रखे 50 लाख वारंट को 7.6 फीसदी इक्विटी में बदलकर अपनी कुर्सी सलामत रखने की कवायद शुरु कर दी है। राव की इच्‍छा के विरुद्ध यह जोर जबरदस्‍ती टेकओवर करने का भारतीय कार्पोरेट जगत में पहला मामला सामने आया है।

राघवेंद्र राव अपनी कंपनी को बचाने में पैसे टके की दिक्‍कत महसूस कर रहे हैं। राव वारंट को इक्विटी में बदलते हैं तो उन्‍हे इसके लिए 90 करोड़ रुपए जुटाने होंगे। इन वारंट को परिवर्तित करने की डेड लाइन 31 अगस्‍त 2008 है। हालांकि, इससे पहले 17 मार्च को मार्जिन लगी बिकवाली में राव को शेयर बेचने पर 75 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है और कंपनी में उनका हिस्‍सा घटकर 15.8 फीसदी रह गया है। साथ ही राव ने 65 करोड़ रुपए का कर्ज ले रखा है। ओर्किड में सबसे बड़ा संस्‍थागत निवेशक एलआईसी है जिसने होस्‍टाइल टेकओवर में किसी का भी साथ देने से इनकार कर दिया है। एलआईसी के पास इस कंपनी के 7.8 फीसदी शेयर हैं। संस्‍थागत निवेशकों के पास ओर्किड की 30 फीसदी हिस्‍सेदारी है। कार्पोरेट जगत के इस युद्ध में ओर्किड कैमिकल्‍स के शेयरों में खूब उतार चढ़ाव हो रहा है। जब तक यह युद्ध थम नहीं जाता निवेशक ओर्किड कैमिकल्‍स के शेयरों में पैसा कमा सकते हैं लेकिन हर खबर पर बारीक नजर रखते हुए क्‍योंकि कोई भी खबर बाजी पलट सकती है।

ओर्किड कैमिकल्‍स के कर्ताधर्ता के पास कंपनी की इक्विटी इतनी कम है कि वे टेकओवर की लड़ाई लड़ने में मजबूर भी नजर आ रहे हैं। भारतीय कार्पोरेट जगत में अनेक ऐसी कंपनियां हैं जिनका कामकाज काफी अच्‍छा है और शेयरों के दाम पिछली ऊंचाई से 30 फीसदी से अधिक नीचे आ चुके हैं। इन कंपनियों में प्रमोटरों की होल्डिंग 20 फीसदी से नीचे हैं। यानी यहां यदि मेहमान जोर जबरदस्‍ती मेजबान को बाहर कर खुद मालिक बनना चाहे तो इन कंपनियों के प्रमोटर तमाशा देखते रह जाएंगे और बरसों से उन्‍होंने इन कंपनियों को एक मुकाम तक पहुंचाने के लिए जो मेहनत की है वह किसी काम नहीं आएगी।

ओर्किड कैमिकल्‍स एंड फार्मास्‍युटिकल्‍स के बाद जिन बेहतर कंपनियों पर दूसरों की नजरें टिकी हैं उनमें आईवीआरसीएल इंफ्रा, मोजर बेयर, हिमाचल फ्युच्‍युरिस्टिक, सुबेक्‍स, एफटैक, मास्‍कॉन ग्‍लोबल, आईसीएस, नागार्जुन कंसट्रक्‍शंस, जीई शीपिंग, पोलारिज, वोल्‍टास, प्राज इंडस्‍ट्रीज, एमआरएफ, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडिया सीमेंट, वैभव जैम्‍स, निक्‍को कार्प, स्‍ट्राइड्स आर्कोलैब, एक्‍सेल क्रॉप कोर आदि हैं। हालांकि, यह सूची एक उदाहरण है। प्रमोटरों के पास जिन बेहतर कंपनियों में अपनी हिस्‍सेदारी 20 से 25 फीसदी है उनकी पूरी सूची बनाई जाए तो देश की अनेक उम्‍दा कंपनियों की यही हालत है।

आईवीआरसीएल इंफ्रा में प्रमोटरों की हिस्‍सेदारी महज 9.69 फीसदी है जबकि विदेशी संस्‍थागत निवेशकों के पास 61 फीसदी से ज्‍यादा इक्विटी है। ऐसे में एफआईआई जब चाहे तब खेल पलट सकते हैं। मोजर बेयर में प्रमोटरों के पास 16.3 फीसदी इक्विटी है। शेयर का भाव भी जनवरी के उच्‍चतम भाव से 50 फीसदी घट चुका है। ऐसे में डिस्‍काउंट भाव पर मिल रही इस कंपनी पर किसी की भी नीयत बिगड़ सकती है। भारतीय कार्पोरेट जगत को इस तरफ तत्‍काल ध्‍यान देना चाहिए ताकि ऐसा न हो जिन एफआईआई के भरोसे वे आगे बढ़ाना चाहते हों वे ही उन्‍हें उनके मालिकाना हक से बेदखल कर दें। निवेशकों को भी ऐसी बुनियादी रुप से मजबूत और बेहद सस्‍ते भाव पर मिल रही कंपनियों में निवेश से नहीं हिचकना चाहिए यदि भविष्‍य में बड़ा मुनाफा बटोरना हो तो।

April 07, 2008

शेयर बाजार में सुधार टिकने की आस नहीं


भारतीय शेयर बाजार में किसी बड़े चमत्‍कार की आशा करना उचित नहीं है। हमने दो सप्‍ताह पहले यह बात कही थी लेकिन उस समय थोड़ी सी बढ़त से निवेशकों को यह लगा था कि बाजार अब बॉटम आउट कर रहा है। लेकिन अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था के हो रहे बेडागर्क से कोई नहीं बच पाएगा। दुनिया के सबसे बड़े निवेशकों में शुमार जार्ज सोरोस का कहना है कि मंदी की कहानी तो 1980 से लिखी जा रही थी। वे कहते हैं कि इस समय शेयर बाजार में जो भी सुधार दिख रहे हैं वे टिक नहीं पाएंगे और मंदी जारी रहेगी।

महंगाई दर के तीन साल के उच्‍च स्‍तर सात फीसदी पहुंच जाने, औद्योगिक उत्‍पादन घटने, अनेक राज्‍यों में आने वाले विधानसभा चुनाव और इसके बाद लोकसभा चुनाव की आहट के साथ अमरीकी मंदी के बढ़ते प्रेत ने सरकार की नींद उड़ा दी है। आर्थिक मंदी के साथ बेरोजगारी बढ़ी तो मौजूदा सरकार के लिए अगला चुनावी समर जीतना कठिन हो जाएगा इसलिए सरकार हर तरह से महंगाई को कम करने के साथ औद्योगिक मोर्चे की मार्च पास्‍ट जारी रखने के प्रयास कर रही है। शेयर बाजार के खिलाडि़यों की नजर सरकारी कदमों के साथ कार्पोरेट नतीजों पर टिकी हैं। आईटी कंपनी इंफोसिस के नतीजे 15 अप्रैल को आ रहे हैं। इस दिन से कंपनियों के नतीजे की विधिवत शुरुआत हो जाएगी यानी नतीजों के साथ साथ शेयर बाजार के चढ़ने व उतरने की शुरुआत।

उम्‍मीद यही की जा रही है कि कार्पोरेट नतीजे बाजार के अनुकूल आएंगे। कार्पोरेट जगत ने हाल में जो भारी भरकम अग्रिम कर चुकाया है उससे तो यही लगता है कि नतीजे शानदार होंगे। लेकिन कंपनियों ने बैंकरों की सलाह के मुताबिक अपने बहीखातों में फोरेक्‍स डेरीवेटिव्‍ज संबंधी नुकसान को शामिल किया तो नतीजे अनुकूल नहीं दिखेंगे। इसका असर वित्‍त वर्ष 2008-09 के नतीजों पर भी देखने को मिलेगा।

भारतीय रिजर्व बैंक चढ़ती महंगाई को देखते हुए कड़े मौद्रिक उपाय कर सकता है। नकद आरक्षित अनुपात यानी सीआरआर में बढ़ोतरी की जा सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक की 29 अप्रैल को मौद्रिक नीति पर बैठक होने जा रही है। रिजर्व बैंक का लक्ष्‍य महंगाई दर को पांच फीसदी है। बैंकिंग जगत का मानना है कि सीआरआर में बढ़ोतरी के अलावा रेपो दरों में बढ़ोतरी कर आगे दिए जाने वाले कर्ज दरों में इजाफा किया जा सकता है। साथ ही रिवर्स रेपो दर भी बढ़ाकर प्रत्‍यक्ष ब्‍याज दर के बारे में भी संकेत दिए जा सकते हैं। हालांकि, अमरीकी फेडरल रिजर्व ने अब और ब्‍याज कटौती से कनकार कर दिया है। बैंक का मानना है कि पहले की गई ब्‍याज दर कटौती का अर्थव्‍यवस्‍था पर अभी पूरा असर नहीं दिखा है।

इस बीच, सेबी के पूर्णकालिक सदस्‍य टी सी नायर ने कहा है कि बाजार चढ़ता गिरता रहेगा लेकिन लंबे समय तक निवेश करने वालों को अच्‍छा मुनाफा होने की उम्‍मीद है। शेयर बाजार में भारी उतार चढ़ाव के बावजूद दीर्घकालिक निवेशकों के हित सुरक्षित है, क्‍योंकि अर्थव्‍यवस्‍था की बुनियाद मजबूत है। लेकिन दुनिया के विख्‍यात निवेशक जार्ज सोरोस कहते हैं कि शेयर बाजार में मौजूदा सुधार तीन सप्‍ताह से लेकर तीन महीने तक दिख सकता है लेकिन मंदी जारी रहेगी। यानी निवेशकों के सामने एक भ्रम की स्थिति की अल्‍प सुधार को टिकने वाला मानने लगे। ऐसी स्थिति में मजबूत बुनियाद और बेहतर रिटर्न देने वाली कंपनियों में किया गया निवेश ज्‍यादा फायदेमंद होगा।

बुनियादी रुप से मजबूत होने के साथ बेहतर रिटर्न दे रही कंपनियों में शीपिंग कार्पोरेशन, अशोक लेलैंड, एचपीसीएल, वरुण शीपिंग, बोंगाईगांव रिफाइनरी, आंध्र बैंक, तमिलनाडु न्‍यूज प्रिंट, चेन्‍नई पेट्रोलियम कार्पोरेशन, आईसीआई इंडिया, निट टेक्‍नालॉजिस, बैंक ऑफ महाराष्‍ट्र, एमटीएनएल, एचईजी, हिंदुस्‍तान यूनिलीवर, डीसीएम श्रीराम कंसोलिडेटेड, फिनोलैक्‍स इंडस्‍ट्रीज, टाटा एलेक्‍सी को शामिल किया जा सकता है।

बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 7 अप्रैल से शुरु हो रहे सप्‍ताह में 15957 से 14814 के बीच घूमता रहेगा। जबकि नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी एनएसई का निफ्टी 4833 से 4463 अंक के बीच कारोबार करता रहेगा। कारोबारियों की राय में शेयर बाजार में सुधार का दौर जून के दूसरे सप्‍ताह से देखने को मिल सकता है। हालांकि, इस बीच बीएसई सेंसेक्‍स के नीचे में 13500 अंक तक जाने की आशंका जताई जा रही है।

इस सप्‍ताह निवेशक टैक्‍समैको, भेल, रैनबक्‍सी, सुजलॉन एनर्जी, कोलगेट पामोलिव, पावर फाइनेंस, हनीवैल ऑटोमेशन, जीटीएल, इलेक्‍ट्रॉस्‍टील कास्टिंग, जीआईसी हाउसिंग, गुजरात फ्लोरोकैम, अल्‍फा लावल, कावेरी सीड, यूटीआई गोल्‍ड ईटीएफ, गीताजंलि जैम्‍स और नागार्जुन कंसट्रक्‍शन पर ध्‍यान दे सकते हैं।

April 03, 2008

शेयर बाजार की सार्थक बाजीगरी


शेयर बाजार के निवेशकों ने पिछले ढाई महीने में जिस तरह अपने निवेश को धुलते हुए देखा है, उसने अधिकतर निवेशकों की कमर तोड़ दी है। इस समय कोई भी निवेशक नया निवेश करने के मूड में नहीं है लेकिन कुछ बातों को ध्‍यान में रखा जाए तो हर दशा में इस बाजार का बाजीगर बना जा सकता है।

बाजीगर निवेशक हमेशा बेहतर कंपनियों की सूची बनाने में लगे रहते हैं जिनमें सही समय और सही भाव पर निवेश किया जा सके। शेयर बाजार की हर गिरावट शेयर खरीदने का मौका देती है लेकिन इसके लिए जरुरी है कि ऐसी मंदी के समय फंड पास हो। इसलिए अपने पिछले निवेश में उचित भाव पर मुनाफावसूली करते रहना जरुरी है। वारेन बफेट का कहना है कि वे किसी कंपनी में निवेश के लिए बेहतर समय का इंतजार बरसों तक कर सकते हैं।

बेहतर कंपनियों के चयन से पोर्टफोलियो उम्‍दा बनता है। जिस तरह बगैर ठोस परिकल्‍पना के एक परियोजना खड़ी नहीं की जा सकती वैसे ही बेहतर और मजबूत कंपनियों के अभाव में मजबूत पोर्टफोलियो नहीं बनाया जा सकता। कमजोर फंडामेंटल और अफवाहों या कानाफूसी के आधार पर चलने वाले शेयर मंदी में पानी पानी हो जाते हैं जिससे आम निवेशक अपने को पूरी तरह साफ पाता है। प्रतिकूल लांग टर्म बिजनैस भविष्‍य, कमजोर लेखा जोखा और खराब संचालन वाली कंपनियां शार्ट टर्म में तारे तोड़ने की बात कहती हैं जिससे यह मजेदार लग सकती हैं लेकिन मंदी का दौर आते ही इन कंपनियों के भाव औंधे मुंह दिखते हैं। ऐसी स्थिति में मजबूत आधार पर पोर्टफोलियो खड़ा करना चाहिए।

यदि आपको किसी छिपे खजाने की जानकारी हो तो क्‍या आप उसे आम आदमी को बताना चाहेंगे। नहीं ना, तो फिर शेयर टिप्‍स पर भरोसा क्‍यों। जिन कंपनियों के शेयरों में आप निवेश करना चाहते हैं उनके बारे में खुद पढ़े और उन्‍हें समझें। बाजार में चल रही टिप्‍स को आप एक टूल के रुप में उपयोग कर सकते हैं लेकिन केवल उसी पर पूरा आधार न रखें। ऐसी चलने वाली टिप्‍स आपके निवेश को साफ कर सकती है।

कहावत है कि जो जितनी बड़ी जोखिम लेता है उतना ही मोटा मुनाफा कमाता है। तगड़ा मुनाफा कमाने के लिए बड़ी रिस्‍क लेना जरुरी है लेकिन ऐसी रिस्‍क लेते समय सावधान रहें। हरेक निवेशक को अपने रिस्‍क प्रोफाइल को समझने और अस्थिरता के समय किस तरह आगे बढ़ाने की कला आनी चाहिए। बगैर इस कला के एक निवेशक बाजीगर नहीं बन सकता।

पोर्टफोलियो खड़ा करते समय जो बात सबसे ज्‍यादा ध्‍यान में रखी जानी चाहिए वह है समूची निवेश राशि का उपयोग एक बारगी ही न करें। अपनी निवेश राशि को टुकड़ों में निवेश करें ताकि आपकी खरीद लागत कम रहे और कई बार अपनी सूची में छूट गए बेहतर शेयर सस्‍ते में मिलने पर खरीदे जा सके। भारी मंदी के समय अर्थव्‍यवस्‍था में अहम भूमिका निभाने वाली कंपनियों के शेयर पानी के भाव खरीदे जा सकते हैं। इसलिए अपने निवेश राशि को चरणबद्ध तरीके से निवेश करें।

पोर्टफोलियो खड़ा करने के लिए जो निवेश किया जा रहा है उसमें उधारी का पैसा नहीं होना चाहिए। मौजूदा मंदी में जिस तरह अनेक निवेशक, हेज फंड्स और बैंक बुरे हालात में पहुंचे हैं उसका मुख्‍य कारण उधार के पैसे होना है। तेजी के समय उधार का पैसा आपको मालामाल बना सकता है लेकिन मंदी के समय यह गले की हड्डी बन जाता है। याद रखें की बुरे दिन मेल या ईमेल भेजकर नहीं आते। उधार के पैसे तेजी के बीच में ही लगाए और तत्‍काल मुनाफा वसूली कर उस पैसे को चुकता कर दें।

अंत में, वित्‍त वर्ष 2008-09 के आम बजट में वित्‍त मंत्री पी चिदम्‍बरम ने शार्ट टर्म कैपिटल गैन टैक्‍स में बढ़ोतरी कर लंबी अवधि के निवेश को प्रोत्‍साहन दिया है, वह कोई नया नहीं है। निवेशक वही सफल हुए हैं जिन्‍होंने लंबी अवधि के लिए निवेश किया है। दुनिया में नंबर वन बने अमीर वारेन बफेट का तो यही उसूल है कि निवेश करो और भूल जाओ। लंबी अवधि का निवेश बाजार में रोज रोज होने वाले उतार चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता और गंभीर निवेशकों पर इसका असर भी नहीं पड़ता। बस थोड़ा सा अनुशासन आपके पोर्टफोलियो को हर स्थिति में मजबूत रख सकता है एवं लंबी अवधि में आपको बेस्‍ट बाजीगर बना सकता है।