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March 09, 2009

शेयर बाजार को आखिरी धक्‍का मारने की तैयारी !

मंदी में डूबे शेयर बाजार को क्‍या अब आखिरी धक्‍का मारने की तैयारी हो रही है। आम निवेशक के विचारों को आगे रखें तो शेयर बाजार में मंदी का अंत नहीं है और उन्‍हें ऐसा लगता है सब कुछ जीरो हो जाएगा। लेकिन ऐसा है नहीं। आम निवेशक की मनोस्थिति में उसे जीरो के अलावा कुछ नहीं दिख रहा जबकि अंधेरे के बाद उजाला और उजाले के बाद अंधियारा प्रकृति का नियम है।

शेयर बाजार में यह कोई पहली बार मंदी नहीं आई है। ऐसा कई बार हुआ है लेकिन अब तक निचले और आकर्षक स्‍तर पर लेवाली कर फिर लौटी तेजी में मुनाफाकमाने वाले इस बार की मंदी में गच्‍चा खा गए हैं। हर घटे स्‍तर को निचला स्‍तर मानकर शेयर खरीदने वालों ने पैसा कमाया ही नहीं, बल्कि गंवाया ही है। शेयर बाजार की तलहटी का पता न लगते देख अब ऐसे निवेशकों ने खरीद रोक दी है। मंदडि़यों ने पूरे देश को ही नहीं बल्कि सारी दुनिया को मंदी में उतार दिया है। बस बेचो..बस बेचो...यही एक शब्‍द सब जगह गुंज रहा है। लेकिन हर बार ऐसा हुआ है पूरी तरह मंदी या तेजी में डूबा देने के बाद खिलाड़ी खेल बदलते हैं।

यदि आपको याद हो तो दिसंबर 2008 में हर कोई मानकर चल रहा था कि रिलायंस पावर का आईपीओ लिस्‍टेड होते समय सेंसेक्‍स को 27, 30 और 35 हजार पहुंचने से कोई रोक नहीं सकता। उस समय जिसने भी गिरावट की बात की या मुनाफावसूली की, उस पर हर कोई हंसता था। नवंबर से जनवरी 2009 के दौरान बार बार यह कहा जा रहा था कि यह समय मुनाफा वसूली का है। मुनाफावसूली करते रहना ज्‍यादा बुद्धिमानी का खेल होगा। पेड़ चाहे कितना लंबा हो जाए वह आसमान को छू नहीं सकता....लेकिन अधिकतर निवेशकों ने इसे नजरअंदाज कर दिया और घाटे में उतर गए।

मंदी में आकंठ डूबे शेयर बाजार में धीरे धीरे खेल पलटने की तैयारी चल रही है। सेंसेक्‍स की तलहटी 6994 का दिख रहा है और यदि यहां कोई छोटी दुर्घटना होती है तो यह 6700 अंक तक जा सकता है। लेकिन यहां से शेयर बाजार की स्थिति पलटती हुई दिख रही है। हालांकि, एक बात साफ कर लें कि अब जो तेजी होगी वह राकेट की गति से नहीं आएगी। यदि निवेशक यह मान रहे हों कि बाजार अपनी इस तलहटी से सीधे 15 या 21 हजार अंक पहुंच जाएगा, वे इस भ्रम में न रहें। बाजार के बढ़ने पर बीच बीच में बिकवाली दबाव साफतौर पर दिखेगा जो सेंसेक्‍स को अपनी पिछली ऊंचाई तक पहुंचाने में काफी समय लग सकता है।

शेयर बाजार के महाखिलाड़ी अब आम चुनाव के इस माहौल में अनेक झूठ और सच के सहारे निवेशकों से उम्‍दा कंपनियों के शेयर पूरी तरह निकलवाने का प्रयास करेंगे ताकि बेहद सस्‍ते में ये शेयर खरीदकर वे अपने पोर्टफोलियों को मजबूत बना सकें। आम निवेशक अब दिल से नहीं दिमाग से काम लें और अच्‍छी कंपनियों के शेयर न बेचें। याद रखें इस बाजार में हर बार मंदी के बाद तेजी लौटी है। खुद निवेशक भी होमवर्क करें और पढ़ने के साथ सारी घटनाओं पर नजर रखें एवं अनके अर्थ सही दिशा में निकालने की कोशिश करें। कहावत है खुद को स्‍वर्ग जाना हो तो खुद को ही मरना पड़ता है। अमरीका और यूरोप में मंदी के बीच भारत में औद्योगिक फंड, एफआईआई, लोकल फंड और बड़े खिलाड़ी शेयर बाजार को ढीला रखने का प्रयास करेंगे लेकिन चतुर निवेशक अपने पोर्टफोलियों में वे बेहतरीन शेयरों को शामिल कर सकते हैं जो मंदी के इस आखिरी धक्‍के में तलहटी पर होंगे।

9 मार्च से शुरु हो रहा नया सप्‍ताह शेयर बाजार के लिए छोटा सप्‍ताह है क्‍योंकि शेयर बाजार में 10 और 11 मार्च को अवकाश रहेगा। नए सप्‍ताह में केवल तीन दिन ही कारोबार होगा। नौ मार्च से शुरु हो रहे सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्‍स 8585 से 7979 के बीच घूमता रहेगा। जबकि, नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 2727 से 2424 के बीच कारोबार करेगा।

शेयर बाजार के लिए मार्च महीना अच्‍छा नहीं रहा है। पिछले 16 साल में से 12 साल मार्च महीने ने नकारात्‍मक रिटर्न दिया है। केवल चार साल ही मार्च महीने ने सकारात्‍मक रिटर्न दिया है। पिछले वर्षों में मार्च महीने में औसतन 3.5 फीसदी नकारात्‍मक रिटर्न मिला है। आने वाले दिनों में बाजार की नजर कार्पोरेट टैक्‍स की जमा होने वाली राशि पर रहेगी। यदि इस टैक्‍स में कोई असामान्‍य कमी देखने को मिली तो शेयर बाजार का बंटाढार हो सकता है।

सूरत कॉमर्शियल कार्पोरेशन के इक्विटी विश्‍लेषक गोपाल मोदी का कहना है कि अगले सप्‍ताह के लिए बैलेंस पाइंट 8378 के मुकाबले पिछला बंद स्‍तर 8325 के कम होने की वजह से नरमी का रुख दिखाता है। बाजार में उतार चढ़ाव सामान्‍य रहेगा। नई मंदी 8209 के नीचे, स्‍टॉप लॉस 8314 का रखें या 8443 से 8547 के बीच स्‍टॉप लॉस 8584 का रखें। 8200 का स्‍तर टूटने पर 7972 से 7811 तक गिरने की संभावना। यदि 7800 के नीचे सेंसेक्‍स आता है तो मंदी में रहे अन्‍यथा बढ़कर 8200 से 8395 आने के आसार। 7800 के नीचे सेंसेक्‍स के रहने पर यह 7662 से 7558 तक आ सकता है। तेजी का कारोबार 8550 के ऊपर करें और स्‍टॉप लॉस 8443 का रखें। तेजी के दौरान सेंसेक्‍स बढ़कर 8820 जाने के आसार लेकिन इसकी संभावना बेहद कम है।

तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि शेयर बाजार में अब अक्‍टूबर 2008 के निचले स्‍तर की परीक्षा होगी। हालांकि, पिछले सप्‍ताह पुलबैक की बात थी जो नहीं हो सका। नए सप्‍ताह में सेंसेक्‍स के लिए रेसीसटेंस स्‍तर 8378-8710-8762 होंगे। साप्‍ताहिक सपोर्ट 7994-7696 और 7278 होंगे। सेंसेक्‍स बढ़कर 8535 के ऊपर बंद होता है तो इसकी तलहटी 8047 तय है और यहां से पुलबैक देखने को मिलेगा। इस पुलबैक के तहत सेंसेक्‍स 9725 तक पहुंच सकता है। लेकिन यदि सेंसेक्‍स 8047 से तत्‍काल गिरता है तो इसके कम से कम 7697 तक जाने की संभावना है।

इस सप्‍ताह निवेशक पेट्रोनेट एलएनजी, गुजरात स्‍टेट पेट्रो, भारती एयरटेल, श्रेई इंफ्रा, पुंज लायड, मीक इलेकट्रॉनिक्‍स, एस्‍सार शीपिंग, सुजलॉन एनर्जी और जी न्‍यूज पर ध्‍यान दे सकते हैं।

March 02, 2009

शेयर बाजार में अगली गिरावट से पहले पुलबैक रैली संभव

‘अवर इकॉनामी आर लैस इफेक्‍टेड देन अदर्स...’ भारत दुनिया भर की मंदी से अलग है, देश की आर्थिक विकास दर को कोई आंच नहीं आएगी, भारतीय अर्थव्‍यवस्‍‍था स्‍थानीय मांग पर आधारित है...जैसी बात कहकर आम जनता और निवेशकों को भ्रम में रखने वाले हमारे अर्थशास्‍त्री नेताओं और ब्‍यूरोक्रेटस को अब पता चलने लगा है कि वाकई अमरीकी व यूरोपीय मंदी हमारी तरफ तेजी से बढ़ रही है। शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट से पहले केवल आम चुनाव तक एक पुलबैक रैली की संभावना है जिसे हमारे यहां सुधार की संज्ञा दी जा रही है लेकिन स्थिति खराब होने के आसार अधिक है।

आर्थिक विकास की दर को नौ से आठ और फिर सात फीसदी बताने वाले अर्थशास्‍त्री अब स्‍वीकार कर रहे हैं कि यह 5.3 से 5 फीसदी ही रह सकती है। आम उपभोक्‍ता वस्‍तुओं की मांग घटने से ही महंगाई दर 3.36 फीसदी पहुंची हैं। जबकि हकीकत में जीवन की जरुरत वाली वस्‍तुओं के दाम वाकई उतने नहीं घटे हैं जितनी महंगाई दर का कम होना बताया जा रहा है। औद्योगिक उत्‍पादन के साथ अब कृषि क्षेत्र भी विकास दर में गिरावट दिखा रहा है। ऐसे में लोकसभा चुनाव जीतने के लिए मौजूदा यूपीए सरकार ने सरकारी तिजोरी पूरी तरह खोल दी है और देश का कीमती विदेशी मुद्रा भंडार साफ हो रहा है। केंद्र सरकार की देखादेखी जिन राज्‍यों में कांग्रेस की सरकारें नहीं है वे भी आम आदमी का वोट हासिल करने के लिए दानवीर बनती जा रही हैं।

सरकारी दानवीरता के अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भी विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा है जिससे भावी खतरे को भांपते हुए स्‍टैंडर्ड एंड पुअर ने देश की रेटिंग को स्थिर से नकारात्‍मक कर दिया है। इस एजेंसी ने भारतीय बाजार और कार्पोरेट सैक्‍टर में निवेश न करने की सलाह दी है। विदेश में रह रहे भारतीय बेरोजगार होकर देश लौटने लगे हैं। इन नकारात्‍मक कारकों को देखते हुए यदि चालू तिमाही के बाद आर्थिक रिकवरी के संकेत नहीं मिलते हैं तो हमें और बुरे माहौल से गुजरने के लिए तैयार रहना होगा।

अमरीका और यूरोप में कार्पोरेट सैक्‍टर तगड़े परिवर्तन कर कंसोलिडेशन की तैयारी की जा रही है। निजी उद्योगों का राष्‍ट्रीयकरण किया जा रहा है। ऐसे में हमारे घरेलू कार्पोरेट सैक्‍टर को भी अपने आपको कसने की तैयारी करनी होगी। निवेशक अब वही कंपनियों को निवेश के लिए चुनें जिनकी भावी योजनाएं और भविष्‍य वास्‍तविकता पर आधारित हों। भारी भरकम सम्‍पदा और कारोबारी अवसर जिन कंपनियों के पास हों, उन्‍हें प्राथमिकता दे। साथ ही यह निवेश ऐसी कंपनियों के शेयरों का भाव वास्‍तविक होने पर करें क्‍योंकि बाजार कभी भी भागकर नहीं जाता।

सप्‍ताह का पहला दिन शेयर बाजार के लिए खास रहेगा क्‍योंकि रिलायंस इंडस्‍ट्रीज और रिलायंस पेट्रोलियम के निदेशक मंडलों की बैठक होगी जिसमें रिलायंस पेट्रोलियम के विलय का फैसला होगा। आने वाले दिनों में रिलायंस इंडस्‍ट्रीज और रिलायंस पेट्रोलियम के शेयरों में खासी हलचल देखने को मिल सकती है। निवेशकों को रिलायंस पेट्रोलियम के शेयरों से दूर रहना चाहिए क्‍योंकि इस विलय से जो भी फायदा होगा वह रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के शेयरधारकों को होगा।

2 मार्च से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) के सेंसेक्‍स का रेसीसटेंस 9095 अंक। सेंसेक्‍स के 8595 अंक टूटने पर 8345 आने के आसार। नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) के निफ्टी का रेसीसटेंस 2826 अंक। निफ्टी के 2676 अंक से टूटने पर 2585 अंक जाने के आसार हैं।

सूरत कॉमर्शियल कार्पोरेशन के इक्विटी विश्‍लेषक गोपाल मोदी का कहना है कि 2 मार्च से शुरु हो रहे सप्‍ताह में 8925 के ऊपर तेजी का कारोबार करें जबकि 8746 के नीचे मंदी का कारोबार करने की सलाह। 8925 के ऊपर तेजी का कारोबार करते समय स्‍टॉप लॉस 8835 का रखें। इसके ऊपर में 9074-9125 तक जाने की संभावना। इससे ऊपर जाने पर 9215 तक पहुंचने के आसार। सेंसेक्‍स के 8746 अंक से टूटने पर 8602-8546 के बीच पहला सपोर्ट। 8546 का स्‍तर टूटने पर 8454-8401 अंक देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में 8746 का स्‍तर टूटने पर तेजी का कारोबार करना जोखिमी हो सकता है।

मोदी का कहना है कि 9070 तक पहुंचने से पहले यदि सेंसेक्‍स 8870 के नीचे बंद होता है या बंद होने के आसार दिखाता है तो यह 8746 तक करेक्‍शन कर सकता है। इस स्‍तर के टूटने की स्थिति में भारी गिरावट की आशंका है। इस तरह जोन और स्‍तर का अध्‍ययन यह बताता है कि अगले सप्‍ताह शेयर बाजार दो तरफा घटबढ़ करेगा।

तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि शेयर बाजार में और गिरावट से पहले पुलबैक दिखाई देगा। वे कहते हैं कि बीएसई सेंसेक्‍स को 8631-8619 पर काफी कठिन सपोर्ट मिलने के आसार हैं। यदि सेंसेक्‍स इस स्‍तर से नीचे आता है तो यह बुरी तरह टूट सकता है। जब तक सेंसेक्‍स 8631 के ऊपर है, इसमें 9725-8600 के बीच उतार चढाव दिखता रहेगा। साप्‍ताहिक रेंसीसटेंस 9053 और 9433 पर देखने को मिल सकता है। सेंसेक्‍स गिरकर 8600 के नीचे आता है तो यह कम से कम 8295 तक आएगा।

इस सप्‍ताह निवेशक ग्‍लेक्‍सोस्मिथक्‍लाइन कंज्‍यूमर, एनटीपीसी, हिंदुस्‍तान डोर ओलिवर, गोदरेज कंज्‍यूमर प्रॉडक्‍टस, बैंक ऑफ बड़ौदा, गुजरात स्‍टेट पेट्रो, जी न्‍यूज, रिलायंस नैचुरल रिसोसर्स, भारत अर्थ मूवर्स और हिंदुस्‍तान यूनिलीवर पर ध्‍यान दे सकते हैं।