लो आखिरकार बाबा रामदेव ने भी लोकप्रियता को और बढ़ाने एवं जनपथ-राजपथ पर बैठे नेताओं से निकटता बढ़ाने के लिए भूख हड़ताल का सहारा लेने का फैसला कर ही लिया। अन्ना हजारे के बताए रास्ते पर चलकर वे भी लोगों के दिलों पर राज करने या दिल्ली में बैठी सरकार के साथ एसी वाले कमरों में जगह चाहते हैं।लेकिन बाबा को हड़ताल पर बैठने से पहले अपनी सारी संपत्ति और दान का हिसाब जनता को देना चाहिए क्योंकि अधिकतर हिंदुस्तानी यह मानते हैं कि उनकी सम्पत्ति काला धन तो नहीं है ? क्योंकि भाई एक दशक पहले बाबा रामदेव साइकिल पर चलते थे। साइकिल यदि पंक्चर हो जाती थी, तो उसे सुधरवाने के लिए उन्हें पैसे जुटाने के लिए मशक्कत करनी पड़ती थी। लेकिन आज बाबा हेलीकॉप्टर में सफर करते हैं। यह पैसा कहां से आया, जरा हमें भी बताइए ताकि बसों और ट्रेनों से उठकर हम भी हेलीकॉप्टर में पहुंच जाएं। पिछले 12 साल में बाबा ने जो धन इकठ्ठा किया है, उसका उन्हें हिसाब देना चाहिए।
अगर बाबा रामदेव की संपत्ति पर नजर डालें तो पतंजलि योगपीठ की कीमत 1000 करोड़ रुपए है। वहीं स्कॉटलैंड में रिट्रीट लैंड करीब 15 करोड़ रुपए की और साथ ही एक धार्मिक टीवी चैनल में बाबा के ट्रस्ट की हिस्सेदारी है। हालांकि, बाबा इस टीवी चैनल में अपनी हिस्सेदारी पर गलत बता रहे हैं और हिस्सा बेचने वाले कह रहे हैं कि बाबा ने हमें हिस्सा खरीदने के पैसे दिए। इसके अलावा दिव्य योग मंदिर, दिव्य योग आश्रम, कृपालु बाग, दिव्य फॉर्मेसी, पतंजलि हर्बल, पतंजलि योग विश्वविद्यालय, हर्बल वाटिका व आयुर्वेदिक चिकित्सा और अनुसंधान संस्थान पर बाबा का अधिकार है। रामदेव को आश्रम की दवाईयों की बिक्री से 25 करोड़ की आय होती है। योग किताबों और सीडी से उन्हें 10 करोड़ की आया अनुमानित है। वहीं उनके स्पेशल कैंप में शामिल होने की कीमत पांच हजार रूपए साप्ताहिक है। इस कैंप में सालाना 50 हजार लोग आते हैं।
बाबा पहले कह चुके हैं कि उनका किसी बैंक में खाता नहीं है। बैंक में खाता होने का मतलब यह नहीं है कि जिनका खाता है वे ही अरबपति हैं। आपके पास किसी भी रुप में पैसा हो, वही मालदार है। रामदेव बाबा को कुछ समय पहले नागपुर में एक मीडिया हाउस ने अपने अखबार के लोकार्पण के लिए बुलाया था। उस समय बाबा ने 20 लाख रुपए नकद में उनके पंतजलि योगपीठ को देने एवं उनके आने जाने के लिए चार्टर्ड विमान और काजू, बादाम सहित रईस खाने की मांग की थी। 20 लाख रुपए और चार्टर्ड विमान के भाड़े को जोड़ने के बाद उस मीडिया हाउस ने उन्हें नागपुर नहीं बुलाया। ऐसी ही मांगें ढ़ेर जगह से सुनी जाती है। भरोसा न हो तो खुद ही उनसे किसी कार्यक्रम में शरीक होने के लिए कहिए वे अपनी फीस बता देंगे। जिस मंच पर बैठेंगे वहां से चाहते हैं कि केवल उनको ही तगड़ा कवरेज किया जाए। बाबा बन गए लेकिन लालसा नहीं गई, प्रचार की लालसा, पैसे की लालसा। झूठ बोल रहे हैं बाबा, जब धन नकद में ले लिया तो बैंक खाते की जरुरत ही क्या है। बाबा रामदेव की सारी संपदा की जांच होनी चाहिए और ट्रस्ट के लिए सरकारी अधिकारी को कर्ता के रुप में नियुक्त किया जाना चाहिए। बाबा जी पहले अपने घर में सफाई कीजिए इसके बाद भूख हड़ताल पर उतरिए, जनता आपका साथ देगी अन्यथा ढोंगबाजी बंद कीजिए और रूपया बटोरकर अपने स्कॉटलैंड के रिट्रीट लैंड में ऐश करिए।
21 comments:
Aap mujhe Digvijay Singhi..maloom padte hai..jyada vaqt barbad nahi kar sakta.
एकदम सही बात है, यह पैंतरा भी किसी स्वार्थ के चलते अपना रहें होंगे ।
Kamal Sharma ji, Kitne paise liye ye blog likhne ke?
अज्ञात महोदय आपने पूछा है कि इस ब्लाग को लिखने के कितने पैसे लिए। आपको हिसाब जरुर दूंगा लेकिन पहले अपने में हिम्मत जुटाकर अपना नाम और कांटेट नंबर लिखकर भेजिए। बेनामी टिप्पणियों के बजाय नाम और नंबर के साथ इन चीजों को लिखिए। कमजोर मत बनिए। इंतजार रहेगा आपके नंबर का ताकि आपको पैसे का हिसाब दिया जा सके। भडास डॉट काम पर भी पढिए बाबा के कारानामे जिसमें स्टॉप डयूटी चोरी के मामले अदभुत है।
इनका यह दांव तो शर्तिया फेल होने वाला है. हालांकि मैं चाहता हूँ कि सफल हो. दरअसल इरादे-इरादे में फर्क होता है. अन्ना का इरादा नेक था, निस्वार्थ था, जो यहाँ किसी सूरत नहीं दिखती...
kamal sharma ji na bilkul sahi likha hai. baba apna hisab data nahi hai.aue arbo rupee ki property banaya batha hai.
i m agree of kamal sharma blogs
robin kasuhik
9910259297
aap congress party ke agent lagte hain
बाबा रामदेव का नाटक भरा आंदोलन पांच सितारा पंडाल से कल शुरू होने जा रहा है। इसके पूर्व बाबा ने दिल्ली के एक होटल में सरकार के दो प्रतिनिधि श्री कपिल सिब्बल एवं श्री सुबोधकांत सहाय से एक गुप्त बैठक करने का प्रयास किया जिसकी जानकारी प्रेस मीडिया वालों को नहीं देकर शक की बुनियाद खड़ी कर दी।
पहला शक- बाबा को यह बताना चाहिये कि उनको गुप्त बैठक करने की क्या जरूरत पड़ गई जिसमें उनके साथ एक भी दूसरा जन प्रतिनिधि नहीं था? सिर्फ उनके संस्थान का ही एक सदस्य क्यों था?
दूसरा शक- लाखों के इस भव्य पंडाल की योजना किसके अनुमति से और क्यों बनाई गई?
तीसरा शक- बाबा जी के साथ एक भी सामाजिक कार्यकर्ता क्यों नहीं है, सिर्फ धार्मिक लोगों में भी तीसरी या चौथी श्रेणी के लोगों की ही भरमार है।
चौथा शक- बाबा के इस आंदोलन को किस समूह द्वारा चलाया जा रहा है। उनके नामों को अभी तक सामने क्यों नहीं लाया गया ?
बाबा रामदेव-ढोल की पोल
यह बात उसी समय स्पष्ट हो गई थी जब राजनीति के धुरंधर माने जाने वाले श्री कपिल सिब्बल एवमं श्री सुबोधकांत सहाय के साथ गुप्त रूप से समझौता कर लेने के बाद योगी-ढोंगी बाबा रामदेव का पांच सितारा सत्याग्रह विवाद के घेरे में आ गया। देश की करोड़ों जनता को धोखा देने वाले अविश्वासी बाबा के विश्वास पात्र आचार्य बालकृष्ण जी का लिखा पत्र देखकर सारी दुनिया चकित रह गई। पहले ही सत्याग्रह के नाम पांच सितारा पंडाल को लेकर एक लम्बी बहस को बाबा ने जन्म दे दिया। अब किस मुँह से ‘विश्वासघात और धोखेबाजी’ का आरोप सरकार पर मंढ़ रहे हैं? बाबा! । बाबा जी द्वारा अनशन के ठीक पहले दिन की गई गुप्त बैठक का गुप्त एजेन्डा सरकार की दो तरफा चाल का एक हिस्सा था। एक अन्ना हजारे समूह को कमजोर कर उनमें फूट डालना, दूसरा बाबा को सामने लाकर बाबा से गुप्त समझौते के तहत अन्ना हजारे द्वारा तैयार किये जा रहे मौसदे में विवाद पैदा करने के लिए तीसरे पक्ष को सामने खड़ा करना। जब बाबा ने इस गुप्त समझौते में इस बात की मांग रखी कि उनके द्वारा संचालित न्यास एवं ट्रस्ट को बैगर क्षति पंहुचाये सरकार उनको अन्ना हजारे के समकक्ष प्रधानता प्रदान करें। बस क्या था बाबा की कमजोर नस को राजनीति के खिलाड़ी तत्काल भांप गये कि यह योग बाबा योगी नहीं, ‘एक ढोंगी बाबा है।’ सरकार ने तत्काल अपने पैंतरे बदलने शुरू कर दिये। जैसे-जैसे दिन गुजरता गया ढोल की पोल खुलती गई।
कल मैंने चार प्रश्न किये थे उसे आज फिर से दोहरा रहा हूँ-
1.बाबा को यह बताना चाहिये कि उनको गुप्त बैठक करने की क्या जरूरत पड़ गई जिसमें उनके साथ एक भी दूसरा जन प्रतिनिधि नहीं था? सिर्फ उनके संस्थान का ही एक सदस्य क्यों था?
2.लाखों के इस भव्य पंडाल की योजना किसके अनुमति से और क्यों बनाई गई?
3.बाबा जी के साथ एक भी सामाजिक कार्यकर्ता क्यों नहीं है, सिर्फ धार्मिक लोगों में भी तीसरी या चौथी श्रेणी के लोगों की ही भरमार है।
4.बाबा के इस आंदोलन को किस समूह द्वारा चलाया जा रहा है। उनके नामों को अभी तक सामने क्यों नहीं लाया गया ?
- निर्भिक पत्रकार शम्भु चौधरी, कोलकाता।
अरविन्द जी केजरीवाल को हम विश्वास दिलाते हैं
हमारी लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ उस व्यवस्था से है जो इसका पोषन करती आ रही है। न कि किसी व्यक्ति विशेष या सरकार के नुमाईदों के साथ है। बाबा रामदेव ने जब काले धन और भ्रष्ट तंत्र की बात शुरू की तो एक विचारधारा के सभी लोगों का एक मंच पर जमा होना स्वभाविक सा था। इस क्रम में स्वामी अग्निवेश जी, श्री अन्ना हजारे, श्री अरविन्द केजरीवाल एवं किरण बेदी का एक साथ एक मंच पर आना इस लड़ाई को बल देने लगा।
अपने स्वभाव से उग्र श्री अन्ना हजारे ने इस लड़ाई को आर-पार की लड़ाई कर अनशन का मार्ग चुन लिया जबकि श्री बाबा रामदेव जी सरकार को सिर्फ खोखली धमकी देते रहे। अन्न जी ने जैसे ही इसका दिल्ली में अनशन शुरू किया बाबा को एकबार लगा कि उनका मुद्दा अन्ना जी ने हाईजेक कर उसे किनारे कर दिया है। वे एकबार मंच पर दिखे पर बड़े वेमन से मंच आये। तब तक देश की जनता पुरी तरह से अन्ना के आंदोलन से जुड़ चुकी थी। एक ही रात में अन्ना के नाम से केन्द्र सरकार हिल चुकी थी। पहले दिन आनाकानी करने वाल श्री सिब्बल जी एवं प्रनव दा के स्वर बदलने लगे। सरकार सभी बातों को क्रमवार मानते चली गई। बाबा को लगा कि उसे किनारा कर दिया गया हो, फिर ड्राफ्टींग कमिटि में खुद के नाम को न पाकर सिविल सोसाइटी द्वारा नामांकित कुछ नामों पर अपनी आपत्ति तक दर्ज करा दी। यही कसक बाबा को नागवार गुजरा जिसको लेकर वे एक योजना के तहत कार्य करने लगे। इस घटना के बाद अन्ना सहित उन सभी लोगों को बाबा के मंच पर आने न तो निमंत्रन दिया गया। न ही बाबा की तरफ से कोई ऐसी पहल की गई। कांग्रेस के चतुर राजनीतिज्ञों ने इस बीच के दरार को दो फाड़ करने के लिए जहाँ एक तरफ बाबा को एक ही मुद्दे पर तुल देने लगे तो दूसरी तरफ सिविल सोसाईटी के सदस्यों के साथ कड़ाई से पेश आने लगे। अन्ना के साथीगण इस दोहरी राजनीति के शिकार हाने लगे। इनको लगा कि बाबा की इस पहल से कांग्रस पार्टी इस ड्राफ्टिंग कमिटि की हवा निकाल देगी।
सबकुछ सिलसिले बार चल रहा था। बाबा को लगा कि अब वे कांग्रेस पार्टी के कहे चलकर अपना उल्लू सीधा कर लेगें। परन्तु वे अपने और पराये का फर्क नहीं समझ पाये। वे कांग्रेस के श्री कपिल सिब्बल एवं श्री सुबोधकांत सहाय को अपना विश्वासपात्र मान उनके बुलावे पर उनके मांद में वैगर किसी को बताये चुपचाप समझौता कर आये। मजे कि बात यह कि अपने एक सहयोगी द्वारा लिखित समझौते को पुरे दिनभर मीडिया से छुपाये रखा। खर! हम बाबा रामदेव की इस भूल को हमारी हार मानते हुए पुनः संगठित रूप से इस लडा़ई को आगे जारी रखेगें एवं बाबा रामदेव जी की प्रतिष्ठा को सम्मान करते हुए हम श्री अरविन्द जी को विश्वास दिलाते हैं कि हम सभी आपके साथ हैं। पूर्व में लिखे मेरे दोनों लेख को हटाने की घोषणा करते हुए आगे के आदेश की अपेक्षा करता हूँ।
-शम्भु चौधरी, कोलकाता
teri aisi ki taisi
कमल शर्मा जी एवं शम्भू चौधरी जी के विचार पढने के बाद इसमें अब कोई शंशय नहीं रह जाता कि इन जैसे महानुभवों के दृष्टिदोष का इलाज नहीं है,स्वामीजी के इतने स्पष्ट, इतने विशाल जनआंदोलन को देखने के बाद भी यदि ऐसे महनुभव स्वामीजी के बारे में ऐसे विचार ब्यक्त करें तो तो इस देश को भगवन भी बचा नहीं पाएंगे,भारत में जयचंद कि भरमार है, हाय रे कांग्रेसी और बामपंथी विचित्र दृष्टिकोण!!!!! मुझे लगता है कहीं न कहीं ये दोनों कांग्रेस के कालेधन के अवस्य भागिदार हैं.
Baba hosiyar hai. Usane khud ko vikhyat kar diya aur yah siddh kar diya ki sarkar ke mukhya logo ke pass kala dhan hai. Isliye ve kanoon nahi banayege. Aisa logo ne samajhha.
darbari bike huye insano se yahi ummid thi
suma hai aajkal juute polish karne ka dhandha sabse acchha hai sharma ji kya khyal hai shuru kiya jay kya yahi kam
August 10, 2011 4:35 PM
darbari bike huye insano se yahi ummid thi
suma hai aajkal juute polish karne ka dhandha sabse acchha hai sharma ji kya khyal hai shuru kiya jay kya yahi kam
August 10, 2011 4:35 PM
वाह भाई वाह शर्मा जी आप ठहरे ओजस्वी पत्रकार फिर भी बाबा की जड़े नहीं खोद पाए .अपना दीमक लगाओ और सबको बताओ की बाबा ने कौन सी बैंक में डकैती डाली जहा इतना माल निकला की बाबा की निकल पड़ी ताकि दूसरो का भी भला हो सके मुझे भी बाबा बनाने में कोई बुराई नहीं दिखती .
टके टके में मरवाने से अच्छा है की सारा देश बाबा बन कर हेलीकाप्टर से घूमे
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