क्रांतिकारी राज्य के नाम पर मार्क्सवादी और तृणमूल पार्टी के लोग पश्चिम बंगाल पर खूब गर्व करते हैं। हमारा बंगाल....हमारा कोलकाता....लेकिन इतनी दरिंदगी भी पश्चिम बंगाल में है यह सोचा नहीं जा सकता। महज एक तरबूज जिसकी कीमत दस रुपए से ज्यादा नहीं होगी के लिए एक नौ साल की लड़की की पश्चिम बंगाल के मालदा के भबानीपुर गावं में हत्या कर दी गई। इस नन्ही जान कुलसुम का दोष यह था कि उसने फ्रूट मंडी में एक तरबूत चुरा लिया था। लेकिन उसे चोरी बुरी बात है...समझाने के बजाय इतना बड़ा दंड दिया कि उसका जीवन ही छिन लिया। तीन स्थानीय कारोबारियों और एक ट्रक डाइवर ने इस लड़की को बिजली के खंभे के साथ बांधकर तब तक पीटा, जब तक कुलसुम मर नहीं गई। हैरत की बात यह है कि लोग तमाशाबीन की तरह इस कांड को देखते रहे और हत्यारों से ना तो इस लड़की को बचा पाए और ना ही इन चारों को ठोक पाए। भीड़ चाहती तो इन चारों की चटनी बना सकती थी लेकिन समझ नहीं आता कि आदमी की संवेदनशीलता कहां चली गई, मानवीयता कहां चली गई। हाथ ही नहीं उठे और बातें होती है कि पश्चिम बंगाल क्रांतिकारी राज्य है।
एक नादान लड़की की हत्या करने वाले क्रांतिकारी नहीं, नपुंसक है। राज्य में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं, खासा बंदोबस्त है लेकिन पुलिस सो रही है। राजनेता सो रहे हैं। बुद्धदेव को फिर कुर्सी पर आना है और ममता को कुर्सी लपकनी है। कुलसुम के मां-बाप बिलख रहे हैं, दो जने पकड़े गए है लेकिन भ्रष्ट पुलिस इन पैसे वाले कारोबारियों से पैसे लेकर सब रफा दफा कर देगी, यह तय है। पुलिस पर तो किसी को भरोसा ही नहीं है, पुलिस पर से क्यों भरोसा उठ गया है, यह चिंतन का विषय है। एसपी भूषण चंद्र मंडल के व्यवहार से यही लगता है कि मामला सेट हो गया है और एक नादान मौत पर पैसे की जीत होकर रहेगी। जनता को खुद जागना चाहिए और ऐसे दरिंदों को खुद सजा देनी चाहिए।
1 comments:
हे भगवान!
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