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“माँ… मैं गिर गया”

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माँ… मैं गिर गया, कुल्हाड़ी की एक चोट से। मेरी जड़ें काँप उठीं, पत्ते चुपचाप रो पड़े। कल तक छाया था मैं, थके पथिक का सहारा। आज ज़मीन पर पड़ा हूँ, अपना ही बोझ बनकर सारा। माँ… मैं गिर गया, पर दर्द मेरी लकड़ी में नहीं, उस हवा में है जो अब सूनी हो गई। #TreePain #FallenTree #SaveTrees #StopDeforestation #VoiceOfNature #NaturePain #EnvironmentalPoetry #PoemForNature #GreenEarth #EcoAwareness #NatureSpeaks #ProtectTrees #EarthCrying   #ClimateAwareness