Thursday, February 28, 2013

आम बजट वर्ष 2013-2014 हिंदी में


नई दिल्‍ली। केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदम्‍बरम द्धारा वर्ष 2013-2014 के लिए पेश आम बजट का पूरा हिंदी भाषण यहां पेश है। इसके अलावा बजट में किए गए मुख्‍य प्रावधानों को भी पढ़ा जा सकता है।

आम बजट वर्ष 2013-2014 मुख्‍य भाषण


बजट प्रावधान




Thursday, February 21, 2013

दुखियारे निवेशकों को कोर्ट से सहारा


भारतीय शेयर बाजार में मार खाए लाखों निवेशक बरसों से इस बात के लिए तड़प रहे थे और अंतत: रो धोकर चुप बैठ गए थे कि उनके पास पड़े ढ़ेरों शेयरों में कोई कारोबार नहीं हो रहा जिन कंपनियों एवं प्रमोटरों की बेईमानी का वे शिकार हुए हैं। शेयर बाजार के कोतवाल सेबी और स्‍टॉक एक्‍सचेंज बीएसई, एनएसई को भी लिखे खतों की तारीखें तक वे भूल चुके थे। निवेशक इन कारोबार न हो रही कंपनियों के शेयरों में फंसे अपने पैसे को पूरी तरह भूल चुके थे। जब इन कंपनियों के शेयरों में कामकाज ही नहीं हो रहा है तो कुछ पैसे तो दूर की बात निवेशक एक धैला तक नहीं पा सकते। लेकिन दिल्‍ली हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद अब इन हजारों निवेशकों को अपने लिए छोटी से आशा दिखाई दे रही है।

निवेशकों के हितों के लिए काम कर रही संस्‍था मिडास टच ने दिल्‍ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है जिसमें अदालत से यह अनुरोध किया गया कि वह 2048 कंपनियों के खिलाफ कदम न उठाने के लिए सेबी, बीएसई और एनएसई के विरुद्ध कार्रवाई करें। एमएस शाहू कमेटी की सिफारिशों के बावजूद सेबी जो अपने को निवेशकों के हितों के लिए काम करने का दावा करती है, ऐसी 2048 कंपनियों और उनके प्रमोटरों एवं निदेशकों के खिलाफ कदम न उठा सकी जिन्‍होंने आम निवेशक को चूना लगाया। इन कंपनियों के शेयरों में किसी न किसी वजह से कारोबार लंबे अरसे से बंद पड़ा है और निवेशकों के सामने सवाल यह है कि वे अपने शेयर कहां बेचें, किसे बेचें ताकि पसीने की गाढ़ी कमाई वापस मिल सके या कुछ हिस्‍सा तो मिल ही जाए।

मिडास टच इनवेस्‍टर्स एसोसिएशन ने तो सेबी, बीएसई और एनएसई के खिलाफ इस बात के लिए सीबीआई जांच तक बिठाने की मांग की है कि इन बेईमानी कंपनियों के विरुद्ध कार्रवाई न करने की मंशा का भी पता लगाया जाना चाहिए। वाकई आखिर ऐसी क्‍या मजबूरी है जो सेबी, बीएसई और एनएसई या फिर केंद्र सरकार इन कंपनियों एवं उनके प्रमोटरों और निदेशकों के खिलाफ कार्रवाई न कर पाई। सेबी के सामने ऐसी क्‍या मजबूरी है कि वह अपने संवैधानिक दायित्‍व को पूरा नहीं कर पा रही है। सेबी की इस लापरवाही का ही नतीजा है कि हजारों सूचीबद्ध कंपनियों के प्रमोटर और निदेशक आर्थिक जुर्माने और कार्रवाई से बेखौफ मस्‍तमौला होकर घूम रहे हैं।

मिडास टच की जनहित याचिका के मुताबिक 1450 कंपनियों में तकरीबन एक करोड़ निवेशकों के 58 हजार करोड़ रुपए फंसे हुए हैं। इस बेईमानी का ही नतीजा है कि भारतीय शेयर बाजार में सर्वाधिक घरेलू बचत के बावजूद निवेशकों की संख्‍या बढ़ी नहीं है। पिछले 20 सालों में निवेशकों की संख्‍या दो करोड़ से घटकर 80 लाख रह गई है। अचरज इस बात का है कि आर्थिक उदारीकरण और तेज अर्थव्‍यवस्‍था के साथ युवाओं की बढ़ती फौज के बावजूद हमारे यहां निवेशकों की संख्‍या तेजी से घटी है। असल में छोटे निवेशकों को न तो शेयर बाजार में भरोसा रह गया है और न ही प्रशासन में।

सेबी के पूर्णकालिक निदेशक एमएस शाहू की अध्‍यक्षता में बनी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि निलंबित कंपनियों के खिलाफ निवेशकों की समस्‍याओं का समाधान होना चाहिए। इस कमेटी ने यह पाया कि बीएसई में 1845 और एनएसई में 203 सूचीबद्ध (लिस्‍टेड) कंपनियां सूचीबद्धता के विभिन्‍न नियमों का पालन नहीं कर रही है। इनमें 425 ऐसी सक्रिय कंपनियां थीं जिनमें कारोबार निलंबित नहीं हुआ है। बीएसई में इनकी संख्‍या 365 एवं एनएसई में 60 थी। देर आए..दुरुस्‍त आए... अदालत का आदेश आने के बाद इन निलंबित कंपनियों एवं इनके कर्ताधर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई होती है तो हजारों निवेशकों का भला जरुर होगा। आप भी ऐसी किसी कंपनी में निवेश कर परेशान हैं तो इस पोस्‍ट पर टिप्‍पणी कर अपनी बात हम तक पहुंचा सकते हैं जिसे इस ब्‍लॉग पर जगह जरुर दी जाएगी।



Thursday, May 03, 2012

शेयर बाजार में तेजी 2014 मध्‍य से

मेरे शेयर विश्‍लेषक मित्र गोपाल मोदी काफी समय से कह रहे हैं कि शेयर बाजार में तेजी वर्ष 2014 के मध्‍य से देखने को मिलेगी।गोपाल मोदी के शेयर बाजार पर दृष्टिकोण को आप भी जानिएं। वे कहते हैं कि भारतीय शेयर बाजार में वहीं कहानी फिर से घट रही है जो वर्ष 2008 में घटी थी। वैसे इसकी शुरुआत विक्रम संवंत 2067 के आरंभ के साथ ही हो गई थी लेकिन मंदी का माहौल दिखने की शुरुआत पहली तिमाही के अंत के साथ हुई। भारतीय शेयर बाजार वर्ष 2011 के आरंभ से ही नकारात्‍मक कारकों से घिरा रहा है। ये कारक चाहे घरेलू हो या अंतरराष्‍ट्रीय।

निवेशक एवं छोटे खिलाड़ी हमेशा तेजी या मंदी के एक तरफा रुझान को ही देखते रहते हैं। यह एक निर्विवाद बात है एवं सभी इसे स्‍वीकार करते हैं कि हरेक निवेशक में ऐसे ही गुण कम ज्‍यादा होते हैं। वर्ष 2008 में अमरीका स्थि‍त एपी सेंटर से पैदा हुए भूकंप के झटके दुनिया भर में लगे एवं उनका ही ऑफ्टर शोक वर्ष 2011 के दौरान भी अनुभव किए जा रहे हैं। यदि यह अध्‍ययन गलत न हो तो शेयर बाजार के लिए यह स्थिति वर्ष 2014 के मध्‍य तक देखने को मिल सकती है। ऐसा मानने की वजह मैं अनेक बार बता चुका हूं। इन कारणों को फिर से एक बार देखते हैं।

भारतीय शेयर बाजार की साइकिल आठ वर्ष के चक्र में घूमती देखने को मिलती है। वर्ष 1986 से 1992 के आठ वर्ष में चौतरफा तेजी देखने को मिली। लेकिन वर्ष 1992 से 2000 के दौरान चार चरणों में उछाल एवं मंदी का चक्र देखने को मिला। वर्ष 2000 से 2008 के आठ वर्षों के दौरान फिर से एक बार सभी स्क्रिपों में तेजी देखने को मिली। जबकि वर्ष 2008 से 2016 के आठ वर्षों में लाख कोशिश के बावजूद भी तेजी का समय वर्ष 2014 के आरंभ या मध्‍य से शुरु होगा जो वर्ष 2016 की शुरुआत तक देखने को मिलेगा।

इस पूरे चक्र को घरेलू एवं वैश्विक फंडामेंटल भी सपोर्ट नहीं करते, यह आप देख सकते हैं। अमरीका एवं यूरापे लगातार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं एवं बीच बीच में चीन का नाम भी सुनने में आ रहा है। दुनिया के अधिकतर देशों में प्रकृति का प्रकोप देखने को मिला है। अपने भारत में वैश्विक मंदी की मार के साथ बढ़ती महंगाई दर को रोकने एवं भ्रष्‍टाचार पर लगाम लगाने जैसे अति गंभीर मुद्दों पर सरकार असहाय है। बढ़ती ब्‍याज दर एवं आर्थिक मंदी का सामना अगले तिमाही नतीजों में भारतीय कंपनियों पर कम-ज्‍यादा देखने को मिलेंगे। ऐसा लग रहा है कि बड़े आर्थिक सुधार की आशा भी निवेशकों को ठग रही है।

वर्ष 2014 ही क्‍यों : वर्ष 2014 में आम चुनाव होने वाले है...यह सरकार आम जनता में लो‍कप्रिय है या नहीं...यह तो जनता ही जानें लेकिन यह तय है कि परिवर्तन देखने को मिल सकता है। यह परिवर्तन चाहे देश की सत्ता संयुक्‍त मोर्चे को संभालने की हो या मौजूदा सरकार को जिसके राज में एक से एक बड़े घोटाले हुए। खैर, चाहे जो हो लेकिन 2014 के आम चुनाव के साथ कुछ अच्‍छा होने की आशा एवं सुधार की हवा जोर पकड़ेगी जो वर्ष 2016 की पहली तिमाही तक बाजार को ऊपर उठा सकती है।

वर्तमान स्थिति : वेव थ्‍योरी में हमेशा दूसरा वेव 50 से 61 फीसदी करेक्‍शन का होता है, जो कभी कभी 76.4 फीसदी तक जा सकता है। तीसरा वेव 161.8 फीसदी या इससे ज्‍यादा का होता है जबकि चौथा वेव फिर से एक बार करेक्‍शन का होता है जो 50 से 61 फीसदी के बीच देखने को मिल सकता है। पांचवां वेव थ्‍योरी का अंतिम वेव है जो तीसरे वेव के लैंस के साथ जुड़ा होता है। यदि तीसरा वेव 161 फीसदी तक देखने को मिलता है तो पांचवां वेव लंबा एवं तेज देखने को मिलता है जबकि तीसरा वेव 261 फीसदी से ज्‍यादा हो तो पांचवां वेव 100 से 161 फीसदी तक सीमित एवं धीमा बढ़ता देखने को मिलता है। वर्तमान में सेंसेक्‍स मंदी के तीसरे वेव में चल रहा है जिसके तहत 15745 तक के बॉटम से 161 फीसदी जितनी वेव एक से दो नंबर वेव तक होती है। यदि 15745 के पास तीसरी वेव पूरी होती मानी जाए तो मौजूदा मूवमेंट को वेव चार माना जाए तो यह 50 से 61 फीसदी होनी चाहिए यानी यह 17800 से 18265 के बीच हो सकती है एवं यह अपवर्ड करेक्‍शन देखने को मिल सकता है।

अब इस वेव दो के उच्‍च स्‍तर से वर्तमान बॉटम 15745 के 38 फीसदी यानी 17318 को पार कर बंद नहीं होता है तो ऐसे संयोग में 16650 जो कि 23 फीसदी का स्‍तर है, जिसके नीचे बंद होने के साथ मंदी का तीसरा वेव और बढ़ सकता है। ऐसा होता है तो बाजार को सपोर्ट 13600 से 13200 के बीच देखने को मिलेगा। इसकी वजह एक्‍सटेंशन रेश्‍यो 161 फीसदी होना है। यदि मौजूदा अपवर्ड करेक्‍शन 17800 या इससे थोड़ा ऊपर जाकर वेव चार पूरा करता है तो पांचवें वेव में बाजार 15700 टूटने के साथ प्रवेश कर सकता है जिसमें पहला सपोर्ट 13700 के पास देखने को मिलेगा। इस तरह सेंसेक्‍स वेव थ्‍योरी के मुताबिक किसी न किसी तरह 13700-13500 के पास सीधा अहम सपोर्ट पाएगा एवं कड़े स्‍टॉप लॉस के साथ कारोबार करना फायदेमंद रहेगा। जोन थ्‍योरी के मुताबिक एसएएस ए 1 जोन 16361 से 15717 के बीच आता है एवं अब मुख्‍य रेजिस्‍टेंस स्‍तर 17800 का है। 15700 का स्‍तर टूटने के साथ सीधा सपोर्ट 13633-12591 के पास दिखता है। सेंसेक्‍स के 17800 पार न करने की स्थिति में तेजी का कारोबार जोखिमी हो सकता है एवं फिर 16361 के नीचे उतरने के साथ 15700 का स्‍तर टूटने पर दिसंबर तक 13600 का स्‍तर देखने को मिल सकता है। विचार करने की बात यह है कि 17800 पार न करने के बीच तेजी का कारोबार जारी रखना चाहिए या नहीं। यदि जारी रखना हो तो स्‍टॉप लॉस का कड़ाई से पालन करें।

मेरा मानना है कि बाजार की मौजूदा नकारात्‍मक चाल में परिवर्तन 18500 के ऊपर लगातार बंद होने पर देखने को मिल सकती है। इससे पहले तो ऐसा संभव नहीं है। इससे पहले तो बाजार लगातार 12500-13500 से 20000 के बीच वर्ष 2014 के मध्‍य तक देखने को मिलता रहेगा। इस दौरान विभिन्‍न स्क्रिपों में तेजी देखते रहने को मिलेगी।

विक्रम संवंत 2068 के दौरान भारतीय शेयर बाजार में दो तरफा मूवमेंट दिखने की संभावना है। वर्ष की शुरुआत गिरावट के साथ होती है तो अं‍त जैसे तैसे सही रहने की संभावना है। वर्ष 2014 के मध्‍य तक सेंसेक्‍स के 19500 से 13500 की ट्रेडिग रेंज में रहने की संभावना है। ऐसे में पुरानी एवं परिचित कंपनियों में निवेश करना अच्‍छा होगा।



Saturday, August 27, 2011

ईआईएच : निवेशकों की पौ-बारह संभव

ओबेराय होटल की मालिक कंपनी ईआईएच के शेयर में एक बार फिर जोरदार हलचल शुरु हो गई है। यह हलचल सेबी द्धारा टेकओवर कोड में परिवर्तन किए जाने के तत्‍काल बाद आईटीसी अध्‍यक्ष वाई सी देवेश्वर के बयान के बाद आई। वाई सी देवेश्वर ने साफ कहा है कि हम ईआईएच में निवेश बढ़ाने के बारे में सोच रहे हैं।

आईटीसी के चेयरमैन वाई सी देवेश्वर का कहना है कि ईआईएच में और निवेश पर हमारा ट्रेजरी विभाग फैसला करेगा लेकिन मौजूदा भाव पर हिस्‍सेदारी बढ़ाने का यह अच्‍छा मौका है, हम निवेश करेंगे। आईटीसी के पास चार हजार से पांच हजार करोड़ नकदी है। जब हम इसे निवेश करेंगे तो इक्विटी में ही होगा और कारोबार की बात की जाए तो आप जानते ही हैं कि यह होटल्‍स में होगा। सेबी ने नए टेकओवर कोड में कहा किसी कंपनी में निवेश 15 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी किया जा सकता है और इसके बाद ओपन ऑफर लाना होगा। आईटीसी के पास ईआईएच की 14.98 फीसदी इक्विटी है।

आईटीसी के पास ईआईएच के शेयर वर्ष 2000 से हैं और यह अटकल हमेशा रही है कि आईटीसी ईआईएच के शेयरधारकों के लिए ओपन ऑफर लाएगी लेकिन कंपनी ने अनेक बार इससे इनकार किया है। ईआईएच में रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के अध्‍यक्ष मुकेश अंबानी को भी रुचि है और उन्‍होंने इसके 14.8 फीसदी शेयर ले रखे हैं। जबकि, प्रमोटरों के पास 34.4 फीसदी शेयर हैं।

ईआईएच के तीन प्रमोटरों ने पिछले साल मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की पूर्ण स्‍वामित्‍ववाली सब्सिडियरी रिलायंस इंडस्‍ट्रीज इनवेस्‍टमेंट एंड होल्डिंग्‍स प्रा. लि. को 5.54 करोड़ शेयर बेचे थे जो कुल इक्विटी का 14.12 फीसदी हिस्‍सा थी। इक्विटी बेचने वाले ये तीन प्रमोटर ओबेराय होटल्‍स प्रा. लि., अरावली पॉलिमर्स प्रा. लि. और पृथ्‍वी राज सिंह ओबेराय हैं। मुकेश अंबानी की कंपनी ने 14.12 फीसदी इक्विटी के लिए एक हजार करोड़ रुपए से ज्‍यादा चुकाएं। बाद में आए राइट इश्‍यू से रिलायंस सब्सिडियरी का हिस्‍सा बढ़कर 14.8 फीसदी पहुंच गया।

हालांकि, सेबी के नए टेकओवर कोड के बाद रिलायंस ने ईआईएच में अपनी हिस्‍सेदारी बढ़ाने के संबंध में कोई संकेत नहीं दिया है। लेकिन आईटीसी तैयारी कर रही है। आईटीसी पहले से ही होटल कारोबार में हैं लेकिन रिलायंस ने अब तक यह नहीं कहा है कि वह इस नए कारोबार में उतरेगी या यह केवल एक निवेश है।

आईटीसी के पास होटल लीला वेंचर के भी 13 फीसदी शेयर हैं। होटल लीला के प्रमोटरों के पास शेयरधारिता 54.6 फीसदी है इसलिए होटल लीला के अधिग्रहण का डर कम है। होटल लीला के प्रमोटर अपना 2800 करोड़ रुपए का कर्ज बोझ कम करने के लिए कुछ हिस्‍सा निजी इक्विटी खिलाडियों को बेचने पर विचार कर रहे हैं। लेकिन पिछले दिनों होटल लीला के शेयर प्रमोटरों की ओर से बाजार से खरीदे गए हैं।

टेकओवर कोड का अन्‍य लाभ वायसराय होटल्‍स को होगा। शेयर निवेशक राकेश झुनझुनवाला के पास इसके 11.5 फीसदी शेयर हैं, जबकि प्रमोटरों के पास 32.2 फीसदी शेयर हैं। वायसराय के 5.9 फीसदी शेयर अनिल अंबानी समूह की कंपनी सोनाटा इनवेस्‍टमेंट के पास है।जो निवेशक धैर्यवान हैं और लंबे समय में बेहतर रिटर्न चाहते हैं उनके लिए ईआईएच बेहतर शेयर हो सकता है। ईआईएच के टेकओवर के लिए आईटीसी के इरादों का जवाब देने के लिए मुकेश अंबानी मैदान में उतरते हैं तो निवेशकों की पौ-बारह होने की संभावना है।