Monday, July 06, 2009

आम बजट तय करेगा शेयर बाजार की चाल


भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार 6 जुलाई का दिन बेहद अहम है। आम बजट वाला यह दिन घरेलू शेयर बाजार की अगली चाल तय करेगा और यह भी पता चल जाएगा कि यदि तेजी की चाल आती है तो कौन-कौन से सैक्‍टर निवेशकों के लिए मध्‍यम से लंबी अवधि के लिए फायदेमंद साबित होंगे और यदि बाजार गिरता है तो किन सैक्‍टरों से बचना चाहिए। हालांकि, लंबी अवधि की दृष्टि से देखें तो आज किए जाने वाले कड़े निर्णय भी मीठे साबित हो सकते हैं। देश की अर्थव्‍यवस्‍था को बचाने और उसे गति देने के लिए काफी कुछ मरम्‍मत की जरुरत पड़ेगी।


वेबदुनिया में पिछले दिनों शेयर बाजार की रिपोर्ट में भारतीय उपमहाद्धीप की बदल रही स्थिति का जिक्र किया था कि श्रीलंका, पाकिस्‍तान और भारत में ऐसे कारक बन रहे हैं कि आने वाले वर्ष भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के होंगे। उसमें से सभी बातें सच साबित हुई हैं। हमने कहा था कि श्रीलंका में तमिल चीतों का दम निकल जाएगा, वह हो चुका है। पाकिस्‍तान में तालिबान को घेरकर मारे जाने की योजना पर इन दिनों स्‍वात घाटी में जोरशोर से काम चल जा रहा है। तीसरा, भारत में लोकसभा चुनाव के तहत एक मजबूत सरकार बगैर वामदलों के आई जिससे मध्‍यावधि चुनाव का खतरा टल गया।


6 जुलाई से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्‍स 15444 से 14144 के बीच घूमता रहेगा। जबकि, नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 4577 से 4222 के बीच रहेगा। तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि तत्‍कालिक मोर्चे पर बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज का सेंसेक्‍स 14995-15203-15401 अंक पहुंचने की संभावना है। लेकिन सेंसेक्‍स 14000 के नीचे बंद होता है तो यह 12717-11825-10932 अंक तक आ सकता है। सेंसेक्‍स 15600 को पार कर जाता है तो यह 16197-17980-19555 अंक तक जा सकता है।

कल्‍पतरु मल्‍टीप्‍लायर के वायस चेयरमैन आदित्‍य जैन का कहना है कि टेक्निकल और फंडामेंटल को छोड़कर बाजार पूरी तरह से आम बजट पर निर्भर है। विनिवेश-टैक्स रिफॉर्म और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी पैकेज के साथ एसटीटी-कैपिटल गेन पर बाजार की नजर रहेगी। असरकारक विनिवेश प्रक्रिया से राजकोषीय घाटे की भरपाई आसान होगी जिससे बाजार एक बड़ी छलांग लगाकर 15713-15789-15824/ 4655-4688 के नए स्तर बना सकता है।

जैन का कहना है कि मंदी से निपटने के लिए उद्योगों की दी गई रियायतें अगर सरकार जारी रखती है और कैपिटल मार्केट को अधिक मजबूत बनाने के लिए नए फॉर्मूले लाती है और साथ ही एफडीआई-एफआईआई का निवेश बढ़ाने की अनुमति कुछ क्षेत्रों में उदारतापूर्वक देती है तो बाजार 15900-15962-16000/ 4705 के स्तर को पार कर सकता है। बजट की वजह से बाजार के निचले स्तरों पर भी जाने की संभावना है। सरकार का घाटा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अगर रियायत की जगह टैक्स या सैस के फॉर्मूलों से खजाना भरने की खबर आती है तो तीव्र उतार-चढ़ाव के आसार ज्यादा हैं। निवेशक वैल्यूएशन वाले इंफ्रास्ट्रक्चर और बैंकिंग, थर्ड जेनरेशन वाले फर्टिलाइजर, केमिकल और पेस्‍टीसाइड वाले स्टॉक के साथ पावर और रूरल डेवलपमेंट से जुड़े शेयरों पर ध्यान दें।

प्‍योर ग्रोथ, नई दिल्‍ली के प्रबंध निदेशक आकाश जिंदल का कहना है कि निवेशक सोमवार को बजट आने से पहले इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, पीएसयू (सरकारी कंपनियां) और बैंकिंग (निजी एवं सरकारी) शेयरों में खरीद करें। लेकिन, निर्यातोन्‍मुखी कंपनियों और लाइफस्‍टाइल कंपनियों के शेयरों से पूरी तरह दूर रहें। बजट पेश होने के बाद पूरा बाजार इस आधार पर चलेगा कि बजट में प्रावधान कैसे आते हैं। यदि प्रावधान अनुकूल हुए तो सेंसेक्‍स में एक हजार अंक तक की तेजी आ सकती है और प्रतिकूल प्रावधानों से यह एक हजार अंक तक घट भी सकता है।


जिंदल कहते हैं कि बजट की बातों का पूरी तरह बाजार पर असर रहेगा, हालांकि दीर्घकाल की बात की जाए तो भारतीय शेयर बाजार अच्‍छा रहेगा। वे कहते हैं कि मुझे बीएसई सेंसेक्‍स में आने वाले दिनों में 30 फीसदी की बढ़त दिखाई दे रही है। जबकि, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, पीएसयू और बैंकिंग शेयरों में यह बढ़त 40-50 फीसदी रहेगी।

Monday, May 04, 2009

शेयर बाजार की दिशा का अहम समय

भारतीय शेयर बाजार के लिए चार मई से शुरु हो रहा सप्‍ताह बेहद अहम है और 16 मई तक शेयर बाजार अनेक उतार चढ़ाव का सामना करता रहेगा। स्‍वाइन फ्लू और राजनीतिक जोड़तोड़ इन दो सप्‍ताहों में शेयर बाजार की अगली दिशा तय कर देंगे। हालांकि, लोकसभा के नतीजों से ही यह पता चल सकेगा कि दिल्‍ली में किस दल के हाथ कुर्सी लगेगी और उसके मित्र दल कौन कौन होंगे लेकिन नतीजों से पहले ही जिस तरह की हलचल राजनीतिक गलियारों में हो रही हैं उसका आम जनता से मिले वोट से कोई सारोकार नहीं है। केवल व्‍यक्तिगत स्‍वार्थ को सर्वोपरि रखा जा रहा है क्‍योंकि जनता से तो अब पांच साल बाद मिलना है।

शेयर बाजार की इस रिपोर्ट में पिछली बार भारतीय उपमहाद्धीप की बदल रही स्थिति का जिक्र किया था कि श्रीलंका, पाकिस्‍तान और भारत में ऐसे कारक बन रहे हैं कि आने वाले वर्ष भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के होंगे। श्रीलंका में तमिल चीतों का काफी दम निकल गया है, जबकि पाकिस्‍तान में ओबामा प्रशासन ने जरदारी को कमजोर खिलाड़ी मानते हुए नवाज शरीफ से पींगे बढ़ाना शुरु कर दिया है ताकि उन्‍हें कुर्सी का आनंद देने की एवज में तालिबान को पाकिस्‍तान में घेरकर मारा जा सके। तालिबान से हर देश परेशान हैं और अमरीका को सभी का इस मुद्दे पर समर्थन मिलेगा। इस बीच, भारत में लोकसभा चुनाव के लिए चौथे चरण का मतदान होने की तैयारी चल रही है।

लोकसभा के लिए चौथे और पांचवें चरण के लिए मतदान होने से पहले दिल्‍ली में कुर्सी पाने के लिए जोड़तोड़ का गणित शुरु हो गया है। वामदलों की आलोचना के बीच उनके समर्थन की भी जोरशोर से कोशिश चल रही है। कांग्रेस के अलावा तीसरा मोर्चा भी केंद्र में सरकार बनाने के लिए वामदलों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। लेकिन वामदलों में से प्रकाश कारत तो खुद ही प्रधानमंत्री बनने की लालसा प्रकट कर चुके हैं। तीसरा मोर्चा सीधे सीधे नहीं चाहता कि कांग्रेस की सरकार बनें और उसे उसके साथ रहना पड़े। हालांकि ऐसा साथ देश हित में कम, ब्‍लैकमेलिंग की राजनीति के लिए ज्‍यादा होगा। तीसरा मोर्चा चाहता है कि सरकार वह खुद बनाए और कांग्रेस समर्थन दे ताकि सब कुछ उसके हाथों में रहें। भाजपा भी जोर लगा रही है कि उसके बिछड़े साथी और यूपीए से नाराज दल उसके साथ आ जाएं तो आडवाणी का सपना पूरा हो सके। भाजपा के एक नेता ने तो यहां तक कहा है कि उन्‍हें वामपंथियों से भी हर्ज नहीं हैं। यानी दक्षिण और वाम मिलकर दिल्‍ली की कुर्सी पर बैठ जाएं।

एक थ्‍योरी यह भी उभर रही है कि इन छोटे छोटे दलों का सफाया करने के लिए क्‍यों नहीं कांग्रेस और भाजपा ही दोस्‍ती कर लें। खैर! जो भी हो लेकिन यह जोड़तोड़ शेयर बाजार पर गहरा असर छोड़ेगा। कांग्रेस या भाजपा की नीतियों में खास फर्क नहीं है इसलिए इनके सत्ता में बैठने को बाजार सामान्‍य तरीके से लेगा लेकिन तीसरे मोर्चे की सरकार आने पर शेयर बाजार बड़ा गोता लगा सकता है। राजनीति के इस सर्कस में चल रहे खेल पर निवेशकों को काफी सचेत होकर नजर रखनी होगी क्‍योंकि ऐसा न हो कि आज सर्कस में जो जमूरा है वह कहीं रिंग मास्‍टर न बन जाएं और रिंग मास्‍टर जमूरा।

4 मई से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्‍स 11855 से 10888 के बीच घूमता रहेगा। जबकि, नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 3622 से 3322 के बीच रहेगा। लेकिन सेंसेक्‍स के लिए 11588 अंक और निफ्टी के लिए 3533 अहम स्‍तर हैं। इन स्‍तरों के ऊपर शेयर बाजार में तेजी का नया दौर शुरु हो जाएगा। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने स्‍वाइन फ्लू पांचवें लेवल का बताया है और यदि छठें लेवल में प्रवेश करने के साथ एशियाई देशों में फैल गया तो बाजार के लिए भी घातक होगा। इस बीच, विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में फरवरी में 2436 करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की लेकिन मार्च में 530 करोड़ रुपए और अप्रैल में 6508 करोड़ रुपए की जोरदार शुद्ध खरीद की है जो सकारात्‍मक कारक है।

तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज का सेंसेक्‍स 11500 के ऊपर जाता है तो अगले रेसीसटेंस 12500-13000 हैं। स्‍टॉप लॉस 10700 का रखें। साप्‍ताहिक सपोर्ट 11000 और 10700 पर हैं जबकि साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 11600 पर है।

सूरत कॉमर्शियल कार्पोरेशन, सूरत के इक्विटी विश्‍लेषक गोपाल मोदी का कहना है कि अगले सप्‍ताह पहला रेसीसटेंस 11613-11690 है और दूसरा 11816-11900 के मध्‍य है। स्‍टॉप लॉस 11273 का कड़ा स्‍टॉप लॉस रखते हुए 11410 के ऊपर तेजी का कारोबार किया जा सकता है। यदि दुनिया भर के शेयर बाजारों में बड़ी तेजी दिखती है तो सेंसेक्‍स ऊपर में अधिकतम 12143 तक जा सकता है। सेंसेक्‍स यदि 11600 के पार बंद नहीं होता है और यह 11400 के स्‍तर को तोड़ देता है तो यह नीचे में 11160 अंक तक आने की आशंका है। इस स्‍तर के टूटने पर सेंसेक्‍स 10957-10880 और 10755-10677 तक जा सकता है।

इस सप्‍ताह निवेशक सुप्रीम इंडस्‍ट्रीज, फेडरल बैंक, टाटा कैमिकल्‍स, सेंचुरी टेक्‍सटाइल, जुआरी इंडस्‍ट्रीज, श्रीसीमेंट, शीपिंग कार्पोरेशन, बैंक ऑफ बड़ौदा, रिलायंस इंडस्‍ट्रीज, रिलायंस इंफ्रा, नेशनल फर्टिलाइजर, बजाज हिंदुस्‍तान, जयश्रीटी और नवीन फ्लोरिन पर ध्‍यान दे सकते हैं।

Monday, April 27, 2009

भारतीय शेयर बाजार नई तेजी की ओर


अंतरराष्‍ट्रीय इक्विटी विश्‍लेषक फर्म इलियटवेव ने जब यह कहा कि भारतीय शेयर बाजार का सेंसेक्‍स अगले 15 साल में एक लाख अंक पर पहुंच जाएगा तो अनेक निवेशकों और विश्‍लेषकों ने इसे हसंने के अंदाज में लिया कि आज क्‍या होगा, यह बताओं, 15 साल किसने देखें। लेकिन एशियाई बाजारों में आने वाले दिन भारतीय शेयर बाजार के होंगे। हो सकता है घरेलू शेयर बाजार चीन जैसे बाजार को भी पीछे छोड़ दें।

भारतीय शेयर बाजार के बेहद मजबूत बनने के अनेक कारक अब पैदा होते जा रहे हैं जिसमें अति धैर्यवान निवेशक भारी भरकम मुनाफा कमाने की स्थिति में होंगे। लेकिन इस खजाने को हासिल करने के‍ लिए आज किए गए निवेश पर धैर्य रखना होगा। यहां धैर्य रखने की समय सीमा पर एक बात साफ कर दूं कि धैर्य का मतलब यह कदापी नहीं हैं कि आज शेयर खरीदें और अगले 15 साल तक उन्‍हें न देखें। अपने निवेश पर बीच बीच में मुनाफावसूली करते रहें और हर गिरावट पर फिर से खरीद जरुर करते रहें। यह न तो इंट्रा डे ट्रेडिंग है और ना ही चुपचाप बैठने वाली सलाह।

भारतीय उपमहाद्धीप में हमारे शेयर बाजार के लिए जो सकारात्‍मक कारक पैदा हो रहे हैं वे भौगोलिक हैं। श्रीलंका में पिछले कई सालों से तमिल चीतों ने जो उत्‍पात मचा रखा था उसका एक स्‍तर पर अंत होने जा रहा है। तमिल चीतों की वजह से न तो श्रीलंका में शांति थी और न ही भारत चैन से रह पा रहा था। जब यह समस्‍या बर्दाशत की सीमा को पार कर गई तो श्रीलंका सरकार ने वह कदम उठाया जो सभी प्रयास के बाद उठाया जाता है। तमिल चीतों का सफाया होने के बाद भी कुछ वर्ष श्रीलंका के लिए कठिन होंगे लेकिन यदि वहां की सरकार ने कड़ाई से काम लिया तो वह एक जमाने की तरह फिर बेहतर प्रगति की ओर बढ़ता दिख सकता है। हमारे कुछ राजनीतिक दल वहां भारत सरकार का हस्‍तक्षेप चाहते हैं लेकिन यह श्रीलंका का मामला है और जब हम अपने यहां किसी दूसरे देश का हस्‍तक्षेप बर्दाशत नहीं कर सकते तो हमें वहां हस्‍तक्षेप करना भी नहीं चाहिए। जिन चीतों ने भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्‍या की, उनके बचाव के लिए सरकार को हस्‍तक्षेप नहीं करना चाहिए। इस सफाये से आने वाले वर्षों में हमें अपनी दक्षिण सीमाओं पर शांति मिल सकती है।

अब बात करते हैं पाकिस्‍तान की। पाकिस्‍तान में इन दिनों तालिबान धीरे धीरे इस्‍लामाबाद की ओर बढ़ रहा है। एक समय अमरीकी राष्‍ट्रपति ओबामा प्रशासन ने भी तालिबानियों से बात करने की इच्‍छा जता दी थी ताकि लंबे समय से चली आ रही इस समस्‍या का अंत हो सके। लेकिन लगता है ओबामा प्रशासन ने कई कारणों से अपनी नीति को थोड़ा बदला है। स्‍वात घाटी के बाद बुनेर जिले में आगे बढ़े तालिबानियों के इस्‍लामाबाद पहुंचने पर अमरीका जरुर कार्रवाई करेगा। इस समय केवल पाकिस्‍तानी फौज छोटे मोटे मोर्चे के मूड में है लेकिन खुलकर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। अमरीका पाकिस्‍तान में तालिबान को चारों तरफ से घेरकर मारना चाहता है। विश्‍व समुदाय इस तरह के आतंक से तंग आ चुका है। हालांकि, यह काम आसान नहीं है लेकिन इस पर काम चल रहा है। पाकिस्‍तान में तालिबान की कब्र खोदने में कुछ वर्ष लग सकते हैं लेकिन इसके बाद परमाणु भट्टियों से रहित पाकिस्‍तान के नव निर्माण में भारत की बड़ी भूमिका होगी क्‍योंकि उसकी जमीन एक समय भारत का ही हिस्‍सा थी।

अब बात हमारे देश की...देश इस समय लोकसभा चुनाव से गुजर रहा है। यह तो सभी को पता है कि अगली सरकार भी गठबंधन सरकार होगी लेकिन नतीजों से पहले जिस तरह हर छोटे दलों के नेता अपने स्‍वार्थों के लिए जोड़ तोड़ करने, मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक की जुगत कर रहे हैं वह तमाशा आम जनता अच्‍छी तरह देख रही है। अगली सरकार चाहे कांग्रेस की अगुवाई में बनें या भाजपा की में, लेकिन यदि स्‍थाई मामला न बना तो देश में मध्‍यावधि चुनाव होंगे जिसमें जनता कांग्रेस या भाजपा में से किसी एक को साफ बहुमत देकर सत्ता की चाबी सौंप सकती है। देश में अब युवाओं की संख्‍या सर्वाधिक है और यह वर्ग वाकई काम चाहता है और सारा हिसाब किताब साफ साफ। ऐसे में यदि राजनीतिक हितों की लड़ाई में मध्‍यावधि चुनाव हुए तो मंत्री बनने के लिए तड़पने वाले नेताओं का कैरियर खत्‍म हो सकता है। यह ऐसा मोड़ होगा जहां भारत में एक बार फिर बेहतर और मजबूत सरकार आने का मौका होगा। ये तीन ऐसे कारक हैं जो भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था और बाजार के लिए मील का पत्‍थर साबित होंगे।

27 अप्रैल से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में शेयर बाजार केवल तीन दिन ही कारोबार करेगा। 30 अप्रैल गुरुवार को लोकसभा चुनाव के लिए मुंबई में मतदान होने की वजह से शेयर बाजार बंद रहेगा। 1 मई को महाराष्‍ट्र दिवस पर शेयर बाजार बंद रहेगा। गुरुवार को बाजार बंद होने की वजह से एफ एंड ओ अप्रैल सीरिज का निपटान बुधवार को होगा।

चालू सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्‍स 11569 के ऊपर बंद होने पर 11877 अंक तक पहुंच सकता है। इसे 10922 पर सपोर्ट मिलेगा। जबकि, नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 3555 के ऊपर बंद होने पर 3644 अंक तक पहुंच सकता है। इसे 3355 पर सपोर्ट मिलेगा।

तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि शेयर बाजार में इस समय तेजडि़यों और मंदडि़यों के बीच युद्ध छिड़ा हुआ है। दोनों बाजार पर छाने की कोशिश में लगे हुए हैं। सेंसेक्‍स के 11400 के ऊपर रहने पर अगले गंभीर रेसीसटेंस 12500-13000 हैं। साप्‍ताहिक सपोर्ट 11000 और 10700 पर हैं जबकि साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 11400 पर देखने को मिलेगा। शार्ट टर्म और पोजीशनल निवेशक 10700 को बेंचमार्क के रुप में इस्‍तेमाल करें एवं इसे सामने रखते हुए निकट भविष्‍य के लिए लांग पोजीशन बनाए रख सकते हैं।

कल्‍पतरु मल्‍टीप्‍लायर लि. भोपाल के वायस चेयरमैन आदित्‍य एम. जैन का कहना है कि 27 अप्रैल से शुरु होने वाले सप्‍ताह में बीएसई सेंसेक्‍स के रेसीसटेंस स्‍तर 11368-11407-11488-11542-11600-11662-11723-11778-11824-11893-12009-12073-12128-12170-12236-12303 हैं। जबकि, सपोर्ट स्‍तर 11280-11192-11031-10958-10902-10834-10761-10703-10651.10589-10532-10438-10362-10303-10216 है। नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज के निफ्टी के रेसीसटेंस स्‍तर 3502-3523-3554-3588-3601-3626-3668-3690-3716-3747-3776-3799-3834-3858 है। जबकि, सपोर्ट स्‍तर 3464-3443-3414-3393-3369-3345-3322-3294-3267-3246-3218-3200-3178-3151-3117-3100 है।

इस सप्‍ताह निवेशक काकतिया सीमेंट शुगर्स, फेडरल बैंक, दिवान हाउसिंग, एचडीआईएल, श्री सीमेंट, अबान ऑफशोर, प्रोक्‍टर एंड गेम्‍बल, पेपर प्रॉडक्‍टस, बीजीआर एनर्जी सिस्‍टम्‍स, बैंक ऑफ बड़ौदा, ग्‍वालियर कैमिकल इंडस्‍ट्रीज, रिलायंस इंफ्रा, रेडिंग्‍टन, जेएसडब्‍लू स्‍टील, जिंदल शॉ, जिंदल ड्रिलिंग, एक्सिस बैंक और जेएसडब्‍लू होल्डिंग्‍स पर ध्‍यान दे सकते हैं।

Monday, March 09, 2009

शेयर बाजार को आखिरी धक्‍का मारने की तैयारी !

मंदी में डूबे शेयर बाजार को क्‍या अब आखिरी धक्‍का मारने की तैयारी हो रही है। आम निवेशक के विचारों को आगे रखें तो शेयर बाजार में मंदी का अंत नहीं है और उन्‍हें ऐसा लगता है सब कुछ जीरो हो जाएगा। लेकिन ऐसा है नहीं। आम निवेशक की मनोस्थिति में उसे जीरो के अलावा कुछ नहीं दिख रहा जबकि अंधेरे के बाद उजाला और उजाले के बाद अंधियारा प्रकृति का नियम है।

शेयर बाजार में यह कोई पहली बार मंदी नहीं आई है। ऐसा कई बार हुआ है लेकिन अब तक निचले और आकर्षक स्‍तर पर लेवाली कर फिर लौटी तेजी में मुनाफाकमाने वाले इस बार की मंदी में गच्‍चा खा गए हैं। हर घटे स्‍तर को निचला स्‍तर मानकर शेयर खरीदने वालों ने पैसा कमाया ही नहीं, बल्कि गंवाया ही है। शेयर बाजार की तलहटी का पता न लगते देख अब ऐसे निवेशकों ने खरीद रोक दी है। मंदडि़यों ने पूरे देश को ही नहीं बल्कि सारी दुनिया को मंदी में उतार दिया है। बस बेचो..बस बेचो...यही एक शब्‍द सब जगह गुंज रहा है। लेकिन हर बार ऐसा हुआ है पूरी तरह मंदी या तेजी में डूबा देने के बाद खिलाड़ी खेल बदलते हैं।

यदि आपको याद हो तो दिसंबर 2008 में हर कोई मानकर चल रहा था कि रिलायंस पावर का आईपीओ लिस्‍टेड होते समय सेंसेक्‍स को 27, 30 और 35 हजार पहुंचने से कोई रोक नहीं सकता। उस समय जिसने भी गिरावट की बात की या मुनाफावसूली की, उस पर हर कोई हंसता था। नवंबर से जनवरी 2009 के दौरान बार बार यह कहा जा रहा था कि यह समय मुनाफा वसूली का है। मुनाफावसूली करते रहना ज्‍यादा बुद्धिमानी का खेल होगा। पेड़ चाहे कितना लंबा हो जाए वह आसमान को छू नहीं सकता....लेकिन अधिकतर निवेशकों ने इसे नजरअंदाज कर दिया और घाटे में उतर गए।

मंदी में आकंठ डूबे शेयर बाजार में धीरे धीरे खेल पलटने की तैयारी चल रही है। सेंसेक्‍स की तलहटी 6994 का दिख रहा है और यदि यहां कोई छोटी दुर्घटना होती है तो यह 6700 अंक तक जा सकता है। लेकिन यहां से शेयर बाजार की स्थिति पलटती हुई दिख रही है। हालांकि, एक बात साफ कर लें कि अब जो तेजी होगी वह राकेट की गति से नहीं आएगी। यदि निवेशक यह मान रहे हों कि बाजार अपनी इस तलहटी से सीधे 15 या 21 हजार अंक पहुंच जाएगा, वे इस भ्रम में न रहें। बाजार के बढ़ने पर बीच बीच में बिकवाली दबाव साफतौर पर दिखेगा जो सेंसेक्‍स को अपनी पिछली ऊंचाई तक पहुंचाने में काफी समय लग सकता है।

शेयर बाजार के महाखिलाड़ी अब आम चुनाव के इस माहौल में अनेक झूठ और सच के सहारे निवेशकों से उम्‍दा कंपनियों के शेयर पूरी तरह निकलवाने का प्रयास करेंगे ताकि बेहद सस्‍ते में ये शेयर खरीदकर वे अपने पोर्टफोलियों को मजबूत बना सकें। आम निवेशक अब दिल से नहीं दिमाग से काम लें और अच्‍छी कंपनियों के शेयर न बेचें। याद रखें इस बाजार में हर बार मंदी के बाद तेजी लौटी है। खुद निवेशक भी होमवर्क करें और पढ़ने के साथ सारी घटनाओं पर नजर रखें एवं अनके अर्थ सही दिशा में निकालने की कोशिश करें। कहावत है खुद को स्‍वर्ग जाना हो तो खुद को ही मरना पड़ता है। अमरीका और यूरोप में मंदी के बीच भारत में औद्योगिक फंड, एफआईआई, लोकल फंड और बड़े खिलाड़ी शेयर बाजार को ढीला रखने का प्रयास करेंगे लेकिन चतुर निवेशक अपने पोर्टफोलियों में वे बेहतरीन शेयरों को शामिल कर सकते हैं जो मंदी के इस आखिरी धक्‍के में तलहटी पर होंगे।

9 मार्च से शुरु हो रहा नया सप्‍ताह शेयर बाजार के लिए छोटा सप्‍ताह है क्‍योंकि शेयर बाजार में 10 और 11 मार्च को अवकाश रहेगा। नए सप्‍ताह में केवल तीन दिन ही कारोबार होगा। नौ मार्च से शुरु हो रहे सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्‍स 8585 से 7979 के बीच घूमता रहेगा। जबकि, नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 2727 से 2424 के बीच कारोबार करेगा।

शेयर बाजार के लिए मार्च महीना अच्‍छा नहीं रहा है। पिछले 16 साल में से 12 साल मार्च महीने ने नकारात्‍मक रिटर्न दिया है। केवल चार साल ही मार्च महीने ने सकारात्‍मक रिटर्न दिया है। पिछले वर्षों में मार्च महीने में औसतन 3.5 फीसदी नकारात्‍मक रिटर्न मिला है। आने वाले दिनों में बाजार की नजर कार्पोरेट टैक्‍स की जमा होने वाली राशि पर रहेगी। यदि इस टैक्‍स में कोई असामान्‍य कमी देखने को मिली तो शेयर बाजार का बंटाढार हो सकता है।

सूरत कॉमर्शियल कार्पोरेशन के इक्विटी विश्‍लेषक गोपाल मोदी का कहना है कि अगले सप्‍ताह के लिए बैलेंस पाइंट 8378 के मुकाबले पिछला बंद स्‍तर 8325 के कम होने की वजह से नरमी का रुख दिखाता है। बाजार में उतार चढ़ाव सामान्‍य रहेगा। नई मंदी 8209 के नीचे, स्‍टॉप लॉस 8314 का रखें या 8443 से 8547 के बीच स्‍टॉप लॉस 8584 का रखें। 8200 का स्‍तर टूटने पर 7972 से 7811 तक गिरने की संभावना। यदि 7800 के नीचे सेंसेक्‍स आता है तो मंदी में रहे अन्‍यथा बढ़कर 8200 से 8395 आने के आसार। 7800 के नीचे सेंसेक्‍स के रहने पर यह 7662 से 7558 तक आ सकता है। तेजी का कारोबार 8550 के ऊपर करें और स्‍टॉप लॉस 8443 का रखें। तेजी के दौरान सेंसेक्‍स बढ़कर 8820 जाने के आसार लेकिन इसकी संभावना बेहद कम है।

तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि शेयर बाजार में अब अक्‍टूबर 2008 के निचले स्‍तर की परीक्षा होगी। हालांकि, पिछले सप्‍ताह पुलबैक की बात थी जो नहीं हो सका। नए सप्‍ताह में सेंसेक्‍स के लिए रेसीसटेंस स्‍तर 8378-8710-8762 होंगे। साप्‍ताहिक सपोर्ट 7994-7696 और 7278 होंगे। सेंसेक्‍स बढ़कर 8535 के ऊपर बंद होता है तो इसकी तलहटी 8047 तय है और यहां से पुलबैक देखने को मिलेगा। इस पुलबैक के तहत सेंसेक्‍स 9725 तक पहुंच सकता है। लेकिन यदि सेंसेक्‍स 8047 से तत्‍काल गिरता है तो इसके कम से कम 7697 तक जाने की संभावना है।

इस सप्‍ताह निवेशक पेट्रोनेट एलएनजी, गुजरात स्‍टेट पेट्रो, भारती एयरटेल, श्रेई इंफ्रा, पुंज लायड, मीक इलेकट्रॉनिक्‍स, एस्‍सार शीपिंग, सुजलॉन एनर्जी और जी न्‍यूज पर ध्‍यान दे सकते हैं।

Monday, March 02, 2009

शेयर बाजार में अगली गिरावट से पहले पुलबैक रैली संभव

‘अवर इकॉनामी आर लैस इफेक्‍टेड देन अदर्स...’ भारत दुनिया भर की मंदी से अलग है, देश की आर्थिक विकास दर को कोई आंच नहीं आएगी, भारतीय अर्थव्‍यवस्‍‍था स्‍थानीय मांग पर आधारित है...जैसी बात कहकर आम जनता और निवेशकों को भ्रम में रखने वाले हमारे अर्थशास्‍त्री नेताओं और ब्‍यूरोक्रेटस को अब पता चलने लगा है कि वाकई अमरीकी व यूरोपीय मंदी हमारी तरफ तेजी से बढ़ रही है। शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट से पहले केवल आम चुनाव तक एक पुलबैक रैली की संभावना है जिसे हमारे यहां सुधार की संज्ञा दी जा रही है लेकिन स्थिति खराब होने के आसार अधिक है।

आर्थिक विकास की दर को नौ से आठ और फिर सात फीसदी बताने वाले अर्थशास्‍त्री अब स्‍वीकार कर रहे हैं कि यह 5.3 से 5 फीसदी ही रह सकती है। आम उपभोक्‍ता वस्‍तुओं की मांग घटने से ही महंगाई दर 3.36 फीसदी पहुंची हैं। जबकि हकीकत में जीवन की जरुरत वाली वस्‍तुओं के दाम वाकई उतने नहीं घटे हैं जितनी महंगाई दर का कम होना बताया जा रहा है। औद्योगिक उत्‍पादन के साथ अब कृषि क्षेत्र भी विकास दर में गिरावट दिखा रहा है। ऐसे में लोकसभा चुनाव जीतने के लिए मौजूदा यूपीए सरकार ने सरकारी तिजोरी पूरी तरह खोल दी है और देश का कीमती विदेशी मुद्रा भंडार साफ हो रहा है। केंद्र सरकार की देखादेखी जिन राज्‍यों में कांग्रेस की सरकारें नहीं है वे भी आम आदमी का वोट हासिल करने के लिए दानवीर बनती जा रही हैं।

सरकारी दानवीरता के अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भी विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा है जिससे भावी खतरे को भांपते हुए स्‍टैंडर्ड एंड पुअर ने देश की रेटिंग को स्थिर से नकारात्‍मक कर दिया है। इस एजेंसी ने भारतीय बाजार और कार्पोरेट सैक्‍टर में निवेश न करने की सलाह दी है। विदेश में रह रहे भारतीय बेरोजगार होकर देश लौटने लगे हैं। इन नकारात्‍मक कारकों को देखते हुए यदि चालू तिमाही के बाद आर्थिक रिकवरी के संकेत नहीं मिलते हैं तो हमें और बुरे माहौल से गुजरने के लिए तैयार रहना होगा।

अमरीका और यूरोप में कार्पोरेट सैक्‍टर तगड़े परिवर्तन कर कंसोलिडेशन की तैयारी की जा रही है। निजी उद्योगों का राष्‍ट्रीयकरण किया जा रहा है। ऐसे में हमारे घरेलू कार्पोरेट सैक्‍टर को भी अपने आपको कसने की तैयारी करनी होगी। निवेशक अब वही कंपनियों को निवेश के लिए चुनें जिनकी भावी योजनाएं और भविष्‍य वास्‍तविकता पर आधारित हों। भारी भरकम सम्‍पदा और कारोबारी अवसर जिन कंपनियों के पास हों, उन्‍हें प्राथमिकता दे। साथ ही यह निवेश ऐसी कंपनियों के शेयरों का भाव वास्‍तविक होने पर करें क्‍योंकि बाजार कभी भी भागकर नहीं जाता।

सप्‍ताह का पहला दिन शेयर बाजार के लिए खास रहेगा क्‍योंकि रिलायंस इंडस्‍ट्रीज और रिलायंस पेट्रोलियम के निदेशक मंडलों की बैठक होगी जिसमें रिलायंस पेट्रोलियम के विलय का फैसला होगा। आने वाले दिनों में रिलायंस इंडस्‍ट्रीज और रिलायंस पेट्रोलियम के शेयरों में खासी हलचल देखने को मिल सकती है। निवेशकों को रिलायंस पेट्रोलियम के शेयरों से दूर रहना चाहिए क्‍योंकि इस विलय से जो भी फायदा होगा वह रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के शेयरधारकों को होगा।

2 मार्च से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) के सेंसेक्‍स का रेसीसटेंस 9095 अंक। सेंसेक्‍स के 8595 अंक टूटने पर 8345 आने के आसार। नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) के निफ्टी का रेसीसटेंस 2826 अंक। निफ्टी के 2676 अंक से टूटने पर 2585 अंक जाने के आसार हैं।

सूरत कॉमर्शियल कार्पोरेशन के इक्विटी विश्‍लेषक गोपाल मोदी का कहना है कि 2 मार्च से शुरु हो रहे सप्‍ताह में 8925 के ऊपर तेजी का कारोबार करें जबकि 8746 के नीचे मंदी का कारोबार करने की सलाह। 8925 के ऊपर तेजी का कारोबार करते समय स्‍टॉप लॉस 8835 का रखें। इसके ऊपर में 9074-9125 तक जाने की संभावना। इससे ऊपर जाने पर 9215 तक पहुंचने के आसार। सेंसेक्‍स के 8746 अंक से टूटने पर 8602-8546 के बीच पहला सपोर्ट। 8546 का स्‍तर टूटने पर 8454-8401 अंक देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में 8746 का स्‍तर टूटने पर तेजी का कारोबार करना जोखिमी हो सकता है।

मोदी का कहना है कि 9070 तक पहुंचने से पहले यदि सेंसेक्‍स 8870 के नीचे बंद होता है या बंद होने के आसार दिखाता है तो यह 8746 तक करेक्‍शन कर सकता है। इस स्‍तर के टूटने की स्थिति में भारी गिरावट की आशंका है। इस तरह जोन और स्‍तर का अध्‍ययन यह बताता है कि अगले सप्‍ताह शेयर बाजार दो तरफा घटबढ़ करेगा।

तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि शेयर बाजार में और गिरावट से पहले पुलबैक दिखाई देगा। वे कहते हैं कि बीएसई सेंसेक्‍स को 8631-8619 पर काफी कठिन सपोर्ट मिलने के आसार हैं। यदि सेंसेक्‍स इस स्‍तर से नीचे आता है तो यह बुरी तरह टूट सकता है। जब तक सेंसेक्‍स 8631 के ऊपर है, इसमें 9725-8600 के बीच उतार चढाव दिखता रहेगा। साप्‍ताहिक रेंसीसटेंस 9053 और 9433 पर देखने को मिल सकता है। सेंसेक्‍स गिरकर 8600 के नीचे आता है तो यह कम से कम 8295 तक आएगा।

इस सप्‍ताह निवेशक ग्‍लेक्‍सोस्मिथक्‍लाइन कंज्‍यूमर, एनटीपीसी, हिंदुस्‍तान डोर ओलिवर, गोदरेज कंज्‍यूमर प्रॉडक्‍टस, बैंक ऑफ बड़ौदा, गुजरात स्‍टेट पेट्रो, जी न्‍यूज, रिलायंस नैचुरल रिसोसर्स, भारत अर्थ मूवर्स और हिंदुस्‍तान यूनिलीवर पर ध्‍यान दे सकते हैं।