भारतीय शेयर बाजार का सेंसेक्स अब 18 हजार अंक की ओर बढ़ने की तैयारी कर रहा है। पिछले सप्ताह वेबदुनिया के इस कॉलम में इस तैयारी का उल्लेख किया गया था, जिसके जल्दी ही फलीभूत होने की उम्मीद की जा सकती है। शेयर बाजार में मजबूती का यह ट्रेंड आम बजट तक बना रह सकता है। हालांकि, बीच बीच में कुछ करेक्शन आ सकता है लेकिन बाजार के पूरी तरह साफ होने का अंदेशा नहीं है। निवेशक सैक्टर के बजाय स्टॉक विशेष पर अधिक ध्यान दें जो उन्हें बेहतर कमाई दे सकता है।
यथा सौर ऊर्जा आयोजन पर सरकारी घोषणा होने की उम्मीद से वेबेल एसएल एनर्जी में करंट की उम्मीद थी और इस कॉलम में पिछले सप्ताह निवेशकों को इस शेयर पर ध्यान देने की सलाह दी गई थी जो सच ठहरी एवं इस कंपनी के शेयरों ने नई ऊंचाई को छूआ। इसी तरह स्टॉक विशेष पर दिया गया ध्यान आपको समृद्ध बना सकता है लेकिन हरेक दांव सचेत रहकर खेलें एवं आंशिक मुनाफावसूली का मंत्र अपनाएं रखें।
इस सप्ताह फ्यूचर एंड ऑप्शन के तहत नवंबर सीरिज का निपटान होगा। इस वजह से शेयर बाजार में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। दो तरफा उतार चढ़ाव पोजीशन रोलओवर करने के लिए आम निवेशक के मन में लालच पैदा करेगा। गुरुवार को संभवत: बाजार में तेजी का माहौल रहे और इसके बाद अचानक बाजार को ढीला किया जा सकता है। अमरीकी सरकार ने अमरीकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए डॉलर में मजबूती के प्रयास करने की जो बात कही है उससे आने वाले दिनों में घरेलू बाजार से हैज फंड और एफआईआई अपना पैसा निकाल सकते हैं। सरकार ने विदेशी निवेश पर कर न लगाने की बात जरुर कहीं लेकिन अब तक खरीददार रहे ऐसे निवेशक इस घोषणा के बाद बिकवाल बन गए हैं। इसी तरह विभिन्न कमोडिटी के दाम अगले तीन महीने, अगले छह महीने तक न घटने के बयान किसके इशारे पर दिए जा रहे हैं। क्या युवाओं के इस देश में सट्टेबाजी ही प्रमुख कारोबार बनता जा रहा है। दिल्ली में गन्ना किसानों ने अपनी ताकत दिखाकर सरकार को जिस तरह झुका दिया उसी तरह खाद्यान्नों के बढ़ते दामों को ब्रेक लगाने के लिए देशव्यापी जनआंदोलन की जरुरत है अन्यथा दुनिया में सर्वाधिक बचत करने वाले देश के नागरिकों को आने वाले दिनों में बेहद कठिन दिनों से रुबरु होना पड़ सकता है।
मोर्गन स्टेनले एशिया के चेयरमैन स्टीफन रोश एशियाई शेयर बाजारों को लेकर तेजी में हैं जबकि अमरीकी बाजार में मंदी की धारणा रखते हैं। रोश का कहना है कि अमरीकी शेयर बाजारों के बारे में मेरी धारणा मंदी की रही है। इसी धारणा के कारण मुझे एशिया भेज दिया गया। अब मैं एशिया में हूं और इस क्षेत्र को लेकर काफी तेजी में हूं। वे कहते हैं कि एशिया को लेकर मैं अभी काफी आशावान हूं बशर्ते चीन आंतरिक मांग के साथ आगे बढ़े, न सिर्फ खुद की अर्थव्यवस्था के लिए बल्कि कोरिया, ताईवान, सिंगापुर और जापान जैसे देशों के लिए भी। फिलहाल मुझे लगता है कि बाजार बहुत जल्दी में ज्यादा बढ़ गए हैं। बाजार लिक्विडिटी से चल रहे हैं और वैश्चिक अर्थव्यस्था में हुई रिकवरी से इनका तारतम्य खत्म हो गया है क्योंकि रिकवरी अभी भी बहुत सुस्त है। मेरा मानना है कि लंबे समय से पैडिंग करेक्शन के बाद वैश्विक बाजार में निवेश के लिए और आकर्षक एंट्री प्वाइंट मिलेंगे।
23 नवंबर से शुरु हो रहे नए सप्ताह में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 17366 से 16344 के बीच घूमता रहेगा। जबकि, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 5166 से 4855 के बीच देखने को मिल सकता है।
तकनीकी विश्लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि सेंसेक्स में पिछले सप्ताह के अंत में बेहतर सुधार दिखा और निकट भविष्य में इसमें और मजबूती की उम्मीद है। सेंसेक्स का अगला ऊपरी स्तर 17493 का बन रहा है एवं यह आगे चलकर यह 17735 अंक पहुंच सकता है। साप्ताहिक सपोर्ट स्तर 16635-16360-16147 है। साप्ताहिक रेसीसटेंस 17201-17493-17735 है। हालांकि तिमाही स्तर पर देखें तो हमारा बाजार लंबी अवधि के रेसीसटेंस क्षेत्र में चल रहा है। यह रेसीसटेंस क्षेत्र 17144-17735 है और सितंबर 2009 के मध्य से सेंसेक्स अब तक इस स्तर को पार नहीं कर पाया है। बीते शुक्रवार को 16635.75 का बना बॉटम तात्कालिक कारोबार में उच्च बॉटम बना है जो नवंबर के पहले सप्ताह का निम्न स्तर 15530 अंक निचला बॉटम बना है। 17500 के ऊपर लांग पोजीशन बढ़ाई जा सकती है लेकिन इस स्तर से ऊपर जाने पर 17735 के बीच मुनाफावसूली कर लें।
कपूर शर्मा एंड कंपनी, दिल्ली के पार्टनर सलिल शर्मा बाजार में तेजी का रुझान बना हुआ है। निफ्टी अगर 5090 अंक का स्तर तोड़ती है तो ऊपर में 5180 अंक तक जा सकती है। नीचे में निफ्टी के 5050 अंक तक कारोबार करने की संभावना है। अगले छह महीने में निफ्टी 5050-5340 अंक के दायरे में रह सकती है। ब्रोकरेज फर्म फर्स्टकॉल इंडिया इक्विटी एडवाइजर्स का मानना है कि भारतीय इक्विटी बाजार में आने वाले दिनों में तेजी जारी रहेगी और अगले तीन महीनों में 17000 के आसपास कारोबार करने वाला सेंसेक्स 20,000 के दायरे में पहुंच जाएगा। साथ ही फर्म ने यह भी कहा है कि एनएसई निफ्टी, जो कि 5000 अंक के करीब कामकाज कर रही है, अगले तीन महीनों में 5933 अंक पर पहुंच सकती है। फर्म ने अगले छह महीनों में सेंसेक्स के 22000 अंक तो निफ्टी के 6526 अंक तक जाने की भविष्यवाणी की है।
निवेशक इस सप्ताह एस्सार ऑयल, मर्केटरलाइंस, बायोकॉन, साउथ इंडिया बैंक, इंडिया ग्लायकोल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, पेज इंडस्ट्रीज, टाटा कैमिकल्स, जुबिलेंट आर्गेनिक्स, विंडसर मशींस, यस बैंक और रैलीज इंडिया के शेयरों पर ध्यान दे सकते हैं।
Monday, November 23, 2009
शेयर बाजार पहुंचा मजबूत स्थिति में
Monday, November 16, 2009
दलाल स्ट्रीट: सेंसेक्स की तैयारी 18 हजार की ओर जाने की !
भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों ने यदि पिछली मंदी के सबक से वाकई कुछ सीखा हो तो यह कहा जा सकता है ट्रेडिंग जोन में चल रहे बाजार में उन्होंने बीते चार महीनों में काफी कुछ कमाया होगा। यदि कुछ निवेशक यह मानते हैं कि उनके हाथ एक धैला भी नहीं लगा तो फिर उन्हें शेयर बाजार की एबीसीडी ठीक से सीखने की जरुरत है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 18 हजार अंक के ऊपर पहुंचने की तैयारी में है और जिन निवेशकों को अब तक निराशा हाथ लगी हो वे अपना गणित ठीक कर लें ताकि यह न हो कि वे अपना बैंक बेलैंस बढ़ाने में फिर नाकामयाब हो जाए।
दलाल स्ट्रीट में मौजूदा तेजी के मद्देनजर एक बात साफ है कि यह पूरी तरह सटोरियों के नियंत्रण में है जिससे निवेशक अल्प अवधि के कारोबार पर ही ध्यान दें एवं मुनाफावसूली करते चले। यह समय लंबी अवधि के निवेश का नहीं है क्योंकि आर्थिक मोर्चे पर भारत सहित समूची दुनिया में कई बातें केवल पॉलिश कर पेश की जा रही है जिससे यह लगे कि सब कुछ चमक रहा है। अक्टूबर में हमारा औद्योगिक उत्पादन उम्मीद से अधिक बढ़कर 9.1 फीसदी रहा, सरकार ने भी एनटीपीसी, सेल और आरईसी सहित अनेक कंपनियों में अपनी विनिवेश योजना के प्रति कटिबद्धता दोहराई लेकिन हम निर्यात के मोर्चे पर अभी भी काफी पिछड़े हुए हैं। निर्यात में हम अपने प्रतिस्पर्धीयों से बेहतर स्थिति में नहीं है। साथ ही अमरीका एवं यूरोपीयन बाजारों की मांग के अभाव में निर्यात का 11.4 फीसदी घटना चिंता की बात है। इसके अलावा, जीवन के लिए जरुरी वस्तुओं का दिनों दिन महंगा होता जाना भी चिंता की बात है। सरकार इस बढ़ती महंगाई को रोकने के बजाय सट्टाखोरी को बढ़ावा देने में लगी है। चाहे शेयर बाजार का कारोबारी समय बढ़ाना हो या कमोडिटी के बढ़ते दामों पर अंकुश के तहत वायदा कारोबार को न रोकना हो। खाद्यान्नों के बारे में ऐसे ऐसे बयान दिए जा रहे हैं जो रोज इनके दाम भड़काने के लिए काफी है।
सरकार के पास गेहूं का भारी भरकम स्टॉक होने के बावजूद उसे जारी न करना, चीनी की कमी के बावजूद पिछले साल 40 लाख टन चीनी का निर्यात, दलहन का सही समय पर आयात न करना, दलहन-तिलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सही कदम न उठाना, ऐसी बाते हैं जिसने शेयर बाजार की तेजी में आम आदमी को आने से रोक रखा है और वह अपनी दैनिक जरुरतों को पूरा करने में संघर्ष कर रहा है। इस संघर्ष में उसकी बचत साफ हो रही है जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी नहीं है। अपने परिवार के भरण पोषण में जूझ रहा आम निवेशक शेयर बाजार में लौट नहीं पाया है जिससे साफ है कि मौजूदा तेजी सटोरियों द्धारा खड़ी की गई तेजी है। ऐसे में निवेशक शार्ट टर्म गेम खेलें तो ही अच्छा होगा एवं मुनाफावसूली करते चलें।
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शेयर बाजार में करेक्शन आने के अनुमान को धता बताकर नवंबर महीने के पहले पखवाड़े में 2800 करोड़ रुपए के शेयरों की शुद्ध खरीद की है। घरेलू संस्थागत निवेशकों का यह मानना था कि शेयर बाजार में एक बड़ा करेक्शन तय है लेकिन चालू कैलेंडर वर्ष में अब तक 72 हजार करोड़ रुपए की शुद्ध खरीद कर चुके विदेशी संस्थागत निवेशकों के हाथ में शेयर बाजार की चाबी जा चुकी है। अब कैलेंडर वर्ष का अंत नजदीक आ रहा है जिसकी वजह से भारत में निवेश और बड़ी तेजी की बातें जोर शोर से प्रचारित होगी। सभी ने शेयर बाजार में कमाया और मैं रह गया...इस नीति के तहत लोग ललाचाएंगे। निवेशक पूरी तरह सावधान रहें क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशक कभी भी हल्के होने के मूड में आ सकते हैं। शार्ट टर्म ट्रेडिंग से बेहतर इस समय कुछ नहीं क्योंकि यूरोप एवं अमरीका की स्थिति में सुधार रहता है तो ये निवेशक अपना पैसा अपने देश ले जाने में जरा भी नहीं झिझकेंगे।
16 नवंबर से शुरु हो रहे नए सप्ताह में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 17277 से 16177 के बीच घूमता रहेगा। जबकि, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 5122 से 4799 के बीच देखने को मिल सकता है।
सूरत कॉमर्शियल कार्पोरेशन, सूरत के तकनीकी विश्लेषक गोपाल मोदी का कहना है कि 16 नवंबर से शुरु हो नए सप्ताह के बेलैंस पाइंट 16635 की तुलना में पिछले सप्ताह का बंद स्तर 16848 काफी ऊंचा है। यह आरंभिक रुख तेजी का दिखा रहा है। संक्षेप में 16700 के स्टॉप लॉस के साथ सेंसेक्स के 16815 के ऊपर रहने पर तेजी। पहला रेसीसटेंस 17016 से 17106 का। 17106 के ऊपर बंद होने पर 17 हजार का स्टॉप लॉस रखते हुए 17397 से 17543 का दूसरा पड़ाव पार होने की संभावना है। यदि 16700 का स्तर टूटता है तो प्रत्याघाती गिरावट की संभावना जिसके तहत सेंसेक्स 16566 से 16455 अंक आ सकता है। बाजार में परिवर्तन की यह हवा 16455 के नीचे सेंसेक्स के बंद होने पर ही देखने को मिल सकती है।
वे कहते हैं कि तकनीकी तौर पर देखें तो सेंसेक्स अपने मार्च के बॉटम से जून महीने में टॉप बनाने के साथ केवल 23 से 33 फीसदी के बीच गिरा था और इसके बाद जून के टॉप से जुलाई के बॉटम से 161 फीसदी का सुधार देखने को मिला है। इसी तरह फिर से मार्च के बॉटम से मौजूदा अक्टूबर महीने के टॉप में 23 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। अब प्रबल आशावाद के बीच सेंसेक्स के अक्टूबर के टॉप और हाल में बने बॉटम के 161 फीसदी यानी 18400 अंक पहुंचने की उम्मीद की जा सकती है।
तकनीकी विश्लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि शेयर बाजार में पिछले सप्ताह 690 अंक का पुलबैक देखने को मिला लेकिन सवाल यह उठता है कि यह और कितना हो सकता अगले सप्ताह सेंसेक्स के सपोर्ट स्तर 16635-16360-16147 है, जबकि रेसीसटेंस 17123-17493-17735 है। बीएसई मिडकैप का रेसीसटेंस 6533-6710 होगा जबकि सपोर्ट 6250 पर होगा। 6250 के नीचे गिरने पर यह दो सप्ताह के निचले स्तर 5771 तक पहुंच सकता है। वासुदेव का कहना है कि पुल बैक रैली में निवेशक लांग पोजीशन से बाहर निकल जाएं।
निवेशक इस सप्ताह अपोलो हॉस्पिटल, व्हर्लपूल ऑफ इंडिया, वेबेल एसएल एनर्जी, शीपिंग कार्पोरेशन ऑफ इंडिया, आईडीएफसी, वोल्टास, धामपुर शुगर, गुजरात स्टेट पेट्रोनेट, यस बैंक, केपीआईटी क्युमिंस और रिलायंस कम्युनिकेशन के शेयरों पर ध्यान दे सकते हैं।
Monday, October 05, 2009
दलाल स्ट्रीट में भय के बीच तेजी की उम्मीद
भारतीय शेयर बाजार के निवेशक कुछ समय पहले तक इस भंवर में फंसे हुए थे कि बाजार में काफी बढ़त आ चुकी है, अब करेक्शन तय है। लेकिन इतने दिनों में हुआ क्या....सेंसेक्स 17 हजार अंक को पार कर गया और निफ्टी पांच हजार अंक के ऊपर। हमने कहा था कि शेयर बाजार के लिए दिन और सुधरेंगे...यही हुआ भी। हालांकि, कुछ विश्लेषक अब भी निवेशकों को डराने का कार्य कर रहे हैं कि डॉव जोंस के गिरने से भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त करेक्शन देखने को मिलेगा और यह दिवाली बिगड़ सकती है लेकिन ऑपरेटरों के मन को पढ़ा जाए तो दिवाली तभी बिगड़ सकती है जब सेंसेक्स 16700 अंक के नीचे आ जाए।
भारतीय शेयर बाजार के 1 अक्टूबर को समाप्त छोटा सप्ताह काफी फायदेमंद साबित हुआ और जो विश्लेषक यह राग अलाप रहे थे कि इस छोटे सप्ताह में बाजार बुरी तरह गिर जाएगा वे इस आंकडें पर गौर फरमाए कि विदेशी संस्थागत निवेशकों ने तीन दिन के इस सप्ताह में दो दिन में 2700 करोड़ रुपए के शेयर खरीदें। विदेशियों को भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार में भरोसा है लेकिन हमें नहीं। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने चालू कैलेंडर वर्ष के पहले नौ महीनों में 60 हजार करोड़ रुपए के शेयर खरीदे हैं। सेंसेक्स को 8500 अंक से 17 हजार अंक तक पहुंचा दिया। लेकिन घरेलू विश्लेषक और संस्थागत निवेशक यह भांप ही नहीं पाए कि भारतीय शेयर बाजार में कितनी संभावनाएं छिपी हुई हैं। यही वजह रही कि सेंसेक्स के इस सफर में करेक्शन, करेक्शन के भय में बड़ा लाभ नहीं उठा पाएं।
अमरीकी शेयर बाजार डॉव जोंस के गिरने के बाद एक बार फिर से भारतीय शेयर बाजार काफी महंगा होने का सुर सुनने को मिल रहे हैं लेकिन इस सुर के गायक फिर गलत साबित होंगे। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने खुद कहा है कि वर्ष 2010 में चीन और भारत दुनिया को आर्थिक रिकवरी की ओर ले जाएंगे। भारत की आर्थिक विकास दर 6.4 फीसदी और चीन की नौ फीसदी की आर्थिक विकास दर का का आया अनुमान यह बताता है कि दुनिया की नजर भारत पर लगी है। अमरीका और यूरोप में यदि किसी कारणवश नरमी रहती है तो हमारे यहां केवल कुछ सटोरिएं एवं एफ एंड ओ के खिलाड़ी ही इस भय में रह सकते हैं कि घरेलू बाजार भी गिरेंगे लेकिन सही निवेशकों को चिंता करने की जरुरत नहीं है। सच्चे निवेशक डॉव जोंस का भय दिखाकर अपने बढि़या शेयर बेच देने की चाल में फंसने से बचें।
इसी महीने की 10 तारीख से इंफोसिस टेक्नालॉजी के परिणाम के साथ जुलाई-सितंबर 2009 की तिमाही के नतीजों का मौसम शुरु हो जाएगा। भारतीय कार्पोरेट जगत इस तिमाही के लिए भी बेहतर नतीजे घोषित करने के मूड में दिख रहा है। यदि ये नतीजे पूरी तरह सकारात्मक आते हैं तो शेयर बाजार में मंदी की धारणा लेकर घूम रहे खिलाडि़यों को जोरदार जवाब मिल जाएगा कि वाकई भारतीय अर्थव्यवस्था पर यू ही दुनिया की नजर नहीं टिकी हुई है। भारतीय पूंजी बाजार में 14 हजार करोड़ रुपए के आईपीओ की सफलता के बाद अब 45 हजार करोड़ रुपए के आईपीओ लाइन में हैं। इनमें सरकारी और निजी दोनों क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं। सरकारी कंपनियां भेल एवं एनटीपीसी के फालोआन इश्यू के अलावा निजी कंपनियां इंडियाबुल्स पावर, जेएसडब्लू एनर्जी, जीएमआर एनर्जी, रिलायंस इंफ्राटेल सहित चार-पांच रियलटी कंपनियों के आईपीओ तैयारी में है।
5 अक्टूबर से शुरु हो रहे नए सप्ताह में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 17474 के ऊपर बंद होने पर 17777 पहुंचने की उम्मीद है। सेंसेक्स को 16727 के स्तर पर समर्थन मिलने की संभावना है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 5181 के ऊपर बंद होने पर 5277 तक जा सकता है। निफ्टी को सपोर्ट 4944 पर मिलेगा।
सूरत कॉमर्शियल कार्पोरेशन, सूरत के तकनीकी विश्लेषक गोपाल मोदी का कहना है कि वैश्विक शेयर बाजारों की बदली स्थिति सोमवार को शेयर बाजार का मूड बिगाड़ सकती है बावजूद इसके निचले स्तर से बाजार को सपोर्ट मिलने की संभावना है। 17080 का स्तर टूटने पर सेंसेक्स घटकर 16050 तक पहुंचने की आशंका। यह अधिकतम 16847 से 16800 या ज्यादा से ज्यादा 16700 तक हो सकता है। 16700 के समीप मासिक और त्रैमासिक आधार पर सपोर्ट मिलता है यानी बाजार का रुख रिवर्स होने से पहले इस स्तर से पुलबैक देखने को मिलेगा ही। यदि संयोग से 16700 का स्तर टूटता है तो बाजार की चाल में आया परिवर्तन लंबा होगा एवं सेंसेक्स घटकर 16381 से 16120 तक जा सकता है।
तकनीकी विश्लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि अगला सप्ताह यह तय करेगा कि इस साल दिवाली कैसी रहेगी, इस दिवाली पर खुशियों के पटाखे चलेंगे या दिवाली काली होगी। हालांकि, इस दिवाली के पिछली दिवाली से बेहतर रहने की उम्मीद तो है ही।
वे कहते हैं कि शेयर बाजार में गर्मी बने रहने के लिए सेंसेक्स का 16400 के ऊपर टिके रहना जरुरी है। सपोर्ट 16943-16802-16693-16494 पर मिलेगा जबकि रेसीसटेंस 17144 और 17734 है। अगले सप्ताह निवेशक 16494 का स्टॉप लॉस जरुर रखें।
निवेशक इस सप्ताह बालमेरी लॉरी एंड कंपनी, इंडसुइंड बैंक, टोरेंट पावर, दिवान हाउसिंग, मुंद्रा पोर्ट एंड सेज, आईडीएफसी, पेन्निसुला लैंड, बैंक ऑफ इंडिया, यस बैंक, विप्रो और एल एंड टी, अल्ट्राटेक सीमेंट, वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के शेयरों पर ध्यान दे सकते हैं।
Monday, August 17, 2009
शेयर बाजार के दिन और सुधरेंगे
भारतीय शेयर बाजार के निवेशक भले ही अब भी बड़े सुधार के बाद भंवर में फंसे हुए हो लेकिन आने वाले दिन और राहत भरे हो सकते हैं। हालांकि, जो निवेशक जल्दबाजी में हैं कि यह सुधार बेहद तेज होना चाहिए, उन्हें सेंसेक्स के फटाफट 21 हजार पहुंचने के बाद जो मंदी आई थी, उसे याद करना चाहिए। अतिरेक और जल्दबाजी दोनों हमेशा घातक होती है। अमरीका के बाद जर्मनी और फ्रांस की अर्थव्यवस्था में मिले सुधार के संकेत दुनिया भर के शेयर बाजारों के लिए शुभ समाचार हैं। हालांकि, अमरीका में कोलोनियल बैंक का दिवालिया होना यह बताता है कि पूरे सिस्टम को ठीक होने में साल भर की अवधि और बीत सकती है।
यूरोप से अच्छे समाचार आने के साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्धारा अपने सदस्य देशों को मंदी की चपेट से निकालने और सिस्टम में नकदी बढ़ाने के लिए 250 अरब अमरीकी डॉलर के बराबर स्पेशल ड्राइंग राइट्स (एसडीआर) देने की घोषणा एक सुखद समाचार है। इसमें से भारत को 478 करोड़ अमरीकी डॉलर मिलेंगे। आईएमएफ के निदेशक मंडल ने इसकी मंजूरी दी। यह फंड 28 अगस्त को जारी होगा।
कमजोर मानसून और स्वाइन फ्लू के नाम पर निवेशकों में जो डर बैठाया जा रहा है उससे निवेशक सचेत रहें। हर गिरावट पर बेहतर कंपनियों के स्टॉक में निवेश करते रहें। कमजोर मानूसन से सरकार खासकर खुद प्रधानमंत्री ने निपटने की तैयारी दिखाई है। देश गेहूं, चावल और अन्य कमोडिटी का ठीक ठाक स्टॉक है, लेकिन बावजूद इसके कुछ विश्लेषकों ने भय खड़ा कर निवेशकों को आगे बढ़ने से रोका है। हमारे देश की खेती हमेशा से ही इंद्रदेव की कृपा पर निर्भर रही है और यहां की जनता ने अनेक बार कम बारिश का सफलता से सामना किया है, लोग आज भी ऐसी चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं लेकिन किसी की शह पर जो भय खड़ा किया जा रहा है, वह सही नहीं है।
निवेशक इस बात को याद करें कि काफी विश्लेषक बीते मार्च में राग अलाप रहे थे कि 30 जून को समाप्त होने वाली तिमाही के लिए भारतीय कार्पोरेट जगत के नतीजे बेहद डरावने साबित होंगे लेकिन अभी आपने देखा ही होगा कि भारतीय कंपनियों ने शानदार नतीजे पेश कर ऐसे विश्लेषकों को मुंहतोड़ जवाब दिया है। इन विश्लेषकों ने इन नतीजों के अच्छे आने के अब दूसरे कारण बताकर अगली तिमाही के लिए कठिन समय बताना शुरु कर दिया है। इसी तरह स्वाइन फ्लू का डर निवेशकों के मन में इस तरह बैठाया जा रहा है मानों शेयर बाजार हमेशा के लिए बंद हो जाएगा। भारतीय अर्थव्यवस्था में भरोसा करते हुए बेहतर फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेश जारी रखना चाहिए और यही निवेश इस बाजार में आपको बड़ा मुनाफा करा सकता है।
17 अगस्त से शुरु हो रहे नए सप्ताह में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के सेंसेक्स के 15877 से 15055 के बीच घूमते रहने की संभावना है। जबकि, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 4717 से 4455 के बीच कारोबार कर सकता है।
तकनीकी विश्लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि शेयर बाजार सेंसेक्स ने जो अहम कारक बनाए रखा है वह है 14700 का स्तर। पिछले सप्ताह नीचे जाने की स्थिति में भी यह 14701 गया लेकिन अंत में बंद 15411 अंक पर हुआ। हालांकि, इसने पिछले सप्ताह के रेसीसटेंस स्तर को पार नहीं किया है। सेंसेक्स के 16200 अंक को पार करने पर खासी तेजी देखने को मिल सकती है। इस स्तर के पार करने पर सेंसेक्स 17218-19845 तक जा सकता है। निचला स्तर 14700 लेकर चलें। निवेशक 14700 का स्टॉप लॉस लगाते हुए 16196 के स्तर तक मुनाफावसूली करते रहें। सेंसेक्स के 16200 पार करने के बाद इंडेक्स से जुड़े शेयरों में दोबारा लांग पोजीशन ली जा सकती है।
निवेशक इस सप्ताह बीईएमएल, आरईसी, कोर प्रोजेक्ट, आईडीएफसी, एलेम्बिक, टोरेंट पावर, एचडीआईएल, केआरबीएल, लक्ष्मी ओवरसीज, एलाइड डिजिटल सर्विसेज, डीएलएफ, नागार्जुन कंसट्रक्शंस, इंडसुइंड बैंक, एसबीआई, रोल्टा, रैलीज इंडिया, आईओएन एक्सचेंज, आईटीसी और रैनबैक्सी के शेयरों पर ध्यान दे सकते हैं।
Monday, August 10, 2009
दलाल स्ट्रीट: उतार चढ़ाव के भंवर में फंसे निवेशक
दलाल स्ट्रीट के निवेशक इन दिनों एक जबरदस्त भंवर में फंसे हुए हैं कि वे सेंसेक्स के मौजूदा स्तर पर निवेश करें या नहीं। कुछ समय ठहर कर निवेश करें या बाजार से पूरी तरह दूर रहने में भलाई है अथवा अगले कुछ महीनों के अनुमान के आधार पर निवेश कर डाले। असल में होता यह है कि सही समय सही कंपनियों का चुनाव और उनमें किया गया निवेश लांग टर्म में ही बड़ा फायदा दिलाता है। लेकिन आम निवेशक छोटी सी कमाई के चक्कर में बड़ी कमाई खो देता है।
मेरे एक शेयर ब्रोकर मित्र पिछले दिनों बता रहे थे कि 20 साल पहले उन्होंने झंडु फार्मा के केवल 20 शेयर 12 हजार रुपए में लिए थे और ईमामी द्धारा इसके अधिग्रहण से पहले उन्होंने तकरीबन 380 शेयर बेचकर कुल 84 लाख रुपए कमाएं। झंडु फार्मा ने इन 20 सालों में जो बोनस और राइट शेयर दिए उससे यह शेयर संख्या बढ़ी और इतना तगड़ा मुनाफा जिसकी हर निवेशक कल्पना नहीं कर पाता। इस एक घटना का जिक्र इसलिए किया गया ताकि खुद निवेशक तय करें कि उन्हें पांच-पच्चीस हजार कमाने हैं या समूची माली हालात पलट देने वाली राशि।
समूची दुनिया में अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर अब सुधार होता दिखाई दे रहा है। अमरीकी और यूरोपीयन देशों के कार्पोरेट सैक्टर से रिकवरी के समाचार आ रहे हैं। कठिन समय में भारतीय कार्पोरेट सैक्टर ने भी बेहतर नतीजे पेश किए हैं। जून के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े आने जा रहे हैं और ये आंकडें सकारात्मक आए तो अचरज नहीं होना चाहिए। अमरीका में भी जॉब से जुड़े आंकड़ें सकारात्मक आए हैं एवं उन अनुमानों को इन आंकड़ों ने गलत ठहरा दिया जो अभी भी वहां हालात खराब होने का राग अलाप रहे थे। भारतीय बाजार में भी विदेशी संस्थागत निवेशकों ने चालू कैलेंडर वर्ष में अब तक 40 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया है। यह निवेश एकदम बॉटम पर है जो यह बताता है कि आने वाले दिन तेजी के हैं।
लेकिन इस बीच कुछ स्थानीय सट्टेबाज जो सेंसेक्स के 17 हजार अंक को पार करने का अनुमान जता रहे थे, अचानक पलट गए और 25 फीसदी कम बारिश के साथ मानसून के विफल रहने की बात कहकर बाजार को तोड़ रहे हैं। आम निवेशक इन सट्टेबाजों की चाल को समझ नहीं पाया एवं बाजार के और ऊपर उठने के इस अनुमान में ज्यादा ही खेल खेल लिया। सट्टेबाज पहले निवेशकों में भरोसा पैदा करते हैं और फिर इसे तोड़ते हैं। सट्टेबाज मॉस सायक्लोजी के खिलाफ चलते हैं, इसे याद रखिए, शेयर बाजार में काफी फायदा होगा।
अदानी पावर के बाद एनएचपीसी के आईपीओ को भी निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला है जो यह बताता है कि इंडिया ग्रोथ स्टोरी में हर निवेशक का भरोसा बना हुआ है। प्राइमरी मार्केट में यह तो केवल शुरुआत भर है जबकि अभी अनेक मुख्य कंपनियों के आईपीओ आने बाकी हैं। निवेशकों को सैकंडरी बाजार के अलावा प्राइमरी बाजार में भी निवेश करना चाहिए। अगले महीने 7 सितंबर को ऑयल इंडिया का आईपीओ पूंजी बाजार में आएगा, जिसमें निवेश करना लंबी अवधि की दृष्टि से फायदेमंद होगा।
10 अगस्त से शुरु हो रहे नए सप्ताह में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 15555 के ऊपर बंद होने पर 15888 तक जाने की संभावना है। इसे सपोर्ट 14777 अंक पर मिलेगा। जबकि, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी को 4311 पर सपोर्ट मिलेगा। यह 4611 आने पर 4711 जा सकती है।
सूरत कॉमर्शियल कार्पोरेशन, सूरत के इक्विटी विश्लेषक गोपाली मोदी का कहना है कि 10 अगस्त से शुरु हो रहे सप्ताह में 15100 का स्तर टूटने पर सेंसेक्स तेजी से घटकर 14647 से 14281 तक आ सकता है। इस गिरावट के दौरान मिलने वाले सपोर्ट 14735, 14523 और 14392 का स्तर दिखा सकते हैं। सप्ताह के दौरान 15100 का स्तर टूटने से पहले संभावना सुधार की है जो अधिकतम 15634 होगा। बीच बीच में सेंसेक्स के रेसीसटेंस स्तर 15381, 15422 और 15503 रहेंगे।
तकनीकी विश्लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि शेयर बाजार को ब्रेकआउट होने के लिए एक और रैली चाहिए। सेंसेक्स ने अभी तक 16200 का मुख्य रेसीसटेंस स्तर पार नहीं किया है। सेंसेक्स में निवेशक 14700 का स्टॉप लांस रखते हुए कारोबार करें। मौजूदा स्तर से बढ़कर 16196 अंक आने तक मुनाफावसूली करें। 16200 के ऊपर ही इंडेक्स से जुड़े शेयरों में दोबारा लांग पोजीशन ली जा सकती है।
सीएनआई रिसर्च लिमिटेड, मुंबई के प्रबंध निदेशक किशोर ओस्तवाल का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार का सेंसेक्स अगले छह महीने में 20 हजार अंक को छूने का माद्दा रखता है। शेयर बाजार में अभी भी कम निवेश हुआ है एवं अभी और निवेश होना बाकी है। आज तक अगस्त सीरिज के फ्यूचर्स में ओपेन इंटरेस्ट 53 हजार करोड़ रुपए का है जिसमें से स्टॉक फ्यूचर्स केवल 23 हजार करोड़ रुपए का है। अभी भी 400-500 अंकों के करेक्शन की संभावना है जिसे रूटीन करेक्शन समझना चाहिए। बी ग्रुप के शेयर को अभी भी ऊपर आने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। निवेशकों को वैल्यू स्टॉक में निवेश करने से पहले रिसर्च प्लेटफॉर्म का उपयोग करना चाहिए। अभी भी भारी डिस्काउंट पर अच्छी इंडस्ट्री और कंपनियों के शेयर मौजूद हैं।
निवेशक इस सप्ताह बजाज ऑटो, इंडिया इंफोलाइन, डीश टीवी, प्रीज्म सीमेंट, लक्ष्मी ओवरसीज, सिनेमैक्स इंडिया, सुप्रीम इंडस्ट्रीज, पटेल इंजीनियरिंग, फर्स्ट सोर्स साल्यूशंस, हिंदुस्तान ऑयल एक्सप्लोरेशन, डेवलपमेंट क्रेडिट बैंक, हेडलबर्ग सीमेंट, हिंद नेशनल ग्लास और मैक्मिलन इंडिया के शेयरों पर ध्यान दे सकते हैं।


