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July 07, 2007

खेलो इंडिया खेलो


बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज के सेंसेक्‍स के 15 हजार अंक को पार करते ही हर आदमी यह पूछ रहा था कि अब अगला मुकाम कहां। यह सवाल हर बार उठता है जब सेंसेक्‍स एक हजार अंक का चक्र पूरा कर लेता है। हमारा कहना है कि सेंसेक्‍स की चिंता के साथ यह चिंता भी करें कि आपके निवेश पर अब कितना रिटर्न मिल रहा है या आपने जिन शेयरों में निवेश किया है वे बढ़े हैं या नहीं। इंडेक्‍स कहीं भी पहुंच जाए, जब तक आपके शेयर नहीं बढ़ते खुशियां मनाना बेकार और बेमानी जैसा है। हम अपने पिछले दो साल के मत पर आज भी कायम है और मानते हैं कि इस साल के आखिर तक सेंसेक्‍स 18 हजार अंक को छू लेगा और अगले साल दिवाली के बाद दिसंबर तक 25 हजार अंक। अनेक निवेश सलाहकार मानते हैं कि बीएसई सेंसेक्‍स 25 हजार अंक तक वर्ष 2010 तक पहुंच पाएगा लेकिन आज जैसी स्थितियां दिखाई दे रही हैं, उसमें यह उपलब्‍धता 2008 में मिल सकती है। हम निवेशकों से कहना चाहेंगे कि 30 कंपनियों पर आधारित सेंसेक्‍स में तभी बढ़ोतरी होती है, जब इन 30 कंपनियों के शेयरों में उछाल आता है। इसलिए अपने निवेश को इन 30 कंपनियों में जरुर बढ़ाए और जब सेंसेक्‍स अपने शबाब पर हो तो मोटा मुनाफा बैंक खाते में बढ़ा सकते हैं। हालांकि, इन 30 कंपनियों के बाहर भी ऐसी ऐसी कंपनियां हैं, जिनमें निवेश कर आप चांदी काट सकते हैं। अनेक निवेशक बार बार यह बात पूछते हैं कि कहां कहां निवेश करें। एक सही निवेश सलाहकार के तौर पर हम आपसे कहना चाहेंगे कि सबसे सुरक्षित और मोटी कमाई के लिए इस समय बिजली और बिजली उपकरण बनाने वाली कंपनियों में निवेश करना चाहिए। इन कंपनियों में आने वाले दिनों में जो उछाल देखने को मिलेगा, उसे देखकर आप आईटी क्षेत्र को भूल सकते हैं। लेकिन इन कंपनियों में निवेश के बाद आप दो रणनीति तय कर सकते हैं। एक : इन कंपनियों में किए गए निवेश पर ट्रेडिंग कर अपने पैसे को बढ़ा सकते हैं। दूसरा : निवेश कर चुप बैठ जाएं और दो से तीन साल का इंतजार करें। पसंद अपनी अपनी। लेकिन दोनों ही पसंद में आप मालदार जरुर बनेंगे, यह तय है। निवेशक को स्‍वार्थी होना चाहिए यानी आम खाने से मतलब रखना चाहिए न कि गुठलियों से। हमारे कहने का मतलब यह है कि सच्‍चा निवेशक वहीं है जो अपने निवेश को जल्‍दी जल्‍दी कई गुना कर लें, भले ही सेंसेक्‍स 15 हजार हो या 5 हजार अथवा 25 हजार। सेंसेक्‍स 50 हजार हो जाए और आपका निवेश दो गुना भी न हो सके तो ऐसा सेंसेक्‍स जम्‍प किस काम का।

1 comment:

अनुनाद सिंह said...

सुझाते रहिये, बहुत काम की बातें हैं।

कभी ये भी बताइये कि सेंसेक्स के इतनी तेजी से बढ़ने की अशा के पीछे क्या तर्क या सोच है?


(एक अनुच्छेद में आठ दस लाइनों से ज्यादा मत लिखिये, पढ़ने में कठिनाई होती है।)