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July 11, 2007

संभलो और खेलो


भारतीय शेयर बाजार में गिरावट आने का अंदेशा हम पहले ही जता चुके हैं और कार्य परिणामों के मौसम में इंफोसिस ने इसकी शुरूआत कर दी। हमने बताया था कि 12 जुलाई से 18 जुलाई के बीच एक करेक्‍शन आएगा और अब लगता है कि यह करेक्‍शन आ रहा है। हालांकि, कुछ लोग मानते हैं कि चलते चलो...कुछ नहीं होगा। लेकिन हम भी मानते हैं कि शेयर बाजार में तेजी का दौर अभी पूरा नहीं हुआ है और इसे जो बड़ा विराम लगेगा वह सेंसेक्‍स के 25 हजार पहुंचने पर ही लगेगा। लेकिन इस सफर को पूरा करने से पहले कई झटके लगेंगे और उन झटकों से पहले मुनाफा वसूली और फिर वापस खरीदी जरुरी है। यही कार्य बैंक बैलेंस को बढ़ाता है। हालांकि, जिन निवेशकों ने कुछ वर्षों का लक्ष्‍य लेकर खरीद की है और बीच बीच में मुनाफा न काटने की कसम ले रखी है, उन्‍हें छोड़ दें तो हमारा मानना है कि मुनाफा वसूल करते रहें और हर बड़ी गिरावट पर फिर से शेयरों की खरीद।

सेंसेक्‍स के 15 हजार पहुंचने के बाद हमारी राय में हर निवेशक को अपने निवेश का 60 फीसदी हिस्‍सा सेंसेक्‍स आधारित कंपनियों में लगाना चाहिए, जबकि 40 फीसदी हिस्‍से में से कुछ राशि ए समूह की दूसरी मजबूत कंपनियों और मिड कैप की बेहतर कंपनियों में निवेश करनी चाहिए। अब तक आपने यदि मिड कैप और स्‍मॉल कैप में ही निवेश किया है तो रणनीति बदलने पर विचार करें क्‍योंकि सेंसेक्‍स को जो मुकाम छूना है और उसका लाभ आपको लेना है तो ऐसा करना ही होगा अन्‍यथा मझौली आय में ही फंसे रहेंगे। अब समय आ गया है कि जब आप उन कंपनियों को निवेश के लिए चुनें जो अगले दो साल में भारतीय कार्पोरेट जगत में टॉप पर होंगी या अपना अहम स्‍थान बनाएंगी।

1 comment:

मनोजय said...

Good advice, Thanks.
One more : Why not take मालदार to the top of the column