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July 20, 2009

दलाल स्‍ट्रीट में मुनाफावसूली से हिचके नहीं

भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर रौनक है। सरकारी कंपनियों के विनिवेश और समूचे भारत में मानसून की शुरुआत ने दलाल स्‍ट्रीट के निवेशकों को एक बार फिर जोश में ला दिया है। लेकिन निवेशक बेहद सावधानी से कारोबार करें क्‍योंकि जोश की यह सवारी कहीं उन्‍हें फिर ने नीचे ना ला पटके। आम बजट से निराश दलाल स्‍ट्रीट को अब हर महीने बेहतर खबरें मिलती रहेंगी। जैसा हमने पिछली बार कहा था कि इस सरकार की मजबूरी अपने आम बजट को राज्‍यसभा में पारित कराने की है और इस मजबूरी ने ही उसे फीका बजट पेश करने पर विवश किया है। शेयर बाजार के लिए ट्रिगर साबित होने वाली इसी तरह की अनेक घोषणाएं हर महीने सुनने को मिल सकती हैं।

अतत: देश के अधिकांश हिस्‍सों में मानूसन का पहुंचना शुरु हो गया है। मानसून का पहला दौर काफी खराब रहा है लेकिन अब दूसरे दौर से यह कमी काफी पूरी होने की उम्‍मीद है। इस बारिश से आम आदमी के साथ किसानों ने राहत की सांस ली है। हमारी सकल घरेलू विकास दर में मानूसन एवं कृषि की हिस्‍सेदारी 20 फीसदी है लेकिन मानूसन के विफल रहने की स्थिति में बेशक नुकसान ज्‍यादा होता है। मानसून की इस साल की स्थिति ने आम आदमी और प्रशासन को यह भी चेता दिया है कि ग्‍लोबल वार्मिंग के नतीजे इससे भी अधिक खतरनाक हो सकते हैं। प्रकृति के साथ खिलवाड़ को रोकने का संदेश इस साल सभी को मिल गया है।

मोर्गन स्‍टेनली के प्रबंध निदेशक एवं सह प्रमुख इक्विटी रिद्धम देसाई का कहना है कि निवेशकों को हर गिरावट पर शेयरों की खरीद करनी चाहिए और इसमें अगले तीन से चार साल में शानदार रिटर्न मिलेगा। वे कहते हैं कि कंज्‍यूमर सैक्‍टर अगली तेजी की अगुवाई करेगा। इसके अलावा ऑटो, मीडिया, शिक्षा, रिटेल क्षेत्र से निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलेगा। हमारे देश ने पिछले पांच से छह साल में जो प्रगति की है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले वर्षों में हमारी विकास दर नौ फीसदी नहीं, बल्कि 11-12 फीसदी पहुंच सकती है। देसाई कहते हैं कि वर्ष 2010 में सेंसेक्‍स की प्रति शेयर आय (ईपीएस) 1030-1040 रुपए और वर्ष 2011 में 1130 रुपए रह सकती है।

20 जुलाई से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्‍स 15155 से 14144 के बीच घूमता रहेगा। जबकि, नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 4488 से 4144 के बीच रहेगा। लेकिन कार्पोरेट नतीजों के इस मौसम में शेयर बाजार पिछले सप्‍ताह जिस तरह तेजी से बढ़ा है उसमें मुनाफावसूली से हिचके नहीं। तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज के सेंसेक्‍स का अगला रेसीसटेंस स्‍तर 15100-15600-16196 है। वे कहते हैं कि सेंसेक्‍स में गिरावट तभी बढ़ेगी जब यह 13200 के नीचे बंद होगा। रेसीसटेंस के विफल होने पर सपोर्ट 14255-13709-13219 पर मिलेगा।

सूरत कॉमर्शियल कार्पोरेशन, सूरत के इक्विटी विश्‍लेषक गोपाली मोदी का कहना है कि जब तक सेंसेक्‍स 15077 अंक को पार नहीं करेगा, मंदडि़एं अपने प्रयासों को नहीं रोकेंगे। यदि बाजार में मं‍दडि़एं हावी हो जाते हैं तो सेंसेक्‍स गिरकर 14330 से 14050 तक आ सकता है एवं इस स्‍तर के टूटने पर यह 13725 अंक तक जा सकता है। मोदी कहते हैं कि जब तक सेंसेक्‍स 14628 के ऊपर बना रहेगा अगले सप्‍ताह के दौरान सेंसेक्‍स 15232 से 15462 तक जा सकता है। लेकिन इस स्‍तर पर पहुंचने के लिए 15077 के ऊपर सेंसेक्‍स का बंद होना बेहद जरुरी है।

अरिहंत कैपिटल मार्केटस लिमिटेड, इंदौर के मुख्‍य तकनीकी विश्‍लेषक राजेश पालविया का कहना है कि निफ्टी का मुख्‍य रेसीसटेंस स्‍तर 4450 है। निफ्टी 4450 का स्‍तर पार करता है तो यह 4600-4700 तक जा सकता है। समूचा बाजार इस समय एफ एंड ओ एक्‍सपायरी पर निर्भर है। इस महीने के अंत तक आम बजट को भी पारित होना जरुरी है। इन घटनाओं के बीच नए सप्‍ताह में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है जिससे निफ्टी 4250 तक आ सकता है। पालविया की राय में आम निवेशक को मौका मिलने पर मुनाफावसूली करते रहना चाहिए क्‍योंकि बाजार में एक बार फिर सस्‍ते में बेहतर शेयर मिल सकते हैं।

निवेशक इस सप्‍ताह साउथ इंडियन बैंक, कोरोमंडल फर्टिलाइर्ज्‍स, आईडीएफसी, जीएमआर इंफ्रा, जेएसडब्‍लू स्‍टील, व्‍हर्लपूल ऑफ इंडिया, पेट्रोनेट एलएनजी, गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट, जीएमडीसी, एनएमडीसी, जयप्रकाश एसोसिएटस, आईआरबी इंफ्रा, टोरेंट पावर, मंगलम टिम्‍बर के शेयरों पर ध्‍यान दे सकते हैं।

July 13, 2009

फीका बजट और सूखा भारी पड़ा शेयर बाजार पर


भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों को नई सरकार के गठन के समय जो खुशी हुई थी वह आम बजट के साथ पूरी तरह धुल गई। हालांकि, इससे पहले पेश हुए आर्थिक सर्वे और रेल बजट ने निवेशकों को दलाल स्‍ट्रीट में थामे रखा लेकिन प्रणब मुखर्जी का ब्रीफकेस खुलते ही निवेशकों ने जमकर पैसा खोया। इस गिरावट में कमजोर मानूसन की भूमिका भी अहम रही। मानसून में देरी और उत्तर भारत में का पहला दौर बेहद कमजोर रहने का दलाल स्‍ट्रीट में विपरीत असर देखा गया।


प्रणब मुखर्जी से अनेक राहतों, प्रोजेत्‍साहन और रियायतों की उम्‍मीद लिए बैठे विदेशी संस्‍थागत निवेशक, हाई नेटवर्थ समूह ने निराश होते ही जमकर बिकवाली की जिससे एक सप्‍ताह में सेंसेक्‍स 1400 अंक लुढ़क गया और इस नरमी के अभी रुकने के आसार कम ही है। 13 जुलाई से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्‍स 13888 से 12888 के बीच घूमता रहेगा। जबकि, नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 4122 से 3788 के बीच रहेगा। तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज का सेंसेक्‍स 14000 अंक के नीचे बंद होने पर 12717-11825-10932 तक जा सकता है। वे कहते हैं कि निवेशकों को 14000 या इससे ऊपर में लांग पोजीशन से बाहर निकल जाना चाहिए। जब तक सेंसेक्‍स 15100 के ऊपर बंद नहीं होता लांग पोजीशन लेने से बचना चाहिए। कुल मिलाकर सेंसेक्‍स के नीचे में 12712 तक जाने की आशंका दिख रही है।

शेयर बाजार इस समय निराशा से घिरा हुआ है लेकिन वित्त विधेयक के राज्‍यसभा में पारित होने के बाद वित्त मंत्री अनेक सकारातमक घोषणाएं कर सकते हैं। साथ ही मानूसन विभाग ने बारिश में देरी की बात कही है, अकाल की नहीं। लेकिन कुछ विशेषज्ञों ने इसका अर्थ उल्‍टा लगाया और अकाल की बात फैलाकर निवेशकों में घबराहट फैला दी। निवेशकों को सलाह है कि वे बेहतर कंपनियों के शेयरों को इस समय न बेचें बल्कि ब्‍लूचिप कंपनियों और उन सैक्‍टरों के शेयरों की छोटी-छोटी मात्रा में खरीद करें जिनमें सरकार को निकट भविष्‍य में गति देनी है। मसलन केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने जिस तरह सड़क परियोजनाओं में निवेश की जो संभावनाएं बताई हैं उसके तहत बेहतर कंपनियों के शेयर लिए जा सकते हैं। इस सरकार की सबसे बड़ी मजबूरी राज्‍यसभा में पर्याप्‍त बहुमत न होना है जिसकी वजह से काफी सोच समझकर यह फीका बजट लाया गया ताकि यह 30 जुलाई तक राज्‍यसभा में पारित हो सके।


इस बजट के पारित न होने की दशा में फिर से अनुदान लेखा लाना पड़ सकता है। सरकार अपनी साख को किसी भी तरह जोखिम में डालने के मूड में नहीं थी। यह बजट प्रणब मुखर्जी ने काफी बुद्धिमानी से बनाया है जिसका दूसरे अनेक दल राज्‍यसभा में विरोध न कर पाएंगे और यह पारित हो जाएगा। इसके पारित होने के बाद तय है कि सरकार हर महीने कुछ न कुछ बेहतर घोषणाएं करेगी और बाजार में गर्मी दिखाई देगी। इस बजट के पारित होने के बाद शीतकालीन सत्र और अगले बजट में कोई दिक्‍कत न आए इसके लिए यूपीए सरकार को राज्‍यसभा में मुलायम सिंह, मायावती, नवीन पटनायक और नीतिश कुमार में से किसी के साथ दोस्‍ती का हाथ बढ़ाना होगा।


सूरत कॉमर्शियल कार्पोरेशन, सूरत के इक्विटी विश्‍लेषक गोपाल मोदी का कहना है कि 13 जुलाई से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह के लिए प्राथमिक रुख नकारात्‍मक है जो 13610 के स्‍टॉप लॉस के साथ मंदी की संभावना दिख रहा है। 13120 से 12850 के बीच पहला सपोर्ट मिलने की संभावना है। शुक्रवार 10 जुलाई का निचला स्‍तर 13400 न टूटने पर मंदी के कारोबार से दूर रहने की सलाह। 13400 का स्‍तर टूटने से पहले यदि 13610 का स्‍तर पार करता है एवं ऊपर टिका रहता है तो पहले 13855 और इसके बाद 14006 तक बढ़ने की प्रबल संभावना दिखती है। मोदी कहते हैं कि यह अधिकतम 14400 तक जा सकता है। बढ़त के साथ साथ नकारात्‍मक स्थिति भी प्रबल है। सप्‍ताह के आरंभ में 13120 से 12850 के बीच सेंसेक्‍स आ जाता है तो मंदी का कारोबार पाट लें कयोंकि यहां से 500-800 अंक की तेजी आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

अरिहंत कैपिटल मार्केटस, इंदौर के मुख्‍य तकनीकी विश्‍लेषक राजेश पालविया का कहना है कि बाजार अभी करेक्शन मोड में है। निवेशकों को अभी बाजार से दूर ही रहना चाहिए। बाजार में कोई गति नहीं दिख रही है। इलेक्शन और बजट से बाजार को जो उम्मीदें बंधी थी और बाजार में जो तेजी आनी थी, वो हो चुका है और अब बाजार को दिशा के लिए नए कारणों की तलाश है। बाजार में मूवमेंट आने के लिए 10-15 दिन इंतजार करना चाहिए। अगले तीन से छह महीनों में सेंसेक्स 12000-14500 तक रह सकता है, जबकि निफ्टी 3550-4490 के बीच रह सकता है। लेकिन इस दौरान अर्थव्यवस्था को लेकर कोई बहुत ही पॉजीटिव या निगेटिव खबर आती है तो यह दायरा टूट भी सकता है।

निवेशक इस सप्‍ताह ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, टोरेंट पावर, पावर ग्रिड कार्पोरेशन, पेट्रोनेट एलएनजी, गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट, आंध्र बैंक, एस्‍सार शीपिंग, एनटीपीसी और इंडसुइंड बैंक के शेयरों पर ध्‍यान दे सकते हैं।

July 06, 2009

आम बजट तय करेगा शेयर बाजार की चाल


भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार 6 जुलाई का दिन बेहद अहम है। आम बजट वाला यह दिन घरेलू शेयर बाजार की अगली चाल तय करेगा और यह भी पता चल जाएगा कि यदि तेजी की चाल आती है तो कौन-कौन से सैक्‍टर निवेशकों के लिए मध्‍यम से लंबी अवधि के लिए फायदेमंद साबित होंगे और यदि बाजार गिरता है तो किन सैक्‍टरों से बचना चाहिए। हालांकि, लंबी अवधि की दृष्टि से देखें तो आज किए जाने वाले कड़े निर्णय भी मीठे साबित हो सकते हैं। देश की अर्थव्‍यवस्‍था को बचाने और उसे गति देने के लिए काफी कुछ मरम्‍मत की जरुरत पड़ेगी।


वेबदुनिया में पिछले दिनों शेयर बाजार की रिपोर्ट में भारतीय उपमहाद्धीप की बदल रही स्थिति का जिक्र किया था कि श्रीलंका, पाकिस्‍तान और भारत में ऐसे कारक बन रहे हैं कि आने वाले वर्ष भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के होंगे। उसमें से सभी बातें सच साबित हुई हैं। हमने कहा था कि श्रीलंका में तमिल चीतों का दम निकल जाएगा, वह हो चुका है। पाकिस्‍तान में तालिबान को घेरकर मारे जाने की योजना पर इन दिनों स्‍वात घाटी में जोरशोर से काम चल जा रहा है। तीसरा, भारत में लोकसभा चुनाव के तहत एक मजबूत सरकार बगैर वामदलों के आई जिससे मध्‍यावधि चुनाव का खतरा टल गया।


6 जुलाई से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्‍स 15444 से 14144 के बीच घूमता रहेगा। जबकि, नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 4577 से 4222 के बीच रहेगा। तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि तत्‍कालिक मोर्चे पर बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज का सेंसेक्‍स 14995-15203-15401 अंक पहुंचने की संभावना है। लेकिन सेंसेक्‍स 14000 के नीचे बंद होता है तो यह 12717-11825-10932 अंक तक आ सकता है। सेंसेक्‍स 15600 को पार कर जाता है तो यह 16197-17980-19555 अंक तक जा सकता है।

कल्‍पतरु मल्‍टीप्‍लायर के वायस चेयरमैन आदित्‍य जैन का कहना है कि टेक्निकल और फंडामेंटल को छोड़कर बाजार पूरी तरह से आम बजट पर निर्भर है। विनिवेश-टैक्स रिफॉर्म और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी पैकेज के साथ एसटीटी-कैपिटल गेन पर बाजार की नजर रहेगी। असरकारक विनिवेश प्रक्रिया से राजकोषीय घाटे की भरपाई आसान होगी जिससे बाजार एक बड़ी छलांग लगाकर 15713-15789-15824/ 4655-4688 के नए स्तर बना सकता है।

जैन का कहना है कि मंदी से निपटने के लिए उद्योगों की दी गई रियायतें अगर सरकार जारी रखती है और कैपिटल मार्केट को अधिक मजबूत बनाने के लिए नए फॉर्मूले लाती है और साथ ही एफडीआई-एफआईआई का निवेश बढ़ाने की अनुमति कुछ क्षेत्रों में उदारतापूर्वक देती है तो बाजार 15900-15962-16000/ 4705 के स्तर को पार कर सकता है। बजट की वजह से बाजार के निचले स्तरों पर भी जाने की संभावना है। सरकार का घाटा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अगर रियायत की जगह टैक्स या सैस के फॉर्मूलों से खजाना भरने की खबर आती है तो तीव्र उतार-चढ़ाव के आसार ज्यादा हैं। निवेशक वैल्यूएशन वाले इंफ्रास्ट्रक्चर और बैंकिंग, थर्ड जेनरेशन वाले फर्टिलाइजर, केमिकल और पेस्‍टीसाइड वाले स्टॉक के साथ पावर और रूरल डेवलपमेंट से जुड़े शेयरों पर ध्यान दें।

प्‍योर ग्रोथ, नई दिल्‍ली के प्रबंध निदेशक आकाश जिंदल का कहना है कि निवेशक सोमवार को बजट आने से पहले इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, पीएसयू (सरकारी कंपनियां) और बैंकिंग (निजी एवं सरकारी) शेयरों में खरीद करें। लेकिन, निर्यातोन्‍मुखी कंपनियों और लाइफस्‍टाइल कंपनियों के शेयरों से पूरी तरह दूर रहें। बजट पेश होने के बाद पूरा बाजार इस आधार पर चलेगा कि बजट में प्रावधान कैसे आते हैं। यदि प्रावधान अनुकूल हुए तो सेंसेक्‍स में एक हजार अंक तक की तेजी आ सकती है और प्रतिकूल प्रावधानों से यह एक हजार अंक तक घट भी सकता है।


जिंदल कहते हैं कि बजट की बातों का पूरी तरह बाजार पर असर रहेगा, हालांकि दीर्घकाल की बात की जाए तो भारतीय शेयर बाजार अच्‍छा रहेगा। वे कहते हैं कि मुझे बीएसई सेंसेक्‍स में आने वाले दिनों में 30 फीसदी की बढ़त दिखाई दे रही है। जबकि, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, पीएसयू और बैंकिंग शेयरों में यह बढ़त 40-50 फीसदी रहेगी।