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March 14, 2007

आनंद लूटो होटल


शेयर बाजार में जिन निवेशकों ने होटल शेयरों में निवेश किया है, वे पिछले दो साल से आनंद ही तो लूट रहे हैं। यह आनंद अभी जारी ही रहेगा। मांग और आपूर्ति में चल रही कमी यानी मिसमैच का फायदा होटल उद्योग को भरपूर मिलेगा। यह उद्योग न तो घरेलू मांग को पूरा कर पा रहा है और न ही अंतरराष्‍ट्रीय जरुरत को। भारत की अर्थव्‍यवस्‍था में जिस तरह की तेजी दिख रही है और बदलाव आए हैं वे कम से कम अगले तीन चार साल तो रहेंगे और यही वजह है कि मेहमानदारी क्षेत्र में गर्मी बनी रहेगी। अगले नौ साल यानी 2006/15 तक की बात करें तो भारतीय पर्यटन उद्योग की मांग 8.8 फीसदी सालाना दर से बढ़ती रहेगी।
समूची दुनिया में भारत पर्यटन बाजार के रुप में तेजी से उभरता दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। सस्‍ती विमान सेवाएं, पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ती बुनियादी सुविधाएं और आउटसोर्सिंग के हब के रुप में उभार भारत में पर्यटकों को खींच लाने का काम कर रहे हैं। हालांकि, यह तय है कि अगले दो तीन साल तो यहां जितने कमरों की जरुरत है वह पूरी नहीं हो सकती। उद्योग जगत पर भरोसा करें तो अगले तीन सालों में एक लाख बीस हजार कमरों की जरुरत है। दिल्‍ली और एनसीआर में ही वर्ष 2010 तक राष्‍ट्रमंडल खेलों की वजह से कोई 30 हजार अतिरक्ति कमरों की मांग दिखाई दे रही है। अब यहां विदेशी पर्यटक जहां कारोबार की संभावनाओं के लिए भी आ रहे हैं, वहीं घरेलू अर्थव्‍यवस्‍था के विकास से मध्‍यम वर्गीय भारतीय की खर्च करने की क्षमता में बढ़ोतरी हुई है जिससे घरेलू पर्यटकों की संख्‍या भी तेजी से बढ़ी है। इस उद्योग की कंपनियों ईआईएच, होटल लीला वेंचर्स, रॉयल आर्चिड, कामत होटल्‍स और इंडियन होटल्‍स आदि अपने विस्‍तार पर तेजी से ध्‍यान दे रही हैं। बंगलूर, नई दिल्‍ली, मुंबई और कोलकाता में निकट भविष्‍य में कमरों की संख्‍या बढ़ने से रुम दरें ज्‍यादा नहीं बढ़ सकेंगी लेकिन हैदराबाद, पुणे और जयपुर जैसे नए शहरों में कारोबारी गतिविधियां बढ़ने से होटलों की संख्‍या बढ़ने के बावजूद कमरों के किराये की दरों में कमी नहीं होगी। कमाई धमाई की बात करें तो चालू वित्‍त वर्ष के पहले नौ महीनों यानी अप्रैल से दिसंबर 2006 तक होटल उद्योग की कुल कमाई 3147 करोड़ रुपए रही, जो अप्रैल से दिसंबर 2005 में 2644 करोड़ रुपए थी। इसी तरह शुद्ध मुनाफा 371 करोड़ रुपए की जगह 619 करोड़ रुपए पहुंच गया। ये आंकडें इंडियन होटल्‍स, ईआईएच, एशियन होटल्‍स, होटल लीला वेंचर्स, रॉयल आर्चिड, ताज जीवीके, ओरिएंट होटल्‍स, वायसरॉय होटल्‍स, सयाजी होटल्‍स, कामत होटल्‍स, जैयपी होटल और ईआईएच एसोसिएटेड के हैं।
इंडियन होटल्‍स की इस समय 21 नई परियोजनाओं पर काम चल रहा है जिनसे कमरों की संख्‍या दो हजार बढ़ेगी और पूंजीगत खर्चा आएगा 1250 करोड़ रुपए। इसी तरह लीला वेंचर्स की इस समय छह नई परियोजनाओं पर काम चल रहा है जिनसे कमरों की संख्‍या 1370 बढ़ेगी और पूंजीगत खर्चा आएगा 1260 करोड़ रुपए। ईआईएच की इस समय 12 नई परियोजनाओं पर काम चल रहा है जिनसे कमरों की संख्‍या 1762 बढ़ेगी और पूंजीगत खर्चा आएगा 1150 करोड़ रुपए। कामत होटल्‍स की इस समय 19 नई परियोजनाओं पर काम चल रहा है जिनसे कमरों की संख्‍या 1540 बढ़ेगी और पूंजीगत खर्चा आएगा 365 करोड़ रुपए। रॉयल आर्चिड की इस समय पांच नई परियोजनाओं पर काम चल रहा है जिनसे कमरों की संख्‍या 480 बढ़ेगी और पूंजीगत खर्चा आएगा 500 करोड़ रुपए। इस तरह कुल नई परियोजनाएं इन होटलों की 63 हैं और कमरों की संख्‍या बढ़ेगी 7152 एवं पूंजीगत खर्चा होगा 4330 करोड़ रुपए।

1 comment:

MediaYug said...

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