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September 20, 2007

शेयर बाजार कहीं भागकर नहीं जा रहा...

भारतीय शेयर बाजार बीएसई सेंसेक्‍स के नई ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अधिकतर निवेशकों का कहना था कि जल्‍दी बताओं कौन कौनसी कंपनियों के शेयर खरीदें...हम तो गाड़ी चूक गए। गाड़ी न पकड़ पाए और यदि गाड़ी में बैठे हैं तो ऐसे निवेशक एक बार इसे पढ़ लें...शेयर बाजार में गिरावट का खेल दस अक्‍टूबर के बाद....। हम गाड़ी पकड़ने के लिए दौड़ने वाले निवेशकों को राय देना चाहेंगे कि शेयर बाजार में आपाधापी का खेल न खेलें और अब तक जो भी निवेशक शेयर बाजार को कोसते हुए मिलते हैं या जिन्‍होंने इस बाजार में अपने हाथ जलाएं हैं वे आपाधापी में थे कि मैं क्‍यों नहीं पैसा कमा सका। उसकी कमीज मेरी कमीज से ज्‍यादा सफेद क्‍यों।

इस समय शेयर बाजार में अलग अलग विश्‍लेषक अलग अलग बात कह रहे हैं...जैसे क्रिस्‍टॉप लालो को लें...उभरते शेयर बाजारों में विपुल संभावनाएं हैं। लेकिन मुद्रा यानी करेंसी एपरिसिएट होना लंबी अवधि के लिए अच्‍छा नहीं है। मेरे ख्‍याल से इस साल के आखिर या अगले साल की शुरूआत में बीएसई सेंसेक्‍स 20 हजार अंक तक पहुंच जाएगा। अब लें...जेएम फाइनेंशियल के तकनीकी विश्‍लेषक गौतम शाह को...अक्‍टूबर का महीना बाजार के लिए क्रूशिएल है। इस महीने शेयर बाजार में अगस्‍त महीने जैसा करेक्‍शन दिखाई दे सकता है। बाजार का मजबूत रेसीसटेंस 16500-16700 पर दिखता है।...टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्‍यमों में यह चर्चा जोरों पर है कि अगला मुकाम क्‍या।

सेंसेक्‍स का मुकाम कुछ भी हो लेकिन हम सभी निवेशकों से कहना चाहेंगे कि किसी भी कंपनी के शेयर खरीदने से पहले उसके बारे में सारी जानकारी जुटा लें क्‍योंकि इस समय बाजार में अफवाहों का दौर है कि यह लो...यह पकड़ो...यहां बिल्‍कुल मत चूको...भागो....पकड़ो...एक निवेशक होने के नाते सारी सूचनाएं आपके पास होनी चाहिए लेकिन जिस कंपनी के शेयर लेना चाहते हैं उन्‍हें आप अपने पास कितने समय रखेंगे यानी कितने समय के कारोबार के हिसाब से खरीदना चाहते हैं...इंट्रा डे...शार्ट टर्म....लांग टर्म...। किसी भी सुनी सुनाई टिप के आधार पर शेयर नहीं खरीदें...क्‍योंकि ऐसा न हो कि शेयर बाजार का कचरा आपके हाथ में आ जाए और आपके सपनों पर पानी फिर जाए। बेहतर कंपनियों और तेजी से बढ़ते उद्योगों के ही शेयर खरीदे लेकिन छोटी छोटी मात्रा में। सारा खरीद ऑर्डर एक साथ न दें।

हमेशा यह ध्‍यान रखें कि बाजार कहीं भागकर नहीं जा रहा और कंपनियां तो बनती बिगड़ती रहती है। यदि आप रिलायंस चूक गए तो कोई बात नहीं...क्‍योंकि रिलायंस को आज तक सफर तय करने में कई साल लगे हैं। ठीक ऐसी ही दूसरी कंपनी की तलाश किजिए और देखिए वह भी इतने साल बाद रिलायंस बनती है या नहीं। एल एंड टी छूट गई तो क्‍या...पकडि़ए दूसरी इंजीनियरिंग कंपनी जो बरसों बाद दूसरी एल एंड टी होगी। असली निवेशक वही है जो भारत की दूसरी बड़ी भावी कंपनियों में आज कम निवेश करता है और हो जाता है करोड़पति कुछ साल बाद। वर्ष 1980 में विप्रो के सौ रुपए वाले सौ शेयर को आपने खरीदा होता तो आज आपके पास दो सौ करोड़ रुपए हो सकते थे। वर्ष 1992 में इंफोसिस के शेयर में दस हजार रुपए का निवेश किया होता तो आपके पास आज डेढ़ करोड़ रुपए हो सकते थे। इसी तरह 1980 में रेनबैक्सी में एक हजार रुपए का निवेश किया होता तो आपके पास आज तकरीबन दो करोड़ रूपए होते। पुरानी बातें छोड़ भी दें तो अगर आपने 2004 की गिरावट में यूनिटेक में 40 हजार रुपए का निवेश किया होता तो आज आपके पास एक करोड़ दस लाख रुपए हो सकते थे। इंतजार करने वाले निवेशकों ही यहां फायदा होता है, भले ही सेंसेक्‍स कुछ भी हो। जिस तरह एक बच्‍चे को पूरी तरह क्षमतावान होने में समय लगता है वही इन कंपनियों के साथ होता है। इसलिए उन कंपनियों की तलाश कीजिए जो कल के युवा होंगे।

1 comment:

Rajesh Roshan said...

ये तो आपने इतिहास और सतर्कता बताई. वाह मनी के पाठको को ये बताइए की कल के रिलायंस, विप्रो और रैनबैक्सी कौन होंगे