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October 13, 2007

शेयर बाजार का मार्च पॉस्‍ट


भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को खासा उछाल देखने को मिल सकता है। लेकिन परमाणु करार से कदम पीछे खींचने से बिजली कंपनियों के शेयरों को झटका लगने की आशंका है। कांग्रेस के परमाणु करार से अधिक सरकार को बचाए रखने की प्राथमिकता यह संकेत देती है कि कांग्रेस जो अब तक अपने आप को चुनाव के लिए तैयार बता रही थी, पहले गुजरात में लड़े जाने वाले मिनी चुनाव युद्ध का जायका लेना चाहती है। यदि गुजरात चुनाव में सही सफलता हाथ लगी तो ही केंद्र सरकार फरवरी-मार्च में लोकसभा चुनाव के बारे में सोच सकती है। इस तरह की सोच से पहले अगले आम बजट के संकेत भी साफतौर पर दिए जाएंगे कि बजट कैसा बनाने का मूड है और इस संबंध में देश के वित्‍त मंत्री पी चिदम्‍बरम ने कुछ बातें कही हैं। पेट्रोल डीजल की कीमतें मार्च से पहले न बढ़ाने की घोषणा और खाद्यान्‍नों के न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍यों को बढ़ाकर किसानों वोट बैंक की आ‍कर्षित करना, खाद्यान्‍नों की कीमतों पर नियंत्रण की बात कर आम आदमी को लुभाना भी इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। परमाणु करार के बजाय सरकार बचाने को वरीयता देने के बाद यह तो साफ है कि शेयर बाजार में उछाल आएगा लेकिन हम आम निवेशक को कहना चाहते हैं कि वे सावधान रहें क्‍योंकि जब यह निवेशकों के मन में बात बैठ चुकी हो कि गिरावट बीती बात बन गई है, ऑपरेटर इसके विपरीत चल सकते हैं। लेकिन कुल जमा माहौल गर्म रहेगा।

सरकार पहले, करार बाद में

किसी भी कीमत पर परमाणु करार को अंजाम तक पहुंचाने का दावा कर रहे प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी अब पीछे हट गए हैं। कांग्रेस के इन दिग्‍गजों ने सरकार बचाने के लिए करार के प्रति बेकरारी रोक दी है। प्रधानमंत्री ने साफ कहा, 'अगर करार नहीं हुआ तो अफसोस होगा, लेकिन जिंदगी यहीं खत्म नहीं होती।' सोनिया ने भी कहा, 'सरकार अपना कार्यकाल पूरा करे, यह हमारी कोशिश होगी।' साफ है कांग्रेस ने कम्‍युनिस्‍टों और सहयोगियों के दबाव में अपने पुराने रुख से पलटी मार ली है। कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री यहां तक कह रहे थे कि 'करार से सरकार पीछे नहीं हटेगी, चाहे जो हो।' लेकिन अब गठबंधन धर्म निबाहने की बात कही जा रही है, भले इससे देश का नुकसान हो।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने न सिर्फ सरकार के कार्यकाल पूरा करने का दावा किया, बल्कि कम्‍युनिस्‍टों की नाराजगी का सबब बने बयानों पर भी सफाई दी। खास तौर से झज्जर में करार का विरोध करने वालों को विकास के दुश्मन बताने संबंधी बयान पर भी उन्होंने सफाई दी। 'मैंने वामदलों पर निशाना नहीं साधा था, बल्कि मैं हरियाणा में विपक्ष को निशाना बना रही थी।' बयान के गलत मतलब निकाले जाने के लिए उन्होंने अपनी खराब हिंदी को दोष दिया।

आम बजट चिदम्‍बरम ही करेंगे पेश

वित्तमंत्री पी चिदंबरम का कहना है कि आर्थिक सुधार अगले बजट में भी जारी रखे जाएंगे। इस तरह से उन्होंने इन अटकलों पर विराम लगा दिया कि चुनावों से पहले वे लोकलुभावन बजट लाएंगे। वित्‍त मंत्री कहते हैं कि वे अगला बजट भी पेश करेंगे। चिदंबरम की यह टिप्पणी सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के उन बयानों के बीच आई है कि केंद्र सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी। अगला बजट लोकलुभावन होगा या सुधारों वाला यह पूछे जाने पर चिदंबरम ने कहा कि रास्ते बदलने की कोई वजह नहीं है। अगर विकास की दर कम हुई हो तो रास्ता बदला जा सकता है। लेकिन हमारी औसतन विकास दर 8.6 फीसदी रही है। उन्होंने जिक्र किया कि विकास दर के बारे में सबसे निराशाजनक अनुमान 8.5 फीसदी का है और इससे कहीं नहीं लगता कि हमें अपना रास्ता बदलना चाहिए।

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