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November 25, 2008

नौकरी खोने वालों के लिए दस सुझाव

नौकरी का एकाएक चले जाना एक भयानक सपने की तरह होता है। एकदम से किंकर्तव्यविमूढता की स्थिति और ढेर सारा तनाव। अनिश्चित भविष्य के प्रति ढे़र सारी चिन्ताओं का बोझ और उदासियां। ऐसे में आशा की किरण खोजना काफी धैर्य और संयम का काम होता है, लेकिन यही एक रास्ता है जो हालिया मुसीबतों से किसी को भी निकालकर आगे ले जाता है। ऐसे में अपना संयम खोने वाले उन संभावनाओं को भी खो देते हैं, जो ऐसे वक्त में बेहतर अवसरों की तरह उनके पक्ष में कार्य कर सकती हैं।

1. सबसे पहले तो शांत और स्थिर चित्त के साथ तर्क पूर्ण तरीके से अपनी विचारशक्ति को बरकरार रखने की जरूरत होती है। लगता भले ही हो, लेकिन किसी के साथ एकाएक ऐसी घटना होते ही, बाकी सारी चीजें भी एकाएक नकारात्मक तरीके से बदल नहीं गई होती हैं। जरूरी है कि चीजों के बारे में अपने आशावादी नजरिए को बरकरार रखा जाए। आप मानें या नहीं, लेकिन लोगों में आपकी निराश भावनाओं को सूंघ लेने की गजब की शक्ति होती है और यदि आपका आत्मविश्वास और उत्साह अपनी जगह पर कायम है, तो इसका अच्छा प्रभाव लोगों को आपके पक्ष में निर्णय करने को प्रेरित भी करता है।

2. दूसरी बात है कि नौकरी से बाहर होते वक्त केवल मिलने वाले 'पैकेज' के चेकों पर ध्यान देना ही जरूरी नहीं, उन संभावनाओं पर भी पर्याप्त गौर किया जाना चाहिए, जो भावी कैरियर के लिए उपयुक्त रूप से लाभप्रद हो सकती हैं, जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम या अन्य तरह से आर्थिक सक्षमता दिलाने में सहायता करने वाले कार्यक्रम। अगर कंपनी आपको ऐसा कोई ऑफर देती है, तो उस पर पर्याप्त विचार करें।

3. इस समय को एक अवसर की तरह देखिए। यह उस कैरियर विकल्प की खोज में भी सहायक हो सकता है, जिसको अभी तक आप 'आइडियल' रूप में सोचते रहे हों। जीवन विविध विकल्पों से भरा हुआ होता है इसमें अपने अनुकूल चुनने के लिए आप पेशेवर सलाहकार की पूरी मदद ले सकते हैं।

4. अपने स्वास्थ्य को चुस्त-दुरूस्त रखें। इसके लिए आपने अपने तरीकों की जो दिनचर्या बना रखी थी, उसे नियमित रखें। यह आपको तनावमुक्त रखने में भरपूर मदद करेगा। आपको अपने खर्चों की जिन मदों में कटौती करनी पड़े, स्वास्थ्य संबंधी खर्चों का नंबर उनमें सबसे अंत में आना चाहिए।

5. मदद हासिल करना सीखिए, जब इसकी सबसे ज्यादा जरूरत हो। सामुदायिकता की मददगार भावना से भरे लोग आपके आसपास हैं, जो कई बार आपके अभिमान के चलते आपके काम नहीं आ पाते। परिवार और मित्रों से बेहतर सम्पर्क कई बार आपकी उम्मीदों से कई गुना उम्‍दा परिणाम भी दे जाते हैं।

6. लोगों को सुनिए, जो कई बार आपकी उन अच्छाइयों को भी आपके सम्मुख स्पष्ट कर देते हैं, जिनके प्रति आप सचेत नहीं होते। सलाहों का विश्लेषण आपको स्वयं ही अपने हालात के मुताबिक करना होता है, लेकिन इनको आने से रोकना नहीं चाहिए। अच्छे विचार, आश्चर्यजनक समाधान, कहीं भी, कभी भी, किसी के भी द्वारा आप तक आ सकते हैं, इसलिए रास्ते खुले रहने देना चाहिए।

7. खुद को उदासियों के स्तर से बाहर आने में मदद दीजिए ताकि तार्किक तरीके से सोचा जा सके। लोगों की उन बातों को प्रोत्साहन मत दीजिए, जो नकारात्मक रवैया दर्शाती हों। लोगों की सतही टिप्पणियां, निराशाजनक सोच उसी तरह आपको प्रभावित करते हुए हताश कर सकती है, जिस तरह किसी प्रेरक व्यक्तित्व की बातें आपके भीतर उम्मीद जगा सकती हैं। इसलिए लोगों में यह फर्क समझने की कोशिश आपको ज्यादा से ज्यादा उन लोगों के सम्पर्क में लाएगी जो आपके लिए अच्छे साबित हो सकते हैं।

8. अपने लक्ष्य और मानक निर्धारित करें कि आप अपनी अगली नौकरी या आर्थिक कार्य से कितनी दूर हैं, और फिर अपने बनाए नियमों का कड़ाई से पालन करें। कई जगह यदि वांछित अर्हताओं की तुलना में आपके स्तर में कुछ कमियां आड़े आती हैं, तो कई बार जरूरी से ज्यादा योग्यताएं भी बाधा बन जाती हैं। इसलिए, सही जगह पर क्लिक करने तक आपको इंतजार तो करना ही होगा, प्रयासों के साथ किया जाने वाला इंतजार।

9. खर्चों पर नियंत्रण रखने की रणनीति पर अमल करने की आपकी मजबूरी को न समझते हुए, यदि आपके मित्र आपकी संगत में खुद को असहज महसूस करने लगें, तो इस मित्रता की समीक्षा करने की जरूरत है। सही मित्र वह है, जो आपकी पूरी परिस्थिति के प्रति एक संवेदनशील सोच रखता है और यदि आप तथाकथित 'स्टेट्स' के चलते, अपनी चादर से बाहर पैर निकालने का प्रयास करते हैं, तो वह आपको सचेत भी करता है।

10. अपने विकल्पों के बारे में बात करते समय सकारात्मक भाषा प्रयोग करिए और दृढ रहिए। आर्थिक स्थिति के बारे में लगातार संदर्भों से बचें, जो नई नौकरी के रास्ते में बाधा उपस्थित करते हैं। यह नैतिक रूप से उत्तम है। अगर आप इन बातों का विश्वास करते हैं तो सही व्यक्ति तक आप जल्दी पहुंच सकेंगे।

November 21, 2008

पांच तरीके एक सफल कार्यकारी जीवन के

फार्च्युन-500 कंपनियों को पिछले 14 सालों से सेवा प्रदान करने वाली एक प्रबंधन सलाहकार कंपनी की संस्थापिका और अध्यक्ष नैन्‍सी कोलासुर्डो ने अपनी पुस्तक 'गेट ए लाईफ दैट डज नॉट सक' में नए उद्यमियों के लिए कुछ बेहतरीन तरकीबों का उल्लेख किया है जो अच्छी तरह से जीवन जीने के बारे में और अपने कारोबार की सफलतापूर्वक शुरूआत करने के बारे में उपयोगी हो सकती हैं। उद्यमिता को विकसित और परिपुष्ट करने के लिए जरूरी इन पांच प्रमुख तत्वों के बारे में आप भी जानिए।

1- चुनिए आप जो, जैसा चाहते हैं, इसे समझने के लिए इस पर पूरा ध्यान केंद्रित करें। ऐसा करने से आप अच्छे चुनाव कर सकेंगे। यदि आपने कोई मनचाहा कारोबार शुरू करना तय कर लिया है, लेकिन पैसा आपके पास है नहीं और कुछ परेशान करने वाली उधारियां भी आप पर अभी बकाया हैं। ऐसे में, यह ध्यान केन्द्रीयकरण आपको पैसे की व्यवस्था के अन्य विकल्पों पर तार्किक रूप से सोचने में मदद देता है कि पैसा परिवार के लोगों से उधार ले लिया जाए या वे चीजें बेचकर जुटा लिया जाए, जिनकी जीवन में अति महत्त्वपूर्ण जरूरत नहीं। यह हमेशा चुनने का विषय होता है।

2- अच्छे विचार उत्पन्न करें अधिकतर नए उद्यमी अपने नए कारोबार की गिरावट के प्रति तो सचेत रहते हैं, लेकिन वे स्वयं पर इतना सचेत फोकस नहीं रखते। सबसे सफल उद्यमी वे होते हैं, जो अच्छी चीजों पर फोकस करते हैं, उन संभावनाओं पर जो आगे हो सकती हैं। यह सोचने का तरीका ही है, जो आपको सफलता की ओर ले जाता है।

3- शुरूआत नए उद्यमी ढेरों विचारों से ओत-प्रोत होते हैं, लेकिन जब तक वे उनको कार्यरूप में परिणत नहीं करते, तब तक कुछ भी घटित नहीं होता और परिस्थितियां ज्यों की त्यों बनी रहती हैं। परिस्थितियों की यथास्थिति, अपने उन विचारों के प्रति भी संदेह को जन्म देने लगती है, जो अमल में लाए जाने पर बेहतर परिणाम दिखा सकते थे। दूसरों की कंपनी में कार्य करने वाले उद्यमी अपना कार्य-व्यापार आरम्भ करने की सोचने पर सुरक्षात्मक कारणों से चिंतित होते हैं। लोग सोचते हैं कि वे उलझ जाएंगे और समस्याग्रस्त हो जायेंगे, लेकिन सच यह है कि जैसे ही आप कोई छोटी सी भी, अनूठी शुरूआत करते हैं, तो इसके साथ ही नई संभावनाओं के द्वार खुलने आरम्भ हो जाते हैं। इन संभावनाओं की आप पहले से ही भविष्यवाणी नहीं कर सकते, न ही आपके लिए कोई दूसरा इसे निश्चित करने वाली भविष्यवाणी कर सकता है। लेकिन अवसरों का सृजन इसी तरह से होता है। एक बार वांछित और अवांछित समस्याओं से परिचित हो जाने के बाद आप उनसे निबटते हुए, अपनी गति को बढा़ना सीख जाते हैं।

शुरूआत छोटी तरह से ही हुआ करती है। यह एक फोन कॉल से भी हो सकती है, जब आप अपने गुरू से सम्पर्क करें या योजना को लागू करने से पहले अपने खाते में छोटी-छोटी धनराशियां इकट्ठा करना शुरू करें। कार्य का आरम्भ एक आश्चर्यजनक प्रस्थान-बिन्दु होता है। तमाम चीजों और विचारों के बीच चुनिये कि आपकी प्राथमिकता क्या होनी चाहिए? सभी चीजें एक दूसरे से संबंधित हैं, जिनके बीच समायोजन, शुरूआत के पीछे स्वयंमेव आता है।

4- एक व्यवस्था निर्मित करें उद्यमियों के बारे में यह देखा गया है कि सामान्यतया प्रबंधन करते हुए वे अपने कार्य को अधिक सुचारू रूप से विकसित नहीं कर पाते। सही लेखे रखने के लिए और ग्राहकों से वादे पूरे करने के लिए उनको कुछ प्रणालियां अपनानी होती हैं। इसे वे खुद यदि नहीं कर सकते, तो उन्हें ऐसे लोगों को पकड़ना चाहिए जो कम महत्त्वपूर्ण होते हुए भी ऐसे गुणों से युक्त होते हैं, फिर चाहे वह उनका हेयर-स्टाइलिस्ट ही क्यों न हो। ऐसे लोगों की भी निससंकोच मदद ली जा सकती है।

कार्य शुरू करते समय की जाने वाली सबसे बड़ी चूक में शुमार है वादों का पूरा न किया जाना। वादे- आपूर्तिकर्ताओं के प्रति, सहकर्मियों के प्रति, समुदाय में किसी के भी प्रति। अधिकतर उद्यमी अपने उत्पाद के प्रति, अपनी सेवा और उद्देश्यों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं और उस बुनियादी ढांचे के प्रति उतने अधिक सचेत नहीं होते, जो इसमें अप्रत्यक्ष रूप से मददगार होता है। बिना समवेत व्यवस्था के योजनाओं को लागू किया जाना, बालू पर बहुमंजिला भवन निर्मित करने की तरह है। वांछित सफलता के लिए इन बातों की गांठ बांध लेना बहुत आवश्यक है।

5- कहिए वह जो आप चाहते हैं, करिये वह जो आप कहते हैं आपकी समवेत शक्ति आप में निहित है। आपकी प्रतिष्ठा से अधिक महत्त्वपूर्ण कुछ और चीजें भी होती हैं। ढेर सारे वादे करके उनकी कसौटी पर खरे न उतरना बुरी बात है। इस तरह चीजें स्वयमेव घटित होने लगती हैं और उन पर से आपका नियंत्रण खत्म होने लगता है। कार्य को विश्वसनीय और प्रशंसनीय तरीके से चलाने के लिए जरूरी है कि आप वही कहें, जो किया जाना सम्भव हो, और वह भी तय समय सीमा के अंदर और जो कहा है, उसे किए जाने का पूरा प्रयास करें।

अधिकतर कारोबारों में शुरूआती स्तर पर पूर्व सम्पर्कों, रिश्तों का लाभ उठाया जाता है, जहां वादों की अति से बचना चाहिए। शुरूआती दौर अति उत्साह भरा होता है, जबकि ग्राहकों एवं अन्य व्यापारिक सहयोगियों को सभी मानकों पर पूर्ण संतुष्ट करने लायक योग्यता हासिल करने में वक्त लगता है।

अपने सिस्टम को स्वयं व्यवस्थित करें। सफल कारोबारी, बेताबियों से बचते हैं और धैर्यपूर्वक वही वादे करते हैं, जिनको पूरी तरह निभाया जा सकता हो। चीजों से भावनात्मक लगाव न रखना अधिक हितकर होता है, जो आपको दुश्वारियों के समय संवेदनशील कार्यवाही के बजाय तार्किक फैसले करने को प्रेरित करता है। वांछित परिणाम की प्रत्याशा साकार करने के लिए आपको सर्वाधिक मदद अपनी करनी होगी। अच्छे विचार और अच्छे चयन के अभाव में आप अपने कार्य को ज्यादा देर तक, ज्यादा दूर तक नहीं ले जा सकते। आपके विचारों तथा आप द्वारा नहीं की गई कार्यवाहियों के मध्य का अंतर ही जीवन को गिरावट की ओर ले जाता है। इस अंतर को कमतर करने के प्रयास किए जाने चाहिए, जिसमें यह बातें मददगार होंगी।


November 18, 2008

जब जॉब खोना पड़े

लगभग रोज ही विभिन्‍न कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों की तादाद घटाने के लिए तरह-तरह की कसरत करने की खबरें आ रही हैं। कहीं स्वैच्छिक (?) छुट्टी पर भेजा जा रहा है, कहीं आधे वेतन पर कुछ सालों के लिए समाजसेवा के लिए कार्मिकों को मुक्त किया जा रहा है, तो कहीं सीधे ही बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है कि निकलो भाई, हम आपका बोझ अब नहीं उठा सकते। लेकिन इसके बावजूद शायद ही कोई ऐसा शख्स होगा, जिसकी जिंदगी में इस वजह से कोई बड़ा परिवर्तन न आए। अगर इस दौर में आप प्रभावित होने से बचे हैं, तो आप खुशकिस्मत हैं। लेकिन यदि प्रभावित हुए हैं, तो आपको कुछ तरीकों पर जरूर सोचना चाहिए, जिनको अपनाकर आप इस परिस्थिति से बाहर निकल सकते हैं और नए सिरे से मुस्करा सकते हैं।

1- शांत बने रहें। चाहे यह अपेक्षित हो या नहीं, चाहे यह कैसे भी हुआ हो, आपको शांत बने रहने की जरूरत है। कुछ भी कदम उठाने से पहले उत्तेजित या तनावग्रस्त होने पर आप अनजाने ऐसा कुछ भी कर सकते हैं, जो आपको नहीं करना चाहिये। एमिली पोस्ट के निदेशक और 'एटिकेट:एडवांटेज इन बिजनेस' के लेखक पीटर पोस्ट कहते हैं-"आपको कंपनी से बाहर किया जाना आपके लिए खुशी की बात तो नहीं ही है, जबकि यह निर्णय आपका अपना नहीं हो। भले ही आपको बाहर किया जा रहा है, लेकिन इसे ध्यान में रखिये कि आपके बॉस और आपके सहकर्मियों से आप हमेशा के लिए विदा नहीं ले रहे हैं, संभवत: फिर उनसे सामना हो सकता है। अपनी भावनाओं को काबू में रखना बहुत ही अच्छी बात है" एक प्रबंधन सलाहकार कंपनी की उपाध्यक्ष बारबरा बारा के मुताबिक-"आपको हमेशा पेशेवराना तरीके से विदा लेनी चाहिए। आप चाहें या न चाहें, लेकिन जहां से आप बाहर जा रहे हैं, वह कंपनी सदैव आपके लिये एक सन्दर्भ का कार्य करेगी।"

2- अपने पुराने एम्प्लॉयर का अधिकतम उपयोग करें। हो सकता है कि छोड़ी जा रही कंपनी आपको छोड़ने के एवज में पुनर्प्रशिक्षण या कार्मिक सहायता कार्यक्रम या अन्य किसी प्रकार के लाभ का प्रस्ताव दे रही हो, जिसे अपनाने से आपको आगे कैरियर में मदद मिल सकने के लिए आपको यह विकल्प खुला रखना चाहिए, उस हर चीज के साथ, जो आप कर सकते हैं। भले ही आपकी परिस्थिति तात्कालिक अस्थिरता का शिकार हो, लेकिन इसका असर आपकी असीमित संभावनाओं पर नहीं पड़ना चाहिए, जो आपके आगे बरकरार होती हैं। एक ब्लॉगर एवं मानव संसाधन सलाहकार आइरिन कोयलर के अनुसार- "यह आपको बाहर निकल जाने और तनावग्रस्त हो जाने के लिए प्रेरित करता है, मगर बाहर निकलने से पहले आप हर एक से सम्पर्क सूचनाएं और राय-मश्वरा जरूर प्राप्त कर लें।" किसी कंपनी से प्रस्थान करने की दशा में वहां के कार्मिकों, आपके अधिकारियों से आपका अन्तर्व्यवहार आपकी भावी योजनाओं को प्रभावित करता है, इसलिए उन लोगों के सामने समस्याएं कम आती हैं और समर्थन ज्यादा मिलते हैं, जो संबंधों को हर हाल में मधुर बनाए रखने में यकीन रखते हैं।

3- पेशेवर सलाह प्राप्त करिए। एक सेवेरेंस समझौते पर हस्ताक्षर करने की दशा में पहले इसका भली-भांति अवलोकन अवश्य करें। कभी-कभी इस पैकेज में सौदेबाजी की संभावना होती है, खासकर तब, जब भारी मात्रा में छंटनी के बजाय एक-दो लोगों के साथ ऐसा किया जा रहा हो। समझौते को समुचित और वास्तविक लाभप्रद स्तर तक लाने के लिये अटार्नी की मदद ली जानी चाहिए। इसे सामान्यतया अटार्नी द्वारा ही तैयार किया जाता है और इससे मानव संसाधन विभाग जुड़ा होता है, जिसमें अधिकतम प्राप्त करने की प्रत्याशा में प्रयास किए जाने चाहिए।

4- इसे अपने कैरियर के पुनरावलोकन के अवसर के रूप में देखिए। कार्य से बाहर किया जाना अच्छी चीज तो नहीं ही हो सकती, लेकिन यह आपको एक कदम पीछे जाकर यह देखने का आपको मौका भी देता है, कि क्या आपको कुछ अलग हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए? इससे आप अपनी योग्यताओं/क्षमताओं को नये तरह से प्रयोग कर सकते हैं, या उस तरह से भी, जैसे आपने पहले सोचा भी नहीं हो। खाली वक्त में स्वैच्छिक, स्वयंसेवी के तौर पर कार्य के अवसरों का उपयोग किए जाने में समझदारी है। यह आपकी योग्यताओं को तरोताजा रखता है और नए संपर्कों का लाभ उठाने के अवसर देता है। अपने अगले बेहतरीन विकल्प के बारे में सोचने का समय निकालें। देखिये कि क्या विकल्प मौजूद हैं और अन्य संगठनों के लिए आप किस तरह से क्या कर सकते हैं।

5- अपनी वित्तीय स्थिति पर निगाह रखिए। अचानक कार्यमुक्ति आपकी आमदनी और वित्तीय स्थिति में बड़ा परिवर्तन लाती है। कंपनी छोड़ने के एवज में होने वाली सभी वित्तीय प्रापतियों को और अपनी बचतों का आगणन करें और देखें कि कितने वक्त के बाद आपको वास्तव में नौकरी करने की जरूरत पड़ेगी। वित्तीय स्थिति अधिक मजबूत होने की दशा में, 'एक अधिक बेहतर' नौकरी की तलाश में लगने वाले समय से आप समझौता कर सकते हैं। अधिक पैसे पास न होने की दशा में आपको अधिक सतर्कता से काम लेना होगा। सामूहिक योजनाओं का लाभ उठायें, जिनमें कम व्यय पर आपकी कई प्रकार की आवश्यकताएं पूरी हो सकती हैं।

6- अपने सम्पर्कों के सम्पर्क में रहें। लोग बिना नौकरी की नई स्थिति में एकाएक आने के बाद अपने इष्ट-मित्रों, परिजनों से कतराना शुरू कर देते हैं। किसी और को ऐसी परिस्थिति में पाकर आप जिस तरह उसकी मदद करने को आतुर होते हैं, उसी ततरह दूसरे भी आपकी मदद कर सकते हैं, इसलिए सम्पर्क में रहना बेहतर है। सभी अनौपचारिक सम्पर्कों के अलावा औपचारिक सम्पर्क, जैसे सोशल नेटवर्किंग आदि भी नई नौकरी की खोज, या तनावमुक्ति में आपकी मदद कर सकते हैं। अपने सम्पर्कों का बुद्धिमत्तापूर्वक इस्तेमाल करें।

7- सक्रिय बने रहिए और लोगों की पहुंच में रहें। एक नियमित कार्य के बिना चीजों के साथ तालमेल बिठाए रखना दुष्कर कार्य है। कई महीनों तक लगातार नौकरी की खोज हताशा और निराशा से भी सामना करा सकती है। अपनी बेहतरी के लिए, अपनी दिनचर्या को नियमित रखने का पूरा प्रयास करें, सक्रियतापूर्वक अपने मेलजोल को जारी रखते हुए नौकरी की तलाश करें। सब कुछ समाप्त नहीं हो गया है, ऐसी सोच के साथ अपनी जिंदगी से व्यक्तिगत आनंद और मनोरंजन के लम्हों से बिल्कुल बेगाने न हों। विपरीत परिस्थिति का सामना करके जब आप फिर से जिंदगी का संतुलन साधते हैं, तो यह आपको और अधिक मजबूत तथा योग्य बनाता हुआ आपके आत्मविश्वास और प्रतिभा को निखारने वाला होता है।

November 03, 2008

ड्रैगन भी मंदी की चपेट में

लो अब ड्रैगन भी मंदी की चपेट में आता जा रहा है। चीन की तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍था अब अपनी भविष्‍यवाणी के विपरीत ठंडी पड़ती जा रही है जिसने दुनिया के सामने यह चिंता पैदा कर दी है जो अर्थव्‍यवस्‍था उनकी मांग के आधार पर नैया पार लगा सकती थी वही अब उनके वित्तीय संकट को और बढ़ा देगी।

चीन सरकार ने जो आंकडें पेश किए हैं उनके मुताबिक चीन की आर्थिक विकास दर वर्ष दर वर्ष तीसरी तिमाही में नौ फीसदी रही। यह दर अभी भी बढि़या दिख रही है लेकिन यह तेजी से घटती भी जा रही है। दूसरी तिमाही में विकास दर 10.1 फीसदी रही जो पहली तिमाही में 10.6 फीसदी थी। चीन की आर्थिक विकास दर वर्ष 2002 के बाद पहली बार दस फीसदी से नीचे रहने की संभावना है। अनेक अर्थशास्‍त्री तो चीनी सरकार के इस विकास दर को तेज करने के अनेक कदम उठाने के बावजूद अगले साल आठ फीसदी से कम रहने की आशंका जता रहे है।

अमरीका और यूरोप जैसे बड़े उपभोक्‍ताओं की मांग तेजी से घटने की वजह से निर्यात को झटके लग रहे हैं। इससे चीन के प्रॉपर्टी बाजार की भी हालत कमजोर हो रही है। बीजिंग सहित दूसरे कई शहरों में ढ़ेरों इमारतों को आज भी अपने खरीददारों का इंतजार है। पीटरसन इंस्‍टीटयूट ऑफ इंटरनेशनल इकॉनामिक्‍स के वरिष्‍ठ फैलो निकोल्‍स लॉर्डी का कहना है कि यद्यपि चीन की वित्तीय प्रणाली साख संकट से अभी बची हुई है लेकिन पर्याप्‍त विकास के लिए उठाए जा रहे कदम गलत दिशा में उठ रहे हैं।

चीन में सितंबर से लेकर अब तक ब्‍याज दरों में दो बार कटौती हो चुकी है। महंगाई दर भी फरवरी के 8.7 फीसदी से कम होकर सितंबर में 4.6 फीसदी रही लेकिन ड्रैगन पर पड़ रही मंदी की छाया धीरे धीरे बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि वहां की सरकार ने अब लचीली और दूरदर्शी आर्थिक नीतियों का वादा किया है जबकि पहले वह स्थिर और तेजी से विकास करने वाली अर्थव्‍यवस्‍था की हामीदार थी। चीन सरकार ने कपड़ा और श्रम-रियायत आधारित उत्‍पादों के लिए कर छूट में बढ़ोतरी करने, छोटे कारोबारियों को बैंक कर्ज अधिक देने, हाउसिंग सौदों पर कर घटाने और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर निर्माण को गति देने का वादा किया है।

हालांकि, इस समय चीन में उपभोक्‍ता खर्च का हिसाब किताब बेहतर है। खुदरा क्षेत्र में सितंबर में रिटेल बिक्री बढ़कर 17.9 फीसदी पहुंच गई जो इस साल की शुरुआत में 13 से 14 फीसदी थी। लेकिन मई से वहां कार की बिक्री, दहाई अंक की विकास दर और हवाई यात्राओं में हर महीने कमी आती दिख रही है। होम फर्निशिंग और एप्‍लायंसेस की बिक्री घटती जा रही है। अर्थशास्‍त्री इस बात की साफ शंका जता रहे हैं कि वहां असल उपभोक्‍ताओं की स्थिति सुर्खीयों में चमकाए जा रहे उपभोक्‍ताओं से अलग है।

चीन के बाजार में जर्मन मशीन टूल निर्माता और जापानी कंसट्रक्‍शन उपकरण निर्माता जो अब तक मौज कर रहे थे, मंदी की ठंडक से परेशान हो उठे हैं। चीन में जर्मनी की वस्‍तुओं का आयात 2.5 फीसदी घटा है। दक्षिण कोरिया से चीन को होने वाला निर्यात भी सितंबर में 15.5 फीसदी रहा जो अगस्‍त में 20.7 फीसदी और जुलाई में 30.4 फीसदी था। चीन में यही हाल जापानी कंपनियों का है। चीन सरकार मानती है कि वैश्विक वित्त संकट ने अनेक देशो के निवेशकों और उपभोक्‍ताओं के विश्‍वास को हिला दिया है और चीन इससे अपवाद नहीं है। हालांकि, दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍था में अभी भी चीन का अहम स्‍थान है और उसके अकेले के दम पर काफी कुछ निर्भर करता है।

समूची दुनिया में प्रति व्‍यक्ति आय के मामले में चीन का स्‍थान 100वां है। जबकि बाजार विनिमय दर के आधार पर इसका योगदान छठे स्‍थान पर है। खरीद शक्ति पैरीटी के आधार पर चीन दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍था का दसवां हिस्‍सा खपत करता है, जो काफी अहम है। चीन विकास के रास्‍ते पर है लेकिन उसकी अपनी घरेलू मांग उतनी अधिक नहीं है जितनी आबादी के हिसाब से होनी चाहिए थी। चीन के 1.3 अरब लोगों का सामूहिक खर्चा पिछले साल 1.2 खरब डॉलर रहा, जबकि अमरीका के 30 करोड़ लोगों ने 9.7 खरब डॉलर खर्च किए।

चीन में लोगों का खर्चा हाउसिंग क्षेत्र में बढ़ा है जिसकी वजह से सीमेंट और स्‍टील का आयात तेजी से बढ़ा। लेकिन पिछले साल वहां हाउसिंग के दाम तेजी से बढ़ने की वजह से सरकार चिंतित हो उठी और उसने बैंकों से दूसरे आवास के लिए दिए जाने वाले कर्ज के नियम कड़े करने को कहा। इस कदम से इस साल चीन के अनेक शहरों में हाउसिंग के दाम या तो स्थिर हैं अथवा गिर गए हैं। चीन के अनेक बिल्‍डर मानते हैं कि आने वाले दिनों में दाम और गिरेंगे जिसकी वजह से खरीददार भी इंतजार करो की नीति अपना रहे हैं। अर्थशास्‍त्री यह मानते हैं कि चीन की सरकार विकास की गर्मी को बनाए रखने के पूरे प्रयास कर रही है लेकिन वैश्विकरण के दौर में आई इस मंदी की ठंडक से कोई देश नहीं बच सकता।

निवेशक लौटने लगे दलाल स्‍ट्रीट में

दलाल स्‍ट्रीट में यह दिवाली वाकई जगमग दिवाली रही और मायूस निवेशकों के चेहरों पर फिर से रौनक लौटने लगी। बीएसई सेंसेक्‍स के पिछले सप्‍ताह 9700 अंक पार करने के साथ एक बार फिर निवेशकों को यह भरोसा दिलाया जाने लगा है कि चलो दलाल स्‍ट्रीट। लेकिन कुछ इक्विटी विश्‍लेषक इस गर्मी को रीलिफ रैली मानते हैं। यानी इस तेजी के टिकाऊ होने के आसार नहीं हैं।

एक फंड प्रबंधक का कहना है कि दलाल स्‍ट्रीट में पिछले सप्‍ताह आई तेजी में घटी महंगाई दर की अहम भूमिका रही। दुनिया भर में खासकर अमरीकी वित्तीय बाजार में आया संकट अभी दूर होने के आसार नहीं हैं। साथ ही दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी बड़े सुधार के आसार कम हैं। इस बीच, भारतीय रिज़र्व बैंक ने मुख्य दरों में कटौती करके एक बार फिर चौंकाया है। रिजर्व बैंक ने शनिवार दोपहर अचानक सीआरआर और एसएलआर में एक फ़ीसदी और रेपो रेट में 0.5 फीसदी की कटौती कर दी। कटौती के बाद सीआरआर अब 5.5 फीसदी रेपो दर 7.5 फीसदी और एसएलआर 24 फीसदी हो गई है। एक अनुमान के मुताबिक इस कटौती से सिस्टम में करीब 85 हजार करोड़ रुपए आएंगे। नकदी की समस्या से जूझ रहे बैंकिंग सिस्टम को इससे निश्चित तौर पर राहत मिलेगी।

सरकार और रिजर्व बैंक द्धारा उठाए जा रहे कुछ कदमों से शेयर बाजार के खिलाडि़यों की राय में बीएसई सेंसेक्‍स निकट भविष्‍य में 11 हजार अंक के करीब पहुंच सकता है लेकिन इस स्‍तर पर भारी मुनाफा वसूली के पक्‍के आसार हैं जिससे सेंसेक्‍स एक बार फिर काफी नीचे आ सकता है। असल में किसी को भी अब यह भरोसा नहीं हैं कि मौजूदा गर्माहट टिकेगी। यही वजह है कि निवेशक इस समय दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंककर पीता है, कि स्थिति में हैं। अधिकतर निवेशक अपनी पोजीशन आगे ले जाने के बजाय कारोबार बंद होते होते काटना ज्‍यादा पसंद कर रहे हैं। बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 03 नवंबर से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में 10473 अंक से 9111 अंक के बीच घूमता रहेगा। जबकि नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी एनएसई का निफ्टी 33088 अंक से 2683 के बीच कारोबार करेगा।

तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बीएसई सेंसेक्‍स बड़ी तेजी से अपने निचले स्‍तर 7697 से रिकवर हुआ है जो यह बताता है कि सेंसेक्‍स आईसीयू से बाहर आया है लेकिन यह देखना होगा कि पुलबैक रैली कितनी बड़ी होती है क्‍योंकि कहीं ऐसा न हो कि इसके तेजी से बढ़ने से पहले इसकी हवा निकल जाए। वे कहते हैं कि साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 10539-10750 है और साप्‍ताहिक सपोर्ट 9118-8366-7697 पर दिखाई देगा। वासुदेव पुलबैक स्‍तर 10532-11395-12284 अंक का मानते हैं।

शेयर बाजार के मौजूदा निचले स्‍तर पर अब एचएनआई और रिटेल निवेशकों ने फिर से शेयर खरीदने की हिम्‍मत दिखाना शुरु किया है। यह संख्‍या बड़ी नहीं है लेकिन काफी निवेशक मानते हैं कि इस समय शेयरों के भाव अपने सही प्राइस पर हैं और कई टुकड़ों में शेयरों की खरीद की जा सकती है। नीचे भावों पर खरीद और ऊपरी भावों पर बिकवाली......शेयर बाजार के इस सामान्‍य सिद्धांत को जानता तो हर कोई है लेकिन साहस करने वालों की संख्‍या कम होती है। दुनिया के विख्‍यात निवेशक वारेन बफेट के अनुयायियों के लिए तो यह समय शेयरों की खरीद और लंबे समय के लिए निवेश का है।

इस सप्‍ताह निवेशक अरेवा टी एंड डी, हिंडाल्‍को, मैक्‍स इंडिया, आईओएन एक्‍सचेंज, पुंज लायड, टिस्‍को, वोल्‍टास, गेल, रिलायंस इंडस्‍ट्रीज, इंडियन बैंक और टीटागढ़ वैगन पर ध्‍यान दे सकते हैं।