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February 24, 2011

जयपुर: जमीन-जायदाद के धंधे में काला धन

राजस्‍थान की राजधानी जयपुर में यदि आयकर विभाग बड़ी मात्रा में काला धन पकड़ना चाहता हो तो जमीन-जायदाद से बेहतर शायद ही कोई स्‍त्रोत हो। यूं तो सरकार की नजर स्विटजरलैंड सहित अनेक देशों में भारतीयों के जमा काले धन पर लगी है लेकिन देश में ही अभी इतना काला धन है, जिसके बाहर आने से सरकार को काफी बड़ा फायदा हो सकता है।

जयपुर में यदि आप कोई मकान, प्‍लाट, फ्लैट, कॉमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं और आपके पास पूरी कीमत नकद में है तब तो आपको शायद ही कोई दिक्‍कत हो और आप जमीन जायदाद आराम से खरीद सकते हैं। हालांकि, इसके तहत प्रॉपर्टी की जो रजिस्‍ट्री होगी वह डीएलसी दर से ज्‍यादा की नहीं होगी, भले ही आपने प्रॉपर्टी इस दर से कितनी ही ऊंची दर पर ली हो। मसलन आप जो घर खरीद रहे हैं मान लीजिए उसकी कीमत 50 लाख रुपए है तो आपको इसका तकरीबन 50 फीसदी हिस्‍सा काले धन के रुप में चुकाना होगा। डीएलसी दर से ज्‍यादा की रजिस्‍ट्री कराने को कोई भी बिकवाल वहां तैयार नहीं है। आप जिस प्रॉपर्टी को खरीदना चाहते हैं उसकी सारी राशि एक नंबर यानी चैक पेमेंट की बात करें तो प्रॉपर्टी डीलर और बिकवाल दोनों उखड़ जाएंगे। वे आपसे पूछ सकते हैं कि आप जयपुर में पहली बार जमीन जायदाद खरीदने आए हैं क्‍या। एक नंबर में सारा पैसा कैसे ले सकते हैं। यह सौदा नहीं हो सकता है। लेना है तो सोच लीजिए, दो नंबर में पेमेंट करना ही होगा। प्रॉपर्टी डीलर तो अपनी सारी फीस जो प्रॉपर्टी कीमत की अधिकतम दो फीसदी होती है, बगैर रसीद और बगैर चैक के ली जाती है। इस आय को कोई भी प्रॉपर्टी डीलर शायद ही अपने बही खातों में पूरी ईमानदारी के साथ दिखाता होगा। लक्ष्‍मी है, क्‍या काली और क्‍या गोरी।

अब जिनके पास सारी राशि नकद नहीं है लेकिन बैंक या किसी वित्त संस्‍था से कर्ज लेकर प्रॉपर्टी खरीदने की हसरत रखते हैं तो समझो उनकी इच्‍छा हमेशा अधूरी ही रहेगी। बैंक नियामानुसार कर्ज देने को तैयार हैं लेकिन काले धन के ये धंधे वाले पहले तो पूरी प्रॉपर्टी की आधी कीमत नकद चाहते हैं। अब जो 50 फीसदी राशि बची है उसका जमीन की दशा में 65 से 70 फीसदी और निर्माण हो चुकी प्रॉपर्टी का 85 फीसदी तक कर्ज मिलेगा। यानी खरीददार को इस 50 फीसदी काले धन के अलावा कर्ज को उठाने के लिए उसका हिस्‍सा भी जुटाना होगा। इसका मतलब यह हुआ कि कर्ज लेकर प्रॉपर्टी खरीदने वाले को प्रॉपर्टी कीमत की 70 फीसदी राशि नकद जुटानी होती है। इस तरह यह राशि प्रॉपर्टी बेचने वाले के हाथ में काले धन के रुप में पहुंचती है। सरकार को डीएलसी दर के जो कर हैं, वे मिल जाते हैं और आयकर विभाग को भी इसी पर कर मिल जाता है लेकिन बहुत बड़े काले धन का कोई हिसाब किताब नहीं। आयकर विभाग को सख्‍ती कर प्रॉपर्टी के बिकवालों से रजिस्‍ट्री के समय डीएलसी रेट पर प्रॉपर्टी की कीमत अदा कर प्रॉपर्टी को अपने कब्‍जे में लेना चाहिए और फिर इसे नीलामी के माध्‍यम से बेचना चाहिए। यदि आयकर विभाग ऐसे केवल 100 मामले भी खड़े कर दें तो जयपुर में ही नहीं समूचे राजस्‍थान में हड़कम्‍प मच जाएगा और प्रॉपर्टी के दाम नीचे आने के साथ काले धन के खिलाडि़यों को सांप सूघ जाएगा। साथ ही प्रॉपर्टी खरीददार को बगैर कोई नुकसान पहुंचाए उसे भरोसे में लेकर प्रॉपर्टी बिकवाल पर छापे मारने चाहिए एवं काले धन को जब्‍त करना चाहिए। प्रॉपर्टी डीलरों के बहीखाते चैक होने चाहिए कि वे साल भर में कितना कारोबार करते हैं एवं आयकर भर रहे हैं या नहीं।

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