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March 03, 2007

रंग बरसे....बुरा न मानो होली है


शेयर बाजार की बजट से पहले जिस तरह फटी पड़ी है, उसमें अच्‍छे-अच्‍छों की ढंग से ठुक गई है। शेयर बाजार में ताजा गिरावट से पैसों के लिए मदमाती युवतियां और युवक दोनों अंदर तक घुस गए हैं और कब बाहर निकलेंगे खुद कामशास्‍त्र की पीली किताबें लिखने वाले भी नहीं जानते। पैसे की जवानी का मजा लूटने निकले युवक-युवतियां तो बजट से पहले ही अंदर घुस गए थे लेकिन वित्‍त मंत्री के बजट ने पैसे के पुजारियों को और अंदर घुसेड़ दिया। शेयर बाजार में मंदडि़यों का मदनोत्‍सव पूरा हो जाने पर ही शायद ये लोग बाहर निकल पाएं और उस समय उनकी स्थिति चलने फिरने लायक नहीं बचेगी। फिर से जवानी की उमंग पाने के लिए उन्‍हें श्रावण भादों तक तेजडि़यां रुपी पिया या प्रियतमा के आने का इंतजार करना पड़ेगा। इस पिया या प्रियतमा के आने पर ही मुखड़ा खिल पाएगा और मद मस्‍त जवानी मिल पाएगी। इससे पहले तो दिल्‍ली की सड़कों पर जवानी लौटाने का दम भरने वाले अस्‍पतालों के पास भी दवा नहीं है। शेयर बाजार में शादी से पहले या शादी के बाद खोई हुई जवानी लौटाने के‍ लिए इन अस्‍पतालों के पास कोई खानदानी इलाज नहीं है यह उन्‍होंने इस ब्‍लॉग को होली के दिन भांग पीने से पहले ही बता दिया है। बॉय....बॉय।

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