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March 13, 2007

काली छाया, उजली आस


भारतीय शेयर बाजारों में चल रहा उतार चढ़ाव का दौर अभी पूरी तरह नहीं थमेगा। हालांकि, ट्रेडिंग के लिए इस तरह के दौर जरुरी हैं और लोग इसमें ही पैसा बना पाते हैं। लेकिन बाजार की बड़ी अनिश्चितता निवेशकों को अंदर तक खूब हिला भी जाती है, जो अच्‍छे अच्‍छे निवेशक के मनोबल को तोड़ देती है लेकिन धैर्य और शांति इस मनोबल को कायम करने और निवेश पर रिटर्न दिलाने के लिए मजबूत कारक होते हैं। शेयर बाजार में चल रहा मौजूदा उतार चढ़ाव का दौर अभी नहीं थमेगा बल्कि इस महीने में किसी भी समय बीएसई इंडेक्‍स में पांच सौ से सात सौ अंकों की गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि यह गिरावट जल्‍दी ही तेजी में बदलती देख सकेंगे और अप्रैल से शेयर बाजारों में तेजी का दौर शुरू होगा। इस वर्ष के आखिर तक बीएसई सेंसेक्‍स यदि 17500 अंक को छू जाए तो अचरज नहीं होना चाहिए और अगले साल दिवाली से दिसंबर तक यह 25 हजार अंक पर निश्चित रुप से पहुंचेगा। बाजार की मौजूदा दशा में कई लोगों के गले यह आंकडे उतर नहीं पा रहे हैं लेकिन चार अंकों से पांच अंक तक पहुंचते पहुंचते जो लोग निराशा के सुर अलाप रहे थे, वे इसी सेंसेक्‍स के 14 हजार आते आते पूरी तरह चुप हो गए। इस साल निफ्टी भी पांच हजार अंक को छू लेगा। काली छाया में आपको बेहतर स्‍टॉक खरीदने का मौका भी मिलता है और ऐसे शेयर खरीद कर उजली आस बनाए रखें और बेहतर मुनाफा काट लें।

निवेश के लंबे चौड़े गणित में जो निवेशक नहीं पड़ना चाहते उनके लिए ऐसी उजली आस जो कंपनियां लेकर आएगी वे है :
एनटीपीसी
गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट
आईडीएफसी
पेट्रोनेट एलएनजी
पावर फाइनेंस कार्पोरेशन
पावर ट्रेडिंग कंपनी (पीटीसी)

2 comments:

Anonymous said...

kya yeh sambav hain ??

पूनम मिश्रा said...

निवेश के लिये सलाह देते रहिये .पर मेहनत का कमाया है.डुबाइयेगा नहीं!