adsense

March 21, 2007

धन दौलत किस पायदान पर है...


अब सुनिएं ललित होटल का अगला किस्‍सा। कल आपने जाना फल्‍कचुएशन और चॉपी को। शेयर बाजार में आ रही लगातार बढ़त के बाद आज सुबह चाय पीने जुटे निवेशक कह रहे थे चलो बाजार के बढ़ने से एसेट में कुछ तो इजाफा हुआ। होना भी चाहिए....तभी तो इस होटल में बैठकर खाना पीना हो सकेगा...नहीं तो चिदंबरम ने कही का नहीं छोड़ा था। मार मार कर दम निकाल दिया था......अब शेयर बाजार बढ़ रहा है तो कुछ दम आ रहा है। यार, एसेट पूरी तरह धुल रही थी। हम तो वहां थे ही सो फिर कूदे....देखो भाईयों....सॉरी.....मित्रों...यह एसेट नहीं धन दौलत है। लक्ष्‍मी तभी आती है, जब उससे जुड़े भारतीय शब्‍द कहे जाएं न कि लंदन के वर्ड। उसी समय पीछे से किसी ने बोला...ईक्रा के पब्लिक इश्‍यू में पैसा लगा देना...लग गया तो चांदी हो जाएगी। बड़ी अच्‍छी रेटिंग कंपनी है। हमने फिर टांग घुसेड़ी....कहा...रेटिंग से अच्‍छा है पायदान। यार अमीन सायनी तो 1952 से 1994 तक यही कहते रहे...आज यह गाना 10 वें पायदान से दूसरे पायदान पर पहुंच गया है। बीना का गीतमाला से कोलगेट सिबाका गीतमाला तक वे यही कहते रहे और तुम नहीं सुधरे। खाते हिंदी की हो और गाते हो अंग्रेजी की। अमीन साब से तो पायदान कहते कहते खुद भी पहले पायदान पर पहुंच गए और गाने भी। लेकिन ऐसा न हो कि रेटिंग के चक्‍कर में कभी तुम्‍हारी ग्रेडिंग हो जाए। चलो इस पर चर्चा फिर....लेकिन कहो...धन दौलत किस पायदान पर है.......शहद सा मीठा लगेगा यह बोलना।

No comments: