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March 27, 2007

परीक्षा और पढ़ाई में भी ठेकेदारी !


ठेके पर शिक्षा का रोग उत्‍तर प्रदेश के बाद अब मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल तक पहुंच गया है। स्कूली शिक्षा में सुधार के तमाम दावों के बीच सरकार की नाक के नीचे भोपाल के एक स्कूल में सुदूर केरल के लगभग पांच सौ छात्र-छात्राएं प्राइवेट हायर सैकेंडरी की परीक्षा दे रहे हैं। अब तक चार पेपर दे चुके इन बाहरी विद्यार्थियों से स्कूल की व्यवस्थाएं गड़बड़ा गई हैं, लेकिन इन्हें एकमुश्त यहां कौन लाया, इसकी पड़ताल न तो स्कूल प्रबंधन ने की और न ही माध्यमिक शिक्षा मंडल ने।

पता चला है कि प्रति छात्र 25 हजार रुपए के पैकेज पर कोई ठेकेदार इन्हें यहां से हायर सेकेंडरी पास कराने लाया है। चार दिन पहले नकल करते पकड़े गए इनमें से एक छात्र ने फ्लाइंग स्क्वाड के सामने यह कहते हुए इस धंधे का खुलासा किया कि उसके 25 हजार रुपए पानी में चले गए। ठेकेदार कौन है, ये छात्र उसके बारे में बताने से परहेज करते हैं। स्कूल प्रबंधन भी अनजान है। हकीकत यह है कि इस ठेकेदार ने ही इन बच्चों के फार्म यहां जमा कराए। उसी ने इनके रहने, खाने का इंतजाम किया। यहां तक कि परीक्षा केंद्र आने के लिए उसने इनके लिए बस भी लगा रखी है।

सैकड़ों किलोमीटर दूर से आए इन छात्रों को एक ही स्कूल में सेंटर मिलना भी शिक्षा माफिया की पकड़ का उदाहरण है। केरल के करीब पांच जिलों से आए ये सभी छात्र-छात्राएं भेल स्थित शासकीय महात्मा गांधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से बारहवीं की परीक्षा दे रहे हैं। इस स्कूल में इनके सहित कुल 729 प्राइवेट छात्र परीक्षा दे रहे हैं। नियमित के अलावा इतनी बड़ी संख्या होने के कारण करीब ढाई सौ परीक्षार्थियों की बैठक व्यवस्था बरखेड़ा स्थित कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में करनी पड़ी है, जो महात्मा गांधी का उपकेंद्र है। ये सभी परीक्षार्थी विशेष बसों से परीक्षा देने आते हैं और इसी से जाते हैं। एक छात्रा को मिजल्स होने के कारण तीन छात्राएं आटो से आती-जाती हैं, आटो का किराया तक इन्हें यहां लाने वाले ही देते हैं। इन्हें ठहराने और खाने-पीने की व्यवस्था भी एक साथ की गई है। इतना ही नहीं इनके इलाज का खर्चा भी यही लोग उठा रहे हैं। करीब तीन सौ छात्र मिसरोद मार्ग पर रुके हैं तो सौ सवा सौ परीक्षार्थियों को भोपाल टाकीज क्षेत्र में ठहराया गया है।

परीक्षा के पहले और बाद तक हमेशा एक साथ रहने वाले ये छात्र वैसे तो कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। अधिकांश तो हिंदी ही नहीं जानते, मलयालम में ही बातचीत करते हैं। इससे स्कूलों में तैनात शिक्षकों के अलावा निरीक्षण पर आने वाले अधिकारी भी खासे परेशान हो जाते हैं। केरल के पालघाट निवासी छात्र रवि नायर झटके में बता गया कि वह किसी नेशनल इंटर कालेज का छात्र है और उसके साथ इसी कालेज के 90 छात्र यहां परीक्षा देने आए हैं। यहां से परीक्षा क्यों दे रहे हैं? कौन लाया है? आदि सवाल सुनते ही वह कुछ नहीं जानने की बात कहते हुए अपने गु्रप में चला गया। अन्य समूह में चल रहे चार छात्र यह तो बता गए कि वे परीक्षा देने ही भोपाल आए हैं। इसके पहले न फार्म खरीदने आए और न जमा करने। फार्म किसने जमा किया, यह सुनते ही ये छात्र भी चुप्पी साध कर बस की ओर चल दिए। साभार जागरण डॉट कॉम से।

1 comment:

अनूप शुक्ला said...

ये खेल तो अब आम बात हो गयी लगती है!