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September 24, 2007

चीनी स्‍टॉक्‍स में निवेश किया तो खाएंगे धोखा

केंद्र सरकार अब चीनी उद्योग को अनेक रियायतों की बातें कर रही हैं जिससे शेयर बाजार में इन दिनों चीनी शेयरों को खरीदने की सिफारिश बड़े पैमाने पर हो रही है। बीच बीच में चीनी शेयरों के दाम इस तरह बढ़े भी हैं कि अच्‍छे अच्‍छे निवेशक पैसे बनाने के लालच में आ जाएं। जबकि हकीकत यह है कि चीनी शेयरों में निवेश करने वाले निवेशक एक दिन अपने को ठगा हुआ महसूस करेंगे।

चीनी उद्योग के हालात मिलने वाली रियायतों के बावजूद खराब ही रहेंगे। अब जानिए हकीकत जो चीनी के मिठास जितनी ही कड़वी है। केंद्र सरकार चीनी उद्योग को दिए जा रहे निर्यात प्रोत्‍साहन समय को एक साल के लिए बढ़ाएगी। एथनॉल की ब्‍लेंडिंग पांच से बढ़ाकर दस फीसदी की जाएगी, जबकि इस समय ब्‍लेंडिंग पांच तो छोड़ों दो फीसदी भी नहीं हो रही। सीधे गन्‍ने में से एथनॉल बनाने का ढांचा ही नहीं है। ऐसी बुनियादी सुविधाएं खड़ी करने में दो साल लगेंगे। नाबार्ड बैंक के कर्ज को रिस्‍ट्रक्‍चरिंग करने की है तो हम आपको बता दें कि शेयर बाजार में लिस्‍टेड किसी भी शुगर कंपनी के पास नाबार्ड बैंक का कर्ज नहीं है, तो फायदा किसे मिलेगा। केवल उत्‍तर प्रदेश में गन्‍ने के दाम घटाए जाएं तो ही वहां की चीनी मिलों को लाभ हो सकता है अन्‍यथा समूचा चीनी उद्योग घाटे की भेंट। बलरामपुर, बजाज, त्रिवेणी और रेणुका शुगर में चतुर खिलाड़ी शार्ट सेलिंग कर रहे हैं तो शेयरों को खरीदने की सिफारिश कैसे की जा रही है। यदि शार्ट सेलिंग न हो रही हो तो भी चीनी शेयरों को न लें, नजरअंदाज करें। बीएसई सेंसेक्‍स 650 अंक जिस दिन उछला उस दिन चीनी शेयरों में आग लगी हुई दिखी लेकिन जब मामला डिलीवरी का आया तो यह केवल आठ से इक्‍कीस फीसदी थी। ऐसे में इन शेयरों के भाव और वोल्‍यूम बढ़ाना धोखा नहीं है तो क्‍या है।


अक्‍टूबर से नया चीनी सीजन शुरु होने जा रहा है और उस समय चीनी का ओपनिंग स्‍टॉक सौ लाख टन रहेगा। जबकि उत्‍पादन तीन सौ लाख टन होने का अनुमान लगाया जा रहा है। कुल उपलब्‍धता चार सौ लाख टन चीनी। इसमें से 210 लाख टन घरेलू खपत और 40 लाख टन निर्यात को निकाल दें तो 50 लाख टन चीनी बगैर बिकी बचती है। यानी अक्‍टूबर 2008 में चीनी का ओपनिंग स्‍टॉक 150 लाख टन। रुपया मजबूत होने के बावजूद चीनी का निर्यात तो होगा, लेकिन निर्यात को झटका भी लगेगा। आज से 15 दिन पहले चीनी 270 डॉलर प्रति टन एफओबी यानी 11070 रुपए प्रति टन बिक रही थी जो अब 260 डॉलर प्रति टन एफओबी आ गई है। इसका मतलब यह हुआ कि प्रति डॉलर 39.80 रुपए के अनुसार 10350 रुपए प्रति टन एफओबी मिल रहे हैं। इस तरह 15 दिन में एक टन पर 720 रुपए का नुकसान। यदि अब रुपया और मजबूत होता है तो चीनी मिलों की हालत क्‍या होगी, आप खुद समझ सकते हैं। डायबिटीज के मरीजों को चीनी खिलाने का मतलब समझते हैं ना, आत्‍महत्‍या।

यहां रखें नजर : 24 सितंबर से शुरू होने वाले नए सप्‍ताह में बीएसई सेंसेक्‍स 16933 अंक के ऊपर बंद होता है तो यह 17816 तक जा सकता है। स्‍पोर्ट स्‍तर 16068 अंक। निफ्टी 4673 के स्‍पोर्ट के साथ 4958 से ऊपर बंद होता है तो 5043 अंक तक जाने के अवसर हैं। इस सप्‍ताह एफ एंड ओ का सैटलमेंट भी होगा लेकिन चाल तेजी की रहने की उम्‍मीद है। हालांकि, सैटलमेंट के समय हर बार खिलाड़ी चाल बदलते हैं। अगले सप्‍ताह टेल्‍को, मारुति, एसीसी, ओएनजीसी और एम एंड एम फ्रंटरनर रह सकते हैं। अन्‍य हीरो: आईसीआई इंडिया, मास्‍टेक, आईडीबीआई, जीएमआर इंफ्रा, एटलास कोप्‍को, नार्गाजुन कंसट्रक्‍शन, इगारसी मोटर्स, रिलायंस पेट्रो, आरएनआरएल, पायोनियर एम्‍ब्रायडरी, अंसल प्रोपर्टीज, बाटलीबॉय, बेस्‍ट ईस्‍टर्न होटल और निप्‍पो बैटरीज।

2 comments:

संजय बेंगाणी said...

चीनी कड़वी हो गई.

आशीष said...

चलिए इसी बहाने आम आदमी तक चीनी की पहुच आसान होगी