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January 19, 2008

डॉलर एंड डंडा

मुंबई नगरिया की फैमस होटल ताज के सामने खड़े होकर गेटवे ऑफ इंडिया का जायजा ले रहे थे कि कैसे इंग्लिश मैन यहां से मुंबई में घुसे थे। तभी एक गोरी चमड़ी वाला मेरे पास आया और हल्‍का मुस्‍काया। हमने सोचा इस गेट पर खड़े होकर इनका स्‍वागत करना हम हिंदुस्‍तानियों का फर्ज है या‍ फिर बाप दादाओं पर चढ़ा कोई कर्ज, जिसे पूरा करना होगा। हम भी मुस्‍काएं और चाल ढाल से साफ पता चला तो सीधा पूछा यू ऑर कमिंग फ्रोर्म यूएसए...। यस...यस...हमारा अगला सवाल सपाट...वॉट इज न्‍यू विद बुश। वह बोला....डॉलर एंड डंडा।

हम चौके यह डंडा कब लंदन से वाशिंग्‍टन पहुंच गया क्‍योंकि अंग्रेजी तो हम पर डंडा खूब यूज करते थे। यह तो हिंदी का डंडा है...वह बोला नो...इट इज अमरीकन डंडा। खूब उत्‍सुकता जगी तो पूछा यार सीधे सीधे बताओं यह है क्‍या। वह बोला यार बोला तो सुना..हम अमरीकनों के जो यार हैं वहां डॉलर चलता है जो हमारे डॉलर के दुश्‍मन वहां डंडा। यूं तो कहा जाता है कि सारी दुनिया में डॉलर चलता है लेकिन अब कुछ बदमाश डॉलर को चलने नहीं दे रहे सो हमने नई नीति में डंडा अपना लिया। अब चाहे कोई देश हो वियतनाम या इराक, अफगानिस्‍तान अथवा ईरान। यह लिस्‍ट लंबी है हम तो चाहते हैं कि डॉलर विरोधी सारी जगह पर डंडा चलाया जाए... इस लिस्‍ट के कुछ नाम बता दूं‍ जैसे सीरिया, जार्डन, क्‍यूबा, म्‍यांमार, उत्‍तरी कोरिया।

वह बोला तुम्‍हारे यहां एक कहावत है तेल देखो, तेल की धार देखो...हम कहते हैं कि तेल और तेल की धार दोनों हमें नहीं दिखाई तो डंडा देखो। अमांयार इस छोटे से देश ईरान की गर्दन इतनी लंबी हो गई कि कहता है पैमेंट डॉलर में नहीं लेगा....हमें कहता है कि पहले तुम परमाणु हथियार बनाना बंद करो..फिर हम बंद करेंगे। पैमेंट डॉलर में नहीं लेगा तो डंडा जरुर लेगा....वैसे भी हमारे बुश साब पंगा लेने में बहुत आगे हैं। तु डॉलर मत लें हम पंगा लेंगे। हमने कहां कि कहावत तो यह भी है कि न नौ मन तेल होगा और न राधा नाचेगी। उसने पलट कर कहा कि तेल भी हमारा होगा और राधा भी। इराक में सद्दाम की गर्दन नापकर तेल भी हमारा हो गया और वहां राज भी हमारा यानी राधा भी हमारी। हमने कहा कि यार तुम लोग पंगा करते ही क्‍यों हो...उसने कहां हम नहीं करते...ये तुम काली चमड़ी वाले करते हो...ब्राड माइंड से सोचते नहीं। कर भला, हो भला..तुम लोग हमारा भला करो, हम तुम्‍हारा भला करेंगे। मैंने पूछा वो कैसे। वह बोला...हम तुम्‍हारे बाजारों, कारखानों, सरकार के बंदों सब जगह घुसपैठ कर लेंगे एमओयू पर साइन करवा कर। जब हमारा सामान बिकेगा तो तुम्‍हारा बनेगा ही नहीं...कच्‍चे माल के आयात और बने माल के निर्यात से तुम्‍हारी मुक्ति। सब जगह हमारा माल....हमारी दुकान। इस तरह होगा तुम्‍हारा भला।

बुश साब ने आज तक किसी का बुरा नहीं चाहा...लेकिन जो डॉलर के साथ पंगा लेता है वहां वे डंडा बजाना नहीं भूलते। हमने कहा कि वैसे इस नारे पर कॉपीराइट हमारा है...क्‍योंकि जैसे हमारा नारा है बंटी और बबली...उसी तर्ज पर बना है यह डॉलर और डंडा। उसने कहा कि चुप रहो...कौन सा कॉपीराइट...हमारे पास डंडा है। मार देंगे एक खोपड़ी में। तुम क्‍या समझते हो कि हम तुम्‍हारे साथ दोस्‍ती कर रहे हैं तो सिर चढ़ जाएं। खाड़ी के ज्‍यादातर देशों में हमारे सैनिक पहुंच ही चुके हैं। वहां रामधुन जमा ली है, अब नहीं हटेंगे। इराक हमारी मुट्ठी में है। अफगानिस्‍तान में राज किसका, हमारा। पाकिस्‍तान चेला किसका हमारा। बाकी जो बचे हैं वे भी हमारे डंडे के जोर पर जेब में होंगे। अब हमारे घर जाने का वक्‍त हो गया था सो बोले चलते हैं, वह बोला सुनते जाओ। एक दिन पाकिस्‍तान में घुस जाएंगे और तुम्‍हारी भी वाट नहीं लगा दी तो बोलना। अपना फोरेन करेंसी भंडार डॉलर पर ही रखना और अमरीकन कंपनियों को अपने यहां राज करने देना....पेप्‍सी, कोक या किसी और को भगाना मत नहीं तो यहां से तुम्‍हें भगा देंगे। पाकिस्‍तान में जिस दिन पहुंचे हिंदुस्‍तान में भी टांग घुसेडेंगे..घेरना तो हमें चीन को है और यह काम तुम्‍हारी धरती से करेंगे एक दिन। समझ गए ब्‍लैक मैन...यह है डॉलर और डंडा।

7 comments:

सिध्दार्थ जोशी said...

चुभोने वाला
कमल जी कई दिन से आपके पोस्‍ट पढ रहा हूं लेकिन पहली बार व्‍यंग का उम्‍दा जलवा देखने को मिला है। शेयर बाजार और कमोडिटी पर लिखी गई सीधी-सीधी बातों के बीच अचानक इंटरनेशनल मुददे पर अमरीकी से टक्‍कर लजवाब लगी।
लेख पढने के दौरान मैं लगातार सोच रहा था कि इसमें कहीं तेल बढने की कीमतों की आगामी संभावना या शेयर बाजार की किसी हलचल से जोडा जाएगा लेकिन अंत तक आपने अमरीका के अन्‍य देशो से संबंधों पर ही बात को जमाए रखा।
मुझे दोबारा पढना पडा तब लगा कि तीर सीध अमरीका पर ही छोडा गया है।
रुपए की मजबूती और देश के बढते सेन्‍सेक्‍स भी जोड लेते तो गोरी चमडी वाले को अधिक लज्जित कर सकते थे।

संजय बेंगाणी said...

अरे आप तो व्यंग्य पर उतर आये. क्या खुब लिखा है. डॉलर और डंडा :) मस्त फँडा.

महेंद्र मिश्रा said...

डालर ऑर डंडा उम्दा व्यंग्य बहुत बढ़िया धन्यवाद

राजीव जैन Rajeev Jain said...

आपने तो मार ही डाला

Sanjeet Tripathi said...

धांसू!!!

अविनाश वाचस्पति said...

व्यंग्य के भी कमल धनी हैं पता चला है
वाह मनी में फूल खिला है कमल बढ़ा है

लिखते बिल्कुल सच्चा हैं कमल कड़ी में
कितने व्यस्त रहें लिखते नहीं हड़बड़ी में

डालर पर डंडा खूब जमा है पता चला है
डालर नीचे रुपया खड़ा है लालची गला है

बदनीयती का राज खोला है सच चला है
बुश नहीं बोला- माफ करो यही सिला है

बुराई का राज जमाने को तो बुबुश चला है
डालर डरा रुपया निडर, यही हश्र भभला है

लोकेश said...

कमल जी आपने बात तो अमेरिका की लिखी है, लेकिन डंडा आपका ही चला है।