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January 31, 2008

शेयर वाले बाबा

sadhu आज मन में इच्‍छा हुई कि चलो यह लोक तो सुधरा शेयर बाजार में कमाकर, गंवाकर, अब परलोक सुधार लिया जाए टीवी पर सुबह सुबह धार्मिक प्रवचन सुनकर। धर्म का धंधा खोले संतों की हमारे देखने से टीआरपी बढ़ जाएगी और सनातन धर्म की रक्षा भी हो जाएगी। आसाराम जी से लेकर रामदेव जी तक को सुनने के लिए, बस हम धोएं कान हुआ स्‍नान के अनुसार तैयार होकर टीवी के सामने। टीवी ऑन, मार्केट गॉन कल दलाल स्‍ट्रीट में घूम रहा दिगंबरी था एक चैनल पर। हमने सोचा दिन में तो यह दलाल स्‍ट्रीट के सांड की अराधना करता रहता है और सुबह सुबह यह टीवी पर अपनी अराधना करवा रहा है या शेयर टिप्‍स दे रहा है भगवा कपड़े पहनकर। बाजार में खुद के कपड़े तो उतरवा ही लिए, अब भक्‍तों के कपड़े उतरवाएगा क्‍या यह। खैर, अपनी जमात के दिगंबरी भाई को सुनने की इच्‍छा हो गई कि यह क्‍या बोलता है। जरा ठहरे।

भक्‍तों, देश का सबसे बड़ा धाम दलाल स्‍ट्रीट खतरे में है। उस पर खतरा मंडराने का मतलब सनातन धर्म का संकट में फंसना है क्‍योंकि आज के जमाने में बगैर लक्ष्‍मी के कुछ नहीं हो सकता। इस जमाने में लक्ष्‍मी तो शेयर बाजार से ही आ रही हैं। पैसा न हो तो क्‍या सनातन धर्म और क्‍या मैं, सब संकट में फंस जाएंगे। पैसा हो तो सारे संकट एक झटके में दूर। अब मुझे ही देखों मेरे शेयर भक्‍तों, मैंने भी मेरे पेट धर्म को संकट में जाने से बचाने के लिए घर बार सब बेचकर एक का दस करने के लिए सब कुछ तेरा तुझको अर्पण क्‍या लागे मेरा की तर्ज पर दलाल स्‍ट्रीट के दलालों के हाथ में सौंप दिया। लेकिन दलाल तो कभी किसी के न हुए सिवाय अपनी दलाली के, तो मेरे क्‍या होते सो मेरा सारा पैसा चट मंगनी पट शादी की तरह साफ हो गया।

जब जब धर्म और उसके ठेकेदारों मेरा मतलब हम जैसे संतों पर संकट आया है आप जैसे चेलों, चे‍लियों ने उसे दूर किया है। यदि आप प्रभु को पाना चाहते हैं तो माया से छुटकारा पाएं। माया मेरे लिए और भगवान आपके लिए। आप चाहे जितना कमाएं लेकिन उसे अपने इस गुरु के बैंक खाते में सौंप दें क्‍योंकि चरणों में सौंपेंगे तो उठाकर कैसे ले जाऊंगा इतनी बड़ी रकम। इसमें हैवी रिस्‍क है। इसलिए मेरे खाता नंबर 4204209211 में जमा कर दें। काम, क्रोध, मद, मोह और लोभ से पिंड छुड़ाने का जो कर्म आपको करना है उसमें माया भी एक है। लेकिन माया जुटाने की किसी ग्रंथ में मनाही नहीं है। हां, उसे छोड़ने के बारे में जरुर कहा गया है। सो, आप पैसे टके को इसी गुरु के बैंक खाते में ट्रांसफर करें। दूसरे गुरुओं के चक्‍कर में भी मत फंस जाना, वे चकमा दे जाएंगे। अकेले इंद्रलोक निकल जाएंगे जहां सुरा व सुंदरी के मजे लिए जा रहे हैं। मैं यहीं हूं आपके बीच, कहीं नहीं जाने वाला जब तक आपके पास माया है और मेरे पास बैंक खाता।

दिगंबरी बोले, हम ग्रेट नागा रोड पर अपना नया आश्रम बनवा रहे हैं जहां लोभी देव की पूजा अर्चना शुरु हो चुकी है। आप लोग आरती, कीर्तन, राजभोग, संध्‍या आरती जैसे ढ़ेरों आयोजन के लिए दान दे सकते हैं। यदि किसी भक्‍त के पास कैश नहीं हो तो वे अपने घर में रखें ब्‍लूचिप शेयरों को भी यहां चढ़ा सकते हैं। इस मंदिर में ढ़ेरों दान पेटियां लगी हैं। वे भी अदभुत है। मसलन आप चाहते हैं कि कपड़े की तंगी न हो आपके इस दिगंबरी को तो, बॉम्‍बे डाईंग, बॉम्‍बे रेयॉन, सेंचुरी के शेयरों के लिए लगी दानपेटियों में पैसा डालें। भक्‍तों आप चाहते हैं कि आपका यह बाबा गाडि़यों का सुख भोगता रहे लेकिन मुझे गा‍ड़ी नहीं चाहिए बल्कि टेल्‍को, मारुति जैसी कंपनियों के शेयर भेंट कर दें। हर त्‍यौहार पर इस आश्रम में खास ब्‍लूचिप कंपनियों के शेयर ही चढ़ावे में चढ़ाए जा सकेंगे। इन शेयरों की लिस्‍ट आप हमारे मैनेजर भारत सांड से ले सकते हैं जो आपको यह बता देंगे कि हम कैसे मोती किस एंगल लाइन से पसंद करते हैं। भक्‍तों हमारा तो एक ही फंडा है परलोक सुधारना है तो करो संत को मस्‍त और तुम रहो पस्‍त।

4 comments:

Vinod Kumar Purohit said...

दिगम्बरी बाबा की जय हो! अच्छा व्यंग्य लिखा है लेकिन इस प्रकार का व्यंग्य लिखने से पहले आपने भाभीजी की अनुमति ली है या नहीं इस निजी मामले पर हम तो कोई टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे आैर ब्लाेग भी प्रात: काल ही लिखा है। देखे आगे आगे क्या महाभारत होती है। बढिया लगा। लगे रहो भाई साहब।

अविनाश वाचस्पति said...

शेयरी सलाह् छोड़ कर
कमल उतरा व्यंग्य पर
पैनी निगाहें आफताब की
खोलें बाबा डीमैट खाता
बाबा कहे शेयर भेंट चढ़ाता जा
चाहे तुझे हो घाटा या लाभ
हानि लाभ विधि हाथ
तू तो कर दे ट्रांसफर
फिर कर कोई भी सफर
बाज़ार से पिंड छुड़ाता जा
धुन सांड की गाता जा
पीछा अपना छुड़ाता जा
जा जा जा शेयर कबूतर
कबूतर जा जा जा ....

Anonymous said...

shaandaar.pratibha aur nazar to pahle bhi paini thi ,aaj kal vyangya main lekhni jamkar muskura rahi hai.apna blog ho to yehi maja hai.keep it up. pankaj ,chhindwara.

dev vrat said...

vah kamal ji...aapka likha pad kar tabiyat khush ho jati hai. business aur vyapaar ki baatein bhi itni rochak ho sakti hain....is kshetra meni ek aap hain aur ek alok puranik....likhate rahiye..
Dev Vrat Singh
Institute of masss Communication and media technology, Kurukshetra University, kurukshetra, haryana