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December 18, 2010

मुरली का सीमेंट प्‍लांट बिकने की खबर थी झूठी!

मुरली इंडस्‍ट्रीज के शेयरों पर पिछले समय दांव लगाकर बड़ा पैसा कमाने की इच्‍छा रखने वाले निवेशकों को जोरदार झटका मैक्सिको की सीमेंट कंपनी सीमेक्स सैब द सीवी ने दिया है। इस कंपनी ने यह साफ कर दिया है कि उसने कभी भी मुरली इंडस्‍ट्रीज के सीमेंट प्‍लांट को खरीदने के लिए बातचीत तक नहीं की। कंपनी ने दो टूक शब्‍दों में कहा है कि सीमेक्‍स न तो इस सौदे में शामिल थी और न ही है। मीडिया में आई खबर के बाद सीमेक्‍स ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। जबकि, मुरली इंडस्‍ट्रीज अब चुप है। सेबी ने पिछले दिनों इस कंपनी के प्रमोटरों को एक पुराने मामले में शेयर बाजार में अपने शेयर बेचने से रोक दिया है।

बाजार के कुछ खिलाडि़यों का कहना है कि मुरली इंडस्‍ट्रीज के प्रमोटरों और इस शेयर में काम कर रहे कुछ ऑपरेटरों ने मिलकर मीडिया में यह खबर परोसवाई की मैक्सिको की सीमेंट कंपनी ने उसके प्‍लांट को खरीदने की तैयारी कर रही है। इस खबर के बाद मुरली इंडस्‍ट्रीज के शेयरों को पंख लग गए। निवेशकों में मुरली इंडस्‍ट्रीज के शेयर खरीदने के लिए अफरातफरी मच गई और लगा जैसे इस कंपनी के शेयर नहीं लिए तो बहुत कुछ उनके हाथ से छूट जाएगा। इसी का नतीजा रहा कि यह शेयर 25 नवंबर 2010 को 118.90 रुपए के उच्‍च स्‍तर पर पहुंच गया। जबकि यह 16 दिसंबर 2010 को 64.20 रुपए पर बंद हुआ। हालांकि, इसका एक सप्‍ताह का निचला स्‍तर 50 रुपए रहा था।

अनेक छोटे निवेशकों का कहना है कि मीडिया ने यह खबर बगैर जांच परख के खूब चलाई जिसकी वजह से उनका खूब नुकसान हुआ। तीन सूत्रों के हवाले से लिखी इस खबर में शायद एक भी सूत्र सही नहीं था या ईमानदार नहीं था। खबर में तो मुरली इंडस्‍ट्रीज और सीमेक्‍स के बीच सौदे के लिए सलाह देने वाले दिग्‍गजों के नाम तक बताए गए हैं लेकिन इन दिग्‍गजों ने कई दिन बीत जाने के बाद भी यह स्‍पष्‍टीकरण नहीं किया कि सीमेक्‍स झूठ बोल रही है या वे इस सौदे में उनके सलाहकार नहीं थे। अथवा उनकी क्‍या पोजीशन थी। सेबी को इस खबर की सच्‍चाई की तह में जाना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

ताज्‍जुब यह है कि सीमेक्‍स की मनाही के बावजूद मुरली इंडस्‍ट्रीज के प्रबंध निदेशक नंदलाल मालू यह कहते फिर रहे हैं कि अंतरराष्‍ट्रीय कंपनी सीमेक्‍स के साथ उनकी बातचीत चल रही है और यह सौदा 180-200 अमरीकी डॉलर प्रति टन पर होगा जो बेहतर भाव कहा जा सकता है। देश के एक आर्थिक अखबार में मुरली इंडस्‍ट्रीज की यह खबर इस तरह थी:

मुरली सीमेंट खरीदने की तैयारी में मैक्सिको की सीमेक्स

मैक्सिको की सीमेंट कंपनी सीमेक्स सैब द सीवी भारतीय कंपनी मुरली सीमेंट को करीब 55 करोड़ डॉलर में खरीदने की तैयारी में है। यूरोपीय कंपनियों लाफार्ज और होलसिम के बाद सीमेक्स दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी है। तीन सूत्रों ने बताया कि कई महीनों तक मुरली सीमेंट का ड्यू डिलिजेंस करने के बाद सीमेक्स ने अंतिम बोली लगाई है। सूत्रों के मुताबिक, पहले लाफार्ज और दुनिया की पांचवें नंबर की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी इटालसीमेंटी भी हिस्सेदारी लेने के लिए मुरली सीमेंट से बातचीत कर रही थीं। इक्विटी ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल की इनवेस्टमेंट बैंकिंग यूनिट इस सौदे में मुरली सीमेंट की मूल कंपनी नागपुर की मुरली इंडस्ट्रीज को सलाह दे रही है। इससे पहले इस साल यह इनवेस्टमेंट बैंकिंग यूनिट श्री रेणुका शुगर के ब्राजीलियाई अधिग्रहण में भी सलाह दे चुकी है। सूत्रों ने बताया कि मैक्वेरी कैपिटल और जेफरीज इंडिया भी मुरली के साथ काम कर रही हैं, जबकि बैंक ऑफ अमेरिका-मेरिल लिंच सीमेक्स को सलाह दे रही है। स्विट्जरलैंड की सीमेंट कंपनी होलसिम द्वारा 2005 में एक आकर्षक सौदे में एसीसी सीमेंट और अंबुजा सीमेंट का नियंत्रण हासिल करने के बाद यह भारतीय सीमेंट इंडस्ट्री का सबसे बड़ा सौदा होगा। बाद में, होलसिम ने 2006 की शुरुआत में गुजरात अंबुजा सीमेंट में शेखसरिया और नेवतिया घरानों का हिस्सा खरीदा था। मुख्य रूप से मुरली इंडस्ट्रीज का नाम कागज और कृषि संबंधी कारोबार के लिए जाना जाता है। माना जा रहा है कि कंपनी इस सौदे के जरिए सीमेंट कारोबार से पूरी तरह किनारा करने की तैयारी में है। महाराष्ट्र के चंदपुर में 30 लाख टन क्षमता के कारखाने के अलावा मुरली ने राजस्थान और कर्नाटक में दो यूनिट शुरु करने की घोषणा की थी। कंपनी की प्रस्तावित दोनों यूनिटों की उत्पादन क्षमता 30-30 लाख टन है। चंदपुर कारखाने की तरह इन दोनों यूनिट में अपने इस्तेमाल के लिए 50 मेगावॉट के बिजली कारखाने भी हो सकते हैं। इन दोनों यूनिट के लिए कोयला आपूर्ति के लंबी अवधि के करार भी हो सकते हैं। सीमेंट उद्योग के अधिकारियों के मुताबिक, इन कारखानों के लिए मुरली ने उपकरणों के ऑर्डर अभी नहीं दिए हैं। कंपनी पर फिलहाल 600 करोड़ रुपए का कर्ज है और इसका डेट-इक्विटी अनुपात 2.5:1 है। विश्लेषकों का कहना है कि यह सौदा मुरली इंडस्ट्रीज के सीमेंट कारोबार का मूल्यांकन 180 डॉलर प्रति टन से अधिक के एंटरप्राइज वैल्यू पर कर सकता है। नाम जाहिर न करने की शर्त पर एक इंस्टीट्यूशनल ब्रोकरेज फर्म के एक विश्लेषक ने कहा, '30 लाख टन क्षमता और 40 फीसदी यूटिलाइजेशन वाले कारखाने का सौदा महंगा है।' अप्रैल में फ्रांस की विकैट ने आंध्र प्रदेश की 25 लाख टन क्षमता वाली सीमेंट कंपनी भारती सीमेंट में 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। इस सौदे का वित्तीय विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया था, लेकिन सूत्रों के मुताबिक 200 डॉलर प्रति टन के वैल्यूएशन के साथ यह सौदा 50 करोड़ डॉलर में हुआ था। दुनिया की बड़ी सीमेंट कंपनियों में अधिग्रहण और विलय के मोर्चे पर सीमेक्स सबसे आक्रामक कंपनी है। 2005 में इसने लंदन के आरएमसी समूह को 5.8 अरब डॉलर में खरीदा था और उसके बाद ऑस्ट्रेलिया के रिकंर ग्रुप का अधिग्रहण लगभग 14.2 अरब डॉलर में किया। सीमेक्स के कर्मचारियों की संख्या 50,000 से ज्यादा है और 2009 में इसकी बिक्री 15 अरब डॉलर थी। नाम जाहिर न करने की शर्त पर एक वरिष्ठ इनवेस्टमेंट बैंकर ने कहा, 'वैश्विक स्तर पर भारत में अधिग्रहण करने में कंपनियों की काफी रुचि है, लेकिन यहां बहुत कम विक्रेता हैं।'(www.moltol.in से साभार)

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