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January 31, 2008

निवेश से पहले रियलटी को परखें

भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्‍याज दर में जो कटौती नहीं कि उससे सबसे ज्‍यादा कंसट्रक्‍शन कंपनियां निराश हुई हैं। इन कंपनियों को उम्‍मीद थी कि रिजर्व बैंक ने यदि ब्‍याज दर को 25 बेसिस अंक भी घटाया तो लोग उनके बने मकान, फ्लैट या व्‍यावसायिक जगह बैंकों से कर्ज लेकर खरीदेंगे क्‍योंकि उनके कुछ पैसे इसमें बचेंगे। लेकिन, रिजर्व बैंक ने इन कंपनियों के साथ उन लोगों के सपने को भी बिखेर दिया जो ब्‍याज दर में कमी की आस लगाए बैठे थे।

हालांकि, भारतीय पूंजी बाजार में पिछले दो साल में रियालिटी या कंसट्रक्‍शन और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के नाम पर ढ़ेरों कंपनियां पूंजी बाजार में आई और निवेशकों को लैंड बैंक के साथ बढ़ती मांग के नाम पर खूब ऊंचे दामों में अपने शेयर बेचे हैं। इन कंपनियों के इश्‍यू की बाढ़ ने देश्‍ा के हर शहर, कस्‍बे में जमीन और मकानों की कीमतें रातों रात इतनी अधिक बढ़ा दी कि आम आदमी यही अफसोस कर रहा है कि काश, जिंदगी में एक छोटा सा मकान पेट काटकर पहले ले लिया होता तो अच्‍छा रहता। खैर! रियालिटी डेवलपरों का कहना है कि ब्‍याज दर महंगी होने की वजह से उनकी बिक्री प्रभावित हो रही है।

खुद भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से नवंबर 2007 के दौरान घर कर्ज की मांग में 39 फीसदी कमी आई है। इस अवधि में यह राशि 32424 करोड़ रुपए रही। डेवलपर्स को दिए जाने वाले परियोजना कर्ज में भी 25 फीसदी की कमी आई और यह राशि 12563 करोड़ रुपए रही। बंगलूर, कोच्चि, हैदराबाद, नोएडा और गुडगांव जहां प्रोपर्टी के दाम बेहद तेज गति से बढ़े थे, अब दस फीसदी कम हो गए हैं। असल में भाव अपने पिछले स्‍तर से कम नहीं हुए हैं, बल्कि आसमान जा पहुंचे भाव में दस फीसदी की कमी आई है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की बात की जाए तो नवंबर 2007 में सभी तरह के रजिस्‍ट्रेशन 12903 रहे, जो नवंबर 2006 में 14161 थे। कोटक रियालिटी के एस श्रीनिवास कहते हैं कि पिछले दो साल में रियल इस्‍टेट डेवलपर्स ने 25 अरब डॉलर जुटाए हैं। हालांकि, बड़े डेवलपर्स बिक्री घटने के बावजूद दाम घटाने की जल्‍दबाजी में नहीं हैं लेकिन निवेशक जो प्रोपर्टी या ऐसी कंपनियों के शेयरों में निवेश करना चाहते हैं, उन्‍हें थोड़ा रुकना चाहिए। इस संकेत के लिए इतिहास में घटी इस घटना पर मनन करना उचित होगा।

भारतीय शेयर बाजार में वर्ष 1930 में बॉम्‍बे रिक्‍लेमेशन नामक कंपनी सूचीबद्ध थी जिसका भाव उस समय छह हजार रुपए प्रति शेयर बोला जा रहा था, जबकि लोगों का वेतन उस समय दस रुपए महीना होता था। कंपनी का दावा था कि वह समुद्र में से जमीन निकालेगी और मुंबई को विशाल से विशाल शहर में बदल देगी लेकिन हुआ क्‍या। कंपनी दिवालिया हो गई और लोगों को लगी बड़ी चोट। अब यह लगता है कि अनेक रियालिटी या कंसट्रक्‍शंस के नाम पर कुछ कंपनियां फिर से इतिहास दोहरा सकती हैं। आप खुद सोचिए कि ऐसा क्‍या हुआ कि रातों रात ये कंपनियां जो अपने आप को करोड़ों रुपए की स्‍वामी बता रही हैं, आम निवेशक को अपना मुनाफा बांटने आ गईं। प्रॉपर्टी में ऐसा क्‍या हुआ है कि भाव दिन दुगुने और रात चौगुने बढ़े हैं। क्‍या आम आदमी की खरीद शक्ति ब्‍याज दरों के काफी ऊंचा होने के बावजूद जोरदार ढंग से बढ़ रही है या फिर यह आर्टिफिशियल गेम है।

शेयर वाले बाबा

sadhu आज मन में इच्‍छा हुई कि चलो यह लोक तो सुधरा शेयर बाजार में कमाकर, गंवाकर, अब परलोक सुधार लिया जाए टीवी पर सुबह सुबह धार्मिक प्रवचन सुनकर। धर्म का धंधा खोले संतों की हमारे देखने से टीआरपी बढ़ जाएगी और सनातन धर्म की रक्षा भी हो जाएगी। आसाराम जी से लेकर रामदेव जी तक को सुनने के लिए, बस हम धोएं कान हुआ स्‍नान के अनुसार तैयार होकर टीवी के सामने। टीवी ऑन, मार्केट गॉन कल दलाल स्‍ट्रीट में घूम रहा दिगंबरी था एक चैनल पर। हमने सोचा दिन में तो यह दलाल स्‍ट्रीट के सांड की अराधना करता रहता है और सुबह सुबह यह टीवी पर अपनी अराधना करवा रहा है या शेयर टिप्‍स दे रहा है भगवा कपड़े पहनकर। बाजार में खुद के कपड़े तो उतरवा ही लिए, अब भक्‍तों के कपड़े उतरवाएगा क्‍या यह। खैर, अपनी जमात के दिगंबरी भाई को सुनने की इच्‍छा हो गई कि यह क्‍या बोलता है। जरा ठहरे।

भक्‍तों, देश का सबसे बड़ा धाम दलाल स्‍ट्रीट खतरे में है। उस पर खतरा मंडराने का मतलब सनातन धर्म का संकट में फंसना है क्‍योंकि आज के जमाने में बगैर लक्ष्‍मी के कुछ नहीं हो सकता। इस जमाने में लक्ष्‍मी तो शेयर बाजार से ही आ रही हैं। पैसा न हो तो क्‍या सनातन धर्म और क्‍या मैं, सब संकट में फंस जाएंगे। पैसा हो तो सारे संकट एक झटके में दूर। अब मुझे ही देखों मेरे शेयर भक्‍तों, मैंने भी मेरे पेट धर्म को संकट में जाने से बचाने के लिए घर बार सब बेचकर एक का दस करने के लिए सब कुछ तेरा तुझको अर्पण क्‍या लागे मेरा की तर्ज पर दलाल स्‍ट्रीट के दलालों के हाथ में सौंप दिया। लेकिन दलाल तो कभी किसी के न हुए सिवाय अपनी दलाली के, तो मेरे क्‍या होते सो मेरा सारा पैसा चट मंगनी पट शादी की तरह साफ हो गया।

जब जब धर्म और उसके ठेकेदारों मेरा मतलब हम जैसे संतों पर संकट आया है आप जैसे चेलों, चे‍लियों ने उसे दूर किया है। यदि आप प्रभु को पाना चाहते हैं तो माया से छुटकारा पाएं। माया मेरे लिए और भगवान आपके लिए। आप चाहे जितना कमाएं लेकिन उसे अपने इस गुरु के बैंक खाते में सौंप दें क्‍योंकि चरणों में सौंपेंगे तो उठाकर कैसे ले जाऊंगा इतनी बड़ी रकम। इसमें हैवी रिस्‍क है। इसलिए मेरे खाता नंबर 4204209211 में जमा कर दें। काम, क्रोध, मद, मोह और लोभ से पिंड छुड़ाने का जो कर्म आपको करना है उसमें माया भी एक है। लेकिन माया जुटाने की किसी ग्रंथ में मनाही नहीं है। हां, उसे छोड़ने के बारे में जरुर कहा गया है। सो, आप पैसे टके को इसी गुरु के बैंक खाते में ट्रांसफर करें। दूसरे गुरुओं के चक्‍कर में भी मत फंस जाना, वे चकमा दे जाएंगे। अकेले इंद्रलोक निकल जाएंगे जहां सुरा व सुंदरी के मजे लिए जा रहे हैं। मैं यहीं हूं आपके बीच, कहीं नहीं जाने वाला जब तक आपके पास माया है और मेरे पास बैंक खाता।

दिगंबरी बोले, हम ग्रेट नागा रोड पर अपना नया आश्रम बनवा रहे हैं जहां लोभी देव की पूजा अर्चना शुरु हो चुकी है। आप लोग आरती, कीर्तन, राजभोग, संध्‍या आरती जैसे ढ़ेरों आयोजन के लिए दान दे सकते हैं। यदि किसी भक्‍त के पास कैश नहीं हो तो वे अपने घर में रखें ब्‍लूचिप शेयरों को भी यहां चढ़ा सकते हैं। इस मंदिर में ढ़ेरों दान पेटियां लगी हैं। वे भी अदभुत है। मसलन आप चाहते हैं कि कपड़े की तंगी न हो आपके इस दिगंबरी को तो, बॉम्‍बे डाईंग, बॉम्‍बे रेयॉन, सेंचुरी के शेयरों के लिए लगी दानपेटियों में पैसा डालें। भक्‍तों आप चाहते हैं कि आपका यह बाबा गाडि़यों का सुख भोगता रहे लेकिन मुझे गा‍ड़ी नहीं चाहिए बल्कि टेल्‍को, मारुति जैसी कंपनियों के शेयर भेंट कर दें। हर त्‍यौहार पर इस आश्रम में खास ब्‍लूचिप कंपनियों के शेयर ही चढ़ावे में चढ़ाए जा सकेंगे। इन शेयरों की लिस्‍ट आप हमारे मैनेजर भारत सांड से ले सकते हैं जो आपको यह बता देंगे कि हम कैसे मोती किस एंगल लाइन से पसंद करते हैं। भक्‍तों हमारा तो एक ही फंडा है परलोक सुधारना है तो करो संत को मस्‍त और तुम रहो पस्‍त।

January 30, 2008

शेयरों में निवेश पर मिलती है टैक्‍स में छूट


शेयर बाजार में नियमित निवेश करने के बावजूद आप अक्सर हैरान होते होंगे कि मोटा मुनाफा होने के बाद भी आपके हाथ में मामूली रकम क्यों बचती है? आपके मुनाफे का बड़ा हिस्सा लेन-देन की लागत व टैक्स में चली जाती है। इस मुनाफे में से सरकार और ब्रोकर दोनों बड़ा हिस्सा खा जाते हैं। ब्रोकर के साथ अगर आपके संबंध अच्छे हैं तो वह दलाली का एक हिस्सा आपको लौटा भी सकता है। वहीं सरकार आपके सिक्यूरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) को शेयर बाजार के लाभ पर टैक्स से बराबर कर सकती है।

आयकर अधिनियम के सेक्शन 88ई में उन लोगों को छूट हासिल है जो शेयर बाजार में सक्रिय ट्रेडर हैं, भले ही व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ), कंपनियां, फर्म, लोगों के संगठन या कोई और हो।

प्रावधान:

एक, आपकी कर योग्य आय वह आय होनी चाहिए जिस पर ‘प्राफिट एंड गेन्स ऑफ बिजनेस आर प्रोफेशन’ के तहत टैक्स लगता हो।

दो, यह आय कर योग्य शेयर कारोबार से मिली पाजिटिव इनकम होनी चाहिए। पाजिटिव इनकम से मतलब है कि शेयरों के लेन-देन से कुछ आय हो। अगर आप इस मद में नुकसान दिखा रहे हैं तो सेक्शन 88ई के तहत कोई छूट नहीं मिलती।

अगर शेयर कारोबार से आय नहीं होती है और इनकम फ्राम कैपिटल गेन्स के तहत उसे लाभ हानि होते हैं और वह इसे निवेश की तरह मानता है तो यह प्रावधान लागू नहीं होगा। निवेश और व्यवसाय अलग-अलग तथ्य हैं और हर मामले के हिसाब से तय होते हैं।

88ई में छूट:

आपको एसटीटी भुगतान का सबूत पेश करना होगा। सबूत दो स्थितियों में अलग-अलग होंगे।
1. अगर आपने किसी स्टाक एक्सचेंज के जरिए सौदे किए हैं तो एसटीटी भुगतान की जानकारी की फार्म 10डीबी के तहत निर्धारित प्रारूप में पुष्टि होनी चाहिए।
2. जिस ब्रोकर के जरिए आपने सौदे किए हैं, उसी से यह फार्म हासिल करना होगा।
3. अगर आप उसी ब्रोकर के साथ दूसरे ग्राहक कोड से कारोबार करते हैं तो जानकारियां दो कोड से दी जाएंगी।
4. अगर अलग-अलग ब्रोकरों के जरिए कारोबार हुआ है तो अलग-अलग जानकारियां दी जाएंगी।

म्यूचुअल फंड के लिए:

अगर इक्विटी फंड या म्यूचुअल फंड की यूनिट आप बेचते हैं तो फार्म 10 डीसी में एसटीटी की जानकारी देनी होगी।
1. जिस म्यूचुअल फंड से आप धन की वापसी करते हैं, उसी से फार्म मिलेगा।
2. एक से ज्यादा स्कीम से धन वापस या मुक्त करते हैं तो हर स्कीम की अलग जानकारी देनी होगी।
3. एक से ज्यादा म्यूचुअल फंड से धन मुक्त करते हैं तो हर फंड के लिए अलग जानकारी देनी होगी। भास्‍कर डॉट कॉम से साभार।

केईआई इंडस्‍ट्रीज: पैसे का केबल

kei लो टेंशन और हाई टेंशन पावर केबल्‍स के उत्‍पादन से जुड़ी देश की मुख्‍य कंपनी केईआई इंडस्‍ट्रीज देश में बिजली क्षेत्र के हो रहे विकास के साथ तेज गति से आगे बढ़ रही है। लो टेंशन केबल्‍स में इसकी 37 हजार किलोमीटर और हाई टेंशन केबल्‍स में तीन हजार किलोमीटर सालाना उत्‍पादन क्षमता है। कंपनी ने अक्‍टूबर से दिसंबर 2007 की तिमाही के घोषित नतीजों में 233.5 करोड़ रुपए की आय पर 13.5 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। जबकि, पिछले साल समान अवधि में इसकी आय 160.5 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 11 करोड़ रुपए था। वर्ष 2006/07 में कंपनी की आय 604.3 करोड़ रुपए और शुद्ध मुनाफा 40.1 करोड़ रुपए रहा। 31 मार्च 2008 को समाप्‍त होने वाले वित्‍त वर्ष में आय बढ़कर 885.1 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 58 करोड़ रुपए होने का अनुमान है।

  • केईआई इंडस्‍ट्रीज देश की दूसरी सबसे बड़ी पावर केबल उत्‍पादक कंपनी है और देश के शेयर बाजार में सूचीबद्ध सबसे बड़ी खिलाड़ी।
  • कंपनी के चौपंकी स्थित नए संयंत्र में जनवरी के पहले सप्‍ताह से आंशिक उत्‍पादन आरंभ हो गया है। हालांकि, हाई टेंशन केबल्‍स इकाई का काम अंतिम चरण में है और इसके मई महीने से शुरु होने की उम्‍मीद है। कंपनी की आय में इस संयंत्र का योगदान 350 करोड़ रुपए सालाना होने की संभावना है। इसके अलावा कंपनी के भिवाड़ी संयंत्र में चल रहे एचटी केबल अपग्रेडेशन और एलटी केबल विस्‍तार सुविधा अंतिम चरण में है। इस संयंत्र के अप्रैल 2008 तक आरंभ हो जाने की उम्‍मीद है।
  • कंपनी बिजली उत्‍पादन के लिए एक सब्‍सिडीयरी के माध्‍यम से उतरने की तैयारी कर रही है। इस संबंध में कंपनी जल्‍दी घोषणा करेगी।
  • कंपनी के ताजा नतीजों में मार्जिन पर एक दबाव दिखा जो इसके स्‍टेनलैस स्‍टील वायर सेगमेंट पर दिखा। निकिल के दामों में आए उतार चढ़ाव से कंपनी के मार्जिन पर दबाव आया।

केईआई इंडस्‍ट्रीज (तकनीकी रिपोर्ट के लिए यहां क्लिक करें)में प्रमोटरों की हिस्‍सेदारी 35.82 फीसदी है। विदेशी संस्‍थागत निवेशकों के पास 16.91 फीसदी, म्‍युच्‍यूअल फंड व संस्‍थागत निवेशकों के पास 8.59 फीसदी, नॉन प्रमोटर कार्पोरेट के पास 24.45 फीसदी शेयर हैं, जबकि आम जनता के पास केवल 14.23 फीसदी श्‍ोयरधारिता है। कंपनी को वित्‍त वर्ष 2008/09 में 1319.3 करोड़ रुपए की आय और 87 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा होने की उम्‍मीद है। जबकि, वित्‍त वर्ष 2009/10 में आय 1652.1 करोड़ रुपए और शुद्ध मुनाफा 110.8 करोड़ रुपए पहुंच जाने की आस है। इसका बाजार पूंजीकरण 523.33 करोड़ रुपए है। पिछले 52 सप्‍ताह में केईआई इंडस्‍ट्रीज का शेयर ऊपर में 169 रुपए और नीचे में 65 रुपए था। यह 29 जनवरी 2008 को 88.50 रुपए पर बंद हुआ। मध्‍यम से लंबी अवधि के निवेश के लिए यह बेहतर स्‍टॉक है क्‍योंकि कंपनी पावर केबल के बाद अब बिजली उत्‍पादन में भी उतरने जा रही है जिसका लाभ निश्चित रुप से निवेशकों को मिलेगा। केईआई इंडस्‍ट्रीज के शेयर का भाव आने वाले दिनों में 120 रुपए तक जा सकता है।

January 29, 2008

रिजर्व बैंक ने किया निराश

भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में नरमी लाने की सभी अटकलबाजियों को खाजिर करते हुए बैंक दर, रेपो दर और रिवर्स रेपो दरों को पहले के स्तर पर ही बनाए रखा है। जबकि, बाजार और उद्योग जगत ने उम्‍मीदों से भरी नजरें रिजर्व बैंक पर लगा रखी थीं।
रिजर्व बैंक गवर्नर वाई।वी.रेड्डी ने 2007-08 की ऋण एवं मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही की समीक्षा रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि बैंक जरुरत पड़ने पर ब्याज दरों में बीच में भी बदलाव कर सकता है।

अमरीका के फैड रिजर्व बैंक ने पिछले सप्ताह ब्याज दरों में पौना फीसदी की कटौती किए जाने के बाद यह अटकलें जोरों पर थी कि रिजर्व बैंक भी ब्याज दरों में कमी कर सकता है। बैंक ने बाजार में वित्तीय तरलता की स्थिति को देखते हुए नकद सुरक्षित अनुपात (सीआरआर) में भी कोई बदलाव नहीं किया है।

रिजर्व बैंक की तिमाही समीक्षा रिपोर्ट जारी होते ही शेयर बाजार में बैंकों के शेयरों में गिरावट का रुझान देखा गया। घोषणा के तुरंत बाद बीएसई के बैंकिंग क्षेत्र के सूचकांक में चार प्रतिशत की गिरावट आई।

समीक्षा में रेपो दर को पौने आठ प्रतिशत, रिवर्स रिपो और बैंक दर प्रत्येक को छह फीसदी पर बनाए रखा गया है। सीआरआर में भी साढ़े सात प्रतिशत पर कोई बदलाव नहीं किया गया है। रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष के लिए रिजर्व बैंक, आर्थिक वृद्धि दर के साढ़े आठ फीसदी के पहले अनुमान पर अब भी कायम है। इसी प्रकार मुद्रास्फीति के पांच फीसदी के दायरे में बने रखने के अनुमान को बनाए रखते हुए बैंक ने इसके चार से साढ़े चार फीसदी के बीच रहने की संभावना व्यक्त की है।

रुचि सोया : सॉलिड स्‍टॉक

ruchi घरेलू खाद्य तेल कंपनी के शेयरों में जब निवेश की बात आती है तो सभी निवेशकों के दिमाग में रुचि सोया का नाम सबसे पहले उभर आता है। इस कंपनी के कार्य प्रदर्शन और सही योजना ने निवेशकों को हमेशा अपनी ओर खींचा है। रुचि सोया ने हाल में अपने तिमाही नतीजे घोषित किए हैं। अक्‍टूबर से दिसंबर 2008 की तिमाही में कंपनी की शुद्ध बिक्री 3196.6 करोड़ रुपए रही जिस पर शुद्ध लाभ 59.5 करोड़ रुपए रहा। जबकि, अक्‍टूबर से दिसंबर 2007 की तिमाही में शुद्ध लाभ 37.5 करोड़ रुपए और शुद्ध बिक्री 2853.4 करोड़ रुपए थी। यानी चालू तिमाही में शुद्ध बिक्री में पिछली समान तिमाही की तुलना में 12 फीसदी और शुद्ध मुनाफे में 59 फीसदी की बढ़ोतरी। जबकि, इन नतीजों को अप्रैल से दिसंबर 2007 के नौ महीनों में संदर्भ में देखें तो शुद्ध बिक्री 7519.2 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 119.7 करोड़ रुपए रहा। जबकि, पिछले साल समान अवधि में शुद्ध बिक्री 5536 करोड़ रुपए एवं शुद्ध लाभ 66.5 करोड़ रुपए था। नौ महीनों में शुद्ध बिक्री 36 फीसदी एवं शुद्ध लाभ में 80 फीसदी का इजाफा हुआ है।

  • रुचि सोया ने सरसों, बिनौला और राइस ब्रान तेलों के रिटेल बाजार में बड़े पैमाने पर उतरने की आसोया क्रामक योजना बनाई है।
  • खाद्य तेलों के खपत में हो रही बढ़ोतरी में पैकेड खाद्य तेल का बाजार 15 से 20 फीसदी की दर से बढ़ रहा है।
  • कंपनी जैट्रोफा प्‍लांटेशन और बॉयो फ्यूल में उतरने की तैयारी में है। देश में डीजल की बढ़ रही मांग से कंपनी का इस मोर्चे पर बड़ा लाभ होगा।
  • रुचि सोया ने इंडोनेशिया में पॉम तेल प्‍लांटेशन की योजना बनाई है। यह अनुबंध फॉर्मिंग पर होगी। इस सौदे के जल्‍दी पूरा होने की संभावना है। कंपनी का यह कदम उसके लिए बड़ा लाभदायी होगा और फीडस्‍टॉक प्राइस को उचित बनाए रखने में मदद मिलेगी।
  • भारत अपनी जरुरत का 40 फीसदी पॉम तेल आयात करता है। जनवरी 2007 से अब तक पॉम तेल के दाम 75 फीसदी बढ़े हैं।
  • रुचि सोया न्‍यूट्रैला ब्रांड के तहत फूड और ब्रेवरीज उत्‍पाद लांच करेगी।

रुचि सोया (तकनीकी रिपोर्ट के लिए यहां क्लिक करें) में प्रमोटरों की हिस्‍सेदारी 36.02 फीसदी, संस्‍थागत निवेशकों और म्‍युच्‍यूअल फंडों की हिस्‍सेदारी 26.51 फीसदी, विदेशी संस्‍थागत निवेशकों की 28.22 फीसदी एवं आम जनता की हिस्‍सेदारी 9.01 फीसदी है। इसका बीएसई कोड 500368 है।

रुचि सोया को चालू वित्‍त वर्ष में 10500 करोड़ रुपए की शुद्ध बिक्री पर 170.5 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ होने की उम्‍मीद है। बुक वेल्‍यू 57.4 रुपए रहने की आस है। कंपनी को वर्ष 2008-09 में 12075 करोड़ रुपए की शुद्ध बिक्री पर 227.7 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा और बुक वेल्‍यू 75.7 रुपए रहने की संभावना है। वर्ष 2009-10 में कंपनी को 13886.3 करोड़ रुपए की शुद्ध बिक्री पर 297.3 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ एवं बुक वेल्‍यू 97.4 रुपए पहुंच जाने की उम्‍मीद है।

रुचि सोया के शेयर का पिछले 52 सप्‍ताह में उच्‍च भाव 165 रुपए और नीचला भाव 61 रुपए था। इसकी इक्विंटी 36.5 करोड़ रुपए है। इसका बाजार पूंजीकरण 2156.88 करोड़ रुपए है। रुचि सोया का भाव 28 जनवरी 2008 को 118 रुपए था जिसके अगले 10 महीनों में 170 रुपए तक पहुंचने की उम्‍मीद की जा सकती है।

January 28, 2008

शेयर बाजार में सब कुछ नेगेटिव नहीं

भारतीय शेयर बाजार जिस मंदी की मार झेल रहे हैं वह खतरा अभी पूरी तरह खत्‍म नहीं हुआ है। अमरीकी फैड रिजर्व ने आनन फानन में ब्‍याज दरों में कटौती कर शेयर बाजार को बुरी तरह टूटने से थामने की कोशिश जरुर की लेकिन सबप्राइम के नतीजों पर इससे वास्‍तव में ब्रेक नहीं लगाया जा सकता। भारतीय रिजर्व बैंक की इस सप्‍ताह मौद्रिक नीति पर बैठक होने जा रही है और उम्‍मीद है कि 25 बेसिक अंक की ब्‍याज दर में कमी की जा सकती है। यह कमी होती है तो भारतीय शेयर बाजार के लिए यह एक अच्‍छी खबर होगी।
भारतीय शेयर बाजार में बीते सप्‍ताह जो मंदी के झटके लगे, उसके बारे में हमने दिसंबर में ही कह दिया था कि विदेशी संस्‍थागत निवेशक अब पहले से अधिक समझदार है और जो निवेशक यह मानते हैं कि जनवरी में नया पैसा लाकर विदेशी निवेशक हमसे महंगे स्‍टॉक खरीद लेंगे, गलत साबित होंगे और बाजार जनवरी को दूसरे सप्‍ताह में ढ़ेर हो जाएगा।

शेयर बाजार की मौजूदा मंदी अमरीका में सबप्राइम का असली नतीजा है। इससे यह तो साफ है कि अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में घटने वाली हर घटना का हमारे शेयर बाजार पर असर जरुर पड़ेगा। यही वजह रही कि 21 और 22 जनवरी की गिरावट ने निवेशकों के दस लाख करोड़ रुपए साफ कर दिए। हालांकि बाद में आए सुधार ने निवेशकों को थोड़ी राहत दी। भारतीय शेयर बाजार में तेजी का यह आठवां साल है और इस साल अंतरराष्‍ट्रीय बाजारों में घटने वाली घटनाओं का हमारे बाजार पर खासा असर पड़ेगा। हालांकि, जो निवेशक मध्‍यम से लंबी अवधि के लिए यहां पैसा लगा रहे हैं उन्‍हें चिंतित होने की जरुरत नहीं है। निवेशकों को याद होगा कि मई-जून 2006 में सेंसेक्‍स 30 फीसदी यानी 3300 अंक टूट गया था और उसके बाद अब तक सेंसेक्‍स 12 हजार अंक बढ़ गया।

केआर चौकसी सिक्‍युरिटीज के देवेन चौकसी कहते हैं कंसोलिडेशन के तहत सेंसेक्‍स 18830-19630 के बीच रहेगा लेकिन इससे ऊपर जाने पर यह 20500­-21200 अंक पर होगा। वे एक अहम बात कहते हैं कि सरकार को तीन लाख करोड़ रुपए का अग्रिम कर मिलने का मतलब है इसे आने वाली आय में परिवर्तित किया जाए तो यह नौ लाख करोड़ रुपए से ज्‍यादा बैठती है। यह नतीजा बताता है कि परियोजनाओं और निवेश बाजार में खासी रकम आ रही है। हम निफ्टी और सेंसेक्‍स शेयरों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी देख सकते हैं। इस स्थिति में बाजार में आई हर गिरावट खरीद का मौका देती है।
आज से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 18931 अंक को पार करता है तो यह 19378 अंक तक जा सकता है। इसे नीचे में 17828 अंक पर स्‍पोर्ट मिलने की संभावना है। निफ्टी को 5222 अंक पर स्‍पोर्ट मिलने के आसार हैं। निफ्टी 5546 अंक पार करने पर 5691 अंक तक जा सकता है।

कोटक एएससी के अलरॉय लोबो का कहना है कि शेयर बाजार में करेक्‍शन अभी खत्‍म नहीं हुआ है। बीएसई सेंसेक्‍स को स्‍पोर्ट 18 हजार के आसपास मिलेगा। जबकि, एम्बिट कैपिटल के निलेश शाह का कहना है कि यह शार्ट टर्म गिरावट है। भारतीय बाजार 21 हजार पर कुछ एक्‍सपेंसिव लग रहा था 18 हजार पर यह निवेश के लिए आकर्षक है।

इस सप्‍ताह कुछ कंपनियां बोनस, शेयर विभाजन और लाभांश घोषित करेंगी। इनमें राजेश एक्‍सपोर्ट, एशियन फिल्‍म, सेसा गोवा, आर्टसन इंजीनियरिंग, फाइनेंशियल, गुजरात फ्लोरो और ओरिएंट पेपर मुख्‍य हैं।

जिन कंपनियों के शेयरों पर इस सप्‍ताह निवेशक ध्‍यान दे सकते हैं वे है : केसीपी, डब्‍लूएस इंडस्‍ट्रीज, इंटरनेशनल कॉब्‍युजन, रिलायंस कम्‍युनिकेशन, एनटीपीसी, केएस ऑयल, जीई शीपिंग, वरुण शीपिंग, एशियन होटल्‍स, कंटेनर कार्पोरेशन, सारेगामा इंडिया और टीटीके प्रेस्‍टीज।

शेयर बाजार की नजरें रिजर्व बैंक पर

शेयर बाजार के खिलाडि़यों की नजरें अब भारतीय रिजर्व बेंक पर लगी हैं। भारतीय रिजर्व बैंक कल यानी 29 जनवरी 2008 को अपनी मौद्रिक नीति घोषित करेगा। इस नीति में उम्‍मीद की जा रही है कि बैंक ब्‍याज दरों में 25 से 50 बेसिस अंक की कमी करें। इस कदम से न केवल वैश्विवक मंदी के माहौल में हालात अच्‍छे करने का मौका मिलेगा बल्कि घरेलू मांग में बढ़ावा होगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर और कर्ज दरों में आखिरी कटौती मार्च 2004 में की थी। जबकि बैंक जून 2006 से पिछले मार्च तक पांच बार इसमें बढ़ोतरी कर चुका है। कारोबारियों का कहना है कि ब्‍याज दरें अपने उच्‍च स्‍तर पर पहुंच चुकी हैं और इससे औद्योगिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। सकल घरेलू विकास दर को 8.6 फीसदी बनाए रखने के लिए अर्थव्‍यवस्‍था को मौद्रिक नीति के स्‍पोर्ट की जरुरत है। उल्‍लेखनीय है कि अमरीकी फैड रिजर्व बैंक 22 जनवरी को आनन फानन में ब्‍याज दरों में 75 बेसिस अंकों की कमी कर चुका है और यह माना जा रहा है कि 29-30 जनवरी को होने वाली बैठक में अर्थवयवस्‍था में कमजोरी दिखने पर ब्‍याज दर में और कटौती कर सकता है।


ब्‍याज दर में कटौती को लेकर कोई भी निश्चित रुप से कुछ नहीं कह पा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ब्‍याज दर में कटौती करेगा या नहीं, इस संबंध में दोनों तरह के मत हैं। कुछ खिलाड़ी मानते हैं कि बाजार में लिक्विडिटी पर्याप्‍त हैं जिससे इस समय ब्‍याज दर में कमी नहीं होगी। जबकि कुछ मानते हैं कि अर्थव्‍यवस्‍था को तेजी से ऊपर उठाने के लिए ब्‍याज दर में कटौती की जानी चाहिए। डीएसपी मेरिल लिंच के मुख्‍य अर्थशास्‍त्री इंद्रनील सेनगुप्‍ता कहते हैं कि अमरीका और भारत की स्थिति में अंतर हैं और ब्‍याज दर में कमी के बावजूद भारत की मौद्रिक नीति में सख्‍ती कम नहीं होगी। पूंजी बाजार के विश्‍लेषकों का मानना है कि शेयर बाजार कहीं भी स्थिर हो लेकिन यह कुछ समय तक सी‍मित दायरे में चलेगा और इसमें जल्‍दी बड़ी तेजी के आसार कम हैं। निवेशकों को इस समय उन बेहतर शेयरों को लेना चाहिए जो पहले काफी ऊंचे भाव पर थे और उनकी पहुंच से बाहर हो चुके थे। असल में यह डिस्‍काउंट सेल है।

January 26, 2008

दलाल स्‍ट्रीट में नागा साधुओं का शाही स्‍नान

मेरा भारत महान के सबसे बड़े शेयर बाजार की बिल्डिंग के एक दरवाजे पर लगे भोलेनाथ के नंदी यानी लोकल भाषा के सांड को जब से हटाने की मांग हो रही है, हम भी अंतिम दर्शन करने वहां पहुंच गए कि ऐसा क्‍या खास है कि इस नंदी महाराज में कि शेयर बाजार के गेट पर खड़े होते ही सुपरसोनिक विमान पर बैठी तेजी को जमीन सूंघा दी। तेजी के सारे तारों ने जैसी ही जमीन सूंघी, सारे निवेशकों को भी नंदी महाराज के मालिक भोलेनाथ का सांप सूंघ गया।

नंदी महाराज के अंतिम दर्शन करने हम उनके पास पहुंचे। शीश नवाया कि हे सांड महाराज हमारे शेयरों पर अपने सींग मत मार देना नहीं तो हम कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं बचेंगे। जिस बैंक से पर्सनल लोन लिया है, जिन पहचान वालों से एक का दो करने के बहाने रोकड़ा लेकर कमीशन देने का वादा किया है, वे हमारी बनियान और चड्डी तक उतार लेंगे। यह प्रार्थना कर ही रहे थे कि देखा तेजी तो दलाल स्‍ट्रीट में पानी बगैर मछली की तरह छटपटा रही थी और नंदी महाराज दे सींग पर सींग मारे जा रहे थे। हमने कहा बम भोले...ये क्‍या कर दिया नंदी महाराज। आपकी पहचान तो इस तेजी से है और आपने तो इसे ही हलाल कर दिया।

नंदी महाराज चुपचाप इसमें जान फूंकिए अन्‍यथा अभी यहां ऐसे ब्रोकरों का जमघट लग जाएगा जिनमें से किसी के पास भी इस शेयर बाजार का कार्ड नहीं है। 22 से 28 साल के लौंडे चले आएंगे आपको इस गेट से खदड़वाने की जब से यह सांड यहां आया है पनौती लग गई है। यह सांड नहीं संकट है। आप जानते नहीं इस जंबूद्धीप के दलालों को। इन दलालों के साथ मीडिया वाले भी आएंगे और पीटने के बाद भी हसंते हुए बयान देंगे कि खूब नुकसान हो गया। शेयरों में जब कमाई हो रही थी, बाजार बढ़ रहा था तो बयान नहीं दे रहे थे कि यह बाजार रोज रोज क्‍यों इतना बढ़ रहा है। सरकार और सेबी कहां चली गई, क्‍यों बढ़ने दे रहे हो बाजार। लेकिन जरा सा झटका लगा तो चिदम्‍बरम, रेड्डी से लेकर दामोदरन तक से हिसाब मांग रहे हैं कि दाल में ज्‍यादा पानी किसने दे दिया दामोदर। तो फिर आप क्‍या हैं महज एक सांड।

इस गली में आपके पत्रकार नारद की नहीं चलेगी। वह कहां कहां दौड़ेगा आपकी निर्दोषिता बताने। जबकि हम दुनियादारी वालों के टीवी पत्रकार ओबी वैन ले लेकर दौड़ेगे और नारद कुछ सच बोल पाए कि दुनिया भर की घटनाओं को सही ढंग से न समझने और एक लेवल पर मुनाफावसूली न करने बंटाढार हुआ, से पहले ही मंदी का सारा ठीकरा आपके सींगों पर फोड़ देंगे। फिर नारद के समाचार देखता कौन है, पहले तो लोग ही नहीं जानते कि नारद चैनल कहां आता है, डिश टीवी पर या टाटा स्‍काई पर। पे चैनल है या फ्री। टीआरपी कितनी है। सो महाराज नंदी भगा दो यह मंदी।

लेकिन नंदी महाराज भी ठहरे हठीले। बोले इस कलियुगी संसार में मेरा इतना अपमान, घोर अपमान। मैंने कहा आप क्‍या करेंगे, वे बोले तुम्‍हारे यहां एक कलाकार है ना, नाना पाटेकर जिसकी एक फिल्‍म में डायलाग था एक मच्‍छर आदमी को हिजड़ा बना देता है अब देखों एक सांड क्‍या बनाता है। हमने पूछा क्‍या बना दोगे, बनाना बिगाड़ना तो दो से चार हजार रुपए महीना लेकर एसएमएस करने वाले शेयर बाजार के विश्‍लेषकों के हाथ में है। लेकिन यह क्‍या नंदी महाराज ने तुरंत भोलेनाथ का ध्‍यान लगाया और कैलाश पर विराजमान भोलेनाथ से सिग्‍नल लिया और अपने सींग शेयर बाजार में इतने जोर से दे मारे कि निवेशक त्राहिमाम त्रा‍हिमाम कर उठे। लेकिन अब नंदी महाराज तो बिगडैल सांड बन चुके थे सो रुकने वाले कहां थे। दलाल स्‍ट्रीट में जो भी सामने पड़ा, उसी को दे पटका। क्‍या ऑपरेटर, क्‍या पंटर, क्‍या फिरंगी और क्‍या देसी, क्‍या निवेशक और क्‍या विश्‍लेषक, सब को अधमरा कर दिया। सारे लोगों को ललित होटल से लेकर द्धारका होटल तक दौड़ा दौड़ाकर मारा।

मारधाड़ के इस शो में सब के कपड़े फटकर उतर गए। साफ साफ समझों की चड्डी यानी कच्‍छा तक उतर गया। बस तभी से दलाल स्‍ट्रीट में नागा साधुओं का जमघट लग गया है। अभी तो देश में कहीं भी कुंभ मेले का मौसम नहीं है लेकिन नागा साधुओं का यहां जमघट लग गया है। दलाल स्‍ट्रीट में ऐसा शाही स्‍नान इससे पहले शायद ही हुआ हो लेकिन देखना है कि अब अगला शाही स्‍नान कब होता है और कौनसा अखाड़ा पहले उतरता है। वैसे बढि़या होगा कि इस सांड की जगह एक गाय की मूर्ति लगा दी जाए जिस पर लिखा हो छोटे निवेशक और बाजार के सारे साधु उसे दुह रहे हों, इस उपाय से मंदी जरुर भाग जाएगी क्‍योंकि यह उपाय मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिले शेयर बाजार के खंडहरों में लिखा हुआ मिला है।

January 25, 2008

रिलांयस 10 रुपए और डॉ. रेड्डी सात रुपए में !

शेयर बाजार में आई ताजा तेज गिरावट ने अधिकतर निवेशकों को पूरी तरह हिलाकर रख दिया। कुछ निवेशक तो इस कदर साफ हो गए कि अब वे शायद ही आपको शेयर बाजार में फिर कभी दिखाई दे और कुछ अब अपना पैसा निकालकर बाहर हो जाएंगे क्‍योंकि वे मानते हैं कि यहां लगने वाले झटके जमकर हिला देते हैं। हालांकि, एक बात सामने जरुर आई है कि हमारी अर्थव्‍यवस्‍था बुनियादी तौर पर मजबूत है और ताजा गिरावट बीते दिनों की बात बन जाएगी एवं जल्‍दी ही शेयर बाजार नई ऊंचाई की तरफ बढ़ेगा।

हिंदू समूह के बिजनैसलाइन अखबार में आज एक ऐसी ही मजेदार स्‍टोरी है। जिसमें मद्रास स्‍टॉक एक्‍सचेंज के पूर्व ब्रोकर महेंद्र शाह ने अपने अनुभव बताए हैं। वाह मनी के पाठक भी इस स्‍टोरी का आनंद लें। शाह कहते हैं कि उनके पास रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के आईपीओ में मिले तीन सौ शेयर आज तक हैं, जो उन्‍हें प्रति शेयर दस रुपए की कीमत पर मिले थे। जबकि डॉ. रेड्डी के का हर शेयर तो उन्‍हें अपने इश्‍यू भाव से भी कम यानी सात रुपए पर मिला था। लेकिन आज इन दोनों कंपनियों के शेयर आसमान पर हैं। इतने वर्षों में राइट, बोनस और लाभांश मिला सो अलग। शेयर बाजार में तीन दशक का अनुभव रखने वाले शाह कहते हैं कि मैं तेजी में हूं और मौजूदा मंदी समाप्‍त हो जाएगी। यदि आपके पास पेसे हैं तो सीधी सी बात है शेयर खरीदें। लेकिन बुनियादी रुप से मजबूत मसलन एल एंड टी, भेल, इंफोसिस या टीसीएस जैसी कंपनियों के शेयर खरीदें। वे कहते हैं कि जब लोग बाजार में पैसा कमाते हैं तो वे पार्टियों और बैठकों में जाते हैं, मजे करते हैं लेकिन जब पैसे गवांते हैं तो होंठ बंद कर लेते हैं।

शाह को बाजार में भरोसा है। रिलायंस के संस्‍थापक धीरुभाई अंबानी से रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के आईपीओ के समय हुई मुलाकात को वे आज तक नहीं भूल पाए हैं। उनकी धीरुभाई से 1976 में चेन्‍नई में मुलाकात हुई थी। जब धीरुभाई अपने बेटे मुकेश के साथ चेन्‍नई में रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के आईपीओ का ऑडियो-विजुअल प्रस्‍तुतिकरण कर रहे थे। इस मीटिंग में शाह अकेले गुजराती ब्रोकर थे। वे कहते हैं कि धीरुभाई ने लगभग मेरे पैर छू लिए थे, जबकि मैं मुश्किल से 27 वर्ष का था। धीरुभाई ने मुझे मीटिंग में आने के लिए धन्‍यवाद दिया और मुझे विमल का एक पैंटपीस और मेरी पत्‍नी के लिए विमल साड़ी दी। उन्‍होंने कहा कि अपने क्‍लायंटों को रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के आईपीओ में पैसा लगाने के लिए कहना। मैं मेहनती हूं, सज्‍जन व्‍यक्ति हूं और जनता के पैसे का खूब ख्‍याल रखूंगा। उन्‍हें बताना कि हम खूब मेहनती हैं और उन्‍हें अच्‍छा लाभांश देंगे एवं हमारे साथ उनका पैसा बढ़ेगा। शाह के क्‍लायंटों ने इस आईपीओ में निवेश किया। खुद शाह को रिलायंस के तीन सौ शेयर मिले जो आज भी उनके पास हैं।

शाह दूसरी रोचक बात बताते हैं कि डॉ. रेड्डी लैबोरेटरीज के आईपीओ में ब्रोकर पैसा लगाने के लिए तैयार नहीं थे। ज्‍यादातर की राय थी कि इस कंपनी का अध्‍यक्ष तो एक वैज्ञानिक है और कारोबार के बारे में क्‍या जानता होगा। ब्रोकरों ने शेयर की कीमत नौ, आठ और सात रुपए बतानी शुरु की। खुद शाह को डॉ. रेड्डी के शेयर उसके इश्‍यू प्राइस से कम यानी सात रुपए में मिले जो आज भी उनके पास है। शेयर बाजार में ऐसी सफलता उन्‍हीं के हाथ लगती है जिनमें शाह जैसा धैर्य और दूरदर्शिता होती है।

January 24, 2008

बड़ी बिल्डिंग गिराती है शेयर बाजार !

शेयर बाजार में जब भी बड़ी गिरावट आती है तो ऑपरेटर, पंटर, निवेशक और ज्‍योतिष सभी इसके अलग अलग कारण देने लग जाते हैं। भले ही गिरावट के वास्‍तविक कारण दूसरे ही हों। दुनिया भर के शेयर बाजारों में आई नरमी से क्‍या मनुष्‍य का अहम या अभिमान जुड़ा हुआ है। यह कारण सत्‍य है या नहीं लेकिन जर्मनी के डयूश बैंक ने अपनी एक रिसर्च रिपोर्ट में कुछ इसी तरह की बात कही है। इस बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक जब भी दुनिया में सबसे ऊंची बिल्डिंग बनाई जाती है, शेयर बाजार औंधे मुंह आ गिरते हैं।

वर्ष 1929 में अमरीका में आई महामंदी से कुछ दिन पहले ही वहां गगनचुंबी इमारत एम्‍पयार इस्‍टेट बनाई गई थी। इसके बाद 1974 की मंदी से पहले शिकागो में सीएर्स टावर और न्‍यूयार्क का वर्ल्‍ड ट्रेड सेंटर बना। वर्ष 1997 में मलेशिया में पेट्रोनॉस टावर का निर्माण कार्य पूरा हुआ और इसी के साथ एशियाई शेयर बाजार ढह गए। ईश्‍वर जिसका संहार करना चाहता है उससे पहले उसे अभिमानी बना देता है। ग्रीक नाटय लेखक यूरिपिडी ने कई सदियों पहले यह बात कही थी। हो सकता है उन्‍होंने यह बात भविष्‍य के कारोबारियों को ध्‍यान में रखकर कही हो।

दुबई में पिछले दो साल में एक गगनचुंबी होटल बनी है और चीन में इस समय दुनिया की सबसे ऊंची बिल्डिंग बन रही है। तो क्‍या मंदी की कहानी फिर से दोहराई जाएगी ? भारत के सबसे बड़े शेयर बाजार बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज के बाहर शनिवार 12 जनवरी 2008 को सांड की एक कांस्‍य प्रतिमा लगाई गई और सोमवार 14 जनवरी से बाजार का पतन शुरु हो गया। क्‍या शेयर बाजार में पिछले सात साल से चल रही तेजी के अभिमान के प्रतीक के रुप में तो नहीं लगी है यह सांड की प्रतिमा। शेयर बाजार से जुड़े हजारों लोगों ने इस प्रतिमा को हटाने के लिए बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज को कहा है और ऐसा न हो कि इन लोगों की बात को मानते हुए जैसे ही इसे हटाया जाए बाजार जमकर दौड़ पड़े। ऐसा हुआ तो तेजी मंदी की एक कथा में यह कहानी भी जुड़ जाएगी।

January 23, 2008

खेल खत्‍म पैसा हजम यानी एचएफसीएल

hfcl दुनिया में जब तक लालची जिंदा है, समझदार भूखे नहीं मरेंगे। शेयर बाजार में दो रुपए के बीस रुपए बनाने के लालच में लोगों ने घटिया कंपनियों के शेयर खरीदे और पछता रहे हैं। वाह मनी हमेशा से कहता आया है कि बेहतर नतीजों, उम्‍दा प्रबंधन और शानदार लाभांश देने वाली कंपनियों में ही निवेश करना चाहिए। मंदी हो या तेजी बेहतर कंपनियां ही फायदेमंद रहती हैं। कहावत है महंगा रोए एक बार, सस्‍ता रोए बार बार। शेयर बाजार में ऐसी अनेक कंपनियां हैं जो किसी भी हिसाब यानी नतीजों, प्रबंधन से उम्‍दा नहीं है लेकिन उनके शेयर बढ़े जा रहे हैं, लोग निवेश पर निवेश किए जा रहे हैं कि वे एक दिन करोड़पति बन जाएंगे। इन कंपनियों के बारे में बाजार में ऐसी ऐसी सूचनाएं फैलाई जाती है कि आम निवेशक तो यह समझ ही नहीं पाता कि यह खबर है या मक्‍कारी।

शेयर बाजार में एक समय अपना डंका बजवा चुकी हिमाचल फ्युच्‍युरिस्टिक कम्‍युनिकेशंस लिमिटेड यानी एचएफसीएल अब भी निवेशकों के बीच नई नई खबरों के साथ छाई हुई है। कभी इसमें खबर आती है कि इस कंपनी को अनिल या मुकेश अंबानी में से कोई खरीद लेगा, इस कंपनी के पास चेन्‍नई में 1200 करोड़ की जमीन है जिसे यह बेचेगी और मालदार बन जाएगी जिसका लाभ निवेशकों को भी होगा। कभी यह बात आती है कि एचएफसीएल तो अपने पोर्टफोलियो में जरुर रखना क्‍योंकि फ्यूचर एंड ऑप्‍शन की जो अगली लिस्‍ट आएगी उसमें यह शामिल है और जल्‍दी ही सौ रुपए का भाव हो जाएगा। लेकिन इसके एफएंडओ लिस्‍ट में आने के बारे में तो कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन पहली दो खबरें गलत हैं।

सात साल पहले इस कंपनी में जो खेल हुआ वही खेल इस बार भी खेला जा रहा है ताकि अधिक से अधिक निवेशक फंस जाएं। कितने निवेशक यह जानते हैं कि इस कंपनी के प्रमोटर नाहटा और मालू अपनी शेयरधारिता खुले बाजार में बेच चुके हैं और अब इस कंपनी में आम जनता की हिस्‍सेदारी 97.82 फीसदी पहुंच गई है। यानी प्रमोटरों की शेयर होल्डिंग जीरो। अब आप खुद सोचिएं इस कंपनी को चलाने में प्रमोटरों की कितनी रुचि है। जब इस कंपनी में प्रमोटरों की शेयर होल्डिंग ही नहीं है तो वे इसमें कर क्‍या रहे हैं। एचएफसीएल में अनेक कहानियां आ चुकी हैं एवं आएंगी जो इसके शेयर को चलाने के लिए प्‍लांटेड की जा रही हैं। निवेशक यदि अपनी खैरियत चाहते हैं तो एचएफसीएल से जितना जल्‍दी हो बाहर निकल जाएं। या अभी भी आप जमीन की कहानी या अंबानी बंधुओं के नाम पर इसमें अपना निवेश बनाएं रखना चाहिए। एचएफसीएल का शेयर आज 34.70 रुपए पर बंद हुआ जो पिछले 52 सप्‍ताह में ऊपर में 62.60 रुपए और नीचे में 16.90 रुपए था। एचएफसीएल की तकनीकी रिपोर्ट के लिए यहां क्लिक करें।

बंदरों का सौदागर वापस आएगा !

एक जंगल के किनारे एक गांव बसा हुआ था वहां के लोग खेती करते और अपना जीविकोपार्जन करते थे। एक दिन वहां शहर से एक सौदागर आया उसने लोगों से कहा कि उसे बंदर चाहिए लेकिन किसी ने उसकी सुनी नहीं सब अपने काम में लगे रहे फिर उसने कहा कि वह एक बंदर के बदले सौ रुपए देगा। गांव के लोगों ने पास के जंगल से खूब सारे बंदर पकडे और सौदागर को सौंप दिए सौदागर ने लोगों को सौ-सौ रुपए दिए।उसने कहा उसे और बंदर चाहिए लोगों का रुझान कम हो गया था क्योंकि बंदर आसानी से नहीं मिल रहे थे अब उसने कहा कि वह एक बंदर के बदले पांच सौ रुपए देगा।

लोगों ने अपना काम छोडकर बंदर ढूंढे और सौदागर को दिए जल्दी की बंदरों की दूसरी खेप भी आनी बंद हो गई। अब सौदागर ने कहा कि मैं एक बंदर के बदले एक हजार रुपए दूंगा लोगों ने अपना खेती बाडी का काम छोडकर घने जंगल में जाकर बंदर पकडेऔर उन्हें सौदागर को सौंप दिया जल्दी ही बंदरों की और आवक बंद हुई।सौदागर ने कहा कि शहर से मांग आई है कि और बंदर चाहिए मैं अभी शहर जा रहा हूंवापस आकर और बंदर खरीदूंगा और एक बंदर के बदले दो हजार रुपए दूंगा। गांव के लोग परेशान थे कि जंगल में बंदर खत्म हो चुके हैं।

गांव में बैठे सौदागर के सहायक ने कहा कि मेरे पास सौदागर के काफी बंदर है वह अभी शहर में सौदा करने के लिए गया हुआ है वहां काफी ऊंचे दाम में बंदर बिक रहे हैं। आप लोगों को मैं डेढ हजार रुपए में बंदर दे देता हूं आप लोग सौदागर को दो हजार में बेच देना। लोग राजी हो गए सहायक ने सारे बंदर गांव वालों को डेढ-डेढ हजार रुपए में बेच दिए उस दिन के बाद न तो सौदागर और न ही उसका सहायक गांव में दिखाई दिए। कुछ लोगों ने अपने बंदर वापस जंगल में छोड दिए और कुछ के पास अब भी बंदर पडे हैं वे लोग सौदागर के लौटने का इंतजार कर रहे हें।

यह कहानी वाह मनी को राजस्‍थान के शहर बीकानेर से सिद्धार्थ जोशी ने भेजी है। शेयर बाजार के निवेशकों को इस कहानी से सबक लेना चाहिए। बंदरों का सौदागर के शहर चले जाने और सहायक द्धारा सारे शेयर बेच देने से बाजार में गिरावट आई। सौदागर एक बार फिर आएगा ताकि छोटे निवेशकों का बचा खुचा पैसा फिर से निकलवाया जा सके। बाजार के इस नियम को मानें कि अपना माल बेचकर एक बार भले ही पछता लें कि थोड़ा जल्‍दी बेच दिया बनिस्‍बत उसे हमेशा के लिए रखकर पछताने से।

January 22, 2008

अंबानी खरीद सकते हैं पाकिस्‍तानी शेयर बाजार !

भारत और पाकिस्तान के लोग एक ही पूर्वजों के वंशज हैं। दोनों देशों के लोगों का डीएनए भी एक ही है। अब देखिए भारत में क्या हो रहा है। भारत के मुकेश और अनिल अंबानी चाहें तो कराची के शेयर बाज़ार (कराची स्टॉक एक्स्चेंज –केएसई) में सूचीबद्ध सभी कंपनियों को खरीद सकते हैं और इससे बावजूद उनके पास 30 अरब डॉलर बचे रहेंगे। अगर भारत के चार रईस चाहें तो एक साल के लिए पाकिस्तान के 16 करोड़ 90 लाख पाकिस्तानियों द्वारा एक साल में उपयोग की जाने वाली सारी उपभोक्ता सामग्री और खाद्य सामग्री खरीद सकते हैं और इसके बावजूद उनके पास 60 अरब डॉलर बचे रहेंगे। भारत के चार सबसे बड़े अरबपतियों के पास चीन के 40 सबसे बड़े अकबपतियों के मुकाबले ज्यादा पैसा है।

नवंबर, 2007 में बाम्‍बे स्टॉक एक्स्चेंज का सेंसेक्‍स 20 हजार अंक तक पहुंच गया। मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज़ 100 अरब डॉलर की कंपनी हो गई (जबकि पूरा कराची स्टॉक एक्स्चेंज की सकल पूंजी 65 अरब डॉलर है), मुकेश अंबानी का रिलांयस के 48 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा है।

नवंबर में मुकेश अंबानी ने अपनी पत्नी नीता अंबानी को उनके 43वें जन्म दिन पर देखिए क्या उपहार दिया...! 60 लाख डॉलर का एक शानदार जेट विमान, जिसमें रोमांचक और मनमोहक लाईटिंग वाला शानदार बेडरुम, तमाम आधुनिक सुविधाओं से लैस बाथरुम, स्कॉय बार, मनोरंजन का कैबिन, सैटेलाईट टेलीविज़न, वायरलैस कम्युनिकेशन, खेलों के लिए एक अलग कैबिन और ऐशो-आराम की तमाम सुविधाएं मौजूद है। मुकेश अंबानी भारत के सबसे बड़े रईसों में पहले नंबर पर नहीं बल्कि दूसरे नंबर पर हैं।

अब देखिए मुकेश अंबानी क्या करने जा रहे हैं। वे अपना एक नया घर बनाने जा रहे हैं। इस घर की कीमत है 1 अरब डॉलर और यह इस पृथ्वी पर बना अब तक का सबसे महंगा घर होगा। 173 मीटर ऊंचे और 60 मंजिल वाले इस आलीशान घर में मुकेश अंबानी के परिवार के 6 सदस्य शान से रहेंगे। इस शानदार इमारत की पहली 6 मंजिलें पार्किंग के लिए सुरक्षित रहेंगी। सातवीं मंजिल कारों के रखरखाव और उनकी साफ सफाई के लिए होगी। आठवीं मंजिल पर एक मिनी थिएटर होगा। इसके बाद एक हैल्‍थ क्लब, जिम और स्वीमिंग पुल होगा। इस भवन की दो मंजिलें अंबानी परिवार के मेहमानों के लिए सुरक्षित रहेंगी। मेहमानों के लिए सुरक्षित इस मंजिल के ऊपर की चार मंजिलें अंबानी परिवार के लिए होंगी, जहाँ से वे चारों ओर दूर-दूर तक हिलोरे ले रहे समुद्र का नजारा देख सकेंगे। इस शानदार ईमारत की छत पर तीन हैलीपैड भी होंगे। इस मकान के रखरखाव, अंबानी परिवार और उनके मेहमानों की सेवा के लिए 600 लोगों का स्टॉफ होगा।

2004 में भारत दुनिया के देशों में तीसरा सबसे बड़ा देश हो गया जहां विदेशी निवेशक अपनी पूंजी लगाने को तैयार हैं। जबकि पाकिस्तान 25 देशों की सूची में भी नहीं आ पाया। वर्ष 2004 में जब इस्लामी देशों अल-जम्हूरियात, अल-इराकिया और दौलत-ए-इस्लामी-ये-अफगानिस्तान में चुनाव हुए तो 192 देशों की प्रतिनिधि संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ ने यहाँ निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए भारत के चुनाव आयोग से निवेदन किया कि वे वहाँ अपने अधिकारी भेजकर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाएं। सयुंक्त राष्ट्र संघ ने यह जिम्मेदारी पाकिस्तान को नहीं दी जबकि पाकिस्तान एक इस्लामी राष्ट्र होने के साथ ही भौगोलिक दृष्टि से काबुल के ज्यादा पास है, बजाय दिल्ली के।

अपने पाकिस्तानी पाठकों को संबोधित करते हुए फारुख लिखते हैं, शायद आप नहीं जानते कि अमरीका में मौजूद सभी वैज्ञानिकों में 12 प्रतिशत भारतीय मूल के हैं। अमरीका में कार्यरत सभी डॉक्टरों में से 38 प्रतिशत भारतीय हैं। अमरीका की सर्वोच्च अंतरिक्ष संस्था नासा में कार्यरत सभी वैज्ञानिकों में से 36 प्रतिशत वैज्ञानिक भारतीय हैं। दुनिया की सबसे बड़ी आईटी कंपनी बिल गेट्स की माईक्रोसॉफ्ट में 34 प्रतिशत कर्मचारी भारतीय हैं। इसी तरह आईबीएम जैसी कंपनी में भी 28 प्रतिशत कर्मचारी भारतीय हैं।

यह भी जान लीजिए कि सबीर भाटिया जिसने हॉटमेल जैसी सुविधा विकसित की वह भारतीय है और सन माइक्रोसिस्टम का संस्थापक विनोद खोसला एक भारतीय है। इंटैल पैंटियम प्रोसेसर जिसके दम पर दुनिया के 90 प्रतिश कंप्यूटर चल रहे हैं विनोद धम नामक भारतीय ने ही शुरु की थी। भारतीयों ने दुनिया के हर कोने में हर कारोबार में और हर जगह अपनी काबिलियत साबित की है। जानीमानी कंप्यूटर कंपनी हेवलेट-पैकैर्ड की इ-स्पीक परियोजना के शोध में एक भारतीय राजीव गुप्ता की ही भागीदारी थी। आज सिलिकॉन वैली में दस में से चार कंपनियाँ भारतीयों की है। बॉलीवुड में हर साल 800 फिल्में बनती हैं। बीते दस सालों में 6 भारतीय युवतियाँ मिस वर्ल्ड मिस यूनिवर्स का खिताब जीत चुकी हैं।

अब जरा भारत में मुस्लिमों की हालत पर भी गौर करें। अज़ीम प्रेमजी इस दुनिया के सबसे धनी मुस्लिम कारोबारी हैं उनका जन्म मुंबई में हुआ, और वे अब बंगलूर में रह रहे हैं। भारत में तीन दर्जन से अधिक अरबपति हैं जबकि पाकिस्तान में एक भी नहीं (यहाँ तक कि एक अरब डॉलर की पूंजी वाला भी नहीं)। अब देखिए भारत किस तेजी से तरक्की कर रहा है। वर्ष 2002 में उद्योगपति धीरुभाई अंबानी का इंतकाल हुआ तो वे अपने पीछे 2।8 अरब डॉलर की पूंजी छोड़ गए थे। वर्ष 2007 में उनके दोनों बेटों मुकेश और अनिल अंबानी के पास कुल 94 अरब डॉलर की संपत्ति थी। 29 अक्टूबर, 2007 में भारतीय शेअर बाजार में आए ज़बर्दस्त उछाल के बाद मुकेश अंबानी के पास 63.2 अरब डॉलर की संपत्ति हो गई और वे दुनिया के सबसे रईस आदमी में शुमार हो गए। जबकि तब दुनिया के सबसे अमीर कहे जाने वाले बिल गेट्स के पास 56 अरब डॉलर की संपत्ति थी।

फारुख कहते हैं भारतीय और पाकिस्तानियों का वाय क्रोमोसोम हैपलोग्रुप एक ही है। हमारे पूर्वज भी एक हैं। हमारी संस्कृति, परंपराएं, खान-पान, सबकुछ एक है। हम भी एक जैसी फिल्में देखते हैं और एक जैसे गाने गाते है। लेकिन आखिर ऐसी कौनसी बात है जो भारतीयों के पास है और पाकिस्तानियों के पास नहीं है-वह है भारत के लोग अपने नेता खुद चुनते हैं!

(हम भारतीय अपने नेताओं के बारे में चाहे जो सोचें और अपने लोकतंत्र को प्रदूषित और भ्रष्ट करने के लिए इनको कोसते रहें, शायद पाकिस्तान के लोग हमारी इन बातों से कतई इत्तफाक नहीं रखते। फौजी शासन के आंतक के साये में जी रहे पाकिस्तान के लोगों को इस बात पर शर्म महसूस होती है कि भारत ने पाकिस्तान को हर मामले में पीछे छोड़ दिया है और दुनिया में पाकिस्तान का कोई सम्मानजनक वजूद नहीं है। पाकिस्तान के एक जानेमाने पत्रकार डॉ. फारुख सलीम द्वारा एक पाकिस्तानी अख़बार में लिखा एक लेख जिसमें उन्होंने इस बात को बेहद शोधपूर्ण तरीके से सामने रखा है कि आज़ादी के बाद भारत कहाँ से कहाँ पहुँच गया और पाकिस्तान अपनी पहचान तक नहीं बना पाया है। साभार : हिंदी मीडिया चैनल डॉट कॉम)

अशुभ है यह अमरीकी सांड

देश के सबसे बड़े शेयर बाजार बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज में पिछले दिनों से जो गिरावट आ रही है उसके पीछे एक वास्‍तुशास्‍त्र का कारण भी हो सकता है या महज एक संयोग। लेकिन 12 जनवरी 2008 को बीएसई के बाहर सांड की एक कांस्‍य प्रतिमा लगाई गई है जिसे तेजी का प्रतीक माना जाता है लेकिन सब उल्‍टा हुआ। क्‍यों मालूम है यह सांड न्‍यूयार्क के बाउलिंग ग्रीन पार्क में लगे तीन टन वजन के सांड की नकल पर है। यानी अमरीकी नकल का सांड भारतीय शेयर बाजार के लिए अशुभ साबित हुआ है। बीएसई के दरवाजे पर लगे इस सांड को महाराष्‍ट्र के शहर सोलापुर के कारीगर भगवान रामपुरे न बनाया है और एक टन वजन का है। यह सांड पांच फीट ऊंचा और आठ फीट लंबा है। बीएसई के बाहर खड़े ढेरों निवेशकों का कहना है कि जब से यह सांड यहां आया है, शेयर बाजार का बंटाढार हो गया है। अमरीकी खुद तो मंदी में डूब रहे हैं, हम भारतीयों का भी नुकसान कर रहे हैं। इस सांड को जितना जल्‍दी हो यहां से हटा देना चाहिए। बीएसई के एक दरवाजे के बीचोंबीच खड़ा यह सांड सही नहीं है। लीजिए यह नई खबर जिसमें मंदी के लिए सांड को दोषी माना जा रहा है।

January 21, 2008

शेयर बाजार : पर्दे के पीछे का खेल

bse शेयर बाजार में आज जो तगड़ी गिरावट आई उसके संबंध में सभी को पता है। लेकिन इस गिरावट के मंच पर जो पर्दा है उसके पीछे के गेम के बारे में हर किसी को जानकारी नहीं है। वाह मनी को संपर्क सूत्रों से पर्दे के पीछे के गेम के बारे में जो जानकारी मिली है वह आप भी जानिए।

  • विदेशी संस्‍थागत निवेशक जनवरी में नया निवेश करेंगे, यह कहानी इन संस्‍थागत निवेशकों के साथ, उन घरेलू ऑपरेटरों ने फैलाई जो केवल इन निवेशकों के लिए लेनदेन करते हैं। ये ऑपरेटर मास साइक्‍लोजी को पढ़ते हैं और बाजार में गलत ढंग से ऐसी पिक्‍चर खड़ी करते हैं कि आम निवेशक इनके झांसे में आ जाता है। सबप्राइम की वजह से विदेशी संस्‍थागत निवेशकों को निवेश के लिए उतना नया पैसा नहीं मिला जितना अखबारों, टीवी और फाइनेंशियल एनालिस्‍टों ने फैलाया।
  • टेक्निकल एनालिस्‍ट आज कह रहे थे कि वे तो पहले ही बता रहे थे कि शेयर बाजार में गिरावट आएगी, जबकि यह झूठ है। ज्‍यादातर विश्‍लेषकों को कहना था कि शेयर बाजार सूचकांक बढ़कर इसी महीने 24 हजार अंक पहुंच जाएगा। कई विश्‍लेषक भी विदेशी संस्‍थागत निवेशकों के लिए काम करते हैं। आम निवेशक से महीने के दो से पांच हजार रुपए लेकर शेयर बाजार की भविष्‍यवाणी और‍ टिप्‍स देने वाले कितने विश्‍लेषक अरबपति हैं, जरा बताएं। कई विश्‍लेषक कंपनियों से पैसा लेकर उनकी रोजी पिक्‍चर खड़ी करते हैं और आम निवेशक भरोसा कर निवेश करते हैं और साफ हो जाते हैं।
  • शेयर बाजार में गिरावट का दौर चालू होने के बावजूद अनेक शेयर ब्रोकिंग फर्म मौजूदा लेवल पर शेयर खरीदने की सलाह और उनके लक्ष्‍य बता रहे थे। जबकि खुद शेयर बेच रहे थे। क्‍या यह निवेशकों के साथ धोखा नहीं है।
  • शेयर बाजार की चल रही तगड़ी गिरावट के समय सेबी, शेयर बाजार के अधिकारियों और वित्‍त मंत्रालय या केंद्र सरकार की ओर से आम निवेशक के हित में कोई बयान नहीं आया। भारत अमरीका परमाणु करार पर चिल्‍लाने वाले वामपंथी कहां चले गए थे।
  • शेयर बाजार के ऑपरेटर कहते हैं कि इस बाजार में देश के कई राजनेताओं का पैसा लगा हुआ है और वे खूब पैसा लगा रहे हैं। वे खुद चाहते हैं कि विदेशी संस्‍थागत निवेशक यहां टिके रहें लेकिन जब उन्‍होंने नया निवेश नहीं किया तो बाजार को गिराकर नीचे भाव लाने की कोशिश की जा रही है ताकि एक बार फिर ये निवेशक सस्‍ते में शेयर ले सकें और खेल चालू रहे भले ही देश का आम निवेश्‍ाक लूटता पीटता रहे। भारतीय राजनीति में जब तक भ्रष्‍टाचार में हैं आम निवेशक की भगवान जानें, नेता और बड़े निवेशक मस्‍त रहेंगे।
  • देश के तीन चार उद्योगपतियों में यह लड़ाई मची हुई है कि देश के अमीरों की सूची में पहले नंबर पर कौन और दूसरा कौन। दुनिया में मैं पहले नंबर पर और तुम दूसरे पर। इस लड़ाई की वजह से औद्योगिक घराने शेयर बाजार की गिरावट में भूमिका निभा रहे हैं ताकि एक दूसरे का बाजार पूंजीकरण कम कर अपने प्रतिस्‍पर्धी को नंबर वन बनने से रोका जा सके। इस लड़ाई पर भ्रष्‍ट राजनेता लगाम नहीं लगा सकते यह आप जान लें।
  • शेयर बाजार में निवेश करें लेकिन फ्यूचर एंड ऑप्‍शन खेलने से बचें। भले ही चाहे स्‍टॉक एक्‍सचेंजों ने छोटा कांट्रैक्‍ट और बडा सेंस जारी किया हो। एफएंडओ आम व छोटे निवेशकों की जेबें खाली करवाने का आसान तरीका है। ऐसे कांट्रैक्‍ट के आने के बाद निवेशक मरे हैं।

छोटा कांट्रैक्‍ट, बड़ा नॉनसेंस


भारतीय शेयर बाजार में आज जो तूफानी गिरावट आई उसमें क्‍या बड़ा और क्‍या छोटा, कोई भी निवेशक समझ पाता, संभल पाता, पूरी तरह साफ हो गया। हालांकि, शेयर बाजार में अंत में नरमी कुछ कम पड़ी, कई कंपनियों के शेयरों में लगा उल्‍टा सर्किट खुला लेकिन अभी मुसीबत कम नहीं हुई है। विदेशी संस्‍थागत निवेशक अपने पूरे घाटे को भारतीय शेयर बाजार से पूरा करने में लगे हैं क्‍योंकि यहां उन्‍होंने कौडि़यों के मोल जो शेयर खरीदे थे वे उन्‍हें खासा मुनाफा दे रहे हैं। भारतीय शेयर बाजार में आज एक दिन में निवेशकों को 6.64 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

वाह मनी ने हमेशा से दो बातें निवेशकों के सामने रखीं। पहली-शेयर बाजार में मुनाफा अपनी जेब में लेते चले। यानी ऊंचे भाव पर बिकवाली और निचले भाव पर खरीद। जो मुनाफा आज आप की जेब में जा रहा है वह कल किसी और का हो सकता है। दूसरी-भूलकर भी फ्यूचर एंड ऑप्‍शन यानी एफएंडओ मत खेलो। देश्‍ा के शेयर बाजारों में आम निवेशक जो बड़े कांट्रैक्‍ट की सीमा से परे जा चुके थे, को लालच में लपेटने के लिए छोटे कांट्रैक्‍ट जारी किए। आम निवेशक इनमें फंसे और जल्‍द से जल्‍द करोड़पति बनने के लालच में फंसकर छोटे कांट्रैक्‍ट खेलने लगे। लेकिन बड़े सेंस के साथ नहीं बल्कि नॉनसेंस बनकर। आज जो भी शेयर बाजार में हुआ, उसके पीछे विदेशी संस्‍थागत निवेशकों की बिकवाली और आम निवेशक का परिपक्‍व न होना है। वाह मनी लंबे समय से कह रहा है क‍ि मुनाफा लेते चले और तभी कारोबार करें। जिन्‍होंने भी इस सलाह पर अमल किया वह निश्चित रुप से गेनर होगा।
भारतीय शेयर बाजार में आज आई गिरावट को आखिरी नहीं मान लेना चाहिए। इसमें अभी और गुंजाइश है। सुधार के भरोसे जल्‍दबाजी में नए शेयर नहीं खरीदे बल्कि हर ऐसी बड़ी गिरावट को बेहतर स्‍टॉक खरीदने का मौका मानें। हम निवेशकों से फिर कहना चाहेंगे कि वे शेयर छोटी छोटी मात्रा में खरीदें और आपको बेहतर प्राइस के लिए कम से कम तीन महीना इंतजार करना पड़ सकता है लेकिन धैर्यवान ही विजेता होंगे। जो निवेशक एफएंडओ खेल रहे हैं और बाहर से ब्‍याज पर पैसा लेकर शेयर बाजार में लगा रहे हैं वे ही साफ हुए हैं और उनके बुरे दिन अभी खत्‍म नहीं हुए हैं। डिलीवरी आधारित कारोबार करने वाले फलेंगे। वाह मनी अपनी बात पर फिर कायम हैं कि दिवाली 2008 से पहले बीएसई सेंसेक्‍स 25 हजार अंक नहीं पहुंचेगा।

वाह मनी केवल एक ब्‍लॉग है लेकिन हमने अपनी बात हमेशा ईमानदारी के साथ रखी। जबकि, अनेक बड़े बड़े विश्‍लेषक और धुरंधर खिलाड़ी तो जनवरी 2008 में ही सेंसेक्‍स के 23 हजार पार कर जाने की बात कह रहे थे। हमारे संसाधन बड़े खिलाडि़यों की तुलना में कम हैं लेकिन जब तक आम मानस को पढ़ने की कला नहीं आती आप कोई भी सही भविष्‍यवाणी नहीं कर सकते। वाह मनी ने हमेशा आम मानस को पढ़ने की कोशिश की है और उसमें सफलता मिली है। हमने अपने पाठकों को दिसंबर में ही बता दिया था कि जो विश्‍लेषक यह कह रहे हैं कि जनवरी 2008 में विदेशी संस्‍थागत निवेशकों को जमकर पैसा शेयर बाजार में आएगा और सेंसेक्‍स 22 से 24 हजार अंक पहुंच जाएगा, झूठे साबित होंगे। नतीजा आपके सामने हैं। हाथ कंगन को आरसी क्‍या........। कारोबार का एक नियम हैं कि आप कारोबार अपनी समझबूझ करें न कि दूसरे के सहारे, जबकि इस समय ज्‍यादातर निवेशक यही गलती कर रहे थे कि बगैर होमवर्क दूसरे के विश्‍लेषण पर पैसा कमाना चाह रहे थे।

जब आपसे जूता पालिश करने वाला शेयर बाजार के बारे में यह चर्चा करने लगे कि फलां कंपनी के शेयर खरीद लो या अमुक के बेच दो....तो समझ लें कि शेयर बाजार में तेजी का एक दौर पूरा हुआ। हमने पहले भी कहा था कि घटिया कंपनियों के शेयर मत लो, साफ हो जाओगे लेकिन लोग दो चार रुपए वाली कंपनियों के शेयर पकड़ने में लगे रहे कि यह दस हो जाएगा तो बेचकर खूब पैसा कमा लेंगे। लेकिन अब क्‍या हुआ। रेसकॉर्स का एक नियम है कि वहां पैसा केवल घुड़दौड़ पर ही लगाया जाता है न कि गधों या खच्‍चरों के दौड़ने पर। लेकिन ज्‍यादातर निवेशकों ने बगैर फंडामेंटल और प्रबंधन को देखें गधों व खच्‍चरों पर पैसा लगा दिया जिसके लिए रेसकॉर्स में मनाही होती है। शेयर बाजार में तेजी का अगला दौर फिर शुरु होगा। विदेशी संस्‍थागत निवेशकों के सामने भारत और चीन के अलावा ऐसे दूसरे बाजार नहीं हैं, जहां वे बेहतर रिटर्न पा सकें। लेकिन अब धैर्यवान निवेशक ही विजेता होंगे। बनाइएं बेहतर कंपनियों की लिस्‍ट जिनके शेयर जमीन पर आ गए हैं और इनमें तैयारी करिए छोटी छोटी खरीद की।

आज का हाल
आज 21 जनवरी 2008 का दिन शेयर बाजारों के लिए काला सोमवार रहा। बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज का सेंसेक्स खतरनाक रुप से गिरता हुआ 1408 अंक टूटा। एक समय सेंसेक्स 2050 अंक की गिरावट पर पहुंच चुका था और इस पर लोवर सर्किट लगने का खतरा मंडरा रहा था। बीएसई सेंसेक्‍स अंत में 17605 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी में यही हुआ और 496 अंक गिरने के बाद 5208 अंक पर बंद हुआ। शाम 5:41 बजे फ्रांस का शेयर इंडेक्‍स सीएसी 6.84 फीसदी यानी 348.22 अंक नीचे चल रहा है जबकि, जर्मनी का डीएएक्‍स 7.29 फीसदी यानी 533.14 अंक और ब्रिटेन का एफटीएसई 5.34 फीसदी यानी 315.20 अंक नीचे चल रहा है। यानी विश्‍वव्‍यापी धुलाई।

बेहतर स्‍टॉक खरीदने का मौका

भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता सप्‍ताह तगडी मंदी का रहा जिसमें बीएसई सेंसेक्‍स 1795 अंक लुढ़का। लगातार तेजी पर सवार भारतीय शेयर बाजार अंतरराष्‍ट्रीय शेयर बाजारों में घट रही घटनाओं को नजरअंदाज कर रहा था लेकिन जब अमरीकी सबप्राइम के वास्‍तविक नतीजे दिखने लगे तो भारतीय शेयर बाजार भी ढ़ेर हो गया। सिटीग्रुप, यूबीएस और मेरिल लिंच की बिगड़ी आर्थिक स्थिति ने अधिकतर विदेशी संस्‍थागत निवेशकों को अमरीका में हुए घाटे को पूरा करने के लिए यहां बिकवाल बनने पर मजबूर कर दिया।

आज 21 जनवरी से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में भी शेयर बाजार में बढ़त की बड़ी उम्‍मीद कम ही रखनी चाहिए क्‍योंकि विदेशी संस्‍थागत निवेशक भारतीय शेयर बाजार में सस्‍ते में लिए गए शेयर अब बेचकर अपने घाटे को पूरा करना जारी रखेंगे। पिछले सप्‍ताह विदेशी निवेशक हर रोज दो हजार करोड़ रुपए से ज्‍यादा के शेयर नगद बाजार में बेच रहे थे। हालांकि यह तय है कि शेयर बाजार में जो रिटर्न भारत और चीन में मिल रहा है उसे देखते हुए विदेशी संस्‍थागत निवेशक यहां से नहीं जाएंगे। अपने घाटे की काफी पूर्ति करने के बाद वे एशिया के इन्‍हीं दो शेयर बाजारों में पैसा लगाएंगे। रिलायंस पावर के आईपीओ को बाजार में तगड़ी गिरावट के बावजूद जो सफलता हाथ लगी है उससे भी दुनिया भर के निवेशक यहां बने रहना पसंद करेंगे। इस आईपीओ की सफलता यह बताती है कि भारतीय शेयर बाजार लंबी अवधि में बेहतर रहेंगे।

शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति में वेल्‍यू इंवेस्टिंग का सिद्धांत उपयोगी रहता है। शेयर बाजार में आई तगड़ी तेजी में निवेशकों ने बेहतर लाभांश देने वाली कंपनियों के शेयरों के नजरअंदाज कर दिया था लेकिन वेल्‍यू इंवेस्टिंग के परंपरागत सिद्धांत को छोड़ना भारी मंदी के समय भारी पड़ता है। शेयर बाजार में मंदी के समय बेहतर लाभांश देने वाली कंपनियों में निवेश करने से नुकसान कम होता है। ऐसे में शेयरों में होने वाले नुकसान की पूर्ति उच्‍च लाभांश से हो जाती है। साथ ही मंदी के माहौल में इन शेयरों में आकर्षण रहता है। आमतौर पर सात फीसदी से अधिक यील्‍ड अच्‍छी कही जाती है। जबकि, इस समय इतने ऊंचे यील्‍ड वाले शेयर काफी कम है। यील्‍ड जानने का सरला फार्मूला : मसलन कंपनी हर साल दस फीसदी लाभांश देती है और उसके शेयर का भाव सौ रुपए है तो इसकी डिविडेंड यील्‍ड दस फीसदी होगी।

आज से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 19583 अंक को पार करता है तो यह 19877 अंक तक जा सकता है। इसे नीचे में 18534 अंक पर स्‍पोर्ट मिलने की संभावना है। निफ्टी को 5534 अंक पर स्‍पोर्ट मिलने के आसार हैं। निफ्टी 5876 अंक पार करने पर 5967 अंक तक जा सकता है।

कोटक एएससी के अलरॉय लोबो का कहना है कि शेयर बाजार में करेक्‍शन अभी पूरा नहीं हुआ है। बीएसई सेंसेक्‍स को स्‍पोर्ट 18 हजार के आसपास मिलेगा। जबकि, एम्बिट कैपिटल के निलेश शाह का कहना है कि यह शार्ट टर्म गिरावट है। भारतीय बाजार 21 हजार पर कुछ एक्‍सपेंसिव लग रहा था 18 हजार पर यह निवेश के लिए आकर्षक है। डयूश एएमसी के सीईओ विजय मंत्री की राय में शेयर बाजार तेजी से ऊपर चढ़ेगा। मौजूदा स्‍तर पर शेयरों के भाव आकर्षक हैं और हर गिरावट को खरीद का मौका समझना चाहिए।

इस सप्‍ताह अनेक कंपनियां अपने अक्‍टूबर से दिसंबर 2007 की तिमाही के नतीजे घोषित करेंगी। इनमें स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया, इंजीनियर्स इंडिया, बिहार कॉस्टिक, जिंदल स्‍टैनलैस स्‍टील, टाटा टेली सर्विसेज, कोटक बैंक, नैवेली लिग्‍नाइट, होंडा सिएल पावर, भारत अर्थ मूवर्स, टीवीएस मोटर, अशोक लेलैंड, रिलायंस इंडस्‍ट्रीयल इंफ्रा, एडलवेइस कैपिटल, सेंचुरी टेक्‍सटाइल, श्री रेणुका शुगर्स, स्‍वराज इंजिन, हिंदुस्‍तान जिंक, सेसा गोवा, तमिलनाडु न्‍यूज प्रिंट, रिलायंस कैपिटल, बल्‍लारपुर इंडस्‍ट्रीज, इंडिया बुल्‍स रियाल्‍टी, झंडु फार्मा, भारत इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, नेल्‍को, इंडिया इंफोलाइन और लुपिन मुख्‍य हैं। जिन कंपनियों के शेयरों पर इस सप्‍ताह निवेशक ध्‍यान दे सकते हैं वे है : बालमेर लारी, कामत होटल, देना बैंक, जेके सीमेंट, एआईए इंजीनियरिंग, क्‍युमिंस इंडिया, फोस्‍को इंडिया, जीआईसी हाउसिंग, वरुण शीपिंग, एनटीपीसी, एसबीआई, इंजीनियर्स इंडिया और पेन्निसुला लैंड।

January 19, 2008

डॉलर एंड डंडा

मुंबई नगरिया की फैमस होटल ताज के सामने खड़े होकर गेटवे ऑफ इंडिया का जायजा ले रहे थे कि कैसे इंग्लिश मैन यहां से मुंबई में घुसे थे। तभी एक गोरी चमड़ी वाला मेरे पास आया और हल्‍का मुस्‍काया। हमने सोचा इस गेट पर खड़े होकर इनका स्‍वागत करना हम हिंदुस्‍तानियों का फर्ज है या‍ फिर बाप दादाओं पर चढ़ा कोई कर्ज, जिसे पूरा करना होगा। हम भी मुस्‍काएं और चाल ढाल से साफ पता चला तो सीधा पूछा यू ऑर कमिंग फ्रोर्म यूएसए...। यस...यस...हमारा अगला सवाल सपाट...वॉट इज न्‍यू विद बुश। वह बोला....डॉलर एंड डंडा।

हम चौके यह डंडा कब लंदन से वाशिंग्‍टन पहुंच गया क्‍योंकि अंग्रेजी तो हम पर डंडा खूब यूज करते थे। यह तो हिंदी का डंडा है...वह बोला नो...इट इज अमरीकन डंडा। खूब उत्‍सुकता जगी तो पूछा यार सीधे सीधे बताओं यह है क्‍या। वह बोला यार बोला तो सुना..हम अमरीकनों के जो यार हैं वहां डॉलर चलता है जो हमारे डॉलर के दुश्‍मन वहां डंडा। यूं तो कहा जाता है कि सारी दुनिया में डॉलर चलता है लेकिन अब कुछ बदमाश डॉलर को चलने नहीं दे रहे सो हमने नई नीति में डंडा अपना लिया। अब चाहे कोई देश हो वियतनाम या इराक, अफगानिस्‍तान अथवा ईरान। यह लिस्‍ट लंबी है हम तो चाहते हैं कि डॉलर विरोधी सारी जगह पर डंडा चलाया जाए... इस लिस्‍ट के कुछ नाम बता दूं‍ जैसे सीरिया, जार्डन, क्‍यूबा, म्‍यांमार, उत्‍तरी कोरिया।

वह बोला तुम्‍हारे यहां एक कहावत है तेल देखो, तेल की धार देखो...हम कहते हैं कि तेल और तेल की धार दोनों हमें नहीं दिखाई तो डंडा देखो। अमांयार इस छोटे से देश ईरान की गर्दन इतनी लंबी हो गई कि कहता है पैमेंट डॉलर में नहीं लेगा....हमें कहता है कि पहले तुम परमाणु हथियार बनाना बंद करो..फिर हम बंद करेंगे। पैमेंट डॉलर में नहीं लेगा तो डंडा जरुर लेगा....वैसे भी हमारे बुश साब पंगा लेने में बहुत आगे हैं। तु डॉलर मत लें हम पंगा लेंगे। हमने कहां कि कहावत तो यह भी है कि न नौ मन तेल होगा और न राधा नाचेगी। उसने पलट कर कहा कि तेल भी हमारा होगा और राधा भी। इराक में सद्दाम की गर्दन नापकर तेल भी हमारा हो गया और वहां राज भी हमारा यानी राधा भी हमारी। हमने कहा कि यार तुम लोग पंगा करते ही क्‍यों हो...उसने कहां हम नहीं करते...ये तुम काली चमड़ी वाले करते हो...ब्राड माइंड से सोचते नहीं। कर भला, हो भला..तुम लोग हमारा भला करो, हम तुम्‍हारा भला करेंगे। मैंने पूछा वो कैसे। वह बोला...हम तुम्‍हारे बाजारों, कारखानों, सरकार के बंदों सब जगह घुसपैठ कर लेंगे एमओयू पर साइन करवा कर। जब हमारा सामान बिकेगा तो तुम्‍हारा बनेगा ही नहीं...कच्‍चे माल के आयात और बने माल के निर्यात से तुम्‍हारी मुक्ति। सब जगह हमारा माल....हमारी दुकान। इस तरह होगा तुम्‍हारा भला।

बुश साब ने आज तक किसी का बुरा नहीं चाहा...लेकिन जो डॉलर के साथ पंगा लेता है वहां वे डंडा बजाना नहीं भूलते। हमने कहा कि वैसे इस नारे पर कॉपीराइट हमारा है...क्‍योंकि जैसे हमारा नारा है बंटी और बबली...उसी तर्ज पर बना है यह डॉलर और डंडा। उसने कहा कि चुप रहो...कौन सा कॉपीराइट...हमारे पास डंडा है। मार देंगे एक खोपड़ी में। तुम क्‍या समझते हो कि हम तुम्‍हारे साथ दोस्‍ती कर रहे हैं तो सिर चढ़ जाएं। खाड़ी के ज्‍यादातर देशों में हमारे सैनिक पहुंच ही चुके हैं। वहां रामधुन जमा ली है, अब नहीं हटेंगे। इराक हमारी मुट्ठी में है। अफगानिस्‍तान में राज किसका, हमारा। पाकिस्‍तान चेला किसका हमारा। बाकी जो बचे हैं वे भी हमारे डंडे के जोर पर जेब में होंगे। अब हमारे घर जाने का वक्‍त हो गया था सो बोले चलते हैं, वह बोला सुनते जाओ। एक दिन पाकिस्‍तान में घुस जाएंगे और तुम्‍हारी भी वाट नहीं लगा दी तो बोलना। अपना फोरेन करेंसी भंडार डॉलर पर ही रखना और अमरीकन कंपनियों को अपने यहां राज करने देना....पेप्‍सी, कोक या किसी और को भगाना मत नहीं तो यहां से तुम्‍हें भगा देंगे। पाकिस्‍तान में जिस दिन पहुंचे हिंदुस्‍तान में भी टांग घुसेडेंगे..घेरना तो हमें चीन को है और यह काम तुम्‍हारी धरती से करेंगे एक दिन। समझ गए ब्‍लैक मैन...यह है डॉलर और डंडा।

January 18, 2008

यही होता है लालच का अंजाम !

बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज में आज जिस तरह फ्री फ्लो गिरावट आ रही थी उसने यह तो साफ कर दिया कि अंतरराष्‍ट्रीय बाजार से मिल रहे मंदी के संकेत के बावजूद तेजी का खेल खेलना कितना खतरनाक हो सकता है। वाह मनी ने 11 जनवरी 2008 को अपनी पोस्‍ट डर पर हावी लालच में काफी कुछ चेता दिया था। इसके अलावा 24 दिसंबर 2007 को अपनी पोस्‍ट शेयर बाजार में अगले साल तगड़ी चंचलता..में भी यह बताया था कि निवेशक मुनाफावसूली करते रहें और हर बड़ी गिरावट पर छोटी छोटी मात्रा में बेहतर स्‍टॉक की खरीद। मुनाफावसूली और बिकवाली में अंतर होता है। हर ऊपरी स्‍तर पर बिकवाली कर निचले स्‍तर पर खरीद करना ही फायदे का सौदा होता है।

वाह मनी शेयर बाजार में मंदी की बात नहीं कर रहा है लेकिन अमरीका में सबप्राइम के जो नतीजे सामने आ रहे हैं उससे यह तो साफ हैं कि अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में घटने वाली हर घटना का हमारे शेयर बाजार पर असर जरुर पड़ेगा। हम अपनी इस राय पर पहले की तरह कायम है कि दिवाली 2008 तक बीएसई का सेंसेक्‍स 25 हजार अंक की ऊंचाई को छू लेगा। आप इसे इस तरह भी ले सकते हैं कि जब हम एक ट्रेन से यात्रा करते हैं तो जरुरी नहीं कि वह जगह एक ही स्‍पीड में दौड़े। ट्रेन कई बार तेज गति से दौड़ती है तो कई बार उसकी गति धी‍मी पड़ जाती है और कई दफा किसी जगह खड़ी रह जाती है, फिर दौड़ने लगती है। यही हालत शेयर बाजार की है। अधिकतर निवेशक गिरावट को नजरअंदाज कर सिर्फ तेजी पर सवार थे और डर पर लालच हावी हो चुका था जिसने अब तक शेयर बाजार को काफी कुछ धो दिया।

भारतीय शेयर बाजार में तेजी का यह आठवां साल है और इस साल अंतरराष्‍ट्रीय बाजारों में घटने वाली घटनाओं का हमारे बाजार पर खासा असर पड़ेगा। हालांकि, जो निवेशक मध्‍यम से लंबी अवधि के लिए यहां पैसा लगा रहे हैं उन्‍हें चिंतित होने की जरुरत नहीं है। सबसे बड़ी चिंता फ्यूचर एंड ऑप्‍शन यानी एफएंडओ खेलने वालों के लिए है। वाह मनी ने हमेशा अपने पाठकों को यही राय दी है कि वे एफएंडओ से बचें। अपनी मेहनत की कमाई को इस तरह के खेल में न गवांकर डिलीवरी आधारित कामकाज करना चाहिए। अन्‍यथा छोटा कांट्रैक्‍ट, बड़ा सेन्‍स...आपके पोर्टफोलियो को छोटा, छोटा और छोटा करता जाएगा एवं आपको तब पता चलेगा कि सेन्‍स से न किए गए कार्य का अंजाम क्‍या होता है।

भारतीय शेयर बाजार में आई ताजा गिरावट अभी नहीं थमेगी....हो सकता है कि किसी दिन आपको दो सौ, चार सौ अंक का सुधार दिखाई दे जाए लेकिन इसके बाद फिर गिरावट आएगी। आम बजट तक 17 से 18 हजार अंक के आसपास दिख सकता है। सेंसेक्‍स में बड़ी बढ़त तभी दिखाई देगी जब यह 21 हजार अंक के ऊपर उठेगा। हालांकि, इस बीच अमरीका ब्‍याज दरों में और कटौती कर कुछ समय के लिए बाजार को ऊपर उठा सकता है लेकिन यह मंदी नामक बीमारी का स्‍थाई इलाज नहीं है। हमें भी ज्‍यादा खुश होने की जरुरत नहीं है क्‍योंकि हमारी अर्थव्‍यवस्‍था बुनियादी तौर पर ठीक है लेकिन उच्‍च ब्‍याज दरों और ऊंचे डेप्रिसिएशन का दबाव कंपनियों पर बढ़ रहा है जिसके नतीजे हमें वर्ष 2008/09 की दूसरी छमाही में भोगने पड़ सकते हैं। हम निवेशकों से एक बार फिर कहना चाहेंगे कि वे एफएंडओ से दूर रहते हुए हर बढ़त पर मुनाफावसूली और बड़ी गिरावट पर खरीद करते रहें।

January 17, 2008

बेहतर रिटर्न देगा अपोलो टायर्स

apollo अपोलो टायर्स ने अक्‍टूबर से दिसंबर 2007 की तिमाही के जो नतीजे पेश किए हैं, वे बाजार की उम्‍मीद से कहीं बेहतर है। कंपनी के शानदार नतीजे और विस्‍तार योजनाओं से पता चलता है कि 32 साल की यात्रा में इस कंपनी ने टायर उद्योग में अपना मुकाम खुद बनाया है। कंपनी की शुद्ध बिक्री चालू वित्‍त वर्ष की तीसरी तिमाही में 974.1 करोड़ रुपए पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 857.5 करोड़ रुपए थी। इसी तरह शुद्ध लाभ भी 35.1 करोड़ रुपए से बढ़कर 62.2 करोड़ रुपए पहुंच गया। कंपनी की आय में यह बढ़ोतरी ओरिजनल इक्विपमेंट मैन्‍युफैक्‍चरर्स (ओईएम) की मांग में सुस्‍ती के बावजूद देखने को मिली है। अपोलो टायर्स की बिक्री में रिप्‍लेसमेंट मांग की भूमिका 70 फीसदी रही जो पिछले साल समान तिमाही में 65 फीसदी थी। कच्‍चे माल की लागत में बढ़त के बावजूद कंपनी का ऑपरेटिंग लाभ मार्जिन सुधरा है।

  • अपोलो टायर्स 220 करोड़ रुपए के पूंजीगत खर्च से अपना विस्‍तार करने जा रही है। इस विस्‍तार के तहत चेन्‍नई के समीप एक ग्रीनफील्‍ड रेडियल सुविधाएं खड़ी करना है। इस परियोजना के पहले चरण का कार्य अगले 18 महीनों में पूरा होने की संभावना है। इस राशि के अलावा सौ करोड़ रुपए लिमडा संयंत्र में एक दस टन दैनिक ऑफ द रोड यानी ओटीआर टायर सुविधा स्‍थापित करने में खर्च किए जाएंगे। नतीजन कंपनी की मौजूदा 740 टन दैनिक की क्षमता में अगले दो साल में सौ टन की और बढ़ोतरी हो जाएगी। कंपनी गुजरात में 39 करोड़ रुपए की लागत से आठ मेगावाट की पवन ऊर्जा परियोजना लगाएगी। अपोलो टायर्स 20 करोड़ यूरो के आसपास राशि हंगरी में एक संयंत्र स्‍थापित करने में खर्च किए जाएंगे ताकि यूरोप व उत्‍तरी अमरीकन बाजारों की मांग को आसानी से पूरा किया जा सके।
  • अपोलो टायर्स की सब्सिडियरी डनलप साउथ अफ्रीका के कार्य प्रदर्शन में सुधार देखने को मिला है। इसकी कंसोलिडेटेड बिक्री 14 फीसदी बढ़कर 1240 करोड़ रुपए पहुंच गई है। सकल लाभ में भी इस तिमाही में 17 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
  • अपोलो टायर्स की वित्‍त वर्ष 2007/08 में शुद्ध बिक्री 3620.1 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 217.6 करोड़ रुपए रहने की उम्‍मीद है। इसकी बुक वेल्‍यू 25.5 रुपए रहने की आस है। वित्‍त वर्ष 2008/09 में कंपनी की शुद्ध बिक्री 4084.4 करोड़ रुपए एवं शुद्ध मुनाफा 248.9 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। बुक वेल्‍यू भी 29.9 रुपए पहुंचने की आस है।

अपोलो टायर्स (तकनीकी विवरण के लिए यहां क्लिक करें) की शेयरधारिता को देखें तो प्रमोटरों की हिस्‍सेदारी 34 फीसदी है, जबकि विदेशी संस्‍थागत निवेशकों के पास 18 फीसदी और संस्‍थागत निवेशकों के पास 28 फीसदी शेयर हैं। जबकि, आम जनता और अन्‍य के पास 20 फीसदी शेयर हैं। इसका बाजार पूंजीकरण 2654 करोड़ रुपए है। पिछले 52 सप्‍ताह में इसका निचला भाव 25 रुपए और उच्‍चतम दाम 63 रुपए था। अपोलो टायर्स का बीएसई कोड 500877 और एनएसई कोड APOLLOTYRE है। कंपनी का मौजूदा कार्य प्रदर्शन, बेहतर विकास संभावनाएं और भावी विस्‍तार योजनाओं को देखते हुए इस समय 56 रुपए में मिल रहा अपोलो टायर्स का शेयर जल्‍दी ही 70 रुपए पर दिखाई देगा।

शेयर बाजार : अंधेरे के बाद ही उजाला

भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के बैरोमीटर बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज का सेंसेक्‍स पिछले दो दिन में एक हजार अंक गिर चुका है और निवेशकों में बेचैनी छा गई है। निवेशकों के मुरझाएं चेहरों पर एक ही सवाल है कि सेंसेक्‍स और शेयर बाजार में आगे क्‍या होगा। क्‍या यह मंदी और बढ़ेगी या फिर मार्केट की रौनक लौट आएगी। हर निवेशक को यह जान लेना चाहिए शेयर बाजार में न तो सब कुछ मिटने जा रहा है और न ही बड़ी तेजी आएगी। लेकिन यह बात ध्‍यान रखनी चाहिए कि हर तगड़ी तेजी के बाद कुछ करेक्‍शन आता ही है लेकिन ऐसे करेक्‍शन स्‍थाई नहीं हैं और शेयर बाजार नई बुलंदियों को छूता रहेगा।

बीएसई सेंसेक्‍स जब पांच हजार अंक था और आठ हजार अंक पर आया तब भी यही बातें होती थी कि अब बहुत बढ़ गया बाजार, कभी भी औंधे मुंह गिरेगा। आठ से 15 हजार अंक पहुंचा तब भी इसी तरह की बातें होती थी और आज भी हो रही है। इस तरह की बातों को सोचने के पीछे हमारी गलती नहीं है, बल्कि हमारी मानसिकता आड़े आ जाती है क्‍योंकि हम तगड़ी तेजी देखने के आदी नहीं रहे और पहली बार बाजार में आग लगते हुए देख रहे हैं लेकिन एक गिरावट ब्‍लड प्रेशर गड़बड़ा देती है। यदि इतिहास देखा जाए तो सेंसेक्‍स ने जब भी बड़ा गोता लगाया, वह अगली बार दुगुने जोश से आगे बढ़ा है। इस समय की मंदी की बड़ी वजह निवेशकों की नए पब्लिक इश्‍यू में पैसा लगाने के लिए निकली बिकवाली है। आम निवेशक को चिंतित होने की जरुरत नहीं है। सेंसेक्‍स को अभी बड़ी मंजिल तय करनी है।

हर निवेशक से कहना है कि यदि आपने देश की क्रीम कंपनियों में निवेश किया है तो बिल्‍कुल न घबराएं, चाहे सेंसेक्‍स किसी भी स्‍तर पर दिखें। साथ ही ऐसी कंपनियों के शेयर छोटे मोटे लाभ के लिए न बेंचे, बल्कि लांग टर्म के आधार पर अपने निवेश को बनाए रखें। हालांकि, बाजार पर बुरा असर डालने वाली कोई बड़ी खबर आ रही हो तो आप कुछ समय के लिए अपने शेयर बेच सकते हैं लेकिन उन्‍हें घटे स्‍तर पर खरीदने की तैयारी भी रखें। यदि आप ऑपरेटरों और पंटरों के मन को पढ़ सकते हैं तो यह जान लें कि जब बाजार में चौतरफा यह तय हो जाता है कि बाजार में अब गिरावट नहीं आएगी और यह उठता ही रहेगा तभी इतना तगड़ा झटका दिया जाता है कि निवेशकों की बड़ी संख्‍या संभल ही नहीं पाती। कई बार यह धक्‍का प्‍यार से दिया जाता है....यानी 80/100/150 अंक की रोज रोज गिरावट एवं आम निवेशक यह सोचता रहता है कि आज गिरा है, कल बाजार उठेगा। परसों तो दम आएगा ही....लेकिन ऐसा नहीं होता और पता चलता है कि बाजार तो डेढ़ हजार अंक का गोता लगा गया।

यह ध्‍यान रखें पैसा कमाने के लिए धैर्य जरुरी है और घबराहट के किसी भी कारण के समय आत्‍मचिंतन जरुर करें अन्‍यथा आप गेनर के बजाय लूजर बन सकते हैं। भेड़चाल का हिस्‍सा न बनते हुए किसी भी कंपनी के शेयर खरीदते और बेचते समय यह जरुर सोचें कि यह खरीद कितने समय के लिए है और यदि शेयर बेच रहे हैं तो यह देखें कि जिस भाव पर आप शेयर बेच रहे हैं क्‍या उसके बाद इसमें बढ़ोतरी की बड़ी गुंजाइश नहीं बची है। यदि गुंजाइश है तो शेयर बेचने का आपका फैसला गलत हो सकता है।

सच्‍चा खिलाड़ी वह है जो हर बड़ी गिरावट में बेहतर शेयर छोटी छोटी मात्रा में खरीदता है। आपको कई बार यह लगता है कि मैंने अमुक कंपनी के शेयर नहीं लिए या चूक गया...लेकिन ऐसी गिरावट आपको बेहतर कंपनियों या अपनी पसंदीदा कंपनियों के शेयर खरीदने के मौके देती है। गिरावट के समय जो सबसे बड़ा मंत्र है, पहले आप शांत मन से अपनी पसंदीदा कंपनियों की सूची का विश्‍लेषण करें और यह देखें कि जिन कंपनियों के शेयर आप खरीदना चाहते हैं उनके नतीजे पिछले तीन सालों में किस तरह के आए हैं, प्रबंधन कैसा है, जिस क्षेत्र से कंपनी जुड़ी हैं, उस उद्योग का भविष्‍य कैसा है। शेयर खरीदने के बाद आपकी होल्डिंग क्षमता कैसी है। इस तरह के अनेक कारक हैं जिन पर आप विचार कर हर गिरावट में बेस्‍ट कंपनियों के शेयर ले सकते हैं, लेकिन याद रखिए आपकी यह खरीद छोटी छोटी मात्रा में होनी चाहिए ताकि अगली गिरावट पर भी आपके पास लिक्विडीटी बनी रहे।

January 16, 2008

मास साइक्‍लोजी का गेम है यह पावर

रिलायंस पावर लिमिटेड के पब्लिक इश्‍यू को खुलते ही जो 11 गुना ओवरसब्‍सक्राइब्‍ड का प्रतिसाद मिला वह असल में रिटेल निवेशकों से अधिक संस्‍थागत निवेशकों की देन है जिन्‍होंने काफी पहले ही यह तैयारी कर रखी थी कि ज्‍योंहि यह इश्‍यू खुलेगा, आवेदन जमा हो जाना चाहिए। आपका आवेदन पहले जमा हो या बाद में उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यहां ऐसा नहीं है कि पहले आओ और पहले पाओ। असल में जब इस इश्‍यू में जमकर पैसा आने की खबर बाजार में फैली तो आम निवेशक भी पावर ऑन, इ‍ंडिया ऑन के जोश में आ गया और लोग अपने बेहतर स्‍टॉक बेचकर इस आईपीओ के लिए पैसे की जुगत में लग गए। यही वजह रही कि कल शेयर बाजार ने विपरीत दिशा में रुख किया, वह इस समय तक कायम है। पूरा शेयर बाजार लाल॥लाल दिखाई दे रहा है। बढ़ने वाले शेयरों को ढूंढा जा रहा है कि कौनसे शेयर बढ़े हैं।

रिलायंस पावर का आईपीओ तो निवेशकों की शेयर बिकवाली और यहां हुए निवेश से ऑन हो गया लेकिन शेयर बाजार खुद ऑफ हो गया। रिलायंस पावर में यह तय है कि किसी भी आम निवेशक को इतनी बड़ी संख्‍या में शेयर नहीं मिलेंगे कि उनकी माली हालत 20 से 25 दिन में पूरी तरह बदल जाएगी। रिलायंस पावर के आईपीओ ने हर तरह के माध्‍यम में जमकर किए गए विज्ञापन व रिंगटोन से आम जन के मानस को जोरदार ढंग से प्रभावित किया है। मार्केटिंग वाले और प्रबंध संस्‍थानों में पढ़ाने वालों के लिए यह एक केस स्‍टेडी हो सकता है कि कैसे आम आदमी इक्विटी बाजार की ओर एक विज्ञापन की बदौलत मुड़ गया। देश के हर शहर, हर कस्‍बे और हर गांव में रिलायंस के आईपीओ की ही चर्चा है। स्‍थानीय, राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय मुद्दे तेल लेने गए...बस चर्चा है तो केवल रिलायंस पावर की....वाकई पावर दमदार बन गया। लोगों यह लग रहा है कि इस आईपीओ में पैसा न भरा तो शायद जिंदगी ही छूट जाएगी। डिमैट खातों की संख्‍या इतने जोरदार ढंग से कभी नहीं बढ़ी, भले ही इन खाताधारियों को यह भी नहीं पता हो कि यह खाता है क्‍या चीज।

शेयर बाजार से जुड़े पुराने निवेशक भी इस करंट के प्रभाव में आ गए हैं और वे भी अपने पास रखी बेहतर कंपनियों के शेयर बेचकर यहां पैसा लगा रहे हैं। लोग इस भ्रम में पूरी तरह फंस गए हैं कि अब केवल रिलायंस पावर के ही शेयर चलेंगे, भले ही बाजार गिर जाए। लेकिन ऐसा हो नहीं सकता। निवेशक तब जरुर पछताएंगे जब वे पाएंगे कि उन्‍होंने जिन बेस्‍ट कंपनियों के शेयर बेचकर यहां पैसा लगाया है उनके दाम नई ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। अगले 20 से 25 दिन में महज सात से आठ हजार रुपए कमाने के लिए बेस्‍ट कंपनियों के शेयर बेचना कहां की समझदारी है। कल एक निवेशक से बात हो रही थी, उसने बताया कि उसने भेल, एल एंड टी के शेयर बेचकर एक लाख रुपए से ज्‍यादा का बंदोबस्‍त कर लिया है और अब घरवालों के नाम चार आवेदन रिलायंस पावर के भर रहा है। हंसी आती है ऐसे मूर्ख निवेशकों पर जिन्‍होंने क्रीम स्‍टॉक बेच दिए क्‍योंकि वह बता रहा था कि इसमें कमाई तो तय है।

आम निवेशकों को निवेश सलाहकारों और ब्रोकरों ने समझाना तो कई दिन पहले से ही शुरु कर दिया था कि रिलायंस पावर के आईपीओ पर सवार जरुर हो जाना क्‍योंकि यह अगली मैराथन में भाग लेगा। मेरे भोले निवेशक 20 से 25 दिन में सात से आठ हजार रुपए कमा लेगा, चल भर ये फार्म। हालांकि, जो लोग यह कह रहे हैं कि आंशिक भुगतान करने वालों को लिस्टिंग गेन नहीं मिलेंगे वह गलत है। इस तरह समझिए... रिटेल निवेशक के लिए रिलायंस पावर का प्राइस बैंड 405 से 450 रुपए है। लेकिन आम निवेशक को इसमें 20 रुपए की छूट मिलेगी यानी चुकाने हैं 430 रुपए प्रति शेयर। शेयर लिस्‍टिंग गेन यानी कंपनी की सूचीबद्धता के समय शेयर बेचने का लाभ केवल उसी स्थिति में नहीं मिल सकता जब आपको अपने शेयरों के लिए कोई भुगतान देना बाकी हो। या फिर इतनी बड़ी मात्रा में शेयर मिल गए कि पैसा चुकाना अभी बाकी है। खुदरा निवेशक रिलायंस पावर में अधिकतम 225 शेयर के लिए कट ऑफ पर आवेदन कर सकते हैं। आंशिक भुगतान में देखें तो 115 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से 25875 रुपए देने होंगे। रिटेल इनवेस्‍टर श्रेणी को भी जबरदस्‍त प्रतिसाद मिल रहा है। जिससे संभावना यह बन रही है कि रिलायंस पावर के 25 से 30 शेयर ही एक निवेशक को मिल पाएं....और यह संख्‍या घटकर एक लॉट यानी 15 शेयर भी रह सकती है। फिर भी हम 25 से 30 शेयर मान लें तो 430 रुपए के कट ऑफ पर यह राशि 10750 से 12900 रुपए आती है। यानी 25875 रुपए में से यह राशि कटने के बाद शेष राशि रिफंड आएगी। इसका मतलब यह है कि आप लिस्टिंग गेन आसानी से पा सकते हैं।

रिलायंस पावर अपने आईपीओ के माध्‍यम से 11700 करोड़ रुपए जुटा रही है। इसमें प्रमोटरों का योगदान केवल 1440 करोड़ रुपए है। इस कंपनी का कामकाज अभी शुरु नहीं हुआ है जिसकी वजह से वित्‍तीय स्थि‍ति को लेकर कोई विश्‍लेषण नहीं किया जा सकता। कंपनी के सही वित्‍तीय प्रदर्शन का अंदाज वित्‍त वर्ष 2010 से पहले नहीं लग सकेगा। ऐसे में एक निवेशक को क्‍या करना चाहिए और क्‍या नहीं, कुछ कहा नहीं जा सकेगा। आईपीओ के बाद कंपनी की विस्‍तारित इक्विटी 2260 करोड़ रुपए होगी। इश्‍यू के कट ऑफ प्राइस 450 रुपए को ध्‍यान में रखें तो इसका बाजार पूंजीकरण 102000 करोड़ रुपए होगा। इस समय ग्रे बाजार में इसका प्रीमियम 370 रुपए प्रति शेयर बोला जा रहा है जिसका अर्थ यह हुआ कि रिलायंस पावर के शेयर की लिस्टिंग 820 रुपए पर होगी। इस स्थिति में एंटरप्राइज वेल्‍यू 210000 करोड़ रुपए होगी। लेकिन कंपनी जिन बिजली परियोजना पर काम करने जा रही हैं वहां काफी समय लगेगा तो ऐसे में एक सवाल उठता है कि क्‍या यह वेल्‍यूएशन बनी रहेगी।

एनटीपीसी की बिजली उत्‍पादन क्षमता 25 हजार मेगावाट से अधिक है और बाजार पूंजीकरण 227000 करोड़ रुपए। इसकी एंटरप्राइजेज वेल्‍यू 245000 करोड़ रुपए का अनुमान है। एनटीपीसी की वित्‍त वर्ष 2008 में प्रति शेयर आय यानी ईपीसी 10 रुपए आने के आसार हैं। सरकार के पास इसकी शेयरधारिता 90 फीसदी है। टाटा पावर का बाजार पूंजीकरण 34 हजार करोड़ रुपए और एंटरप्राइजेज वेल्‍यू 36 हजार करोड़ रुपए है। टाटा पावर की बिजली उत्‍पादन क्षमता तीन हजार मेगावाट है और सात हजार मेगावाट की परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं जिनमें मुंद्रा का चार हजार मेगावाट की अल्‍ट्रा मेगा पावर परियोजना शामिल है। इन कंपनियों से जब रिलायंस पावर की तुलना करें तो यह लगता है कि या तो ये कंपनियां अंडरवेल्‍यूड हैं या फिर रिलायंस पावर के बारे में बढ़ाचढ़ाकर स्थिति पेश की गई है। रिलायंस पावर को 21 हजार मेगावाट की नई परियोजनाओं के लिए 95 हजार करोड़ रुपए निवेश करने की जरुरत होगी और इन परियोजनाओं को खड़ा करने में कम से कम दो से तीन साल का वक्‍त लगेगा ऐसे में निवेशक चाहें तो मौजूदा बड़ी बिजली कंपनियों में निवेश कर कम समय में मोटा मुनाफा कमा सकते हैं।

January 15, 2008

स्‍टील की मजबूती है गेलेन्‍ट मेटल में

gallant गुजरात स्थित इंटीग्रेटेड स्‍टील उत्‍पादक कंपनी गेलेन्‍ट मेटल स्‍पोंज ऑयरन, एमएम बिलेट्स, रि रोल्‍ड उत्‍पादक (टीएमटी बार्स) के उत्‍पादन से जुड़ी हुई कंपनी है। कंपनी समूचे बिलेट्स का रोलिंग उत्‍पादकों के लिए खुद ही खपत करती है। कंपनी के रिरोल्‍ड उत्‍पादों को बनाने में एमएस बिलेट्स मुख्‍य कच्‍चा माल है। कंपनी के पास स्‍वयं के उपयोग के लिए बिजली संयंत्र भी है जिसमें 18 मेगावाट बिजली का उत्‍पादन किया जाता है। कंपनी ने अपनी परियोजना के दूसरे चरण के तहत मार्च 2007 में 25 मेगावाट का निजी बिजली संयंत्र स्‍थापित किया। शानदार आर्थिक विकास दर, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलपमेंट, और ग्रामीण विकास पर ध्‍यान देने की नीति से स्‍टील उद्योग पर सकारात्‍मक असर देखने को मिलेगा। पश्चिम क्षेत्र में स्‍टील की मांग व आपूर्ति में अंतर का लाभ भी इस कंपनी को मिलेगा। साथ ही कंपनी ने गुजरात व महाराष्‍ट्र के हर बाजार में अपनी उपस्थिति बनाना शुरु कर दिया है। इस कंपनी ने अब अलॉय और स्‍पेशल स्‍टील के उत्‍पादन में उतरने का इरादा जताया है। साथ ही अपनी उत्‍पादन क्षमता में बढ़ोतरी और यूरोप व चीन के बाजार में निर्यात के माध्‍यम से यह अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर अपना कारोबार विस्‍तार करने के मूड में है।

गेलेन्‍ट मेटल (तकनीकी विवरण के लिए यहां क्लिक करें) ने 31 दिसंबर 2007 को समाप्‍त तिमाही में 102.5 करोड़ रुपए की बिक्री पर 12.5 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया। जबकि, 30 सितंबर 2007 को समाप्‍त तिमाही में कंपनी की बिक्री 85.7 करोड़ रुपए और शुद्ध मुनाफा 5.8 करोड़ रुपए था। कंपनी का बाजार पूंजीकरण 340.78 करोड़ रुपए है। वित्‍त वर्ष 2007 में इसकी बुक वेल्‍यू 13.18 रुपए थी। कंपनी की शेयरधारिता की बात की जाए तो इसमें प्रमोटरों की हिस्‍सेदारी 59.65 फीसदी है, जबकि वित्‍त संस्‍थाओं और अन्‍य की हिस्‍सेदारी 23.58 फीसदी है। आम जनता के पास कंपनी के केवल 16.77 फीसदी शेयर हैं। इसका बीएसई कोड 532726 और एनएसई कोड GALLANT है। मौजूदा समय में 48 रुपए पर बिक रहे गेलेन्‍ट मेटल के शेयर का दाम मध्‍यम अवधि में 75 रुपए तक जाने की उम्‍मीद है।

January 14, 2008

पैसे तो जमीन में गड़े हैं पेन्निसुला

land पुराने जमाने के कई बड़े बुजूर्ग आज भी ऐसे ढ़ेरों किस्‍से सुनाते हैं जिनसे पता चलता है कि पहले कई धन्‍ना सेठ या आम आदमी पैसे जमीन में गाड़कर रखते थे। अब नए जमाने में लोग जमीन की खरीद फरोख्‍त का काम कर पैसा कमाते हैं लेकिन इक्विटी कल्‍चर वाले जानते हैं कि जितने पैसों में महंगी जमीन खरीदेंगे उससे कम दाम में बेहतरीन रियल्‍टी स्‍टॉक खरीद कर कम समय में मोटा मुनाफा बैंक में जमा कर लेंगे। यदि आप इस समय बेहतरीन रियल्‍टी स्‍टॉक की तलाश कर रहे हैं तो अशोक पिरामल समूह की कंपनी पेन्निसुला लैंड से उम्‍दा कोई नहीं, जहां आने वाले समय में मोटे मुनाफे की बड़ी संभावना छिपी हुई है।

पिरामल होल्डिंग्‍स लिमिटेड और मोरारजी रियॉल्टीज लिमिटेड के वर्ष 2005 में हुए विलय से पेन्निसुला लैंड अस्तित्‍व में आई। मुंबई स्थित यह रियल इस्‍टेट डेवलपर, नॉन लैंड बैंक अवधारणा वाली यह कंपनी अब मुंबई के अलावा दक्षिण व पश्चिम भारत में अपने पैर पसार रही है। इस कंपनी का उसूल है मौजूदा जरुरत के मुताबिक जमीन खरीदो और इसे विकसित करो। कंपनी अब तक मुंबई में 22 लाख वर्ग फीट रियल इस्‍टेट विकसित कर चुकी है जिसमें 38 फीसदी आवासीय परियोजनाएं, 38 फीसदी व्‍यावसायिक और शेष रिटेल परियोजाएं हैं।

  • पेन्निसुला के पास इस समय मुंबई में 39 लाख वर्ग फीट बिक्री योग्‍य क्षेत्र है जिसे विकसित किया जा रहा है। इसमें दो आवासीय और तीन व्‍यावसायिक परियोजनाएं है जो वर्ष 2011 तक विकसित हो जाएंगी। इनसे 39 अरब रुपए की आय और 26 अरब रुपए का लाभ होगा। इन परियोजनाओं में स्‍वान मिल और डॉन मिल पेन्निसुला लैंड की सहभागी है।
  • कंपनी के पास मुंबई से बाहर तेजी से उभरते शहरों में 225 लाख वर्ग फीट की परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं। इनमें टाउनशीप और सेज परियोजनाएं हैं। इन परियोजनाओं को चरणबद्ध रुप में अगले छह से सात साल में विकसित किया जाएगा। कंपनी की पुणे, नासिक, गोवा और नागपुर में अनेक परियोजनाएं हैं। कंपनी ने हाल में हैदराबाद में रैलीज के पास से 31 एकड़ भूमि ली है। इसमें शेष 85 एकड़ भूमि अधिग्रहण करने का विकल्‍प है। इसके अलावा पेन्निसुला की चेन्‍नई, बंगलूरु, अहमदाबाद और मैसूर जैसे शहरों में अपना विस्‍तार करने की योजना है।
  • कंपनी दो रियल इस्‍टेट फंड लांच कर रही है। कंपनी इस फंड का 25 फीसदी हिस्‍सा अपने विभिन्‍न परियोजनाओं में लगाएगी ताकि पूंजी के मामले में दूसरे स्‍त्रोतों पर निर्भरता को कम किया जा सके।

पेन्निसुला लैंड (तकनीकी विवरण के लिए यहां क्लिक करें) की बिक्री वित्‍त वर्ष 2007 में 327.2 करोड़ रुपए रही और शुद्ध लाभ 128.9 करोड़ रुपए रहा। वित्‍त वर्ष 2008 में कंपनी की बिक्री 645.1 करोड़ रुपए और शुद्ध मुनाफा 197.3 करोड़ रुपए, वित्‍त वर्ष 2009 में बिक्री 1056.4 करोड़ रुपए एवं शुद्ध लाभ 376.6 करोड़ रुपए रहने की उम्‍मीद है। वर्ष 2007 में इसकी प्रति शेयर आय यानी ईपीएस 6.1 रुपए थी। वित्‍त वर्ष 2008 में ईपीएस 8.4 रुपए और वित्‍त वर्ष 2009 में 16 रुपए रहने की आस है। इसका बाजार पूंजीकरण 3040 करोड़ रुपए है।

रियल इस्‍टेट, टैक्‍सटाइल, रिटेल और इंजीनियरिंग जैसे उद्योगों से जुड़े अशोक पिरामल समूह की इस कंपनी में प्रमोटरों की शेयरधारिता 62.3 फीसदी है, जबकि विदेशी निवेशकों के पास 3.6 फीसदी और संस्‍थागत व नॉन प्रमोटरों के पास 21.7 फीसदी शेयर हैं। आम जनता के पास इसके केवल 12.4 फीसदी शेयर हैं। समूह की चैयरपर्सन उर्वी पिरामल हैं और पेन्निसुला लैंड का कामकाज राजीव पिरामल देखते हैं। पेन्निसुला लैंड का शेयर का दाम आज 154 रुपए था और जल्‍दी ही इसके 170 रुपए तक जाने की उम्‍मीद की जा सकती है। पेन्निसुला लैंड का शेयर नीचे में जब भी 120 से 127 रुपए आए तो यह बेहतर खरीद के लिए सबसे अच्‍छा भाव कहा जा सकता है। पिछले 52 सप्‍ताह की बात की जाए तो पेन्निसुला लैंड के शेयर का भाव ऊपर में 168 और नीचे में 61 रुपए था।

शेयरों में घटबढ़ सीमित रेंज में

नए साल के पहले सप्‍ताह ने शेयर बाजार और निवेशकों में तेजी का नया जोश भरा लेकिन पिछले सप्‍ताह जिस तरह से विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने जमकर बिकवाली की उससे अधिकतर निवेशकों में बेचैनी छा गई। 14 जनवरी से शुरु होने वाले नए सप्‍ताह में भी शेयर बाजार के एक सीमित रेंज में ही रहने की उम्‍मीद है। वैसे भी इस सप्‍ताह रिलायंस पावर का पब्लिक इश्‍यू खुल रहा है जिसमें देश के ज्‍यादातर निवेशकों ने पैसा लगाने की तैयारी कर रखी है।

आज से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स के 21443 से 20168 अंक के बीच रहने की प्रबल संभावना है। जबकि निफ्टी 6348 से 6066 अंक के बीच घूमता रहेगा। तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का मानना है कि शेयर बाजार में तेजी के लिए बीएसई सेंसेक्‍स के 20210 से ऊपर बने रहना जरुरी है। तकनीकी विश्‍लेषक मार्टिन प्रिंग मानते हैं कि सेंसेक्‍स को 19600 पर मजबूत स्‍पोर्ट मिलेगा। सेंसेक्‍स 21 हजार अंक के लेवल को पार करता है तो यह 23 हजार तक पहुंच जाएगा।

इस सप्‍ताह देश की अनेक प्रमुख कंपनियों के तिमाही नतीजे आने जा रहे हैं। यदि जो बेहतर नतीजे समाने रखती हैं तो शेयर बाजार में बड़ी गिरावट के आसार नहीं है। इस सप्‍ताह रिलायंस इंडस्‍ट्रीज, इंडिया बुल्‍स, बायोकॉन, निकोलस पिरामल, आइडिया, आईडीएफसी, टीसीएस, वेल्‍सपन गुजरात, विप्रो, आईडीबीआई, गोदरेज कंज्‍यूमर, रिलायंस नेचुरल रिसोर्सिस, हिंदुस्‍तान कंसट्रक्‍शन, इंडिया सीमेंट, उकालफ्यूल, टैक्‍समेको, रैनबक्‍सी, फाइनेनशियल टेक्‍नालॉजी, जेके लक्ष्‍मी सीमेंट, एनडीटीवी, अपोलो टायर्स, बालमेरी लॉरी, एनआईआईटी टेक्‍नालॉजी, किर्लोस्‍कर ब्रदर्स, गुजरात एनआरई, प्राइम सिक्‍युरिटीज मुख्‍य हैं।

प्राइमरी बाजार में रिलायंस पावर का 11500 करोड़ रुपए का मेगा इश्‍यू 15 जनवरी को खुल रहा है जिसे आम जनता का बेहतर प्रतिसाद मिलने की पूरी उम्‍मीद है। इस इश्‍यू में पैसा लगाने के लिए नए निवेशक धड़ाधड़ नए डिमैट खाते खुलवा रहे हैं। गुजरात के अहमदाबाद शहर की बात की जाए तो वहां रोजाना नए दो हजार डिमैट खाते खुल रहे हैं। यही हाल दूसरे शहरों का भी है।

डीएसपी मेरिल लिंच के रिसर्च प्रमुख ज्‍योतिवर्धन जयपुरिया कहते हैं कि दूसरे उभरते बाजारों से तुलना की जाए तो भारत बेहतर है। जयपुरिया की राय में मिडकैप शेयरों में करेक्‍शन जारी रहेगा। फर्स्‍ट ग्‍लोबल के शंकर शर्मा भी इसी तरह की राय रखते हैं। शर्मा के मुताबिक मिडकैप में करेक्‍शन जारी रहेगा क्‍योंकि ये काफी बढ़ चुके हैं। वे कहते है कि ज्‍यादा चांस बाजार के मौजूदा स्‍तर से घटने के हैं। लार्जकैप शेयरों में भी अधिक हलचल के अवसर कम हैं।

इस समय अधिकतर निवेशक गलती यह कर रहे हैं कि शार्ट टर्म अवधि दो दिन की, मीडियम टर्म एक सप्‍ताह और लांग टर्म 15 दिन को मानकर चल रहे हैं। हर निवेशक हर घंटे रुपए की बरसात चाहता है। ऐसा लालच इस समय ज्‍यादातर निवेशकों के दिमाग पर हावी हो चुका है जो भविष्‍य के लिए उचित नहीं है, भले शेयर बाजार में अगले पांच साल तेजी के हों। लालच मारता है और डर मुनाफा देता है इसे गांठ बांध लें। आप अपना पोर्टफोलियो पूरी तरह से न बेचें लेकिन अपने जिस निवेश पर 30 फीसदी मुनाफा मिल रहा हो वहां आंशिक बिकवाली कर इसे बटोर लें। ऐसा न हो कि पूरी रोटी के चक्‍कर में आधी भी हाथ से निकल जाए। आज जो मुनाफा आपकी जेब में आ रहा है वह कल किसी और का हो सकता है।

जिन कंपनियों के शेयरों पर इस सप्‍ताह निवेशक ध्‍यान दे सकते हैं वे है : एचडीएफसी लिमिटेड, कार्बोरेंडम यूनिवर्सल, आइडिया सेलुलर, पीटीसी इंडिया, पेन्निसुला लैंड, विकास डब्‍लूएसपी, रेप्रो इंडिया, आईटीसी, एलआईसी हाउसिंग, गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट, यस बैंक, एस कुमार नेशनवाइड, नीतिन फायर प्रोटेक्‍शन और ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन।

January 12, 2008

शेयर बाजार को मजबूती की जरुरत

हितेंद्र वासुदेव
भारतीय शेयर बाजार बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज के सेंसेक्‍स ने दो सप्‍ताह पहले ब्रेकआउट किया लेकिन भविष्‍य के लिए यह ब्रेकआउट ही पर्याप्‍त नहीं है बल्कि इसमें लगातार बढ़ोतरी होना जरुरी है। सप्‍ताह दर सप्‍ताह शेयर सेंसेक्‍स बढ़ रहा है लेकिन यह बढ़ोतरी टिक नहीं पा रही और उठापटक भरी है।

बीएसई का सेंसेक्‍स पिछले सप्‍ताह 20637.21 अंक पर खुला और नीचे में 20438.19 अंक तक गया। ऊपर में यह 21206.77 अंक तक गया लेकिन अंत में साप्‍ताहिक आधार पर 104 अंक बढ़कर 20827.45 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्‍स में यह लगातार तीसरे सप्‍ताह बढ़ोतरी दिखाई दे रही है। साप्‍ताहिक रुझान बढ़त का दिख रहा है लेकिन यह तभी उल्‍ट सकता है जब सेंसेक्‍स 20 हजार अंक के नीचे बंद हो।

सेंसेक्‍स में साप्‍ताहिक आधार पर ब्रेकआउट इसके 21210 से ऊपर बंद होने पर होगा और यह नई ऊंचाई की ओर बढ़ेगा। मौजूदा समय में ऊपरी स्‍तर पर दबाव देखा जा रहा है। उच्‍च स्‍तर पर पर्याप्‍त मुनाफा वसूली देखने को मिल रही है। सेंसेक्‍स के लिए दो मीडियम टर्म स्‍पोर्ट अंक 18800 और 18100 हैं। सेंसेक्‍स यदि इन दोनों स्‍तरों से नीचे बंद होने पर पूरी तरह टूट जाएगा और ये स्‍तर बाजार से पूरी तरह बाहर निकल जाने के लिए हैं। सेंसेक्‍स का 20210 अंक के पार बंद होना जरुरी है। साप्‍ताहिक स्‍पोर्ट 20824-20441-20000 अंक पर मिलेगा। साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 21210 और 21978 पर।

इलियट वेव विश्‍लेषण
वेव I-2594 से 3758
वेव II-3758 से 2904
वेव III- इंटरनल्‍स इस तरह:
वेव 1- 2904 से 6249
वेव 2-6249 से 4227
वेव 3-4227 से 12671
वेव IV- 12671 से 8799
वेव V- इंटरनल्‍स इस तरह:
वेव 1-8799 से 14724
वेव 2- इंटरनल्‍स इस तरह:
वेव A- 14724 से 12316
वेव B-12316 से 15868
वेव C-15868 से 13779
वेव 3- 13799 से 21206.77 (इस समय प्रगति पर)
वेव 3 के इंटरनल्‍स इस तरह:
वेव i-13799 से 20238
वेव ii-20238 से 18886
वेव ii के इंटरनल्‍स
वेव a-20238 से 18182
वेव b-18182 से 20498
वेव c-20498 से 18886
वेव iii – 18886 से 21206.77 (इस समय प्रगति पर)
वेव iii के इंटरनल्‍स तब तक सही रहेंगे जब तक सेंसेक्‍स 20 हजार से ऊपर रहेगा। जब यह इस स्‍तर से गिरेगा तो इंटरनल्‍स मूव बदल सकते हैं।


January 11, 2008

डर पर हावी लालच

भारतीय शेयर बाजारों में इस समय जो उथल पुथल मची है उसका आम निवेशक कोई कारण नहीं ढूंढ पा रहा है। हर कोई विश्‍लेषक यह कह रहा है कि बाजार में गिरावट की कोई वजह नहीं है। यह ऊपरी स्‍तर पर मुनाफा वसूली आने से छाई नरमी है। इक्विटी बाजार के बड़े बड़े धुरंधरों ने यह जो वजह बताई है वह अपने में सही है लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि अब आम निवेशक का लालच बढ़ता जा रहा है और उसे यह डर कतई नहीं सता रहा कि शेयर बाजार में गिरावट आएगी। यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में निवेशक यह तक कह सकते हैं कि गिरावट या करेक्‍शन....यह क्‍या बला होती है।

भारतीय निवेशक यह मान चुके थे कि नवंबर और दिसंबर 2007 में विदेशी संस्‍थागत निवेशक काफी बिकवाली कर चुके हैं और आगे जाकर वे ऐसा नहीं करेंगे। बल्कि जनवरी में उन्‍हें निवेश के लिए जो नया पैसा मिलेगा, उसे भारतीय शेयर बाजार में हर भाव पर झौंक देंगे। इसी लालच में भारतीय निवेशकों ने हर बेहतर, अच्‍छी और घटिया कंपनियों के शेयर खरीदें। बाजार में केवल एक ही शोर था....लाओं...लाओं.....पकड़ लो। जनवरी में विदेशी संस्‍थागत निवेशक नया पैसा लेकर आ रहे हैं उन्‍हें ऊंचे में टिका देना। चांदी ही चांदी...ऐसा चांस फिर नहीं मिलेगा कि दिसंबर में शेयर खरीदें और जनवरी में मुनाफा। हर कोई दौड़ रहा था....बगैर होमवर्क किए...हर किसी कंपनी के शेयर खरीदने। कई निवेशकों से बात होती है तो पता चलता है कि जिस कंपनी का नाम लोगों ने ढंग से सुना भी नहीं होगा या जिसका दस रुपए वाला शेयर 50 पैसे चल रहा होगा ऐसी ऐरा गैरा नत्‍थू खैरा कंपनी में आगे बड़ी कमाई के लालच में हजारों शेयर खरीद लिए हैं। ऐसे निवेशकों में से चंद ही नसीब वाले होते हैं जो कुछ कमा पाते हैं बाकी का मरना तय है, यह जान लें।

कंपनी के फंडामेंटल और उसका अतीत व भविष्‍य जाने बगैर पैसा कमाने के लालच ने निवेशकों को अंधा कर दिया है। यह स्‍पष्‍ट जान लें कि विदेशी संस्‍थागत निवेशक मूर्ख नहीं है जितना हम उन्‍हें समझ रहे हैं। भारतीय शेयर बाजार को घरेलू संस्‍थागत निवेशक, म्‍युच्‍यूअल फंड और निवेशक नहीं चला पाते क्‍योंकि विदेशी संस्‍थागत निवेशकों के पास पैसे की जबरदस्‍त ताकत है जो किसी भी तकनीकी विश्‍लेषण और फंडामेंटल को एक बार फेल कर सकते हैं। एक बात हर निवेशक के दिमाग में साफ हो जानी चाहिए कि हमारे शेयर बाजार पर विदेशी संस्‍थागत निवेशक ही हावी हैं और वे जो चाहेंगे वही होगा। आम निवेशक को केवल बाजार की ट्रेंड लाइन के हिसाब से खरीद और बिक्री करनी चाहिए और जो मुनाफा हाथ लग रहा है उसे बटोरते रहना चाहिए।

जब विदेशी संस्‍थागत निवेशक एक उद्योग के शेयरों से निकलकर दूसरे की ओर मुड़े मसलन पावर शेयरों से निकलकर सीमेंट, बैंक, इंफ्रा आदि में पोजीशन लेने लगे तो आम निवेशक को भी यही करना चाहिए तभी थोड़ा अच्‍छा पैसा कमाया जा सकता है। यह नहीं कि चल रहे हैं पावर सेक्‍टर के शेयर और खरीद रहे हैं सीमेंट के, जहां सरकारी बयानबाजी के अलावा मांग के अभाव से कंपनियां जूझ रही हों। हां, यदि बात लांग टर्म की है जिसे एक महीना नहीं बल्कि दो से चार साल मानें तो बात अलग है और ऐसे निवेश के साथ्‍ा बने रहने में कोई तकलीफ नहीं आएगी।

निवेशक गलती यह कर रहे हैं कि शार्ट टर्म अवधि दो दिन की, मीडियम टर्म एक सप्‍ताह और लांग टर्म 15 दिन को मानकर चल रहे हैं। हर निवेशक हर घंटे रुपए की बरसात चाहता है। ऐसा लालच इस समय ज्‍यादातर निवेशकों के दिमाग पर हावी हो चुका है और गिरावट का डर पूरी तरह से निकल गया है जो भविष्‍य के लिए उचित नहीं है, भले शेयर बाजार में अगले पांच साल तेजी के हों। लालच मारता है और डर मुनाफा देता है इसे गांठ बांध लें। हम यह नहीं कह रहे कि आप अपना पोर्टफोलियो बेच दें लेकिन जब अपने निवेश पर 30 फीसदी मुनाफा मिल रहा हो तो आंशिक बिकवाली कर इसे बटोर लें। ऐसा न हो कि पूरी रोटी के चक्‍कर में आधी भी हाथ से निकल जाए। आज जो मुनाफा आपकी जेब में आ रहा है वह कल किसी और का हो सकता है। तो फिर देर किसी बात की...लालच को हावी न होने दें और उचित निर्णय लेने में खुद सक्षम बनें बनिस्‍बत दूसरे के दिमाग पर निर्भर रहने के।

January 08, 2008

सस्‍ती, सुंदर सुमेधा

sumedha वाह मनी से अनेक निवेशकों ने यह पूछा है कि उन्‍हें कोई सस्‍ता शेयर बताया जाए जिसमें बड़ी मात्रा में निवेश किया जाए जिसकी लागत भी कम हो और रिटर्न बेहतर मिले। यानी सस्‍ता और सुंदर शेयर। शेयर बाजार में आई जोरदार तेजी के बीच सभी ब्रो‍किंग कंपनियों के शेयर दौड़ रहे हैं। ऐसे में इसी क्षेत्र की कंपनी सुमेधा फिस्‍कल सर्विसेस एक बेहतर शेयर है जो अन्‍य सभी ब्रोकिंग कंपनियों की तुलना में सस्‍ता मिल रहा है।

सुमेधा फिस्‍कल सर्विसेस पूंजी बाजार और एफएनओ सेगमेंट में नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज की सदस्‍य है। इस कंपनी का बाजार पूंजीकरण 14 करोड़ रुपए है और संभवत: यह ब्रोकिंग कंपनियों के शेयरों के बीच बीएसई पर सबसे सस्‍ते में मिल रहा है। वर्ष 2007 में कंपनी को केवल 85 लाख रुपए का लाभ हुआ जबकि वर्ष 2008 की पहली छमाही में इसने कर पश्‍चात लाभ 85 लाख रुपए कमाया। कंपनी ने वर्ष 2007 में लाभांश दिया जो पांच फीसदी था लेकिन वर्ष 2008 में इस लाभांश के बढ़ने की उम्‍मीद है।

सुमेधा फिस्‍कल के ऑफिस कोलकाता में है। इसके अलावा आठ शाखाएं हैं। कंपनी के प्रमोटर चार्टर्ड एकाउंटेंट्स हैं और 6.6 करोड़ रुपए की इक्विटी में 53 फीसदी शेयरधारिता अपने पास रखते हैं। इसके अलावा संस्‍थागत निवेशकों के पास 4.13 फीसदी और बॉडी कार्पोरेट के पास14.37 फीसदी शेयर हैं। सुमेधा फिस्‍कल संस्‍थागत निवेशकों, म्‍युच्‍यूअल फंडों, बैंकों और कार्पोरेट समूहों के लिए कारोबार कर रही है। अब यह कार्पोरेट फाइनेंस, आईपीओ मैंनेजमेंट और सलाहकार सेवाओं की ओर ध्‍यान देने जा रही है जिससे इसकी आय बढ़ेगी।

सुमेधा फिस्‍कल (तकनीकी विवरण के लिए यहां क्लिक करें) का शेयर 52 सप्‍ताह में नीचे में 6.53 रुपए और ऊपर में 22.95 रुपए था लेकिन 8 जनवरी 2008 को शेयर बाजार के गिरने के बावजूद यह 4.79 फीसदी के ऊपरी सर्किट के साथ 24.05 रुपए पर बंद हुआ। इसका बीएसई कोड 530419 है।

January 07, 2008

डार्क हॉर्स है गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट

GSPL गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट लिमिटेड (जीएसपीएल) ने वित्‍त वर्ष 2007 में अपनी पाइपलाइन नेटवर्क को 1130 किलोमीटर कर दिया, जो वित्‍त वर्ष 2006 में केवल 510 किलोमीटर थी। यानी एक ही साल में पाइपलाइन नेटवर्क दुगुना। यह कंपनी पाइपलाइन के निर्माण और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर स्‍थापित करने के लिए पहले ही दो अरब रुपए निवेश कर चुकी है। कंपनी ने जामनगर और हलोल के इलाके को जोड़ने के लिए दो अरब रुपए का अतिरिक्‍त पूंजीगत खर्च करने की योजना बनाई है। कंपनी मोरबी से मुंद्रा पोर्ट और पीपावाव पोर्ट से जामनगर के इलाके को कवर करने के लिए पाइपलाइन गैस ग्रिड स्‍थापित करने की भी योजना बना रही है। पूंजीगत खर्च के लिए आईएफसी ने लगभग 123 करोड़ रुपए का इक्विटी निवेश किया है और 338 करोड़ रुपए का कर्ज दिया है।

जीएसपीएल शुद्ध रुप से गैस ट्रांसमीशन कंपनी है और मौजूदा समय में यह अपने ग्राहकों को लगभग 18 एमएमएससीएमडी गैस सप्‍लाई कर रही है। वर्ष 2009 तक कंपनी चरणबद्ध रुप से अपने इस वोल्‍यूम को बढाएगी। वर्ष 2009 की चौथी तिमाही से कंपनी का रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के साथ भरुच से जामनगर के बीच 11 एमएमएससीएमडी गैस के ट्रांसपोर्टेशन का 15 साल का अनुबंध अमल में आएगा। अप्रैल 2008 से टोरेंट पावर जनरेशन लिमिटेड के लिए 4.5 एमएमएससीएमडी गैस के ट्रांसपोर्टेशन का 20 वर्षीय अनुबंध अमल में आ जाएगा।

क्रिसिल के मुताबिक कुल गैस खपत में शहरी गैस वितरण का हिस्‍सा वर्ष 2011-2012 में 14 फीसदी पहुंच जाएगा जो कि इस समय आठ फीसदी है। गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट इस मौके का लाभ उठाने के लिए अपने समूह की विभिन्‍न कंपनियों में रणनीतिक निवेश करने जा रही है जो कि शहरी गैस वितरण से जुड़ी हुई हैं। कंपनी तकरीबन 60 करोड़ रुपए अपनी पूर्ण सब्‍सिडीयरी जीएसपीसी गैस, साबरमती गैस (बीपीसीएल के साथ जीएसपीसी का संयुक्‍त उद्यम) और कृष्‍णा गोदावरी गैस नेटवर्क लिमिटेउ में निवेश करेगी। कंपनी प्रबंधन इन उद्यमों का कार्पोरेट ढांचा तीन से चार महीनों में तैयार कर लेगा।

गुजरात में व्‍यापक नेटवर्क के साथ काम कर रही जीएसपीएल ने राजस्‍थान, आंध्र प्रदेश और महाराष्‍ट्र में अपना कारोबार फैलाने की योजना बनाई है। हालांकि, इस संबंध में कंपनी अभी कुछ भी खुलकर बोलना नहीं चाहती। लेकिन इतना तय है कि इस विस्‍तार का कंपनी को भविष्‍य में भारी लाभ मिलेगा। प्राथमिक ऊर्जा स्‍त्रोत में नैचुरल गैस तेजी से आगे बढ़ता ऊर्जा स्‍त्रोत साबित हो रहा है।

गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट की शेयरधारिता को देखें तो प्रमोटरों की हिस्‍सेदारी 39 फीसदी है, जबकि विदेशी संस्‍थागत निवेशकों के पास 14 फीसदी, म्‍युच्‍यूअल फंडों व संस्‍थागत निवेशकों के पास नौ फीसदी और अन्‍य के पास 28 फीसदी हिस्‍सेदारी है। जबकि आम जनता के पास इस कंपनी के केवल दस फीसदी हिस्‍सेदारी है। कंपनी के कामकाज को देखें तो वर्ष 2007 में इसकी कुल आय 335.4 करोड़ रुपए थी जो वर्ष 2008 में बढ़कर 430.3 करोड़ रुपए और वर्ष 2009 में 579.9 करोड़ रुपए और वर्ष 2010 में 815.6 करोड़ रुपए पहुंच जाने की उम्‍मीद है। कंपनी का शुद्ध लाभ वर्ष 2007 में 89.4 करोड़ रुपए रहा जिसके वर्ष 2008 में 87 करोड़ रुपए, वर्ष 2009 में 117.4 करोड़ रुपए और वर्ष 2010 में 212.2 करोड़ रुपए पहुंचने की आस है। कंपनी की पूंजी 56.19 करोड़ रुपए है। गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट (तकनीकी विवरण के लिए यहां क्लिक करें)का शेयर इस समय तकरीबन 110 रुपए में मिल रहा है। कंपनी की भावी योजना और नेचुरल गैस के मोर्चे पर जिस तरह प्रगति हो रही है उसमें गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट डार्क हॉर्स शेयर साबित होगा और इसे मध्‍यम से लंबी अवधि के लिए रखा जा सकता है। हालांकि, शार्ट टर्म में इसका लक्ष्‍य 135 रुपए है।

शेयर की पतंग आसमान में ही रहेगी

जनवरी महीना मकर संक्रांति पर्व का होता है और इस पर्व के कई दिन पहले से देश के अनेक भागों में पतंग उड़ाने का जोरशोर दिखाई देता है। लेकिन शेयर बाजार में जो पतंग उड़ रही है वह सभी पतंगों से आगे है। वर्ष 2007 का दिसंबर महीना निवेशकों के लिए लाभदायी रहा और नए साल का पहला महीना निवेशकों की आय को और बढ़ा रहा है। आज 7 जनवरी से शुरू हो रहे सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज का सेंसेक्‍स यदि 20947 अंक से ऊपर बंद होता है तो यह 21222 अंक तक पहुंच सकता है। स्‍पोर्ट 20222 अंक पर मिलेगा। निफ्टी 6133 के स्‍पोर्ट पर 6368 अंक पर बंद होने पर यह 6444 अंक तक पहुंच सकता है।

तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि अगले सप्‍ताह के लिए साप्‍ताहिक स्‍पोर्ट 20439-20255- 20000 पर होगा। साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 20940 और 21626 अंक पर रहेगा। यदि सब कुछ सही रहता है और बीएसई सेंसेक्‍स 20 हजार अंक से ऊपर बना रहता है तो इसके 22 हजार अंक की ओर बढ़ने की आस की जा सकती है। अन्‍यथा सेंसेक्‍स के घटकर 18182 आने की आशंका रहेगी।

बीएसई स्‍मॉल कैप इंडेक्‍स दैनिक और साप्‍ताहिक आधार पर मुख्‍य आउटपरफार्मर बन गया है। इसके आने वाले समय में 13883 अंक से बढ़कर 18800 अंक तक जाने की उम्‍मीद की जा सकती है। बीएसई स्‍मॉल कैप जब तक 12900 अंक से ऊपर रहेगा तब तक चिंता की कोई बात नहीं। मिड कैप भी आउटपरफार्मर है। सीएनएक्‍स मिड कैप मौजूदा स्‍तर 9637 अंक से बढ़कर 13169 अंक तक पहुंच सकता है। लेकिन इसका भी 8900 अंक से ऊपर बने रहना जरुरी है। कोटक महिंद्रा बैंक के सी जयराम की राय में शेयर बाजार में और पैसा आने की संभावना है लेकिन बजट तक बाजार के 8 से 10 फीसदी से अधिक बढ़ने की उम्‍मीद नहीं है। अब हरेक बढ़त पर बिकवाली दबाव दिखेगा।

भारतीय शेयर बाजार इस समय अमरीकी, जापान और यूरोपीय शेयरों बाजारों की चाल के विपरीत तेजी की ओर बढ़ रहा है। जापान और यूरोप के फंड इस वर्ष भारतीय शेयर बाजार में बड़े पैमाने पर निवेश करने जा रहे हैं। इस साल विदेशी संस्‍थागत निवेशकों को भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने के लिए 1.35 लाख करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है। इस राशि में से बड़ा हिस्‍सा जापान के फंडों से आएगा। दिसंबर 2007 में विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने 5597 करोड़ रुपए और म्‍युच्‍यूअल फंडों ने 3203 करोड़ रुपए की शुद्ध लेवाली की।

इस सप्‍ताह भारतीय कार्पोरेट जग‍त के तीसरी तिमाही अक्‍टूबर से दिसंबर के नतीजे आने लग जाएंगे। उम्‍मीद की जा रही है कि नतीजे काफी मजबूत आएंगे जिससे शेयर बाजार नई ऊंचाई की ओर बढ़ेगा। 11 जनवरी को आईटी कंपनी इंफोसिस का नतीजा आएगा और इससे पहले आईटी शेयरों में तेजी का माहौल बनेगा। आईटी में इंफोसिस, मास्‍टेक और आईगेट इस तेजी की अगुवाई करेंगे। नतीजों के इस महीने में रिलायंस पावर का 11500 करोड़ रुपए का मेगा इश्‍यू आ रहा है जिसे आम जनता का बेहतर प्रतिसाद मिलने की पूरी उम्‍मीद है और रिलायंस समूह अपने दम पर भी शेयर बाजार को ऊपर बनाए रखेगा। बीएसई ने नौ सौ से अधिक कंपनियों की सर्किट लिमिट बदल दी है जो नकद शेयरों की तेजी को ब्रेक मारेगी और आम निवेशक रिलायंस पावर में पैसा लगाने की ओर मुड़ेगा। रिलायंस पावर के अलावा महिंद्रा होली डे रिसोर्ट, फ्यूचर कैपिटल, जिंदल समूह की कंपनी जेएसडब्‍लू का पब्लिक इश्‍यू आम निवेशक को अपनी ओर आकर्षित करेंगे।

जिन कंपनियों के शेयरों पर इस सप्‍ताह निवेशक ध्‍यान दे सकते हैं वे है : हिंदुस्‍तान नेशनल ग्‍लास, हिंदुस्‍तान मोटर्स, सेंचुरियन बीओपी, एमआरओ टेक, 3 आई इंफोटेक, गरवारे ऑफशोर, केएस ऑयल, पावर फाइनेंस कार्पोरेशन, रिलायंस इंडस्‍ट्रीज, रिलायंस एनर्जी, क्‍युमिंस इंडिया, महिंद्रा एंड महिंद्रा, सांवरिया एग्रो, एबीएम नॉलेज, इंडियन होटल, ओरिएंट होटल्‍स, पेनेशिया बायोटेक और गोकुलदास एक्‍सपोर्टस।