Thursday, January 31, 2008

निवेश से पहले रियलटी को परखें

भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्‍याज दर में जो कटौती नहीं कि उससे सबसे ज्‍यादा कंसट्रक्‍शन कंपनियां निराश हुई हैं। इन कंपनियों को उम्‍मीद थी कि रिजर्व बैंक ने यदि ब्‍याज दर को 25 बेसिस अंक भी घटाया तो लोग उनके बने मकान, फ्लैट या व्‍यावसायिक जगह बैंकों से कर्ज लेकर खरीदेंगे क्‍योंकि उनके कुछ पैसे इसमें बचेंगे। लेकिन, रिजर्व बैंक ने इन कंपनियों के साथ उन लोगों के सपने को भी बिखेर दिया जो ब्‍याज दर में कमी की आस लगाए बैठे थे।

हालांकि, भारतीय पूंजी बाजार में पिछले दो साल में रियालिटी या कंसट्रक्‍शन और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के नाम पर ढ़ेरों कंपनियां पूंजी बाजार में आई और निवेशकों को लैंड बैंक के साथ बढ़ती मांग के नाम पर खूब ऊंचे दामों में अपने शेयर बेचे हैं। इन कंपनियों के इश्‍यू की बाढ़ ने देश्‍ा के हर शहर, कस्‍बे में जमीन और मकानों की कीमतें रातों रात इतनी अधिक बढ़ा दी कि आम आदमी यही अफसोस कर रहा है कि काश, जिंदगी में एक छोटा सा मकान पेट काटकर पहले ले लिया होता तो अच्‍छा रहता। खैर! रियालिटी डेवलपरों का कहना है कि ब्‍याज दर महंगी होने की वजह से उनकी बिक्री प्रभावित हो रही है।

खुद भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से नवंबर 2007 के दौरान घर कर्ज की मांग में 39 फीसदी कमी आई है। इस अवधि में यह राशि 32424 करोड़ रुपए रही। डेवलपर्स को दिए जाने वाले परियोजना कर्ज में भी 25 फीसदी की कमी आई और यह राशि 12563 करोड़ रुपए रही। बंगलूर, कोच्चि, हैदराबाद, नोएडा और गुडगांव जहां प्रोपर्टी के दाम बेहद तेज गति से बढ़े थे, अब दस फीसदी कम हो गए हैं। असल में भाव अपने पिछले स्‍तर से कम नहीं हुए हैं, बल्कि आसमान जा पहुंचे भाव में दस फीसदी की कमी आई है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की बात की जाए तो नवंबर 2007 में सभी तरह के रजिस्‍ट्रेशन 12903 रहे, जो नवंबर 2006 में 14161 थे। कोटक रियालिटी के एस श्रीनिवास कहते हैं कि पिछले दो साल में रियल इस्‍टेट डेवलपर्स ने 25 अरब डॉलर जुटाए हैं। हालांकि, बड़े डेवलपर्स बिक्री घटने के बावजूद दाम घटाने की जल्‍दबाजी में नहीं हैं लेकिन निवेशक जो प्रोपर्टी या ऐसी कंपनियों के शेयरों में निवेश करना चाहते हैं, उन्‍हें थोड़ा रुकना चाहिए। इस संकेत के लिए इतिहास में घटी इस घटना पर मनन करना उचित होगा।

भारतीय शेयर बाजार में वर्ष 1930 में बॉम्‍बे रिक्‍लेमेशन नामक कंपनी सूचीबद्ध थी जिसका भाव उस समय छह हजार रुपए प्रति शेयर बोला जा रहा था, जबकि लोगों का वेतन उस समय दस रुपए महीना होता था। कंपनी का दावा था कि वह समुद्र में से जमीन निकालेगी और मुंबई को विशाल से विशाल शहर में बदल देगी लेकिन हुआ क्‍या। कंपनी दिवालिया हो गई और लोगों को लगी बड़ी चोट। अब यह लगता है कि अनेक रियालिटी या कंसट्रक्‍शंस के नाम पर कुछ कंपनियां फिर से इतिहास दोहरा सकती हैं। आप खुद सोचिए कि ऐसा क्‍या हुआ कि रातों रात ये कंपनियां जो अपने आप को करोड़ों रुपए की स्‍वामी बता रही हैं, आम निवेशक को अपना मुनाफा बांटने आ गईं। प्रॉपर्टी में ऐसा क्‍या हुआ है कि भाव दिन दुगुने और रात चौगुने बढ़े हैं। क्‍या आम आदमी की खरीद शक्ति ब्‍याज दरों के काफी ऊंचा होने के बावजूद जोरदार ढंग से बढ़ रही है या फिर यह आर्टिफिशियल गेम है।

शेयर वाले बाबा

sadhu आज मन में इच्‍छा हुई कि चलो यह लोक तो सुधरा शेयर बाजार में कमाकर, गंवाकर, अब परलोक सुधार लिया जाए टीवी पर सुबह सुबह धार्मिक प्रवचन सुनकर। धर्म का धंधा खोले संतों की हमारे देखने से टीआरपी बढ़ जाएगी और सनातन धर्म की रक्षा भी हो जाएगी। आसाराम जी से लेकर रामदेव जी तक को सुनने के लिए, बस हम धोएं कान हुआ स्‍नान के अनुसार तैयार होकर टीवी के सामने। टीवी ऑन, मार्केट गॉन कल दलाल स्‍ट्रीट में घूम रहा दिगंबरी था एक चैनल पर। हमने सोचा दिन में तो यह दलाल स्‍ट्रीट के सांड की अराधना करता रहता है और सुबह सुबह यह टीवी पर अपनी अराधना करवा रहा है या शेयर टिप्‍स दे रहा है भगवा कपड़े पहनकर। बाजार में खुद के कपड़े तो उतरवा ही लिए, अब भक्‍तों के कपड़े उतरवाएगा क्‍या यह। खैर, अपनी जमात के दिगंबरी भाई को सुनने की इच्‍छा हो गई कि यह क्‍या बोलता है। जरा ठहरे।

भक्‍तों, देश का सबसे बड़ा धाम दलाल स्‍ट्रीट खतरे में है। उस पर खतरा मंडराने का मतलब सनातन धर्म का संकट में फंसना है क्‍योंकि आज के जमाने में बगैर लक्ष्‍मी के कुछ नहीं हो सकता। इस जमाने में लक्ष्‍मी तो शेयर बाजार से ही आ रही हैं। पैसा न हो तो क्‍या सनातन धर्म और क्‍या मैं, सब संकट में फंस जाएंगे। पैसा हो तो सारे संकट एक झटके में दूर। अब मुझे ही देखों मेरे शेयर भक्‍तों, मैंने भी मेरे पेट धर्म को संकट में जाने से बचाने के लिए घर बार सब बेचकर एक का दस करने के लिए सब कुछ तेरा तुझको अर्पण क्‍या लागे मेरा की तर्ज पर दलाल स्‍ट्रीट के दलालों के हाथ में सौंप दिया। लेकिन दलाल तो कभी किसी के न हुए सिवाय अपनी दलाली के, तो मेरे क्‍या होते सो मेरा सारा पैसा चट मंगनी पट शादी की तरह साफ हो गया।

जब जब धर्म और उसके ठेकेदारों मेरा मतलब हम जैसे संतों पर संकट आया है आप जैसे चेलों, चे‍लियों ने उसे दूर किया है। यदि आप प्रभु को पाना चाहते हैं तो माया से छुटकारा पाएं। माया मेरे लिए और भगवान आपके लिए। आप चाहे जितना कमाएं लेकिन उसे अपने इस गुरु के बैंक खाते में सौंप दें क्‍योंकि चरणों में सौंपेंगे तो उठाकर कैसे ले जाऊंगा इतनी बड़ी रकम। इसमें हैवी रिस्‍क है। इसलिए मेरे खाता नंबर 4204209211 में जमा कर दें। काम, क्रोध, मद, मोह और लोभ से पिंड छुड़ाने का जो कर्म आपको करना है उसमें माया भी एक है। लेकिन माया जुटाने की किसी ग्रंथ में मनाही नहीं है। हां, उसे छोड़ने के बारे में जरुर कहा गया है। सो, आप पैसे टके को इसी गुरु के बैंक खाते में ट्रांसफर करें। दूसरे गुरुओं के चक्‍कर में भी मत फंस जाना, वे चकमा दे जाएंगे। अकेले इंद्रलोक निकल जाएंगे जहां सुरा व सुंदरी के मजे लिए जा रहे हैं। मैं यहीं हूं आपके बीच, कहीं नहीं जाने वाला जब तक आपके पास माया है और मेरे पास बैंक खाता।

दिगंबरी बोले, हम ग्रेट नागा रोड पर अपना नया आश्रम बनवा रहे हैं जहां लोभी देव की पूजा अर्चना शुरु हो चुकी है। आप लोग आरती, कीर्तन, राजभोग, संध्‍या आरती जैसे ढ़ेरों आयोजन के लिए दान दे सकते हैं। यदि किसी भक्‍त के पास कैश नहीं हो तो वे अपने घर में रखें ब्‍लूचिप शेयरों को भी यहां चढ़ा सकते हैं। इस मंदिर में ढ़ेरों दान पेटियां लगी हैं। वे भी अदभुत है। मसलन आप चाहते हैं कि कपड़े की तंगी न हो आपके इस दिगंबरी को तो, बॉम्‍बे डाईंग, बॉम्‍बे रेयॉन, सेंचुरी के शेयरों के लिए लगी दानपेटियों में पैसा डालें। भक्‍तों आप चाहते हैं कि आपका यह बाबा गाडि़यों का सुख भोगता रहे लेकिन मुझे गा‍ड़ी नहीं चाहिए बल्कि टेल्‍को, मारुति जैसी कंपनियों के शेयर भेंट कर दें। हर त्‍यौहार पर इस आश्रम में खास ब्‍लूचिप कंपनियों के शेयर ही चढ़ावे में चढ़ाए जा सकेंगे। इन शेयरों की लिस्‍ट आप हमारे मैनेजर भारत सांड से ले सकते हैं जो आपको यह बता देंगे कि हम कैसे मोती किस एंगल लाइन से पसंद करते हैं। भक्‍तों हमारा तो एक ही फंडा है परलोक सुधारना है तो करो संत को मस्‍त और तुम रहो पस्‍त।

Wednesday, January 30, 2008

शेयरों में निवेश पर मिलती है टैक्‍स में छूट


शेयर बाजार में नियमित निवेश करने के बावजूद आप अक्सर हैरान होते होंगे कि मोटा मुनाफा होने के बाद भी आपके हाथ में मामूली रकम क्यों बचती है? आपके मुनाफे का बड़ा हिस्सा लेन-देन की लागत व टैक्स में चली जाती है। इस मुनाफे में से सरकार और ब्रोकर दोनों बड़ा हिस्सा खा जाते हैं। ब्रोकर के साथ अगर आपके संबंध अच्छे हैं तो वह दलाली का एक हिस्सा आपको लौटा भी सकता है। वहीं सरकार आपके सिक्यूरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) को शेयर बाजार के लाभ पर टैक्स से बराबर कर सकती है।

आयकर अधिनियम के सेक्शन 88ई में उन लोगों को छूट हासिल है जो शेयर बाजार में सक्रिय ट्रेडर हैं, भले ही व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ), कंपनियां, फर्म, लोगों के संगठन या कोई और हो।

प्रावधान:

एक, आपकी कर योग्य आय वह आय होनी चाहिए जिस पर ‘प्राफिट एंड गेन्स ऑफ बिजनेस आर प्रोफेशन’ के तहत टैक्स लगता हो।

दो, यह आय कर योग्य शेयर कारोबार से मिली पाजिटिव इनकम होनी चाहिए। पाजिटिव इनकम से मतलब है कि शेयरों के लेन-देन से कुछ आय हो। अगर आप इस मद में नुकसान दिखा रहे हैं तो सेक्शन 88ई के तहत कोई छूट नहीं मिलती।

अगर शेयर कारोबार से आय नहीं होती है और इनकम फ्राम कैपिटल गेन्स के तहत उसे लाभ हानि होते हैं और वह इसे निवेश की तरह मानता है तो यह प्रावधान लागू नहीं होगा। निवेश और व्यवसाय अलग-अलग तथ्य हैं और हर मामले के हिसाब से तय होते हैं।

88ई में छूट:

आपको एसटीटी भुगतान का सबूत पेश करना होगा। सबूत दो स्थितियों में अलग-अलग होंगे।
1. अगर आपने किसी स्टाक एक्सचेंज के जरिए सौदे किए हैं तो एसटीटी भुगतान की जानकारी की फार्म 10डीबी के तहत निर्धारित प्रारूप में पुष्टि होनी चाहिए।
2. जिस ब्रोकर के जरिए आपने सौदे किए हैं, उसी से यह फार्म हासिल करना होगा।
3. अगर आप उसी ब्रोकर के साथ दूसरे ग्राहक कोड से कारोबार करते हैं तो जानकारियां दो कोड से दी जाएंगी।
4. अगर अलग-अलग ब्रोकरों के जरिए कारोबार हुआ है तो अलग-अलग जानकारियां दी जाएंगी।

म्यूचुअल फंड के लिए:

अगर इक्विटी फंड या म्यूचुअल फंड की यूनिट आप बेचते हैं तो फार्म 10 डीसी में एसटीटी की जानकारी देनी होगी।
1. जिस म्यूचुअल फंड से आप धन की वापसी करते हैं, उसी से फार्म मिलेगा।
2. एक से ज्यादा स्कीम से धन वापस या मुक्त करते हैं तो हर स्कीम की अलग जानकारी देनी होगी।
3. एक से ज्यादा म्यूचुअल फंड से धन मुक्त करते हैं तो हर फंड के लिए अलग जानकारी देनी होगी। भास्‍कर डॉट कॉम से साभार।

केईआई इंडस्‍ट्रीज: पैसे का केबल

kei लो टेंशन और हाई टेंशन पावर केबल्‍स के उत्‍पादन से जुड़ी देश की मुख्‍य कंपनी केईआई इंडस्‍ट्रीज देश में बिजली क्षेत्र के हो रहे विकास के साथ तेज गति से आगे बढ़ रही है। लो टेंशन केबल्‍स में इसकी 37 हजार किलोमीटर और हाई टेंशन केबल्‍स में तीन हजार किलोमीटर सालाना उत्‍पादन क्षमता है। कंपनी ने अक्‍टूबर से दिसंबर 2007 की तिमाही के घोषित नतीजों में 233.5 करोड़ रुपए की आय पर 13.5 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। जबकि, पिछले साल समान अवधि में इसकी आय 160.5 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 11 करोड़ रुपए था। वर्ष 2006/07 में कंपनी की आय 604.3 करोड़ रुपए और शुद्ध मुनाफा 40.1 करोड़ रुपए रहा। 31 मार्च 2008 को समाप्‍त होने वाले वित्‍त वर्ष में आय बढ़कर 885.1 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 58 करोड़ रुपए होने का अनुमान है।

  • केईआई इंडस्‍ट्रीज देश की दूसरी सबसे बड़ी पावर केबल उत्‍पादक कंपनी है और देश के शेयर बाजार में सूचीबद्ध सबसे बड़ी खिलाड़ी।
  • कंपनी के चौपंकी स्थित नए संयंत्र में जनवरी के पहले सप्‍ताह से आंशिक उत्‍पादन आरंभ हो गया है। हालांकि, हाई टेंशन केबल्‍स इकाई का काम अंतिम चरण में है और इसके मई महीने से शुरु होने की उम्‍मीद है। कंपनी की आय में इस संयंत्र का योगदान 350 करोड़ रुपए सालाना होने की संभावना है। इसके अलावा कंपनी के भिवाड़ी संयंत्र में चल रहे एचटी केबल अपग्रेडेशन और एलटी केबल विस्‍तार सुविधा अंतिम चरण में है। इस संयंत्र के अप्रैल 2008 तक आरंभ हो जाने की उम्‍मीद है।
  • कंपनी बिजली उत्‍पादन के लिए एक सब्‍सिडीयरी के माध्‍यम से उतरने की तैयारी कर रही है। इस संबंध में कंपनी जल्‍दी घोषणा करेगी।
  • कंपनी के ताजा नतीजों में मार्जिन पर एक दबाव दिखा जो इसके स्‍टेनलैस स्‍टील वायर सेगमेंट पर दिखा। निकिल के दामों में आए उतार चढ़ाव से कंपनी के मार्जिन पर दबाव आया।

केईआई इंडस्‍ट्रीज (तकनीकी रिपोर्ट के लिए यहां क्लिक करें)में प्रमोटरों की हिस्‍सेदारी 35.82 फीसदी है। विदेशी संस्‍थागत निवेशकों के पास 16.91 फीसदी, म्‍युच्‍यूअल फंड व संस्‍थागत निवेशकों के पास 8.59 फीसदी, नॉन प्रमोटर कार्पोरेट के पास 24.45 फीसदी शेयर हैं, जबकि आम जनता के पास केवल 14.23 फीसदी श्‍ोयरधारिता है। कंपनी को वित्‍त वर्ष 2008/09 में 1319.3 करोड़ रुपए की आय और 87 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा होने की उम्‍मीद है। जबकि, वित्‍त वर्ष 2009/10 में आय 1652.1 करोड़ रुपए और शुद्ध मुनाफा 110.8 करोड़ रुपए पहुंच जाने की आस है। इसका बाजार पूंजीकरण 523.33 करोड़ रुपए है। पिछले 52 सप्‍ताह में केईआई इंडस्‍ट्रीज का शेयर ऊपर में 169 रुपए और नीचे में 65 रुपए था। यह 29 जनवरी 2008 को 88.50 रुपए पर बंद हुआ। मध्‍यम से लंबी अवधि के निवेश के लिए यह बेहतर स्‍टॉक है क्‍योंकि कंपनी पावर केबल के बाद अब बिजली उत्‍पादन में भी उतरने जा रही है जिसका लाभ निश्चित रुप से निवेशकों को मिलेगा। केईआई इंडस्‍ट्रीज के शेयर का भाव आने वाले दिनों में 120 रुपए तक जा सकता है।

Tuesday, January 29, 2008

रिजर्व बैंक ने किया निराश

भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में नरमी लाने की सभी अटकलबाजियों को खाजिर करते हुए बैंक दर, रेपो दर और रिवर्स रेपो दरों को पहले के स्तर पर ही बनाए रखा है। जबकि, बाजार और उद्योग जगत ने उम्‍मीदों से भरी नजरें रिजर्व बैंक पर लगा रखी थीं।
रिजर्व बैंक गवर्नर वाई।वी.रेड्डी ने 2007-08 की ऋण एवं मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही की समीक्षा रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि बैंक जरुरत पड़ने पर ब्याज दरों में बीच में भी बदलाव कर सकता है।

अमरीका के फैड रिजर्व बैंक ने पिछले सप्ताह ब्याज दरों में पौना फीसदी की कटौती किए जाने के बाद यह अटकलें जोरों पर थी कि रिजर्व बैंक भी ब्याज दरों में कमी कर सकता है। बैंक ने बाजार में वित्तीय तरलता की स्थिति को देखते हुए नकद सुरक्षित अनुपात (सीआरआर) में भी कोई बदलाव नहीं किया है।

रिजर्व बैंक की तिमाही समीक्षा रिपोर्ट जारी होते ही शेयर बाजार में बैंकों के शेयरों में गिरावट का रुझान देखा गया। घोषणा के तुरंत बाद बीएसई के बैंकिंग क्षेत्र के सूचकांक में चार प्रतिशत की गिरावट आई।

समीक्षा में रेपो दर को पौने आठ प्रतिशत, रिवर्स रिपो और बैंक दर प्रत्येक को छह फीसदी पर बनाए रखा गया है। सीआरआर में भी साढ़े सात प्रतिशत पर कोई बदलाव नहीं किया गया है। रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष के लिए रिजर्व बैंक, आर्थिक वृद्धि दर के साढ़े आठ फीसदी के पहले अनुमान पर अब भी कायम है। इसी प्रकार मुद्रास्फीति के पांच फीसदी के दायरे में बने रखने के अनुमान को बनाए रखते हुए बैंक ने इसके चार से साढ़े चार फीसदी के बीच रहने की संभावना व्यक्त की है।

रुचि सोया : सॉलिड स्‍टॉक

ruchi घरेलू खाद्य तेल कंपनी के शेयरों में जब निवेश की बात आती है तो सभी निवेशकों के दिमाग में रुचि सोया का नाम सबसे पहले उभर आता है। इस कंपनी के कार्य प्रदर्शन और सही योजना ने निवेशकों को हमेशा अपनी ओर खींचा है। रुचि सोया ने हाल में अपने तिमाही नतीजे घोषित किए हैं। अक्‍टूबर से दिसंबर 2008 की तिमाही में कंपनी की शुद्ध बिक्री 3196.6 करोड़ रुपए रही जिस पर शुद्ध लाभ 59.5 करोड़ रुपए रहा। जबकि, अक्‍टूबर से दिसंबर 2007 की तिमाही में शुद्ध लाभ 37.5 करोड़ रुपए और शुद्ध बिक्री 2853.4 करोड़ रुपए थी। यानी चालू तिमाही में शुद्ध बिक्री में पिछली समान तिमाही की तुलना में 12 फीसदी और शुद्ध मुनाफे में 59 फीसदी की बढ़ोतरी। जबकि, इन नतीजों को अप्रैल से दिसंबर 2007 के नौ महीनों में संदर्भ में देखें तो शुद्ध बिक्री 7519.2 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 119.7 करोड़ रुपए रहा। जबकि, पिछले साल समान अवधि में शुद्ध बिक्री 5536 करोड़ रुपए एवं शुद्ध लाभ 66.5 करोड़ रुपए था। नौ महीनों में शुद्ध बिक्री 36 फीसदी एवं शुद्ध लाभ में 80 फीसदी का इजाफा हुआ है।

  • रुचि सोया ने सरसों, बिनौला और राइस ब्रान तेलों के रिटेल बाजार में बड़े पैमाने पर उतरने की आसोया क्रामक योजना बनाई है।
  • खाद्य तेलों के खपत में हो रही बढ़ोतरी में पैकेड खाद्य तेल का बाजार 15 से 20 फीसदी की दर से बढ़ रहा है।
  • कंपनी जैट्रोफा प्‍लांटेशन और बॉयो फ्यूल में उतरने की तैयारी में है। देश में डीजल की बढ़ रही मांग से कंपनी का इस मोर्चे पर बड़ा लाभ होगा।
  • रुचि सोया ने इंडोनेशिया में पॉम तेल प्‍लांटेशन की योजना बनाई है। यह अनुबंध फॉर्मिंग पर होगी। इस सौदे के जल्‍दी पूरा होने की संभावना है। कंपनी का यह कदम उसके लिए बड़ा लाभदायी होगा और फीडस्‍टॉक प्राइस को उचित बनाए रखने में मदद मिलेगी।
  • भारत अपनी जरुरत का 40 फीसदी पॉम तेल आयात करता है। जनवरी 2007 से अब तक पॉम तेल के दाम 75 फीसदी बढ़े हैं।
  • रुचि सोया न्‍यूट्रैला ब्रांड के तहत फूड और ब्रेवरीज उत्‍पाद लांच करेगी।

रुचि सोया (तकनीकी रिपोर्ट के लिए यहां क्लिक करें) में प्रमोटरों की हिस्‍सेदारी 36.02 फीसदी, संस्‍थागत निवेशकों और म्‍युच्‍यूअल फंडों की हिस्‍सेदारी 26.51 फीसदी, विदेशी संस्‍थागत निवेशकों की 28.22 फीसदी एवं आम जनता की हिस्‍सेदारी 9.01 फीसदी है। इसका बीएसई कोड 500368 है।

रुचि सोया को चालू वित्‍त वर्ष में 10500 करोड़ रुपए की शुद्ध बिक्री पर 170.5 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ होने की उम्‍मीद है। बुक वेल्‍यू 57.4 रुपए रहने की आस है। कंपनी को वर्ष 2008-09 में 12075 करोड़ रुपए की शुद्ध बिक्री पर 227.7 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा और बुक वेल्‍यू 75.7 रुपए रहने की संभावना है। वर्ष 2009-10 में कंपनी को 13886.3 करोड़ रुपए की शुद्ध बिक्री पर 297.3 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ एवं बुक वेल्‍यू 97.4 रुपए पहुंच जाने की उम्‍मीद है।

रुचि सोया के शेयर का पिछले 52 सप्‍ताह में उच्‍च भाव 165 रुपए और नीचला भाव 61 रुपए था। इसकी इक्विंटी 36.5 करोड़ रुपए है। इसका बाजार पूंजीकरण 2156.88 करोड़ रुपए है। रुचि सोया का भाव 28 जनवरी 2008 को 118 रुपए था जिसके अगले 10 महीनों में 170 रुपए तक पहुंचने की उम्‍मीद की जा सकती है।

Monday, January 28, 2008

शेयर बाजार में सब कुछ नेगेटिव नहीं

भारतीय शेयर बाजार जिस मंदी की मार झेल रहे हैं वह खतरा अभी पूरी तरह खत्‍म नहीं हुआ है। अमरीकी फैड रिजर्व ने आनन फानन में ब्‍याज दरों में कटौती कर शेयर बाजार को बुरी तरह टूटने से थामने की कोशिश जरुर की लेकिन सबप्राइम के नतीजों पर इससे वास्‍तव में ब्रेक नहीं लगाया जा सकता। भारतीय रिजर्व बैंक की इस सप्‍ताह मौद्रिक नीति पर बैठक होने जा रही है और उम्‍मीद है कि 25 बेसिक अंक की ब्‍याज दर में कमी की जा सकती है। यह कमी होती है तो भारतीय शेयर बाजार के लिए यह एक अच्‍छी खबर होगी।
भारतीय शेयर बाजार में बीते सप्‍ताह जो मंदी के झटके लगे, उसके बारे में हमने दिसंबर में ही कह दिया था कि विदेशी संस्‍थागत निवेशक अब पहले से अधिक समझदार है और जो निवेशक यह मानते हैं कि जनवरी में नया पैसा लाकर विदेशी निवेशक हमसे महंगे स्‍टॉक खरीद लेंगे, गलत साबित होंगे और बाजार जनवरी को दूसरे सप्‍ताह में ढ़ेर हो जाएगा।

शेयर बाजार की मौजूदा मंदी अमरीका में सबप्राइम का असली नतीजा है। इससे यह तो साफ है कि अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में घटने वाली हर घटना का हमारे शेयर बाजार पर असर जरुर पड़ेगा। यही वजह रही कि 21 और 22 जनवरी की गिरावट ने निवेशकों के दस लाख करोड़ रुपए साफ कर दिए। हालांकि बाद में आए सुधार ने निवेशकों को थोड़ी राहत दी। भारतीय शेयर बाजार में तेजी का यह आठवां साल है और इस साल अंतरराष्‍ट्रीय बाजारों में घटने वाली घटनाओं का हमारे बाजार पर खासा असर पड़ेगा। हालांकि, जो निवेशक मध्‍यम से लंबी अवधि के लिए यहां पैसा लगा रहे हैं उन्‍हें चिंतित होने की जरुरत नहीं है। निवेशकों को याद होगा कि मई-जून 2006 में सेंसेक्‍स 30 फीसदी यानी 3300 अंक टूट गया था और उसके बाद अब तक सेंसेक्‍स 12 हजार अंक बढ़ गया।

केआर चौकसी सिक्‍युरिटीज के देवेन चौकसी कहते हैं कंसोलिडेशन के तहत सेंसेक्‍स 18830-19630 के बीच रहेगा लेकिन इससे ऊपर जाने पर यह 20500­-21200 अंक पर होगा। वे एक अहम बात कहते हैं कि सरकार को तीन लाख करोड़ रुपए का अग्रिम कर मिलने का मतलब है इसे आने वाली आय में परिवर्तित किया जाए तो यह नौ लाख करोड़ रुपए से ज्‍यादा बैठती है। यह नतीजा बताता है कि परियोजनाओं और निवेश बाजार में खासी रकम आ रही है। हम निफ्टी और सेंसेक्‍स शेयरों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी देख सकते हैं। इस स्थिति में बाजार में आई हर गिरावट खरीद का मौका देती है।
आज से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 18931 अंक को पार करता है तो यह 19378 अंक तक जा सकता है। इसे नीचे में 17828 अंक पर स्‍पोर्ट मिलने की संभावना है। निफ्टी को 5222 अंक पर स्‍पोर्ट मिलने के आसार हैं। निफ्टी 5546 अंक पार करने पर 5691 अंक तक जा सकता है।

कोटक एएससी के अलरॉय लोबो का कहना है कि शेयर बाजार में करेक्‍शन अभी खत्‍म नहीं हुआ है। बीएसई सेंसेक्‍स को स्‍पोर्ट 18 हजार के आसपास मिलेगा। जबकि, एम्बिट कैपिटल के निलेश शाह का कहना है कि यह शार्ट टर्म गिरावट है। भारतीय बाजार 21 हजार पर कुछ एक्‍सपेंसिव लग रहा था 18 हजार पर यह निवेश के लिए आकर्षक है।

इस सप्‍ताह कुछ कंपनियां बोनस, शेयर विभाजन और लाभांश घोषित करेंगी। इनमें राजेश एक्‍सपोर्ट, एशियन फिल्‍म, सेसा गोवा, आर्टसन इंजीनियरिंग, फाइनेंशियल, गुजरात फ्लोरो और ओरिएंट पेपर मुख्‍य हैं।

जिन कंपनियों के शेयरों पर इस सप्‍ताह निवेशक ध्‍यान दे सकते हैं वे है : केसीपी, डब्‍लूएस इंडस्‍ट्रीज, इंटरनेशनल कॉब्‍युजन, रिलायंस कम्‍युनिकेशन, एनटीपीसी, केएस ऑयल, जीई शीपिंग, वरुण शीपिंग, एशियन होटल्‍स, कंटेनर कार्पोरेशन, सारेगामा इंडिया और टीटीके प्रेस्‍टीज।

शेयर बाजार की नजरें रिजर्व बैंक पर

शेयर बाजार के खिलाडि़यों की नजरें अब भारतीय रिजर्व बेंक पर लगी हैं। भारतीय रिजर्व बैंक कल यानी 29 जनवरी 2008 को अपनी मौद्रिक नीति घोषित करेगा। इस नीति में उम्‍मीद की जा रही है कि बैंक ब्‍याज दरों में 25 से 50 बेसिस अंक की कमी करें। इस कदम से न केवल वैश्विवक मंदी के माहौल में हालात अच्‍छे करने का मौका मिलेगा बल्कि घरेलू मांग में बढ़ावा होगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर और कर्ज दरों में आखिरी कटौती मार्च 2004 में की थी। जबकि बैंक जून 2006 से पिछले मार्च तक पांच बार इसमें बढ़ोतरी कर चुका है। कारोबारियों का कहना है कि ब्‍याज दरें अपने उच्‍च स्‍तर पर पहुंच चुकी हैं और इससे औद्योगिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। सकल घरेलू विकास दर को 8.6 फीसदी बनाए रखने के लिए अर्थव्‍यवस्‍था को मौद्रिक नीति के स्‍पोर्ट की जरुरत है। उल्‍लेखनीय है कि अमरीकी फैड रिजर्व बैंक 22 जनवरी को आनन फानन में ब्‍याज दरों में 75 बेसिस अंकों की कमी कर चुका है और यह माना जा रहा है कि 29-30 जनवरी को होने वाली बैठक में अर्थवयवस्‍था में कमजोरी दिखने पर ब्‍याज दर में और कटौती कर सकता है।


ब्‍याज दर में कटौती को लेकर कोई भी निश्चित रुप से कुछ नहीं कह पा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ब्‍याज दर में कटौती करेगा या नहीं, इस संबंध में दोनों तरह के मत हैं। कुछ खिलाड़ी मानते हैं कि बाजार में लिक्विडिटी पर्याप्‍त हैं जिससे इस समय ब्‍याज दर में कमी नहीं होगी। जबकि कुछ मानते हैं कि अर्थव्‍यवस्‍था को तेजी से ऊपर उठाने के लिए ब्‍याज दर में कटौती की जानी चाहिए। डीएसपी मेरिल लिंच के मुख्‍य अर्थशास्‍त्री इंद्रनील सेनगुप्‍ता कहते हैं कि अमरीका और भारत की स्थिति में अंतर हैं और ब्‍याज दर में कमी के बावजूद भारत की मौद्रिक नीति में सख्‍ती कम नहीं होगी। पूंजी बाजार के विश्‍लेषकों का मानना है कि शेयर बाजार कहीं भी स्थिर हो लेकिन यह कुछ समय तक सी‍मित दायरे में चलेगा और इसमें जल्‍दी बड़ी तेजी के आसार कम हैं। निवेशकों को इस समय उन बेहतर शेयरों को लेना चाहिए जो पहले काफी ऊंचे भाव पर थे और उनकी पहुंच से बाहर हो चुके थे। असल में यह डिस्‍काउंट सेल है।

Saturday, January 26, 2008

दलाल स्‍ट्रीट में नागा साधुओं का शाही स्‍नान

मेरा भारत महान के सबसे बड़े शेयर बाजार की बिल्डिंग के एक दरवाजे पर लगे भोलेनाथ के नंदी यानी लोकल भाषा के सांड को जब से हटाने की मांग हो रही है, हम भी अंतिम दर्शन करने वहां पहुंच गए कि ऐसा क्‍या खास है कि इस नंदी महाराज में कि शेयर बाजार के गेट पर खड़े होते ही सुपरसोनिक विमान पर बैठी तेजी को जमीन सूंघा दी। तेजी के सारे तारों ने जैसी ही जमीन सूंघी, सारे निवेशकों को भी नंदी महाराज के मालिक भोलेनाथ का सांप सूंघ गया।

नंदी महाराज के अंतिम दर्शन करने हम उनके पास पहुंचे। शीश नवाया कि हे सांड महाराज हमारे शेयरों पर अपने सींग मत मार देना नहीं तो हम कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं बचेंगे। जिस बैंक से पर्सनल लोन लिया है, जिन पहचान वालों से एक का दो करने के बहाने रोकड़ा लेकर कमीशन देने का वादा किया है, वे हमारी बनियान और चड्डी तक उतार लेंगे। यह प्रार्थना कर ही रहे थे कि देखा तेजी तो दलाल स्‍ट्रीट में पानी बगैर मछली की तरह छटपटा रही थी और नंदी महाराज दे सींग पर सींग मारे जा रहे थे। हमने कहा बम भोले...ये क्‍या कर दिया नंदी महाराज। आपकी पहचान तो इस तेजी से है और आपने तो इसे ही हलाल कर दिया।

नंदी महाराज चुपचाप इसमें जान फूंकिए अन्‍यथा अभी यहां ऐसे ब्रोकरों का जमघट लग जाएगा जिनमें से किसी के पास भी इस शेयर बाजार का कार्ड नहीं है। 22 से 28 साल के लौंडे चले आएंगे आपको इस गेट से खदड़वाने की जब से यह सांड यहां आया है पनौती लग गई है। यह सांड नहीं संकट है। आप जानते नहीं इस जंबूद्धीप के दलालों को। इन दलालों के साथ मीडिया वाले भी आएंगे और पीटने के बाद भी हसंते हुए बयान देंगे कि खूब नुकसान हो गया। शेयरों में जब कमाई हो रही थी, बाजार बढ़ रहा था तो बयान नहीं दे रहे थे कि यह बाजार रोज रोज क्‍यों इतना बढ़ रहा है। सरकार और सेबी कहां चली गई, क्‍यों बढ़ने दे रहे हो बाजार। लेकिन जरा सा झटका लगा तो चिदम्‍बरम, रेड्डी से लेकर दामोदरन तक से हिसाब मांग रहे हैं कि दाल में ज्‍यादा पानी किसने दे दिया दामोदर। तो फिर आप क्‍या हैं महज एक सांड।


इस गली में आपके पत्रकार नारद की नहीं चलेगी। वह कहां कहां दौड़ेगा आपकी निर्दोषिता बताने। जबकि हम दुनियादारी वालों के टीवी पत्रकार ओबी वैन ले लेकर दौड़ेगे और नारद कुछ सच बोल पाए कि दुनिया भर की घटनाओं को सही ढंग से न समझने और एक लेवल पर मुनाफावसूली न करने बंटाढार हुआ, से पहले ही मंदी का सारा ठीकरा आपके सींगों पर फोड़ देंगे। फिर नारद के समाचार देखता कौन है, पहले तो लोग ही नहीं जानते कि नारद चैनल कहां आता है, डिश टीवी पर या टाटा स्‍काई पर। पे चैनल है या फ्री। टीआरपी कितनी है। सो महाराज नंदी भगा दो यह मंदी।

लेकिन नंदी महाराज भी ठहरे हठीले। बोले इस कलियुगी संसार में मेरा इतना अपमान, घोर अपमान। मैंने कहा आप क्‍या करेंगे, वे बोले तुम्‍हारे यहां एक कलाकार है ना, नाना पाटेकर जिसकी एक फिल्‍म में डायलाग था एक मच्‍छर आदमी को हिजड़ा बना देता है अब देखों एक सांड क्‍या बनाता है। हमने पूछा क्‍या बना दोगे, बनाना बिगाड़ना तो दो से चार हजार रुपए महीना लेकर एसएमएस करने वाले शेयर बाजार के विश्‍लेषकों के हाथ में है। लेकिन यह क्‍या नंदी महाराज ने तुरंत भोलेनाथ का ध्‍यान लगाया और कैलाश पर विराजमान भोलेनाथ से सिग्‍नल लिया और अपने सींग शेयर बाजार में इतने जोर से दे मारे कि निवेशक त्राहिमाम त्रा‍हिमाम कर उठे। लेकिन अब नंदी महाराज तो बिगडैल सांड बन चुके थे सो रुकने वाले कहां थे। दलाल स्‍ट्रीट में जो भी सामने पड़ा, उसी को दे पटका। क्‍या ऑपरेटर, क्‍या पंटर, क्‍या फिरंगी और क्‍या देसी, क्‍या निवेशक और क्‍या विश्‍लेषक, सब को अधमरा कर दिया। सारे लोगों को ललित होटल से लेकर द्धारका होटल तक दौड़ा दौड़ाकर मारा।

मारधाड़ के इस शो में सब के कपड़े फटकर उतर गए। साफ साफ समझों की चड्डी यानी कच्‍छा तक उतर गया। बस तभी से दलाल स्‍ट्रीट में नागा साधुओं का जमघट लग गया है। अभी तो देश में कहीं भी कुंभ मेले का मौसम नहीं है लेकिन नागा साधुओं का यहां जमघट लग गया है। दलाल स्‍ट्रीट में ऐसा शाही स्‍नान इससे पहले शायद ही हुआ हो लेकिन देखना है कि अब अगला शाही स्‍नान कब होता है और कौनसा अखाड़ा पहले उतरता है। वैसे बढि़या होगा कि इस सांड की जगह एक गाय की मूर्ति लगा दी जाए जिस पर लिखा हो छोटे निवेशक और बाजार के सारे साधु उसे दुह रहे हों, इस उपाय से मंदी जरुर भाग जाएगी क्‍योंकि यह उपाय मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिले शेयर बाजार के खंडहरों में लिखा हुआ मिला है।

Friday, January 25, 2008

रिलांयस 10 रुपए और डॉ. रेड्डी सात रुपए में !

शेयर बाजार में आई ताजा तेज गिरावट ने अधिकतर निवेशकों को पूरी तरह हिलाकर रख दिया। कुछ निवेशक तो इस कदर साफ हो गए कि अब वे शायद ही आपको शेयर बाजार में फिर कभी दिखाई दे और कुछ अब अपना पैसा निकालकर बाहर हो जाएंगे क्‍योंकि वे मानते हैं कि यहां लगने वाले झटके जमकर हिला देते हैं। हालांकि, एक बात सामने जरुर आई है कि हमारी अर्थव्‍यवस्‍था बुनियादी तौर पर मजबूत है और ताजा गिरावट बीते दिनों की बात बन जाएगी एवæ